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100% Free Hindi Sex Stories - Sex Kahaniyan

सितम्बर 2018 की बेस्ट लोकप्रिय कहानियाँ

(Best and Popular Hindi Sex Stories Published In September 2018)

दीदी की ननद संग सेक्स संबंध

मेरा नाम विनोद है और मैं ट्रांसपोर्ट का काम चलाता हूं। मेरी उम्र भी 38 वर्ष है। मुझे ट्रांसपोर्ट का काम करते हुए काफी वर्ष बीत चुके हैं परंतु अब मेरे अंदर बहुत ज्यादा गुस्सा भर गया है।

क्योंकि मेरी पत्नी भी मुझसे घर में अच्छे से बात नहीं करती और ना ही वह मुझसे ज्यादा संबंध रखती है। इस वजह से मुझे उससे बात करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और मैं जब भी घर में होता हूं तो अपने बच्चों के साथ समय बिताता हूं। मैं उन्हीं के साथ अपना टाइम पास कर लिया करता हूं। वह भी बहुत खुश हो जाते हैं और कहते हैं पापा जब भी आप घर पर होते हो तो हमें बहुत अच्छा लगता है।

मुझे सिर्फ मेरे बच्चों से ही प्यार है और मेरी पत्नी से तो मुझे बिल्कुल भी लगाओ नहीं है। क्योंकि वह अपने ही कामों में व्यस्त रहती है। उसे किटी पार्टी का बहुत शौक है और हमारे मोहल्ले में जितनी भी किटी पार्टीज होती हैं उनमें वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करती है और अपने आप को बहुत ही ज्यादा मॉडर्न दिखाने की कोशिश करती है। परंतु वह अंदर से बिल्कुल ही समझदार नहीं है। उसके अंदर समझ नाम की बिल्कुल भी कोई चीज नहीं है। इस वजह से मैं उससे ज्यादा बात नहीं करता और जब मैं घर पर भी होता हूं तो सिर्फ अपने बच्चों के साथ ही समय बिताना मुझे अच्छा लगता है।

मेरी पत्नी के नेचर की वजह से मेरे छोटे भाई का भी मेरे घर पर आना नहीं होता। पहले तो वह बहुत ज्यादा आया करता था परंतु अब उसके व्यवहार की वजह से उसे हमारे घर आना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। क्योंकि एक बार मेरी पत्नी ने मेरे भाई को बहुत ज्यादा बुरा भला कह दिया था। जो कि उसे बहुत ज्यादा बुरा लगा।

उसके बाद से वह बिल्कुल भी नहीं आता और उसने मेरे घर पर आना बंद कर दिया है। वह मुझे कहता है कि भैया यदि आप घर पर होंगे तभी मैं आपके घर पर आऊंगा और मुझे सिर्फ आपसे ही मिलना है। मुझे भाभी से बिल्कुल भी बात नहीं करनी है और ना ही मुझे उनसे कोई संबंध रखना है। उन्होंने मेरे बारे में इतना बुरा भला कहा जिसकी वजह से मुझे बहुत बुरा लगा।

मैं अपने भाई को कई बार समझाता था कि तुम तो समझदार हो, तुम तो मेरे घर पर आ ही सकते हो लेकिन वह बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं था और कहता था कि मुझे बिल्कुल भी भाभी से बात नहीं करनी है। वह मुझसे अक्सर मिलने आ जाया करता था और मेरा हाल-चाल पूछ लिया करता था। वह भी अपने काम में बहुत व्यस्त रहता था इस वजह से उसे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था और मैं भी अपने काम में व्यस्त था। इसलिए मुझे भी ज्यादा समय नहीं मिल पाता था।

