पूरा डालो भाई बड़ी प्यासी है मेरी चूत

मे ने एक पुरानी चादर नीचे बिछा दी और एक तकिया उसके चुतड के नीचे लगा दिया और जैनब एक क्रीम लाई और उसने क्रीम मेरे लंड पर लगाई फिर नूर की चूत पर भी थोड़ी सी क्रीम लगाई मुझे ये कहने मे ज़रा भी संकोच नही कि जैनब एक तजुर्बेकार कुतिया थी फिर मैं धीरे धीरे अपना लंड नूर की बुर पर लगा कर अंदर घुसाने लगा .मेरा लंड क्रीम की वजह से जैसे स्लिप हो रहा था नूर की चूत मे हां लेकिन चूत बहुत टाइट थी और कुछ ही देर में मेरा आधा लंड अंदर चला गया था लेकिन नूर को बहुत दर्द हो रहा था जैनब उस के मुँह पर अपना मुँह रख कर किस्सिंग कर रही थी ताकि वो आवाज़ ना करे और मे कुछ देर के लिए रुक गया मेरा आधा लंड नूर की चूत मे घुसा हुआ था , और कोई 2 मिनट के बाद नूर ही नीचे से कुछ उपर हुई शायद उसे अब अच्छा लगने लगा था वो अब गरम होती जा रही थी नूर ने मुझ से पूछा कि अभी कितना लंड बचा है ,मे ने बाकी का लंड भी आहिस्ता आहिस्ता अंदर डाल दिया और दुबारा कुछ देर के लिए रुक गया. जस्ट 5 मिनट के बाद नूर ने जैनब को हटा दिया आंड वी वर फक्किंग लाइक एनितिंग वो मुस्कुरा रही थी मेरी कमर पर हाथ फेर रही थी मे ने पूछा भी ज़्यादा दर्द हो रहा है क्या वो बोली हां हो रहा है थोड़ा लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा है और कुछ देर बाद नूर ने मुझे बताया दर्द बिल्कुल गायब हो गया है, और वो नीचे से पूरे रिदम से मेरे धक्को का जवाब दे रही थी | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | जैनब उस के बूबज़ चूस रही थी नूर को अब पूरा मज़ा मिल रहा था वो पूरी तरह मस्त हो रही थी और उस ने मुझे कस लिया अपनी टाँगो से और बोली भाई ज़ोर से प्लीज़ ज़ोर से हां अंदर पूरा अंदर ले लो मेरी , फाड़ दो प्लीज़ हां ऐसे ही हां भाई हां और अंदर और अंदर और फिर वो ठंडी पड़ गई और मे भी बहुत करीब था और लास्ट सेकेंड पर मे ने लंड निकाल लिया और सारा कम उस के पेट पर निकाल दिया और थक कर नूर की साइड मे बहाल हो कर लेट गया. जैनब ने नूर से पूछा ईज़ शी ऑलराइट? वो बोली हां दर्द है लेकिन ज़्यादा नही, जैनब ने लाइट जलाई पिल्लो और चादर पर थोड़ा ब्लड था और थोड़ा मुझ पर भी लगा हुआ था और नूर की टाँगो पर से मे उठा और बाथरूम मे गया और नूर भी मेरे पीछे आ गयी और उस ने मुझे साफ किया पानी से और फिर खुद नहाने लगी और मे बाहर आ गया . तब तक जैनब बेड फ्रेश कर चुकी थी मे ने पानी पीया और लेट गया, अब जैनब मेरे पास आई और मेरी टाँगों और पेट पर हाथ फेरने लगे, तो मे ने कहा मे इतना थक क्यों गया यार पहले तो ऐसा नहीं हुआ कभी तो वो बोली उस का 1स्ट टाइम था और तुम्हे रुकना भी पड़ा बीच मे उस से थक गये हो मे अभी रिलॅक्स कर देती हूँ आंड शी स्टार्टेड मसाजिंग मी फॉर सम टाइम और जब मेरा लंड सहलाया तो वो फिर खड़ा होने लगा , वो बोली अभी बिल्कुल फ्रेश हो जाओगे और उस के बाद उस ने चूसना शुरू कर दिया मेरा लंड , और मुझे कहना चाहिए वो बहुत दिलसे…. चूस रही थी वरना लड़कियाँ बस जान ही छुड़ाती हैं बट शी टोल्ड मी उसे लंड मुँह मे लेना बहुत पसंद है, आंड शी कॅन सक फॉर अवर’स. बस फिर भी वो मेरे लंड को चुसती रही फिर उसने मेरे सारे शरीर पर अपने होंठो से चूमना शुरू किया अब मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था जैनब ने मेरे ऊपर बैठ कर मेरा लंड अपनी चूत मे ले लिया और धक्के लगाना सुरू कर दिया …उस की चूत ना तो बहुत टाइट थी ना ही बहुत ढीली और मुझे महनत नही करनी पड़ रही थी और लंड बहुत आराम से अंदर बाहर हो रहा था और दोनो को मज़ा आ रहा था नूर बाहर आई बाथरूम से तब मैं जैनब की टाँगे उठा कर चोद रहा था वो मेरे पास आई और मेरे होंठो को चूमने लगी . मैने देखा उस का फेस पीला पड़ गया था और वो बहुत थकि हुई लग रही थी मैने उस को गाल पर चूमा और कहा मेरा बच्चा जाओ और थोड़ा रेस्ट करो सुबह मुझे तुम बिल्कुल फ्रेश चाहिए ,वो मेरी बात ,मान गयी और जा कर लेट गयी मे भी करीब ही था फारिग होने के और इस बार मैं जैनब के अंदर ही झाड़ा मे सुबह जल्दी उठा था और यूनिवर्सिटी चला गया वहाँ भी मसरूफ़ियत ही रही दोपहेर मे घर आया तो सिर्फ़ अम्मी और नैना दीदी ही थीं, जैनब और नूर कहीं गयी हुईं थीं,मे ना चाहते हुए भी उन से नजरे चुरा रहा था, मे ने खाना खाया और मैं माँ शाजिया दीदी आज उन दोनो को भी औरत की तरह देख रहा था बल्कि तोल रहा था,नैना दीदी मुझ से 4 साल बड़ी थी और बदन मे नूर से काफ़ी भरी भरी थीं,जिस्म कुछ भारी,बड़ी बड़ी चुचियाँ कुछ 36डी की तो हों गी ही. मैं खाना खा कर सो गया और कोई सात बजे मुझे जैनब ने उठाया वो चाइ लाई थी और मुझे उठा के बोली उठो नबाब सोई तो मे भी नहीं हू सारी रात, हाआँ तो सो जाती, मे सो जाती तो तुम्हारी खिदमत कोन करता, अच्छा आज सो जाना मे और नूर कुछ ना कुछ कर ही लेंगे, अच्छा तुम्हे कंवारी मिल गयी तो इसलिए? अरे नहीं यार ये कह कर मेने उसे अपने पास खींच लिया, उस के रसीले होंटो को चूमा उस के बूबज़ प्रेस किए दिल तो कर रहा था यहीं चोद भी दूँ लेकिन… बोली छोड़ो कोई आ जाए गा, अच्छा ना हां लेकिन मे मस्ती कर रहा था तुम मेरी जान हो तुम बहुत अच्छी लग रही हो, आच्छा अच्छा ज़्यादा बटरिंग मत करो चाइ पीओ और फिर मेरे और नूर के लिए आइस क्रीम ले कर आओ, अरे आइस्क्रीम की क्या ज़रूरत है मे रात को क्रीम दूं गा ना?, जी नहीं रात को क्रीम देनी है तो अभी आइस क्रीम लानी ही होगी वो आँख मारते बोली और रूम से निकल गई. बस फिर रात आ ही गयी और 2 भी बज गए मे उठा और नूर के रूम मे गया डोर खुला था लेकिन अंदर सिर्फ़ नूर ही थी मे ने सोचा जैनब शायद बाथरूम मे है लेकिन वहाँ की लाइट बुझी हुई थी, मे ने नूर से पूछा जैनब कहाँ है तो वो बोली भाई आ जाएगी अभी मे हूँ ना. अरे वो तो तुम हो लेकिन मे ऐसे ही पूछ रहा था, वो भाई वो असल मे असिद भाई के रूम मे गई है. क्या? हरसद के रूम मे , जी वो कल लाइट गयी हुई थी ना तो सब छत पर थे तो हरसद भाई ने पकड़ लिया था जैनब को, फिर आज भी गए थे दोनो छत पर, तो अभी वो बोली मे जा रही हूँ वसीम आए तो संभाल लेना. मुझे हर्ट तो हुआ लेकिन मे काफ़ी दिन से देख रहा था कि उसके और हरसद भाई के बीच कुछ चल ही रहा है,बस फिर मे और नूर एक दूजे मे गुम हो गए, उस ने मेरे कपड़े उतारे और मे ने उस के, और फिर वो मेरा लंड सहलाने लगी और आख़िर चूसना शुरू कर दिया,जैसे कोई बच्चा लॉली पोप चूसता है,उस के मुँह से पक पक की आवाज़ आ रही थी जब वो ज़ोर से लंड को चूस रही थी और.