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अजब रिश्तो में गजब चुदाई -2

अजब रिश्तो में गजब चुदाई -1

दीप वहा से निकल के घर आता है। खाना खा के अपने कमरे में आराम करने लगता है। मन ही मन नीरज की चाची को चोदने के बारे में सोचने लगता है। वो थोडा डरा हुआ भी था और खुश भी। जिंदगी में पहली बार वो किसी औरत को चोदने वाला था।
इधर नित्या भी आराम कर रही थी। लेकिन आज उसे नींद नहीं आ रही थी।रह रह के उसे दशरत का लंड याद आ रहा था। जितना वो उसे याद कर रही थी उसकी चूत में आग उतनी ही भड़क रही थी। उसकी चूत गीली हो रही थी। उससे अब सहा नहीं जा रहा था। उसने अपनी साडी ऊपर खींची और चूत को उंगली से सहलाने लगी। गीली चूत को सहलाने उसकी उत्तेजना में और बढ़ोतरी हो गयी। उसने अपने पैरो को फैलाके घुटनो से मोड़ लिया और चूत में उंगली डाल के आगे पीछे करने लगी। वो उत्तेजना में ये भी भूल गयी की दीप घर पे ही है। वो मस्ती में अपनी चूत चोदे जा रही थी। उसी वक़्त दीप अपने कमरे से निकल के नित्या के रूम की तरफ आ रहा था। खिड़की थोड़ी खुली थी। दीप जैसे ही वहा से गुजरा उसे अपनी माँ की नंगी चूत एकदम से दिखाई पड़ी।वो वही रुक के देखने लग गया। नित्या की आँखे बंद थी। वो चूत में उंगली ड़ाले जा रही थी।*

दीप ये सब देख के हैरान रह गया।उसे क्या करू कुछ समझ नहीं आया। जब तक वो समझ पाता की क्या करना है तब तक देर हो चुकी थी। उसकी आँखे अपनी माँ की चिकनी गोरी चूत पर टिक गयी थी। वो उसे देखे जा रहा था। उसका लंड उड़ने लगा था। उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसकी माँ उंगली से अपनी चूत चोद रही थी।और वो भी दिन के इस समय। वो नजारा देख उसे बुखार सा आने लगा था। नित्या अब अपनी चरम सीमा पर पहोच चुकी थी।

दीप को ये बात समझ आ गयी वो तुरंत अपने कमरे में चला गया। बिस्तर पे धड़ाम से गिर गया और सोचने लगा। नीरज शायद सही कह रहा था। औरत लंड के बिना जादा दिन नहीं रह सकती। लेकिन क्या बाबा माँ को चोदते नहीं होंगे?? क्या माँ भी नीरज जैसे किसी और के पास…..नहीं नहीं ये नहीं हो सकता….लेकिन फिर वो उंगली से क्यू चोद रही थी अपनी चूत को?? ऐसे कई सवाल उसके दिमाग में दौड़ने लगे थे।
उसकी ये तंद्रि नीरज के फ़ोन से टूटी। नीरज उसे बुला रहा था। उसने आता हु बोल के फोन रख दिया। आज का दिन उसके लिए बहोत अजीब था। पता नहीं और क्या क्या उसे देखने सुनने मिलाने वाला था।
यहाँ सोना दिनभर दीप की यादो में खोयी हुई थी। उसका मन क्लास में बिलकुल भी नहीं था। वो तो बस स्कूल खत्म होने का इन्तजार बड़ी बेसब्री से कर रही थी।

दीप घर से निकल के सीधा नीरज के तबेले में पहोचता है। नीरज ने उसे बता दिया था की चाची उसको वही मिलेगी। दीप थोडा नर्वस था। पहली बार किसी की चुदाई करने वाला था। वो अंदर गया तो उसने देखा की चाची अंदर एक कोने में बैठी थी। उसे देख के वो उसकी तरफ आती है।
चाची:- ह्म्म्म आ गये तुम….तुम पे तो मेरी नजर बहोत दिनों से थी….चाची उसके एकदम करीब जाके उसका कालर पकड़ के अपनी तरफ खिंचती हुए कहती है।
दीप:- मतलब??
चाची:- मतलब ये की तू तो मुझे बहोत पहले से हु पसंद है…ये फ़ोटो खिंच के मुझे धमकी देने की क्या जरुरत थी??ऐसेही आके मुझे बोल देता…खुशीसे बिछ जाती तेरे आगे।…….चाची दीप के एकदम करीब जाके अपनी भारी भरकम चुचिया उसके सीने से दबाते हुए और अपनी चूत उसके लंड के करीब दबाते हुए कहा।
दीप के हाथ भी अनायास उसकी कमर पे आ जाते है।
दीप:- (उसे कमर से पकड़ के अपनी और थोडा खिचता है) अगर मैं इतना ही पसंद था तो खुद क्यू नहीं आयी मेरे पास??
चाची:- धत्त…कोई औरत खुद चलके थोड़ी ना आती है…अपनी चूत दीप के लंड से दबा के थोडा उसके लंड का जायजा लेती है। जब उसे अहसास होता है की दीप का लंड खड़ा हो चूका है और साइज़ में काफी बड़ा है तो वो अपना एक हाथ निचे ले जाके उसे पैंट के ऊपर से पकड़ने की कोशिश करती है।

