भाई ने अम्मी और हम बहनो को चोदा

मैं उस वक्त 19 साल की थी और अपने कॉलेज मे पढ़ती थी. मैं 5 फीट और 4 इंच की हाइट वाली सेक्सी लड़की हूँ, सुंदर जवान हूँ, रंग सांवला, और जिस्म गदराया हुआ है. मेरी चुची बड़ी बड़ी है और चूतर बड़े ही मतवाले हैं. मेरा भाई फारुख बहुत ही रिष्ट पुष्ट जिस्म का 6 फुट का जवान है, चौरी छाती, सुडोल टाँगें और लोहे जैसा कड़क 9 इंच का लंड है. मैं अपने भाई को बहुत प्यार करती हूँ. मेरी बेहन आर्या भी बहुत सेक्सी है, उसकी हाइट 5 फीट 5 इंच है, रंग गोरा, भारी चूतर, भरे भरे स्तन, पतली कमर. मेरा इश्क मेरी क्लास के एक लड़के शमीम के साथ चल रहा था और वो मेरे साथ छेड़ छाड़ करता था.

एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया क्यों कि उस दिन उस के घर मे कोई नहीं था. मैं वहाँ गयी तो उसने मुझे जाते ही पकड़ लिया और चूमने लगा. मेरे बूब्स दबाने लगा और मेरी साँसे आनी मुश्किल हो गयी. मैं बहुत ही उतेज़ित हो चुकी थी और मेरी चूत चुदवाने के लिए तडप रही थी. शमीम ने मुझे नगा कर दिया और मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा. वो अभी रगड़ ही रहा था कि उसका फॉवरा फुट पड़ा और उसका सारा पानी मेरी चूत पर गिर गया. मैने पुछा कि क्या हुआ तो वो बोला” मैं तो झाड़ गया हूँ” लेकिन मैं तो आग मे जल रही थी. शमीम ने मुझे वापिस घर भेज दिया. उसका मुह्न लटका हुआ था..

मैं घर चली आ रही थी और उपर से घने काले बदल आसमान मे छाए हुए थे. मैने घर में परवेश किया तो बारिश होने लगी लेकिन मैं तो आग मे जल रही थी. मेरा जिस्म दहक रहा था और मुझे लंड के सिवा और कुच्छ नहीं सूझ रहा था. घर में पहला कमरा फारुख का था जहा से अजीब सी आवाज़ें आ रही थी,
” अमायरा मेरी जान चूसो मेरे लंड को दीदी, तुम बहुत सेक्सी हो, एमरी बहना, अब चुदवाने को तैयार हो जाओ अपने भाई से” मैं हैरान हो कर देखने लगी. फारुख अपने मोटे लंड को निकाल कर मूठ मार रहा था. मैं समझ गयी के वो मेरे को इमॅजिन कर के मूठ मार रहा था. जब मैने अपना नाम उसके मुख से सुना तो दंग ही रह गयी.

मेरी चूत लंड के लिए पहले ही तरस रही थी. कामवासना इस हद बढ़ गयी कि मैं भाई बहन के रिश्ते को भूल गयी और फारुख के कमरे में चली गयी.” ये क्या कर रहे हो फारुख? मेरे नाम की मूठ मार रहे हो, तुझे शरम नहीं आती? मैं तेरी बेहन हूँ और तुम कल्पना में मुझे ही चोद रहे हो?” वो शर्मा गया और अपने लंड को ढकने लगा,” मैने उसे धमकी दी” मैं अगर ये सब अम्मी को बता दूं ‘ वो मेरे पैरों पर गिर के माफी माँगने लगा. मैं भी तो यही चाहती थी.

मैने उससे कहा ” एक शरत पर चुप रह सकती हूँ, अगर तुम अपनी बेहन को वाकई ही चोद कर ठंडी कर दो तो” उसका मुह्न खुला के खुला रह गया. मैने उसको पुछा” फारुख किया किसी लड़की की चुदाई की है” वो बोला” नहीं पर दिल बहुत करता है”मैने जवाब दिया ” तो फिर देर किस बात की है, मेरा यार तो हरामी नमार्द निकला अब देखें भाई कितना मर्द है”.

