Mastaram.Net

100% Free Hindi Sex Stories - Sex Kahaniyan

गर्म करके काजल दीदी को चोदा -3

गर्म करके काजल दीदी को चोदा -1 ( Garm Karke Kajal Didi Ko Choda -1)

गर्म करके काजल दीदी को चोदा -2 ( Garm Karke Kajal Didi Ko Choda -2)

गर्म करके काजल दीदी को चोदा -3 ( Garm Karke Kajal Didi Ko Choda -3)

फिर वो मेरे बेड पर बैठ गयी, और धीरे-2 करके उन्होने मेरी रज़ाई को उतार दिया… मैने सिर्फ़ एक शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनी हुई थी.. मेरा शरीर काँप सा गया बाहर की ठंडी हवा से पर मैं उठ नही सकता था, मैं देखना चाहता था कि अब कौनसी हद पार करती है मेरी बहेन.

वो कुछ देर तक तो मेरे अंडरवेर मे क़ैद खड़े लंड को निहारती रही और फिर धीरे-2 उन्होने मेरे लंड पर हाथ रख दिया.

मैने कुन्मूनाने का नाटक किया और उनके हाथ के उपर अपना हाथ रखा .… वो पूरी तरह से गर्म चुकी थी.. और शायद काँप भी रही थी..

मेरा हाथ उनके हाथ पर था इसलिए जब उन्होने अपने हाथ की मूव्मेंट स्टार्ट की तो मुझे सॉफ एहसास हुआ कि वो कैसे अपने काँपते हाथों से मेरे लंड को सहला रही है.

कुछ ही देर मे मेरा लंड कल की तरह उभरकर पूरा खड़ा हो गया..

मेरी साँसे तेज़ी से चल रही थी उनके अगले मूव के बारे मे सोच-सोचकर..

और फिर उन्होने वही किया जिसके बारे मे मैं सोच रहा था.

काजल दीदी ने मेरी शॉर्ट्स को धीरे-2 नीचे खिसकाना शुरू कर दिया और कुछ ही देर मे मेरा लंड तन कर उनके सामने खंबे की तरह खड़ा था… बंद कमरे मे उनकी तेज साँसों की आवाज़ मुझे सॉफ सुनाई दे रही थी..

फिर वो साँसे धीरे-2 मुझे मेरे लंड पर भी महसूस होने लगी… एक दम गर्म थी वो.. मेरे लंड को पिघला देने वाली गर्म साँसे… और फिर उन्होने अपनी गर्म जीभ को मेरे लंड से छू लिया.. मुझसे बर्दाश्त करना अब मुश्किल हो रहा था…

मैने एक जोरदार सिसकारी के साथ अपनी आँखे खोल दी और वो सीधा मेरी बहेन की आँखो से जा टकराई जो मेरे लंड को बस मुँह मे लेने ही वाली थी..

जैसे ही दीदी ने मुझे नींद से जागते देखा, वो झट से बोली स्टाचु

और एक बार फिर मैं जहाँ का तहाँ, जम कर रह गया..

हालाँकि मैं उन्हे रोकने वाला तो फिर भी नही था, पर फिर भी इस खेल की आड़ मे ये सब करने मे जो रोमांच हम दोनो को महसूस हो रहा था वो अलग ही था. आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मुझे स्टाचु बनाकर उन्होने अपने गुलाबी होंठों को पूरा खोला और मेरे लंड के सुपाडे को मुँह मे लेकर बंद कर दिया…

मैं सिसकारी मारकर रह गया.

”उम्म्म्ममम अहह”

दीदी के नर्म होंठ मेरे लंड को पूरी तरह से जकड़ते हुए धीरे-2 नीचे जाने लगे… और कुछ ही पलों मे उन्होने मेरे 6 इंची लंड को पूरा नाप लिया…

मेरा लंड अब पूरी तरह से उनके होंठों के कब्ज़े मे था, ये एक अलग ही फीलिंग थी, जिसे शब्दों मे बयान करना मुश्किल है, मेरा पूरा बदन गर्म हो गया, जो कुछ देर पहले रज़ाई हटने से काँप रहा था अब उसपर पसीने की बूंदे चमकने लगी..

