बहन के साथ होली स्पेशल इनसेस्ट सेक्स

गतांग से आगे …..

जब मेरी नींद खुली तो वेदना वँहा नही थी ,मैं भी उठाकर अपने को पोछा और बैडरूम में गया .वो कपड़े चेंज कर सो चुकी थी ,वो बच्चों की तरह पैर मोड़े हुए सोए हुए थी ,मेरे होठो पर एक मुस्कान फैल गई ,मैं भी खुद के कपड़े चेंज किये उसे एक किस किया और गहरी नींद के आगोश में चला गया …………

होली का दिन और सुबह उठाते ही रात की सारी बाते दिमाग में घूम गई ,सर में थोड़ा दर्द भी हो रहा था,मैंने बाजू देखा तो वेदना को नही पाया ,मैं सर पकड़े बाहर आया ,घर जमा हुआ था मतलब की वेदना बहुत पहले ही उठ चुकी थी ,
मैं किचन की तरफ बढ़ने लगा ,तभी किसी के जोरो की हँसी आयी,ये नेहा थी,नेहा वेदना की सहेलियों में एक थी बहुत ही सेक्सी टाइप की लड़की थी ,वेदना के सभी दोस्तो से अलग थी क्योकि सभी मुझे भैया ही कहा करती वेदना को छोड़कर,
वेदना और मैं दोनो ही जानते थे की नेहा मुझे बेहद पसंद करती है लेकिन मैं ही उसे भाव नही देता ऐसे भी नेहा मेरे टाइप की नही थी ,लेकिन दिल की बड़ी अच्छी लड़की थी ,वो वेदना के सामने उसके डर से कोई भी ऐसी वैसी बात करने से बचती थी,लेकिन जब हम अकेले होते तो वो मुझपर टूट ही पड़ती …….

“ऐसे क्यो हँस रही हो ,और वेदना कहा है “
“अपना चहरा देखो पहले और वेदना बाजू वाली आंटी के घर गई है ,अभी बस हम दोनो ही है घर में “ उसने बड़ी अदा से कहा और मैं मुह सिकोड़कर वहां से भागा अपने बाथरूम में आ गया ,अपना चहरा देखा तो वो पूरा काला था ,जरूर ये वेदना की ही बदमाशी थी मुझे हँसी आयी और अगले ही पल वेदना के बारे में सोचकर दुख….इस उम्र में उसे ये सब सहना पड़ रहा है ,सोच के ही मन रो पड़ता है,मैं तैयार होकर बाहर आया ,नेहा ने मेरे लिए नाश्ता लगाया ,वो आज बड़े ही तमीज से पेश आ रही थी ,
“तुम्हे क्या हुआ है आज सलवार कमीज में “

“क्यो पसंद नही आया क्या “
“अच्छी लग रही हो ,लेकिन ये बदलाव कैसे “
“सब कुछ तो बदल गया है ,वेदना आप तो मैं कैसे वैसे ही रहू “
मैंने उसे धयन से देखा उसे हो क्या गया है की वो इतने संजीदा बाते कर रही है,
“क्या हुआ “
“आप बताओ की क्या हुआ है “
“अरे ये क्या बात हुई “
“तो आपका चहरा क्यो उतरा है “

मेरा चहरा?ओह तो इसे समझ आ गया
“कुछ नही “
“ह्म्म्म वेदना मेरी सबसे खास सहेली है और जो बात उसने आपको कल बताई वो मैं बहुत ही पहले से जानती हु ,जब नागेश और उसकी शादी हुई “
मैं फिर से उसे गौर से देखने लगा

“अब अगर कोई कुछ कर सकता है तो आप “
“मतलब “
“वेदना को जो चाहिए वो देकर “
“क्या चाहिए उसे “
मैं आश्चर्य चकित सा उसे देख रहा था
“प्यार “
“तो तुम्हे क्या लगता है की मैं उसे प्यार नही करता “
“जिस्म का प्यार “
मेरा गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ गया ,

“तुम समझती क्या हो अपने आप को तुम उसकी सहेली हो तो मैं तुम्हारी किसी भी बात को चुपचाप सुनूंगा ,निकल जाओ यहां से और कभी फिर चहरा मत दिखाना ,अगर तू लड़की नही होती तो तुझे यही गाड़ देता “
मेरा चहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था ,मेरी धड़कन बड़ी हुई थी ,लेकिन नेहा के चहरे में एक शिकन तक नही आयी .
“हा जा रही हु ,लेकिन ये मैं अपने मर्जी से नही कह रही हु,मैं तो आपको किसी और के साथ सोच भी नही सकती लेकिन इसे मेरे अलावा कोई और