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…

पति के सामने ही चुदती रही बीवी- मजेदार कहानी

हाई दोस्तों मेरा नाम राहुल हे और मैं कल्याण से हूँ. मैं एक सर्विस मेल हूँ जो पैसे के लिए दुसरो की चूत को मारना पड़ता हे. आप को लगता होगा की बड़े मजे का काम हे चूत भी मिलती हे और पैसे भी. लेकिन उतना भी इजी नहीं होता हे. 90% से ऊपर ऐसी लड़कियां और औरतें मिलती हे जो चुदास का सागर होती हे. और छोटे, और कमजोर लंड वालो का तो पेशा ही नहीं हे इस खेल में. आंटी या भाभी मिल गई तो उन्हें तो घंटो चोदना पड़ता हे क्यूंकि उनकी प्यास कुछ हट के ही होती हे! पति के ऊपर गुस्से हुई लेडिज गिगोलो को गुलाम समझती हे. जैसे की बीवी की मार खाने वाला आदमी रंडी के ली जालिम होता हे! खेर गन्दा हे पर धंधा हे!

एक बार मुझे मेरे मोबाइल के ऊपर कॉल आई. ट्रू कॉलर में सत्यप्रकाश लिखा हुआ आया. मैंने पिक किया. सामने जो आदमी था उसने कहा, हल्लो आप सर्विस देते हो?

मैंने कहा, हां.

वो बोला मुझे अपनी वाईफ के लिए चाहिए.

मुझे डाउट हुआ और मैंने उसे कहा की एडवांस पेमेंट और मैं घर पर नहीं आता हूँ. वो बोला आप कहो वहां पर मैं अपनी वाइफ को ड्राप कर दूंगा.

मैंने उसे कहा की होटल यशिका पेलेस में आप रूम बुक कर लो मैं वहाँ मिल लूँगा.

वो बोला, क्या मैं भी वहां बैठ सकता हूँ?

मैंने कहा, क्यूँ नहीं.

उसने मुझे शाम को एक जगह पर बुला के पे कर दिया. फिर दुसरे दिन उसने मुझे 1 बजे होटल के लिए कहा. जब मैं गया तो उसने ही कमरे का दरवाजा खोला. मैंने देखा की उसकी वाइफ सेक्सी स्काई ब्ल्यू सलवार स्यूट में सोफे के ऊपर बैठी हुई थी. सत्यप्रकाश ने कहा, ये मेरी वाइफ हे मारिया. मैंने उसे स्माइल दी. वो भी स्माइल दे के मुझे देखने लगी. उसने फिर कहा, इसको अपने बड़े लंड से ऐसे चोदो की उसकी चूत फाड़ दो. मैं देखना चाहता हूँ आज अपनी बीवी की भयंकर चुदाई को.

और वो औरत बार बार मेरी पेंट के तरफ ही देख रही थी. जैसे उसे मेरे लंड का ही बहार आने का इंतजार सा था. फिर वो बोली, आप रेडी हो क्या?

मैंने कहा, मैं तो घर से ही रेडी हो के आता हूँ.

इतना सुनते ही मारिया मेरे पास आ गई और मेरी जांघो के ऊपर हाथ रख दिया उसने. मैंने भी अपने हाथ को उसके बड़े बूब्स के ऊपर रख के दबा दिया. उसके बूब्स इतने बड़े थे की एक हाथ में एक चुन्ची का आना भी मुश्किल था. सत्यप्रकाश हमारे पास आया और उसने अपनी बीवी की सलवार और कमीज को उतारा. अन्दर ब्लेक ब्रा पेंटी थी जिसके अन्दर ये सेक्सी भाभी की बॉडी शाइन कर रही थी. मैंने अपने हाथ को उसकी चूत के ऊपर रख के दबाया. उसकी चूत पहले से ही गीली थी. मैंने पेंटी की डोरी को खिंचा और उस स्टाइलिश पेंटी को निकाल दिया. मारिया ने अपने हाथ से ब्रा के हुक्स खोले और वो अब मेरे सामने पूरी के पूरी नंगी थी.