एक लड़की के गर्म शरीर मे कितनी ताक़त होती है ये मैने आज ही जाना.

काजल दीदी ने अपनी जीभ से मेरे लंड को चुभलाना शुरू कर दिया. मैने अपनी गान्ड थोड़ी सी हवा मे उठा ली जिसके वजह से रहा-सहा लंड भी जड़ तक उनके हलक मे उतर गया… बहुत ही मज़ा आ रहा था ये सब करवाने मे… उनके मुलायम बूब्स मेरे घुटनो पर बुरी तरह से पिस कर मुझे मस्साज़ दे रहे थे.

धीरे-2 उनकी लंड चूसने की स्पीड बढ़ती चली गयी.

मुझे ये तो अच्छे से पता था कि ये उनका फर्स्ट टाइम है, पर उनकी लंड चूसने की कला देख कर लग नही रहा था कि पहली ही बार मे वो एक प्रोफेशनल की तरह चूस रही है…

शायद उन्हे भी पॉर्न मूवीस का चस्का था.

मेरा लंड बुरी तराहा से ऑर्गॅज़म के करीब पहुँच गया और जल्द ही वो पल भी आ गया जिसके लिए वो मेरे लंड को दोह रही थी..

मेरे लंड से ताबड़तोड़ वीर्य निकलने लगा… जिसकी एक बूँद तक मैं नही देख पाया, सारा का सारा रस वो नाश्ते का समान समझकर पी गयी…

उनकी इस कलाकारी को देख कर मैं अचंभित सा होकर उन्हे देखता रह गया..

मेरे लंड को अच्छी तरह से चूसने के बाद, उसमे से एक-2 बूँद निचोड़ने के बाद वो खड़ी हुई और दरवाजे तक मटकते हुए गयी और बाहर निकलने से पहले उन्होने मुझे ‘रिलीस’ बोला और चली गयी..

मैं एक बार फिर से अपने रस निकल चुके लंड को देख कर, अपनी किस्मत की दाद देता हुआ मुस्कुराने लगा..

कल के बाद आज सुबह भी उन्होने दो बार मुझे स्टाचु बनाकर मुझसे मज़ा लिया था…

अब किसी भी कीमत पर मुझे इस बात का बदला लेना था..यही मज़ा मुझे उन्हे देना था, दीदी को स्टाचु बनाकर.

मैं अपने बिस्तर से उठा और बाथरूम मे जाकर फ्रेश हुआ, ब्रश किया और फिर नीचे आ गया..

दीदी मेरे लिए नाश्ता बना रही थी..

इस वक़्त उन्होने अपनी रात वाली ड्रेस ही पहनी हुई थी जो एक कपरी और टी शर्ट थी.. मेरे दिमाग़ मे कुछ चल रहा था…

जब मुझे नाश्ता सर्व करके वो अपने रूम मे गयी तो मैं समझ गया कि वो नहाने जा रही है, मुझे तो कोई फ़र्क नही पड़ता था पर वो बिना नहाए ब्रेकफास्ट नही करती थी.

मैने जल्दी से अपना नाश्ता निपटाया और मैं भी दबे पाँव उनके रूम मे घुस गया…

दरवाजा खुला था, और बेड पर उन्होने अपने लिए ब्लॅक कलर की ब्रा और पैंटी का सेट रखा हुआ था जो वो आज पहेन ने वाली थी, मैने उसे उठाकर अपने चेहरे से लगा लिया, उसमे से उनके जिस्म की खुश्बू आ रही थी..

साथ मे दीदी ने एक टी-शर्ट और शॉर्ट्स रखी हुई थी, जो मुझे भी काफ़ी पसंद थी, उसमे उनकी सुडोल जांघे काफ़ी सेक्सी लगती थी.

