इस कमीनी चुत को घोड़े का लंड चाहिए- 1

मेरा नाम आशुतोष है, मैं एक कम्पनी में मैनेजर हूँ।

कुछ दिन पहले अपने ऑफिस के गार्ड कल्पेश से मेरी दोस्ती हो गई। धीरे धीर हम दोनों बातचीत में काफी खुल गए।

मैं अभी कुंवारा हूँ लेकिन १०० से ज्यादा रंडियां चोद चुका हूँ। मेरा लण्ड ८इंच लम्बा और काफी मोटा है।

कल्पेश शादीशुदा है। अक्सर हम लड़कियों की चूत चोदने और गांड मारने की बातें करते थे। मैं और कल्पेश अब साथ साथ रंडियां चोदने भी जाने लगे थे।

कल्पेश ने कुछ दिन बाद मुझे बताया कि वो अपने गाँव की ५-६ भाभियाँ चोद चुका है। कल्पेश ने कहा कि अगर मैं उसके साथ गाँव चलूं तो ३-४ भाभियाँ तो मुझसे भी चुदने को आराम से तैयार हो जाएँगी।

एक दिन बात-बात में उसने बताया कि गाँव में एक सुचिता नाम की औरत है और उसकी बीबी रितू की दोस्त है। देखने में सुंदर है लेकिन उसको पटा कर चोदने के उसके सारे प्रयास असफल रहे हैं।

मैंने और कल्पेश ने मिल कर सुचिता को चोदने की एक योजना बनाई। हम लोगों ने १५ तारीख को गाँव जाने का फैसला कर लिया। १५ तारीख को १२ बजे हम कल्पेश के गाँव पहुँच गए। गाँव में कल्पेश की बीबी और २ बच्चे थे। कल्पेश की बीबी घूंघट डाले थी। कल्पेश मेरा परिचय कराते हुए बोला- रितू ! यह आशुतोष भाईसाहब हैं। यह हमारे दोस्त और साहब दोनों हैं। इनसे घूंघट करने की जरूरत नहीं है।

रितू भाभी ने घूंघट हटा दिया और मुस्कराते हुए बोली- भाईसाहब नमस्ते !

मैंने उसकी बीबी रितू की तरफ देखा वो थोड़ी काली थी लेकिन उसकी चूचियां बहुत बड़ी बड़ी और तनी हुई थीं। ब्लाउज़ के नीचे रितू कुछ नहीं पहने थी, संतरे बाहर निकलने को बेताब हो रहे थे, चुचूक के उभार बिलकुल साफ़ दिख रहे थे। चूचियों का कुछ हिस्सा ब्लाउज़ से बाहर झाँक रहा था।

रितू का बदन पूरा माल था और चोदने में मज़ा देने वाला था। नमस्ते करके रितू चाय बनाने चली गई। थोड़ी देर में रितू हम लोगों के लिए चाय बना कर ले आई।

रितू ने जब झुक कर मुझे चाय दी तो उसकी चूचियां पूरी बाहर निकलने लगी। झुकने पर ब्लाउज़ के झरोखों से उसकी चूचियां पूरी नंगी दिख रही थीं। नंगी चूचियां देख कर मेरा लण्ड टनक कर खड़ा हो गया था।

रितू ने देखा कि मैं उसके बूब्स में झांक रहा हूँ तो उसने एक जहरीली सी मुस्कराहट दी। मुझे उसकी मुस्कराहट से लगा कि इसकी चूत चोदी जा सकती है। मैंने मन ही मन रितू भाभी की चूत चोदने की ठान ली।

मैं, रितू और कल्पेश चाय पीते हुए आपस में बातचीत करने लगे। रितू बहुत बातूनी थी, मुझे वो कुछ चालू सी भी लगी।

कल्पेश ने बातों बातों में रितू को बताया कि मुझे भूत-प्रेत भगाने में महारत हासिल है।

हम लोग चाय पी रहे थे तभी वहां गाँव की एक औरत आई, रितू बोली- आओ बसंती आओ ! कल्पेश आये हुए हैं और यह इनके मित्र आशुतोष हैं।

हम सब लोग बातें करने लगे। कुछ देर बाद रितू उठकर अंदर किसी काम से चली गई।

कल्पेश ने मौका देखकर बसंती की चूचियां मेरे सामने ही मसल दी और बोला- बसंती, तेरे को चोदने का मन कर रहा है !

