बहन के साथ होली स्पेशल इनसेस्ट सेक्स

गतांग से आगे …..

“आह “उसकी आंखे बंद हो गई .पानी उसके गुलाबी होठो से जो अभी थोड़े बैगनी हो गए थे में जाने लगा उसका मुह थोड़ा सा खुल गया था ,
उसकी आंखों में नशा उतर गया था ,नशीली आंखे अब मेरे चहरे को ही गहरे जा रही थी ,मेरे भी लिंग का हाल बुरा था ,
“भइया आप कितने सेक्सी हो ,ये मेरे दिमाग में पहले क्यो नही आया ,आप तो मुझे रौंद ही डालोगे,कितनी ताकत है आपके अंदर ,मुझे बहुत मजा आएगा “
वो इतनी हांफ रही थी की वो ढंग से बोल भी नही पा रही थी ,उसका नाजुक शरीर मेरे पास आने लगा ,मेरे लिए वो किसी गुड़िया जैसी थी ,मैंने उसे जोरो से कसा वो मेरे सीने में धस गई और मेरा लिंग उसके जांघो के बीच जोरो से रगड़ खाया.
“आआआ हहहह “
वो नजर उठाकर मेरे होठो पर अपने होठ रखने को अपना सर ऊपर की और मैं अपने सर को नीचे कर उसके रसीले होठो को अपने होठो की गिरफ्त में ले लिया ,

गुलाल का स्वाद मेरे मुह में घुल रहा था लेकिन हम दोनो ही एक दूसरे को जी जान से खाने में तुले थे ,मेरा हाथ उसके शरीर के हर हिस्से पर जा रहा था मैं उसके कूल्हों को पूरे ताकत से दबाता जैसे मसल कर राख कर देना चाहता हु,वो भी जोरो से आहे भर रही थी ,उसके हाथ मेरे सर पर था और वो पूरी तरह से मेरे गिरफ्त में …………..
मैं उसके सलवार के नाड़े को पकड़ कर खोल दिया सलवार भी एक ही झटके में नीचे आ गिरा ,आप उसकी पेंटी के ऊपर से मेरा हाथ उसके कूल्हों को मसल रहा था ,उसकी नरम त्वचा का अहसास मुझे और भी गर्म कर रही थी ,मेरे लिए ये सब सहन करना मुश्किल हो रहा था मैं अपने अंडरवियर को निकाल फेका और उसके पेंटी के ऊपर से ही उसके योनि के ऊपर रगड़ने लगा..
“ओह माँ …आह नही ओह “

वो उत्तेजना के शिखर में थी और मैं पागलो की तरह उसके पेंटी के ऊपर से ही अपने लिंग को रगड़ रहा था लेकिन मुझे थोड़ा भी शुकुन नसीब नही था ,बल्कि ये और भी ज्यादा बढ़ रहा था ,मैंने अपना हाथ लेजाकर उसके पेंटी को उसकी योनि से सरकाया और धीरे से अपने लिंग को उसकी योनि में घुसा दिया ,वाह क्या अहसास था जब मेरे लिंग की चमड़ी पहली बार अपने सुपडे से अलग हुई और फैलाकर पीछे हो गई ,दर्द तो दोनो को ही हुआ था लेकिन इतना मजा और ये नशा सब दर्द पी गया ,
वो चिल्लाई
“माँ ……भइया ….ओह गॉड ..ऊहह “

मुझे कसकर जकड़ लिया ,उसके गीले योनि में मेरा लिंग दो ही झटकों में पूरी तरह से समा गया था ,शायद मेरा लिंग थोड़ा छिल गया था और उसमे खून भी आ गया था लेकिन अभी इसका अहसास भी मुझे नही था ,लिंग के अंदर जाते ही मुझे इतना अच्छा अहसास और शांति मिली की मैं तो दीवाना ही हो गया ,एक बार फिर से उसे बाहर खिंचा और जोरो से अंदर डाला ,इस बार भी वेदना ने मुझे जोरो से जकड़ा ,वो अब बस अपने कमीज में खड़ी थी ,शावर अब भी चालू था और हमे भिगो रहा था और मैं पूरी तरह से नंगा खड़ा था ,उसके पैर काँपने लगे थे मैंने उसे वही लिटा दिया और उसके बाकी के कपड़ो को लगभग चीरते हुए उतारा।