फर्श पर उनकी टी शर्ट और कपरी पड़ी थी जिससे सॉफ पता चल रहा था कि उसे उतारकर वो नंगी ही अंदर चली गयी थी…

मैने बाथरूम के दरवाजे की तरफ देखा और धीरे-2 उसके करीब आ गया…

अंदर शावर चल रहा था और उनके गुनगुनाने की आवाज़े आ रही थी..

”मेरे ख्वाबो मे जो आए, आके मुझे छेड़ जाए, उससे कहो कभी सामने तो आए”

मेरा दिल मचल उठा ये सुनकर… ऐसी अल्हड़ उम्र मे ऐसे ही गाने निकलते है नहाते हुए..

मैने उपर वाले का नाम लेते हुए दरवाजे को धीरे से धक्का दिया और वो खुलता चला गया… दीदी ने उसे अंदर से बंद नही किया था. मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गयी…

ये पहला मौका था जब मैं अपनी तरफ से कोई ऐसी हरकत करने जा रहा था जो हमारे समाज मे सही नही समझी जाती पर ऐसा करने के लिए मुझे काजल दीदी ने ही विवश किया था. उन्होने ही इन सब की शुरूवात की थी वरना मैने तो आज तक इन्सेस्ट के बारे मे सोचा तक नही था..

मेने धड़कते दिल से पूरा दरवाजा खोल दिया और मेरे सामने वो नज़ारा था जिसकी मैने आज से पहले कभी कल्पना भी नही की थी…

काजल दीदी नंगी खड़ी होकर नहा रही थी.. उनकी पीठ थी मेरी तरफ और उनके भरे चूतड़ मेरी आँखो के बिल्कुल सामने थे..

पानी की बूंदे उनके संगमरमरी बदन से लूड़क कर नीचे फिसल रही थी, और गान्ड की दरारों मे घुसकर गायब होती जा रही थी..

मन तो कर रहा था कि उन दरारों मे जीभ लगाकर उस झरने का सारा पानी पी जाउ…

दीदी ने अपने सिर पर शेंपू लगाया और पूरा बाथरूम जेस्मीन की महक से नहा उठा… चेहरे और बदन पर पूरी झाग ने कब्जा कर लिया… और फिर शावर के नीचे खड़े होकर वो शॅंपू की झाग को निकालने लगी… और धीरे-2 घूमकर उन्होने मेरी तरफ मुँह कर लिया…
ये नज़ारा तो पिछवाड़े से भी ज़्यादा ख़तरनाक था… पहले तो हल्की झाग ने उनके बूब्स और पुसी को कवर कर रखा था पर जैसे-2 पानी पड़ रहा था वो जगह निखरकर सामने आ रही थी… आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | और कुछ ही पलों मे उनका पूरा जिस्म दमकने लगा… और मैने दीदी के बूब्स देख ही लिए…

एकदम मध्यम आकार के थे वो, करीब 34 साइज़ के, एकदम कठोर, लाल निप्पल्स लगे थे उनपर.. और उनकी पुसी तो मैने कल सुबह ही देख ली थी पर फिर भी एक बार फिर से उसे देख कर एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी मेरे लंड मे…

एकदम कसी हुई थी उनकी पुसी, हल्के बाल थे, देखने मे इतनी टाइट थी कि ऐसा लग रहा था कि उसमे एक उंगली का भी घुसना संभव नही होगा..

मैं उनके नंगे बदन की सुंदरता को निहार ही रहा था कि अचानक उन्होने आँखे खोल दी और मुझे सामने खड़े देख कर बोखलाते हुए वो ज़ोर से चीखी

“राहुल तू…..तू यहाँ क्या कर रहा है…”

इतना कहते हुए उन्होने एक हाथ अपने बूब्स पर और दूसरे को अपनी चूत पर रखकर उसे ढक लिया…

और लगभग तभी मैने वो बोलकर उन्हे चुप करा दिया जिसे इस्तेमाल करके वो पिछली 2 बार से मुझे सता रही थी.

