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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

चचेरी बहन की कुवारीं गांड की चुदाई

गतांग से आगे..

अर्चना ने अपनी टाईट जींस को धीरे धीरे से उतारना शुरू किया उसकी जींस इतनी टाईट थी की उसकी पेंटी भी थोड़ी सी नीचे हो गई मेरा लंड अब मेरे बॉक्सर को बम्बू बन कर तम्बू बना चूका था अब मेरा हाथ अपने लंड को सहला रही थी और नजर अर्चना की नंगी होती जवानी को, मैंने ऊपर से लंड पकड़ रखा था! अर्चना ने जींस उतारना रोका और पेंटी को ऊपर खींचा और फिर से जींस उतारने लगी जैसी ही उसकी जींस जांघो तक आई मेरी आँखे फटी रह गई उसकी पेंटी नेट वाली थी जिस पर एक फूल था जो उसकी गांड के छेड़ को छुपा रहा था बाकि उसके रसीले पिछवाड़े नजर आ रहे थे, वो जींस को उतारने के लिए निचे झुकी और मैंने बॉक्सर में हाथ डालकर लंड हिलाना शुरू कर दिया! तभी वो एक दम से पलटी और उसने मुझे मुठ मारते देखा और बोली : कमीने हरामी मैं तेरी बहन हु।

ये सुन कर मैं होश में आया और मेरा लंड जोश खोने लगा मुझे लगा की वो बुरा मान गई है। तभी वो हंसी और बोली : मैं समझती हु तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं और पहली बार किसी लड़की को देख रहा है चल मार ले मुठ मुझे देख कर। यह सुनते ही मेरे लंड में फिर से जोश भर गया और मैं उसके पास गया और घुटने के बल बैठ गया और उसकी पेंटी में से गांड और चूत देखने लगा

मैं आपको बता दू उसने नेट वाली पेंटी पहनी थी जो की बहु छोटी थी उस पर आगे की तरफ एक कपडा था जो उसकी चूत को छुपा रहा था और वो सिर्फ उसकी चूत को कवर करते हुए पीछे भी उतने ही हिस्से मे थी यानि उसके चुतड पेंटी से बहार थे मैं उनको आँखे फाड़ के देख रहा था तभी वो बोली : ऐसे क्या देख रहा है खा जायेगा क्या और हसने लगी फिर बोली चल तू क्या याद रखेगा चल छू ले पर सिर्फ पीछे से आगे छूने की कोशिश की तो मैं कभी तुझसे बात नहीं करुगी मैंने बिना कुछ बोले अपना हाथ उसके चुतड पे रख दिया और उनको सहलाने लगा उन पर अपने हाथ फिरने लगा और फिर अपना मुह उसके चुतद पे लगा दिया

उसके मुह से एक सिसकारी निकली और उसके पुरे बदन में एक हरारत हुई मैं अपने काम पे लगा हुआ था तभी मैंने अपना हाथ को पेंटी में डाला तो उसने अपने चुतड पीछे की तरफ कर दिए मैं समझ गया | आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है और इस कहानी का शीर्षक चचेरी बहन की कुवारीं गांड की चुदाई है | अब उसको मजे आने लगे है और वो बहक रही है मैंने जैसे ही अपनी ऊँगली को उसकी गांड में डालने लगा वो जोर से चीखी और दूर खिसक गई! वो बोली: तुझे मना किया था मेरी गांड में क्या कर रहा था अगर तुझे छूना है तो ठीक वरना दूर रह मुझसे।

अब मैं पीछे नहीं हटने वाला था मैं जानता था की अगर अभी नहीं तो कभी नहीं, मुझे अपनी गलती का भी अहसास था की वो गांड मरवाने के लिए तैयार नहीं है और अब हर काम उसकी रजामंदी से और सोच कर करना था। मैंने उसे सॉरी बोला और सॉरी के बहाने उसके गालो को चूमने लगा वो बोली ओके अब छोड़ मुझे मैंने कहा एक बार और प्लीज उसने कहा ओके। मैं उसके चहरे से अपना मुह सिर्फ 1 इंच पीछे किया और धीरे से निचे बैठने लगा मेरी सासे उसके बदन पर पद रही थी जो उसे उत्तेजित कर रही थी मैं जैसे ही उसके बूब्स पे पंहुचा मुझे बूब पर वो लिखा हुआ याद आ गया जो की नाम मात्र का बहार दिख रहा था मैंने अपना हाथ उसके बूब पर रखा और पुचा तूने बूब्स पे टैटू बनवाया है उसने कहा नहीं मैंने झट से उसके बूब को बहार निकल लिया और कहा ये क्या है उसने कहा ये तो मैंने पेन से लिखा था |

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मैंने कहा मुझे तो ये टैटू ही लगा रहा है, वो बोली: नहीं ये मिट सकता है मैं तो बस इसी का इन्तेजार कर रहा था और उसके बूब को निप्पल से पकड़ कर खींचा और दुसरे हाथ से मिटने लगा और वो मेरी इस हरकत से फिर से उतेज्जित हो गई कुछ देर बाद मैंने कहा ये ऐसे नहीं उतरेगा और उसके बूब को मुह में भर लिया जैसे की मैं उसे गिला कर के मिटा रहा हु अब मैंने अपनी जीभ को उसके बूब पर फिरना शुरू किया तो उसने जोर जोर से सिस्कारिया लेने शुरु कर दी और अपने हाथ से मुझे अपने बूब पर दबाने लगी मुझे समझ आ गया की वो बहक चुकी है तो मैंने एक निप्पल को चूसने शुरू कर दिया और दुसरे बूब के निप्पल को हाथ से निचोड़ने लगा। फिर उसने ही अपने हाथ पीछे करके अपना ब्रा खोल दिया ताकि मुझे दिक्कत ना हो।

मैंने अब आगे बढने की सोची और एक हाथ जो खाली था उसे उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चूत पर रखा वो झट से पीछे हो गई, मुझे लगा गई भेंस पानी में शायद फिर से जल्दी कर दी और अब कुछ हाथ नहीं आएगा। वो बोली : हरामी कमीने स्सरे मजे खुद ही ले ले, चल निकाल अपना लंड और मुझे होठो पर जोर जोर से चूमने लगी क्या मजा आ रहा था मैं उसके चुतड और बूब को हाथो से मसल रहा था करीब 5-10 मिनट बाद हम अलग हुए वो झट से मेरे लंड पर टूट पड़ी और उसे कैद से आजाद कर के मुह में ले लिया और चूसने लगी ये आज तक की सबसे बहतरीन फीलिंग थी। थोड़ी देर में मैं उसके मुह में ही छुट गया उसका मुह मेरे वीर्य से भर गया और वो उसे मजे से पी गई फिर उसने अपनी पेंटी उतारी तो मैंने देखा उसकी चूत बिलकुल साफ़ थी रात की तरह झाते नहीं थी वो बोली चल चूस मैं आज्ञाकरी की तरह उसके पैर में बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा वो बहुत जोर से चिलाने लगी : हाँ ऐसे ही चूस ले कामिनी बहुत दिन से आग लगी है आज ठंडी कर देना मुझे।

मेरा लंड जो अभी उसने झाड़ा था फिर से सर उठा चूका था वो भी जल्द ही झड गई अब मैंने उसे लेता दिया और उसे छोड़ने के लिए उसपे चड़ने लगा।

पर मेरी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था कोई लोगो की आवाज आने लगी यह सुन कर वो झट से उठ गई क्युकी दीवार तीन तरफ ही, वो झट से अपने कपडे उठा कर पेड़ के पीछे चली गई और कपडे पहनने लगी। मैंने देखा की कुछ लोग नदी के पार आकर कुछ करने लगे और मैं उनके जाने का इंतज़ार करने लगा पर वो उधर ही बैठ कर ताश खेलने लगे। मैंने भी अपने कपडे पहने और उनको गाली देने लगा मैं जैसे ही पेड़ के पीछे गया उसने मुझे चूमा और बोली चल गुस्सा मत कर फिर कभी कर लेना, देख ये जगह ठीक नहीं है। मैं खुश हो गया की चलो वो तैयार है चुदाने के लिए और हम फिर से घर के लिए निकल पड़े।

घर के रस्ते में अर्चना मुझसे चिपक कर बैठी रही उसके हाथ मेरे लंड को सहला रहे थे जैसे ही घर पहुचे पापा गेट पर हमारा इंतज़ार कर रहे थे। पापा ने मुझे कहा : किधर रह गए तुम और मोबाइल क्यों नहीं उठा रहा था मेरा? आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है और इस कहानी का शीर्षक चचेरी बहन की कुवारीं गांड की चुदाई है | मैंने कहा सॉरी पापा मोबाइल इसके बैग में रख दिया था तो आवाज सुनाई नहीं दी। पापा ने कहा: चलो दोनों जल्दी से अपना सामान पैक करो तुम दोनों को अभी 8 बजे प्लेन से मुंबई जाना है। मैं और अर्चना दोनों हैरान थे और एक दुसरे को देख रहे थे तभी पापा ने कहा : अबू धाबी से मोसा जी का फ़ोन आया था कल इसका इंटरव्यू है तो मैंने तुम दोनों का इन्तेजाम कर दिया है तुम रात को 10 – 10.30 बजे मुंबई होगे उधर ही कोई होटल ले लेना और सुबह इसको कॉलेज में इंटरव्यू दिला देना। मैंने कहा ठीक है और अन्दर आकर सामन पैक करने लगा। रात को पापा ने हमे प्लेन में बैठा दिया।

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मैं थोडा सा उदास था ये देख कर अर्चना ने पूछा क्या हुआ मैं बोला आज तो दिन ही ख़राब है सारे प्लान ख़राब हो गए पहले फार्म पे इतना अच्छा मौका था वो निकला अब ये सब। इस पर अर्चना ने मुझे कहा: तू पागल है मेरे भाई फार्म पर जो हम कर रहे थे वो तो हम कभी भी कर सकते है जब मौका मिले तब और ये तो अच्छा है ना अब हम 3-4 दिन अकेले रहेगे तो रोज रात को मजे करेगे बिना किसी की रोक टोक के और तू है की मुह लटका रहा है। मैंने कहा पर मैं तेरे साथ ट्रेन में जाना चाहता था क्युकी मैंने ट्रेन सेक्स की बहुत कहानी पड़ी है मैं भी वही करना चाहता था। वो बोली उधर कोई आता ही नहीं जैसे, चल अब छोड़ उन बातो को।

हम मुंबई पहुचे और पास ही मैं एक होटल ले लिया कमरे में जाते ही मैंने अर्चना को पकड़ लिया और उस पर टूट पड़ा। अर्चना ने कहा: जानू पहले खाना आर्डर कर दे फिर हमे कोई तंग नहीं करेगा मैं जल्दी से उठा और एक तंदूरी चिकन और दाल नान का आर्डर दे दिया, तभी अर्चना ने मुझसे फ़ोन लिया और लेमन पाई और एक वोडका का आर्डर दे दिया और मुझे बोली आज तुझे मैं ट्रेनिंग देती हु और मेरे होठो पर चूम लिया। फिर टीवी देखने लग गई मैं जैसे ही उसके पास पंहुचा तो बोली अभी वेटर आ जाये उसके बाद मेरी जान। उसके मुह से जान और जानू शब्द सुन कर मैं अपना कण्ट्रोल खो रहा था।

करीबन आधे घंटे में खाना आया और जैसे ही वेटर गया अर्चना ने मुझ पर झपटा मारा और मेरे होठो को ऐसे चूसने लगी जैसे काट कर खा ही खाएगी। उसने अपने स्सरे कपडे उतार के फेंक दिए अब वो मेरे सामने मादरजात नंगी कड़ी थी अब मैं उस पर भूखे भेदिये सा चढ़ गया मैंने उसके उसके बूब्स को मुह में लेकर काटना और चुसना शुरू कर दिया और उसके मुह से सिस्कारिया निकलने लगी।

मैंने अपनी उंगली जैसी ही उसकी चूत में डाली उसके मुह से अजीब सी आवाजे निकलने लगी और वो मुझे धक्का दे कर बेड पर लेट गई और अपनी टाँगे फेला दी और मुझे अपनी चूत की और इशारा कर के बुलाने लगी मैं झट से उसकी चूत को अपनी जीभ से छोड़ने लगा, कभी कभी मैं उसकी चूत के फूल को काट भी लेता। अर्चना के मुह से उह्ह आह्ह्ह और तेज बहनचोद फाड़ दे मेरी, पूरा पानी चूस ले उह्ह्ह अहह उह्ह्ह निकल रही थी करीबन 5 मिनट बाद उसने पानी छोड़ दिया, मुझे उसका पानी खारा लगा और जैसे ही मैं हटने लगा उसने मेरा सर पकड़ के अपनी चूत पर टिका दिया और मुझे उसका सारा पानी पीना पड़ा वो बोली :

भडवे ये तेरे पिने के लिए है अमृत छोड़ के किधर जा रहा है

जैसे ही मैं उसकी चूत पर से हटा उसने मुझे निचे पटक दिया और मुझ पर सवार हो गई और मेरे लंड को लोलीपोप की तरह से चूसने लगी कभी कभी वो मेरे कंचो को भी मुह में भर के चूसती मुझे ऐसा लग रहा था की बस वो मुझे पूरा ही चूस जायेगी और मैं भी जल्दी झड गया वो मेरा सारा वीर्य पी गई फिर अपनी जीभ से मेरा लंड साफ़ कर दिया। मैंने जैसे ही कंडोम की तरफ हाथ बढ़ाया उसने कहा मादरचोद सारी रात क्या गांड मरवानी है चल उठ और कुछ खाते है।

मैंने प्लेट में खाना डाला और उसने वोडका के पेग बना लिए हमने एक एक जाम उठाया और चियर्स किया मैं जैसे ही पिने लगा उसने कहा ऐसे तो अपने दोस्तों के साथ पीना आज मैं तुझे दुसरे तरीके से पीना सिखाती हु। उसने एक घूंट अपने मुह में लिया और फिर अपने होठ मेरे होठो से मिला दिए मुझे सारी वोडका पिला दी मैं आपको बता नहीं सकता कितनी नशीली थी वो वोडका। हमने वो जाम ऐसे ही एक दुसरे को पिलाया फिर उसने मुझे पीठ को दिवार पे टिका कर थोडा सा टेडा कर दिया अब मेरे सीने पर धीरे से वोडका डाली जो पेट से बहती हुई मेरे लंड से टपकने लगी और वो मेरा लंड मुह में लेकर वोडका और मेरे लंड का मजा साथ में लेने लगी। फिर मैंने भी ऐसे ही किया उसके बाद मैंने पेस्ट्री उठाई और उसके पुरे बदन पर मल दी फिर उसके पूरे शरीर को चाटने लगा। वो बोली : बहनचोद बड़ी जल्दी सीख गया। जब मैंने पूरा बदन चाट लिया तो वो बोली मुझे पूरा चिपचिपा कर दिया, मैंने उसे उठाया अब वो मेरी गोद में थी मैंने उसे बाथरूम में टब में डाल दिया और उसके शरीर पे साबुन मलने लगा फिर फिर वो कड़ी हो गई मैंने अपने हाथो में साबुन लगाया और उसकी चूत साफ़ करने लगा वो बोली ये हाथ से नहीं ( मेरा लंड पकड़ कर ) इस साब से साफ़ होगी मैंने झट से सारा साबुन लंड पर मला और घुसेड दिया।

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अर्चना के मुह से एक जोरदार चीख निकली और वो मुझसे लिपट गई। मैंने उसे कहा: रंडी चीख तो ऐसे रही जैसे पहली बार चुद रही हो? वो बोली : मादरचोद खड़े होकर पहली बार चुदवा रही हु और तूने इतनी तेज डाला की चीख निकल गई। उसकी बात सुन कर मैं जोश में आ गया और उसे जोरदार धक्के मरने लगा वो तेज तेज उह्ह्ह अह्ह्ह हननं उह्ह्ह मजा आ गया उह्ह्ह्ह वहहह उह्ह्ह्ह और तेज उह्ह्ह्ह करने लगी। मैं दस मिनट तक लगा रहा वो इस बीच में दो बार झड गई। फिर उसने कहा लेट कर करते है ना पैर में दर्द हो रहा है। मैं बोला: अब चाहे यमराज भी आ जाये जब तक छुट नहीं जाता लंड तेरी चूत से बहार नहीं निकलने वाला।

इतना बोलते ही वो मुझसे लिपट गई और पेरो को मेरे पेरो पर लपेट लिया और बोली: अब तो चल मेरे चोदु राजा। मैंने अपने दोनों हाथो से उसकी गांड की दोनों फांको को पकड़ा और एक उंगली उसकी गांड के छेद पर टिका दी और बाहर आने लगा। मैं जैसे ही चलता वो फिसलती और मेरा लंड बहार आने को होता मैं अपनी ऊँगली गांड में डाल देता वो झटका खा के उछलती और मेरे लंड को अपनी चूत में घुसा लेती ऐसा करने में मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं कोई 10 कदम चला था वैसे और कम से कम 8 बार मैंने यु किया था।

बहार आते ही मैं उसे कालीन पर ले कर लेट गया और खूब चोदा। वो भी अपनी गांड उछाल कर मेरा साथ दे रही थी मेरा मुह उसके बोबो से भरा हुआ था जिन्हें मैं धीरे से काट रहा था। 2 मिनट बाद मैं फारिग होने वाला था सो मेरा शरीर अकड़ने लगा। मैं उसके बोबे जोर से काटने लगा वो चीख भी रही और मेरी पीठ पर अपने नाख़ून भी चुभा रही थी अगले ही मिनट में हम दोनों एक साथ झड गए। हम जैसे ही एक दुसरे अलग हुए फिर एक दुसरे के चिपक गए और एक दुसरे के होठ चूसने लगे। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है और इस कहानी का शीर्षक चचेरी बहन की कुवारीं गांड की चुदाई है | पूरा कमरा एक अजीब सी पर मदहोश करने वाली खुशबु से महक रहा था।

रात को हम दोनों नंगे ही सो गए। सुबह जब मैं जागा तो अर्चना मेरी तरफ पीठ करके सो रही थी मेरा एक हाथ उसके बूब के ऊपर था और उसकी गांड मेरे सोये हुए लंड से कुछ इंच दूर थी उसकी गांड देखते ही लंड अपनी औकात पर आ गया और मैं भी मैंने उसके बूब को दबाना और मसलना शुरू किया और अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा। वो भी मेरी हरकत से जाग गई और उसे जैसे ही मेरे लैंड का अहसास हुआ वो मुझसे छिटक कर दूर हो गई। वो मुझ पर चिल्लाई : बहनचोद पता नहीं गांड में क्या मिलता है तुम सब हरामियो को? मैं यह सुन कर मुस्कुरा दिया और

मैंने पूछा : सति सावित्री जी आप क्यों गांड बचा रही हो, हम हरामियो के बिना आपका गुजरा भी नहीं होता और हमारा गांड के बिना तो हमे गांड दे दो और मजे लूटो। वो कुछ नहीं बोली और खड़ी होकर बाथ गोऊन पहन लिया जो सिर्फ आगे से एक डोरी से बंधता था। वो उसी में बालकनी में चली गई मैं भी बॉक्सर पहन कर उसके पास गया और उसे पीछे से पकड़ लिया और अपना लंड उसकी गांड पर लगा दिया बस अबकी बार घिसा नहीं और उसके बूब्स को हाथो से मसलने लगा। मैंने उसे कहा :

जानेमन नाराज हो गई क्या?

वो बोली : मुझे गांड मरवाने से डर लगता है क्युकी मेरी एक दोस्त ने गांड मरवा ली थी तो दो दिन तक सीधी चल भी नहीं पायी थी और उसकी मम्मी को शक हो गया और वो पकड़ी गयी, कुछ ही महीनो में उसकी शादी हो गई और ये मैं नहीं चाहती। मैंने उसे कहा : तुम अभी तो मरवा सकती हो क्युकी हमारे सिवा कोई और नहीं है और दो दिन कम से कम हमे यही रुकना है। वो पलट कर बोली : गांड मारे बिना नहीं मानेगा पर एक शर्त है मैंने कहा क्या? तो वो बोली : मुझे एक बिकनी पसंद आई थी पर वो 3500/- हजार की थी तो मैं नहीं ले पाई वही दिला दे। मैंने कहा ठीक है और उसकी गांड पर हाथ रख दिए वो फिर मुझसे दूर होकर बोली पहले कॉलेज चल और फिर बिकनी दिला उसके बाद।