हम दोनो बहुत ही जल्दी और जोश में थे ,उसके पूरा नंगा होते ही मैं उसके टांगो को उठाकर अपने लिंग को उसकी योनि पर हमला कर दिया ,मैं अपने पूरे जोश में अंदर बाहर कर रहा था और वो भी मेरे सर को पकड़े जोरो से चिल्ला चिल्ला कर मेरा साथ दे रही थी ,हम दोनो ही उत्तेजना के शिखर पर थे वो झड़ी ना जाने कितने बार मेरे भी हाथो में दर्द भर गया था ,लिंग का हाल तो बेहाल था ,वही हाल उसकी योनि का भी था लेकिन दोनो ही डटे हुए थे ,मैं उसे अलग अलग पोजिशन बना कर सेक्स कर रहा था ,पता नही मुझे ये सब कैसे आ गया ,मैंने जिंदगी में कभी ना पोर्न देखी थी ना ही हिलाया था लेकिन कहते है ना की सेक्स सीखने या सीखने की चीज नही है ,जोश हो तो सब खुद ब खुद हो जाता है ऐसा ही मेरे साथ हो रहा था।

मैं उसे पलटा कर कुत्तों की तरह चोदने लगा था ,उसके कूल्हों से मेरे कमर टकराकर आवाज करने लगे थे मैं हर झटका इतने जोर से मरता था…पानी की आवाज के साथ साथ हम दोनो के मिलन से उठने वाली छप छप की आवाज कमरे में फैल रही थी ,वो झर जाती फिर से गर्म हो जाती ऐसा घंटे भर तक चला.
वो तो मर सी गई थी मेरा भी हालत वैसा ही था,मैंने पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन साला मेरा लिंग पानी छोड़ने का नाम ही नही ले रहा था ,मैं पागल हुए जा रहा था और मुझसे अब नही हो रहा था ,हमारा नशा भी खत्म होने लगा था ,मैं 5 -10 मिनट ताकत लगाने के बाद थककर उसके ऊपर गिर जाता फिर थोड़ी देर में फिर से कोशिस करता था ,वेदना भी परेशान लग रही थी ,उसे अब दर्द होने लगा था ,1 घंटा बीत जाने के बाद वो रोने लगी और मजबूरी में मैं भी..

“भइया हो गया ना प्लीज़ ,अब नही सहा जाता …”
वो सच में रो रही थी उसे देखकर मेरा दिल भी भर गया मैं उठा और उसे ऐसे ही उठाकर बिस्तर में पटक दिया ,वो बेहद ही मजबूरी भरे नजरो से मुझे देख रही थी,
“माफ कर दो भइया मैं सह नही पा रही हु “
वो रोने लगी मैं उसके ऊपर आकर उसे प्यार करने लगा ,मेरा लिंग अब भी रॉड बना हुआ था

“कोई बात नही बहन ये ठीक हो जाएगा मैं इसे ठंडे पानी से धोता हु “
हम अब नशे में नही थे लेकिन हमारे मन में अभी तक हुए वाकये को लेकर कोई भी ग्लानि नही उठी थी ,मैं फ्रिज से बेहद ठंडा पानी निकल कर अपने लिंग में डालने लगा ,इससे मुझे राहत तो मिली लेकिन अब भी उसकी अकड़ नही गई ,तभी वेदना ने नेहा को काल किया और उसे सभी बताई ,थोड़ी ही देर में घर की घंटी बजी,वेदना एक नाइटी उठा कर दरवाजा खोली नेहा ने अंदर आकर तुरंत अंदर से दरवाजा बंद कर लिया ,
“ये क्या दे दिया है तुमने “

