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अर्चना की जवानी की आग भड़क उठी

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

चचेरी बहन के साथ मामा की लड़की भी चुद गयी

दोस्तों मै सुरेन्द्र गुर्जर आज फिर हाजिर हो आपके खातिरदारी में आज मै अपनी आगे की सच्चाई बताने से पहले एक सच्ची बात बताना चाहता हूँ दोस्तों अगर शेर के मुह एक बार खून लग जाता है तो वो बार बार खून ही मागेगा तो मेरे कहने का अर्थ था की अगर किसी कुवारी चूत में एक बार असली लंड चला जाए तो बार बार लंड की ही चाहत रहती है | तो चलिए अब आगे की कहानी सुरु करते है .. इस बार जैसा मैं चाहता था अर्चना जीती और मैं हार गया। अब सब कुछ मेरे हिसाब से हो रहा था। मैंने जैसा उसने कहा वैसे ही किया।

नेहा – मुझे प्यास लगी है पानी ले कर आ।

मैं – खुद ले ले मैं तेरा नौकर नहीं हु।

नेहा – ये क्या बात हुई ये (वो कुछ बोलती उससे पहले अर्चना ने बोला)

अर्चना – मेहमान से ऐसे नहीं पेश आते जा पानी ले आ।

मैंने पानी ला दिया।

नेहा – देखा बच्चू हमारी बात मनानी पड़ी ना।

मैं – रहने दे मैंने जो किया वो मेमसाब का हुकुम था तेरा नहीं।

नेहा का मुह उतर गया और वो नाराज हो गई

मैं- मैं तेरे लिए कुछ भी नहीं करने वाला।

अर्चना – बहुत बोलता है साले? अब तू नेहा के पैर दबाएगा और वो भी कंधे पर रख कर।

नेहा – हाँ बड़ा दर्द हो रहा था इतनी देर से बैठी हुई थी ना।

मैं जमीन पर बैठ गया और उसका राईट साइड का पैर अपने लेफ्ट कंधे पर रख लिया। ऐसा करने से वो अधलेटी सी हो गई और उसकी एक टांग मेरे कंधे पर और दूसरी सोफे से नीचे लटकी हुई थी। जिससे उसकी चूत खुल गई और बिलकुल मेरी आँखों के सामने आ गई, वो बिन चुदी चूत जिसपे हल्के हल्के भूरे से छोटे छोटे बाल थे और उसमे से निकलता रस उसकी चूत को सुन्दर और मेरे लंड को उतावला किये जा रहा था।
मैं जीभ निकाल के अपने सूखे हुए होठो को गीला करने की कोशिश कर रहा था।

नेहा – वाह मजा आ गया। तुझे बड़ा अच्छा दबाना आता है।

अर्चना – जरा ऊपर तक दबा क्या घुटने तक दबा रहा है।

ये सुन कर नेहा ने आँखे खोली और मुझे देखा, मैं अभी भी जीभ फिरा रहा था और उसने अपनी हालत देखी। उसको समझ आ गया ये सब मैं उसकी चूत देखकर कर रहा हु।

नेहा – रहने दे

अर्चना – क्यों क्या हुआ

नेहा – ऐसे में कमर में दर्द होने लगा है? ( उसने बहाना मारा)

अर्चना- कोई ना इसका भी इलाज है मेरे पास।

नेहा – क्या ?

अर्चना – सेवक तू जा और मेरे बेड के पास जो कालीन बिछ रहा है वो लाकर इधर बिछा दे।

मैंने अर्चना के आदेश की पालना करी

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अर्चना – अब रसोई में जा कर एक कटोरी में सरसों का तेल ले आ। मैं वो ले आया।

अर्चना – नेहा तू लेट जा पेट के बल। यह कहते हुए अर्चना कड़ी हो गई जिससे नेहा ने सोचा अर्चना उसकी मालिश करेगी।

नेहा उलटी लेट गई और अर्चना ने मुझे इशारा किया।

मैंने नेहा की पीठ पर तेल डाला और उसकी पीठ पर जैसे ही हाथ रखे उसके पूरे बदन में कंपकपी छुट गई (मैं समझ गया वो सही में कुंवारी है )
अब मैंने उसकी पीठ पर मालिश शुरू कर दी नेहा आँखे बंद कर के लेती हुई थी।