सत्यप्रकाश ने अपने लंड को निकाला. एक पल के लिए तो मैं हंसने को ही हो गया था. उसका लंड खड़ा होने पर भी सिर्फ 4 इंच का था और काफी पतला भी. अब मैं समझ गया की क्यूँ वो अपनी बीवी के लिए मुझे बुला के लाया था. मारिया के सामने जब मैंने अपने लंड को निकाला तो उसे देख के उसकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई. वो बार बार मेरे और अपने हसबंड के लंड को देख रही थी जैसे कम्पेर कर रही हो साइज को. मैं उसके पास गया और उसके बूब्स के ऊपर अपनी जबान को लगा दिया. मैंने सर्कल बना रहा था उसके निपल्स के ऊपर और वो मेरे माथे को चुचियों के ऊपर दबा रही थी. मैंने उसके सेक्सी दूध से बहरे हुए जग्स को खूब चूसा!

वो जोर जोर से सिसकियाँ ले रही थी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह धीरे से प्लीज़ अह्ह्ह्ह उईइ माँ. और फिर मैंने एक हाथ से उसकी सेक्सी चिकनी गांड को दबाई और उसे सहलाने लगा. और फिर मैंने निपल बदल दी. पहले वाली लाल हो गई थी और कडक भी. फिर मैंने दूसरी को अपने मुहं में डाल के चुसना चालू कर दिया.

और फिर मैंने उसे सोफे के ऊपर डाला. मारिया ने अपनी दोनों टांगो को खोला और अपनी चूत मेरे लिए पेश कर दी. सत्यप्रकाश जोर जोर से लंड को हिला रहा था और उसने कहा, मारिया की चाट दो प्लीज!

मैंने मन ही मन कहा, साले तू मुझे मेरा काम मत दिखा.

मैंने अपने होंठो को जैसे ही मारिया के चूत की पलकों पर रखा तो वो जैसे पिगलने लगी थी. उसके मुहं से एकदम जोर की सिसकी निकल पड़ी और उसने मेरे माथे को अपने भोसड़े के ऊपर दबा दिया. उसकी बॉडी कांपने भी लगी थी. और मैंने देखा की सत्याप्रकाश की मुठ निकल गई थी. मैंने फिर से चूत की तरफ ध्यान लगाया और उसे अपनी लम्बी जबान से चाटने लगा. मैं पांच मिनिट तक अपनी जबान को उसके ऊपर घुमा के मजे से चूसता रहा. मारिया उस बिच एक बार झड़ चुकी थी. और उसने मुझे कहा की आज से पहले ऐसा ओरल सेक्स उसे किसी ने नहीं दिया!

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दीदी की सेक्सी जिस्म की जवानी

हेलो फ्रेंड्स मैं आपका दोस्त रोहन आपके सामने एक सेक्सी कहानी लेकर आया हूँ. मेरी ऐज 23 साल और मैं कोलकाता में रहता हूँ. मैंने जिम जाकर अच्छी बॉडी बना रखी है. दूसरी तरफ मेरी दीदी रिधिमा काफी मोटी है और पुराने ख्यालो की है . रिधिमा दीदी दिखने में गोरी और सुन्दर है उनकी उम्र 27 साल है.

पर मोटापे की वजह से ना कोई उनका बॉयफ्रेंड है और ना ही उनकी शादी फिक्स हो रही है. दीदी इस वजह से काफी परेशान रहने लगी. मैंने दीदी को समझाया की आपको थोड़ा मॉडर्न बनना पड़ेगा, दीदी मेरी बात मान गयी. फिर मैंने दीदी को अपना जिम ज्वाइन करवा दिया.

मैंने उनकी डाइट चार्ट बनायीं और अलग अलग एक्सरसाइज बताये. दीदी भी रेगुलर जिम आने लगी. इसी बिच मेरा कॉलेज खुल गया और मैं अपने हॉस्टल वापस चला गया. पर मैंने दीदी को रेगुलर जिम जाने बोल दिया था. सेमेस्टर ख़तम होने के बाद ६ महीने बाद वापस अपने घर गया. जब मैं रिधिमा दीदी से मिला तो मुझे यकीं नहीं हुआ. दीदी ने अपना काफी वेट लूस कर लिया था.