उस दिन भाई बहुत ही बेचैन था. मैं मटक मटक कर उसकी तरफ बढ़ी. ठंडी हवा चल रही थी. उसने मूड कर दरवाज़ा बंद किया, बाहर बारिश पूरे ज़ोरों पर हो रही थी और वो मेरे बूब्स की झलक देख रहा था. मैने अपनी कमीज़ उत्तर दी जिस से से मेरी छाती नगी हो उठी.

मैं उसके पास चली गयी और वो मुझे घूर कर देखने लगा. उसने हाथ बढ़ा कर मेरी चुचि पर हाथ रख दिया, मेरा मन धक धक करने लगा. मेरी चूत एक बार फिर पनिया गयी. मैने उससे कहा” फारुख अब अपने कपड़े भी उतार दो” वो बोला,” मेरा लंड तो तुम देख ही चुकी हो दीदी, चलो अपनी सलवार भी उतार दो ता कि मैं अपनी ज़िंदगी मे पहली बार चूत के दर्शन तो कर लूँ” मैने कहा” फारुख, झूठ क्यों बोलते हो. क्या तुम ने कभी चूत नहीं देखी?’ वो बोला’ सच दीदी, कभी नहीं’ मैने मज़ाक किया’ साले झूठ क्यों बोलता है, जब पैदा हुआ था तो अम्मी की चूत नहीं देखी थी?’ वो सकपका गया.’ वो तो है पर तब मैं छ्होटा था अब मैं मर्द बन गया हूँ.”

मैने कहा” चलो देखते हैं कितना मर्द बन गया है तू, क्या अपनी बेहन को चोदने के काबिल हो गया है के नहीं” उसने अपनी पॅंट और कमीज़ खोल दी और नंगा मेरे सामने खड़ा हो गया तो मेरे पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी. मेरी आँखें फटी की फटी रह गयीं क्योंकि, उसका लंड कम से कम 8 इंच का हो गा.बल्कि उसने मुझे भी पूरी तरह से नंगी कर दिया. मेरी नज़र उसके लंड पर गयी और सॉफ देखा के वो अभी अभी शेव कर के बाहर निकली थी.

मैं अपने आप को काबू ना रख सकी और मेरी चूत की हालत खराब होने लगी. मैं गरम हो कर बोली” भाई जान, अब मुझे चोद डालो ” वो बोला जल्दी का काम शैतान का, चलो तुम मेरे लंड को हाथ मे लेकर प्यार करो और मैं आपकी चुचि दबाता हूँ.” मैने आगे बढ़ कर उसे अपनी बाहों मे भर लिया. वो मेरे शरीर का स्पर्श पा कर तो पागल हो गया.मेरी चुचि को बेरेहमी से दबाने लगा. ” भाई धीरे से मेरा यह पहला चान्स है, प्लीज़ मुझे दर्द मत देना भाई’ मैने उसे ज़ोर से भींच लिया और उसके होंठों का चुंबन लिया, मेरे हाथ उसके लंड को सहलाने लगे.

वो मुझे किस करने लगा और हमारी साँसें उखरने लगी. मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती. लेकिन फारुख का तो कोई और ही इरादा था. उसने मेरी चुचि को मुह्न मे ले लिया और बच्चो की तरह चूसने लगा. मेरी हालत और खराब होने लगी. मेरी चूत में से पानी बहने लगा, फिर भाई ने अपना मुह्न मेरी चूत पर सटा दिया और चूमने लगा” ओह्ह्ह भाई ये कैसी आग लगा दी तुम ने मेरी चूत तो आग की तरह दाहक रही है इसको शांत कर दो मेरे भाई, प्लीज़” उसने मेरे मुह्न में अपना लंड डाल दिया और हम 69 पोज़िशन में एक दूसरे को चूमने लगे.

थोरी देर के बाद उसने अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया और उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ खाने लगा. वो कराह उठा” ओह्ह बहना, तैयार हो जाओ चुदने के लिए, तुम्हारा जिस्म अब चुदाई के लिए तैयार है और उसका लंड मेरी चूत पर दस्तक देने लगा,” क्या अपनी बहन को नहीं चोद दो गे भाई, आह, बहुत मज़ा आ रहा है भाईजान मैं तो तेरी चुदसी हो रही हूँ, फारुख भाई, मेरी आग शांत कर दो भाई, मुझे अपने लंड से ठंडा कर दो’ वो मेरे साथ लिपट गया. उसने मेरी चुचि चूमि और मेरे, निपल कड़े हो चुके थे और उसके हाथ मेरे चूतरो पर रेंग रहे थे.

