Category: रोमांटिक कहानियां

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यह भी एक सच्चाई है क्या?

दोस्तों आज मै जो कुछ भी भेज रही लिख कर वो सब एकदम सच है मेरे सामने आंगन में फैली धूप सिमटकर दीवारों पर चढ़ गई और कन्धे पर बस्ता लटकाए नन्हे-नन्हे बच्चों के झुंड-के-झुंड दिखाई दिए, तो एकाएक ही मुझे समय का आभास हुआ। घंटा भर हो गया यहाँ खड़े-खड़े और अरुन का अभी […]

फाड़ दो मेरी चूत तुम्हारी है मेरे सेम राजा

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम विश्वा है, मैं मंगलौर का रहने वाला हूँ आज ख़ास मैं अपना कीमती वक्त निकाल कर आपके लिए अपनी नई देशी भाभी की कहानी लाया हूं और मुझे ये पूरी उम्मीद है की मेरी ये समय बर्बाद नहीं होगा क्योकि आप सभी को ये कहानी जरुर मजा देगी. कहानी तब शुरू […]

ये कैसा इंसाफ – 23

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है: ये कैसा इंसाफ – 22 उसका ध्यान फिर नैना की तरफ गया जो अनुष्का के उठकर उसके करीब आने की प्रतीक्षा कर रही थी। वो औरत दो खून कर चुकी थी और अब निश्चय ही तीसरा—या चौथा, खुद उसका भी—खून करने से हिचकने वाली नहीं थी। जब भी […]

ये कैसा इंसाफ – 22

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है: ये कैसा इंसाफ – 21 ‘ये दिल्ली में पड़ी एक बैंक डकैती में लूटे माल का हिस्सा है’—रितेश बोला—‘ये नोट ट्रेस किये जा सकते हैं। सारे हिन्दोस्तान की पुलिस को इन नोटों के सीरियल नम्बरों की खबर है। ऊपर से ये रुपया पांच सौ के एकदम नये […]

ये कैसा इंसाफ – 21

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है: ये कैसा इंसाफ – 20 ‘इसका जवाब है कि इसने ऐसा नहीं किया। इसने रात को बाल धोकर ब्यूटी पार्लर की मेहनत की ऐसी तैसी नहीं फेरी। ब्यूटी पार्लर की मेहनत की ऐसी तैसी उस तेज बारिश ने की जिसमें कि ये कत्ल के बाद ही गुप्ता […]

ये कैसा इंसाफ – 20

ये कैसा इंसाफ – 20, एक तो रोशनी कम थी और दूसरे बारिश तेज थी लेकिन इतना मुझे फिर भी दिखाई दिया था कि वह औरत थी और सिर से पांव तक पूरी तरह से भीगी हुई थी उसके गीले बाल लटों की सूरत में उसके चेहरे पर लटक आये थे और उनमें से पानी बह रहा था। उसके हाथ में एक बन्डल था जिससे अपना सिर ढंकने की जगह वो उसे अपनी छाती से चिमटाये हुए थी

ये कैसा इंसाफ – 19

विभा पर निगाह पड़ते ही मिथलेश स्प्रिंग लगे खिलौने की तरह अपनी कुर्सी से उठा। विभा को रिधिमा के चंगुल में फंसी होने का उसने एक ही मतलब लगाया कि वो मिथलेश के आदेशानुसार टैक्सी में नहीं बैठी रही थी। वह उसके बचाव के लिए आगे झपटा तो कैप्टन का राक्षस जैसा विशालकाय शरीर उसके रास्ते में आया।

ये कैसा इंसाफ – 18

ये कैसा इंसाफ – 18, मैं खुली खिड़की के रास्ते बाहर निकलने ही लगा कि मुझे बाहर तुम्हारे पहुंचने की आहट मिली थी मैं खिड़कियों के पहलू में दीवार के साथ लग कर बाद में खिड़की से बाहर झांका था तो मैंने एक साये को चमेली के झाड़ की जड़ में बैठे पाया था मैं समझ गया था कि कोई जवाहरात हथियाने की फिराक में था तब मैं फौरन खिड़की से बाहर कूद पड़ा था

ये कैसा इंसाफ – 17

ये कैसा इंसाफ – 17 स्टोर में इतनी स्तब्धता थी कि अनुष्का को अपनी कनपटियों में बजते खून और पहलू में धड़कते दिल की आवाजें साफ सुनायी दे रही थीं उसे दहशत हो गई है कि मौजूदा हालत में जवाहरात की उसके पास बरामदी उसे कत्ल के इलजाम में गिरफ्तार करा सकती है। इसीलिए वो उन जवाहरात से पीछा छुड़ाना चाहता है।

ये कैसा इंसाफ – 16

ये कैसा इंसाफ – 16, जवाहरात चमेली के झाड़ से खोद निकालने के बाद उसके बाद वह क्या करेगी उनका? उन्हें अपने पास रखे रहना खतरनाक साबित हो सकता था वह लपक कर बीच के दरवाजे के पास पहुंची और झिरी के करीब कान ले जाकर भीतर चल रहा वार्तालाप सुनने की कोशिश करने लगी