भाभी और ननद की चुदास भरी मस्तियाँ


गतांग से आगे…

अब प्रिया पूरी तरह से बल्लु के काबू में आ चुकी थी, उसके मन से बल्लु का भय निकल चुका था, उसने मद भरी आवाज में बल्लु से कहा- भैया अब मैं तो झड़ गई हूँ ! अब तुम क्या करोगे? लाओ, मैं अपने हाथ से आपके लौड़े का पानी निकाल देती हूँ। बल्लु बोला- नहीं रे, मेरी छुटकी अभी देखना तेरी चूत फिर से गर्म कर दूँगा मैं, जैसे रोज रात को तेरी भाभी को कई कई बार चोदता हूँ न ! मैं उसी तरह तुझको भी आज पूरा मजा दूंगा।

प्रिया मुस्कुरा उठी, बोली- मुझे मालूम है, और मैंने खिड़की से कई बार आप दोनों की चुदाईलीला भी देखी है।

अब बल्लु प्रिया को चोदने के लिए बेताब था। वो फ्रिज से मक्खन उठा लाया और अपने सुपाड़े पर लगाने लगा। प्रिया उसके सूजे हुये कड़े लंड को देख फिर से डरने लगी क्योंकि उसको पता था कि अब उसका भाई उसकी नाज़ुक चूत का बुरा हाल बनाएगा। लेकिन उसको अब चुदाई से मिलने वाले आनंद को भी महसूस करने का मन था। इस आनंद के बारे में उसने अपनी सहेलियों से सुना था, और किताबों में पढ़ा और देखा भी था।

बल्लु ने सुपाड़े पर मक्खन लगाने के बाद प्रिया को पकड़ उसकी चाटने से लाल हो चुकी चूत पर भी मक्खन मला और उसकी नाज़ुक कमसिन चूत की फांकों को एक हाथ फैलाया और अपने अपनी एक उंगली को उसकी बुर में मक्खन के साथ घुसेड़ दिया |

उसकी एक ऊँगली सट से अंदर चली गई अब बल्लु ने प्रिया को सीधा लेटा कर उसके पैरों को चौड़ा किया और उसकी चूत के मुहाने पर अपना मूसल जैसा लंड रख दिया, प्रिया की तरफ देखा और उससे कहा- जरा सा दर्द होगा बेबी तुमको, फिर देखना कितना मजा आएगा… ठीक है?

और यह कहते हुये बल्लु ने अपने लौड़े को जरा सा धक्का दिया मक्खन से सराबोर उसका लंड और चूत के खूनी मिलन का आगाज हो गया !!!

प्रिया दर्द से चीख पड़ी लेकिन बल्लु का लंड धीरे धीरे उसकी चूत में जगह बनाता हुआ घुसता रहा। उसको ऐसी नाज़ुक चूत चोदने में इतना मज़ा आ रहा था कि उससे रहा नहीं गया और उसने एक तेज धक्का लगा दिया। प्रिया को दर्द से छटपटा उठी लेकिन बल्लु ने उसके मुहँ पर अपने होंठों को जमा दिया और उसके होंठों को चूसते हुये हौले हौले धक्के लगाने लगा।

ज़्यादा आनन्द सहन ना हो पाने के कारण बल्लु को लगा कि वो झड़ जाएगा तब वो अपनी पूरी इच्छा शक्ति लगा कर रुक गया और प्रिया के होंठ चूसने लगा। कुछ देर में संभालने के बाद फिर से अपने धक्के शुरु कर दिये और प्रिया को भी तब तक अपनी चूत में दर्द कम हो कर मस्ती का एहसास होने लगा था, आख़िर वो भी एक जवान और चुदाई की प्यासी लड़की थी।

उसको मज़ा आने लगा और जब उसने अपनी आँखों को बंद करके किताब में चुदाई करवाती हुई औरत को याद किया तो एक अज़ीब सी सनसनाहट उसके शरीर में दौड़ गई। उसकी चूत पानी छोड़ने लगी जिससे बल्लु को उसकी बुर को चोदने में और भी आसानी होने लगी।

प्रिया ने अब अपनी बाहों को बल्लु के गले में डाल अपनी टाँगों को खोल उसको जकड़ लिया, उसको बेतहाशा चूमने लगी और अपनी कमर को उछाल उछाल कर चुदवाने लगी… आअहह भैया और ज़ोर से चोदो, फक मी हार्ड…

और प्रिया ना जाने कितनी बार उस चुदाई की आँधी में झड़ गई…

लेकिन बल्लु उसको लगातार चोदता ही रहा.. बल्लु के जबरदस्त धक्के वो बर्दास्त ना कर पाई और लगभग बेहोश सी हो गई… आखिरकर बल्लु भी अंत में कुछ ज़ोरदार धक्के मार कर झटके लेते हुए उसके ऊपर निढाल हो गया।

झड़ जाने बाद बल्लु प्रिया के लगभग बेहोश पड़े शरीर पर लेटे हुये उसकी चूचियों से मज़ा लेता रहा फिर उठ कर नंगा ही बाहर चला गया।

बाहर नीता उसका इंतज़ार कर रही थी। बल्लु की तृप्त आँखों में देख वो समझ गई कि चुदाई मस्त हुई है।

“चोद आए मेरी गुड़िया जैसी प्यारी ननद को?”

