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चूत को करार मिल ही गया भाग – 4

गतांग से आगे …

“चल पहले तो काफी ऐश कर ली तूने उसके साथ… देख कितनी मोटी गाँड हो गयी है तेरी…” रशिदा बोली।

“यार चूत तक तो ठीक था लड़का पर साले का पाँच इंच का लंड क्या खाक मेरी गाँड की बैंड बजाता… सिर्फ़ दो इंच ही अंदर जाता था… बाकी दो-तीन इंच तो चूतड़ों में ही फँस कर रह जाता था…!” नफ़ीसा की ये बात सुनकर वहीदा खिलखिला कर जोर से हंसने लगी। “वहीदा तुझे वो आदमी याद है… जो उस दिन इस स्टेशन पर गल्ती से उतर गया था…” नफ़ीसा की बात सुनते ही वहीदा की चूत से पानी बाहर बह कर उसकी पैंटी को भिगोने लगा और वो आह भरते हुए बोली, “यार मत याद दिला उसकी… साले का क्या लंड था… एक दम मूसल था मूसल..!”

“हाँ यार… मर्द हो तो वैसा… साले ने हम दोनों की गाँड रात भर बजायी थी… गाँड और चूत दोनों का ढोल बजा दिया था… कैसे गाँड से पुर्रर्र-पुर्रर्र की आवाज़ें निकल रही थी तेरी…” नफ़ीसा बोली तो वहीदा ने भी पलट कर हंसते हुए कहा, “और तेरी गाँड ने क्या कम पाद मारे थे… साले के धक्के थे ही इतने जबरदस्त कि साली गाँड हवा छोड़ ही देती थी पर हम दोनों ने भी मिलकर सुबह तक उसे गन्ने की तरह चूस डाला था।”
हाँ वहीदा यार! मेरी तो अभी से गाँड और चूत में खुजली होने लगी है… कुछ कर ना यार… कहीं से लंड का इंतज़ाम कर!” नफ़ीसा ने आह भरते हुए कहा तो वहीदा बोली, “यार वैसे लौंडे तो बहोत पीछे है पर साला काम का कौन सा है… पता नहीं चलता!”

ये सुनकर नफ़ीसा भी बोली, “यार मेरा भी यही हाल है… कितनों के साथ कोशिश करके देख चुकी हूँ लेकिन वो मज़ा नहीं आया! पर मैं नज़रें जमाये हुए हूँ… तू भी देख शायद कोई काम का लौंडा मिल जाये… वैसे हम दोनों तो हैं ही एक-दूसरे के लिये….. आजा मेरे घर आज रात को…!”

उधर कैबिन के बाहर अपनी कुर्सी पे बैठा समीम उनकी बातों को सुन कर एक दम हैरान था। उनकी बातें सुन कर उसका लंड एक दम तन चुका था और अब दर्द भी करने लगा था। समीम इतना तो जान ही गया था कि ये साली दोनों हाई-क्लॉस और शरीफ़ दिखाने वाली औरतें कितनी चुदैल हैं और उसे अब उनकी दुखती रग का भी पता था।

नफ़ीसा और वहीदा दोनों बेहद सैक्सी जिस्म वाली खूबसूरत औरतें थीं। दोनों करीब साढ़े पाँच फुट लंबी थीं। दोनों ज्यादातर सलवार-कमीज़ ही पहनती थीं और ऊँची पेन्सिल हील वाली सेन्डल पहनने से उनकी बड़ी-बड़ी गाँड बाहर की ओर निकली हुई होती थी। समीम पहले भी अक्सर चोर नज़रों से इन दोनों औरतों को देखा करता था…

खासतौर पर इसलिये कि उसे ऊँची हील के सैंडल पहनने वाली औरतें खास पसंद आती थीं। लेकिन ये दोनों औरतें काफी रोबदार और सीनियर ऑफ़िसर थीं और वो महज़ नया-नया कलर्क लगा था… इसलिये रोज़ सुबह की औपचारिक सलाम-नमस्ते के अलावा कभी उनसे कोई बात तक करने की हिम्मत नहीं हुई थी। डिपार्टमेंट भी अलग होने की वजह से समीम का उनसे कोई काम भी नहीं पड़ता था कि कोई काम को लेकर ही बात हो पाती। लेकिन अब वो उन दोनों की असलियत जान गया था।

अगले दिन समीम सिर्फ़ ट्रैक सूट का लोअर और टी-शर्ट पहन कर ही स्टेशन पर गया। ये समीम ने पहले से प्लैन कर रखा था। जब समीम स्टेशन पर पहुँचा तो जावेद ने समीम से पूछा, “अरे यार क्या बात है… आज नाइट सूट में ही चले आये हो… खैरियत तो है..?”