चाची:- उईई माँ मैं मर गयी….इतना बड़ा लंड??? वो थोडा पीछे हट के देखती है। बापरे मैंने आज तक इतना बड़ा लंड नहीं देखा….उफ्फ्फ्फ्फ़ आज तो। मजा आ जायेगा स्स्स्स्स् …..कितनो की चूत फाड़ी है तूने आजतक इससे??
दीप:- नहीं आज पहली बार है।
चाची:- हाय रे इतना बड़ा लंड लेके घूम रहा है और अब तक कुँवारा है….ये तो ऐसा है की किसी भी औरत ने देख लिया तो खुद चूत खोल के बैठ जायेगी इस पर अह्ह्ह मेरी तो चूत इसे छूने से ही गीली होने लगी है। उम्म्म्म्म्म मेरे राजा ….चल मेरे साथ तुझे आज जन्नत की सैर कराती हु।
चाची उसे लेके घांस के पास लेके जाती है जहा एक गद्दा डाला हुआ था। जो शायद नीरज ने डाल के रखा था। वहा जाके चाची निचे बैठ जाती है। दीप के पैंट की चैन खोल के उसका लंड बाहर निकालती है।

चाची:-स्स्स्स हाय रे जालिम *कहा था तू अब तक उम्म्म्म …..चाची दीप का लंड हातो में पकड़ के हिलाने लगाती है। पहली बार किसी औरत का हाथ अपने लंड पे पाकर दीप पागल सा होने लगा था। उत्तेजना के मारे उसका लंड और भी कड़क होने लगा था। चाची तो जैसे अपने होश खो चुकी थी। वो लंड को अपनी मुठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी पर वो उसकी मुट्ठी में समां नहीं रहा था। वो उसे दोनों हाथो से पकड़ के उसका सुपाड़ा मुह में भर लिया।

दीप तो जैसे हवा में उड़ने लगा था। उत्तेजना के मारे उसके मुह से सिसकियो के अलावा और कुछ नहीं निकल रहा था।
चाची:-अह्ह्ह्ह दीप उम्म्म्म्म अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा। ऐसा लग रहा कब इसे अंदर लू। आजा मेरे राजा डाल दे इसे मेरी चूत में।…..चाची निचे लेट के अपनी साडी ऊपर खीच उसे अपनी चूत दिखाते हुए कहती है।
दीप घुटनो पे बैठ जाता है और उसकी चूत पे लंड रखता है पर पहली बार होने की वजह से उसे कुछ समझ नहीं आता।*
चाची:- उम्म्म हाय रे मेरे अनाड़ी बलमा….चची उसका लंड पकड़ के चूत के मुह पे रखती है…..अब इसे धीरे धीरे अंदर डाल….दीप थोडा जोर लगाता है …उसके लंड का सुपाड़ा चाची की चूत में घुस चूका था। चूत गीली थी पर दीप का लंड बहोत मोटा था। वो थोडा और जोर लगाता है लेकिन हड़बड़ाहट में कुछ जादा ही जोर लग जाता है। लंड एक झटके में ही पूरा अंदर चला जाता है। चाची की चींख निकल जाती है। उसकी आँखों से पानी निकलने लगता है।
चाची:- आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् मार डाला रे …मर गई माँ अह्ह्ह्ह पागल कही के उफ्फ्फ्फ्फ्फ इतनी जोर से डालता है क्या कोई?? अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ उईई माँ ….चाची दर्द के मारे करहाने लगाती है।
दीप:- माफ़ करना चाची…वो गलती से हो गया….बाहर निकलू क्या??

चाची:- अह्ह्ह्ह नहीं मेरे अनाड़ी बलमा…स्स्स्स्स् अब रहने दे…पहली बार इतना मोटा लंड एक झटके में चूत लिया है तो थोडा दर्द होता ही है। उफ्फ्फ्फ्फ़ आज तो तूने मेरी चूत फड़वाने की तम्मन्ना पूरी कर दी अह्ह्ह्ह्ह अभी तेरा लंड बहोत अच्छा लग रहा है चूत में स्सस्सस्सस लेकिन किसी कुवारी लड़की को चोदेगा ना तो ध्यान से और धीरे चोदना…वरना मर जायेगी बिचारी…..
दीप:- अह्ह्ह्ह चाची मुझे भी बहोत अच्छा लग रहा है स्स्स्स…चाची अपना ब्लाउज खोलो ना…तुमारी चुचिया देखना चाहता हु।*
चाची ने ऍम ब्लाउज खोल दिया। दीप उसकी नंगी चुचिया देख बहोत खुश हो जाता है। वो उसे दोनों हातो से जोर जोर से दबाने लग गया।*
चाची:- अह्ह्ह्ह स्स्स्स इन्हे धीरे धीरे प्यार से दबाना होता है अह्ह्ह्ह उम्म्म्म फिर इसके निप्पल को मुह में लेके बारी बारी चूसना होता है ….औरतो को ये बात बहोत पसंद होती है।