आपसे कह भी नही सकता था,ये कहने को वेदना ने ही मुझे कहा था ,अब आप जानो और आपकी बहन मैं चली “
वो भी गुस्से में आते हुए वहां से चली गई ,उसके चहरे से उसका दुख जरूर झलक रहा था ,
लेकिन मैं ……………मैं तो स्तब्ध था,दिल चीख रहा था की जो तूने सुना है वो बस बकवास है ,कोरी बकवास …वेदना तो ऐसा सोच भी नही सकती …

नाश्ता मेरे मुह के अंदर ही नही जा रहा था,मैंने वेदना के आने से लेकर अब तक को फिर से सोचा ,जो नेहा हमेशा ही मेरे लिए पागल रहती थी कल वो बिल्कुल चुपचाप बैठी थी ,बहन के आने की खुसी में मैं उसे देखना ही भूल गया था,वेदना का पहले इतना दुखी होना और मेरे साथ ही नहाने की जिद करना ,क्या ये महज इत्तफाक था ,या प्लान किया गया था,लेकिन क्या उसे मुझपर इतना भरोसा नही था की उसे लगा की मैं ये कर पाऊंगा ………..
हो सकता है की वेदना की ये सबसे बड़ी जरूरत हो ,और उसे पूरा करना उसके जीवन और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी हो ,लेकिन मैं ही क्यो दुनिया में इतने लड़के है,और मैं तो उसका भाई हु ये गलत है ,मैं अपने ही आप से बात करता हुआ अपने सोच में गुमसुम सा बैठा था ,की फिर से नेहा की आवाज आई ,वो बाहर जा चुकी थी लेकिन फिर से अंदर आई .
और मेरे सामने खड़े हो गई .

“अगर आप सोचते हो की ऐसा क्यो ,तो वो इसलिए क्योकि वेदना आपसे ज्यादा किसी से भी प्यार और विस्वास नही करती ,उसके लिए आपसे बढ़कर कोई भी नही है नागेश भी नही “
मैं उसे देखता रहा मेरे आंखों में आंसू थे ,जो बहाने को तैयार थे लेकिन किसी वजह से रुके हुए थे ,दिल भरा हुआ था लेकिन फिर भी मैं उसकी बात सुन रहा था.
“और अगर आप सोचते हो की ये गलत है तो बहन की इज्जत और जीवन से बढ़कर कोई भी सही गलत नही होता ,खुशियो के सामने सब सही गलत फीके है,जब बहन ही नही रहेगी ,उसकी खुसी ही नही रहेगी तो सही गलत का अचार तो डालना नही है आपको ….”
मैं अब भी उसे ही देख रहा था.

“खैर जो फैसला करना है कर लीजिएगा और आपके बिस्तर के पास एक जेल रख दिया है क्योकि वेदना अब भी वर्जिन है ,और ये भांग की गोलियां जिससे आप और वेदना इस रिश्तो के बंधन से मुक्त होकर एक दूसरे को दुख से बचा सके …”
वो कुछ गोलियां रखकर वहां से चली गई ,मैं तो अब और भी शॉक में था की वेदना ने सब प्लान किया हुआ है ,मेरे दिमाग में कोई भी सवाल नही थे क्योकि नेहा ने सारे जवाब पहले ही दे दिए थे ,लेकिन एक अजीब सी बेचैनी और डर मुझे अंदर ही अंदर खाये जा रहा था ………
थोड़ी देर बाद वेदना घर आती है ,उसके भी चहरे का रंग उड़ा हुआ था ,वो मेरे टेबल में रखे गोलियो को देखती है ,हमारी नजर मिलती है और वो अपनी नजर झुका लेती है ,और मेरे सामने आकर खड़े हो जाती है.
“भइया नेहा ने आपसे बात की “
उसकी नजर अभी भी झुकी हुई थी.
“हा “
“तो .”