भाई का लंड फूँकार उठा और वो अब रुकने वाला नहीं था. उसने मुझे बाहों मे उठाया और बेड पर लिटा दिया. उसका नंगा जिस्म मेरे सामने था और मैने अपनी आँखें बंद कर ली. वो मेरी चुचि चूसने लगा. ‘ओह भाई कितना आनंद आ रहा है और चूसो मेरी चुचि को भाई जान, पेल डालो अपने लंड को मेरी चूत मे आज तोड़ डालो मेरी सील को मेरे भाई”, मैं बोली ‘ उसने अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रख दिया और ज़ोरदार धक्का मारा.

मैं दर्द के मारे चीख पड़ी,” मेरी जान ही निकाल दो गे बेह्न्चोद धीरे से चोदो अपनी बेहन को, मुझे दर्द हो रहा है ” वो धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और उसका लंड मेरी चूत में आराम से जाने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा,”ओह भाई चोद डालो अपनी बेहन को आज मैं चुदवाने के लिए मर रही हूँ, पेल दो अपना लंड मेरी चूत में, मेरी चूत चुदने के लिए तडप रही है मेरा यार सला नमार्द ही निकला है’ वो लंड चूत में धकेल रहा था, उसका लंड पूरा मेरी गरम चूत में समा रहा था.

वो बोला” हाए मेरी बहना, तू कितनी अच्छी है, तेरी बुर कितनी प्यारी है, यह ले अपने भाई का लंड,चुदवा ले आज अपने भाई से, अब तेरा भाई तुझ में घुस गया है, मेरी रानी चुदवा ले अपनी चूत को’ मैं भी पूरी तरह गरम हो चुकी थी और चूतर उठा उठा कर लंड पेल्वा रही थी. वो मेरी छाती से चिपक कर चोद रहा था. कमरे से फ़चा फ़च की आवाज़ें आ रही थी. ” ओफफफ्फ़ चोदो भाई मुझे, मैं झरने वाली हूँ, मेरी चूत छ्छूटने को है, चोदो मुझे ज़ोर से भाईजान, मेरी चूत पानी छोड़ने वाली है, पेल दो अपना लॉरा मेरी चूत में, बेहन्चोद चोद दो मेरी बुर‘ वो भी झरने के नज़दीक था और जल्दी जल्दी धक्के लगा कर लंड मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगा” मैं भी झरने वाला हूँ मेरी बहन, तूने मुझे धन्य कर दिया, आज से तू मुझ से ही चुदाये गी मेरी प्यारी बहना, देख तेरा भाई तेरी चूत में अपना माल डाल रहा है, साली ज़ोर से धक्के लगा, साअली गश्ती, चुदवा अपने भाईजान से.’ हम दोनो एक साथ झाड़ गये तो मैं बोली” आज तो तूने मेरी आग भुजा दी है मेरे भाई आज के बाद मैं कभी उस नमार्द . शमीम के पास नहीं जाउ गी”

पहली बार फारुख से चुदवाने के बाद तो मैं उसके लंड की पूरी तरह से दीवानी हो गयी, और शमीम को मैने लगभग छ्चोड़ ही दिया. वो मुझे किसी ना किसी बहाने बुलाता रहता था और मैं उस को मिलने चली भी जाती थी. सारे सर्कल में मैं और शमीम प्रेमी प्रेमिका के संबंध से जाने जाते थे, लेकिन असल बात कुच्छ और ही थी.

असल प्रेमी तो मेरा भाई फारुख था जो मुझे जब मौका मिलता चोद लेता और मैं भी चुदाई की दुनिया में खूब जवानी के मज़े लेने लगी थी.. किसी को भी हम भाई बेहन के संबंधो की भनक नहीं थी. बस एक दिन जब अम्मी बाज़ार गयी हुई थी और नाज़ हॉस्टिल में पढ़ रही थी, मैं और फारुख बिस्तर में चुदाई के मज़े लूटने में लगे हुए थे तो अचानक अम्मी वापिस घर आ गयी. असल में अम्मी अपना पर्स भूल गयी थी.