दीप चाची की बात मान के उसकी चुचिया चूसने लगा। फिर चाची के कहे नुसार धीरे धीरे अपना लंड चूत में आगे पीछे करने लगा। चाची पागल सी हो रही थी। उसे आज तक इतना मजा किसीने नहीं दिया था।
दीप को भी बहोत मजा आ रहा था। वो अब थोडा फ़ास्ट फ़ास्ट चाची की चूत चोद रहा था। पांच मिनट में ही चाची झड़ चुकी थी। दीप भी अब झड़ने वाला था।
चाची:- अह्ह्ह्ह्ह स्स्स्स उफ्फ्फ्फ़ दीप मेरे राजा उम्म्म्म्म्म*
दीप:-अह्ह्ह्ह चाची स्स्स्स मेरा पानी निकलने वाला है स्सस्सस्स आपके मुह में दू क्या?? मैंने देखा था सुबह आपको लंड का पानी पीना बहोत पसंद है।
चाची:- अह्ह्ह्ह्ह हा दे दे अह्ह्ह्ह स्सस्सस्स

दीप अपना लंड चाची के मुह में देता है चाची उसे चूसने लगती है। दीप अह्ह्ह उम्म्म्म करते झड़ने लगा था। चाची उसके लंड से निकलती वीर्य की पिचकारियां अपने मुह में लेने लगती है।चाची का पूरा मुह दीप के वीर्य से भर गया था।*
चाची:- उफ्फ्फ्फ्फ़ जितना दमदार तेरा लंड है उतना अच्छा वीर्य है तेरा। उम्म्म्म मजा आ गया हाय रे स्स्स्स्स्
दीप:- क्यू चाची नीरज के साथ मजा नहीं आता क्या??
चाची:- अरे पागल…सब्जी रोटी और पंच पकवान में कोई फर्क होता है की नहीं???तेरा लंड तो पंच पकवान समान है मेरी जान अह्ह्ह्ह आज लग रहा है की पहली बार चुदी हु उम्म्म्म
दीप:- अहह चाची सच में बहोत मजा आता है चुदाई में …चलो मैं जाता हु अभी…
चाची:- अरे रुक कहा जा रहा है??एक बार और चोद मुझे स्स्स्स मन नहीं भरा मेरा …
दीप:- लेकिन चाची मेरा लंड तो अभी छोटा है…
चाची:- तू फ़िक्र मत कर अभी 2 मिनट में खड़ा करती हु।
दीप:- एक बात पुछु?? आपको अपना पति। के अलावा दूसरे मर्द से चुदवाने में बुरा नहीं लगता??
चाची:- लगता था पहले….लेकिन ये चूत की प्यास बड़ी अजीब होती है मेरे राजा….चाची दीप का लंड पकड़ के उसे जुबान से चाटती हुए कहती है।
दीप:- अह्ह्ह्ह चाची क्या मस्त चुसती हो आप अह्ह्ह्ह….चाची एक बात बताओ आपने नीरज को फसाया या उसने आप को??
चाची:- अरे ये नीरज बहोत हरामी किसम का लड़का है….तू उसे ऐसा वैसा मत समझ….उसने अपनी सगी बहन को नहीं छोड़ा…
दीप ये सुनके शॉक हो गया।
दीप:- क्या मतलब???

चाची:- उसे मत कहना मैंने तुम्हे बताया है….वो अपनी बड़ी बहन के साथ चुदाई करता था। ये देख के ही तो मैंने उसे अपनी चुदाई के लिए मजबूर किया था।
दीप:- क्या बात कर रही हो चाची??
चाची:- हा सच में मेरे राजा…अपने गाँव में तो ये नार्मल चीज है। लगबघ हर घर में भाई अपनी बहन की जवानी का मजा लेते है। कोई कोई तो अपनी माँ को भी चोदता है।
दीप:- ऐसा कैसे हो सकता है??
चाची:- क्यू नहीं हो सकता?? नीरज को ही लेलो अगर उसकी माँ अगर थोड़ी जवान होती ना तो वो उसको भी चोद देता। उसका क्या मेरा बेटा जवान होता तो मैं भी उससे चुदवा लेती।

दीप ये सुनके हक्का बक्का था। उसे एकदम दोपहर का नजारा याद आ गया उसके माँ की चूत का नजारा.…जो चाची के चूत से कही जादा सुन्दर थी। उसे वो बात याद आते ही उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा था।

