बहन के साथ होली स्पेशल इनसेस्ट सेक्स

होली आने वाली थी और जैसे जैसे ये पास आ रही थी मेरे लिए तकलीफे और भी बढ़ रही थी ,कारण था की इस होली मैं अकेले ही रहने वाला था ,घर के सभी लोग गांव को निकल चुके थे और मेरे ऑफिस वालो ने मुझे 1 दिन की ही छुट्टी दी थी जिसमे मेरा गांव जाना तो नामिमकिंन ही था ,15 दिन मुझे यंहा अकेले ही बिताने थे ,और सबसे बड़ी बात मैं जिसके साथ होली में सबसे ज्यादा मस्ती करता था वो इस होली मेरे साथ नही थी,मेरी बहन वेदना …..

वेदना मुझसे 2 साल छोटी थी और इसी साल उसकी शादी हुई थी ,उसने अपने ही क्लास के लड़के से लव मैरिज किया था जिससे मेरे घर वाले उससे बात तक बंद कर चुके थे,उसके स्पोर्ट में खड़ा रहने वाला एक ही शख्स था वो था मैं ,मैं अपनी बहन को बहुत चाहता हु और उसकी हर जिद मानना मेरी बचपन की आदत है ,उसके होठो में आयी हुई मुस्कुराहट ही मेरे लिए सबसे खास थी ,जब वो घर में थी तो हम जमकर होली खेला करते थे,होली से एक दिन पहले ही उसकी सब सहेलियां हमारे ही घर आ जाया करती क्योकि बाकियों को वो छूट नही दी गई थी जो मैं अपनी बहन को देता था,मैं ही उन लोगो के लिए वोदका और बियर की व्यवस्था करता था ,और मेरे घर के छत में सभी की महफ़िल जमती थी ,मेरे निगरानी में सब होता था इसलिए पापा मम्मी भी कोई विरोध नही करते थे.

होली के दिन मैं मम्मी पापा और वेदना के साथ गांव निकल जाता था और वँहा भी पूरा परिवार मिलकर जमकर होली खेलता था , लेकिन इस साल ना वेदना मेरे साथ थी ना मैं गांव ही जाने वाला था,वेदना के जाने के बाद ऐसे भी घर में मातम सा माहौल रहता था और घर वाले ज्यादातर घर से दूर ही रहना पसंद करते थे वही मैं भी अपने काम में ही बिजी रहने की कोशिश करता था.

होली को बस दो ही दिन बचे थे मैं ऑफिस से थका हुआ घर में आया ,लेकिन अंदर जाते ही मेरी आंखे खुसी से भर गई थी ,
“भइया …”
वेदना दौड़ते हुए मेरे पास आयी और मेरे सीने से लग गई ,मैं अभिभूत होकर उसेके बालो को सहलाये जा रहा था ,मैंने नजर दौड़ाई उसका पति नागेश कही नजर नही आ रहा था,
“बेटा नागेश कहा है “

“हम अलग हो गए “
“क्या “मेरे सीने में जैसे पत्थर टूटा ,
“हा भैया ,मैं जैसा सोची थी वो वैसे नही है ,वो …वो “
वो फफक कर रोने लगी ,अभी उनकी शादी को मुश्किल से 3 महीने ही हुए थे और ये कैसे हो गया ,वेदना ,नागेश को पिछले 5 सालो से जानती थी ,5 साल आ प्यार शादी के 3 महीने में ही कैसे खत्म हो गया ,मैं अपनी ही उलझन में था .
“क्या हुआ है वेदना तूने कुछ बताया क्यो नही “

“किस मुह से बताती और क्या बताती ,मैंने जिस लड़के के लिए अपने घरवालों को भी छोड़ दिया वो एक ,”
वेदना इतना ही बोलकर चुप हो गई.
“वो क्या “
“कुछ नही भैया ,लेकिन हमारा बहुत झगड़ा हुआ है और जब तक मम्मी पापा नही आ जाते मैं यही रहूंगी ,अगर आपको एतराज ना हो तो “
“तू पागल हो गई है क्या ,मुझे तेरे होने से एतराज होगा ,तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया “
मेरी आंखे भर गई थी और वेदना को अपनी गलती का अहसास हुआ
“सॉरी भईया “