बसंती मुस्करा के बोली- चल खेत में घूमकर आते हैं, गन्ने बहुत बड़े बड़े हो रहे हैं, वहां चुदवाने में बहुत मज़ा आएगा और तेरा केला खाए हुए भी बहुत दिन हो गए हैं।

कल्पेश मुस्करा दिया और बोला- आशुतोष भाईसाहब का केला बहुत बड़ा है इनका भी खाए, तो चलें !

बसंती मुस्करा दी और आँख मार कर बोली- दोनों आना ! दोनों के केले खा लूंगी ! और मुस्कराती हुई अंदर चली गई।

बसंती देखने में बुरी नहीं थी लेकिन रितू भाभी के आगे बेकार थी। मैंने कल्पेश से कहा- तू २ महीने बाद आया है जा कर जरा भाभी के पास लेट !

कल्पेश खी-खी कर हँसा और बोला- भाई ! बीबी की तो रात में भी ले लेंगे ! अभी तो चल कर बसंती की चूत बजाते है, साली बड़ी मस्त होकर चुदवाती है और लोड़ा भी लपालप पीती है।

घड़ी में एक बज रहा था। कल्पेश बोला- दो बजे खेत में चल कर बसंती को चोदते है ! उसके बाद ५ बजे सुचिता आएगी तब फिर उसे फंसाते हैं। हम लोगों ने खाना खाया और मैं आराम करने लगा।

दो बजे कल्पेश बोला- चल ! बसंती को चोद कर आते हैं !

मेरे मन में रितू भाभी को चोदने का प्लान चल रहा था। मैंने उससे कहा- यार ! तू जा मुझे बहुत थकान हो रही है ! थोड़ा आराम कर लूं, फिर तुझे तेरी सुचिता भाभी की भी चूत दिलवानी है, अगर ज्यादा थक गया तो सुचिता को चोदने का प्लान ख़राब न हो जाए।

कल्पेश बोला- ठीक है, तू आराम कर ! मैं बसंती को चोद कर आता हूँ।

कल्पेश बाहर चला गया। कल्पेश के दोनों बच्चे बाहर खेल रहे थे। रितू भाभी और मैं अकेले थे। कल्पेश की बीबी रितू मेरे कमरे में आई और बोली- भाई साहब ! मुझे एक दिक्कत है अगर आप किसी को नहीं बताएँगे तो मैं आप को बताऊँ !

मैंने कहा- ठीक है, आप बताइए !
रितू बोली- मुझे रात को नींद नहीं आती है, ऐसा लगता है जैसे कोई मेरी साड़ी उठा रहा हो, एक दो बार यह सोचकर नंगी भी सोई की भूत अब साड़ी कैसे उठाएगा लेकिन तब मुझे एसा लगता है जैसे कोई मेरे टांगें चौड़ी कर रहा है और मेरी चूत चोदना चाहता है। भैया ! मुझे लगता है कोई भूत मुझे तंग कर रहा है, आप मुझे चेक कर के बता दो कि कोई भूत तो मुझ पर नहीं चढ़ा हुआ है।

मेरा लण्ड रितू की बातें सुनकर उछाल मारने लगा था। मैंने कहा- भाभी भूत चेक तो कर देता हूँ लेकिन आपको जगह-जगह से छूना पड़ेगा, आपको बुरा तो नहीं लगेगा?

रितू बोली- कैसी बात करते हैं भाईसाहब ! एक तो आप मेरा इलाज करेंगे, ऊपर से मैं बुरा मानूं ! मैं इतनी ख़राब लगती हूँ क्या आपको?

मैं रितू को देखकर कुछ देर तक सोचने लगा।

रितू बोली- भाईसाहब आप कुछ कहना चाहते हैं तो कह दीजिए ! और उसने एक कामुक सी अंगड़ाई ली।

मैं समझ गया कि अब लाइन साफ़ है।

मैं बोला- आप साड़ी उतार देंगी तो थोड़ा ठीक से चेक कर लूँगा।

रितू बोली- बस इतनी सी बात !