36 की कमर अब सिर्फ 32 की रह गयी थी. मोटापे की वजह से दीदी जो माल थी वो किसी को नजर नहीं आयी थी. पर अब जब दीदी ने अपनी एक्स्ट्रा चर्बी हटा ली थी तब उनका सेक्सी फिगर दिखने लगा था, जो की ४०-३२-४० होगा.

मुझे अब रिधिमा दीदी नहीं मस्त माल लग रही थी. दीदी ने टाइट कुर्ती और लेग्गिंग पहन रखी थी. जिसमे उनके शरीर का एक एक कर्व नजर आ रहा था, बड़ी बड़ी चूचियां दो गुम्बदों की तरह लग रहे थी और फैली हुई गांड कददू जितनी बड़ी लग रही थी. दीदी ने मुझे हग कर लिया

दीदी: रोहन कैसी लग रही हूँ मैं.
मैं: अरे दीदी आप तो बहुत हॉट हो गयी हो.
दीदी: रोहन सब तेरी वजह से हुआ है, तू मुझे मोटीवेट नहीं करता तो मैं मोटी ही रह जाती. मैं: दीदी अब आप ऐसे ही जिम जाते रहना फिर आपका फिगर और अच्छा हो जायेगा और आप सेक्सी लगोगी.

दीदी: तो मैं अभी सेक्सी नहीं लग रही हूँ क्या भाई. मैं: नहीं दीदी आप अभी भी बहुत सेक्सी लग रही हो… पर आपने थोड़े ओल्ड फैशन वाले कपडे पहने है.. आज मॉल चलते है फिर आपके लिए कुछ सेक्सी कपडे लेते है.

दीदी: ठीक है भाई.

मैं वहा से सीधा वाशरूम गया और मूठ मारने लगा. मेरा लंड दीदी की बड़ी बड़ी चूचियां और भारी चुत्तड़ देखकर पूरा अकड़ गया था. मैं अपना ८” का लौड़ा हिला रहा था. आज पहली बार मैं रिधिमा दीदी के नाम की मूठ मार रहा था.

दीदी की फिगर याद करके आखिर मेरा मूठ गिर ही गया.

शाम को मैं दीदी को अपने साथ मॉल ले गया और वह उसके लिए कपडे लिए. टीशर्ट, शर्ट, शॉर्ट्स, कैप्री, टॉप, जीन्स ख़रीदा हमने. सभी कपडे मैंने काफी टाइट लिए थे जिससे दीदी का फिगर अच्छे से दिखे. मेरी नजर वह पड़ी एक ब्लैक कलर की वन पीस ड्रेस पर गयी जो काफी सेक्सी टाइप की थी. मैंने वो ड्रेस दीदी को दी ट्राई करने के लिए.

दीदी: भाई ये ड्रेस तो बहुत छोटी और टाइट है. मैं: अरे दीदी ये आप पर ठीक रहेगी.. वैसी भी लड़कियां आजकल ऐसे ड्रेस ही पहनती है.
दीदी: पर रोहन ये थोड़ा रिवीलिंग भी है. मैं: दीदी अब आपका फिगर मस्त हो गया है.. अब आपको ऐसे ही ड्रेस पहनना चाहिए.. आप टेंशन ना लो आप पे ये अच्छी लगेगी.

दीदी: ठीक है भाई.

मैं: दीदी आप इधर ही पहन लो ये ड्रेस … फिर यहाँ से कोई डिस्को चलते है .. मजा आएगा.

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बहन एक लड़के से चुदते हुये बच नहीं पाई

दोस्तों, मैं दीपेश गाजीपुर से हूँ. . इनकी कहानियाँ बहुत ही जादा मनोरंजन देती है. और चुदाई की नयी नई टिप्स भी देती है. तो मैं भी आज अपनी सेक्स कहानी को लेकर हाजिर हूँ. तो आपको अपनी चुदाई कहानी सुनाता हूँ.

