मेरी पहली चुदाई मौसी की लड़की के साथ

गतांग से आगे …

उसने भी जोरदार कश लगाया. मेरा मन थोडा बढ़ गया. इस बार मैंने उसके होठों पर सिगरेट ही नहीं रखा बल्कि अपने उँगलियों से उसकी होठों को सहलाने भी लगा. उसे बुरा नहीं माना. मैं उसके होठों को छूने लगा. वो चुचाप मेरे कंधे पर रखे हुए हाथ से मेरे गालों को छूने लगी. हम दोनों चुपचाप एक दुसरे के होंठ और गाल सहला रहे थे. धीरे धीरे मेरा लंड खड़ा हो रहा था. सिगरेट ख़तम हो चुका था. मैंने एक हाथ से उसके चूची को हलके से दबाया. वो हलके के मुस्कुराने लगी. मैंने उसकी चूची को और थोड़ी जोर से दबाया वो कुछ नही बोली. अब मै आराम से उसकी दोनों चुचियों को दबाने लगा. धीरे धीरे मैंने अपने होठ उसके होठ पर ले गया. और उसे किस किया. उसने भी मेरे होठों को अपने होठो से लगाया और हम दोनों एक दुसरे के होठों को दस मिनट तक चूसते रहे. इस बीच मेरा हाथ उसकी चुचियों पर से हटा नहीं. अच्छी तरह उसके होठ चूसने के बाद मैंने उसे छोड़ा. उसके चुचियों पर से हाथ हटाया. उसके चूची के ऊपर के कपडे पर सिलवटें पड़ गयी थी. उसने अपने कपडे ठीक किये. मैंने कहा – अनन्या अब हमें चलना चाहिए . अनन्या – रुकन, थोड़ी देर के बाद एक और पियेंगे, तब चलना. मैंने कहा – ठीक है. अनन्या ने कहा – मुझे पिशाब लगी है. मैंने कहा – कर ले बगल की झाड़ी में. अनन्या – मुझे झाडी में डर लगता है.

तू भी चल. मैंने कहा – मेरे सामने करेगी क्या ? अनन्या – नहीं. लेकिन तू मेरी बगल में रहना. पीछे से कोई सांप- बिच्छु आ गया तो? मैंने – ठीक है. चल. मै उसे ले कर निचे की तरफ झाडी के पीछे चला गया. बोला – कर ले यहाँ. वो बोली – ठीक है. लेकिन तू मेरे पीछे देखते रहना. कोई सांप- बिच्छू ना आ जाये. कह कर मेरे तरफ पीठ कर के उसने अपने स्कर्ट के अन्दर हाथ डाला और अपनी पेंटी को घुटनों के नीचे सरका ली. दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | और स्कर्ट को ऊपर कर के पिशाब करने बैठ गयी. पीछे से उसकी गोरी गोरी गांड दिख रही थी. और उसकी पिशाब उसके चूत से होते हुए उसके गांड की दरार में से हो कर नीचे कर गिर रहे थे. उसकी पिशाब की आवाज़ काफी जोर जोर से आ रही थी. थोड़ी देर में उसकी पिशाब समाप्त हो गयी. वो खड़ी हो गयी. उसने अपनी पेंटी को ऊपर किया. और बोली – चलो अब. मैंने कहा – तू जा के बैठ. मै भी पिशाब कर के आता हूँ. वो बोली – तो कर ले न अभी. मैंने कहा – तू जायेगी तब तो. वो बोली – अरे,जब मै लड़की होकर तेरे सामने मूत सकती हूँ तो क्या तू लड़का हो के मेरे सामने नहीं मूत सकता?

