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अर्चना की जवानी की आग भड़क उठी

गतांग से आगे..

फिर अर्चना ने नेहा को बाथरूम के गेट पे छोड़ा और खुद कमरे में चली गई। कुछ देर में वो वापिस आई और रसोई में घुस गई, रसोई से पानी की बोतल लेकर बहार आई पहले तो नेहा को दर्द कम करने की गोली दी फिर मेरे पास आई और मुझे भी एक गोली दी।
मैं : ये क्या है …… किसलिए है?

अर्चना : चूतिये खा ले मजे आ जायेगे।

मैंने खा ली। फिर अर्चना मेरे लंड पे झुक गई और उसे मुह में ले रही कभी जीभ से चाट रही तो कभी कभी दांत भी लगा देती। उसकी इन सब हरकतों से मेरे लंड ने सर उठाना शुरू कर दिया और कुछ ही मिनटों में वो अपने शबाब पे आ गया पर अर्चना ने मेरा लंड नहीं छोड़ा अब मेरी बर्दाश्त से बहार हो गया था | आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है और इस कहानी का शीर्षक अर्चना की जवानी की आग भड़क उठी है | मैंने भी अपने हाथ उसके सर पर रख कर उसे अपने लंड पर दबाना शुरू कर दिया। बहुत ही जल्द अर्चना की हरकतों से मैं झड़ने को हुआ।

मैं : अर्चना मेरी रांड, मेरी जानेमन ऐसे ही चुस्ती रह मैं आने वाला हु ……

अर्चना ने अपनी रफ़्तार तेज करदी और मेरी चरम सीमा आ गई मैं बहुत तेज सिसकारी लेने लगा आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह्ह्ह yesस्सस्सस्सस्स आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह और मैं झड गया पर …………….. मेरा लंड नहीं झडा और वैसे ही सर उठाये खड़ा रहा, मैं हैरान था ……. मेरी हालत देख कर अर्चना जोर से हसने लगी और नेहा भी पर

नेहा : क्यों क्या हो गया ….
मैं : मैं झडा क्यों नहीं …… कुछ समझ नहीं आ रहा
अर्चना : ये सब गोली का असर है अब तू अगले आधे घंटे तक नहीं झड़ने वाला और मैं आज तुझे पूरा चूसने वाली हु।

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ये कह कर अर्चना ने ऊपर आना शुरू किया और उसकी जीभ मेरी नाभि में आ गई वो मेरी नाभि को चूस रही थी और नाभि में जीभ गोल गोल घुमा रही थी जिसका असर ये था कि मेरा लंड झटके खा रहा था और उसके बोबो से टकरा रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसको ऊपर खीच ने की कोशिश की पर वो नहीं आई नाभि पे ही जमी रही मैंने नेहा को बुलाया वो मेरे पीछे सोफे पे बैठ गई मैंने उसका सर पकड़ कर झुका दिया और उसके रसीले होठो को चूसने लगा …… अब नेहा बहुत ज्यादा उतेजित हो गई वो मेरे होठ काटने लगी मैंने भी उसके निचले होठ को मुह में लिया और अपने दांत गडा दिए नेहा ने मेरी छाती पे नोचना शुरू कर दिया। मैंने अब नेहा के होठ छोड़ कर उसे थोडा और निचे खीचा और उसके एक बूब को मुह में भर लिया।
नेहा का मुह मेरे सीने पर था और मैंने उसके निप्पल के चारो तरफ जीभ फिरना शुरू कर दिया इससे नेहा बेचैन हो गई और अपना सर कभी इधर कभी उधर पटकना शुरू कर दिया तभी मैंने उसके निप्पल को दांतों से काट लिया उसने भी अपने दांत गदा दिया। अब अर्चना ऊपर उठी और उसने झुकी हुई नेहा की गांड में उंगली घुसा दी नेहा उचक कर सीधी हो गई ……
नेहा : आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह पागल है क्या मादरचोद