आज वो मेरी तरफ देख भी रही थी. मे फिर घूम के 69 पोज़ीशन मे आ गया और उसकी चूत चाटने लगा, मुझे अच्छा लगता था जब मे उसके क्लिट कोज़ोर से होंटो मे दबाता और वो आआई आआई की आवाज़ निकालती थी, बस फिर हम रेडी थे और मे ने उस को बेड पर लिटाया और उसकी टाँगे पूरी तरहा उठा के उस की टाँगो के बीच आ गया,और मेरा लंड उसकी चूत मेजाने के लिए तैयार था मे ने इसी पोज़िशन मे उसे काफ़ी देर तक चोदा, हम दोनो को पसीने आ गया था और दिल भी भर गया था.. हां लेकिन मज़ा बहुत आ रहा था मेरा लंड बहुत फँस के जा रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वो अंदर से खीच रही थी वो मेरा लंड. नूर नीचे से फुल ज़ोर लगा रही थी और यही मुझे पसंद भी था,वरना ज़्यादा तर लड़कियाँ तो बस पड़ी रहती हैं मुर्दे की तरह उन की बला से कुछ भी होता रहे… जैसे कि आप का मज़ा और उन की सज़ा. और फिर वो बोली भाई मे झड़ने के पास हू बहुत ज़ोर से करो और पूरा डाल के रूको थोड़ी देर मे फील करना चाहती हूँ फूल्लनेस हाआँ ऐसे ही भाई ऐसे ही यू आर ग्रेट,जो कुछ मन था आज तक सब सच हो जाएगा आप के साथ लगता है… हां तो क्यों नहीं जो भी हसरत हो तुम्हारी मुझे बताना मे ज़रूर पूरी करूँगा ..हां मेरा निकल रहा है हाआअँ ज़ोर से ज़ोर से और वो ढीली पड़ गयी और मे भी करीब ही था आंड फिर मे ने लास्ट एंड पर अपना लंड निकाल लिया और सारा कम उस के पेट पर निकाल दिया क्यों कि मैं खुद को या उस को किसी मुश्किल मे नहीं डालना चाहता था. बस फिर रूम मे वापस आया और बाथरूम से निकला ही था कि मुझे नैना दीदी की आवाज़ आई वसीम.. मे ने कहा जी दीदी? वो बोली कब से चल रहा है??ज़मीन मेरे पाँवो के नीचे से निकल गई!!!! फिर भी मे ने पूछा क्या चल रहा है दीदी? तुम मुझे पागल समझते हो? मे अभी नूर के ही रूम से आ रही हूँ. तुम कल भी बिस्तेर पर नहीं थे मुझे तभी शक़ हुआ था या हुआ क्या है तुम दोनो भाइयो को वो बड़ा जैनब को ले के बैठा हुआ है और तुम तो तुम नूर को ही… मे चुप रहा तो वो बोली मे कुछ बकवास कर रही हूँ .. वो दीदी …वो.. क्या वोव ….दीदी ये सब उस जैनब ने ही शुरू किया है… और नूर? नही दीदी उस का कोई कसूर नही. तुम्हे शरम आती है? हां नूर का क्यों कसूर होने लगा अभी अभी उस के साथ मुँह को काला कर के आ रहे हो,नही दीदी नूर को भी जैनब ने ही लगाया है इस लाइन पर. अच्छा नूर की बड़ी फिकर है उस की हिमयात की जा रही है उसकी तन्हाई मिटाई जा रही है उस की प्यास भी बुझा रहे हो. रूम मे अंधेरा था और मुझे उन की आवाज़ ही आ पा रही थी तभी वो बोलीं ” कभी अपनी दीदी का भी सोचा है … मे भी तो पूरी पूरी रात यहाँ प्यासी लेटी रहती हूँ… मुझे यकीन नहीं हुआ मे ने कहा जी | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो बोली जी हां. अब खड़े क्या