नेहा – वाह मजा आ गया क्या बात है

अर्चना : जान अभी तो मजा आना बाकि है
नेहा : हाँ अभी तो गुलामी के कई घंटे बाकि है।
मैं चुपचाप उसकी मालिश कर रहा था। मैंने अपने हाथ धीरे धीरे निचे की तरफ ले जाने शुरू किये और अपने हाथ उसकी मस्त गदराई हुई गांड तक ले गया। नेहा के पुरे बदन में सुरसुरी छुट गई।

नेहा : पहले ऊपर की तरफ तो सही से कर फिर निचे जाना।

मैंने भी यही सही समझा और उसके हाथ की मालिश करने लगा। अभी तक उसके हाथ उसके बदन से चुपके हुए थे पर जैसे ही मैंने उसके हाथ को पकड़ के मालिश करने के लिए उठाया तो उसके बोबे के दर्शन हुए जो दबा हुआ था और साइड से बहार निकल रहा था। मैं उसके बोबे को देखता ही रह गया। मेरे हाथ उसके हाथ पर चल रहे थे और नजर बोबे पे थी। अर्चना की नजर उसकी बगल पे पड़ी और वो नेहा से पूछने लगी।

अर्चना : नेहा तेरी बगल बिलकुल साफ है इधर बाल नहीं आते क्या?

नेहा : यार आज ही पुरे बदन की सफाई की है।

अर्चना : तो फिर चूत पे से क्यों साफ नहीं किये।

नेहा : वो अभी छोटे ही थे न इसलिए .

उनकी ये बाते सुनकर मुझे ये यकीन हो गया मेरा प्लान काम कर रहा है और नेहा भी खुल के बात कर रही और मेरे होने का अहसास नहीं रहा उसे अब।

मैंने अब उसके दूसरी तरफ गया और उसके दुसरे हाथ की मालिश करने लगा। अर्चना बिलकुल मेरे बगल में थी। उसने मुझे एक छोटा सा लिप किस दिया और फिर खड़ी हो गई। मुझे लगा वो कुछ लेने जा रही होगी पर उसने अपना एक बोबा मेरे मुह में दे दिया। मैं उसका बोबा चूस रहा था और नेहा की मालिश कर रहा था। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है और इस कहानी का शीर्षक अर्चना की जवानी की आग भड़क उठी है | थोड़ी देर बाद मैंने अपने मुह से बोबा निकाल दिया और नेहा की और देखा वो अभी भी आंखे बंद कर के मालिश मजे ले रही थी। मैं अब उसकी पीठ पर आ गया मेरे पूरा वजन अपने घुटनों पर था और दोनों घुटने नेहा की कमर के दोनों तरफ थे। अब मैं नेहा की साइड पे मालिश करने लगा और उसके बोबो को साइड से मसलने लगा इससे नेहा गरम होने लगी और सिस्कारिया लेने लगी।

नेहा : अह्ह्ह उह्ह्ह आह्ह्ह्ह उह्ह्ह उफ्फ्फ

ये सब सुन कर मेरी रंडी अर्चना की चूत कुलबुला उठी और वो मेरे सामने की तरफ कड़ी हो गई उसकी भी दोनों टाँगे नेहा के दोनों तरफ थी पर उसकी चूत बिलकुल मेरे मुह के पास थी जिसमे से निकलता हुआ पानी की गंध मुझे पागल कर रही थी अर्चना ने अपनी चूत मेरे मुह से छू दी और मैंने भी जीभ निकाल के चाटनी शुरू कर दी। अब मेरे हाथ नेहा के बूब्स से खेल रहे थे और जीभ अर्चना की चूत से, मैं सातवे आसमान पे था। दो मिनट ऐसे ही चला की अर्चना ने मेरे सर पकड के चूत में दबा दिया मैं समझ गया वो झरने वाली है मैंने मुह खोलकर उसका पूरा पानी पी लिया। अर्चना संतुष्ट हो कर हट गई और सोफे पे बैठ गई। मेरे लंड का बहुत बुरा हाल था ऐसा लग रहा था की वो फट ही जायेगा। अब मैंने ज्यादा देर करना सही नहीं समझा और निचे की तरफ गया। पहले उसकी टांगो पे हाथ फेरा और फिर उसकी गांड पे आ गया। मेरे हाथ नेहा की मस्त गदराई गांड को मसल रहे थे पर मैंने अभी तक कुछ नहीं किया था। फिर मैंने दो ऊँगली ले कर दरार में फिरने लगा। नेहा की सिस्कारिया फिर शुरू हो गई मैंने ये ध्यान रखा की कही उसकी गांड के छेड़ में ऊँगली न चली जाये वर्ना जैसा हाल अर्चना के समय हुआ था वही हो जायेगा। नेहा ने अपनी टाँगे खोल दी और मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत तक पंहुचा दी। मेरी ऊँगली के छुते ही नेहा जैसे नींद से जागी। वो बोली बस और नहीं।