मै बोला- ठीक है. मै हल्का सा मुड़ा और अपनी पैंट खोल कर कमर से नीचे कर दिया. फिर मैंने अपना अंडरवियर को ऊपर से नीचे कर अपने लंड को निकाला. अनन्या के गांड को देख कर ये खड़ा हो गया था. मैंने अपने लंड के मुंह पर से चमड़ी को नीचे किया और जोर से पिशाब करना शरूकिया. मेरा पिशाब लगभग तीन मीटर की दुरी पर गिर रहा था. अनन्या आँखे फाड़ मेरे लंड और पिशाब के धार को देख रही थी. वो अचानक मेरे सामने आ गयी और बोली – बाप रे बाप. तेरी पिशाब इतनी दूर गिर रही है. मैंने अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए कहा – देखती नहीं कितना बड़ा है मेरा लंड. ये लंड नहीं फायर ब्रिगेड का पम्प है. जिधर जिधर घुमाऊंगा उधर उधर बारिश कर दूंगा. अनन्या हँसते हुए बोली – मै घुमाऊं तेरे पम्प को? मैंने कहा – घुमा. अनन्या ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे दायें बाएं घुमाने लगी. मेरे पिशाब जहाँ तहां गिर रहा था. उसे बड़ी मस्ती आ रही थी. लेकिन मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था..मेरा पिशाब ख़तम हो गया. लेकिन अनन्या ने मेरे लंड को नहीं छोड़ा. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. बोली – तेरा लंड कितना बड़ा है. कभी किसी को चोदा है तुने? मैंने – नहीं, कभी मौका नहीं मिला. मैंने कहा – तू भी अपनी चूत दिखा न अनन्या. अनन्या ने अपनी पेंटी को नीचे सरका दिया और

स्कर्ट ऊपर कर के अपना चूत का दर्शन कराने लगी.

घने घने बालों वाली चूत एक दम मस्त थी.मैंने लपक कर उसकी चूत में हाथ लगाया और सहलाते हुए कहा – हाय, क्या मस्त चूत है तेरी. मुठ मार दूँ तेरी? अनन्या – मार दे. मै उसके चूत में उंगली डाल कर उसकी मुठ मारने लगा. वो आँखे बंद कर सिसकारी भरने लगी. मैंने कहा – पहले किसी से चुदवायी हो या नहीं? अनन्या – हाँ, कई बार. मैंने कहा – अरे वाह. तू तो एकदम एक्सपर्ट है. अचानक उसने मेरी पेंट और अंडरवियर खोल दिया. और अपनी पेंटी को पूरी तरह से खोल कर जमीन पर लेट गयी. बोली – राधेश्याम , मेरे चूत में अपना लंड डाल कर मुझे चोद लो. आज तू भी एक्सपर्ट बन जा. . मेरी भी गरमी का कोई ठिकाना नहीं था. मैंने अपना लंबा लंड उसके चूत के डाला और अन्दर की तरफ धकेला. पहले तो कुछ दिक्कत सी लगी. लेकिन मैंने जोर लगाया और पूरा लंड उसके चूत में डाल दिया. अचानक उसकी चीख निकल गयी. लेकिन मैंने उसकी चीख की परवाह नही की और उसकी चुदाई चालू कर दी. वो भी मेरे लंड से अपनी चूत की चुदाई के मज़े लेने लगी. थोड़ी देर में उसके चूत ने माल निकाल दिया. मेरे लंड ने भी उसके चूत में ही माल निकाल दिया. हम दोनों अब ठन्डे हो गए थे. हम दोनों ने कपडे पहने और झाड़ियों में से निकल कर पेड़ के नीचे चले गए. वहां हम दोनों ने सिगरेट का सुट्टा मारा. लेकिन मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था. मैंने कहा – अनन्या , चल न एक बार फिर से करते हैं.इस बार मज़े ले ले कर करेंगे. अनन्या – चलो. हम दोनों फिर से एक विशाल झाड़ियों के बीच चले गए.उस झाड़ियों के बीच मैंने कुछ झाड उखाड़े और हम दोनों के लेटने लायक जमीन को खाली कर के पूरी तरह नंगे हो गए. फिर हम दोनों ने एक दुसरे के अंगो को जी भर के चूमा चूसा. उसने मेरे लंड को चूसा. मैंने उसके चूत को चूसा. मैंने उसके दोनों चूची को जी भर में मसला . फिर आधे घंटे के चूमने चूसने के बाद मैंने उसकी चुदाई चालू की. बीस मिनट तक उसकी दमदार चुदाई के बाद मेरा माल निकला. फिर थोड़ी देर सुस्ताने के बाद हम दोनों ने कपडे पहने और वापस घर चले आये. अगले दिन गनेश, अनन्या और मै उसी अड्डे पर आये.आज मन में बड़ी उदासी थी. सोच रहा था कि आज अगर गनेश साथ ना होता तो आज भी मज़े करता. अनन्या भी यही सोच रही थी.

कहानी जारी है … आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे …