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रुचिका चाची की धमाकेदार चुदाई – 1

गतांग से आगे ….

चाची : मम्म मुझे और किस करो ना . इन का ख्याल कोन रखेगा ( अपने मम्मे अपने हाथों में लेकर बोली)

चाचा ने अपना थुक लंड पे लगाया और सीधा ही चाची की चूत में ठोक दिया. चाची के मुह से आह निकल गयी. चाचा की बाल भरी गांड जोर जोर से हिलने लगी.
दस पंद्रह धक्के मारे और चाचा सांड जैसा हुन्कारने लगा.

चाची : नहीं अभी नहीं. डौगी करो. पीछे से डालो आ आअह. नहीं ना ना आह

चाचा तो अनसुनी कर के धक्के मरता गया और एक दम उसका शरीर अकड़ा और भेन्चोड ने अपने माल छोड़ दिया.

चाची : ये क्या किया आपने ? ऊह मुझे हर बार ऐसे ही छोड़ देते हो. मुझे और जोर से खुजली हो रही hai.n

चाचा ने चड्डी से अपने लंड पोछा और चाची की तरफ पीठ करके सो गया. चाची के साथ तो चोट हो गयी. कहाँ तो डौगी में चोदने का बोल रही थी और कहाँ दस धक्के मैं कहानी ख़तम.

मेरा लंड मेरे हाथ में ही था. मैं कभी अपने लंड को देखता और कभी बेचारी चाची को.

चाची की चूत दिख नहीं रही थी. मगर मैंने देखा की उनका हाथ धीरे धीरे अपनी चूत की तरफ गया और वो उसे रगड़ने लगी. उनके मुह से फिर सिसकारी छुटी और मेरा लंड फिर तनने लगा. चाची का एक हाथ अपने बूब्स को दबा रहा था, उनके निप्प्लेस उनकी उँगलियों के बीच थे. वाव क्या सीन था.

मैंने अभी अपना लंड जोर से हिलाना शुरू कर दिया. चाची की सिस्कारियां तेज़ होती गयी और मेरे हाथ की स्पीड और उनकी उँगलियों का मोशन फास्ट होता गया.

अचानक उन्होंने जोर जोर से सांस लेना शुरू कर दिया और मादक स्वर में आह आह उहुहू ……उहुह….आह…करने लगी. चाची का ओर्गेस्म हो रहा था
मेरे गोटे भी कड़क होने लगे. मैंने इधर उधर देखा और टेबल पे पड़ा हुआ कागज़ उठाया और उसमे अपने लंड हिलाने लगा. अचानक एक सुरसुरी और गुदगुदी का मिला जूला एहसास हुआ और मेरे लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मगर ये क्या …….पहली धार जोर से निकली और हवा में उड़ के डोर पे जा गिरी. फच फच करके पानी निकलता ही रहा. मेरा सर पीछे हो गया ऑंखें बंद हो गयी…..ओ गोड…..यस.

मैंने कागज़ फोल्ड कर के वही रखा और बिस्तर पे पड़ गया. वाव इतना मज़ा आज तक नहीं आया था.
सुबह नींद खुली तो दस बज चुके थे. 10.30 पर तो कॉलेज ही था. फटाफट तैयार हुआ बुक्स उठाई और पुराने नोट्स भी उठा लिए. प्रिया के लिए

चाची नाश्ता लगा रही थी. पर मैं जाने लगा तो बोली

चाची : कार्तिक, नाश्ता कर ले.
मैं : नहीं चाची लेट हो गया हूँ.

चाची पास आके मुझे बिठाते हुए : नाश्ता नहीं करेगा तो ताक़त कैसे आएगी. अब तू जवान हो गया है

मेरी समझ में कुछ आया नहीं. ओह god कल रात की रास लीला देखके जो माल निकला था वो तो कागज़ फिर से कंप्यूटर टेबल पर ही छोड़ दिया था.
कहीं फिर से चाची ने वो कागज़ तो नहीं देख लिया. मेरी फटी.

मैं : च च चाची ……वो …….म म मेरा मतलब है की वो कागज़ ……आई ऍम सॉरी ……अब नहीं होगा

टेड़ी मुस्कान के साथ बोली : कोनसा कागज़…अच्छा वो वाला…..

मैंने सर नीचे झुका लिया.