स्टाचु

मेरे मुँह से स्टाचु सुनते ही वो शावर के नीचे फ्रीज़ होकर खड़ी रह गयी..

उनके चेहरे पर आए हैरानी के भाव बता रहे थे कि उन्होने ये एक्सपेक्ट ही नही किया था मुझसे…

पर ये तो टिट फॉर टॅट हो रहा था

उन्होने जिस तरह मुझे कल मूठ मारते हुए स्टाचु बोलकर ना हिलने पर मजबूर कर दिया था उसी तरह से मैने भी उन्हे नहाते देख कर ये तरीका अपनाया था.

मैने सबसे पहले तो आगे बढ़ कर शावर बंद कर दिया ताकि उन्हे ज़्यादा परेशानी ना हो.. और उसके बाद जब पानी की सारी बूँदो ने उनके जिस्म का साथ छोड़ दिया तो नीचे का नंगा बदन उजागर होकर सामने आ गया…

अब मैं उन्हे काफ़ी गोर से देख रहा था…

उनके जिस्म के रोँये खड़े हो चुके थे, जो इस बात को दर्शा रहे थे कि वो पूरी तरह से उत्तेजित है.

मैने उनकी आँखो मे देखा, जो विनती कर रही थी कि उनकी इस मजबूरी का फ़ायदा ना उठाए..

मैने कहा : “दीदी , इस गेम को यहाँ तक लाने मे आपका ही हाथ है… अदरवाइज़ मैं तो सपने मे भी ये गुस्ताख़ी नही करता…”

इतना कह कर मैने उनके कूल्हे पर हाथ रख दिया..

ऐसा करने की हिम्मत मुझमे कहाँ से आई ये मैं आज तक नही जान पाया…

पर मज़ा बहुत आया…

इतने मुलायम, गद्देदार और कठोर कूल्हे पकड़ कर मेरे लंड का पारा फिर से चढ़ने लगा…
हालाँकि मैं अभी कुछ देर पहले ही झडा था पर फिर भी वो बैठने का नाम नही ले रहा था, नज़ारा ही इतना सेक्सी था.

मैने काजल दीदी के दोनो हाथ नीचे कर दिए, वो तो बुत बनकर खड़ी रही जैसे उनमे कोई जान ही ना हो..
और हाथ नीचे होते ही उनके बूब्स एक बार फिर से मेरे सामने आ गये…

उनके उठते-गिरते सीने को देख कर उनके अंदर चल रही उथल-पुथल का सॉफ पता लगाया जा सकता था..

और फिर मैने नीचे झुक कर उनके बूब्स को चूम लिया..

उनके मुँह से ना चाहते हुए भी एक जोरदार सिसकारी निकल गयी

”आआआहह उम्म्म्ममम विक्ककीईईईईईई”

मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे माँस से बना कोई पिल्लो मैने अपने होंठों से लगा लिया है…
मैने उसे दांतो से काटा तो और भी ज़्यादा मज़ा आया..
और शायद मुझसे ज़्यादा मज़ा उन्हे आ रहा था क्योंकि उनकी सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी..

मैने अब उन्हे इतनी छूट दे दी थी कि इस गेम मे वो सिसकारियाँ मार सकती है..

और फिर धीरे-2 उनके बूब्स को अच्छी तरह चूसने के बाद मैने उनके निप्पल को मुँह मे भर लिया…

ये वो मौका था जब उनकी सिसकारी अब तक की सिसकारियो मे सबसे तेज थी.

”अहह उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़… म्म्म्मममम”

मैं खुद सातवे आसमान पर पहुँच गया… ऐसा लग रहा था जैसे कोई रसीला फ्रूट चूस रहा हूँ मैं अंदर से रस निकले ही जा रहा था… रुकने का नाम ही नही ले रहा था.

