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भाई के लंड पर मम्मी और बहन लट्टू-3

भाई के लंड पर मम्मी और बहन लट्टू-1

भाई के लंड पर मम्मी और बहन लट्टू-2

दोस्तों मै राहुल आज  भाई के लंड पर मम्मी और बहन लट्टू का तीसरा भाग लिख रहा हूँ | अभी तक आपने पढ़ा … अगर तुम्हारी मा तुमसे चुदना चाहती होगी तो तुमसे अलग होकर तुम्हारे चेहरे को देखेगी तब तुम थोड़ा सा मुस्कुरा देना अगर वह भी मुस्कुरा देती है तब तुम समझ जाना कि वह भी तुमसे चुदना चाहती है और फिर मोका देख के तुम आगे बढ़ सकते हो. ओ भाभी क्या आइडिया दिया है आपनी मा की चूत को मे एक बार क्या दो बार सहला दूँगा, हा किशन लेकिन थोड़ा ध्यान से. अपनी भाभी की मस्त प्लानिंग को सुन कर अजाय का लंड फिर से तन चुक्का था और उसने अपनी नंगी पड़ी भाभी को अपने उपर खीच कर अपने लंड पर चढ़ा लिया और दोनो मे चुदाई का एक लंबा दौर फिर शुरू हो गया जो कि इस बार काफ़ी लंबा चला. शाम तक दोनो पूरे मस्ती मार कर वापस घर लौट आए… और अब आगे ….

आकृति अपने कमरे मे मनीषा की दी हुई बुक पढ़ रही थी और एक हाथ अपनी सलवार के अंदर डाल कर अपनी चूत भी सहला रही थी लेकिन वह ग़लती से दरवाजा बंद करना भूल गई तभी संध्या चुपके से कमरे मे आ गई और आकृति को अपनी चूत मसल्ते देख लिया तो सीधे जाकर आकृति के हाथो से बुक छीन ली. आकृति एक दम से सकपका गई और अपना हाथ सलवार से निकाल लिया, संध्या ने किताब के पन्ने खोल कर देखा तो आकृति भाई और बहन की चुदाई की कहानी पढ़ रही थी, संध्या ओहो तो हमारी प्यारी नंद रानी ऐसे गुल खिला रही है आकृति शर्म से लाल हो चुकी थी और अपनी गर्देन नीचे झुकाए बैठी थी, संध्या ने मोके की नज़ाकत देखते हुए आकृति के पास बैठते हुए उसकी मोटी मोटी चुचियो को अपने हाथो से मसल दिया, आकृति कसमसा कर रह गई, अरे मेरी लाजो रानी इतना क्यो शर्मा रही है, तू क्या सोचती है कि तू अकेली ऐसी कितबे पढ़ती है अरे मैं तो इनसे भी गंदी कितबे पढ़ चुकी हू जिसमे कही बेटी अपने बाप से चुद रही है मा अपने बेटे से चुड रही है और सच पूछो तो ऐसी कहानिया पढ़ कर चूत सहलाने मे बहुत मज़ा आता है क्यो मे सही कह रही हू ना, ओह भाभी तुम भी ना, संध्या अच्छा सच सच बता मे तो तेरी भाभी कम सहेली ज़्यादा हू मुझसे मत छुपा तेरा मन एक मोटे लंड से चुदने का कर रहा है ना, अरी बोल ना नही तो मे ये किताब मा जी को बता देती हू, दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

