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मामा समझ कर अपने सगे भाई से ही चुद गई

मामा समझ कर अपने सगे भाई से ही चुद गई
( Mama Samajh Kar Apne Sage Bhai Se Hi Chud Gyi )

दोस्तो ये कहानी एक ऐसी लड़की की है जो मामा समझ कर अपने सगे भाई से ही चुद गई . और जिस चादर पर उसकी भाभी की सुहाग मनी थी उसी चादर पर उसने अपने भाई से चुदाई करवाई . तो दोस्तो आपको ज़्यादा बोर ना करते हुए ये कहानी साना की ज़ुबानी ही आपको सुनाता हूँ |

अभी दो महीने पहले ही मैं 21 साल की हो गयी हूँ. मेरे से 11 साल बड़ा मेरा एक भाई है जिसकी चार साल पहले शादी हो गयी है. हमारे घर में बहुत ही खुश नुमा माहौल है. पिकनिक्स में जाना, अच्छे रेस्तराँ में जाना, कहने का मतलब जिंदगी का हर लुफ्त हम खुल के उठाते हैं. आज फिर पिक्निक का प्रोग्राम था. हमने एक आलीशान फार्म हाउस बुक करवा लिया. पिक्निक में मेरे सगे मामा और दूसरे करीबी रिस्तेदार भी शिरक़त कर रहे थे. मैं अपनी दूसरी रिस्ते की बहनों के साथ फार्म हाउस के स्विम्मिंग पूल में तैराकी कर रही थी. मामा हम सब को तैराकी सिखा रहे थे. हम लड़कियों ने शलवार क़मीज़ पहनी हुई थी. मामा हम सब को बारी बारी तैराकी सिखा रहे थे.

चूँकि फार्म हाउस मामा ने बुक कराया हुआ था इस वजह से हमारी फॅमिली के अलावा कोई और नहीं था. शाम का समय और हल्के हल्के बादल की वजह से मौसम (सीज़न) बहुत ही खुश गवार था. मम्मी अपनी बहनों और दूसरे रिलेटिव के साथ और पापा अपने रिलेटिव के साथ तैराकी कर रहे थे. कुछ फ़ासले पर भाई जान भाभी के साथ पानी में खेल रहे थे.

पानी काफ़ी ठंडा और गहरा था और ब्लू कलर के बारे स्विम्मिंग पूल की वजह से पानी भी नीले रंग का बहुत ही दिलकश लग रहा था. जहाँ हम लोग पानी मे खेल रहे थे वहाँ पानी हमारी कमर(वेस्ट) के ऊपेर था. मामा ने अब मुझे तैराकी के बारे में बताया और मेरी मदद कर ने के लिए मेर पेरो के नीचे से मुझे उठा कर हाथ और पैर की मदद से तैराकी करा रहे थे.

मामा की शादी नही हुई थी और वो मेरे नाना नानी के साथ ही डिफेन्स में रहते थे. सब लोग अपनी बीवियों के साथ खेल रहे थे जब कि वो हम लोगों के साथ तैराकी में मसरूफ़ थे.

मामा ख़ास तोर पर हमसे बहुत ही मोहब्बत कर ते थे. चूँकि मेरी मम्मी उनकी एकलौती बहन थी. मामा ने मेरे पेरो के नीचे हाथ रखा हुआ था और मैं तैराकी के लिए हाथ पैर हिला रही थी. मामा ने अचानक हाथ हटा लिया और मैं डिसबॅलेन्स होकर गिरने लगी तो मैने मामा को पकड़ना चाहा और गलती से मेर हाथ मामा के लंड पर लग गये.

मैं घबरा गयी लेकिन कोई ध्यान नहीः दिया. मामा ने फिर मुझे तैराकी करने को कहा और मैं फिर से तैराकी करने लगी. मामा ने अब जो हाथ रखा तो वो एक हाथ मेरे मम्मों के नीचे और दूसरा मेरी चूत के नीचे था. मैं अभी 17 साल की थी और मैं ना तो मम्मों पर कुछ पहेनती थी और ना ही मुझे अंडरवेर की आदत थी. मामा के हाथ मेर कपड़े गीले होने की वजह से ऐसे लग रहे थे कि मेरे मम्मे नंगे हैं. यह पहली बार था कि किसी के हाथ ने मेरे मम्मों और चूत को स्पर्श किया था. आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मुझे मामा का हाथ बहुत अच्छा लगा |