और एक के बाद दूसरा फल चूसने के लिए जब मैने दूसरे बूब की तरफ मुँह बढ़ाया तो मैने महसूस किया कि उन्होने खुद ही अपना वो स्तन मेरी तरफ कर दिया है… यानी वो भी पूरी तरह से एंजाय कर रही थी.

मैने मस्ती मे भरकर उनके दूसरे बूब को भी उसी तरह से चूसा जैसे पहले को चूसा था.. अब तो काजल दीदी का शरीर फड़फड़ाने सा लगा… उनके अंदर की उत्तेजना उबल्कर बाहर आ रही थी…

फिर मैने सोचा कि देखा जाए कि ये उत्तेजना उनसे क्या करवाती है

उन्हे यहाँ से भागने पर मजबूर करती है या यही रुक कर मज़े दिल्वाति है…

मैने धीरे से उनके गालो को चूमते हुए कहा रिलीस

और मेरे इतना कहने की देर थी कि उन्होने मुझे बुरी तरह से पकड़ कर मुझे चूमना शुरू कर दिया..

यानी जो आग मैने लगाई थी वो पूरी तरह से भड़क कर बाहर आ चुकी थी…

उन्होने अपने गीले और रसीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे अपनी जवानी का रस पिलाने लगी..

और साथ ही साथ वो बुदबुदा भी रही थी..

”ओह्ह्ह राहुल…… अहह…. सककककक इट बैबी…… एसस्स्स्स्स्सस्स सकककक इट…… उम्म्म्मम”

मेरे हाथ पकड़ कर उन्होने खुद ही अपने बूब्स पर रख दिए और उन्हे दबाने लगी जैसे अपनी कोई पीड़ा कम करवा रही हो…

मेरी हथेलियो के नीचे दबकर उनके बूब्स पिस कर रह गये थे पर उसमे भी उन्हे बड़ा मज़ा मिल रहा था..

फिर दीदी ने मेरे सिर को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया और मैं एक बार फिर से उनके निप्पल्स को मुँह मे लेकर उनकी सेवा करने लगा..
ऐसा शायद और भी काफ़ी देर तक चलता रहता और शायद बहुत कुछ और भी हो जाता अगर नीचे के दरवाजे की बेल ना बजी होती…

हम दोनो ने एक दूसरे को देखा, कोई बाहर के दरवाजे की बेल लगातार बजाए जा रहा था.. और दोनो के मन का चोर एक साथ बोल पड़ा कि कहीं ये मम्मी तो नही है जो घर वापिस आ गयी है…

दीदी तो नंगी थी, मेरे कपड़े भी थोड़े बहुत गीले हो गये थे उनके पानी से भीगे बदन को बाहों मे लेने की वजह से…

पर फिर भी बाहर जाया जा सकता था… मैने अपना हुलिया ठीक किया और दरवाजा खोने भागा..

पर मन ही मन मेरी हालत खराब हो रही थी. आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | दरवाजा खोला तो मैं हेरान रह गया, सामने मेरी मौसी की लड़की काजल और उसका भाई अमर खड़े थे.. मैं उन्हे देख कर जितना हैरान था उतना ही खुश भी था..

मेरी मौसी आगरा मे रहती है और उनके दोनो बच्चे लगभग हमारी ही उमर के है.. अक्सर छुट्टियों मे हम एक दूसरे के घर पर जाया करते थे, इन दोनो से मिलने के लिए तो मैं हमेशा तैयार रहता था.

उन्हे गले से लगाकर, हाथ मिलाकर अंदर बिठाया मैने, तब तक काजल दीदी भी कपड़े पहन कर नीचे आ गयी, और मेरी तरह वो भी उन्हे देख कर हैरान रह गयी.. पर साथ ही साथ खुश भी काफ़ी हुई.

तब उन दोनो ने बताया कि यहाँ आने के प्रोग्राम के बारे मे हमारी मोम को ऑलरेडी पता था, ये तो बस काजल और अमर हम दोनो को सर्प्राइज़ देना चाहते थे, इसलिए हमे नही बताया गया था इस बारे मे.. पर उन दोनो से मिलकर काफ़ी अच्छा लगा.. अब वो अगले 1 हफ्ते के लिए यहीं रहने वाले थे.