जैसे ही वो घर में घुसी हम चुदाई में इतने व्यस्त थे के हमारा ध्यान ही नहीं गया, के कोई हमें देख रहा है. अम्मी कुच्छ देर हमे चुदाई करते हुए देखती रही, जबकि फारुख अपने लंबे लंड से मुझे निहाल करता रहा. मैं चुदाई में करहती रही जब की फारुख मुझे बे-रहमी से चोद्ता रहा. अम्मी चुप चाप बाज़ार चली गयी. हम को इस बात का पता ही ना चलने दिया के हमारा राज़ अब राज़ नहीं रहा.

उसी दिन रात को टेलीग्राम आया के अब्बू का इंतकाल हो गया था. वो कार आक्सिडेंट में मारे गये. मेरे अब्बू अमेरिका में रहते थे जहाँ के वो एक अच्छी नौकरी करते थे. अम्मी बहुत उदास थी. अम्मी ने हम दोनो को अपने पास बुलाया और बताया के अब अब्बू इस दुनिया में नहीं रहे. सारे लोग रोने धोने लगे और हमारी आर्थिक स्थिति भी अब काफ़ी कमज़ोर हो गयी थी.

दो दिन के बाद अब्बू के वकील ने हमारे घर आ कर अब्बू की वसीयत दिखाई जिसमे लिखा था कि अब्बू की जयदाद हम लोगों को तभी मिलेगी जब हम तीनो भाई बेहन अपनी 25 साल की उमर के अंदर अंदर पक्के तौर पर निकाह कर लेंगे और 25 साल की उमर तक कम से कम एक बच्चे को जनम दे देंगे.

हम में से अगर कोई भी ऐसा ना कर पाए गा तो उसे अब्बू की जयदाद से कुच्छ नहीं मिलेगा. हमारे लिए स्थिति बहुत ही मुश्किल और जटिल बन चुकी थी.

अंमिजान कुच्छ देर के बाद बोली” देखो बच्चो, मैं तुम दोनो के बारे में सब कुछ जान गयी हूँ. मुझे कोई एतराज़ नहीं है के फारुख काफ़ी टाइम से अमायरा को चोद रहा है. असल में मुझे खुशी है के अमायरा ने बाहर जा कर किसी से चुदवा कर हमारी बदनामी नहीं करवाई है. फारुख के लंड को देख कर मुझे खुशी हुई है के उसका लंड काफ़ी दमदार है. अब मेरी बात ध्यान से सुनो मेरे बच्चो, अब जब के तुम्हारे अब्बू दुनिया में नहीं रहे तो मुझे भी लंड की ज़रूरत पड़ती ही रहे गी. मेरा सुझाव है कि हम तीनो घर के अंदर ही आपस में चुदाई का खेल खेलें और बाहर किसी को शक ही ना हो, और इसी बीच में हम अमायरा के लिए लड़का और फारुख के लिए लड़की ढूंड लेंगे.

लेकिन यह लड़का, लड़की ऐसे होने चाहिए जिन को हमारे संबधों से कोई एतेराज़ ना हो, और हमें तुम्हारे अब्बू की सारी जयदाद भी मिल जाए,” मेरा मुह्न खुला का खुला रह गया जब अम्मी ने ये सब हम दोनो से कहा. अम्मी की उमर 45 साल के करीब थी और देखने में अभी काफ़ी जवान लगती थी. इस उमर में लंड से बिछड़ जाना कोई आसान काम नहीं था. मेरा मन ये सब सोच के उतेज्ना से भर उठा के अब से मैं और अम्मी दोनो ही भाई से चुदवा सकें गी. अम्मी ने मुझे बाहों में भर लिया और कस के मेरे होंठों को चूम लिया. अम्मी की चुचियाँ मुझ से बड़ी थी और चूतर भी ज़यादा भारी थे. मेरे हाथ भी अम्मी के दोनो, बूब्स पर टिक गये जब के अम्मी ने मेरे होंठों को किस करना जारी रखा. फारुख अपनी सीट से उठा और हम दोनो की तरफ बढ़ा.

