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चचेरी बहन के साथ मामा की लड़की भी चुद गयी

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

चचेरी बहन की कुवारीं गांड की चुदाई

हेल्लो मित्रो कैसे हो आप सब आशा करता हु आप अभी अपने अपने लंड और चूत पर हाथ लगा चुके होंगे तो चलिए देर किस बात की सुरु करते है आगे की कहानी और फिर आगे .. हम दोनों ने खाना खाया और फिर सो गए। अगली सुबह भी उसको दर्द था पर जिसके कारण हम दोनों उस ट्रिप पर फिर से सेक्स नहीं कर सके। अर्चना अब मुंबई में ही थी। मैंने कुछ महीनो के बाद उससे मिलने का प्रोग्राम बनाया और मुंबई पहुच गया। मैं जैसे ही उसके घर पंहुचा तो मैं आवाक रह गया उधर मेरी मामा की लड़की नेहा आई हुई थी वो हम दोनों से 2 साल बड़ी थी और वो इतनी सुन्दर थी की मुर्दा भी उसको चोदने के लिए जिन्दा हो जाये। मैं तो कब से उसे चोदना चाहता था पर वो बड़ी थी और कोई मौका भी नहीं मिला था।

मैं तो ये सोच कर गया था की जाते ही अर्चना की एक बज्जी ले कर रहूगा। मैं पूरी तरह से तैयार था पर नेहा को देखते ही सारा फितूर उतर गया और मैं अन्दर गया। मैं आप सब को बताना भूल गया की अर्चना एक फ्लैट किराये पर ले कर रह रही थी और उसके साथ उसकी 1 सहेली और थी जो कुछ दिनों के लिए घर गयी थी इसलिए ही मैं मुंबई आ गया था मजे करने ……… पर अपने नसीब में मजे नहीं थे।

मैं अन्दर गया और नेहा से बोला : अर्चना किधर गई है और तुम कब आई?

उसने मुझे बताया की वो आज सुबह ही आई है और अर्चना अपनी किसी सहेली को छोड़ने गई है। मैं समझ गया की वो अपनी रूममेट को ही छोड़ने गई होगी।

मैं : नेहा, तुम कितने दिन के लिए आई हो तो उसने कहा मैं 15-20 दिन मुंबई में रुकने वाली हु। अब मेरी बची खुची उम्मीद भी टूट गई और मेरा चेहरा उतर गया पर नेहा की बात जारी थी।

नेहा :- मुझे मुंबई में ऑफिस का काम है इसलिए इधर आई हु और शायद मुझे कल ही ऑफिस की तरफ से गेस्ट हाउस मिल जाए।
यह सुनते ही मेरे लंड ने फिर से सपने सजाने शुरू कर दिए थे तभी अर्चना घर में आई और मेरे गले लग गई। हम दोनों कई महीनो के बाद मिले थे और इस बार के लिए दोनों ने ही कई सारे प्लान बनाये थे और दोनों ही जानते थे की नेहा के रहते ये पुरे नहीं हो सकते। वो जल्दी से मुझसे अलग हो गई पर मैं नहीं होना चाह रहा था। तभी नेहा का फ़ोन बजा और वो दुसरे कमरे में चली गई। उसके जाते ही मैंने अर्चना से पूछा

मैं : तूने मुझे इसके बारे में क्यों नहीं बताया ?

अर्चना : मुझे भी किधर पता था वो आज सुबह ही बिना बताये आ गई मैं भी क्या करती और तुम भी तब ट्रेन में थे तो बताना या ना बताना बराबर था।
मैं : इसने सारे प्लान पर पानी फेर दिया और अब अगली बार तो जल्दी से भी आने की इजाजत नहीं मिलनी। यह कहते हुए मेरा मुह उतर गया।
अर्चना : मेरा भी तेरे जैसा हाल है, मुझे भी इधर कोई अच्छा लड़का नहीं मिला और मुझे भी उतनी ही लगी है जितनी तुझे।
तभी नेहा कमरे से बहार आती है |

नेहा : क्या बात कर रहे हो गुपचुप में

मैं : कुछ नहीं मैं इसे बता रहा था की तुम तो शायद कल ऑफिस के गेस्ट हाउस में चली जाओगी।

नेहा : अरे मेरे प्यारे भाई, मैं कही नहीं जा रही यही रुकुगी तुम दोनों के पास मैंने ऑफिस वालो को मना कर दिया (अब मेरी और अर्चना की हालत हिरोशिमा और नागासाकी जैसी हो गई बम गिरने के बाद वाली). और तो और मेरा टाइम भी अर्चना के कॉलेज टाइम के बराबर है मैं इसको अपने साथ ही कैब में ले भी जाऊगी और फिर वापसी में भी।