मैं तैराकी की कोशिश कर रही थी और मामा का हाथ वहीं लगा हुआ था. मामा ने कहा कि वो हाथ हटा रहे हैं और उन्हों ने हाथ हटाया कि मैं फिर अस्थिर होगयी और ज्योन्ही मैने उनको पकड़ना चाहा, मेरा हाथ फिर मामा के लंड पर लगा. इसबार मैने खुद ही हाथ वहीं लगाया था. मैने हाथ से महसूस किया कि मामा का लंड अब कुछ तना हुआ था.

मैं मामा के सामने खड़ी थी और मैं ने ट्रॅन्स्परेंट पानी से देखा कि मामा का लंड खड़ा हुआ था. ईतने मैं मेरी एक कज़िन ने कहा कि अब मैं सीखूँगी लेकिन मैने माणा कर दिया और कहा कि मैं कुछ देर और सीखूँगी. मैं फिर तैराकी करने लगी अब मैं जान बूझ कर बार बार अस्थिर होने लगी और मामा का लंड अब खूब सॉफ नज़र आ रहा था कि वो बिल्कुल सीधा खड़ा हुआ था. मैं एक बार तैराकी करते हुए डूबने लगी.

मामा ने मुझे थाम लिया और मैं खड़ी होकर मामा के सीने से लग गयी. मामा का लंड मेरे पेरो से टकरा रहा था. इस मंज़र ने मुझे बहुत ही सेक्सी कर दिया. मैने एक बार फिर तैराकी की कोशिश की और अब मामा ने मुझे पानी पर सीधा करके खुद मेरी टाँगों को फेला कर मेरे पीछे आ गये |

अब उन्हों ने मेर पीछे से दोनो टाँगों के बीच होकर मेर पैरो को पकड़ लिया और कहा,पहले हाथों की प्रॅक्टीस करो फिर पैरों से करना. मैं मामा को दोनो टाँगों के बीच पाकर हाथों से प्रॅक्टीस करने लगी और मामा का लंड मेरी चूत के क़रीब महसूस हो रहा था जो कि बहुत ही लाजवाब लग रहा था. मैं हाथों से प्रॅक्टीस कर रही थी और दर असल मामा के लंड को चूत के क़रीब पाकर खुश हो रही थी या सेक्स में गरम हो रही थी.

मामा का लंड हिलता हुआ महसूस हो रहा था और उसने मेरे ठंडे पानी में डूबे हुवे बदन में आग लगा रहा था. यह एहसास मुझे पहली बार हुआ था और बहुत ही खुस गवार था.. मैं तैराकी तो क्या सीखती किसी और आग मैं जलना सीख रही थी. मैं थक गयी तो मैं खड़ी हो गयी. मामा का हाथ अब भी मेर पैरो पर था और खड़े होते ही मेरे चूतड़ के ऊपर मामा का लंड महसूस हुआ.

मैं पलट कर सीधी हो गयी और मैने मामा की आँखों मे एक नई चमक देखी और खुद मेरे जिस्म के अंदर भी एक नया पैगाम था. शाम ढल चुकी थी और मैं एक नई ख्वाहिस महसूस कर रही थी. मामा ने पूछा, और प्रॅक्टीस करो गी लेकिन उनका हलक खुश्क हो चुका था और बड़ी मुश्किल से उनकी आवाज़ निकल रही थी.

अभी मैं जवाब ही देने वाली थी कि पापा और भाई की आवाज़ आई कि चलो अब रात हो रही हैं. मैं आवाज़ सुन कर ना चाहते हुए पानी से बाहर निकल आई लेकिन मामा ने कहा, मैं अभी ठहर कर आ रहा हूँ.

मैं समझ गयी कि वो खड़े लंड के साथ कैसे बाहर आ सकते हैं. हमलोंग फार्म हाउस के हॉल मे आ गये और थोड़ी ही देर के बाद मामा भी आ गये. वो कुछ चुप चुप थे. हॉल मे भाई और मामा के साथ साथ सब ही ने हाफ पैंट पहनी हुई थी जबकि हम लड़कियों और लॅडीस ने शलवार कमीज़ पहनी हुई थी. मम्मी और भाभी वाघिरा खााना लगा रही थी. मैं बार बार मामा को देख रही थी और जब उनकी तरफ देखती तो उनको अपनी ही तरफ देखते हुवे ही पाती. मेरे अंदर आग लगी हुई थी और मामा के लंड और हाथो की तपिश अब भी महसूस हो रही थी. सब खाना खा रहे थे लेकिन मैं बेदिली से खा रही थी.