इधर नित्या की नींद मोबाइल बजने से खुल जाती है। लेकिन उसका फ़ोन नहीं था। वो आवाज दीप के रूम से आ रही थी। वो उठ के बाहर जाती है। दीप के कमरे में देखती है तो वहा कोई नहीं था। सिर्फ उसका मोबाइल था। वो इधर उधर देखती है मगर वो नहीं था। तब तक कॉल कट जाता है। वो देखती है फ़ोन किसका था तभी फिरसे फ़ोन बजने लगता है। वो उसे उठा लेती है। नीरज का फ़ोन था मगर नित्या आगे कुछ बोले उससे पहले उधर से नीरज बोल पड़ा…..नीरज:-भाई चाची की चूत चोदने में इतना बिजी हो गया क्या?? और कितना चोदेगा भाई?? देखना कोई तबेले में आके तुम्हारी चुदाई लीला ना देख ले। और जल्दी निपटा ले।ये सुनके नित्या के पैरो तले जमीन सरक जाती है। उसकी आवाज तो मानो जैसे चली गयी हो। उसे कुछ सूझता नहीं वो झट से फ़ोन कट कर देती है। नीरज की चाची??दीप??येक्या चक्कर है?? और दीप उसकी चाची को चोद रहा है??

मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा….मैंने सुना तो था की वो औरत एक नंबर की चुद्दकड़ है पर दीप ???हे भगवन ये क्या है?? अभी उसके तबेले में जाके देखती हु…नित्या वैसेही दरवाजा बंद करके जल्दी जल्दी तबेले की तरफ निकल पड़ती है।वहा जाके वो चुपके से। देखती है पर उसे कही कुछ नजर नहीं आता। फिर वो थोडा अंदर जाती है और वो जो देखती है उसपे उसे बिलकुल विश्वास नहीं होता। दीप निचे लेटा हुआ था और चाची उसके लंड पे बैठ के खप खप उसे अपने चूत के अंदर बाहर कर रही थी। नित्या ये देख के हैरान रह जाती है। उसे गुस्सा आने लगता है।वो आगे बढ़ के उन दोनों को रोकना चाहती है पर उसके कदम वाही रुक जाते है।

क्यू की चाची अब दीप का लंड चूसने लगी थी। दीप के लंड का साइज़ देख उसका मुह खुला का खुला रह गया।नित्या:- बापरे इतना मोटा आउट लंबा लंड उफ्फ्फ्फ्फ़ ये तो दशरत के लंड से भी बड़ा है।यहाँ दीप अब अपने वीर्य की बरसात चाची के मुह में करने लगता है। चाची उसका वीर्य पि जाती है। और दोनों वाही गद्दे पे लेट जाते है।
उसी वक़्त प्रणीति स्कूल से आ जाती है।
प्रणीति:- माँ….ओ माँ…
नित्या अपने आप को सँभालती है और बाहर आती है।

नित्या:- हा क्यू चिल्ला रही है??जिन्दा हु मैं अभी…वो थोडा गुस्से में बोली।
प्रणीति:- गुस्सा क्यू कर रही हो?? और भैया कहा है?? वो हमे लेने आने वाले थे…
नित्या:- मुझे नहीं पता वो कहा है….मुझसे मत पूछ….
प्रणीति:- क्या हो क्या गया तुझे??इतना क्यू उखड़ी हुई है?? मुझ पे क्यू चिल्ला रही है??
नित्या:- जादा चु चपड़ मत कर…जा अपना काम कर….और हा सुन मैं आती हु थोडा बाहर जाके…
प्रणीति:- अब कहा। जा रही है?? बाबा आते ही होंगे…
नित्या उसे एक बार गुस्से से देखती है और बिना कुछ बोले बाहर चली जाती है। वो मन ही मन नीरज की चाची को सबक शिकाने की ठान लेती है। वो उसके घर पहोच के देखती है की उसका पति वहा बारामदे में बैठा था। उसे देख के वो थोडा सहम सी जाती है।

नित्या:- भैया नमस्ते…मीना कहा है??
पति:- अंदर है भाभी…अरे वो सुनाती हो…नित्या भाभी आयी है।
मीना:- अरे दीदी आओ ना अंदर…
नित्या उसे बहोत गुस्से से देखती है और अंदर चली जाती है।
मीना:- हा दीदी चाय बनाऊ??आज कैसे मेरे घर का रास्ता भूल गयी??
नित्या:- देख मीना…ये चिकनी चुपड़ी बाते मुझसे ना कर…इन बातो में मेरा बेटा आ सकता है मैं नहीं..
मीना ये सुनके सन्न रह जाती है…
मीना:- दीदी आप ये क्या कह रही हो??