और उसने एक झटके में साड़ी उतार दी। अब वो एक लो कट ब्लाउज़ और पेटीकोट मैं मेरे सामने खड़ी थी। मेरा लण्ड पूरा तना हुआ था और चोदने को बेकाबू हो रहा था।

मैं बोला- भाभी जरा मेरी आँखों में आँखे डालो !

उसने मेरी आँखों में आँखे डाल दी। उसकी आँखे बड़ी बड़ी थीं। उसके बाद मैंने रितू के दोनों गालों पर हाथ फिराया और गाल सहलाने लगा।

कुछ देर बाद गला सहलाते हुआ मेरे हाथ उसकी चूचियों के ऊपर आ गये। ब्लाउज़ के ऊपर से कस-कस कर दो बार मैंने उसकी मोटी मोटी गदराई हुई चूचियां दबा दीं।

अपने को थोड़ा कंट्रोल में रखते हुआ मैं अपना हाथ उसके पेट पर फिराते हुऐ पेटीकोट के उपर ले गया और उसकी चूत अपने हाथ से दो तीन बार रगड़ दी।

रितू गरम हो गई थी, उसने दो-तीन बार उह उह आह की आवाज़ की। थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ हटा लिया। रितू उतेजित थी उसके मुँह से निकल ही गया- भाईसाहब, भूत भगाइए ना ! बहुत मज़ा आ रहा है।

मैंने भाभी से कहा- भाभी आपके बदन में भूत चिपटा हुआ है, उसे भगाने के लिए आपको नंगा करना पड़ेगा।

रितू भाभी की चूत गरम हो गई थी, वो बोली- मैं तैयार हूँ !

उन्होंने कहा- हम दोनों बाथरूम में चलते हैं ! रितू भाभी ने मुझे बताया कि उनके बाथरूम का दरवाज़ा दो कमरों में खुलता है, एक दरवाज़ा जिस कमरे में मैं था उसमें खुलता था दूसरा दरवाज़ा भाभी के बेडरूम में खुलता था। मेरा लण्ड रितू को चोदने के लिए बेकरार हो रहा था।

रितू साड़ी उठाकर अपने कमरे की तरफ चली गई। मैं सोच ही रहा था कि बाथरूम से खट खट की आवाज़ आई। रितू अपने कमरे की तरफ से बाथरूम में आ गई थी। रितू भाभी बाथरूम से झाँककर बोलीं- आओ, जल्दी अंदर आओ ना !

मैं अब बाथरूम में चला गया। बाथरूम में मैं और रितू अकेले थे। रितू बोली- मेरा भूत भगाओ ना !

मैं कुछ घबरा रहा था। मैंने अपने को सँभालते हुए कहा- आप अपने कपड़े तो उतारो !

रितू इतराते हुए बोली- आप नंगा कर दो न मुझे ! खुद नंगा होने मैं शर्म आ रही है !

मैंने आगे बढ़कर रितू को अपने बाँहों में भर लिया। अब मेरे होंठ उसके होंठों से चिपक रहे थे। मैं बोला- आज आपके सारे भूत भगा दूंगा !

और हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने लगे। कुछ देर बाद मैं अलग हुआ और उसके ब्लाउज़ के बटन मैंने खोल दिए।

रितू के दोनों संतरे फड़फड़ा कर बाहर निकल आये। उसकी चूचियां काफी बड़ी बड़ी और तनी हुई थीं, मेरे हाथों में पूरी नहीं आ रही थी।

मैंने उन्हें अपने दोनों हाथों से हार्न की तरह बजाना शुरू कर दिया बीच बीच मैं निप्प्ल भी उमेठ रहा था। मेरा लण्ड थोड़ा गीला हो गया था। रितू मस्ती में आह ऊह आह ! बड़ा मज़ा आ रहा है ! करके चिल्ला सी रही थी। चुदने को वो बेकरार हो रही थी।

मैंने बाथरूम का नल खोल दिया था ताकि आवाज़ बाहर न जा सके। रितू पूरी गरम थी, वो मुझसे कहने लगी- भाईसाहब ! थोड़ा चूत पे भी हाथ फेरो ना ! साले भूत को आज मार के ही छोड़ना !