क्या हिन्दुस्तान में हम अपनी बहनों को छू सकते है, उनको हाथ लगा सकते है. अगर बिना लाग लपेट के बात करे तो मैं हम सभी भाई अपनी बहनों को खुलकर बिना किसी भय और लोक लाज के चोद सकते है. हिंदुस्तान इतना रुढिवादी क्यूँ है.

क्यूँ अब संस्कारों का बोझ अपने कन्धों पर धो रहे है. विदेशों की तरह हम भाई क्यूँ नहीं अपनी बहनों को चोद सकते है. सेक्स और चुदाई को लेकर हमारे देश में इतने नियम, इतने उसूल आदर्श क्यूँ है.

उस दिन जब मैं शांत अकेला घर में बैठा था तो घूम फिर कर यही सब बातें मेरे जहन में आ रही थी. ये सुनने में आया था की मेरी बहन किरण किसी लड़के से बात करने लगी है. ये बात मेरे पुरे मोहल्ले में आग की तरह फ़ैल गयी थी.

कुछ लोग तो ये भी कह रहें थे की वो लड़का मेरी बहन को एक सुनसान पार्क में चोदने वाला था, पर किस्मत से शर्मा अंकल दे देख लिया. उनको देखकर वो लड़का मेरी जवान और चुदासी बहन को छोड़ के भाग खड़ा हुआ.

शर्मा अंकल ने सारी बात मेरी माँ को आकर बताई. बहन जी !! आज तो मैं आपकी लड़की किरण को रंगे हाथ पकड़ लिया, वरना आपकी लड़की तो चुद गयी होती उस वीरान पार्क में. आपकी इज्जत तो चली गयी होती, ये कहिये की मैंने देख लिया.

कहाँ आप लोग पंडित और कहाँ वो छोकरा. मैं तो कहता की आपकी लड़की अब गर्म हो गयी है, फटाफट शादी कर दीजिए इसकी!! शर्मा अंकल से मेरी माँ से कहा.

मैं वहीँ खड़ा था. पुरे मोहल्ले में शर्मा अंकल से बता दिया की करन की बहन किरण आज एक लड़के से चुदते चुदते बाल बाल बची. उस रात मैं अपनी बहन किरण को चप्पल ही चप्पल मारा.

हरामजादी! कुतिया!! रंडी कहीं की !! वहां पार्क में क्या करने गयी थी उस सुनसान पार्क में?? क्या अपनी माँ चुदाने गयी थी?? मैंने तरह तरह से अपनी चुदासी बहन को चप्पल से मारा और तरह तरह से उसको गालियाँ दी.

उस काली रात में मेरे घर में खाना नही बना., मेरे पिताजी तो 9 साल पहले की गुजर गए थे. अब घर पर मेरी 21 साल की कडक माल बहन किरण, मैं और माँ थी. मेरी माँ ने भी किरण को झाड़ू से मारा.

हम दोनों सोच रहें थे की सब मामला शांत हो जाएगा. १० दिन नही बिता की माँ ने किरण के कमरे से उसकी तकिया के नीचे से १ रिलाइंस वाला मोबाइल पकड़ लिया. अच्छा तो छिनार!! अब फ्री वाले फोन से उस कटुवे से बात करती थी माँ बोली और मुझको बुलाया.

उस दिन भी किरण मेरे और माँ के हाथ से जुते चप्पल से पिटी. पर कुछ दिन बित्ते और एक नया मोबाइल उसके पास से जब्त होता.

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टाइट चुत वाली भी इतने मजे से लंड चुसी

मेरा नाम ध्रुव है और मैं एक ट्रैवल एजेंसी में काम करता हूं। हमारी एजेंसी बहुत ही ज्यादा बड़ी है। जो कि हर शहर में है। मुझे यहां पर काम करते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं और मैं अब एक अच्छी पोस्ट पर हूं।

मैं शहर शहर जाकर घूमता रहता हूं और हमारे जितने भी ऑफिस हैं उनका काम देखता हूं, कि वहां पर किस तरीके से काम चल रहा है। जिसकी वजह से मुझे घूमने का मौका भी मिल जाता है और मैं अपनी लाइफ भी जी लेता हूं।