अर्चना : रंडी ये मेरा शिकार है सिर्फ मैं चुदुगी साइड हो जा

और नेहा हट गई अर्चना ने मुझे वही पे लेता दिया और मेरे ऊपर आ गई। वो मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर उस पर अपनी चूत टिका कर बैठ गई पर उसने लंड अन्दर नहीं लिया और सुपाडे पर चूत घिसने लगी।

मैं : और मत तडपा मेरा लंड फट रहा है प्लीजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज
ये सुन कर शायद उसको मुझ पर रहम आ गया पर वो जालिम एक झटके से बैठ गई मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया झटका इतनी तेज था कि मेरी और अर्चना की चीख निकल गई …. अब मैंने जैसे ही झटका लगाने की कोशिश करी अर्चना ने मुझे रोक दिया और मेरे हाथ पकड कर अपने बूब्स पे रख दिए और खुद ऊपर नीचे होने लगी पर उसकी गांड और कमर गोल गोल घूम कर ऊपर निचे हो रही थी जिससे उसकी चूत मेरे लंड को और ज्यादा तेज सक करने लगी मेरी हालत बहुत ख़राब हो गई और दर्द के मारे मैंने अर्चना के बूब्स को बहुत तेज भीच दिया।

मेरे और अर्चना दोनों के मुह से आह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह वह्ह्ह्ह्ह्ह्ह निकल रहा था मुझे लगा मैं झड़ने वाला हु पर फिर वही हुआ मैं नहीं झडा अब मेरा लंड फूल गया और दर्द करने लगा। मैंने अर्चना को निचे गिराया और उसके ऊपर चढ़ गया।
अर्चना : मैं घोड़ी बन जाती हु पीछे से डालना प्लीजस्स्स्स्स्स्स
मैंने कहा ठीक है अर्चना खडी हुई और नेहा को सोफे पे बैठा दिया और उसकी टाँगे खोल कर अपना मुह लगा दिया नेहा की सिसकारी शुरू हो गई इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स आअह्ह्ह्ह्ह्ह और फिर अर्चना ने अपनी गांड उठाई और टाँगे फैला दी, मुझे उसकी फूली हुई चूत नज़र आने लगी मैंने उस पर अपना लंड टिकाया और एक जोर का झटका में पूरा लंड घुसा दिया। अर्चना की जीभ इस झटके के साथ नेहा की चूत में और अन्दर घुस गई नेहा की चीख आह्ह्ह्ह्ह्ह्हिह्ह्ह्ह्ह इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स निकल गई अब मेरे हर झटके से नेहा की चीख निकलती। सबसे पहले नेहा झड गई फिर अर्चना ने उसकी चूत छोड़ दी और वो सिसकारी लेने लगी आह्ह्ह्ह्ह इस्सस उह्ह्ह्ह्ह्ह ……..
फिर कुछ ही देर में वो दूसरी बार झड गई वो बोली
अर्चना : अब छोड़ दे मुझे अब दर्द हो रहा है

मैं : तेरी दवाई का असर है भुगत अब और मैंने अपने झटके तेज कर दिया।

अर्चना ने पलती खायी और मेरा लंड उसकी चूत से बाहर आ गया। उसने मेरा लंड मुह में ले लिया और चूसने लगी जोर जोर से …… मैंने नेहा को बुलाया और उसके होठो का रसपान करने लगा मेरे हाथ उसके बदन को तलाश रहे थे पहले बूब्स फिर कमर फिर उसकी गांड पे आ कर टिक गए मैंने उसके कुल्हो को पकड़ के मसलना शुरू कर दिया तभी मैं झड़ने वाला था मैंने नेहा के होठो को दांतों से पकड़ कर और उसकी गांड में उंगली घुसा दी जिससे उसकी दबी हुई चीख निकली और उधर मैं भी फारिग हो गया। मेरे वीर्य से अर्चना का मुह भर गया और उसके चारे और बूब्स पे भी बहुत सारा वीर्य गिर था। मैंने नेहा को छोड़ दिया और अर्चना को देखा तो हैरान था की इतना वीर्य कैसे आ गया। नेहा भी बैठ गई और अर्चना के बूब्स को चाट चाट कर मेरा वीर्य चाटने लगी फिर उसके चहरे पे से फिर उसके मुह पे मुह लगा दिया। अब दोनों एक दुसरे को जोर से चूसने लगी मानो मेरे वीर्य के लिए जंग चल रही हो।

