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चूत को करार मिल ही गया भाग – 4

आज मै चूत को करार मिल ही गया का चौथा और आखिरी भाग लिख रही हूँ आशा करती हूँ मेरी पिछली कहानियो का की तरह यह कहानी भी पढ़ कर मज़ा ले रहे होंगे अगर आप लोगो ने इस कहानी का पिछला भाग नहीं पढ़ा तो यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते है चूत को करार मिल ही गया भाग – 1 चूत को करार मिल ही गया भाग – 2  चूत को करार मिल ही गया भाग – 3 और अब आगे की कहानी पढ़िए

शाम को समीम घर वापस आया तो समीरा भी कॉलेज से वापस आ चुकी थी। समीम ऊपर चला गया। शाम के साढ़े पाँच बज रहे थे और लाइट एक बार फिर से गुल थी। समीरा पढ़ने के बहाने ऊपर छत पर आकर कुर्सी पर बैठ गयी। शबाना नीचे काम में मसरूफ़ थी। जब समीम ने समीरा को बाहर छत पर देखा तो वो भी रूम से निकल कर बाहर आ गया और हवा खाने के लिये इधर उधर टहलने लगा। समीरा चोर नज़रों से बार-बार समीम की ओर देख रही थी।

“कैसा रहा आज कॉलेज में?” समीम ने समीरा के पास से गुज़रते हुए पूछा तो समीरा उसकी के आवाज़ सुन कर एक दम चौंकी और फिर मुस्कुराते हुए बोली, “अच्छा रहा…!”

समीम फिर से समीरा के पास से गुज़रते हुए बोला, “एक बात पूछूँ?” समीरा ने अपनी नज़रें किताब में गड़ाये हुए कहा, “पूछो!”

“क्या कॉलेज में ऐसे टाइट कपड़े पहन कर जाना जरूरी है… सलवार कमीज़ पहन कर नहीं जा सकते?” समीरा को समीम के ये सवाल अजीब सा लगा तो वो बोली, “क्यों… सभी लड़कियाँ ऐसे ही कपड़े पहनती हैं इसमें क्या गलत है?”

“नहीं गलत तो नहीं है पर वो बस जब तुम कॉलेज के अंदर जा रही थी तो सामने से दो लड़के आ रहे थे बाहर की तरफ़ और तुम्हारे बारे में कुछ गलत कह रहे थे!” समीम बोला।

“क्या बोल रहे थे वो?” समीरा ने पूछा तो समीम बोला, “छोड़ो तुम… मैं तुम्हे नहीं बता सकता कि कैसे-कैसे गंदे कमेंट कर रहे थे तुम्हारे बारे में!” ये सुनकर समीरा बीच में ही बोली, “वो लड़के हैं ही ऐसे आवारा… उनके तो कोई मुँह भी नहीं लगता!”

समीम ने आगे कहा, “वैसे वो जो भी बोल रहे थे तुम्हारे बारे में… है तो वो सच!” समीम की बात सुन कर समीरा हैरान-परेशान रह गयी और उसके मुँह से निकला, “क्या?”