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मुझे ऐसा लग रहा था जैसे की उसने बिना लंड के मेरी गांड मार दी हो फिर उसमे निम्बू मिर्च लगा रही हो।

अब हम तीनो साथ में थे पुरे 4 घंटे तक तो मुझे अर्चना से बात करने का मौका ही नहीं मिला उसके बाद हम पास में ही माँल में घुमने गए थे तब नेहा जब चेंज रूम गई तभी हमारी बात हुई।

अर्चना : बहन की लौड़ी, बाप का राज़ समझ कर आ गई वो भी बिना बताये हमारे प्लान की माँ चोदने।

मैं : कैसे भी कुछ करके 1 दिन के लिए कॉलेज ऑफ कर दे ताकि मैं तुझे छू तो सकू।

अर्चना : वो नहीं हो सकता मेरे कॉलेज में भी तो अभी असाइनमेंट चल रहे ह

अब मेरा मूड और दिमाग दोनों ही ख़राब हो गए थे। हम लोगो ने बाहर खाना खाया और फिर घर आ गए। अब सोने की बारी आई तो फिर नेहा ने अपनी टांग अड़ा दी और बोली : हम दोनों रूम में सो जाते है तू बाहर हाल में सो जा।
मैं कुछ कह भी नहीं सकता था तो मैंने कहा ठीक है और फिर मैंने बैग से लैपटॉप निकला और गेम शुरू कर दिया।
अर्चना ने कहा : इधर वाई फाई है ला मैं ओं कर दू और मेरा लैपटॉप लेकर बगल में बैठ गई नेहा हमारे सामने थी। अर्चना ने उसपे टाइप किया आज तो सोजा कल का कुछ देखते है। मैं भी कोई प्लान बनती हु तू भी बना कुछ तो रास्ता निकलेगा मेरे जानू।

फिर उसने वाई फाई ओं कर के नेहा का हाथ पकड़ा और अन्दर ले गई। अर्चना का फ्लैट 1 बेडरूम + हाल ( जिधर मैं अकेला पडा था) था। मैंने कई देर तक प्लानिंग करने की कोशिश की कुछ नहीं हुआ फिर मैंने सेक्सी कहानियो की साईट खोल ली और पड़ने लगा। उनमे से एक कहानी थी जिसमे 4-5 अनजान लोग ताश का गेम खेलते है जो बाद में काफी कामुक हो जाता है। मुझे अब कुछ आस दिखाई दे रही थी। मैंने अपना लंड बाहर निकला और मुठ मारने लगा। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है और इस कहानी का शीर्षक चचेरी बहन के साथ मामा की लड़की भी चुद गयी है | फिर झड गया तो वीर्य को अर्चना की सहेली का पजामा जो उधर ही पड़ा था उससे साफ़ करके सो गया सुबह उठा तो देखा 9 बज गए थे और वो दोनों जाने को तैयार थी।

वो दोनों निकल गई मैं भी नहाने धोने चला गया करीबन 1-2 घंटे बाद मैंने अर्चना को फ़ोन किया और उसे सारी बात समझा दी। और मैंने पीछे से अपनी तरफ से तैयारी कर ली और शाम होने का इंतज़ार करने लगा।

नेहा ने अर्चना को 4 बजे ले लिया। रास्ते में अर्चना ने मेरे कहे अनुसार काम शुरू कर दिया।
अर्चना : दीदी, एक बात बताओ क्या आप पीती हो?
नेहा : क्या मतलब?
अर्चना : आप शराब पीती हो क्या?
नेहा : क्यों?
अर्चना : आज मेरी एक सहेली बोल रही थी की वो कल 4-5 पेग खीच गई और फिर गाडी भी चला ली। मुझे तो वो झूटी लगी मैं तो 3 पेग में ही टल्ली हो जाती हु।
नेहा : हाँ मैं भी इतनी ही ले पाती हु, पर किसी किसी की कैपेसिटी होती है।
अर्चना : आज अपन भी ट्राई करे?
नेहा : पागल घर पर वो भी तो है?
अर्चना : उसके साथ तो मैं पी चुकी हु उसकी कोई प्रॉब्लम नहीं है।
नेहा : कब पी तुम दोनों ने? और हम सब किधर थे उस वक़्त?
अर्चना : अरे जब एडमिशन के लिए आये थे तब। आप लोगी क्या मैं तो आज लगा कर ही रहूगी।
नेहा : चल ठीक आज रात को लेते है बोल कौनसी लेती है?
अर्चना : मेरे घर पे बोटल पड़ी है।
घर पर मैं पहले से ही बोटल ले आया था।
अर्चना : मैं नॉन वेज का भी आर्डर दे देती हु। आप को चलेगा ना?
नेहा : हाँ कोई दिक्कत नहीं पर मेरे लिए वेज आर्डर कर देना।
अर्चना ने फ़ोन करके आर्डर दे दिया।
वो घर पे आये घर आते ही अर्चना बोली आज तो पार्टी करते है।
मैंने नाटक करते हुए नेहा की तरफ देखा। नेहा बोली : इसने मुझे बता दिया है ऐसे क्या देख रहा है।