मैं उसके पेटीकोट का नाड़ खोलने लगा। रितू बोली- भाईसाहब, आप अपने कपड़े भी उतार लो, वरना बाथरूम में ख़राब हो जायेंगे।

मुझे रितू की बात सही लगी मैंने पहले अपने कपड़े उतार दिए। अब मैं सिर्फ चड्डी में था, मेरा ८ इंच लम्बा लण्ड पूरा तना हुआ चड्डी में से साफ़ दिख रहा था। रितू भाभी मुस्कराई और बोली- आप का औजार तो बहुत अच्छा दिख रहा है, यह तो गाँव की सभी औरतों की चूत का भूत भगा देगा।

रितू अब भी पेटीकोट पहने थी। मैंने आगे बढ़ कर उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट एक झटके से नीचे गिर गया और उसकी चमचमाती हुई चूत अब मेरी आँखों के सामने थी। चूत पूरी चिकनी थी और गीली हो रही थी। मैंने चूत पर हाथ फेर दिया और बोला- रितू रानी, माल तो तुम्हारा बहुत बढ़िया है।

रितू बोली- साली को भूत रोज रोज़ तंग करता है, आज इसकी शेव बनाई थी कि कल्पेश से भूत को पिटवाउँगी लेकिन मुझे क्या पता था कि आज इसका इतना अच्छा दिन है कि आप जैसे भूत भागने वाले से इसका दीदार होगा।

मैं रितू से पूरा चिपक गया था, मैं बोला- दिन आपका नहीं मेरा अच्छा है कि मुझे आपकी चूत का भूत भागने का काम मिला है।

अब हम एक दूसरे से बुरी तरह से चिपके हुए थे। मैं उसके नरम नरम चूतड़ सहला रहा था। रितू भी आह ऊह कर रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया, मेरा ८ इंच लम्बा लण्ड अब रितू के आगे था। रितू मेरा लण्ड अपने हाथ में मसल कर बोली- वाह वाह ! कितना अच्छा लण्ड है आपका ! इससे चुदने में तो मज़ा आ जायेगा ! साला आज तो मेरी चूत से चिपके भूत की इससे ऐसी पिटाई होगी कि भूत जिन्दगी भर याद रखेगा !

मैंने रितू को अपने से चिपका लिया। अब मेरा लण्ड उसकी चूत के मुँह पर टकरा रहा था।

मैंने रितू को फर्श पर लिटा दिया उसने अपनी टाँगे फैला दी थीं उसकी सुंदर थोड़ी सी फटी हुई चूत मुझे चोदने के लिए उकसा रही थी। मेरा लण्ड लोहे की रॉड की तरह तना हुआ था।

रितू सिसकारी लेते हुआ बोली- मेरे रजा ! अब अपना लण्ड इस कमीनी चूत में डालो ना ! इसको फाड़ो और चोदो ! अब इसे और मत तड़फाओ।

मैंने रितू की जाँघों के बीच घुटने के बल बैठकर अपने हाथों से उसकी दोनों चूचियां कस कस के पकड़ ली और उन्हें तेजी से दबाने लगा।

मेरा लण्ड का सुपाड़ा रितू की चूत से टकरा रहा था। मैं चोदने का माहिर था और २०० से जयादा औरतों की चूत चोद चुका था इसलिए मैं रितू को चोदने से पहले थोड़ा और गरम करना चाहता था।

मैं रितू के दोनों स्तनों को मुँह में बारी बारी से चूस रहा था और अपने लण्ड को हिला हिला कर उसकी चूत के मुँह पर फिरा रहा था।

रितू की आहऽऽ ऊहऽऽ आहऽ आहाऽअ आह बहुत मज़ा आ रहा है ! की आवाजें बाथरूम में गूँज रही थीं। रितू अब बहुत गरम थी, वो चिल्ला रही थी- राजा थोड़ा अंदर डालो ! मेरे राजा आज बहुत दिन बाद इतना बढ़िया लण्ड मिला है, चोदो न ! देर मत करो !