अर्चना : चल आगे की रह गई घूम जा अब आगे की मालिश करवाले।

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मैं नेहा के दूर हट गया था। नेहा घुमि और सीधे लेट गई, उसकी कसी हुई चूत और उसके बूब्स के खड़े निप्पल ये बता रहे थे की वो कितनी ज्यादा चुदाई चाहती है। मैं तो बस उसके बदन को निहार रहा था अर्चना ने मुझे छेड़ा।

अर्चना : ओ लोडू क्या उधर खड़ा होकर घूर रहा है।

नेहा जोर से हसने लगी और मैं झेप गया।

अर्चना : चल मालिश शुरू कर बे लोडू।

नेहा : नहीं मैं इससे नहीं करवा मालिश

अर्चना : ओ महारानी अभी तक भी तो कामुक कामुक सिस्कारिया ले कर करवा रही थी ना।

नेहा : तो क्या ये मेरी कर रहा था।

अर्चना : हाँ अब नाटक मत कर और करवा ले समझी।

नेहा ने कुछ नहीं बोला और मैं आगे बड़ा। मैं नेहा के सर पे आ कर बैठ गया और उसके पेट की मसाज करने लगा। मेरा लंड उसके गालो और मुह पे दस्तक दे रहा था अभी इसकी जगह अर्चना होती तो खा ही जाती और नेहा अपना मुह बचा रही थी। मैंने उसके पेट पर गुदगुदी की जिससे उसका मुह खुल गया और मेरा लंड उसके मुह में था। अर्चना ने ये देख कर ताली बजानी शुरू कर दी पर नेहा ने कोशिश करके लंड मुह से बाहर निकल दिया।

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नेहा : सॉरी गलती से हो गया।
मैं : सॉरी मेरी गलती है।
मैं अब खड़ा हुआ और अर्चना को इशारे से जाने के लिए बोल दिया। अर्चना उठ कर बाथरूम में चली गयी और मैं नेहा की टांगो के बीच में बैठ गया। नेहा की दोनों टांगो को अपने एक एक कंधे पर रख लिया जिससे उसकी गांड मेरी जांघ पे आ गई और लंड चूत में बस इतनी ही दूरी थी की मुझे हल्का सा आगे होना था और दोनों का मिलन था। मैंने नेहा की जांघो की मालिश करते वक़्त अपना हाथ इस तरह से फिराया की मेरा हाथ उसकी चूत के पास से गुजर रहा पर उसे छु नहीं रहा था ऐसे करने से उसकी चूत में चीटिया रेगने लगी और वो खुद पर काबू नहीं कर पा रही थी।
नेहा : थोडाआआ सआया आआगे काआअर
मैं : क्या बोला ( मैं उसकी बात समझ गया था पर मैं उसकी शर्म ख़त्म करना चाहता था )
नेहा : ऊपर कर ऊपर
मैं : ठीक है।।।।।
मैंने अपने हाथ अब नेहा के पेट पर रख दिए और झुक कर हाथो को उसके बूब्स पे निचे से ऊपर फिरने लगा। नेहा की चूत में आग लगी थी लंड की आग और उसमे घी जा रहा था, मेरा लंड बिलकुल उसकी छुट के ऊपर था और जैसे ही मैं अपने हाथ ऊपर निचे कर रहा था मेरा लंड उसकी चूत पे रगड़ खा रहा था जिससे नेहा की हालत ख़राब हो रही थी।

नेहा अब कुछ न कुछ बडबडा रही थी जो उसके मुह से भी बहार नहीं आ रहा था बस अज्जेब सी आवाजे आ रही थी और वो अपनी गांड को उठा कर पटक रही थी जैसे वो चुदाई मैं मेरा साथ दे रही हो। मुझे पता था की अब वो किसी भी वक़्त चुदने के लिए खुद बोल देगी। सो मैं उसी तरह चालू रहा और मैं सही था।
नेहा : अब रहा नहीं जा रहा चोद दे मुझे। फाड़ दे मेरी चूत भोसदा बना दे इसका।
ये सब सुनकर अर्चना बाथरूम से बहार आने लगी मैंने उसे इशारे से रुकने के लिए बोला।
अब मैं नेहा के ऊपर लेटा हुआ था और हम दोनों एक दुसरे को चूम रहे थे, चूम क्या रहे थे एक दुसरे के होठो को चबा रहे थे। ये वही नेहा थी जो अभी तक कुवारी है इस पर विश्वास करना मुश्किल था। इसलिए कहते हैं ना सेक्स की आग में इन्सान कुछ भी कर सकता है।