“हाँ सर सब ठीक है.. बस थोड़ी सी तबियत खराब थी… इसलिये नहाने और तैयार होने का मन नहीं किया… ऐसे ही चला आया..!” समीम ने सफ़ाई पेश की तो जावेद बोला, “यार अगर तबियत खराब थी तो फ़ोन कर देते… और आज घर पर आराम कर लेते..!”

समीम बोला, “सर घर में पड़ा-पड़ा भी बोर हो जाता.. और वैसे भी यहाँ काम होता ही कितना है..!”

जावेद ने कहा कि “हाँ वो तो है… वैसे दवाई तो ली है ना?”

“जी सर ले ली है..!” ये कहकर समीम जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ गया और फाइल खोलकर अपने काम में लग गया। थोड़ी देर बाद नफ़ीसा और वहीदा भी आ गयीं और समीम से ‘गुड मोर्निंग’ के बाद वो भी अपने-अपने कैबिन में जा कर अपने कामों में मसरूफ़ हो गयीं।
थोड़ी देर बाद जावेद प्लैटफ़ोर्म पर राउँड पे चला गया और उसके थोड़ी देर बाद वहीदा अपने कैबिन से बाहर निकली कर टॉयलेट की तरफ़ गयी तो मार्बल चिप वाले सिमेंट के पर्श पे सैंडल खटखटाती हुई वो समीम के पीछे से गुजरी। दो छोटे-छोटे टॉयलेट उसी रूम में पीछे की तरफ़ थे जिनमें एक लेडीज़ था और एक जेंट्स का। समीम की नज़र जैसे ही तंग कमीज़ और चुड़ीदार सलवार में कैद वहीदा की गाँड पर पड़ी तो उसका लंड तुनक उठा और उसका लंड ट्रैक-सूट के पजामे में कुलांचें मारने लगा।

समीम ने जो प्लैन सोचा था अब उसको काम में लाने का समय आ गया था। “आहह कैसी दिखती होगी वहीदा की गाँड… कितनी मोटी गाँड है साली की… एक बार मिल जाये तो आहहह.!” ये सोचते हुए समीम का लंड पूरी औकात में आ गया। समीम का लंड उसके ट्रैक-सूट के पजामे में तन कर तम्बू सा बन गया जो बाहर से देखने से साफ़ पता चल रहा था। थोड़ी देर बाद जब वहीदा के ऊँची हील के सैंडलों की फर्श पे खटखटा कर चलने की आवाज़ आयी तो समीम अपनी पीठ पीछे टिका कर कुर्सी पर लेट सा गया और अपने पायजामे के ऊपर से अपने लंड को जड़ से पकड़ लिया ताकि वो ज्यादा से ज्यादा बड़ा दिख सके।

उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और वही हुआ जो समीम चाहता था। जब वहीदा वापस आयी और समीम के पीछे से गुज़रने लगी तो उसकी नज़र समीम पर पड़ी जो अपने हाथ से अपने लंड को पायजामे के ऊपर से पकड़े हुए था। वहीदा एक दम धीरे-धीरे चलने लगी और समीम के लंड का मुआयना करने लगी पर वो रुक नहीं सकती थी और वो वापस अपने कैबिन में गयी और कुर्सी पर बैठ कर सोचने लगी।

थोड़ी देर सोचने के बाद उसने नफ़ीसा को धीरे से बुलाया और अपने कैबिन में आने को कहा। नफ़ीसा अपने कैबिन से निकल कर वहीदा के कैबिन में गयी और एक कुर्सी वहीदा के करीब सरका कर बैठ गयी।

वहीदा धीरे से बोली, “अरे यार नफ़ीसा! लगता है आज समीम का लंड उसे तंग कर रहा है… देख साला बाहर कैसे अपने लंड को पकड़ कर बैठा है!”
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नफ़ीसा ने पूछा, “तूने देखा क्या उसे अपना पकड़े हुए…?”