उसकी चूचियां मैं कस कस कर मसल रहा था। उई आह की आवाज़ से बाथरूम गूँज रहा था। रितू जो गाँव की शर्मीली भाभी लगती थी, इस समय पूरी गरम थी और अपनी गांड बार बार लण्ड अंदर डलवाने के लिए उचका रही थी। मैंने एक तेज झटका उसकी चूत के मुँह पर मारा, मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में उतर गया।

रितू ने कस कर मुझे भींच लिया और उसकी आह उह्ह की आवाजें तेज हो गईं। अगले झटके में मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में था। रितू तेजी से चिल्ला उठी- ऊई ऊई मर गई !

अब मुझे उसकी चूत चोदनी थी।

रितू की जांघें पकड़ कर मैंने ऊपर उठा दीं। मेरा लण्ड रितू की चूत में घुसा हुआ था। मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में लण्ड आगे पीछे करना शुरू किया।

रितू की बुर बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी। मैंने अपनी चोदने की स्पीड बढ़ा दी।

रितू की चूचियां आगे पीछे जोर जोर से हिल रही थी। उसके मुँह से ऊई आह आह आह मर गई ! की आवाजें निकल रही थीं। बीच बीच में वो गालियाँ भी बक रही थी।

रितू चिल्ला रही थी- मादरचोद ! चोद कुत्ते ! मार मेरी चूत को ! इसको फाड़ ! बहुत मज़ा आ रहा है तुझसे चुदने में !

मैं बोला- आज तेरी चूत के भूत को फाड़ कर ही छोड़ूंगा !

रितू बोली- मेरी चूत के राजा ! मेरे को जम के बजा !

इस वक्त मैं उस बहुत तेजी से चोद रहा था। थोड़ा झुककर मैंने उसकी चूचियां दबानी शुरू कर दी और चोदने की स्पीड कम कर दी।

रितू का चुदना जारी था। मैं और रितू इस समय चुदने का पूरा मज़ा ले रहे थे। सबसे ज्यादा मजा मुझे घरेलू औरतों की चूत पेलने में आता है जो आज मैं पूरा पूरा ले रहा था।

रितू की चूत मेरे कण्ट्रोल में थी और मैं उसमें कभी धीरे धीरे और कभी तेज तेज धक्के मारते हुए चोद रहा था। रितू को चोदते हुए मैं उसकी चूचियां भी दबाने लगा।

रितू आह उह आह उह्ह आह आह की आवाज करती हुऐ चुदने का मज़ा ले रही थी।

रितू की चुचियों की घुन्डियाँ मसलते हुए मैंने कहा- क्यों चूत के भूत की पिटाई का मज़ा ले रही हो?

रितू बोली- सच राजा ! आज बहुत मज़ा आ रहा है ! तुम मुझे ऐसे ही चोदो और मसलो ! आज मेरी सबसे अच्छी चुदाई का दिन है !

थोड़ी देर बाद मैंने रितू की चूत में से लण्ड बाहर निकल लिया, रितू बोली- भाईसाहब और चोदो न ! कल्पेश अभी नहीं आएगा ! मेरे राजा और चोदो ना !

मैंने कहा- तुम्हारी चूत में जो भूत है उसने मेरे लण्ड को गरम कर दिया है, इसे मुँह में लेकर थोड़ा सा प्यार करो, उसके बाद साले भूत के प्राण निकाल दूंगा।

थोड़ी देर में रितू भाभी के मुँह में मेरा मोटा लण्ड था। रितू उसे प्यार से घोड़ी बनकर चूस रही थी।

मेरे हाथ भाभी के चूतड़ों को कस कस कर पीट रहे थे। लौड़ा चूसने से बुरी तरह तन गया। अब मैं और भाभी ६९ आसन में थे।

उनका चूत रस बहुत तेजी से बह रहा था जिसे मैं लपालप पीने लगा। भाभी मेरा लण्ड फुल मस्त होकर चाट और चूस रही थीं।

मैंने रितू भाभी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उनकी चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया और झुककर उनके संतरों को मसलने लगा।