मैंने नेहा की जीभ लो अपने होठो से चुसना शुरू कर दिया। नेहा भी मेरा साथ देने लगी और वो भी मेरी जीभ चूसने लगी। उसके ऐसा करने से मेरे लंड ने एक झटका खाया और वो सीधा नेहा की चूत से टकराया, जिससे नेहा के मुह से एक जोर से चीख निकली आहाआह्ह्ह्ह्ह और उसकी गांड भी उछली जो ये बता रही थी कि वो कितनी चुदासी हो गई है। मैंने भी जोश में आकर जैसे ही लंड को उसकी चूत पर हाथ से पकड़ कर सेट किया ……..
अर्चना : मादरचोद पहले चूस कर गीली कौन तेरा बाप करेगा।
मैं और नेहा दोनों जैसे नींद से जागे।
नेहा : प्लीज अभी मत रोक मुझे चुद लेने दे निचे आग लगी हुई है।
अर्चना : रांड अभी जब घुसेगा ना तो चीखेगी तेरे भले के लिए ही बोल रही हु। तू इसकी चूत चाट …. नयी चूत मिलते ही मुझे भूल गया।
मैं : नहीं जानू, ऐसे ना बोल। ये कहकर मैंने उसे पास में खीचा और उसकी चूत पर किस कर दिया।
अर्चना : चल काम कर इसे चोद कर औरत बना दे।
मैंने नेहा को फिर से लेटा दिया और उसकी टाँगे खोल दी। फिर मैंने घोड़ी बन कर उसकी चूत चटनी शुरू कर दी। मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत के ऊपर फेरा तो उसके छोटे -2 बालो से जीभ पर अजीब सी गुदगुदी हुई और नेहा तो पूरी तरह झनझना गई। फिर मैंने जीभ को चूत के छेद में डाल दिया और उसकी भंगिमा पर जीभ घुमाई नेहा ने हाथो से मेरा सर नीचे दबा दिया और गांड को ऊपर की ओर झटका दिया जिससे मेरी जीभ उसकी चूत में चली गई। मैं नेहा की चूत का रसपान कर रहा था तभी अर्चना ने पीछे से मेरी टांगो के बीच में आकर पीठ के बल लेट गई और अपनी जीभ से मेरी गांड चाटती हुई ऊपर की और आते हुए मेरे आंड अपने मुह में ले लिए और जोर से चूसा जिसके वजह से मैंने नेहा की चूत की भंगिमा पर हल्का सा दांत गडा दिया ऐसा करते ही नेहा के मुह से जोर दार चीख निकली : आअह्ह्ह्ह्ह्हाह्ह्ह्ह्ह ऐसे ही चूस ले मुझे आह्ह्ह्ह्ह
मैंने अपने हाथ उसके बूब्स पर लेजाकर उसके निप्पल से खेलने लगा और इधर अर्चना ने मेरा लंड मुह में ले लिया और चूसने लगी और उसका एक हाथ मेरी गांड पर फिर रहा था और दुसरे से वो चूत में उंगली कर रही थी। पुरे हाल में एक मादक खुशबु फ़ैल गई थी। सबसे पहले नेहा स्खलित हुई और उसने पानी छोड़ा जिसे मैं पी गया और फिर मैं भी ज्यादा टिक नहीं पाया और अर्चना के मुह को वीर्य से भर दिया। मैं उठा और अर्चना की चूत में उंगली डालने लगा।

अर्चना : तू इसको चोद दे फिर मुझे चोद लेना।
यह कहते हुए अर्चना खड़ी हो गई, नेहा वैसे ही आँखे बंद करके लेटी हुई थी।