मेरे अन्दर हिम्मत नहीं बची थी मैं वही पर पड़ गया थोड़ी देर बाद नेहा ने मेरा सर पकड़ा और अपनी गोदी में रखा और अर्चना ने जग मेरे मुह पे लगा दिया और बोली ले दूध पी ले तुझे बहुत जरूरत है। मुझे भी भूख लगी थी मैंने भी पूरा दूध पी लिया।
फिर हम तीनो कमरे में जाकर एक दुसरे से चिपक कर सो गए।

अभी तक आपने पड़ा कैसे मैंने अर्चना ने और नेहा ने यादगार लम्हे बिताये थे। अब हम बात करते है अर्चना की छोटी बहना रागिनी की। मैं अपने मम्मी पापा के साथ नया साल मानाने दुबई गया रागिनी के पास, हम दुबई 24 को पहुच गए थे पर उस दिन हम थक चुके थे इसलिए सारा दिन घर में ही बैठ कर बाते करते रहे और जब शाम को खाना खा कर सोने की तैयारी करने लगे तब ……….

मौसी के घर में तीन कमरे थे एक मौसी मोसा का, एक अर्चना और रागिनी का, तीसरा कमरा गेस्ट के लिए था।
मौसी बोली : रागिनी और सुरेन्द्र एक कमरे में और हम लोग एक एक कमरे में सो जायेगे. यह सुन कर मैं खुश हो गया चलो जो कुछ एअरपोर्ट पे शुरू हुआ था वो पहले दिन ही अगले मुकाम पे चला जायेगा। हम सब बाते करते करते रात को लगभग 11.30 पे सोने गए।
मैं और रागिनी कमरे में गए तो जैसे ही मैं कुछ कहता रागिनी बोल पड़ी
रागिनी : भाई तुम सो जाओ मैं बाथरूम में जा रही हु चेंज करके आती हु और मेरे कुछ कहने से पहले ही चली गई।
मुझे वो थोड़ी सी उखड़ी उखड़ी सी लगी मैं थोडा सा उदास हो गया की मैं क्या सपने देख कर यहाँ आया और इधर तो कोई चांस ही नहीं है। फिर भी मैं उसके आने का इंतजार करने लगा चलो देखे वो क्या पहन के आती है मैं एक बिस्तर पे लेट कर इंतजार करने लगा कोई 10 मिनट हो गए बाकि सब सो गए थे। मुझे अजीब सा लगा रागिनी इतनी देर अन्दर क्या कर रही है, तभी मेरे लंड ने ताव मारा और मैंने सोचा कही मेरे घर की तरह फ़ोन पे फ़ोन सेक्स तो नहीं हो रहा मैं उठा पहले कमरा बंद किया फिर बाथरूम के पास गया और देखा रागिनी फ़ोन पे ही थी मैं खुश हुआ उसने एक टी शर्ट और शोर्ट पहना था बड़ी सेक्सी लग रही थी। मैंने सुनने के लिए कान लगाये तो मुझे पता चला।
रागिनी : प्लीज मेरे साथ ऐसा मत करो …………… तुम जानते हो मैं तुम्हे कितना चाहती हु तुम्हारे बिना नहीं जी सकती प्लीजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज dont do this to me …….. ……………………………………………………………………….. मुझसे मन भर गया तुम्हारा या कोई और पसंद आ गयी तुमको।
मुझे समझ में आ गया उसका शायद झगडा या कोई बात हो गई है अपने B/F से मैंने फिर से झाँका तो देखा वो रो रही है पहले तो मैंने सोचा की गेट खटखटा दू पर फिर रुक गया और फिर से सुनने लगा उनकी बाते ..
रागिनी : वो bitch तुम्हे मुझसे ज्यादा अच्छी लग रही है हाँ क्यों नहीं लगेगी अब मुझसे तो बोर हो गए होगे नान्न्नाआआअ ……….. मेरी बात भी सुन लो मैं सिर्फ तुमसे प्यार करती हु और तुमने मुझे अभी I LOVE YOU नहीं कहा तो मैं जहर खा लूगी अभी के अभी …………