हम दोनों कॉलेज गए उसका एडमिशन एक दिन में ही हो गया। वो घर पर कॉल करने लगी मैंने उसे रोक दिया और कहा गांड मरवानी बाकि है मेरी जान वो मुस्कुरा दी। फिर हम एक मॉल में गए और उसने अपनी पसंद की बिकनी ले ली मैंने पैसे दे दिए। वो बोली : अब घर पे क्या कहेगा? मैंने कहा : कहना क्या है मम्मी ने कहा था की दो रूम लेना तो उसके पैसे काम आ गए।

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हम होटल में आये और वो सीधे बाथरूम में घुस गई और जब वो बाहर निकली वो किसी भी मॉडल से ज्यादा हॉट और सेक्सी लग रही थी। मैं उस पर भूखे शेर की तरह झपट पड़ा और उसको चूमने लगा वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैंने उसके दोनों बूब्स को रगड़ना शुरू कर दिया। उसने मेरी शर्ट के बटन तोड़ दिए और झुक कर मेरे सीने को चूमने लगी और मेरी निप्पल को दांतों से काटने लगी। मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा उतार दी और उसे घुमा दिया। मैं उसकी गांड पर अपना लंड रगड़ना लगा। हमारे बीच में उसकी पेंटी और मेंरी पेंट थी पर हम दोनों एक दुसरे को फील कर रहे थे। उसने मेरी पेंट उतार दी मैंने चड्डी नहीं पहनी थी उसने मेरा लंड पकड़ा और मुझे बाथरूम में ले गई। उसने बाथटब पहले से ही तैयार करा हुआ था वो उसमे चली गई। होटल में बाथटब ना होकर एक छोटे से पूल की तरह था जिसमे दो तीन लोग आराम से मजे कर सकते थे। हम दोनों बाथटब में थे और एक दुसरे के जिस्म को आपस में रगड़ रहे थे तभी मेरा लंड उसकी पेंटी में फस गया मैंने झट से उसकी पेंटी उतार दी और उसकी गांड में लैंड घुसाने लगा उसने मुझे रोका और

कहा : पहले गांड में अच्छी तरह से साबुन लगा दे ताकि मुझे कम दर्द हो।

मैंने हाथ में साबुन लेकर उसकी गांड के फूल पे मसलने लगा और फिर उंगली से धीरे धीरे गांड के अन्दर भी। उसने भी हाथ में तेल लेकर मेरे लंड पर लगा दिया। थोड़ी देर में वो मुझसे थोड़ी दूर हुई औए दिवार के सहारे गई और झट से निचे झुक गई। अब उसकी गांड मेरे सामने थी मैंने भी आव देखा ना ताव और उसकी कमर को कास के पकड़ कर अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखा और एक झटका दिया। मेरा लौड़ा आधा उसकी गांड में था और उसकी एक जोर दार चीख निकली जिसे उसने जल्दी से रोक लिया।

वो बोली: बहुत दर्द हो रहा है निकाल ले। मैंने कहा अब तो जितना दर्द तुझे सहना था सह लिया अब मजे ले। मैंने देखा उसकी गांड से खून निकल रहा था पर मैंने उसकी गांड मारनी चालू रखी। जल्द ही उसको मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी अपनी कमर को हिला कर। जल्द ही मैं उसकी कसी हुई गांड में झड गया और अपना लंड निकाला मेरा लंड उसके खून से लाल था और बहुत तेज दर्द कर रहा था।

उसकी भी हालत बुरी थी हम दोनों जैसे तैसे बिस्तर तक पहुचे और सो गए। रात को करीब 10 बजे मेरी आँख खुली मैंने उसका हाल पुछा तो वो बोली : चलने में दर्द हो रहा है मैंने कहा तू आराम कर मैं खाना लेकर आता हु। हम दोनों ने खाना खाया और फिर सो गए। अगली सुबह भी उसको दर्द था पर जिसके कारण हम दोनों उस ट्रिप पर फिर से सेक्स नहीं कर सके।

कहानी जारी रहेगी …

मित्रो कहानी अभी बाकी है आगे की कहानी पढ़ने के लिए आप मस्ताराम.नेट को डेली पढ़ते रहिये मै रोज एक न्य अपडेट देता रहूँगा और हां आप अपने विचार निचे लिखे कमेंट बॉक्स में लिखना ना भूले |

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