हो जल्दी इधर आओ… रूम मे अधेरा था मे अंदाज़े से दीदी के बेड का पास गया उन्हों ने अपने हाथ बढ़ा कर मेरा हाथ पकड़ लिया और मे उन की बगल मे बैठ गया, और उन्हों ने अपने हाथ अपने सीने पर रख लिए, और बोली ये सब कब से चल रहा है मे ने कहा दीदी 3 रातो से, अच्छा और तुम तो कह रहे हो सब जैनब ने शुरू किया लेकिन जैनब तो हरसद के साथ है, मे अभी देख कर आ रही हूँ. हां दीदी वो आज रात हरसद भाई के साथ है लेकिन उस से पहले मे वो और नूर सब साथ थे… तुम्हारा मतलब है तीनों एक साथ? जी दीदी, वसीम ये सब इस घर मे हो क्या रहा है? दीदी बस सब कैसे शुरू हो गया पता भी नही चला, हां पर तुम दोनो भाइयों को देख कर मैं आज बहुत गरम हो गयी हूँ. आने के बाद खुद को 2 दफ़ा ठंडा कर चुकी हूँ लेकिन ये आग है कि कम ही नही हो रही,तुम तो जानते हो ज़ुल्फी अभी भी एक साल के बाद आएगा वापस यू एस ए से तब कहीं जा कर हमारी शादी होगी(ज़ुल्फी दीदी का मंगेतर था) मे सुन कर हैरान तो हुआ कि दीदी क्या कह रही हैं हां लेकिन मुझे कुछ दुख भी हुआ, और मे ने कहा दीदी आप क्यों फिकर करती हैं मे हूँ ना और मे ने झुक के दीदी के माथे पर चूम लिया और फिर गाल पर और अगले ही लहमे मेरे होन्ट दीदी के होंठो पर थे. मुझे कहना चाहिए कि दीदी जानती थीं आर्ट ऑफ किस्सिंग और मेरा निचला लिप और ज़ुबान खूब चूस रही थीं फिर मे ने अपने हाथ घुमाने शुरू कर दिए दीदी पर और उन की चुचियों और चुचियों से पीठ और फिर रानों और फिर उन की टाँगो के बीच हाथ घुमाने लगा दीदी की शलवार कुछ नम नम थी और जब मे ने हाथ चूत के बिल्कुल उपर रखा तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत पर रगड़ने लगीं, और आह आह की आवाज़ करने लगी उन की चूत पूरी गीली थी और शलवार के उपर से महसूस हो रही थी. मेरे लंड मे भी हीट आ गयी थी और वो टाइट होता जा रहा था, मे ने दीदी को बुरी तरह चूमना शुरू कर दिया और उन्हों ने जगह दी और मे सिंगल बेड पर उन के बराबर लेट गया और मेरा एक हाथ उन के लेफ्ट बूब पर और मेरा राइट हॅंड उन की चूत पर था और मे उन की चूत को रगड़ रहा था ज़ोर ज़ोरर से और साथ ही हम किस्सिंग कर रहे थे. कुछ देर बाद मे ने दीदी से कहा दीदी कपड़े उतारो तभी मज़ा आए गा, तो वो बोलीं तो उतार दो मे ने कहा नही आप मेरे उतारो मे आप के उतारूँगा और उठ का बैठे लेटे लेटे मज़ा नही आए गा, दीदी बोली अच्छा 3 दिन मे ही एक्सपर्ट हो गये हो, मे उठा और जा कर फ़ैन कुछ तेज किया डोर का लॉक चेक किया, नाइट लॅंप जला दिया और बेड पर वापस आ गया. दीदी उठ बैठी मे ने दीदी की कमीज़ साइड से पकड़ कर उठाई और उन्हों ने दोनो हाथ उठा दिया फिर मे ने दीदी से कहा अब आप मेरी शर्ट उतारो उन्हों ने मेरी शर्ट उतार दी और फिर मे ने उन की ब्रा खोली और एक तरफ उछाल दी मुझे पहली बार दीदी की चुचियों की झलक नेज़र आई, दीदी ने दोनो हाथों से चुचियों को छुपाने की कोशिस की, बड़ी बड़ी चुचिया थी और उठी हुई और टाइट भी थी जैसे कुँवारी लड़कियों की होती हैं मे दबा के देख ही चुका था.

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