नित्या:- जादा बन मत मैंने सब देख लिया है तबेले में तुम दोनों क्या कर रहे थे।
मीना मन ही मन सोचती है जब इसे पता चल ही गया है तो छुपाने से कोई फायदा नहीं…लेकिन अगर मैं इससे अच्छेसे बात नही करुँगी तो ये मेरे पति को बता देगी…और मेरा पति मुझे काट डालेगा।
मीना:- दीदी आप पहले शांत हो जाओ…इन्होंने सुन लिया तो मेरा क़त्ल कर देंगे। और हा दीदी वो मेरे पास आया था मैंने नहीं बुलाया था उसे।
नित्या:- मैं तुझर अछेसे जानती हु…बता कब से चल रहा है ये सब??
मीणा:- दीदी सच कह रही हु…और आज पहली बार था दीदी विश्वास करो मेरा मेरे बच्चों की कसम खा के कह
*ये सुनने के बाद नित्या थोड़ी शांत हो जाती है।
मीना:- दीदी आप फ़िक्र मत कीजिये आज के बाद ऐसा कुछ नहीं होगा। लेकिन आप इन्हें मत बताना।

नित्या:- देख मीना ये कच्ची उम्र में लड़के बहक जाते है…मैं नहीं चाहती की मेरा बीटा इन सब बातो पे पड़ के अपनी पढाई बर्बाद कर ले। मैं उसे भी समजाऊंगी….लेकिन तुझसे बिनती है मेरी ….
हीना:- दीदी आप फ़िक्र मत करो…अब तो चाय पियेंगी??
नित्या:- ठीक है…देख तूने अपने बच्चों की कसम खायी है।
हीना:- हा दीदी…हीना चाय बनाने लगती है।….नित्या भी अब शांत हो चुकी थी।…दीदी बुरा ना मानो तो एक बात कहू??
नित्या:- हो बोल….

हीना:- क्या मर्द बेटा पैदा किया है आपने….मेरी तो हालत ख़राब कर दी उसने आज…
नित्या:- चुप कर छिनाल कही की….
नित्या को गुस्सा नहीं आया ये देख वो और आगे बाते करने लगी।
हीना:- हाय दीदी सच में क्या तगड़ा लंड है उसका….मेरी चूत में तो अब तक दर्द हो रहा है।
नित्या ये सब सुनके क्या बोले ये सोच ही रही थी के हीना आगे बोलने लगी।
मीना:- दीदी सच में मेरे पति का इतना बड़ा होता न तो दिन रात चढ़ी रहती उसपे…
नित्या:- तू है ही एक नम्बर की छिनाल।

मीना:- अरे नहीं दीदी उसका लंड देख के तो अच्छे अच्छो की नियत डोल जाय। वो आपकी जगह काश मेरा बेटा होता….
नित्या:- चुप कर…और ये चुदाई का भुत निचे उतार अपने सर से। पागल हो गयी है तू। तेरा बेटा होता तो भी चुदवा लेती क्या उससे??
हीना:- हा क्यू नहीं दीदी…वो सरला है ना रोज अपने बेटे का लंड लेती है।
नित्या:- क्या कह रही तू??
हीना:-हा दीदी सच में…मैंने खुद देखा है अपनी आँखों से।
नित्या:- जितना सुनो उतना कम है अपने गाँव के बारे में…
हीना:- अरे दीदी मेरा तो मानना है की लंड किसी का भी मिले उसे बस लेलो अपनी चूत में।लंड और चूत में कैसा रिश्ता…वो तो एक दूसरे की प्यास बुझाने के लिए बने है।
नित्या कुछ बोल नहीं पा रही थी। वो गहरी सोच में पड़ गयी थी। हीना की बातो का असर उसपे हो चूका था। हीना ने भी जानबुज कर ये सारी बातें उससे कही थी। नित्या चाय खत्म कर के अपने घर की धीमे कदमो से। बड चली थी। लेकिन दिमाग में कई बाते एकसाथ उछलकूद कर रही थी। उसे हीना की कही हर बात याद आ रही थी। उसका जिस्म प्यासा तो था ही…लेकिन दो दिनों से उसे उस बात का अहसास कुछ जादा ही होने लगा था। पहले दशरत की वजह से और अब दीप और मीना की वजह से l
इधर तबेले में…….
नीरज:- और भाई मजा आया की नहीं??? कैसी रही तेरी पहली चुदाई??
दीप:- बहोत मजा आया यार….फिर कब दिलवाएगा??
नीरज:- जब तू बोले….
दीप:-एक काम कर ना यार आज रात का जुगाड़ कर ना कुछ……
नीरज:- ह्म्म्म क्या बात है अब तो तेरेसे रहा नहीं जा रहा…रात का तो नहीं बता सकता…फिर भी तुझे फ़ोन करता हु।
दीप को एकदम से याद आता है की उसका फ़ोन वो घर पे भूल आया था।*
दीप:- अरे यार मेरा फ़ोन घर पे ही रह गया।
नीरज उसे ये। बता पाता की उसने फ़ोन किया था तभी उसका मोबाइल बजता है।चाची का फ़ोन था। वो नीरज को नित्या के बारे में बताती है। सब सुनने के बाद नीरज दीप की तरफ मुड़ता है….