वो अपने लंड को दबाते हुए बोला” अब्बू का मरना हमारे लिए कुच्छ अशुभ और कुच्छ शुभ साबित हुया है, मैं अब तुम दोनो के साथ चुदाई के मज़े लूट सकूँ गा पर साथ में वो वसीयत की शरत फ्री करने की भी टेन्षन है, पर अभी टेन्षन लेने की ज़रूरत नहीं है, अमायरा तुम तो मेरे लंड से चुद ही चुकी हो, आज ज़रा अम्मी की चूत का स्वाद मुझे ले लेने दो, देखो अम्मी की गांद कितनी मस्त है और चुचि कितनी कड़ी हो कर तन चुकी है, ” फारुख ने अम्मी की चुचि को कस के मसल दिया और अम्मी के मुह्न से अह्ह्ह्ह निकल गई. फारुख ने अम्मी के चूतर पर हाथ फेरा और अम्मी को किस करने लगा. अम्मी के मुह्न से कराह निकलने लगी.

अम्मी भी कई महीनो के बाद आज चुदने जा रही थी और वो भी अपने बेटे के जवान लंड के द्वारा. ” अमायरा तुझे चोदने के बाद तो में बेहन्चोद बन गया था और आज अम्मी की चूत चोदने के बाद मैं मादरचोद बन जाउ गा, देख अम्मी भी मुझ से चुदने के लिए बेकरार है, देख कैसे इसकी सलवार चूत वाली जगह से भीग गयी है, साली अम्मी भी बड़ी चुड़क्कड़ लग रही है मुझे, आज मैं उस चूत में अपना लंड पेलने जा रहा हूँ जिसमे से मैं पैदा हुया हूँ .
अमायरा तुम अम्मी की चुचि को चूस कर अम्मी को गरम कर दो तब तक मैं कुच्छ खाने पीने का बन्दो बस्त कर के आता हूँ, बस 15 मिनिट में वापिस आता हूँ.’ यह कह कर फारुख बाहर चला गया और मैने अम्मी की कमीज़ उतार दी और ब्रा के उपर से अम्मी की भरपूर चूचियाँ को मसल्ने लगी, अम्मी गरम होती गयी, मैने उसकी ब्रा भी उतार फेंकी.”

क्या तू मेरे सारे कपड़े ही उतार देगी क्या मुझे नंगा कर देगी साली, मैं तेरी मा हूँ, मुझे नंगा करते हुए तुझे शरम नहीं आती, अमायरा.” अम्मी बोली तो मैने उसकी सलवार भी खोल डाली और अम्मी पूरी नंगी हो गयी, मैने एक हाथ अम्मी की बुर पर रगड़ दिया और उसकी मस्तानी चूत पर हाथ फेर कर कहा’ अंमिजान, तुम तो नंगी होने से ही घबरा गयी, तब क्या होगा जब भाईजान अपना मोटा लंड तेरी चूत में पेल देंगे, उसका लंड सच में बहुत बड़ा और मोटा है, आज वो अब्बू की जगह तुम को चोदेगा और तुम को बहुत मज़ा आएगा.

देख तेरी चूत तो उसके लंड के स्वागत के लिए पहले ही पानी छ्चोड़ रही है, आज मैं भी मा को बेटे से चुदवाते हुए देखूं गी, आअज से फारुख तेरी चूत का भी मलिक बन जाए गा,” मैने अम्मी को कहा. ” मुझे शरम आ रही है यह संब करते हुए. मेरी बेटी, बात करनी एक बात है और असल में चुदाई करनी दूसरी बात है, मेरा तो हाल बुरा हो रहा है, ना जाने कहाँ चला गया है फारुख,”

थोड़ी देर के बाद अम्मी बहुत ही चुदासि हो गयी थी. इधर मुझे भी उतेज्ना होने लगी और मैने अम्मी की चूत को छेड़ना शुरू कर दिया. मेरा दिल करने लगा कि मैं अम्मी की चूत को चूम लूँ, उसमे जीभ डाल कर चोद डालूं.. मैने अम्मी की जांघों को खोल कर अपना मुह्न अम्मी की चूत के लिप्स के अंदर डाल दिया. उनका नमकीन रस मेरे मुह्न में आने लगा और वो उतेज्ना की सारी हद पार कर गयी. अम्मी ने अपनी गांद उपर उठाई और अपनी चूत मेरे मुह्न में थेल दी. अम्मी का छ्होला फरफ़राने लगा.