मैंने ग्लास निकाले और अर्चना ने बोटल ( मैंने उसे जगह बता दी थी). फिर हम बैठे और मैंने 3 ग्लास में पेग बनाये और पानी डाल कर पेग तैयार कर दिया।
नेहा : यार मुझे तो कोल्ड ड्रिंक में चाहिए पानी से चढ़ जाती है।
मैं : ले कर आता हु(अपना पेग निचे रखा और खड़ा होने लगा )
अर्चना : किधर जा रहा है बैठ निचे, दीदी आप भी ना। उसे पीते को उठा रही हो। पी लो चढ़ भी गई तो बस हम ही तो है क्या घबराना।( ये सब हमने पहले से ही तय कर रखा था )
नेहा : ठीक है। पर मैं कुछ उल्टा सीधा कर दू तो मुझे दोष न देना।
फिर हमने पेग उठाये और चीयर किया। अर्चना बोली : एक ही बार में पीना पड़ेगा जो नहीं पिएगा उसको एक पेग एक्स्ट्रा वो भी नीट ….
हम तीनो ने पेग खीच लिया। मैंने दूसरा भी बना दिया और बोला अब आराम से। फिर मैंने लैपटॉप पर गाने चला दिए और हम बात करने लगे। तभी खाना भी आ गया। नेहा ने खाना लिया बिल दे दिया। नेहा पहले पेग में ही हिल गई थी पहली बार पानी में वो भी एक साथ …. उसके लिए काफी था। उसकी चाल ने बता दिया था अब मैं और अर्चना अपनी कामयाबी पे मुस्कुरा दिए।
फिर करीबन 30 मं तक दूसरा पेग चलता रहा। दुसरे पेग के बाद नेहा पे दारु का सुरूर था पर अर्चना क्युकि आये दिन पीती थी वो होश में थी उसने मुझे आँख मारी।
मैंने प्लान का दूसरा चरण शुरू किया।
मैं : क्या यार कैसी बोरिंग पार्टी हो रखी है …
नेहा : हाँ यार कुछ करते है ..
अर्चना : क्यों ना ताश खेले तीन पत्ती …
मैं और नेहा हाँ सही है।
मैंने बेग से ताश निकल ली।
मैं : खेलने से पहले रूल्स …. कोई भी गेम नहीं छोड़ सकता अगर पैसे ख़त्म तो जीतने वाला जो कहे वो करना पड़ेगा। और एक्स्ट्रा पैसे भी नहीं ला सकता सब 200-200 रूपये ले कर बैठगे और पहली चाल 10 की होगी।
अर्चना और नेहा ठीक है।

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गेम शुरू हुआ पहला गेम में सबके पत्ते बेकार थे और सिर्फ 30 रूपये की बोली थी जो j से नेहा ने जीती .
अगली बारी में मेरे और नेहा के पत्ते अच्छे थे।
मेरे पास 2 इक्के थे और उसके पास 2 बेगम तो गेम लम्बा चला और मैं 100 रूपये जीता।
अब नेहा के पास 150 ही बचे थे अगली बारी में मेरे पास फिर 2 इक्के थे और 1 दुग्गी …. मैंने 200 की चाल चल दी।
अर्चना के पास भी 2 इक्के थे और 1 बादशाह उसने मुझे हरा दिया। अब मेरे पास सिर्फ 90 रूपये बचे थे और नेहा ने पेक कर दिया था उसके पास 140 थे।
अगली बाजी में नेहा जीती ….. कुछ देर तक युही चलता रहा फिर मैं अपने सारे पैसे अर्चना से हार गया।
अगली बारी फिर मैं हारा और नेहा जीत गई। अब नेहा को मुझे सजा देनी थी।
नेहा : तू मुर्गा बन जा …
मैं : ये क्या है मैं नहीं बनता (मेरी चाल थी)
अर्चना : करना तो पड़ेगा रूल तूने ही बोला था चल बन जा …..
मैं गया और 1 मिनट के लिए मुर्गा बन गया। नेहा कुकड़ू कू बोल
मैं : मुर्गा गुंगा है।
फिर गेम शुरू हुआ मैंने कहा नेहा तुझे मैं देख लुगा। अबकी बार मैं जीता मेरे पास फिर से 40 रूपये थे।
अगली बाज़ी में मेरे पत्ते खराब थे सो मैंने पेक कर दिया।
पर नेहा के पास इक्का बादशाह और बेगम थी उसने आल इन कर दिया।
अर्चना के पास भी यही थ पर कलर में वो जीत गई।

कहानी जारी है …आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करें..

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