नीरज:- भाई तेरी गांड लग गयी….नित्या चाची ने तुझे और हीना चाची का चुदाई वाला खेल देख लिया…वो चाची से बात करने गयी थी उसके घर….अब तू गया बेटा…
दीप ये सुनके पसीना पसीना हो जाता है…उसे कुछ समझ नहीं आता वो क्या करे और क्या नहीं। घबराहट के मारे उसके मुह से आवाज नहीं निकलती।
नीरज:- यार बहोत बड़ी प्रॉब्लम हो गई…कही चाची मेरी माँ को भी ना बता दे…
दीप:- यार अब मैं क्या करू?? माँ ने बाबा को बता दिया तो वो मेरी जान ले लेंगे…
नीरज:- हा यार..और मेरी भी…भाई अब तुझे कुछ करना होगा…तुझे चाची को समझाना होगा…
दीप:- मैं क्या समझाऊ यार??

नीरज:- कुछ भी कर पेअर पकड़ ले चाची के माफ़ी मांग कुछ भी कर यार लेकिन मेरी माँ या तेरे बाबा तक बात पहूंची ना तो बहोत बुरा होगा…
दीप:- देखता हु यार…
नीरज:- तू जा घर..
दीप:- बहोत डर लग रहा है यार…
नीरज:- भाई जब तक घर नहीं जाएगा तब तक ये सोल्व नहीं होगा…
दीप:- ठीक है..
दीप घर की और चल पड़ता है। उसकी बहोत फटी पड़ी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे कैसे करे??

दीप डरते डरते ही घर आता है। घर में जाते ही नित्या उसके सामने दिखती है। प्रणीति भी वही हॉल में बैठ के टीवी देख रही थी। दीप नित्या से आँख नहीं मिला पा रहा था।
प्रणीति:- कहा थे भैया?? आप हमे लेने आने वाले थे। सोना भी कितना गुस्सा कर रही थी।
दीप कुछ बोले उससे पहले नित्या बोल पड़ती है…
नित्या:-बहोत जरुरी काम कर रहा था वो…वो छोड़के नहीं आ सकता था…
नित्या दीप की और गुस्से से देखते हुए बोली। दीप ने नजर उठा के एक बार देखा और वापस निचे देखने लग गया। नित्या अभी भी उसे देख रही थी की वो कुछ बोले लेकिन दीप कुछ भी नहीं बोल रहा था। वो चुपचाप थोड़ी देर टीवी देखा और अपने कमरे में चला गया।
* *नित्या के लिए ये थोडा अजीब था। प्रणीति भी कुछ समझ नहीं पा रही थी। दीप अपने कमरे में जाके सोचने लगा की माँ से कैसे बात करू?? बहोत सोचने के बाद उसने निश्चय किया की वो अभी कुछ बात नहीं करेगा। नार्मल रहेगा जब माँ सामनेसे बात करेगी तब देखा जाएगा।
नित्या भी यही सोच रही थी की अभी वो दीप से कुछ बात ना करे। पहेली बार है इसलिए उसे माफ़ कर देती हु।
रात को खाने के टाइम सब नार्मल हो चूका था। दीप ये देख के बहोत रिलैक्स फील कर रहा था की नित्या नार्मल थी।*
सब अपने कमरे में जाके सोने लगे थे। लेकिन नित्या का मूड आज कुछ और ही था। उसने अपने कमरे की लाइट बंद की और जसवंत के पास जाके लेट गयी।उसके कंधे के पास अपना सर रख के उसकी छाती पे हाथ घुमाने लगी।

जसवंत:- क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है मुझपे?
नित्या:- मैं तो आपसे बहोत प्यार करती हु पर आप तो जैसे प्यार करना भूल ही गए हो।
जसवंत:- अरे नहीं मेरी रानी वो तो खेतो में बहोत थक जाता हु…
नित्या:- बहाने बनाते रहो….मुझे तो लगता है आप वहा खेतो में किसी मजदुर औरत को पेलते होंगे इसलिए मुझे कई दिनों तक हाथ नहीं लगाते।
जसवंत:- पागल हो क्या?? सच में थक जाता हु।
नित्या:- चलो ना आज मेरा बहोत मन कर रहा है।
जसवंत:- नहीं आज रहने दो…कल करते है।
नित्या:- आप लेटे रहो जो करना है मैं ही करुँगी…