वो बस इतना ही बोलकर रुक जाती है ,मैं गोलियां सामने कर देता हु ..
“लो इसे दूध में घोलकर भांग तैयार कर दो “
“भइया “
वेदना खुसी के मारे चिल्ला पड़ती है और मेरे गले से लग जाती है ,मुझे उसके इस रिएक्शन का जरा भी इल्म नही था ,

“मैं बहुत खुस हु की अपने मुझे माफ कर दिया और आपके लिए ऐसा भांग बनाउंगी की आप सब कुछ भूल जाओगे “
मुझे तो विस्वास ही नही हुआ की वेदना इतनी बड़ी बात के लिए थोड़ी भी गंभीर नही थी ,हो सकता है की वो इस बारे में बहुत सोच कर ही ये फैसला किया है ,और ये स्वाभाविक था क्योकि जैसा नेहा ने कहा था की नागेश के शादी के बाद से ही वेदना प्रॉब्लम में थी तो वो इतने दिनों तक इसके बारे में सोचा ही होगा ,और नेहा से इसके बारे में लंबी बातचीत भी की होगी ….

वेदना अंदर चले गई और बाहर आकर मुझे अपने हाथो से नाश्ता खिलाने लगी ,मैं अभी भी बहुत ही नर्वस फील कर रहा था
“भइया अपने मुझे माफ नही किया है ना “
“नही बहन ऐसे क्यो बोल रही हो “
“तो यू गुमसुम क्यो हो ,अगर आप ऐसे ही रहोगे तो मुझे कुछ भी नही चाहिए पहले आपकी खुसी फिर बाकी कुछ ,आज होली है हमारा सबसे फेवरेट त्योहार है और आप ऐसे घुमसुम रहोगे तो नही चलेगा ,बोलो तो भांग को फेक दु “

मैंने उसके चहरे को देखा सच में वो मेरी खुसी के लिये कुछ भी कर सकती थी
“भांग मेरे ही साथ पीना जरूरी है क्या “
मैं उससे अब भी सीधे बात नही कर सकता था
“आप पागल हो गए हो क्या ,सिर्फ सिर्फ और सिर्फ आपके साथ ही पिऊंगी और किसी के साथ तो सोच भी नही सकती “
“लेकिन नागेश “

“देखो भैया अब उसका नाम लेकर मेरा दिमाग खराब मत करो ,मैं भांग को फेक रही हु “
वो अपने स्वाभाविक गुस्से में उठी ,मैं ने उसे खीचकर अपने गोद में बिठा लिया ,वो एक सफेद सलवार कमीज में थी ,आज पहली बात उसके कूल्हों को मैं अपने जांघो में महसूस कर रहा था ,अब मुझे तो ये करना ही था और वेदना की भी यही चाहत थी तो क्यो ना मैं अपने शर्म को गिरा दु ताकि मैं उस चीज के लिए तैयार हो जाऊ,ये मेरे लिए आसान तो नही था.
“ठीक है तू मेरे साथ ही भांग पीयेगी ओके ,और एक चीज हमेशा से याद रखना की तेरा भाई तेरे लिए कुछ भी कर सकता है ,कुछ भी ,i love you मेरी जान .”

मैं उसके गालो को चूमने लगा ,मेरी आंखों में आंसू आ गए थे
“भैया रोइये मत मैं जानती हु आप मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो ,मैं आपके प्यार को जानती हु भैया,मैं जानती थी की आप मुझे माफ भी कर देंगे और मेरी खुसी के लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाएंगे लव यु भैया “

वो मेरे गालो को पकड़े हुए उसे चूमने लगी ,तभी गेट में किसी की दस्तक हुई ,जैसे ही मैंने गेट खोला होली खेलने वाले मेरे घर में हमला बोल दिया सब कुछ ही देर में रंगों से सराबोर थे ,सबने हमे नीचे ग्राउंड में जंहा पर पूरी कालोनी के लोग इकट्ठा होते है ले जाने लगे ,लेकिन वेदना थोड़ी देर बोलकर सबको भगा दी ,वेदना अंदर जाकर मेरे लिए और अपने लिए भांग के दो ग्लास लायी ,इतना बढ़िया भांग मैंने कभी नही पिया था,
जो लोग भांग के नशे के बारे में जानते है उन्हें पता होगा की इसमें जो आप सोचोगे आप बस वही सोचते रहोगे ,दिमाग मतवाला सा होकर बंधनो को तोड़ देता है ,ये शराब के नशे से बहुत ही भिन्न है ये गांजे के नशे के समान होता है लेकिन उससे अच्छा होता है ,स्वस्थ्य की दृष्टि से भी भांग जब ठंडाई के साथ साथ बनाया जाय तो ये ठंडा करने वाला और दिमाग को अच्छा बनाने वाला भी होता है ,लेकिन जैसा सभी औषधियों के साथ होता है इसका भी उपयोग बस नशे के रूप में किया जाता है ….