एक आग जो मेरे बदन में लगी हुई थी कम नहीं हो रही थी. मामा भी दूसरी तरफ चुप चुप थे और वो भी वही सोच रहे होंगे जो मैं सोच रही थी. मामा एक लंबे क़द और सेहत मंद जिस्म के मालिक थे. वो और भाई दोनो ही डेली जिम जाया करते थे और इसी वजह से दोनो में बहुत दोस्ती थी. मेरी कज़िन्स मुझ से बातें कर रही थी लेकिन मुझे कोई दिलचस्पी नही हो रही थी. मैं अपने बारे में गौर कर रही थी कि मैं एक दुबली पतली परंतु लंबी थी. मेरी आँखे ब्राउन और स्किन कलर फेर था जबकि बाल बहुत ही सिल्की और बड़े थे.

मैं अपने बारे में सोच ही रही थी कि खाना ख़तम हुआ और अब हमलोग चाय का लुफ्त उठा रहे थे और सब ही गॅप शॅप कर रहे थे. रात के अब 11 हो गये थे और आख़िर पापा ने कहा, अब सब सो जाएँ क्योंकि मॉर्निंग मे ब्रेक फास्ट कर के सब को वापिस जाना है. हॉल मने कार्पेट पर बिस्तर सेट होने लगे और मैं हॉल की दीवार के पास खिडकी के नीचे अपने बिस्तर पर लेट गयी.

तमाम जेंट्स के बिस्तर हॉल में एक साथ सेट हुए और उनके पैरों की तरफ कुछ फ़ासले के बाद लॅडीस के बिस्तर सेट हुए. मैने देखा कि मामा मेरी खिडकी के बाद एक खिडकी छोड़ कर दूसरी खिडकी के पास बेड पर थे और उनके बराबर पापा का बेड था… हम सब के लेटने के बाद हॉल की लाइट ऑफ कर दी गयी.

मेरी विंडो से चाँदनी रात छन छन कर मेरे बेड पर गिर रही थी और खिडकी के नीचे लगी हुई रात की रानी की खुश्बू ने मुझे मस्त कर दिया था. मैं लेटे लेटे मामा के बारे मैं सोच रही थी कि जो कुछ आज स्विम्मिंग पूल मैं हुआ था वो कितना हस्सीन था. मुझे अब भी ख़यालों में मामा का लंड चूत के क़रीब और हाथ मम्मों पर महसूस हो रहा था.

मैं ने अपने हाथ शर्ट के अंदर से अपने मम्मों पर लगाए तो महसूस हुआ कि मेरे मम्मे अब भी खुशी में खूब तने हुवे थे.. मैने दूसरे हाथ को शलवार के अंदर डाला और चूत को छुआ तो मज़ा आ रहा था.

मैं ने सोने की कोशिस की लेकिन मुझ से तो लेटा भी नहीं जा रहा था, बस करवट बदल रही थी. मैं तो बेड पर फॉरन सोने की आदी थी लेकिन आज तो नींद नाराज़ हो गयी थी. हॉल मे ख़र्राटों की आवाज़े आ रही थी और ठंडी चाँदनी मेरे ऊपेर थी.

मैं मामा के बारे में सोच रही थी कि वो सोते हुए मेरे बारे मे ख्वाब ज़रूर देख रहे होंगे. मेरी हालत आज के वाक़्ये के बारे में सोच कर बर्दाश्त से बाहर हो रही थी. कम्बख़्त नींद भी नही आ रही थी..

मैने अपने ऊपेर से चादर (शीट) हटाई और अपनी शर्ट ऊपर कर के अपने जिस्म को नंगा किया. हल्की हल्की चाँदनी में कुछ नज़र तो आ रहा था लेकिन सॉफ नहीं था. मैने शर्ट और सलवार दोनो उतार दी और अब मैं नंगी हो गयी. मैं अपने हाथों से अपने जिस्म को सहलाने लगी और मुझे मज़ा आने लगा. अपनी उंगलियों से चूत को छुआ तो और भी मज़ा आने लगा.