“जब मां पापा आ जाय तो भी रहना ये घर तेरा ही है ,देख अभी भी तेरे पास इसकी चाबी है ,और तुझे कौन निकलता है मैं देखता हु ,वो लोग तेरे जाने के बाद से मुरझा गए है अकेले में तो रोते है और सामने बड़े ज्ञान की बात करते है ,समाज मर्यादा वो सब ,देखता हु अब मेरी बहन को कौन क्या बोलता है “
मैंने अपना संकल्प दोहरा दिया ,वेदना मुझसे और भी जोरो से लिपट गई .
“नही भैया आप मेरे लिए किसी से नही लड़ोगे ,मा पापा को आपकी जरूरत है ,आप ही तो उनका सहारा हो ,मैं उन्हें भी आपसे अलग नही करना चाहती “

मैं वेदना को और भी कस कर जकड़ लेता हु मेरी बहन …
“मेरी बहन बड़ी बड़ी बाते करने लगी है आजकल “
वेदना और मैं दोनो ही हँस दिए..
रात होने को थी और वेदना ने अभी भी मुझे नही बताया था की आखिर उसके और नागेश के बीच किस बात को लेकर झगड़ा हुआ है ,वेदना का मुरझाया हुआ चहरा मुझसे बर्दास्त नही हो रहा था,मैंने बाहर जाकर नागेश को काल लगा ही दिया .
“हैल्लो “
“हैल्लो नागेश “
“विपुल भैया “
“क्यो तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे की मेरा नंबर तुम्हारे पास नही है “

“भैया वो वेदना ने जाते हुए सबका नंबर मेरे फोन से डिलीट कर दिया था,मैं बहुत परेशान हु क्या वो आपके साथ है “
मैं और भी ज्यादा चौक गया
“तुम्हे पता था की वो मेरे पास है कैसे पति हो तुम ,”
“थैंक्स गॉड ,भैया आप नही जानते ये सुनकर मुझे कितना सुकून हुआ है “
“अभी तुम्हारी शादी को बस 3 महीने हुए है ,तुम दोनो ने अपने घर वालो से लड़कर शादी की और इन 3 महीनों में ही ऐसा क्या हो गया की वेदना इसतरह तुमसे झगड़कर घर आ गई “

मेरा माथा फटा जा रहा था ,मुझे पता था की वेदना तो नकचढ़ी थी लेकिन नागेश बहुत ही शांत स्वभाव का समझदार लड़का था,
“भैया वो…”वो रुक गया
“क्या ना ही वेदना कुछ कह रही है ना ही तुम ,आखिर बात क्या हो गई है “
“भैया सबसे पहले आप मुझे सबका नंबर मेसेज कीजिये और वेदना का भी वो तो बात करने को तैयार ही नही हो रही है “
“आखिर हुआ क्या है ,???”
“भैया मैं सब कुछ बताऊंगा लेकिन अभी मुझे वेदना से बात करनी है “
“ठीक है मैं नंबर दे रहा हु “…..
थोड़ी ही देर बाद

“मैंने कह दिया ना की मुझे तुमसे कोई बात नही करनी ,और नंबर किसने दिया मेरा “
वेदना फोन में चीख रही थी
वो मुझे घूर कर देखती है ,फिर थोड़ी शांत दिखाई देती है ,मैं उसके पास ही बैठा हुआ था ,
“मैं भी लेकिन …”
“ह्म्म्म ठीक है लेकिन मुझे समय चाहिए ,”
“तो तुम्हे क्या लगता है की मेरा इस दुनिया में कोई नही है ,इनके पास नही आऊंगी तो किसके पास जाऊंगी “
वो फिर से एकबार मेरी ओर देखती है लेकिन फिर नजर हटा लेती है ,
“ओके “

वो मुझे खा जाने वाले नजर से देख रही थी ,
“अपने मेरा नंबर नागेश को दिया था “
“कुछ गलत किया क्या “
“मैं उसे सबक सीखना चाहती थी “
मैं उसके पास जाकर उसे अपने बांहो में भरने की कोसिस की लेकिन वो मेरे हाथो को झटक देती है ,