मैने काजल दीदी की तरफ देखा, खुश तो वो भी थी उनके आने से पर इस वक़्त उन्होने आकर जिस तरह से हम दोनो को डिस्टर्ब किया था, उसका गुस्सा भी उनके चेहरे पर सॉफ देखा जा सकता था.

पर काजल दीदी समझदार थी, वो जान चुकी थी कि जहाँ तक हम दोनो इस गेम के ज़रिए निकल आए है, वहाँ से सिर्फ़ आगे जाया जा सकता है, पीछे नही और एक ही घर मे रहने की वजह से ऐसे कई मोके और मिलेंगे जिसमे हम दोनो भाई बहेन ऐसी मस्तियाँ जारी रख सकते है.

अब मैं आपको काजल के बारे मे बता देता हूँ, वो मुझसे 2 महीने छोटी है, और मैं उसे अपनी छोटी बहेन की तरह ही मानता था.. मानता था मैने इसलिए कहा क्योंकि वो 2 साल पहले तक छोटी ही लगती थी. बाल बिखरे हुए से, चेहरे पर कोई रोनक नही होती थी.. बात-2 पर लड़ती झगड़ती रहती थी.. देखने मे वो थोड़ी काली थी और बॉडी बिल्कुल फ्लॅट थी उसकी..

पर पिछले साल जब मैं मौसी के घर रहने गया था तो उसका बदला हुआ रूप देख कर मैं हैरान रह गया था, वो भी 12थ मे आ चुकी थी और उसके पहनावे मे तो ज़मीन आसमान का अंतर आ चुका था…

हमेशा वेस्टर्न कपड़े पहनती थी वो जिनमे उसके शरीर के कटाव सॉफ नज़र आते थे और तभी मुझे पता चला था कि उसके बदन मे कहाँ-2 और कैसे-2 बदलाव आ चुके है… उसकी छातियाँ निकल आई थी जो करीब 32 के साइज़ की थी… गान्ड वाला हिस्सा भी उभरकर उतना ही बाहर आ चुका था जितनी छातिया बाहर थी..

उपर से उसकी अदाए, उसका चलने का तरीका और बोलने का अंदाज, सब बदल चुका था… उसकी सेक्सी आँखो मे एक अलग ही शरारत झलकने लगी थी… और उस शरारत को महसूस करके कई बार मेरा मन उसके लिए बेईमान हुआ था… और तभी से मैं उसके बारे मे गंदा सोचने लगा था और तभी से मैं उसे अपनी बहेन की तरह नही बल्कि एक कच्ची कली की तरह देखने लगा जो कभी भी फूल बन सकती थी.

वहीं अमर, दीदी से 2 साल बड़ा था, वो कॉलेज के 2न्ड एअर मे था, उसकी और दीदी की हमेशा लड़ाई हुआ करती थी, पर पिछले 1-2 सालो मे काफ़ी कुछ बदल चुका था, शायद उनकी लड़ाई भी ख़त्म हो चुकी थी.

शाम को जब मोम आई तो सभी ने मिल जुलकर धमाल किया… पापा हम सभी को एक अच्छे से रेस्टोरेंट मे ले गये.. मैने नोट किया कि अमर की नज़रें दीदी के उपर ही थी, शायद वो भी उनके शरीर मे आए बदलाव को देख कर हैरान था.. हालाँकि दीदी को इस बात का इल्म नही था कि अमर उन्हे घूर रहा है, वो तो मुझे ही देखने मे लगी हुई थी… जबकि मैं काजल को ताड़ रहा था..

मेरे मन मे ये विचार भी आया की काश ऐसा हो जाए कि हम सभी भाई बहेन आपस मे एक दूसरे के साथ मज़े कर सके… अमर मेरी दीदी के साथ और मैं अमर की बहेन यानी काजल के साथ…

पर ये सोचने मे ही इतना अटपटा लग रहा था कि करने मे कैसा लगेगा वो… खैर ये तो मेरे दिमाग़ मे चल रहे गंदे ख़याल थे, जो सच होंगे या नही इसका कोई अता-पता नही था..