मेरे अंदर से भाप(स्टीम) निकल रही थी और लग रहा था कि मेरा जिस्म आग से पिघल(मेल्ट) ना जाय.चैन नहीं आ रहा था और समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ बस दिल चाह रहा था कि मामा मेरे पास आ जाए और मेर साथ लेट जाएँ.यह सोचते ही मेरे ज़हन में एक ख्याल बिजली की तरह आया कि क्यों ना मैं खुद ही मामा के पास चली जाऊं. फिर सोचा कि कहीं गड़बड़ ना हो जाय और मामा कुछ और ही ना कर दें.

जिस्म था कि ज़ालिम सुकून नहीं पा रहा था. मैं अपने हाथों से अपनी चूत और बूब को सहला रही थी लेकिन ज्यों ज्यों मैं सहलाती आग और भड़क उठती मैं एक दम नंगी ही खड़ी हो गयी और हॉल में देखा कि हर तरफ अंधेरा ही छाया हुआ है. मामा वाली खिडकी पर शायद परदा था जो कि बहुत ही मुश्किल से नज़र आ रहा था.

मैने सोचा कि आज या फिर कभी नहीं. यह सोचना था कि सारा खोफ़ ख़तम और मैं एक निडर और बेखौफ़ लड़की की तरह हो गयी. मैं आहिस्ता आहिस्ता मामा की तरफ बढ़ रही थी. एक विंडो छोड़ी और दूसरी खिडकी तक पहुँच गयी. इसी खिडकी के किनारे मामा थे.  मैं नंगी ही थी और मामा के बराबर लेट गयी. मामा ने चादर ओढ़ रखी थी.

मामा सो रहे थे और उनकी साँसों की आवाज़ें आ रही थी. मुझे दुख हुआ कि मेर अंदर आग लगा कर खुद किस मज़े से सो रहे हैं. मैने आहिस्ताः से उनकी चादर उठाई और उनके बराबर ही लेट गयी. मामा के जिस्म की गरमी मेरे जिस्म पर महसूस हो रही थी. मामा गहरी नींद में थे और सीधे लेटे हुवे थे.

मैने अपना हाथ मामा की हाफ पैंट पर से लंड पर रखा तो मामा की तरह वो भी सोया हुआ था. मैं करवट लेकर उनके और क़रीब हो गयी और अपने हाथों से उनके सीने को हाथ लगाया और उंगलिओ से सहलाने लगी लेकिन क्या नींद थी कि उन पर कोई असर नहीं हुआ. मैने अपने हाथ बढ़ाए और उनकी हाफ पैंट मे, जो कि बिल्कुल लूस थी, अपने हाथ डाल कर लंड तक पहुँच गयी.

उनका लंड ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई ठंडा गोश्त हो. मैं ने अपनी उंगलियो से उनके लंड को सहलाना शुरू कर दिया. चन्द ही लम्हों मे उनका लंड कुछ हरकत में आ गया.

मेरी उंगलियाँ उनके लंड को जगा रही थी और उनका लंड भी रफ़्ताह रफ़्ताह जाग रहा था. तभी अचानक मामा ने करवट बदली और उनका चेहरा मेरी तरफ हो गया. मैने हाथ निकाला नहीं और सहलाती ही रही.

मेरे होन्ट मामा के होन्ट के क़रीब हो गये और मेरे मम्मे उनकी छाती पर लग गये. मैने उनके होंटो से अपने होन्ट चिपका लिए और उंगलिओ से उनका लंड सहलाती रही. उनका लंड काफ़ी बड़ा हो चुका था मगर अब भी वो लेटा ही हुआ था. मैने मामा के होंटो को अपने होंटो मे ले लिया.

उनके होंटो को चूसा तो ऐसा लगा कि मेरे होंटो मैं कोई मीठी और गरम सी चीज़ आ गयी. होंटो को चूमा तो मेरा जलता हुआ जिस्म और दहक गया. मामा का लंड तेज़ी से और बड़ा हो रहा था और अब खड़ा होने लगा था. मैने अपने हाथों से लंड को पकड़ लिया. मेरे हाथों ने पहली बार किसी लंड को छुआ था. लंड इतना मोटा था कि मेरी हथेली में नहीं आ रहा था और लंबा कितना था उसका अंदाज़ा ही मुश्किल था. लंड मेरी हथैली मे ऐसा मचल रहा था कि हाथों से बाहर निकलना चाहता हो.