“हाँ सच कह रहा हूँ अगर समय आया तो तुम्हें जरूर बताऊँगा कभी!” ये कह कर समीम अपने कमरे में चला गया। समीरा ऐसी बातों से अंजान नहीं थी। बीस साल की कॉलेज में पढ़ने वाली आज़ाद ख्यालों वाली काफ़ी तेज तर्रार लड़की थी। पंद्रह-सोलह साल की उम्र में ही उसने खुद-लज़्ज़ती करनी शुरू कर दी थी। कॉलेज में अपनी सहेलियों से उनके बॉय-फ्रेंड्स के साथ चुडाई के किस्से भी सुनती थी तो दिल तो उसका भी बेहद मचलता था लेकिन खुद को अभी तक उसने किसी लड़के को छूने नहीं दिया था। उसे रोमांटिक और सैक्सी कहानियाँ-किस्से पढ़ने का बेहद शौक था और हर रोज़ रात को केले ये मोमबत्ती से खुद-लज़्ज़ती करके अपनी चूत का पानी निकालने के बाद ही सोती थी। भले ही उसकी चूत में आज तक कोई लंड नहीं घुसा था लेकिन वो मोमबत्ती या बैंगन जैसी बेज़ान चीज़ों से अपनी सील पता नहीं कब की तोड़ चुकी थी।
खैर उस रात कुछ खास नहीं हुआ। समीरा की मौजूदगी में समीम और शबाना दूर-दूर ही रहे। शबाना की गाँड में वैसे अभी तक दर्द की मीठी-मीठी लहरें रह-रह कर उठ जाती थीं और वो अपनी गाँड सहलाते हुए उस रात खूब सोयी। अगले दिन फ़िरोज़ भी वापस आ गया। फ़िरोज़ के आने से वैसे ज्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा क्योंकि वो तो अपनी बीवी पे ज़रा भी ध्यान देता नहीं था और रात को शराब के नशे में इतनी गहरी नींद सोता था कि अगर रुकसाना उसकी बगल में भी समीम से चुदवा लेती तो फ़रूक को पता नहीं चलता।

सबसे बड़ा खतरा समीरा से था क्योंकि वो शाम को कॉलेज से घर आने के बाद ज्यादातर घर पे ही रहती थी और उसकी खुद की भी नज़र समीम पे थी।

अब तो समीम और शबाना को कभी चार-पाँच मिनट के लिये भी मौका मिलता तो दोनों आपस में लिपट कर चूमते हुए एक दूसरे के जिस्म सहला लेते या कभी शबाना खाना देने के बहाने ऊपर जाकर समीम के कमरे में कभी उससे लिपट कर उसके साथ खूब चूमा-चाटी करती और कभी उसका लंड चूस लेती या कभी मुमकिन होता तो दोनों जल्दबाजी में चुदाई भी कर लेते लेकिन पहले की तरह इससे ज्यादा मौका उन्हें नहीं मिल रहा था।

शबाना तो समीम के लंड की बेहद दीवानी हो चुकी थी। अगले दो-तीन हफ़्तों में एक-दो बार तो फ़िरोज़ को बेडरूम में गहरी नींद सोता छोड़कर रात के दो बजे शबाना ने समीम के कमरे में जाकर उससे चुदवाया लेकिन खौफ़ की वजह से शबाना बार-बार ऐसी हिम्मत नहीं कर सकती थी। चुदाई का सबसे अच्छा मौका दोनों को तब मिलता जब हफ़्ते में एक-दो बार समीम मौका देखकर दोपहर को स्टेशन पे कोई बहाना बना कर थोड़ी के लिये घर आ जाता और फिर दोनों अकेले में मज़े से चुदाई कर लेते।

समीम का मन होता तो शबाना खुशी-खुशी उससे अपनी गाँड भी मरवा लेती। अब तो शबाना के जिस्म में हवस ऐसे जाग गयी थी की समीम का तसव्वुर करते हुए उसे रोज़ाना कमज़ कम एक-दो दफ़ा किसी बेजान चीज़ के ज़रिये खुद-लज़्ज़ती करनी पड़ती थी।

एक दिन ऐसे ही शबाना को दोपहर में चोदने के बाद समीम वापस स्टेशान पहुँचा और अपनी टेबल पे जा कर काम में मसरूफ़ हो गया। जिस कमरे में समीम का टेबल था उस कमरे में तीन बड़े कैबिन भी बने हुए थे जो ऊपर से खुले थे। एक तरफ़ स्टेशन मास्टर जावेद का कैबिन था और समीम के पीछे की तरफ़ दो और कैबिन थे जिनमें वहीदा और नफ़ीसा नाम की औरतें बैठती थीं।