पर एक बात तो पक्की थी, काजल के दिल मे ज़रूर कुछ चल रहा था मेरे लिए.. इसलिए जब भी हम दोनो की नज़रें आपस मे मिलती तो वो मुस्कुरा देती.. और एक लड़का होने की वजह से मुझे पता था कि ऐसी मुस्कुराहट का मतलब क्या होता है… उसकी आँखो की चमक भी एक अलग ही इशारा कर रही थी, एक बार तो उसने मुझे आँख भी मारी.. और उसी वक़्त मैने निश्चय कर लिया कि मैं उसपर भी हाथ आजमा कर ही रहूँगा..

इस बीच मैं थोड़ी देर के लिए भूल चुका था कि मेरा और काजल दीदी का खेल अधूरा सा रह गया है, जिसकी मुझसे ज़्यादा उन्हे चिंता थी शायद.

रात को जल्दी सोने का कोई मतलब नही था, छुट्टियां जो चल रही थी, इसलिए हम चारो ड्रॉयिंग रूम मे बैठकर मूवी देखने लगे..

अमर अपने साथ पेन ड्राइव मे हॉरर मूवी कॉंज्रिंग 2 लेकर आया था, और काजल दीदी को हमेशा से ही हॉरर मूवीस पसंद थी, इसलिए सभी देखने बैठ गये..
काजल दीदी और अमर भैया मेरे दाँये-बाँये के सिंगल सोफे पर और काजल मेरे साथ लंबे सोफे पर आकर बैठ गयी, मूवी शुरू हुई तो सभी उसमे खो से गये, एक के बाद एक डरावने सीन को देख कर सभी की हालत खराब हो रही थी.

अचानक काजल ने मेरे बाजू मे अपनी बाहे फसा दी और खिसक कर मेरे करीब आ गयी और धीरे से बोली – “ये तो बड़ी डरावनी मूवी है… मुझे तो डर लग रहा है…”

उसकी बात सुनकर दूर बैठा अमर बोला : “तुझे बोला था ना कि तू मत देख, बेकार मे डरेगी…” और फिर सभी मूवी देखने मे व्यस्त हो गये…

सिर्फ़ मुझे छोड़कर क्योंकि काजल के इतने करीब आने की वजह से उसके नन्हे स्तन मेरी बाजू से टकरा कर मुझे एक अलग ही आनंद प्रदान कर रहे थे, उसकी नरम चुचियाँ रूई के गोले की तरह मेरी बाहों पर रगड़ खा रही थी. मेरा लंड धीरे-2 खड़ा होने लगा..

अचानक एक सीन आया जिसमे दरवाजा खुलते ही कुछ उपर गिरता है हीरो के, और वो देख कर काजल के मुँह से जोरदार चीख निकल गयी… मैने हंसते हुए उसके सिर पर थपकी देते हुए कहा : “काजल, तू एक काम कर, डर लग रहा है तो उपर चली जा, वरना यहीं सो जा..”

उपर जाने का तो सवाल ही नही था, डरावनी मूवी देख कर अकेले मे वो कैसे सो पाएगी. इसलिए वो वही लेट गयी, सिर को उसने मेरी गोद मे रखा और मेरे पेट की तरफ मुँह करके आँखे बंद करके सो गयी..