मामा के लंड की तपिश से मेरी हथैली गीली हो रही थी और लंड की वेन्स तैज़ी से हिल रही थी. काश मैं मामा का लंड देख सकती. मैं होंटो को चूस रही थी कि अचानक मामा की सोने वाली साँसे रुक गयीं. वो यक़ीनन जाग चुके थे लेकिन मैं डर नहीं रही थी और बिल्कुल नॉर्मल थी. मामा ने अपने हाथों से मुझे हटाना चाहा तो उनको महसूस हुआ कि मैं तो नंगी हूँ.

उनका हाथ मेरी कमर पर रुक गया. अब उनके हाथों ने मेरे जिस्म को नीचे की तरफ टटोला तो मेरा पूरा बदन ही नंगा मिला. उनका लंड और सख़्त हो गया और उन्हों ने कुछ देर तक रुकने के बाद मुझे अपने हाथों से सीने पर चिपका लिया और खुद ही प्यार करने लगे.

मेरा काम ख़तम हुआ और अब मैं मामा की मर्ज़ी पर थी. मामा मुझे प्यार कर रहे थे और अपने मज़बूत हाथों से मेरे 15 साल के सिल्की, बैदाग और गरम जिस्म को मसल रहे थे.

मैं खुश थी और मामा की आगोश में बहुत ही महफूज़ महसूस कर रही थी. मामा के बराबर पापा की ख़र्राटों की आवाज़े मुसलसल आ रही थी. मैने हाथ बढ़ा कर मामा को गले लगा लिया और कुछ ज़ोर से उनसे चिमट गयी. मामा ने अपनी हाफ पैंट उतार दी और शर्ट तो थी ही नहीं. मामा का लंड मेरी चूत पर था और मेरी थाइस के अंदर जाने की कोशिस कर रहा था.

मैने अपनी ऊपेर वाली जाँघ को ज़रा ऊपेर किया और मामा का लंड अंदर चला गया. लंड को अंदर पाया तो मैने अपनी जाँघ वापिस रख दी और मामा का पूरा लोहे की तरह सख़्त लंड मेरी जाँघ को क्रॉस करता हुआ बाहर झाँक रहा था. मामा मेरे होंटो, गालों और आँखों को चूम रहे थे और मैं भी उनको चूम रही थी जबकि उनका लंड मेरी चूत के दाने को मसल रहा था. मेरे पेरो मैं एक आग का गोला था जो अंदर ही अंदर घूम रहा था.

मैं मामा को चूमते हुए पागल हो गयी और उनके मूँह मे अपनी नाज़ुक ज़ुबान डाल दी. मामा ने मुझे अपनी बाँहो में जकड़ा हुआ था और मैं एक कंवारी लड़की मामा को अपने सीने से चिपका कर उनकी ज़ुबान को काट रही थी.मामा ने मुझे सीधा लिटा दिया और खुद मेरी टाँगों के बीच आ गये.

पूरे हॉल मे खामोशी थी और सब ही गहरी नींद सो रहे थे. मामा ने अपना लंड मेरी चूत पर रखा. मेरी चूत तो वैसे ही इतनी देर मे गीली हो चुकी थी.

उन्होने लंड को मेरी चूत पर रख कर अंदर डालने की कोशिस की. उनका तपता (हॉट) हुआ लंड मेरी चूत पर रखा तो चूत पर नई लज़्ज़त सी महसूस हुई. उनका लंड ज्योन्ही मेरी चूत के दरवाज़े को खोल कर ज़रा सा ही अंदर दाखिल हुआ तो मेरी चूत मे दर्द शुरू हो गया. ऐसा लग रहा था कि कोई पहाड़ मेरी चूत के अंदर आ रहा है.चूत में मामा का लंड फँस गया और ज्योन्ही कुछ और अंदर आया मेरी तो चीख निकल ने लगी और दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