मेरा पहले से ही शौक था कि मैं ट्रैवल इंडस्ट्री में ही अपना कैरियर बनाऊ। इसलिए मैंने भी शुरुआत से ही ट्रेवल एजेंसी ज्वाइन कर ली थी। इस बार भी मुझे कंपनी की तरफ से माथेरान भेजा गया। वहां पर भी हमारा एक छोटा सा ऑफिस है और मेरे ऑफिस वाले चाहते थे कि मैं वहां का भी काम देखू। कि किस तरीके से वहां पर काम हो रहा है।

मैंने ऑफिस में पूछा कि मुझे वहां कब निकलना है। तो उन्होंने बताया कि आपको एक हफ्ते बाद माथेरन के लिए निकलना है। मैं एक हफ्ते तक अपने काम करता रहा और एक हफ्ते बाद मैं माथेरन चला गया।

मैं जब वहां पहुंचा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मैं उससे पहले भी वहां पर तीन चार बार जा चुका था। वहां पर हमारे ही ऑफिसर्स के गेस्ट हाउस हैं। तो मैं वहीं पर रुका हुआ था। मैं वहां पर एक महीने तक रुकने वाला था।

इस वजह से मैं अक्सर पैदल ही घूमने निकल जाया करता था और काफी दूर आपना पैदल जाता था। जिससे कि मुझे भी बहुत अच्छा लगता और मैं ऐसे ही अकेले घूमने निकल जाया करता हूं।

कभी कबार हमारे गेस्ट हाउस में कुछ नए लोग आ जाते हैं। तो मैं उनके साथ भी इंजॉय कर लेता और उनको भी अपने साथ घुमाने ले चलता। वहां पर हमेशा कोई ना कोई नया व्यक्ति आता रहता था और मैं ऐसे ही घूमता रहता हूं।

एक दिन मैं अकेले ही घूमने निकल पड़ा और मैंने देखा वहां पर एक छोटा सा रेस्टोरेंट था। वहां पर एक सुंदर सी लड़की बैठी हुई थी। उसे देखकर मुझे अंदर से कुछ अच्छी फीलिंग आयी और मैं जैसे ही उस रेस्टोरेंट में गया तो वह लड़की तब तक वहां से जा चुकी थी।

मैं उसके बारे में रेस्टोरेंट वाले से पूछ रहा था लेकिन उसने कहा साहब हमें भी नहीं पता। मैंने भी उसे पहली बार यहां देखा है।

वह इतनी ज्यादा सुंदर थी कि मुझे लग रहा था कि वह दुनिया की सबसे ज्यादा सुंदर लड़की है और मैं उसे ढूंढने लगा। मुझे लगा शायद वह मुझे मिल जाएगी लेकिन वह मुझे मिली ही नहीं।

फिर एक दिन ऐसे ही मैं घूमते घूमते किसी के घर के पास पहुंच गया और वहीं खड़ा होकर काफी देर तक इधर उधर देख रहा था। तभी अचानक से आगे से वह लड़की मुझे दिखाई दी। मैं जल्दी से उसके पास गया और मैंने उससे बात की।

पहले तो वह मुझे देखकर डर गई। उसने सोचा कोई अनजान व्यक्ति है और ऐसे ही बात कर रहा है। मैंने उसे फिर अपने बारे में बताया और अपनी कंपनी का विजिटिंग कार्ड दिखाया। उसे थोड़ा राहत मिली और उसने मुझे अपना नाम बताया।

उसका नाम संध्या था और वह भी घूमने के लिए ही आई हुई थी। मैंने उससे पूछा कि आप कहां पर रह रहे हो। तो उसने मुझे अपने होटल का नाम बताया और वह अब निकल पड़ी। मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की लेकिन फिर भी मैं उसके होटल पर चला गया है।

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Updated: November 12, 2018 — 1:16 pm

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The Author

गुरु मस्तराम

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