समीम का अपना कैबिन नहीं था और उस कमरे में एक खिड़की के पास थोड़ी सी जगह में समीम की टेबल थी। जब भी कोई उन तीन कैबिन में आता-जाता तो समीम के पीछे से गुज़र कर जाता था।

वहीदा और नफ़ीसा दोनों ही रेलवे में काफ़ी सीनियर ऑफ़िसर थीं और दोनों सीधे डिविज़नल ऑफिस में रिपोर्ट करती थीं। वहीदा की उम्र चवालीस-पैंतालीस के करीब थी और उसके बच्चे अमरीका में पढ़ाई कर रहे थे और उसके शौहर कोलकाता में एक बड़ी मल्टीनेश्नल कंपनी में काफ़ी ऊँची पोस्ट पे काम करते थे। वहीदा अपनी बुजुर्ग सास के साथ तीन बेडरूम के बड़े फ्लैट में रहती थी उसके शौहर महीने में एक-दो बार आते थे। वहीदा ने कोलकाता के लिये अपने ट्राँसफ़र की अर्ज़ी भी रेलवे में लगा रखी थी।

वहीदा अपने शौहर के साथ कईं दूसरे मुल्कों की सैर भी कर चुकी थी। वहीदा काफ़ी पढ़ी लिखी और आज़ाद खयालों वाली औरत थी… और बेहद रंगीन मिजाज़ थी। शादीशुदा ज़िंदगी के बीस-इक्कीस सालों में वो करीब डेढ़-दो दर्जन लंड तो ले ही चुकी थी पर वो हर किसी ऐरे-गैरे के साथ ऐसे ही रिश्ता नहीं बना लेती थी।

नफ़ीसा भी वहीदा की हम-उम्र थी और उसी की तरह काफ़ी पढ़ी लिखी और आज़ाद खयालों वाली रंगीन औरत थी। नफ़ीसा का एक ही बेटा था जो अलीगढ़ युनीवर्सिटी में पढ़ रहा था। उसके शौहर का तीन साल पहले बहुत बुरा हादसा हो गया था जिसकी वजह से उसके शौहर को लक़वा मार गया था और वो बिस्तर पर ही पड़े रहते थे। उनकी देखभाल के लिये उन्होंने एक कामवाली को रखा हुआ था जो उनके सरे काम करती थी। नफ़ीसा के शौहर हादसे से पहले इंकम टैक्स कमीश्नर थे और अब उन्हें अच्छी पेंशन मिलती थी और पहले भी नम्बर-दो का खूब पैसा कमाया हुआ था। उनकी माली हालत बेहद अच्छी थी।

नफ़ीसा शहर से थोड़ा सा बाहर अपने खुद के बड़े बंगले में रहती थी जो उसके शौहर का पुश्तैनी घर था। घर काफ़ी बड़ा था जिसमें छः बेडरूम थे… तीन नीचे और तीन पहली मंजिल पर और इसके अलवा बड़ा लॉन और स्विमिंग पूल भी था। नफ़ीसा कद-काठी और शक़्ल-सूरत में बिल्कुल बॉलीवुड की हिरोइन ज़रीन खान की तरह दिखती थी।

जहाँ तक उसकी रंगीन मिजाज़ी का सवाल है तो नफ़ीसा अपनी सहेली वहीदा से भी बहुत आगे थी। शादी से पहले भी और शादी के बाद अब तक नफ़ीसा अनगिनत लंड ले चुकी थी और वो अमीर-गरीब… जान-अंजान… कमिस्न लड़कों से बूढ़ों तक हर तरह के लोगों से चुदवा चुकी थी। चुदाई के मामले में नफ़ीसा किसी तरह का कोई गुरेज़ नहीं करती थी। हकीकत में चाहे कभी अमल न किया हो लेकिन तसव्वुर में तो अक्सर जानवरों से भी चुदवा लेती थी।