वहीदा बोली, “हाँ अभी देखा है… जब मैं टॉयलेट से वापस आ रही थी… यार देख तो सही!”
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नफ़ीसा उठी और वहीदा के कैबिन से निकल कर बाथरूम की तरफ़ जाने लगी। जब वो समीम के पीछे से गुजरी तो उसने तिरछी नज़रों से समीम की तरफ़ देखा जो अभी भी अपने आँखें बंद किये हुए कुर्सी पे आधा लेटा हुआ था। समीम ने अभी भी अपना लंड हाथ में पायजामे के ऊपर से थाम रखा था। नफ़ीसा अच्छे से तो नहीं देख पायी और वो टॉयलेट में चली गयी। नफ़ीसा के जाने के बाद समीम उठा और टॉयलेट की तरफ़ चला गया। वो जेंट्स टॉयलेट में घुसा और जानबूझ कर कुछ “आहह आहहह” की आवाज़ की और अपने पजामे को नीचे सरका दिया।

समीम को पता था कि जावेद जल्दी वापस नहीं आने वाला था। समीम ने अपने टॉयलेट का दरवाजा थोड़ा सा खोल रखा था और दीवार की तरफ़ देखते हुए अपने लंड को हाथ से सहलाने लगा। नफ़ीसा बगल वाले टॉयलेट में बैठी हुई समीम की आवाज़ सुन कर चौंक गयी। वो टॉयलेट से बाहर आयी तो उसने देखा कि साथ वाले जेंट्स टॉयलेट का दरवाजा ज़रा सा खुला हुआ था।

अंदर लाइट जल रही थी जिससे अंदर का नज़ारा साफ़ दिखायी दे रहा था। नफ़ीसा धीरे से थोड़ा आगे बढ़ी और दीवार से सटते हुए उसने अंदर झाँका। उसके ऊँची हील वाले सैंडल की आवाज़ ने समीम को उसकी मौजूदगी से आगाह करवा दिया। समीम ने अपने लंड को जड़ से पकड़ कर दबाया और उसका लंड और लंबा हो गया। जैसे ही नफ़ीसा ने अंदर देखा तो उसका केलजा मुँह को आ गया।

अंदर समीम अपने मूसल जैसे लंड को हिला रहा था। समीम के अनकटे लंड की लंबाई और मोटाई देख कर नफ़ीसा की चूत कुलबुलाने लगी और गाँड का छेद फुदकने लगा। समीम ने थोड़ी देर अपने लंड का दीदार नफ़ीसा को करवाया और ट्रैक सूट का पायजामा ऊपर करने लगा। नफ़ीसा जल्दी से वापस वहीदा के कैबिन में गयी और वहीदा के पास आकर बैठ गयी।

उसकी साँसें उखड़ी हुई थी और आँखों में जैसे हवस का नशा भरा हो। “क्या हुआ नफ़ीसा… तेरी साँस क्यों फूली है…?” वहीदा ने नफ़ीसा के सुर्ख चेहरे और उखड़ी हुई साँसों को देख कर पूछा। “पूछ मत यार… क्या लौड़ा है साले अपने नये हीरो का… माशाल्लह… इतना बड़ा और मूसल जैसा लंड… साला जैसे गाधे का लंड हो…!”

वहीदा: “क्या बोल रही है यार तू…?”

नफ़ीसा: “सच कह रही हूँ यार… तू भी अगर एक दफ़ा देख लेती तो तेरी चूत में भी बिजलियाँ कड़कने लगती… साले का ये लंबा लंड है… और इतना मोटा…!” नफ़ीसा ने हाथ से इशारा करते हुए दिखाया।

वहीदा: “सच कह रही है तू?”

नफ़ीसा: “हाँ सच में तेरी इस मोटी गाँड की कसम…!”

वहीदा: “चुप कर रंडी… साली जब देखो मेरी गाँड के पीछे ही पड़ी रहती है…!”

नफ़ीसा: “तो क्या बोलती है… साले चिकने को फंसाया जाये…?”

वहीदा: “पता नहीं यार… हमारे साथ जॉब करता है और बहोत जुनियर भी है… और जवान खून है… अगर साले ने बाहर किसी के सामने कुछ बक दिया तो खामाखाँ मसला हो जायेगा!”

नफ़ीसा: “अरे यार कुछ नहीं होता… तू तो हमेशा ऐसे ही ऐसे ही बेकार में घबराती है… साले को साफ़-साफ़ बोल देंगे कि मज़ा लो और अपना-अपना रास्ता नापो… बोल तू बात करेगी या मैं करूँ उससे बात!”

वहीदा: “अच्छा-अच्छा मैं देखती हूँ… पहले ये तो मालूम हो कि साले का लौड़ा चूत और गाँड मारने के लिये बेकरार है भी या नहीं…!”
नफ़ीसा: “यार कुछ भी कर पर जल्दी कर… मेरी चूत और गाँड दोनों छेदों में खुजली हो रही है… जब से उसका लंड देखा है..!”