जसवंत:- मेरा मन नहीं है नित्या…नहीं होगा कुछ।
लेकिन नित्या ये नहीं सुनाती और *जसवंत का लंड बाहर निकाल के हिलाने लगती है। अभी थोडा तनाव आने लगता है फिर वो उसे मुह में लेके चूसने लगती है। बहोत कोशिश के बाद जसवंत का लंड खड़ा होता है। नित्या उठती है और साड़ी ऊपर उठा के उसके लंड पे बैठना चाहती है लेकिन जब वो देखती है की जसवंत का लंड फिर से छोटा हो जाता है तो उसे बड़ी निराशा होती है।
नित्या:- ह्म्म्म सच कहा आपने आज नहीं होगा….लेकिन कल जरूर करना…बहोत तड़प रही मेरी चूत
जसवंत:-ठीक है मेरी जान…अब सो जा।

जसवंत कपडे ठीक करके दूसरी तरफ करवट लेके सो जाता है। लेकिन नित्या तो बहोत उत्तेजित हो चुकी थी। वो निचे लेट के छत की और देखने लगती है। आज का दिन बहोत अजीब था उसके लिए।उन घटनाओ के बारे में सोचती नित्या उस पल में अटक जाती है जहा हीना दीप का लंड चूस रही थी। उसे वो पल याद आते ही अपनी चूत में चुलबुलाहट सी महसूस होती है।फिर मीना की वो बात…उसका हाथ अपने आप ही चूत के पास चला जाता है।

नित्या:-सच में दीप का लंड तो है बहोत दमदार…मीना ने तो आज मजे कर लिये।उफ्फ्फ ये मैं क्या सोच रही हु। अपने बेटे के लंड के बारे में क्यू सोच रही हु।लेकिन ये क्या मेरी चूत तो गीली हो रही है। सच कहती है हीना चूत और लंड में कोई रिश्ता नहीं होता।साली रांड मेरे बेटे का लंड कितने मजे से चूस रही थी। और दीप भी क्या जोरदार तरीके से उसकी चूत मार रहा था….हाय रे उम्म्म्म काश हीना की जगह मैं होती…..उफ्फ्फ ये क्या हो गया है मुझे??दीप मेरी चूत चोदे ऐसा कैसे सोच सकती हु मैं…पागल हो गयी हु मैं…लेकिन जैसे ही मैंने ये सोचा मेरी चूत में त्यों जैसे आग लग गयी है। क्या ऐसा हो सकता है की दीप मुझे चोदे??उफ्फ्फ्फ़ स्स्स्स अह्ह्ह लेकिन ये गलत है। फिर वो सरला कैसे चुदवाती है अपने बेटे से?? फिर भी ये गलत है।मुझे ऐसा बिलकुल भी नहीं सोचना चाहिए।लेकिन मेरे दिमाग से दीप के लंड की तस्वीर हट ही नहीं रही है। अगर उसे पता चला की मैं उसके बारे में ये सब सोच रही हु तो क्या सोचेगा वो मेरे बारे में?? लेकिन वो भी तो नीरज की चाची को मजे से चोद रहा था।

अगर वो मेरे बारे में भी यही सोचता होगा तो??वो भी मुझे चोदना चाहता हो तो?? उस हीना से कही जादा सेक्सी हु मैं अगर वो मीना को चोद सकता है तो मुझे क्यू नहीं?? वो जवान है उसे चूत की जरुरत है अगर वो उसे घर में ही मिल जाती है तो वो बाहर मुह नहीं मरेगा और मुझे भी उसके तगड़े लंड से चुदने का मजा मिलता रहेगा।नित्या क्या सोच रही है ये गलत है….बस बहोत हो गया सही गलत मुझे नहीं पता…. मुझे अपनी चूत की प्यास बुझानी है और वो दीप के लंड से अह्ह्ह्ह स्स्स्स उम्म्म हाय रे मेरी चूत से पानी की बाढ़ आ गयी है ये सोच के उम्म्म्म असल में जब चुदवाउंगी तो कितना मजा आयेगा स्सस्सस्स*
नित्या अब अपनी चूत को रगड़ने लगी थी। उसे अब कुछ फरक नहीं पड़ रहा था की उसका पति बाजू में सोया है और वो अपने बेटे के बारे में सोच के चूत रगड़ रही है।