तो दोनों औरतें में काफ़ी बातें एक जैसी थीं। दोनों ही खूब पढ़ी-लीखी और अच्छे पैसे वाले घरों से होने के साथ-साथ खुद भी ऊँची पोस्ट पे काम करती थीं। दोनों ही काफी खूबसूरत और सैक्सी फिगर वाली चुदैल औरतें थीं और दोनों खूब बन-ठन कर अपनी-अपनी कारों से काम पे आती थीं। इसके अलावा दोनों सिर्फ़ गहरी सहेलियाँ ही नहीं थी बल्कि उनका आपस में जिस्मानी लेस्बियन रिश्ता भी था।

शाम के वक़्त अपना काम निपता कर समीम अपनी कुर्सी पर आँखें मूँद कर बैठ गया और स्टेशन मास्टर जावेद भी बाहर निकल गया था। जावेद बाहर गया तो उधर दोनों औरतें शुरू हो गयी। नफ़ीसा अपने कैबिन में से निकल कर समीम के सामने वहीदा के कैबिन में जा कर बैठ गयी। “और वहीदा कल तो तेरे हस्बैंड आये हुए थे… खूब चुदाई की होगी तुम लोगों ने…!” नफ़ीसा चहकते हुए बोली तो वहीदा ने उसे खबरदार करते हुए कहा, “शशशऽऽऽ अरे धीरे बोल… वो नया लड़का समीम भी है… अगर उसने सुन लिया तो..!”

नफ़ीसा बोली, “अरे सुन लेगा तो क्या होगा… उसके पास भी तो लंड है… और सारी दुनिया करती है ये काम हम क्यों किसी से डरें..!”

“अरे नहीं यार अच्छा नहीं लगता… अगर सुन लेगा तो क्या सोचेगा बेचारा..!” वहीदा ने कहा तो नफ़ीसा उसे टालते हुए बोली, “तू वो छोड़.. बता ना… कल तो जरूर तेरी गाँड का बैंड बजाया होगा खुर्शीद साहब ने..!”
वहीदा मायूस से लहज़े में बोली, “अब उनमें वो बात नहीं रही यार… ऊपर से इतनी तोंद बाहर निकल लायी है.. दो तीन धक्कों में ही उनकी साँस फूलने लगती है..!”

“तो मतल्ब कुछ नहीं हुआ हाऽऽ…?” नफ़ीसा ने पूछा तो वहीदा बोली, “अरे नहीं वो बात नहीं है… पर अब वो मज़ा नहीं रहा… एक तो उनका मोटापा और अब उम्र का असर भी होने लगा है… कितनी बार कह चुकी हूँ कि जिम जाया करें… कसरत वसरत करने… पर मेरी सुनते ही कहाँ है वो..!”

“मतलब तेरी गाँड का बैंड नहीं बजा इस बार हेहेहे!” नफ़ीसा हंसते हुए बोली। “अरे कहाँ यार… चूत और गाँड दोनों मारी… पर बड़ी मुश्किल से चार पाँच धक्के में उनका पानी निकल जाता है… अब तो काफ़ी वक़्त से लंड भी ढीला पड़ने लगा है… तुझे तो मालूम ही है… जब तक लौड़ा इंजन के पिस्टन की तरह चूत को चोद-चोद कर पानी नहीं निकाले और गाँड मराते हुए से पुर्रर्र- पुर्रर्र की आवाज़ ना आये तो मज़ा कहाँ आता है और उसके लिये मोटा सख्त लंड चाहिये…. तू सुना तेरी कैसी चल रही है… तेरा भतीजा तो तेरी गाँड की बैंड तो बजा ही रहा होगा..!”

नफ़ीसा मायूस होकर बोली, “हम्म्म क्या यार… क्यों दुखती रग़ पर हाथ रखती हो यार… उसकी अम्मी ने एक दिन देख लिया था तब से वो घर नहीं आया…!”

कहानी जारी है … आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करें ..

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