“अरे मेरी जान “मैंने उसके फुले हुए गालो को पकड़कर दबा दिया वो अब भी गुस्से में थी
“बात करने से ही सुलह होती है ,अगर तू ऐसे भागेगी तो कैसे बनेगा,अभी तो सिर्फ 3 महीने हुए है शादी को अभी तो पूरी जिंदगी बाकी पड़ी है ,और तू बहुत ही नकचढ़ी हो गई है ,ऐसे कोई किसी के मोबाइल से कांटेक्ट डिलीट करता है क्या “
वो फिर से मुझे घूरती है

“हा हु मैं नकचढ़ी और अपने ही बनाया है मुझे ऐसा “उसके होठो में वो मुस्कान आती है जिसका मैं इतने देर से इंतजार कर रहा था ,मुझे उसपर बहुत प्यार आया और मैंने उसके गालो को पकड़कर चुम ही लिया ,……
रात को मैंने उसकी सभी सहेलियों को मेसेज कर दिया था ,होली के दिन मेरी छुट्टी थी इसलिए एक दिन पहले रात का ही प्लान किया गया था,लेकिन इस बारे में वेदना को कुछ भी नही बताया था ,मैं उसे सरप्राइज देना चाहता था और उसके चहरे में वही खुसी और उमंग देखने को बेताब था जो कभी मेरे लिए सबसे बड़ी चीज हुआ करती थी ………

नागेश से बात होंने के बाद से वेदना थोड़ी खुस तो थी ,लेकिन उसकी उदासी जा ही नही रही थी,मुझे तो समझ ही नही आ रहा था की वो क्या चाहती है ,रात वो मेरे कमरे में आ गई और मुझसे लिपट के सोने लगी मुझे पता था की वो सो नही रही है ,रात उसके मोबाइल की रिगटोन बजी वो उसने बंद कर दिया ,फिर से बजा तो मोबाइल ही स्विच ऑफ कर दिया,फिर से मुझसे लिपट गई ,
“अरे बात कर ले ना उससे “
“मैं सो रही हु नींद आ रही है है मुझे “
मैंने आगे कुछ भी नही कहा ,

दूसरे दिन मैं रोज की तरह ऑफिस गया और शाम जल्दी ही घर आ गया,मोहल्ले में होलिका दहन होने वाला था इसबार सबको लगा था की मेरे घर से कोई भी नही आएगा ,सभी का खासकर लड़कियों का चहरा उतारा हुआ था क्योकि उनकी पार्टी मेरे ही घर में होती थी ,शाम वेदना ने जाने से मना कर दिया लेकिन मैं उसे खीचकर ले ही गया ,सबके चहरे खिल गए थे ,सभी वेदना को घेरने लगे वेदना के चहरे में भी थोड़ी खुसी आयी वो धीरे धीरे रंग में रंगने लगी थी ,नगाड़े बज रहे थे ,और गुलाल फेके जा रहे थे ,सभी लोग नाचने लगे लेकिन वेदना पहले तो वैसे ही खड़ी थी ,फिर उसके आंखों में आंसू आये जिसे मैने देख लिया मैं जल्दी से उसके पास जाकर उसे उठाकर लोगो के बीच ले आया और उसका हाथ उठाकर डांस करने लगा ,थोड़ी ही देर में वो रंग में आ गई और एक बार जो नाचना शुरू किया वो बस …..
पड़ोस की रूपाली ने मुझे खिंचा ,
“भैया आज का क्या प्रोग्राम है ,हर साल की तरह या सब सूखा सूखा ही होने वाला है “
“तुझे मेसेज नही मिला क्या “
“नही तो “

“भूल गया होऊंगा सभी लड़कियो को बात दे की पार्टी मेरे घर में है ,बस वेदना को पता नही चलना चाहिए ,”वो समझ गई थी
रात वेदना थकी हुई थी ,और हम जल्द ही सोने चले गए ,मैंने उससे कहा की मुझे कल भी ऑफिस जाना है सुबह जल्दी तो मैं सोने जा रहा हु ,वो और भी उदास हो गई थी ,लेकिन करती भी क्या ..वो अपने कमरे में जाकर सोने लगी …
रात लगभग 10 बजे हमारे घर की घण्टी बजी मैं अब भी बिस्तर में पड़ा था ,वेदना ने एक बार मुझे आवाज दी लेकिन मेरे तरफ से कोई भी रिस्पॉन्स नही आता देख वो ही उठकर गेट खोलने जाने लगी ,
उसने गेट खोला और
“हैप्पी होली “