अब हम दोनो ही मस्त थे ,मैंने अपनी पिचकारी उठाई ,
“भैया आज अपनी पिचकारी अच्छे से भर लेना ,आज देखती हु की आप मुझे कितना भीगा पाते हो ….”
वो हँसते हुए वहां से निकल गई और मैं उसके बात का मतलब समझने की कोसीसे करने लगा ,…………
भांग का नशा अपने शबाब पर था साथ ही होली का रंग भी ,ये पहली बार था जबकि हम शहर में होली मना रहे थे,हम हमेशा से ही गांव में होली मनाते थे.

वेदना और मैं पूरी तरह से रंग में सराबोर थे,मेरी पिचकारी ना जाने क्यो आज सिर्फ और सिर्फ वेदना के ऊपर ही बरस रही थी ,वो हँस रही थी और हँस रही थी और हँस रही थी ,लगभग सभी को पता चल चुका था की हम भांग पीकर आये है क्योकि हम थोड़े पागलो वाली हरकत कर रहे थे,मैं बार बार पिचकारी में रंग भरता और वेदना के ऊपर डालता और वो बस हँसती रहती वो भी ठहाके मार मार कर मैं भी उसे देखकर हँसता था फिर पिचकारी में रंग भरकर उसे भिगोने चले जाता,हमारी हालत देखकर आस पड़ोस की आंटीयो को चिंता सताने लगी क्योकि वेदना को हँसने के कारण पेट में दर्द होने लगा था ,वही वो उल्टियां करने की कोशिस भी कर रही थी लेकिन कुछ हो नही रहा था.

उसके चहरे का दर्द साफ झलक रहा था लेकिन वो भी मजबूर हो गई थी और अपनी हँसी रोक ही नही पा रही थी ,जो लोग गांजा या भांग का नशा करते है उन्हें शायद ये पता हो जिन्हें नही पता उनको बता दु की ये नशा कभी उल्टियां करने से ठिक नही होता,इसके लिए माइंड को बिजी रखना जरूरी है या अगर वो सो पाए तो सुला दो ये सबसे असरकारक होता है लेकिन इस नशे में सो पाना भी तो बेहद मुश्किल है.

नेहा हमारी हालत देखकर मुस्कुरा रही थी ,उसे सबने कहा की वो हमे घर छोड़ दे ,नेहा हमे खीचकर हमारे घर तक ले गई और जाते जाते मैं वेदना की हालत देखकर रोने लगा ,मुझे देखकर वेदना रोने लगी ,नेहा ने हमे जैसे तैसे हमारे घर तक लायी और दरवाजा खोलकर वेदना के पास आकर कहा….
“ठिक होना है “
“हा”वेदना रोते हुई बोली
“तो कुछ ऐसा सोच जो अच्छा हो “
“क्या “वेदना सुबक ही रही थी ,वो इच्किया ले रही थी

“सेक्स के बारे में सोच अच्छा लगेगा “नेहा ने हम दोनो को देखकर कहा
“और तुम अपनी बहन का ध्यान नही रख सकते जाकर इसे नहलाओ और जो बोला है वो करो “मैं किसी बच्चे की तरह उसकी बात में सर हिलाया
“और दरवाजा अंदर से बंद कर देना “
वो हमे छोड़कर वँहा निकल गई
मैं अंदर आकर दरवाजा लगाया
“चल नहाते है “
“हा भैया “वो अब भी रो रही थी साथ ही मैं भी ,हम इसे खत्म कैसे करे वो समझ नही आ रहा था ,