अम्मी की उंगलियाँ मेरे बालों से खेलने लगी और मुझे चूत चाटने के लिए कहने लगी. कोई 20 मिनिट्स के बाद जब फारुख कमरे में आया तो उसके हाथ में एक बॉटल विस्की की थी और साथ में तंदूरी मुर्गा और खरा सोडा. उसने सब समान टेबल पर रखा और अम्मी को बाहों में भर के बेतहाशा चूमने लगा. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और मुझे कहने लगा के मैं उसके लंड की मूठ मारू. मैने अपने हाथ उसकी जांघों पर फेरने शुरू कर दिए और उसके लंड को सहलाने लगी. अम्मी ने भी अब शरम त्याग कर फारुख की छाती पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

फारुख ने अब हम तीनो के लिए पेग बनाए, सोडा डाला और चिकन की टाँग पकड़ कर बोला. ” आज तो पहले शराब पीते है और फिर अपने घर की संपूर्ण चुदाई का प्रोग्राम बनाते हैं, अमायरा तू तो चुदाई का स्वाद मेरे साथ चख ही चुकी हो, आज पहले मैं अम्मी की चुदाई करूँ गा और फिर तेरी और उसके बाद तुम दोनो ही मुझ से मज़े लेते रहना. हम ने पेग अपने होंठों से लगाए और चुस्की लेने लगे. इस बीच फारुख के कपड़े मैने उतारने शुरू कर दिए. उसका लंड साँप की तरह फूँकार उठा. थोड़ी देर में ही हम सब पर नशा छाने लगा और अम्मी अपने आप पर काबू ना रख पाई. उसने फारुख के लंड को मुह्न में डाल कर चूसना शुरू कर दिया और फारुख भी चोदने के लिए बेकरार हो गया.

फारुख ने अम्मी के नंगे शरीर को सहलाया और चूत पर चुम्मा लिया और अम्मी को घोड़ी बना दिया. अम्मी की गांद हवा में उठी हुई थी और फारुख ने अम्मी की गांद पर हाथ फिराया और चूत में उंगली डाल दी” अहह फारुख अब मत तड़पाओ, मेरे लाल, मैं चुदवाने को तड़प रही हूँ, ज़रा अपना लंड मेरी प्यासी चूत में पेल डालो मेरे राजा बेटा, तेरी अम्मी को लंड चाहिए, आज तुम अपने अब्बू की जगह ले कर मुझे तृप्त कर दो मेरे राजा, मुझे वैसे ही चोद डालो जैसे तुम ने अपनी बेहन को तृप्त किया था, आज मेरी प्यास बुझा दो, मेरी चूत की आग शांत कर दो अपने लंड से मेरे राजा,’

फारुख ने अम्मी की गांद की तरफ से पोज़िशन ली और अपना लंड अम्मी के चूतरो के बीचो बीच ले कर पीछे से अंदर पेल दिया, अम्मी के मुह्न से एक चीख निकल गयी, ‘ अहह, कितना बलिष्ठ लंड है तेरा, मेरे राजा बेटा, आज अपने अब्बू को भूलने मैं मेरी मदद करो, तेरे अब्बू ने तो सारी उमर दूसरी औरतों के साथ मज़े लूटे हैं जब की मैं तो घर में उसके लंड का इंतज़ार ही करती रही, अब तुम अब्बू की कमी दूर कर दो मेरी चूत को निहाल कर दो मेरे राजा, आज से तू अपनी बेहन और अम्मी की जवानी का मालिक है, चोद देना हमें जैसे चाहो, जब चाहो, हम तेरी हैं, मुझे अपना लंड दे दो मेरे बेटे, मेरे मालिक,” अम्मी बिना मतलब के बोले जा रही थी. मैने भी आगे बढ़ के भाई के लंड को पकड़ कर अम्मी की चूत में धकेल दिया और फारुख लगा धक्के मारने और अम्मी अपनी गांद को पीछे की तरफ उच्छालने लगी. फारुख का लंड पूरा अम्मी की चूत में समा गया.