एक बाल्टी रंगों से भरी उसके ऊपर उड़ेल दी गई ,वो स्तब्ध थी ,मैं पीछे से आकर उसके में रंग लगाना शुरू कर दिया उसका पूरा शरीर ही गिला हो गया था कपड़े जिस्म से सट गए थे ,सोते समय ऐसे भी वो अंदर कुछ नही पहनती थी उसका टीशर्ट और छोटा सा लोवर पूरी तरह से भीग गए थे लेकिन किसे परवाह थी ,वो थोड़ी देर तो गुस्से में दिखी लेकिन जब उसने देखा की उसकी सभी फ्रेंड्स और मोहल्ले की सभी लडकिया और कुछ आंटीया वहां है तो उसे समझ आ गया की क्या हो रहा है वो भी उनके ऊपर झपट पड़ी ,मैं थोड़ा दूर खड़ा हुआ अपनी बहन को देख रहा था ,उसकी इसी खुसी ले लिये तो ये सब किया था,तभी एक आंटी मेरे पास आ गई
“क्यो विपुल सब सूखा सूखा इस बार”

“अरे आंटी होली सूखी कैसे हो सकती है सब इंतजाम है चलो तो सही ऊपर “
सभी एक एक कर छत में आने लगे ,मैंने एक टेबल में बियर और वोडका को सजा कर रख दिया था ,खाने का समान वेदना की फ्रेंड्स ला रही थी ,रंग और बाकी समान मोहोले की लडकिया,मैंने साउंड सिस्टम बजाना शुरू कर दिया ,यहां का रूल था की यहां लड़को की एंट्री नही थी ,मैं ही एक मात्र लड़का यहां होता हु वो भी आयोजक की तरह ना की मैं उनके साथ शामिल होता हु ,
वेदना ने जब ये सब देखा वो भाव विभोर हो गई और मुझसे आकर लिपट गई ,
“ये सब कब कर लिये “

“आज शाम से यही तो कर रहा हु ,मेरी बहन आये और होली ना मने ऐसा हो सकता है क्या “
वो और भी जोरो से लिपट गई ,वो इस सरप्राइज के लिए तैयार नही थी इसलिए उसने कपड़े नही बदले थे,उसका जिस्म पूरी तरह नजर आने लगा था ,लेकिन यहां किसी को इससे कोई भी परेशानी नही थी ,लेकिन मुझे उसके शरीर का आभास हुआ तो कुछ अजीब सा लगा
“तू कपड़े बदल ले ना “
उसे समझ आ गया की मैं क्या कहना चाहता हु
“छोड़ो ना भैया ऐसे भी कोई तो नही है यहां ,और आपकी विस्की “

मैंने उसे इशारे से दिखाया ,वो उनलोगों में शामिल हो गए ,शराब का दौर चला और सच बताऊ दारू के बाद औरते बहुत ही ज्यादा वाइल्ड हो जाती है ,इतनी मस्ती करती है की आप साधारण तह सोच भी नही सकते ,उनकी मस्तिया चल रही थी और उन्हें देख देखकर मैं भी खुस हो रहा था,मैंने अपनी विस्की की बोतल निकल कर पिने लगा ,डांस पूरे जोरो में था ,और कुछ लड़कियों ने मुझे भी खिंच लिया ,मुझे भी रंगों से नहला दिया गया था,मैं भी पूरे जोश में नाच रहा था ,थोड़ी थोड़ी देर नाचकर मैं उनसे अलग होकर बैठ जाता था,और वेदना को नाचते हुए देखने लगता था,वो आज हँस रही थी ,खुस थी इससे ज्यादा मुझे और क्या चाहिए था,वो मुझे देखती फिर मुझे खिंच लेती ,ये सब रात 1 बजे तक चला अब सभी पूरी तरह से टुन्न थे और कुछ तो वही लुढक गए थे.