हम बाथरूम में खड़े थे ,हम रंगों से सराबोर थे और पूरी तरह से गीले थे हम शावर के नीचे आ गए ,हम अब भी रो रहे थे ,अब वो मेरे आंसू पोछती और मैं उसके ,
मैंने शावर चालू किया पानी की ठंडक ने हमे थोड़ा आराम दिया हम पूरी तरह से गीले थे ,हमारे चहरो और शरीर में लगा हुआ रंग धीरे धीरे करके पानी की धार के साथ साथ ही बह रहा था,अब मुझे उसका वो प्यारा सा चहरा दिखने लगा था हालांकि अब भी उसपर बहुत रंग बाकी था,
रोना बंद ही नही हो रहा था जैसे ही हम एक दूसरे को देखते दहाड़ मार कर रो पड़ते …

“भइया कुछ करो ना “
“क्या “
“जो नेहा बोली सेक्स की बात कैसे सोचु कुछ समझ नही आ रहा “
वो और भी जोरो से रोने लगी ,भांग चीज ही ऐसा है ,गांजा तो फिर भी ठिका हो जाता है लेकिन भांग अगर चढ़ गई तो जान ही ले लेती है ,

सेक्स की बात सुनकर मेरे दिमाग में एक बार नेहा की पूरी बात घूम गई ,उस नशे की हालत में ही मैंने वेदना को खुस करने का फैसला किया लेकिन कैसे मुझे ये तो पता ही नही था ,
“भइया कैसे सोचु सेक्स के बारे में “
“नागेश के बारे में सोच “
वो और भी जोरो से रोने लगी मेरा दिमाग तो सेक्स की तरफ जाने लगा था और मैं नेहा की कही बातो के कारण थोड़ा गर्म हो रहा था ,लेकिन बेचारी वेदना का क्या
“वो तो बहुत बेकार है ,मैं कैसे सोचु “

वो फिर से रोने लगी ,मैं आगे बड़ा और उसके स्तनों में अपने हाथ रखकर उसे मसलने लगा ,वेदना के कपड़े जिस्म से चिपक कर बहुत ही सेक्सी हो गए थे ,लेकिन अभी भी मुझे इसका कोई आभास नही था क्योकि अब भी मेरे अंदर का भाई जिंदा था जो अपनी बहन को हवस की नजर से नही देख सकता चाहे वो नंगी ही क्यो ना हो …
“अब अच्छा लगा “
“नही ….”वो जोरो से रोई
“सोचु कैसे “

मेरा दिमाग काम नही कर रहा था की ये कैसे सोचेगी मैं अपने कपड़े निकलकर बस अंडरवियर में आ गया ,अभी मेरे लिंग में कोई भी अकड़ नही थी ,मैं उसका हाथ पकड़ कर अपने सीने में लगाया
“तू मुझे प्यार करती है ना “
“बहुत “वेदना ने बड़ी ही मासूमियत से कहा
“तो सोच अगर मैं तेरा पति होता ,तो …”
“ओ अब सुबक रही थी ,थोड़ी शांत भी हो गई ,थोड़ी ही देर के बातचीत और पानी की धार ने कमाल दिखाया था ,
“तो ….”

“हम कैसे सेक्स करते ये सोच “
वो मेरे सीने को सहलाती है ,
“भइया आपके मसल्स कितने कसे हुए है ,नागेश तो थुलथुला है “
“अरे छोड़ उसे मेरे बारे में सोच ना “

बेचैनी में मुझे भी रोना आ गया था,मेरा लिंग उसके स्पर्श और सेक्स के विचारों के कारण खड़ा होने लगा था ,मुझे इतनी उत्तेजना कभी महसूस नही हुई थी ,ये भी उस नशे का कमाल है और जो लोग इसका सेवन कर कभी भी सेक्स के बारे में सोचे हो वो ये बात भली भांति जानते होंगे की मैं क्या कहना चाहता हु ,दिमाग शून्य हो जाता है ,लिंग ऐसे अकड़ जाता है जिसे की कोई रॉड हो ,मेरे साथ भी यही हुआ ….
दिल की धड़कने बहुत ही बढ़ गई थी ,वो मेरे सीने को चुपचाप सहला ही रही थी ,अब उसकी सांसे भी तेज हो गई थी वो भी गर्म होने लगी थी ,अब हम दोनो का ही रोना बंद हो चुका ,वो मेरे बालो से भरे चौड़े सीने को इतने ध्यान से देख रही थी जैसे की उसमे खो गई हो शायद वो ये सोच रही थी की अगर मैं उसका पति होता तो उसके साथ कैसे सेक्स करता .

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