मैं खड़ी हो कर अपनी चुचि फारुख के मुह्न में डालने लगी, और फारुख नीचे से अम्मी को चोदने लगा और उपर से मेरी चुचि को चूसने लगा. मेरी साँसें मुश्किल से चल रही थी, मेरा छ्होला भड़क रहा था. फारुख ने चुदाई की स्पीड और तेज़ कर दी और वो अम्मी की चुचि को पकड़ कर दबाने लगा.” अम्मी तुम तो बहुत टाइट हो, मुझे पता ही नहीं था कि अम्मी एक चुड़ाकड़ छिनल है, अम्मी तेरी चूत तो बहुत टाइट है, अम्मी तेरी चूत ने मेरे लंड को कैसे जाकड़ रखा है, तेरी चूत तो क़िस्सी कुँवारी लड़की जैसी है, सच बहुत मज़ा दे रही है तेरी चूत मुझे, ” मैने अब अपनी पोज़िशन बदल ली और अम्मी के नीचे लेट गयी और अम्मी की चूत चाटने लगी.

अम्मी की चूत के अंदर फारुख का लंड आ जा रहा था और उसमे से रस टपक रहा था, जिसे मैने चाटना शुरू कर दिया और अम्मी की चूत पर अपनी ज़ुबान रगड़नी शुरू कर डाली जिस कारण अम्मी और भी जोश में आ कर चुदवाने लगी और शोर मचाने लगी,’ पेल दो मेरी चूत में अपना लंड ज़ोर से फारुख, मेरी चूत में तो आग लगी हुई है, अपने मस्त लंड से इसको बुझा डालो, अमायरा तेरी ज़ुबान तो ग़ज़ब ढा रही है, मैं तो झड़ने वाली हो गयी हूँ, बेटा ज़ोर से चोद डालो अपनी अम्मी को, तेरा लंड तो तेरे अब्बू से भी ज़यादा दमदार है.

मैं तेरे लंड को अपनी चूत में लेकर धन्य हो गयी, मेरी चूत अपना पानी छ्चोड़ रही है, पेल डालो अपनी अम्मी को मेरे रजाआआअ, ओह, मैं मरी मैं झडियी, चोदूऊ, मेरी चूत झाड़ रहियीईई है,’ फारुख ने ज़ोर से धक्के मारने जारी रखे और अम्मी झाड़ कर निढाल हो गयी, उसकी चूत से फारुख का लंड निकल आया, जब कि वो अभी भी कड़ा था और अभी नहीं झाड़ पाया. फारुख ने मेरी तरफ देखा और आँखों आँखों में इशारा किया. मैने अपने आप को पूरी तरह नंगी कर दिया और फारुख की गोद में जाकर बैठ गयी.

अम्मी ने हम दोनो की तरफ देख कर कहा” बेटे, अब तुम अपने लंड का पानी अपनी बेहन की चूत में ही गिरा दो, मैं तो अब तेरा साथ और नहीं दे पाउ गी, मेरी तो चूत का कचूमर निकाल दिया है तेरे हल्लाबी लंड ने, तू वाकाई ही मर्द है, मेरे राजा, अब अपनी मर्दानगी से अपनी बेहन को निहाल कर दे.”

फारुख ने मेरी चुचि को मुह्न में ले कर चूसा और मेरी चूत तो पहले ही पनिया चुकी थी. उसने मुँझे बिस्तर पर चित लेटया, मेरी जांघों को उपर उठाया, मेरी चूत पर अपना हाथ फिराया, जिस कारण मेरी चूत पानी से चिपचिपा गयी. उसका लंड मेरी चूत के दरवाज़े पर दस्तक देने लगा. फारुख बोला,” बहना अब में और वेट नहीं कर सकता, मेरा काम आधा तो पहले ही हो चुका है, अब अपनी मस्त चूत से मेरे लंड का पानी निकाल दो, मेरी अमायरा बेहन, अब मेरे लंड का स्वागत अपनी प्यारी चूत में कर डालो, आज शराब के कारण मेरा लंड नहीं छूट रहा है, चल खोल अपनी चूत मेरी बहना, ले लेने दो मुझे अपनी चूत के मज़े,”

मैने भी टाँगें खोल कर फारुख को निमंत्रित करते हुए कहा” मेरे भाई, मैं तो पहले से ही तेरी जवानी की गुलाम हूँ, चोद डाल अपनी बेहन को जिस तरह तेरा दिल चाहे, मैं तेरे लंड की हर ज़रूरत पूरा करने के लिए तय्यार हूँ, पेल दो अपना लंड अपनी बेहन की चूत में, अब से मैं तुम्हारी हूँ, मेरे राजा भैया,”

फारुख ने एक मिनिट भी इंतज़ार नहीं किया और अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया. लंड माखन की तरह मेरी चूत में दाखिल हो गया किओं के मेरी चूत से पानी एक नदी की तरह बह रहा था. फारुख पहले से ही गरम था और पूरे ज़ोर से चोदने लगा, उसने अपने हाथ मेरी गांद पर रखे और कस के पकड़ लिया.