मैं अब भी नंगा था और मुझे नेहा से कोई भी शर्म नही आ रही थी ,वो बस मुस्कुराई और मेरे पास आकर नीचे बैठ गई और मेरे लिंग को देखने लगी ,चमड़ी अब भी ऊपर चढ़ी हुई थी और लिंग इतने रगड़े जाने के बाद और भी सूज गया था ,वो बहुत ही मोटा दिख रहा था ,मेरा सूपड़ा बुरी तरह से लाल था ,वो उसे देखकर एक आह भरी ,
“मुझे पता था की तुम जितने दमदार हो ये भी उतना ही दमदार होगा “वो इतना ही बोलकर लिंग को अपने मुह में लेकर चूसने लगी ,जो लिंग ठंडे पानी के पड़ने से थोड़ा सा ठंडा पड़ा था वो फिर से गर्म होकर बेहद ही कड़ा हो गया ,वो किसी बहुत ही एक्सपर्ट की तरह उसे चूसे जा रही थी मेरा भी हाथ उसके सर पर चला गया और मैं मजे के सागर में डूब गया ……….

वो काफी देर तक मेरे लिंग को जोरो से चूसती रही ,पूरी मेहनत वो कर रही थी और मजे मैं उठा रहा था,उसके चूसने का अंदाज ही ऐसा था की मैं पागल हुए जा रहा था ,आखिरकार वो समय आया जिसका मुझे इतनी देर से इंतजार था मैं जोरो से नेहा के मुह में अपना वीर्य छोड़ा और आश्चर्य की बात ये थी की वीर्य बहुत गढ़ा तो था लेकिन ज्यादा मात्रा में नही था ,मैं शांत हो गया और हांफता हुआ बिस्तर में गिर पडा ,
मेरे बाजू में वेदना जो अब फिर से अपने कपड़े उतार चुकी थी आकर लेट गई ,वही नेहा अब अपने कपड़े खोलकर मेरे ऊपर आ गई और मुझे धीरे धीरे चूमने लगी ,अब हम तीनो ही नंगे थे …

“इस दिन का मुझे ना जाने कब से इंतजार था “नेहा की मदभरी आवाज मेरे कानो में पहुची लेकिन अब मैं नशे में नही था ना ही मेरे अंदर उत्तेजना ही थी ,
वो मेरे शरीर को सहलाने लगी मेरा लिंग फिर से अकड़ने लगा नेहा ने पास रखे उस क्रीम को देखा ,
“तुमने इसका प्रयोग नही किया “
“जरूरत ही नही पड़ी “
उसके चहरे में कातिलाना मुस्कान आ गई
“थैंक्स नेहा “मैं धीरे से उससे कहा
“मेरी तरफ से भी “वेदना भी बोल पड़ी और मेरे सीने में एक किस कर दिया

“मुझे जिंदगी का सुख देने के लिए ,लेकिन उस भांग में था क्या “वेदना ने फिर से कहा
“कुछ भी नही ,जो भी था तुम दोनो के अंदर ही था,तुम दोनो की समाज के बंधन में ऐसे बंधे थे की तुम्हे अपने शरीर की भूख दिखाई नही देती थी ,इसलिए तुम दोनो इस उम्र में भी वर्जिन हो ,मैंने तो बस इतना ही किया की उस बंधन को तोड़ने में मदद कर दी ,बाकी तो सब कुछ तुम लोगो ने ही कर दिया “
वो रहस्य से भरी हुई मुस्कुराई ,
“लेकिन अगर तुमने ये नही कहा होता की वेदना भी ये चाहती है तो शायद मैं कभी ये नही कर पाता ,वेदना को समझने के लिए थैंक्स “

अब वेदना मुझे आश्चर्य से देखने लगी
“मैंने ऐसा कब कहा था,ये तो इसने ही मुझे कहा था की अगर नागेश से नही होता तो दूसरा ढूंढ ले और जब मैंने मना किया तो ये आपका नाम लेने लगी लेकिन मैं जब इसपर गुस्सा हो गई तो इसने वो सब कहना छोड़ दिया “
मेरा तो दिमाग ही हिल गया ,
“लेकिन तू मुझसे इतना माफी क्यो मांग रही थी और तूने नेहा को तो पूछने भेजा था ना “

