बहन के नाम पे कई बार मुठीयाए

मेरे प्यारे दोस्तो, मैं मैनपुरी से रमेश अभी 23 साल का एक हैंडसम युवक हूँ। मैं यहाँ एक हिंदी सेक्सी स्टोरी लिख रहा हूँ जो कि मेरे साथ पिछले साल घटी थी।
मेरी बुआ की बेटी जो कि देखने में बहुत ही गोरी है। उसका नाम भाग्यश्री है उसकी हाइट 5 फुट 6 इंच की है.. उम्र 25 साल और उसका 34-28-30 का फिगर तो बहुत ही मस्त है।

मैं जब भी बुआ के घर जाता था तो उसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था मगर कुछ कर नहीं पाता था।
एक बार वो हमारे घर दशहरा पर आई हुई थी। उस दिन शाम को रावण को जलता देखने के लिए जाने का प्रोग्राम बना तो केवल मैं और वो ही जा रहे थे।
उधर भीड़ भी इतनी अधिक थी कि हम दोनों हाथ पकड़ कर चल रहे थे। कभी-कभी मैं उसकी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता था कि कहीं उसे धक्का ना लग जाए और उस पल वो मेरी बांहों में आ जाती थी।

जब हम नज़दीक पहुँच गए तो भीड़ के कारण हम आपस में सट के खड़े थे और उसकी एक चुची मेरे कंधे के ठीक पीछे मुझसे सटी हुई थी। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया.. फिर मुझे उसके मुलायम चुची की गर्मी महसूस हुई तो मेरा भी लंड खड़ा होकर 6 इंच का हो गया। मैं बार-बार उसकी चुची को कंधे से दबा कर मजा लेता रहा।
फिर प्रोग्राम खत्म होने पर हम दोनों घर पर आ गए। उस रात मैंने उसके नाम की मुठ मार कर खुद को शांत किया। फिर जैसे ही सोने जा रहा था तभी वो मेरे पास आकर बैठ गई।

मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो बोली- मन नहीं लग रहा है।
मैंने उससे कहा- आओ मेरे लैपटॉप पर मूवी देखते हैं।
उसने हाँ किया तो मैंने एक हॉलीवुड की मूवी डेकोर लगा दी और हम देखने लगे। न ज़ाने कब मेरी आँख लग गई और मैं सो गया।
तकरीबन एक घंटे के बाद मेरी आँख खुली तो मैंने देखा मूवी में एक सेक्स सीन चल रहा था। मेरी बहन उसे देख कर गरम हो चुकी थी और अपने हाथ को अपनी पेंटी में डाल कर अपनी चूत सहला रही थी। उसे मालूम नहीं था कि मैं जाग गया हूँ, वो अपने में ही मस्त थी।

मैंने भी सोने का नाटक किया और हल्की आँख से उसे देख भी रहा था। जैसे-जैसे वो और गर्म हो रही थी.. उसकी हल्की आवाज़ें भी निकल रही थीं।
अब तक मेरा लंड भी खड़ा हो गया था। मैंने भी ट्राई मारी और अपने लंड को लोवर के ऊपर से ही हल्का एड्जस्ट किया.. उसे लगा मैं नींद में हूँ। तभी उसका ध्यान मेरे खड़े लंड पर गया और थोड़ी देर के लिए वो रुक गई। मैं उसे चोरी-चोरी देख रहा था। कुछ मिनट बाद वो फिर से चूत रगड़ने में चालू हो गई। मगर इस बार उसका ध्यान मेरे लंड पर ही था।

इस बार उसने हिम्मत करके वो किया, जो मैं चाहता था। उसने मेरे लंड को अपने हाथ से छुआ और हल्के हाथ से सहलाने लगी ताकि मैं जाग ना जाऊँ। कुछ देर बाद उसने अपना हाथ मेरे लोवर में डाल कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और उसे सहलाने लगी। उसके एक हाथ में मेरा लंड था और दूसरे हाथ से वो अपनी चूत रगड़ रही थी। मेरा तो लंड बस उसे ही सलामी दे रहा था। वो एकदम मस्त होकर मेरे लंड को हिला रही थी और इतने जोश में थी कि उसे पता ही नहीं चला कि उसने मेरा लंड जोर से दबा दिया।

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इस बार मैं हल्की चीख मारता हुआ उठ बैठा और वो मुझसे दूर को चली गई। मैंने उसे डांटते हुए कहा- ये क्या कर रही हो.. करना ही है तो आराम से करो ना। उसे मेरी इस बात से रिलॅक्स हुआ और वो मेरे से गले लगती हुई बोली- भाई आप बहुत अच्छे हैं आई लव यू..
मैंने भी उसे ‘लव यू टू..’ कहा और उसके बालों में हाथ फेरने लगा। वो तो पहले से ही गर्म थी, मैं तुरंत उसे किस करने लगा, हमारी चूमाचाटी दस मिनट तक चली। इसी बीच मैं उसकी दोनों चुची को भी बारी-बारी से दबाता रहा.. साथ ही अपने एक हाथ से मैं उसकी गांड भी दबाता रहा।
आप लोगों को बता दूँ मुझे गांड मारना बेहद पसंद है।

