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मेरी चाची के साथ मेरा सबसे प्यारा अनुभव

आज मैं भी अपना एक ख़ुद का अनुभव लिख रहा हूँ, यह जो मैं कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी चाची और मेरी है। पहले मैं अपने और चाची के बारे में बताना चाहूँगा, मेरा नाम जीतेन्द्र हैं सतना का रहने वाला हूँ, अभी उच्च अध्ययन कर रहा हूँ। कॉलेज में मैं बहुत सी लड़कियों को चोद चुका हूँ। मेरी उम्र 23 साल है, कद 5 फीट 9 इंच है, अच्छा खासा व्यक्तित्व है, मेरा लंड 7.5 इंच लम्बा है और बहुत मोटा है।

मेरी चाची की उमर 31 साल हैं नाम अनीता(बदला हुआ), ऊँचाई 5 फीट 5 इंच, वक्ष का आकार 38 लगभग, 38-29-38. रंग गेहुँआ, लम्बे घने बाल, गांड तक आते हैं, जब वह मटक मटक कर चलती है सबकी पागल कर देती है।
अच्छा, अब मैं कहानी पर आता हूँ। हमारे घर में कुल दस लोग रहते हैं, गर्मी के वजह से मैं, मेरे चाचा, मेरी चाची और एक दूसरी चाची की बेटी छत पर सोते थे, बाकी सब लोग नीचे सोते थे।

एक रात मैंने चाची की सिसकारियों की आवाज़ सुनी, मैं जाग गया। चाची सिसकारियाँ भर रही थी। मैं समझ गया कि चाचा चाची को चोद रहे हैं। मैं हल्के से अपने मुँह के ऊपर से चादर उठा कर देखने लगा। चाचा चाची की चूत चाट रहे थे, चाची पूरी नंगी थी ! उनके वो रेशमी बाल जो मुझे हमेशा पागल कर देते हैं, वो खुले हुए थे। चाची बुरी तरह सिसकार रही थी। मैं तो वैसे ही गर्म हुए जा रहा था।

फिर शायद चाचा ने चाची की चूत में काटा तो चाची चिल्ला दी ! जल्दी से चाचा ने अपना हाथ उनके मुँह पर रख दिया और बोले- चिल्ला क्यों रही हो? बच्चे जाग जाएँगे !
चाची बोली- ऐसे करोगे तो चिल्लाऊँगी ही !

तो चाचा बोले- अच्छा, आराम से करता हूँ ! और फिर चाची की चूत चाटने लगे। चाची फिर से सिसकारियाँ भरने लगी- आआह्ह्ह्ह्ह् य्य्य्याआ ! क्या कर रहे हो ! फाड़ दोगे क्या ! मैं कही भागी नहीं जा रही हूँ ! हाआअ आआआह्ह्ह्ह!
फिर चाचा ऊपर आ गए और चाची को बोले- ले अब मुँह खोल … और चूस इसे !चाचा का लण्ड चाची के मुँह में था और वो उसे मज़े से चूस रही थी, आवाज़ निकल रही थी- पिपिच्चच पिच्च्च्चक पिच्च्च्चच्च्च्क !

फिर चाची बोली- आज तुम्हारा निकल रहा है !
तो चाचा बोले- पी जा उसे !
चाची ने सारा का सारा मुठ पी लिया ! फिर चाची ऊपर आई और चाचा के ऊपर लेटकर उनके होटों को कस के चूसने लगी ! कम से कम दस मिनट तक चूमा चाटी का कार्यक्रम चला। इधर मेरे लण्ड की बुरी हालत हो रही थी। अगर मैं हिलता तो उन्हें पता लग जाता कि मैं जगा हुआ हूँ। मैं शांति से देखने लगा, तो देखा कि चाची फिर से नीचे आ गई और चाचा धीरे से अपना लण्ड चाची की चूत में घुसा रहे थे !

देखते देखते चाचा का लंड गायब हो गया। फिर चाचा ने झटके लगाना शुरू किये, नीचे से चाची चूतड़ उठा-उठा कर साथ दे रही थी ! फिर से चाची की आवाज़े निकलना शुरू हो गई- धीईरे……. धीईर्र……! बीस मिनट की जम के चुदाई के बाद चाचा शांत पड़ गए, मैं समझ गया की चाचा झड़ गए !

फिर कुछ देर बाद चाचा चाची के ऊपर से हटे और दोनों ने कपड़े पहने और सो गए! पर मैं तो रात भर सोचता रहा चाची के बारे में ! मैंने भी ठानी कि एक बार तो चाची की चूत जरुर मारूँगा ! अब तो रोज़ मैं चाची और चाची का कार्यक्रम देखता ! मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ ! दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

एक दिन चाची के कमरे में गया तो वह कोई नहीं था, बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी, चाची नहा रही है! मैंने सोचा कि क्यों न चाची को नहाते देखूँ ! मैं बगल वाले संडास में नल पर पैर रख कर देखने लगा ! क्या नज़ारा था ! चाची के वो लम्बे खुले बाल ! चूचों पर बहता पानी ! वो अपनी झांटों को साफ़ कर रही थी ! एकदम से मेरा पैर फिसल गया और मैं गिर गया !

चाची चिल्लाई- कौन है?
जब तक वह बाहर आकर देखती, मैं धीरे से वहाँ से भाग लिया ! उन्होंने शायद मुझे पहचान लिया था, चाची का मेरी तरफ बात करने का ढंग कुछ बदल गया था ! पर मुझे तो हर रोज़ रात को मुफ्त का प्रोग्राम देखने को
मिलता था ! मेरे एक और चाचा थे वो दिल्ली में रहते थे ! अचानक वे बीमार पड़ गए ! तो चाचा और मेरे पिता जी को जाना पड़ा दिल्ली ! एक दो दिन बाद पिताजी तो आ गए पर चाचा को वहीं एक महीने रुकना पड़ेगा ! क्योकि दिल्ली वाले चाचा जी अकेले रहते थे !

यह सुनते ही जैसे चाची की तो जान ही निकल गई ! अब छत पर सिर्फ मैं और चाची सोते थे ! कुछ दिन तो कुछ नहीं हुआ ! पर चाची की चुदास बढ़ती जा रही थी ! बिना चुदाई के वह रात में सो नहीं पाती थी, हमेशा करवट बदलती दिखती थी, कई बार तो मैंने देखा कि चाची अपनी चूत रगड़ रही हैं। फिर मैंने बड़ी हिम्मत की कि कुछ भी हो जाए, अब तो चाची को चोदना है।

अगले दिन फिर से चाची आई और अपने बिस्तर पर सोने लगी। मैं सोने का नाटक कर रहा था पर उनकी तरफ ही देख रहा था। मैंने देखा की चाची करवटें बदल रही थी और अपनी चूत को सहला रही थी। फिर जो हुआ मैं देख कर घबरा गया !

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