देवर ने मेरी चुत का रस निकाल दिया – Audio Sex Story

देवर ने मेरी चुत का रस निकाल दिया मेरी कहानी मेरी आवाज में पढ़े  | हम दोनों तैयार हो कर नीचे खाना खाने आ गये थे। रात के नौ बज रहे थे, हम बाहर होटल के बाग में टहलने लगे। मेरा मन तो देवर पर लगा था । मन ही मन देवर से चुदने की योजना बना रही थी। मेरे तन बदन में जैसे आग सी लगी थी। तन की अग्नि को मिटाना जरूरी था। मैंने देवर के चूतड़ों पर हाथ मार कर देखा तो पता चला कि उसने अंडरवियर नहीं पहनी थी। उसके नंगे से चूतड़ो का मुझे अहसास हो गया था। मैंने भी पजामे के नीचे पेंटी और कुर्ते के अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी।

बाग में घूमते घूमते मैंने कहा,”देवर जी, मैं एक चीज़ बताऊँ.!” “हां बताओ .” उसने उत्सुकता से पूछा। “पहले आंखें बंद करो. फिर एक जादू बताती हूँ.” मैंने शरारत से कहा। मेरी वासना उबल रही थी। उसने आंखें बंद कर ली। मैंने अपना हाथ धीरे से उसके उठते हुए लण्ड पर रख दिया,”देवर जी आंखें बंद ही रखना. प्लीज मत खोलना .!” धीरे से मैंने उसके लण्ड पर कसाव बढ़ा दिया “आह. भाभी.!” उसके मुख से आह निकल पड़ी।

“देखो आंखें नहीं खोलना. तुम्हे मेरी कसम.!” और लण्ड को हौले से उपर नीचे करने लगी। “सी सीऽऽऽऽऽऽ. आह रे.” उसकी सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी। “तुम्हें मेरी कसम है. आंख बंद ही रखना.!” मैंने सावधानी से बाग में इधर उधर देखा, और पजामे में हाथ घुसा कर उसका नंगा लण्ड थाम लिया। बस मसला ही था कि कुछ आहट हुई, मैंने तुरन्त ही हाथ बाहर खींच लिया।

देवर की आंखें खुल गई,”भाभी, मैं कोई सपना देख रहा था क्या ?” “चुप भी रहो. बड़ा आया सपने देखने वाला. अब चलो कमरे में.” मैंने उसे झिड़कते हुए कहा । हम दोनों वापस कमरे में आ गये। डबल बेड वाला कमरा था। देवर बड़ी आस लगाये मुझे देख रहा था। पर मैंने अपने बिस्तर पर लोट लगा दी और आंखें बंद करके लेट गई। देवर ने बत्ती बुझा दी। मैं इन्तज़ार करती रही कि इतना कुछ हो गया है |

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