Category: रोमांटिक कहानियां

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ये कैसा इंसाफ – 20

ये कैसा इंसाफ – 20, एक तो रोशनी कम थी और दूसरे बारिश तेज थी लेकिन इतना मुझे फिर भी दिखाई दिया था कि वह औरत थी और सिर से पांव तक पूरी तरह से भीगी हुई थी उसके गीले बाल लटों की सूरत में उसके चेहरे पर लटक आये थे और उनमें से पानी बह रहा था। उसके हाथ में एक बन्डल था जिससे अपना सिर ढंकने की जगह वो उसे अपनी छाती से चिमटाये हुए थी

ये कैसा इंसाफ – 19

विभा पर निगाह पड़ते ही मिथलेश स्प्रिंग लगे खिलौने की तरह अपनी कुर्सी से उठा। विभा को रिधिमा के चंगुल में फंसी होने का उसने एक ही मतलब लगाया कि वो मिथलेश के आदेशानुसार टैक्सी में नहीं बैठी रही थी। वह उसके बचाव के लिए आगे झपटा तो कैप्टन का राक्षस जैसा विशालकाय शरीर उसके रास्ते में आया।

ये कैसा इंसाफ – 18

ये कैसा इंसाफ – 18, मैं खुली खिड़की के रास्ते बाहर निकलने ही लगा कि मुझे बाहर तुम्हारे पहुंचने की आहट मिली थी मैं खिड़कियों के पहलू में दीवार के साथ लग कर बाद में खिड़की से बाहर झांका था तो मैंने एक साये को चमेली के झाड़ की जड़ में बैठे पाया था मैं समझ गया था कि कोई जवाहरात हथियाने की फिराक में था तब मैं फौरन खिड़की से बाहर कूद पड़ा था

ये कैसा इंसाफ – 17

ये कैसा इंसाफ – 17 स्टोर में इतनी स्तब्धता थी कि अनुष्का को अपनी कनपटियों में बजते खून और पहलू में धड़कते दिल की आवाजें साफ सुनायी दे रही थीं उसे दहशत हो गई है कि मौजूदा हालत में जवाहरात की उसके पास बरामदी उसे कत्ल के इलजाम में गिरफ्तार करा सकती है। इसीलिए वो उन जवाहरात से पीछा छुड़ाना चाहता है।

ये कैसा इंसाफ – 16

ये कैसा इंसाफ – 16, जवाहरात चमेली के झाड़ से खोद निकालने के बाद उसके बाद वह क्या करेगी उनका? उन्हें अपने पास रखे रहना खतरनाक साबित हो सकता था वह लपक कर बीच के दरवाजे के पास पहुंची और झिरी के करीब कान ले जाकर भीतर चल रहा वार्तालाप सुनने की कोशिश करने लगी

ये कैसा इंसाफ – 15

ये कैसा इंसाफ – 15, जब तुम्हें मेरा एतबार नहीं जब तुम ये समझते हो कि मैं तुम्हारे खिलाफ पुलिस के कान भर सकता हूं अगर मैं राझना को भी न पकड़वा पाती तो पता नहीं वो मेरा या मेरे परिवार की क्या गत बनाता। और सौ बातों की एक बात ये कि पहले मुझे नहीं मालूम था कि वो रुपया चेरी का था

ये कैसा इंसाफ – 14

ये कैसा इंसाफ – 14, हाथ से लगभग निकल ही चुकी पुरानी माशूक वापिस मिल गयी यहा माशूका कोई लड़की नही एक लिफाफा है जिसमे की पचास लाख रुपये के जवाहरात थे

ये कैसा इंसाफ – 13

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है: ये कैसा इंसाफ – 12 ‘ज्यादा पहले से नहीं मालूम था। अभी सोमवार को ही मालूम हुआ था। उस शाम मैंने गुप्ता के साथ उसके बंगले पर ही डिनर किया था। उस रात वो बहुत खुश था और उसने पी भी आम दिनों से ज्यादा ली थी। […]

ये कैसा इंसाफ – 12

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है: ये कैसा इंसाफ – 11 ‘कल रात’—वह निर्णायक स्वर में बोला—‘जब मैं गुप्ता के बंगले पर गया था और मुझे वहां उसकी लाश पड़ी मिली थी तो रास्ते में शेरबहादुर मुझे बंगले के करीब एक पेड़ के नीचे खड़ा मिला था।’ ‘क्या?’—इन्स्पेक्टर हकबकाकर बोला—‘कहां खड़ा मिला था […]

मैंने कुवारी माँ की सुहागरात पे सील तोड़ा

मेरी माँ अभी तक कुवारी हैं बाप के मरने के बाद मैंने माँ से शादी कर लिया और मैंने कुवारी माँ की सुहागरात पे सील तोड़ा चुत और गांड दोनों का जिससे वो बेहोश हो गई और उनके बेहोश होने के बाद मैंने अपना सब जगह की सील तोड़कर उन्हें होश में लाया जिससे होश में आते ही वो चिल्लाने लगी उनकी चुदाई करके मैंने उन्हें अपने बच्चे की माँ बना दिया