आसपास की सभी आंटीया और लडकिया अपने घर जा चुकी थी ,लेकिन वेदना और उसकी एक दो फ्रेंड्स अब भी नाच रही थी,मैं भी पूरी एक बोतल विस्की गटक चुका था ,कोई उल्टियां कर रहा था कोई छत में ही पड़ा था तो कोई मेरे सोफे में आकर सोया हुआ था .अब जो होशं में थे मैं और वेदना ही थे,क्योकि ये अचानक किया गया था और मा पापा भी नही थे ,घर की हालत भी खराब हो गई थी ,मै नीचे आकर देखने लगा की कल कितना काम करना पड़ेगा ,खैर एक 500 के नोट से मेरे घर की काम वाली ये सब साफ कर देगी ,जिन्हें जहा जगह मिली थी वो सो गए थे ,लेकिन वेदना को तो अभी भी डांस करना था वो हमेशा ही ऐसा करती थी ,मैं उसके साथ थोड़ी देर और नाचा लेकिन मैं भी थक गया था ,
“हो गया ना चल अब मैं भी थक गया “

हम दोनो का एक एक अंग अभी रंग से रंगा था,
“आप नही थक सकते भैया “
मुझे लगा वो अपने आपे में नही है ,मैं उसे उठाने की कोसिस करने लगा लेकिन वो मुझे बीच में ही रोक दी.
“नागेश भी थक जाता है ,वो तो शुरू भी नही कर पता “
मेरा दिमाग चकराया
“हा भैया मैं अभी भी वैसे ही हु जैसा की शादी के समय थी “

मैं कुछ समझने की कोसीस कर रहा था
“मैं अभी भी वर्जिन हु भइया ,”
मेरे दिल में जोरो की चोट लगी ,अब मुझे उन दोनो की पूरी बाते समझ आ गई थी,मुझे वेदना के दुख का आभास हुआ और मैंने उसे जोरो से जकड़ लिया वो जोरो से रोने लगी ,मेरा इतना किया सब जाता रहा ,थोड़ी देर तक हम ऐसे ही रोते रहे मुझे तो इसका यकीन ही नही हो पा रहा था की नागेश जैसा लड़का ऐसा हो सकता है ,मैं उससे बात करना चाहता था लेकिन अभी नही ,

मैं वेदना को नीचे ले आया और उसे अपने कमरे में ले गया वो बिस्तर में बैठी हुई थी मैंने पहले उसे कपड़े बदलने और नहाने की सलाह दी लेकिन वो पहली मेरे साथ ही नहाने की जिद करने लगी ,जिंदगी में जो थोड़ी खुसी मैं उसे दे सकता था देना चाहता था ,ताकि वो इस दुख से लड़ सके ,
हम दोनो शावर के नीचे खड़े थे ,अभी हमने कपड़े उतारे नही थे ,पानी की फुहार हमारे बदन पर पड़नी शुरू हुई .
“हैप्पी होली भइया “

हम दोनो ही हँस पड़े,
धीरे धीरे हम पूरे तरह से गीले हो गए और वेदना ने मुझे अपने बांहो में जकड़ लिया ,उसका पूरा शरीर भीगा हुआ था उसके कपड़े उसके तन से चिपक गए थे,मेरी प्यारी बहन इतने जल्दी इतनी बड़ी हो गई इस बात का सही अहसास तो मुझे अब हुआ ,उसके हर अंगों का भराव मेरे बदन से चिपक रहा था और मैं उसे महसूस कर सकता था,थोड़ी देर में वो मुझसे अलग हुई और बाथटब में थोड़ा गर्म पानी कर उसमे लिकविड डाल दिया ,हम दोनो वही लेट गए ,वो हल्का हल्का गर्म गर्म अहसास ,हमे बहुत सकून दे रहा था ,थोड़ी देर में वेदना पहले की तरह बच्चों जैसे मुझपर पानी फेक्नी लगी और पास ही पड़े फोम से मेरे शरीर को धोने लगी फिर मैं भी उसे रगड़ रगड़ कर साफ करने लगा ,पूरा पानी ही रंगीन हो गया था ,तो फिर से नया पानी भरकर हम उसमे लेते रहे ,दारू का नशा थोड़ा कम तो हो गया था लेकिन अब भी सर भारी था ,हमे कब नींद आयी पता ही नही चला.

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