अमर भी बोला : “हां, ये सही किया तूने, वरना पूरी रात जागना पड़ता तुझे सुलाने के लिए…”

अमर और काजल दीदी तो दोबारा मूवी देखने मे मस्त हो गये पर मेरी हालत खराब थी, कारण था मेरा खड़ा हुआ लंड, जो पिछले 10 मिनट से खड़ा होकर स्टील का डंडा बन चुका था और उसी के बिल्कुल करीब आकर काजल ने अपना मुँह लगा दिया था… और वो इतना करीब था कि उसकी गरम साँसे मैं अपने लंड पर सॉफ महसूस कर पा रहा था, सिर्फ़ 1-2 कपड़े थे बीच मे.. और कुछ नही…

सबकी मूवी देख कर और मेरी काजल को देख कर हालत खराब हो रही थी.. सब सोच रहे थे कि वो सो गयी है पर सिर्फ़ मैं ही जानता था कि वो जाग रही है..

क्योंकि उसने अपने हाथ से मेरी जाँघ वाले हिस्से को सहलाना शुरू कर दिया था… पता नही क्यो पर वो उसे लगातार सहलाए जा रही थी अपने नखुनो से… मुझे मज़ा तो बहुत आ रहा था ऐसे सेनुयल टच से पर मेरी फट भी रही थी क्योंकि अमर भैया वही बैठे थे..

फिर कुछ देर बाद मैने भी हिम्मत करके अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और उसे भी ठीक वैसे ही सहलाने लगा जैसे वो सहला रही थी. मेरे हाथो को महसूस करके वो मुस्कुरा उठी और धीरे-2 वो अपनी उंगलियो को और उपर लाने लगी.. मेरे लंड की तरफ.

मेरे हाथ भी उसी के अनुसार उसकी जाँघ से खिसकते हुए उसकी चूत की तरफ जाने लगे… मैं उसके चेहरे को देखे जा रहा था ताकि मुझे ये पता चल सके कि वो अब भी मेरी हरकतों को एंजाय कर रही है या नही…आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

उसके चेहरे से तो नही पर उसकी तेज हो चुकी सांसो को अपने लंड पर महसूस करके मुझे पता चल रहा था कि उसकी हालत भी मेरी तरह ही है… उसकी नन्ही छातियाँ उपर नीचे हो रही थी, उत्तेजित हो चुकी थी वो भी..

पर यहाँ हम कर भी क्या सकते थे, मेरी बहेन थी वहाँ, काजल का भाई भी वही था.. ऐसे मे कुछ करने का तो सवाल ही नही पैदा होता था.. पर एक बात तो तय थी कि काजल की जवानी भी लहरे मार रही है… और उसे अपनी बोतल मे उतारना मुश्किल नही होगा..

तो दोस्तों कैसे लगी कहानी अपनी प्रतिक्रिया निचे कमेंट बॉक्स में लिख कर दे | धन्यवाद !

आप इन सेक्स कहानियों को भी पसन्द करेंगे:

The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

Disclaimer: This site has a zero-tolerance policy against illegal pornography. All porn images are provided by 3rd parties. We take no responsibility for the content on any website which we link to, please use your won discretion while surfing the links. All content on this site is for entertainment purposes only and content, trademarks and logo are property fo their respective owner(s).

वैधानिक चेतावनी : ये साईट सिर्फ मनोरंजन के लिए है इस साईट पर सभी कहानियां काल्पनिक है | इस साईट पर प्रकाशित सभी कहानियां पाठको द्वारा भेजी गयी है | कहानियों में पाठको के व्यक्तिगत विचार हो सकते है | इन कहानियों से के संपादक अथवा प्रबंधन वर्ग से कोई भी सम्बन्ध नही है | इस वेबसाइट का उपयोग करने के लिए आपको उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए, और आप अपने छेत्राधिकार के अनुसार क़ानूनी तौर पर पूर्ण वयस्क होना चाहिए या जहा से आप इस वेबसाइट का उपयोग कर रहे है यदि आप इन आवश्यकताओ को पूरा नही करते है, तो आपको इस वेबसाइट के उपयोग की अनुमति नही है | इस वेबसाइट पर प्रस्तुत की जाने वाली किसी भी वस्तु पर हम अपने स्वामित्व होने का दावा नहीं करते है |

Terms of service | About UsPrivacy PolicyContent removal (Report Illegal Content) | Disclaimer | Parental Control