मैने चादर अपने मूँह में ठूंस ली जबकि मामा को कुछ पता ही नहीं था कि मुझ पर कैसी क़यामत टूट रही है. एक लम्हे को दिल चाहा कि वहाँ से भाग जाऊं लैकिन फिर सोचा कि ऐसा मोक़ा कभी नही आएगा. सोचा, आज या फिर कभी नहीं. मामा का लंड और अंदर आया और अब मेरी बर्दाश्त ने जवाब दे दिया और चादर मूँह मे ठूँसने के बावजूद एक हल्की सी चीख निकल गयी. मामा ने चीख सुनी तो एक दम मेरे ऊपेर आ गये. उन्हों ने मेर होंटो को चूमना चाहा तो वहाँ चादर थी.

वो समझ गये कि उनके लंड ने क्या कर दिया हे. उन्हों ने मेरी आँखों पर हाथ लगाया तो वहाँ आँसू बह रहे थे. मामा ने अपना मूँह मेरी आँखों पर रखा और आँसू को पीने लगे. उनका लंड अब भी वहीं था. मामा मेर ऊपेर लेटे हुवे थे और मैं उनके बोझ(वेट) के नीचे दबी हुई थी लेकिन उसकी तकलीफ़ लंड से पैदा होने वाली चूत की तकलीफ़ के सामने कुछ भी नहीं थी.मामा मुझे प्यार करने लगे और आहिस्ताः आहिस्ता लंड को अंदर डालने लगे. मेरा अंदाज़ा था कि एक इंच फी मिनिट की रफ़्तार से लंड अंदर जा रहा था.

मैने मामा को दर्द की शिदत से अपनी बाँहों मे लिपटा लिया था. मेरी चूत मे मिर्ची सी लग रही थी और लग रहा था कि कंवारी चूत लंड की वजह से टुकड़े टुकड़े(पीस) हो जाए गी. मामा के होंटो ने मेरे होंटो को चूसते हुवे मेरी तकलीफ़ देह चीखों को बंद कर दिया था. लंड अंदर जा रहा था जैसे कोई साँप(स्नॅक) अपने बिल मे दाखिल हो रहा हो. एक मुक़ाम पर आ कर उनका लंड रुक गया और मैं महसूस कर रही थी कि एक परदा है जिसने उनके लंड को रोका हुआ है.

यह मैं जानती थी कि कंवारी लड़कियों मे अक्सर एक परदा होता है. मामा का लंड रुका हुआ था और ना मालून कितना अंदर गया था और कितना बाहर रह कर अंदर जाने के लिए बैताब था. मामा ने मेरी गर्दन के नीचे हाथ डालकर मुझे और ज़ोर से अपने से चिमटा लिया और मेर दोनो होंटो को अपने मूँह में ले लिया.

मामा इसी तरह मेरे ऊपेर से ज़रा ऊपेर उठे. उनका पैर ऊपेर हुआ जिससे उनका लंड थोड़ा सा बाहर निकला और फिर उन्हों ने मेरी गर्दन को खूब ज़ोर से भींचा और फिर एक दम उन्हों ने अपने लंड को खोफ़नाक झटका दिया और मेरी चूत के पर्दे को पाश पाश (पीस) कर दिया. मेरी आँखे उबल पड़ी, मेरी चीख निकल गयी, मेरी चूत मे जैसे बॉम्ब फॅट गया. पूरा हॉल रोशन लग रहा था. मेरी आँखों में तारे नाचने लगे. मेरा जिस्म काँपने लगा और मामा का लंड पूरी तरह अंदर जा चुका था.

मैं रो रही थी और मैं अपने हाथों से मामा को धकैल रही थी. लेकिन कहाँ मैं दुबली सी सिर्फ़ 17 साल की लड़की और कहाँ लहीम शाहेम मामा. मुझे पेन नहीं बल्कि मेरा पूरा जिस्म टुकड़े टुकड़े हो चुका था. मैने मामा को अपनी बाँहों से जकड लिया और अपने होंटो को मामा के होंटो से आज़ाद कर के दर्द की शिदत से मामा के राइट साइड के शोल्डर को जो कि मेरे होंठो के क़रीब था पर अपने दाँत (टीत) गाढ (काट) दिया.