“वो तो मैं भांग पीने को लेकर पूछने को बोला था,मुझे लगा की आप इससे गुस्सा हो जाओगे …”वेदना भी आश्चर्य में थी ,मेरा दिमाग गुस्से से पागल हो गया,मेरे चहरे में आये भाव देखकर नेहा मेरे ऊपर से हट गई थी,
“तेरी इतनी हिम्मत मादरचोद “मैं लगभग चीखा लेकिन मैं कुछ कह पता वेदना ने मेरे होठो पर अपने होठ टिका कर जोरो से चूमने लगी …उसके आंखों से आंसू झर रहे थे ..
“भइया इसने जो किया वो अपनी मोहोब्बत को पाने और अपनी दोस्ती को निभाने के लिए किया ,वो हमे ऐसे दुख में नही देख पाई होगी ,और देखो आज हम कितने खुस है ,”

मैं वेदना को देखने लगा ,उसके नाजुक होठ थोड़े सूजे हुए थे,बाल पूरी तरह से बिखरे हुए ,उसकी आंखों में वो आंसू भी मुझे किसी मोती की तरह लग रहा था ,गुलाबी होठो की पंखुड़ियां थोड़ा थोड़ा हिल रही थी,मैं फिर से उसे अपने पास खिंच कर उसके होठो को चूमने लगा इस बार मैं उसके ऊपर था हम दोनो की नजरे मिली और उसकी आंखों में देखते हुए ही मैंने अपना लिंग उसके अंदर डाल दिया ,उसके नाजुक होठ खुले और मैं उन्हें अपने होठो में भर लिया ,में बहुत ही धीरे धीरे से अपनी कमर हिला रहा था,लिंग इस बार भी उतना ही कड़ा था लेकिन उत्तेजना की जगह बस प्यार था,और वो प्यार शायद सिर्फ वेदना के लिए ही नही बल्कि नेहा के लिए भी था,वो आकर अपने शरीर को मेरी पीठ पर ठिका दी मैं सर पलट कर उसे देखा और उसके सर को अपने निगाहों के पास लाया ,उसकी आंखों में भी आंसू थे मैं उसके होठो को चूसने लगा ,मेरी कमर हल्के हल्के से हिलते हुए मेरी बहन के अंदर मेरे लिंग को हल्के हल्के चला रही थी ,

“मुझे माफ कर दो “
नेहा की आंखों में अब भी आंसू थे,वेदना ने अपने हाथो से उसके सर को पकड़ा और उसकी आंखों में देखने लगी ,
“नही नेहा तुम्हारा धन्यवाद की तुम्हारे कारण मेरे भाई ने मुझे इतनी बड़ी सौगात दी “
वेदना का ये कहना था की हम तीनो ही प्यार की दरिया में डूब गए ………………

इसके बाद ये प्यार हमारे रोज का काम हो गया ,आज भी हम तीनो जब भी एक दूसरे से मिलते है प्यार और सेक्स का पूरा सुख उठाते है ,नेहा की शादी हमारे ही कालोनी के एक लड़के से हुई है ,जी है वो उसके साथ कम और मेरे साथ ज्यादा सोती है,अब नागेश पहले से थोड़ा अच्छा हो गया है ,इसके लिए उसने डॉ चुतिया से अपना ट्रीटमेंट कराया था,लेकिन वेदना अब भी मेरे नीचे रहना ही पसंद करती है,इसलिए वो अब इसी शहर में रहने लगी है,मैंने दोनो को सौगात और हमारे प्यार की वेदनानी के रूप में अपने वीर्य से भरा था जिसका परिणाम अब दो हट्टे कट्टे बच्चे है,मेरी भी शादी होने को है और मुझे यकीन है की नेहा और वेदना मिलकर कोई ऐसा तिकड़म करेंगी की मेरी बीवी भी हमारे साथ हो जाय ……