नित्या:-उफ्फ्फ्फ्फ़ कितना मजा आएगा जब उसका लंड मेरी चूत में घुसेगा अह्ह्ह्ह औऊऊऊच अह्ह्ह्ह मेरी चूत तो फट ही जायेगी अह्ह्ह्ह स्स्स्स्स् जब वो अपना लंड आगे पीछे करेगा मेरी चूत का कोना कोना रगड़ जाएगा उसके लंड से अह्ह्ह्ह्ह
नित्या पागलो की तरह अपनी चूत सहला रही थी ….उंगली से चोद रही थी। वो इतनी उत्तेजित थी की कुछ ही मिनटो में वो अपनी मंजिल पे पहोंच गयी। उसे आज तक इतना मजा कभी नहीं आया था। वो जोर जोर। से साँसे लेते हुए वैसेही पड़ी रही।
इधर दीप को भी नींद नहीं आ रही थी।वो दिनभर हुए बातो के बारे में सोच रहा था। लेकिन उसकी बार बार नित्या पे आ के रुक रही थी। वो सोच रहा था की क्यू नित्या ने उसे कुछ पूछा नहीं या कुछ कहा नहीं?? आखिर वो क्या चाहती है??कही वो भी तो मेरे साथ कुछ करना *चाहती है?? नहीं वो भला ऐसा क्यू चाहेगी?? उनको और बाबा को देख के तो ऐसा नहीं लगता की उनमे कुछ प्रॉब्लम है। लेकिन फिर वो। दोपहर में क्यू अपनी चूत में उंगली कर रही थी??

दीप को दोपहर का वो दृश्य याद आते ही उसके लंड में हरकत होने लगी थी।
दीप:- हा यार..शायद बाबा अब माँ को नहीं चोदते…इसीलिये तो अपनी आग अपनी उंगली से शांत कर रही थी। हा यार ….क्या मस्त नजारा था वो…कितनी सुन्दर चिकनी चूत थी उनकी…किसी 25 साल की लड़की की तरह….नहीं तो उस चाची की…छोड यार उसे..माँ पे कंसन्ट्रेट कर…उफ्फ्फ्फ़ जब वो उसे सहला रही थी…अंदर का गुलाबी रंग स्सस्सस्स उम्म्म्म यार बस एक बार चोदने मिल जाय अह्ह्ह्ह हाहा मजा आ जायेगा स्स्स्स। पागल हो गया है क्या?? ऐसे मत सोच उनके बारे में…माँ है वो तेरी…लेकिन चाची भी तो बता रही थी की इसमे कुछ गलत नहीं है…हा न इसमे क्या गलत है?? वो अगर मेरी माँ नहीं होती तो क्या औरत नहीं होती?? और। मैं उसे नहीं चोदता क्या??*

इसके आगे वो कुछ सोच पाता …उसका मोबाइल बजने लगा..उसे लगता है की फ़ोन शायद नीरज का होगा…लेकिन कोई नंबर था।
उसने फ़ोन उठाया…दो तिन बार हेलो हेलो बोलने पर पभी उधर से कोई जवाब नहीं दे रहा था। उसने फ़ोन कट कर दिया।
दो मिनट बाद फिर से फ़ोन बजा..लेकिन वो उठाय इससे पहले कट हो जाता है।
दीप गुस्से में आके वापस फ़ोन करता है। वो उसे डांटने वाला होता है की उधर से एक लड़की की आवाज आती है।
दीप:- कोण बात कर रहा है??
“”मैं सोना””
उधर से आवाज आती है।

दीप:- सोना ??क्या हुआ??इस वक़्त क्यू फ़ोन किया??प्रणीति तो सो रही होगी…
सोना:- मैंने तुमसे ही बात करने के लिए फ़ोन किया है।
दीप ये सुनके थोडा आश्चर्य होता है और थोड़ी ख़ुशी भी।
दीप:- मुझसे??क्या बात करनी है??
सोना:- मुझे तुमपे बहोत गुस्सा आ रहा है…तुम हमे लेने क्यू नहीं आये??
दीप:- ओह्ह अरे वो मैं थोडा दोस्तों से बाते करने लगा और मेरे ध्यान से निकल गया। तुमने ये पूछने के लिए रात के 12 बजे फ़ोन किया है??
सोना:- नहीं तो..
दीप:- फिर किस लिए??
सोना:- ऐसेही..

दीप:- ऐसेही??सच में?? तो ठीक है फिर अभी मुझे नींद आ रही है कल बात करते है…
सोना:- पागल हो तुम…एक लड़की रात को एक लड़के को फ़ोन करती है..और वो भी अपने बाबा का मोबाइल चुरा के…तो वो क्या ऐसेही??
दीप:- तुमने ही तो कहा…
सोना:- तुम्हे समझ नहीं आता क्या बुद्धू..??
दीप:- क्या??
दीप सब समझ रहा था लेकिन जानबुज के उसकी खिंचाई कर रहा था।
सोना:-समझो न यार…

दीप:- क्या समझू?कुछ बोलोगी तो समझूगा न…
सोना:- भोले मत बनो…सब समझ आ रहा है फिर भी नाटक कर रहे हो।
दीप:-मैं कोई नाटक नहीं कर रहा हु…सच में…तुम कुछ बोल नही रही और मुझसे कहती हो की मैं भोला बन रहा हु…बुद्धू हु…
सोना:- सच में टीमहे इतनी सिंपल सी बात समज नहीं आ रही??
दीप:- कोनसी??
सोना:- यही की मुझे तुमसे प्यार हो गया है…..

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The Author

Ruby

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