मुझ में जितनी ताक़त थी उतनी शिदत से मामा के कंधे पर अपने दाँतों को गाढ दिया. मैं उनके कंधे को इस ज़ोर से काट रही थी कि मुझे मामा के कंधे से नमकीन खून (ब्लड ) का स्वाद महसूस हो रहा था. मामा की भी दर्द के मारे सिसकियाँ निकल रही थी. इसी दोरान मुझा अपनी चूत मे से कोई गरम गरम पदार्थ बहता हुआ महसूस हुआ. यक़ीनन यह मेरी कंवारी चूत से बहता हुआ खून था जोकि रह रह के बह रहा था.

मामा मेरे मम्मों को चूस रहे थे और मैं उनके कंधे को ही काट रही थी. अब मेरे पेन में रफ़्ता रफ़्ता कमी हो रही थी. मैने मामा के होंटो पर अपने होन्ट रख दिए और उनको चूसने लगी. दर्द की कमी के बाद मेरी चूत मे सज़ा हुआ मामा का लंड अच्छा लग रहा था.

मामा ने मुझे प्यार करता हुआ पाया तो वो शायद कुछ मुत्मिन (बेफ़िक्र) हो गये और जवाब मे मुझे भी प्यार करने लगे. मैं लंड के बारे मे सोच रही थी कि कितना बड़ा होगा काश मैं देख सकती. अब मामा ने लंड को आहिस्ताः आहिस्ताः बाहर निकाल कर अंदर डालना शुरू कर दिया. मामा का खोफ़नाक लंड अब दर्द की मंज़िल तय कर चुका था और मेरे जिस्म मे हल्की हल्की लज़्ज़त और मज़ा मिल रहा था. अभी मैं इस लज़्ज़त को महसूस ही कर रही थी कि बराबर लेटे हुवे पापा का हाथ मेर सीने पर आ गया.

मेरे पापा का हाथ उनकी बेटी के सीने पर था मैं मुस्कुरा दी लेकिन वो खर्राटे ले रहे थे. मैने उनका हाथ सीने पर से हटा दिया और मामा के लंड की तरफ मुतवजह हो गयी. मामा का लंड अंदर बाहर हो रहा था और गोया कि मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था लेकिन मज़ा ज़्यादा आ रहा था. आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैं मामा को प्यार कर रही थी और वो मेरे मम्मों और होंठो को चाट रहे थे.

मैने मामा को अपनी बाँहों (आर्म्स) से क़रीब किया हुआ था. मामा के लंड में अब तैज़ी आ रही थी और मैं भी अपनी चूत से उनके लंड को अंदर बाहर कर रही थी. चारो तरफ खामोशी थी और रात की रानी ने पूरे हॉल को महका दिया था.

मैने मामा के गालों को प्यार किया और फिर उनके मूँह मे अपनी ज़ुबान डाल दी. मामा की ज़ुबान ने मेरी ज़ुबान को चूसना शुरू कर दिया और लंड ने मेरी चूत मे सेक्स की चिंगारी जला रखी थी.मामा की रफ़्तार और तेज हो गयी थी और रफ़्ताह रफ़्ताह तेज़ी मे इज़ाफ़ा हो रहा था. मैने अपनी दोनो टाँगों को मामा की कमर के गिर्द फेला दिया था और खुद भी धक्के लगा रही थी. अब हम दोनो ही एज हो गये थे. दर्द तो था लेकिन बहुत ही कम. मामा ने एक बार फिर मुझे भींच लिया और लंड की रफ़्तार खूब तेज हो गयी थी.

मेरी चूत भी लंड को पाकर पागल हो चुकी थी. मामा के लंड मे कुछ देर तक तेज़ी रही और हम दोनो के किस भी गहरे और लंबे होते गये. मामा के लंड से गरम गरम गाढ़ा पदार्थ निकला और उसने मेरी चूत के अंदर तमाम हिस्सों को भर दिया. मेरी चूत इस नयी और सेक्सी तब्दीली को महसूस कर के खुद भी निढाल हो गयी और अंदर से एक नया सैलाब बहने लगा.

मेरा पूरा वुजूद सुकून और राहत में डूब गया. मैने मामा की तरह इस लम्हे एक दूसरे को खूब ज़ोर ज़ोर से किस किया. मामा का लंड मेरी चूत के अंदर ही अपने अंदर से एक एक क़तरे को बाहर निकाल रहा था और मेरी चूत का जूस भी निकल रहा था. मामा मेरे ऊपेर लेटे हुए प्यार कर रहे थे.