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यह सुनकर मेरी गांड फट गयी मैंने देखा तो मेरी आँखे फट गयी उसके हाथ में जहर की शीशी थी। मैंने झट से गेट खटखटा दिया।
रागिनी : उह्ह्ह कौन (बड़ी ही डरी और सहमी आवाज में)
मैं : मैं हु सुरेन्द्र।
रागिनी : भैया क्या हुआ ?
मैं : तू अन्दर क्या कर रही है ?
रागिनी ने गेट खोल दिया मैं गेट पे ही खड़ा था।
रागिनी : भैया आप यहाँ क्या कर रहे हो ? और गेट क्यों खटखटाया आपने?
मैं पहले तो उसके हमले हिल गया पर फिर संभल कर बोला : यार मेरी तो आंख लग गयी थी जैसे ही उठा तो देखा तू नहीं है बहार भी देखा तू नहीं थी तो बाथरूम खटखटाया तू इतनी देर से अन्दर क्या कर रही थी?
रागिनी : वॊओव्व्वॊओ भैया कुछछ्छ्च्छ नहीं क्यूऊऊऊ क्याआआअ हुआ
मैं : तेरी आँखों को क्या हुआ ?
रागिनी : वो मेरी आंख में साबुन चला गया था इसलिए
मैं : इधर दिखा और मैंने उसका चेहरा पकड़ लिया फिर बोला : तू रही थी ना ये आंसू के निशान बता रहे है मुझसे भी झूठ बोलने लगी अब तू और उसको गले लगा लिया। रागिनी मुझसे लिपट कर रोने लगी और मैं उसका चुप करा रहा था और सोच रहा था चलो मैंने इसको बचा लिया बेफकूफी करने से। उसको थोड़ी देर में चुप कराया और पूछा
मैं : अब मुझे सच सच बता क्यों रो रही थी तू ?
रागिनी : कुछ नहीं भैया ….
मैं : कुछ गलती करदी तूने
उसने कुछ नहीं किया
मैं : B/F से झगडा हो गया क्या
रागिनी एक दम से चौंक गयी।
मैं : तो यह बात है …… बस इतनी सी बात। जाने दे साले को तेरे पीछे तो लाइन लगती होगी लडको की ….
रागिनी : भैया मैं उसे सच्ची मैं प्यार करती हु और वो किसी और को पसंद करने लग गया है …. मैं उसके बिना जी नहीं सकती मैं मर जाना चाहती हु
मैं : ख़बरदार जो ऐसा सोचा भी तूने समझी