मैं उसके ऊपर लेटने लगा तो अर्चना ने रोक दिया बोली : अभी कुंवारी है मैं इसे आगे से संभालती हु तू पीछे से, मैं उसकी बात समझ गया और उसकी टांगो में बैठ गया और उसकी टांगो को अपने कंधे पे रख कर पोजीशन में आ गया। नेहा ने आँखे खोल ली और वो मुझे ललचाई नज़रो से देख रही थी कि प्लीज मुझे रगड़ दे। अर्चना उसके बूब्स के ऊपर दोनों तरफ टाँगे करके बैठ गई और उसके मुह को अपने मुह में भर लिया। मैंने मौका देख कर अपने लंड पे तेल लगाया और थोडा सा तेल नेहा की चूत पे डाल दिया फिर अपना लंड लेकर उसकी चूत में घुसाने लगा। जैसे ही मेरा सुपाडा उसकी चूत पे छुआ नेहा ने गांड हलकी सी उठाई की चोद दे मुझे अब रहा नहीं जाता मैंने बिना देर किये एक झटका मारा तो मेरा सुपाडा उसकी चूत में घुस गया। नेहा तड़प उठी पर वो हिल नहीं पा रही थी वो पूरी तरह से हम दोनों के कब्जे में थी। मैंने 5-7 सेकेंड के बाद फिर एक जोर का झटका दिया जिससे मेरा लंड आधे से ज्यादा घुस गया था। नेहा की हालत बुरी थी वो बुरी तरह से छटपटा रही थी पर वो हिल नहीं पा रही थी, अगर अर्चना नहीं होती तो शायद मैं उसे संभल नहीं पाता। नेहा की आँख से आंसू आ रहे थे उसके थोडा सा सँभालते ही मैंने फिर से झटका मार के अपने लंड को उसकी चूत में पूरा उतार दिया। नेहा इतनी जोर से चीखी थी की अर्चना के मुह से बंद होने के बाद भी आवाज बहार आ गई मैं उसी पोजीशन में रुक गया अर्चना ने भी उसका मुह छोड़ दिया।

नेहा : आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह निकाल इसको बहार मैं मर जाउंगी आह्ह्ह ….. प्लीज …. मुझे नहीं चुदना आह्ह्ह्ह्ह्ह

अर्चना : जान अब दर्द ख़त्म और मजे शुरू …. जवानी के मजे लूट …….

अर्चना उसके बूब्स को सहलाने लगी और उसके होठ चूमने लगी जीभ चूसने लगी, मैं भी उसकी गांड पर हाथ फिराने लगा थोड़ी देर में नेहा की गांड ने झटका देकर कार्यक्रम आगे बढाया मैंने हलके -2 झटके मारने शुरू कर दिए तो नेहा की गांड भी उचक -2 कर साथ देने लगी उधर अर्चना अभी भी उसके बूब्स को सहलाने रही थी और उसके होठ चूम रही थी उसकी पीठ मेरी तरफ थी वो नेहा के ऊपर कुछ ऐसे झुकी हुई थी की उसकी गांड हवा में उठ गई मैंने भी झुक कर उसकी गांड चाटनी शुरू करदी इस हमले से वो सिहर उठी पर फिर गांड हिला कर साथ देने लगी।
क्या मादक नजारा था मैं नेहा की कमसिन चूत में लंड और अर्चना की गांड में जीभ घुसा रहा था और वो दोनों लेस्बियन कर रही थी। 5 मिनट में मैं झड़ने को हुआ तो मैंने अर्चना को पीछे खीच लिया और वो मेरे सीने पे पीठ टिका कर अपनी बाहे मेरे गले में डाल कर मुझे किस करने लगी और मैं उसके बूब्स को मसलने लगा उधर नेहा जोर जोर से सिस्कारिया ले रही थी आह्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह रगड़ दे मुझे आह्ह्ह करके अपने हाथ से ही अपने बूब्स दबा रही थी। मैं जल्द ही चरम पे आ गया और मैंने अपना खोलता हुआ लावा नेहा की चूत में छोड़ दिया। मैं झड चूका था और नेहा इस बीच 3 बार झड गयी थी। मैंने उठकर सोफे का टेक लिया और सुस्ताने लगा। तभी मैंने सोफे का टेक लिया और सुस्ताने लगा। तभी मुझे मेरे लंड पर कुछ महसूस हुआ मैंने आँखे खोल के देखा तो अर्चना मेरा लंड चाट रही थी। फिर उसने मुझे प्यार से देखा और फिर से मेरे लंड पर लग गई। नेहा जो अभी भी वही पे लेती थी वो मुतने के लिए उठाने की कोशिश कर रही थी और वो जैसे ही खड़ी हुई एक झटके से गिर गई उसकी चुत सूज गई थी और उससे चला भी नहीं जा रहा था। अर्चना ने उसे पकड़ा और खड़ा किया।
अर्चना : जानू ऐसे ही नहीं कहते की ये इश्क नहीं आसान ………… और वैसे भी ये चुदाई तो इतनी शानदार थी की दोनों ही खड़े नहीं हो रहे ( उसकी नज़र मेरे लंड पे थी )

कहानी जारी है …आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करें..

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