आकृति -अरे नही भाभी ऐसा गजब मत करना

संध्या- तो फिर बता तेरा मन चुदने का कर रहा है कि नही, हा कर रहा है, अच्छा मुझे अपनी सलवार उतार कर दिखा और आकृति का नाडा खोलने लगी, आकृति भाभी आप ये क्या कर रही हो, अरे पागल मैं भी तो देखु मेरी ननद कितना पानी छोड़ रही है और एक झटके मे नाडा खोल दिया और आकृति की मोटी गांड से सलवार नीचे सरका दी, आकृति की मोटी मोटी केले के तने जैसी गुदज जंघे और मोटे मोटे चूतड़ गुलाबी पॅंटी मे समा नही रहे थे, संध्या ने आकृति की पॅंटी खिच कर उसे भी उतार दिया और उसकी दोनो जंघे फैलाकर उसकी चूत देखने लगी आकृति शर्म से लाल होने लगी संध्या ने उसकी फूली हुई चिकनी चूत पर हाथ फर्टे हुए, तेरी चूत तो बहुत रस छोड़ रही है सच सच बता किताब पढ़ते पढ़ते किसके लंड की कल्पना कर रही थी, और उसकी चूत के खड़े दाने को अपनी दो उंगलियो से मसलने लगी, आकृति ओह भाभी किसी के लंड की कल्पना नही कर रही थी बस कहानी पढ़ के ही मेरा मन करने लगा, संध्या झूठ मत बोल मे जानती हू तू किसके लंड से चुदने की कल्पना कर रही थी, आकृति आश्चर्या से भाभी को देखते हुए किसके लंड की, संध्या किशन के लंड की और किसके लंड की, आकृति ये क्या बोल रही हो भाभी भला मे ऐसा क्यो सोचूँगी वो मेरा भाई है, संध्या अच्छा मेरी गुड़िया रानी जब तुम भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ोगी तो अपने भाई के लंड से चुदने की ही कल्पना करोगी या अपने पापा के लंड की कल्पना करोगी, आकृति ऐसा कुछ नही है भाभी आप ग़लत सोच रही है, संध्या ने आकृति की चूत मे एक उंगली पेल दी जिससे आकृति छटपटाने लगी, अरे ननद रानी तुम मुझे चोदना मत सिख़ाओ मे सब समझती हू और वैसे भी किशन भी तुझे चोदने के लिए मरा जा रहा है, अब आकृति बुरी तरह चौंकते हुए क्या कह रही हो भाभी आप को शर्म नही आती, संध्या अरे मे सच कह रही हू, आकृति क्या सबूत है आपके पास कि किशन मुझे चोदना चाहता है, संध्या अरे कल रात को मेने किशन को तेरी पॅंटी की महक शुंघते और तेरा नाम ले ले कर लंड हिलाते हुए अपनी आँखो से देखा है | दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |  आकृति समझ गई कि भाभी ने भी मेरी ही तरह किशन के रूम मे झाँक कर यह सब देखा होगा, अब की बार आकृति को ज़्यादा चकित होते ना देख संध्या ने आकृति से पूछा क्या हुया तुझे मेरी बात पर यकीन नही आ रहा और आकृति का एक मोटा थन पकड़ कर मसल्ने लगी आकृति काम अग्नि मे जल रही थी और अपने दिल की बात भाभी से कह गई, भाभी जो आप कह रही है वो मे पहले से जानती हू पर, संध्या अरे पर क्या, आकृति भाभी कोई बहन अपने भाई से कैसे कहे कि वो उसे चोदे, संध्या उसकी चूत के छेद मे दो उंगलिया डालते हुए अरे पगली तू पहले मुझे बोल तो सही कि तू किशन का लंड लेना चाहती है बाकी सब मुझ पर छोड़ दे, आकृति सीस्यते हुए और कामुकता भरी आवाज़ मे हाँ भाभी मैने जब से किशन का लंड देखा है मे उसकी दीवानी हू उसका मोटा डंडा दिन रात मुझे पागल करता रहता है एक बार मुझे उसके तगड़े लंड से चुदवा दो भाभी मे आपका

एहसान जिंदगी भर नही भूलूंगी.

संध्या अच्छा बता अभी कहानी पढ़ते पढ़ते जब तू अपनी चूत सहला रही थी तब क्या सोच रही थी, और संध्या ने आकृति के मोटे मोटे आमो को मसलना शुरू कर दिया, ओह भाभी क्या बताऊ मैं सोच रही थी कि मे किशन के मूह पर अपनी जंघे खोल कर बैठी हू और वह मेरी चूत का रस फैला फैला कर चाट रहा है, ओह भाभी कहानी और फ़िल्मो मे देख देख कर मैं मरी जा रही हू, भाभी कैसा लगता होगा जब कोई मर्द अपनी चूत खोल कर चाटता है, संध्या बड़ा मज़ा आता है मेरी रानी लेकिन उससे भी ज़्यादा मज़ा तब आता है जब अपना खुद का भाई अपनी बहन को नंगी करके उसकी चूत खोल खोल के चाते और फिर उसे हुमच हुमच कर चोदे, और आकृति के होंठो को चूम लेती है, आकृति भी अपनी भाभी से चिपक जाती है और संध्या आकृति के हाथ पकड़कर अपने मोटे मोटे चुचो पर रख देती है तब आकृति भी अपनी भाभी के मोटे मोटे दूध दबाने लग जाती है.