कोई 10 मिनिट में ही मैं भी झड़ने को तय्यार हो गयी और मेरी चूत पानी छ्चोड़ने लगी,” मैं झडियी भाई, अब मैं नहीं रुक सकती, मेरी चूत पानी छ्चोड़ गयी है, तुम अपना लंड निकाल लो, अम्मी मैं मरी,” फारुख का लंड अब भी वैसे ही खड़ा था, वो गुस्से में बोला,” साली दो दो मस्त चूतो के बावजूद मैं नहीं झाड़ पा रहा हूँ, अमायरा चल मेरा पानी निकाल दे क़िस्सी तरह, मेरा कुच्छ करो मेरी बहना, मैं क्या करूँ इस मस्त लॉड का?” अम्मी ने मुझ को कहा,” अमायरा फारुख से कभी गांद मरवाई है क्या?” मैने ना में जवाब दिया.

अम्मी ने कहा” बेटे, चल आज मैं तुझ से गांद मरवा कर तेरी गरमी निकाल देती हूँ, क्या मेरी गांद का स्वाद चखे गा तेरा लंड?” फारुख की आँखों में एक वहशत सी नज़र आने लगी. वासना की आग में देहक्ते हुए फारुख ने अम्मी को फिर से घोड़ी बनाया और अपने लंड को क्रीम से लिपलीपा करने के बाद गांद में पेल दिया, अम्मी की चीख निकल गयी और वो दर्द के मारे चिल्ला पड़ी, ‘ मर गयीईइ मेरी मा, यह क्या किया मैने, तेरा लंड तो किसी लकड़ी के डंडे की तरह मेरी गांद को फाड़ रहा है, मैं तो भूल ही गयी थी कि तेरे अब्बू का लंड छ्होटा सा था जिस के साथ मेने गांद मरवाई थी, लेकिन मैं तो भूल ही गयी थी कि मेरे बेटे का लंड तो बहुत ज़ालिम है, आराम से चोद मेरी गांद बेटे, बहुत दर्द हो रहा है,’

फारुख का लंड अम्मी की टाइट गांद में जा कर अटक गया और वो धीरे धीरे धक्के मारने लगा,” उफ़फ्फ़ कितनी टाइट है तेरी गांद अम्मी, मैने कभी गांद नहीं मारी अभी तक, लेकिन बहुत मस्त है तेरी गांद अम्मी जान, अब मैं भी ज़यादा देर ना रुक सकूँ गा, मेरा झड़ने को ही है, चोद लेने दो अपनी गांद मुझे, बहुत ही मस्त हैं तेरे चूतर अम्मी, क्या बात है तेरी मस्त चुदाई की, देख मेरा रस तेरी गांद में गिरने को है, ले लो मेरा सारा रस अपनी गांद में, मैं झाड़ रहा हूँ, अम्मी,” इसके साथ ही फारुख अम्मी की गांद में झाड़ गया, उसका रस अम्मी की गांद में गिर गया और अम्मी के चूतरो पर फैल गया जब फारुख ने अपना लंड अम्मी की गांद से निकाला.

एक छप की आवाज़ आई और फारुख अम्मी की पीठ पर औंधे मुह्न निढाल हो कर गिर गया. हम तीनो सारी रात बेहोश सोते रहे. हम चुदाई कर के थक कर मस्त थे और किसी को किसी बात की सुध ना थी. इस तरह हम तीनो की चुदाई का खेल शुरू हुआ जो आज तक चल रहा है और जिसमे काफ़ी कुच्छ और भी शामिल हो चुका है जिस कारण फारुख आज दो नहीं बल्कि बहुत सी औरतों की चुदाई कर के अपनी मर्दानगी का सबूत दे रहा है और जन्नत के मज़े लूट रहा है और हमें भी मस्त कर रहा है.