मैने ऊपेर लेटे मामा की कमर पर 3 टाइम एसएसएस लिखा और वो थोड़ी देर के लिए मेरे लिखने पर कुछ रुके और फिर प्यार करने लगे. मामा का लंड अब वापिस आने लगा था और थोड़ी देर बाद जब बाहर निकला तो चूत मे बंद हम दोनो का निकला हुआ वीर्य निकल ने लगा. मामा मेरे पहलू मे आ गये और मुझे गले लगा लिया.

मैने मामा के मुक़ाबले मे उनको खूब किस किया और काफ़ी देर तक उनके साथ चिमटी रही. मैने एक बार फिर मामा के सीने पर अपनी नाज़ुक उंगलिओ से 3 बार एसएसएस लिखा यानी कि मेरा पूरा नाम समा सलमान सुरती मैने देखा कि दूर कहीं सूरज निकल रहा है. मैने मामा के होंठो पर उस रात का आखरी किस किया और नंगी ही अपने बेड पर चली गयी. मामा को शायद यह मालूम था कि नहीं कि मैं कॉन हूँ.

उन्होने हॉल में मोजूद किस लड़की की जवानी को अपने लंड से क़ुबूल किया है. मैं अपने बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी और खुश गवार यादें मेरी रूह मे मुस्तक़िल जगह बना चुकी थी. मेरी चूत के अंदर और बाहर अब भी हल्का हल्का दर्द था मगर सुरूर मे डूबा हुआ महसूस हो रहा था.

मैने चादर ओडी और कुछ देर बाद नींद की आगोश मे नंगी ही चली गयी. हाल मे लोगों के शोर पर उठी तो मालूम हुआ कि लोग जागना शुरू हो गये थे. मैने चादर के अंदर ही अपने कपड़े पहने और बेड पर बैठ गयी. मामा पापा और दूसरे लोगों के साथ ब्रेक फास्ट की तैयारी कर रहे थे जबकि भाई सब लोगों को जगा रहे थे.

मामा समेत काफ़ी लोगों ने अपना समान पॅक कर लिया था. चूँकि नाश्ते के बाद सब का वापिस जाने का प्रोग्राम था. मैं वॉश रूम से फारिघ् होकर मामा के पास बैठ गयी. मामा ने पूछा, रात कैसी गुज़री, नींद अच्छी से आई या नहीं. मैने कहा, ज़बरदस्त, ऐसी मुबारक रात सब को मिले. यह सुन कर सब ही मुस्कुराने लगे. भाई ने पूछा, समा ! तैराकी अच्छे से सीखली ना.

मैने जवाब दिया, बहुत कुछ सीख लिया. हम लोग घर पहुँच गये और मामा हमलोगों को छोड़ कर अपने घर चले गये. उन्हे जाते हुए देख कर मैने मुस्कुरा कर शुक्रिया अदा किया और वो मुस्कराते हुए चले गये. मैं दिल मे सोच रही थी कि अब अगली बार मामा से किस तरह मज़ा लूँगी और अब तो कोई मुश्किल भी नही.

मैं अपने कमरे मे चली गयी और शवर लेकेर सो गयी. सारी रात तो जागी थी. मैं ने तो फार्म हाउस मे अपनी ज़िंदगी की सब से सुहानी रात गुज़ारी थी. शाम को सो कर उठी और भाभी के कमरे मे चली गयी.

वो भी अभी सो कर उठी थी. शायद उन्हों ने भी भाई के साथ फार्म हाउस का लुफ्त उठाया था. भाई शवर ले रहे थे. भाभी ने मुझ से कहा, समा ! तुम पिक्कनीक के बाद कितनी खुश ओर फ्रेश नज़र आ रही हो. मैं सिर्फ़ मुस्कुरा दी. भाभी ने फार्म हाउस वाला बेग निकाला कि समान सेट कर लें और इतने में भाई हस्बे आदत बनियान और शॉर्ट पहने हुए हाथ में तोलिआ (टवल) लिए हुए आ गये. उन्हों ने मुझे देख कर पूछा, पिक्निक कैसी रही | मैं ने कहा, भाई बहुत मज़ा आया.

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