वहीदा: “हाँ-हाँ पता है… इसी लिये तुझे बात करने नहीं भेज रही… तू तो वहीं सलवार खोल के खड़ी हो जायेगी उसके सामने… अब तू अपने कैबिन में जा कर बैठ… मैं देखती हूँ कि अपना चिकना हाथ आने वाला है कि नहीं…!”

नफ़ीसा अपने कैबिन में वापस चली गयी और वहीदा उठ कर समीम के पास गयी और समीम के पास जाकर कुर्सी पर बैठते हुए हंस कर बोली, “और समीम कैसे हो… क्या बात है आज बड़े फ़ॉर्मल कपड़ों में जोब पर चले आये..!”

नफ़ीसा के इस तरह अचानक अपनी टेबल पे बैठ कर उससे बात करने से समीम पहले तो थोड़ा घबरा गया लेकिन जल्दी ही संभल गया। उसे उम्मीद तो थी ही कि दोनों औरतों में कोई तो पहल करेगी। समीम संभलते हुए बोला, “वो मैडम बस ऐसे ही… आज तबियत थोड़ी खराब थी… नहाने और तैयार होने का मन नहीं किया तो ऐसे ही चला आया..!”

वहीदा थोड़ा सा झुक कर अपना दुपट्टा गर्दन में ऊपर खींच कर समीम को अपनी कमीज़ के गहरे गले से अंदर कैद दोनों खरबूजों के बीच की घाटी का दीदार करवाती हुई बोली, “उफ़्फ़ ये गरमी भी ना… और कहाँ पर रह रहे हो!”

समीम: “ये वो जो ट्रेफ़िक डिपार्ट्मेंट में ऑफ़िसर हैं ना फ़िरोज़ साहब… उन्ही के घर पर पेईंग गेस्ट रह रहा हूँ!”

वहीदा: “अच्छा वो फ़िरोज़… कितना किराया ले रहा है वो तुमसे?”

समीम: “ये खाने का मिला कर साढ़े-तीन हज़ार रुपये दे रहा हूँ..!”

वहीदा: “ये तो बहोत ज्यादा है… पहले बताया होता तो तुम्हें नफ़ीसा के घर में रूम दिलवा देती… उसका इतना बड़ा बंगला है… और रहने वाले सिर्फ़ दो जने हैं… बेटा उनका बाहर अलीगढ़ में पढ़ रहा है…!”

समीम: “कोई बात नहीं मैडम मैं ठीक हूँ… कोई दिक्कत नहीं है वहाँ!”
वहीदा: “और कभी हमारे साथ भी बैठ कर बातें वातें कर लिया करो… यूँ अकेले बैठे-बैठे बोर नहीं हो जाते?”

समीम: “जी मैडम जरूर… वो बस मैं सोचता था कि आप दोनों इतनी सीनियर हैं तो शायद आप दोनों को बुरा ना लगे कि मैं आपको परेशान कर रहा हूँ!”

वहीदा: “अरे सीनियर्स के साथ क्या बातें करने की कोई पाबंदी है.. हम क्या खा जायेंगी तुम्हें!”

समीम: “ओहह सॉरी मैडम मेरा मतलब वो नहीं था… वैसे मैं भी बोर हो जाता हूँ… घर जाकर भी अकेले रूम में बैठा-बैठा उकता जाता हूँ..!”

वहीदा: “तुम्हारे कोई दोस्त या कोई गर्ल-फ़्रेंड नहीं है क्या..!”

समीम: “जी नहीं मैडम वैसे भी नया हूँ यहाँ पे…!”

वहीदा: “इसी लिये तो कह रही हूँ… ज़रा मिलोजुलो लोगों से… बातचीत करो… तुम हैंडसम हो… अच्छी शक़्ल सूरत है… बॉडी भी अच्छी बनायी हुई है… क्या प्रॉब्लम हो सकती है!”

समीम: “पर मैडम आप तो जानती है ना… आज कल की लड़कियों को बस महंगे-महंगे गिफ़्ट चाहिये और बदले में क्या… बस पैसे बर्बाद..!”

वहीदा: “अच्छा शाम को क्या कर रहे हो..?”

समीम: “जी मैडम… कुछ खास नहीं!”

वहीदा: “तो चलो आज नफ़ीसा के घर में पार्टी करते हैं… ड्रिंक तो कर ही लेते हो ना?”

समीम: “जी कभी-कभी!”

वहीदा: “और कोई शौक भी है तो बता दो… उसका अरेंजमेंट भी कर लेंगे..!”

समीम: “जी शौक तो बहुत हैं… जैसे-जैसे जान पहचान बढ़ेगी… आपको पता चल जायेगा…!”

वहीदा: “अच्छा ऐसी बात है… चलो देखते हैं..!

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