बल्लु खुशी से उसको चूमता हुआ बोला- हाँ मेरी जान, चोद दिया साली को, बहुत रो रही थी।

नीता वासना के जोश में घुटने के बल बल्लु के सामने बैठ गई और उसका रसभरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। लंड पर प्रिया की चूत का पानी और बल्लु के वीर्य का मिलाजुला मिश्रण लगा था, जिसको पूरा साफ कर के ही उठी।

बल्लु कपड़े पहन कर ऑफीस जाने के लिए तैयार हुआ, फिर अपनी कामुक जुगाड़ नीता से पूछा- अब तुम क्या करोगी?

नीता बोली- पहले उसकी चूत चुसूंगी जिसमें तुम्हारा यह मस्त रस भरा हुआ है, फिर उससे अपनी चुसवाऊँगी। हम लड़कियों के पास मज़ा लेने के लिए बहुत से प्यारे प्यारे अंग हैं, आज ही सब सिखा दूँगी उसको !

प्रिया होश में आ गई थी और बेड पर लेट कर दर्द से सिसक रही थी। चुदवाने की प्यास ख़त्म हो जाने पर अब उसकी चुदी हुई चूत में बहुत दर्द हो रहा था।

नीता उसके पास बैठ कर उसके नंगे बदन को प्यार से सहलाने लगी- क्या हुआ मेरी प्रिया रानी को? तू नंगी क्यों पड़ी है और तेरी टाँगों के बीच से चिपचिपा क्या बह रहा है?

प्रिया शर्म से रो दी- भाभी, बल्लु भैया ने आज मुझे चोद डाला।

नीता ने नाटक करते हुए कहा- ओह ! ज़रा देखूँ तो, और वो प्रिया की चूत को झुक कर देखने लगी। उसकी चुदी हुई चूत को देखकर नीता की चूत भी गीली होने लगी, नीता बोली- चिंता मत कर तेरी चूत फटी नहीं, बस थोड़ी खूल गई है, पर क्या तू पहले भी किसी से चुद चुकी है? तुझको खून क्यों नहीं निकला?

प्रिया बोली- नहीं भाभी, वो तो स्कूल में मैं जिम्नास्टिक करती हूँ तो उसी में मेरी झिल्ली फट चुकी थी।

नीता बोली- अच्छा इसी कारण तुझको खून नहीं निकला ! खैर तुझे दर्द और जलन हो रही होगी, मैं अभी ठीक कर देती हूँ।

ऐसा कहकर उसने प्रिया की चूत पर अपना हाथ फेरना शुरू किया तो प्रिया को फिर से अच्छा लगने लगा और उसने अपनी दोनों टांगों को फैला दिया अब नीता को समझ में आ गया कि इसकी चूत को मेरा हाथ फिराना अच्छा लग रहा है, सो वो उसको चूमने लगी। फिर उसको जीभ से दो तीन बार चाटा, ख़ासकर लाल अनार जैसे दाने पर जीभ फेरी। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है

प्रिया चहक उठी- भाभी, यह क्या कर रही हो? “कुछ नहीं, बस, तेरा दर्द कम कर रही हूँ, तुझे अच्छा नहीं लग रहा?” नीता ने उसकी चिकनी जाँघों को सहलाते हुये कहा।

“बहुत अच्छा लग रहा है भाभी, और करो ना !”

नीता ने झुक कर उसको चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया। प्रिया काफ़ी गर्म हो गई और अपने चूतड़ उचका उचका कर अपनी चूत नीता के मुँह पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी। नीता ने उसकी चूत को फैला कर बीच में अपनी जीभ डाल कर तेज़ी से उसकी चूत चोदने लगी तो प्रिया इस आनन्द को बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ गई।

फिर नीता ने अपने कपड़े उतार कर उसको भी अपनी चूत चाटने को बोला। प्रिया वैसे भी ऐसा करना चाहती थी क्योंकि उसकी एक सहेली लेस्बीयन थी जो अपनी कहानी अक्सर बताया करती थी। तभी से प्रिया की भी इच्छा थी कि वो भी कभी ्किसी सखी-सहेली या अपनी भाभी के साथ यह खेल खेले।

प्रिया ने अपनी पूरी मस्ती से नीता के साथ इस लेस्बियन सुख के तालाब में गोते लगाये और नीता को खुल कर यह भी बता दिया- भाभी, मुझको बल्लु भैया और तुम्हारे सम्बन्धों के बारे सब कुछ मालूम है और मैं खुद आपके साथ बल्लु का लौड़ा अपनी चूत में पिलवाना चाहती थी ! यह तो सब आपकी मेहरबानी से आराम से हो गया नहीं तो वो खुद ही रोज बल्लु के सामने झुक कर अपने दुद्दुओं का नजारा दिखा कर उसके लौड़े को अपने काबू में करना चाहती थी।

तो दोस्तो, उस पूरी दोपहर ननद और भाभी एक दूसरे की चूचियाँ और चूत दबाती और मसलती रही और एक दूसरे को संतुष्ट करती रही। और जब रात हुई तो एक बार फिर से सेक्स का मस्त खेल बल्लु, नीता और प्रिया तीनों के बीच चला। अब तो उनकी यह नियमित दिनचर्या का एक अंग बन गया है |

कहानी कैसी लगी बताना ना भूले तभी तो और मजेदार मजेदार कहानियां लिखुगा आपके लिए और हां शेयर भी करें अपने जिगरी दोस्तों के साथ अकेले अकेले मज़ा लोगे क्या |