अब संध्या अपनी उंगली आकृति की चूत मे तेज तेज चलाने लगी और आकृति झड़ने लगी ओह भाभी मे गई आह आह आह कितना मज़ा आ रहा है आपने मुझे पागल कर दिया ओह ओह ओह….और आकृति की चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया, और आकृति अपनी भाभी की बाहो से चिपक गई और भाभी के रसीले होटो को चूम लिया ओह मेरी प्यारी भाभी आप कितनी अच्छी हो, आप ने तो मुझे आसमान मे उड़ा दिया. संध्या अरे मेरी बन्नो जब उंगली से आसमान मे उड़ने लगी तो अपने भाई के मोटे लंड से तेरा क्या होगा. ओह भाभी पर ये सब होगा कैसे. संध्या सुन आज रात को टॉप और केवल स्कर्ट पहन कर सोना और पॅंटी मत पहनना और अपने टॉप के नीचे ब्रा नही पहनना और टॉप के दो बटन खोल लेना फिर रात को किशन के कमरे मे जाना और उससे कहना किशन मुझे नींद नही आ रही है चल मेरे कमरे मे थोड़ी देर बात करेंगे जब किशन तेरे कमरे मे आ जाए तो थोड़ी देर उससे हसी मज़ाक कर भाई बहन जैसे एक दूसरे से चिपक कर झप्पी देते है इस तरीके से करना जैसे तू कुछ नही जानती है लेकिन अपने अंगो को किशन को ऐसे दिखाना और किशन के बदन से ऐसे सटना कि उसका लंड खड़ा हो जाए फिर किशन को कहना कि तुझे नींद आ रही है और किशन की गोद मे सर रखने का बोलना और कहना किशन थोड़ा मेरा सर दबा दे तो मे सो जाती हू और तू चाहे तो तू भी यही सो जाना और फिर तू सोने का नाटक करना जब तक की किशन तेरे टॉप के अंदर हाथ डाल कर्टेरी चुचियो को मसल्ने ना लग जाए और फिर कसमसाते हुए किशन का खड़ा लंड पकड़ लेना बस तेरा काम हो जाएगा. लेकिन भाभी मुझसे यह सब हो पाएगा संध्या अरे तू बिना डरे यह सब करना देखना किशन कैसे एक अग्यकारी भाई की तरह तेरी सब बात मानेगा और रात भर मे तुझे मस्त कर देगा. भाभी की कामुकता भरी बाते सुन कर आकृति की चूत फिर से पानी छोड़ने लगी. संध्या अब बाहर जा चुकी थी और आकृति किशन के लंड की कल्पना मे डूबी अपनी चूत सहलाकर मन ही मन बहुत खुश हो रही थी और रात की कल्पना से ही उसका पूरा जिस्म मस्ताने लगा था. इधर संध्या ने किशन को सब समझा दिया और उससे कहा जब तक संध्या सोने का नाटक करे तब बिना डरे उसकी टॉप मे हाथ डाल कर कस कस कर उसकी चुचिया को मसलना शुरू कर्दे और केवल बनियान और पाजामा पहनकर ही आकृति के कमरे मे जाए अंडरवेर भी ना पहने. दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | किशन स्मार्ट था वह भाभी की सारी प्लॅनिंग समझ गया. दिन भर घर मे किशन और आकृति जब भी एक दूसरे से टकराते तो नर्मोल बिहेव करते लेकिन मन ही मन एक दूसरे के लंड और चूत की कल्पना करते रहते. रात के करीब 10 बजे जब सब अपने कमरे मे सोने चले गये तब आकृति ने किशन के कमरे की ओर कदम बढ़ा दिया. किशन भी आकृति के इंतजार मे ही बैठा था. आकृति जैसे ही दरवाजा खोलकर किशन के कमरे मे आई किशन बुक पढ़ने का नाटक करने लगा आज आकृति ने सिर्फ़ एक टॉप और स्कर्ट पहना था उसकी चूत बिल्कुल फूल गई थी किशन का लंड भी पाजामे मे तना हुआ था. अरे दीदी आप अभी तक सोई नही, किशन मुझे नींद रही आ रही थी सोचा तुम्हे बुलाकर कुछ बाते ही करते है इसलिए तुम्हे बुलाने आ गई चलो मेरे रूम मे बैठ कर थोड़ी देर बाते करेगे, किशन क्यो नही दीदी और किशन आकृति के साथ उसके रूम मे चल दिया आकृति ने अपने रूम का दरवाजा बंद कर लिया और दोनो भाई बहन बिस्तर पर चढ़ कर बैठ गये. दीदी नींद तो मुझे भी नही आ रही थी अच्छा हुआ आपने मुझे बुला लिया…..

कहानी जारी है …. आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे |

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