फिर मैंने उसे अपनी गोद में अपनी तरफ मुँह करके बैठाया, जिससे कि उसकी दोनों चुची मेरी तरफ हो गईं।
मैंने उसकी पिंक टी-शर्ट उतार दी। उसकी टी-शर्ट क्या उतरी.. मेरे तो होश ही हवा हो गए.. यार क्या मस्त चुची थीं उसकी.. ऐसा लग रहा था कि दो खरबूजों को एक ब्लू कपड़े में बाँध दिया हो। उसने ब्लू-कलर की ब्रा पहनी हुई थी, जिससे उसकी आधी चुचियाँ बाहर झाँक रही थीं।
मैंने तुरंत उसकी ब्रा भी उतार दी और उसकी दोनों चुची को मसल-मसल कर और टाइट कर दीं। उसकी गोरी-गोरी चुची को मैं बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर उसके दोनों निप्पलों को अपने होंठों से दबा कर चूसने लगा। उसकी चुची मेरे चूसने और मसलने के कारण बहुत ही लाल हो गई थीं। मैं इस दौरान कभी-कभी उसकी चुची को हल्का सा काट भी लेता था। वो भी मस्ती में थी.. और जोश में ‘आआहह.. उइई.. ईईई..’ की आवाज़ें भी निकाल रही थी।

वो इतने जोश में थी कि बार-बार अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी और बोल रही थी- अह.. भाई चूसो और चूसो मेरी चुचियों को.. अह.. बहुत मजा आ रहा है।
अब मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में डाला तो पाया कि बहन की चूत इतनी गीली हो गई थी कि मेरे उंगली लगते ही वो उसके अन्दर सट से चली गई।
चूत में उंगली घुसते ही वो चिहुंक कर ऊपर को उठ गई और बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… भाई आराम से डालो ना।
मैं धीरे-धीरे बहन की चूत में उंगली करने लगा। जब वो और गर्म हुई तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। करीब पांच मिनट में ही वो झड़ चुकी थी।
फिर मैंने उसे 69 की पोज़िशन में किया और उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। वो भी मेरे 6 इंच के कड़क लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे किसी छोटे से बच्चे को कोई लॉलीपॉप चूसने को मिल गई हो।
कई मिनट बाद मेरा माल निकला और मैंने पूरा लंड रस उसके मुँह में ही छोड़ दिया.. और वो भी गजब की रांड थी.. साली ने एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी.. सारा माल पी गई।

अब मैंने उसे सीधा किया और उसकी चूत पर अपना लंड घिसने लगा।
वो मचलने लगी.. और बार-बार मुझसे कह रही थी- भाई अब अन्दर डाल दो ना प्लीज़..
मैं जब भी उसकी चूत पर लंड लगाता.. तो वो तुरंत नीचे हो जाती ताकि मेरा लंड उसकी चूत में घुस जाए। जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो मुझे अपने दोनों पैरों से बाँध कर अपनी तरफ खींचने लगी। मैं समझ गया कि अब ये नहीं मानेगी।
मैंने भी तुरंत अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। मेरा आधा लंड उसकी चूत की सील को तोड़ता हुआ अन्दर चला गया। मैं जानता था कि वो चिल्लाएगी, इसलिए मैंने पहले ही उसके होंठों को दबा कर किस करने लगा। उसकी आवाज़ मेरे मुँह में ही दब कर रह गई।

मैं उसे बस किस ही करता रहा। इसी बीच मैंने एक और बार धक्का मारा और मेरा पूर 6 इंच का लंड उसकी चूत में समा गया। वो तड़फ गई और बिना आवाज के रोने से लगी।
कुछ देर तक मैं यूं ही उसे चूमता और सहलाता रहा। जब मुझे लगा कि वो अब शांत हो गई है तो मैं धीरे-धीरे आगे-पीछे होने लगा। अब वो भी मेरा साथ देने लगी। मैंने नीचे देखा कि मेरा पूरा लंड उसके खून से सन गया था। मैं उसे बिना कुछ बताए बस धीरे-धीरे अपने लंड से उसको चोदता रहा और अब स्पीड भी बढ़ा दी।
वो भी इस चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। वो अब तक झड़ चुकी थी।

जब लगातार कई मिनट तक चूत चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने उससे पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ।
उसने कहा- मेरे मुँह में झड़ जाओ।
मैंने तुरंत अपना लंड चूत से खींच कर उसके मुँह में दे दिया। इस बार भी उसने लंड से एक बूँद भी बाहर नहीं निकलने दी और सारी रबड़ी पी गई।
मेरी यह हिंदी सेक्सी स्टोरी कैसी लगी..