रागिनी : पर भैया मैं क्या करू?
मैं : तू ये सब मुझपे छोड़ दे मैं कुछ करता हु।
रागिनी : थैंक यू भाई
रागिनी मेरे से चिपक गई और मेरे गाल पे किस करके अपने बेड पे जा कर सो गई फिर मैं भी सो गया।
सुबह मुझे रागिनी ने जगाया और मुझसे पूछा भाई क्या करोगे तुम?
मैं : पहले तो रेडी होने वाला हु फिर सोचते है क्या करेगे?
रागिनी का चेहरा उतरा हुआ था मैं भी उसे बिना कुछ बोले बाथरूम में चला गया और अन्दर बस यही सोच रहा था की रागिनी को बोल तो दिया पर अब मैं क्या करुगा। मैं बहार आया तो मौसी बोली चलो सब नाश्ता कर लो। हम नाश्ता कर रहे थे पर रागिनी नहीं कर रही थी वो मेरे बगल में ही बैठी थी मैंने उसे बोला मुझे आईडिया आ गया है तू चिंता मत कर। वो खुश हो गयी मैंने उसे नाश्ता करने के लिए कहा वो खाने लगी। मैंने सोचा ये पगली मेरी हर बात को कैसे सच मान रही है, मुझे कुछ न कुछ करना पड़ेगा। अभी तो मैंने झूठ बोल दिया पर इसको क्या बोलूगा? जैसे ही हम लोग खड़े हुए …..
रागिनी : चलो भाई कमरे में चलते है
मैं : अपन टीवी देखते है चल आजा और उसका हाथ पकड कर उसे सोफे पर ले गया।
रागिनी : भाई तुमने क्या सोचा क्या करोगे तुम?
मैं : मैं उस लड़की को पटा लेता हु तो वो लड़का फिर तेरे पास आ जायेगा।
रागिनी : पर तुम तो कुछ ही दिन के लिए हो फिर वही शुरू हो जायेगा।
मैं : नहीं होगा लड़का इतना पागल थोड़े ना है जो उसकी फितरत नहीं समझेगा।
रागिनी : भाई वो बहुत ज्यादा हॉट है कुछ और सोचो ना …. वो उसे फिर से पटा लेगी मुझे पता है
मैं चैनेल बदल रहा था तभी जी सिनेमा पे “प्यार तो होना ही था” आ रही थी मैंने रागिनी को कहा ले तेरा काम हो गया।
रागिनी : कैसे
मैं : जैसे पिक्चर में काजोल ने उस लड़के को जलाया था हम भी जलाते है बोल क्या ख्याल है
रागिनी : आप को लगता है आईडिया काम करेगा  आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है और इस कहानी का शीर्षक अर्चना की जवानी की आग भड़क उठी है |
मैं : यही सही लग रहा है दो दिन देखते है अगर काम करेगा तो सही है नहीं तो चेंज कर देगे
रागिनी : ओके भाई
मैं : कोई जगह जिधर वो मिले और तेरे उधर जाने पे उनको फील न हो
रागिनी : हाँ आज हमारे ग्रुप में एक का जन्मदिन है
मैं : किसका
रागिनी : सोनल का
मैं ठीक है हम उधर चलेगे तूने किसी को ये थोडा न बताया की मैं तेरा भाई हु इंडिया से
रागिनी नहीं
मैं बहुत अच्छा

फिर शाम को हम दोनों रागिनी की कार से पार्टी के लिए निकल गए। रस्ते में मैंने सोचा कुछ पसंद ना पसंद पूछ लेता हु वर्ना उधर मजाक बन जाएगी।
मैं : रागिनी एक बात बता तुझे कौनसा कलर पसंद है ?
रागिनी : पिंक
मैं : और फूल?
रागिनी : क्यों
मैं : उधर कोई कुछ पूछ लेगा तो क्या जवाब देगे
रागिनी : अब मैं बड़ी हो गयी हु और मेरे दोस्त भी ये चुतियापा सवाल नहीं करेगे। तुम मेरे B/F बन के जा रहे हो वो मेरा साइज़ पूछेगे?
मैं : अच्छा चल एक बात बता
रागिनी पूछो
मैं : तू उत्तेजित कब होती है और क्या करती है ?
रागिनी : ये उत्तेजित क्या होता है ?
मैं : तू हॉर्नी कब होती है
रागिनी : जब कोई मेरी चूत चाटता है ना तब
मैं : अरे फोरप्लेय में पूछ रहा हु
रागिनी : पता नहीं
मैं : क्यों तूने तेरे B/F के साथ कभी सेक्स नहीं किया क्या ?
रागिनी : बहुत बार किया है हर हफ्ते एक दो बार तो करते ही है

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मैं सोचने लगा क्या लाइफ है इन लोगो की कौन करे ऐसे में शादी, मैं समझ गया था इसका B/F नादान है और उसने इसको असली मजा नहीं दिया है जरा सा करते ही ये उत्तेजित हो जाएगी।
हम पार्टी में पहुच गए। रागिनी ने मुझे सबसे अपना B/F कह कर मिलाया उसकी सभी फ्रेंड्स ने उसे कहा इतना चिकना किधर से ले आई इतनी जल्दी। तभी रागिनी का पुराना आता है अपनी वाली के साथ मैं तो उसे देखता ही रह गया क्या लग रही थी एकदम सही हरा भरा माल था क्या बूब्स क्या गांड सिर्फ उनमे ही चर्बी थी बाकि सब जगह सिर्फ इतनी की शेप आ सके।

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