चाची: अब तू कॉलेज जाने लगा हे, जवान हो गया है….चलता है मगर थोडा कन्ट्रोल रखा कर…..रोज़ रोज़ कोई करता है क्या ?

मैंने झटके से सर उठाया, चाची कुटिल तरीके से मुस्कुरा रही थी. तभी उन्होंने वो किया जिस से मेरे दिमाग में हतोड़े पड़ने लगे

अचानक वो अपनी टांगों के बीच खुजली करने लगी ये करते हुए तो बेशरमी से मुझ से बातें भी कर रही थी. मुझे तो यह भी नहीं पता की वो क्या बोल रही है. मेरा सारा ध्यान उनकी उंगिलयों के खेल पर था.

चाची : कार्तिक तू सुन रहा है न ? शाम को जल्दी आ जाना
में : ह ह हाँ च च चाची

चाची :अच्छा तू लेट हो रहा है. जल्दी कर नहीं तो बस नहीं मिलेगी.

और झुक कर मेरी प्लेट उठाई. हाय क्या नज़ारा दिखा. उनके दोनों संतरे ब्लैक ब्रा में कैद थे और हमेशा की तरह उन्होंने काफी टाईट ब्लाउस पहना था जिसके कारण उनके बूब्स उभर के बहार निकल रहे थे. बूब्स के बीच के घाटी पूरी अन्दर तक दिख रही थी . मेरे बदन की नसे गरम हो गयी और वही मेरा माहोल बन गया. जींस में जैसे तैसे अड्जेस्ट किया. चाची मुझे वो ही बेशरमी भरी मुस्कान से देखे जा रही थी. बड़ी मुश्किल से मैंने बुक्स समेटी और कॉलेज के लिए भागा.
चाची के झटके से मेरा दिमाग घूम गया था.

रुचिका चाची जिनका प्यार का नाम नीलू है. मेरे चाचा की बीवी. पिछले साल ही गाँव से आई थी. जब गाँव में बाड़ आने से सब तबाह हो गया और चाचा सड़क पे आ गया, तो मेरे पापा ने उनको शहर बुला लिया और अपने साथ दुकान पे लगा लिया. मेरा बनिया बाप बहुत शाना है. दूकान के दो नोकरों की छुट्टी करके उनका पूरा काम मेरे चाचा से ही कराता था, शायद इसी लिए मेरा चाचा इतना थका रहता था की नीलू की खुजली नहीं मिटा पा रहा था. बेचारी को शादी के ५ साल बाद भी बच्चा नहीं था.
सांवले रंग में ढली उसकी चिकनी काया में अजंता की मूर्तियों जैसे घुमाव और उठाव थे. तीखा नाक जैसे चोंच हो, कंटीली भंवे, थोड़े भरे भरे होंठ और उसके ऊपर एक तिल.

गाँव से आई चाची को डौगी पोसिशन में करना पसंद है यह सोच सोच के मेरा सांप फिर फन उठाने लगा.

अपनों अरमानो की गाड़ी को ब्रेक लगा कर कॉलेज में घुसा. अकाउंट का लेक्चर ख़तम हो चूका था. तभी सामने से आती प्रिया दिखी. उसने सफ़ेद शर्ट और ब्लू जींस पहनी थी, बाल खुले थे, क़यामत दिख रही थी. वो आई और

प्रिया : हाय …मेरे नोट्स लाये हो ना
मैं : ह ह हाय (साला ये हकलापन). हाँ यह लो.

प्रिया : थेंक्स. तुम्हे जल्दी तो नहीं चाहिए.
मैं : न न नहीं. अ अ आप आराम से कॉपी कर लो.

प्रिया : यह आप आप क्या लगा रखा है. अरे हम दोस्त है. इतने फोर्मल मत बनो
मैं : थ थ ठीक है…..अ अ आप….मेरा मतलब है की तुम को अब तुम कहूँगा

वो हंसी और उसके गुलाबी होटों के बीच में उसके मोती जैसे दांत चमक उठे. तभी मैं नोटिस किया किया की उसके होटों के ऊपर एक तिल है. ऐसा ही एक तिल चाची के होटों पर भी है. चाची की याद आते ही मेरा दिमाग उनकी रात की और सुबह की बातें याद करने लगा. तभी प्रिया बोली

प्रिया : अरे कहाँ खो गए. आज लेट कैसे हो गए. क्लास में तो दिखे ही नहीं आज.
मैं : ह ह हाँ म म मैं वो …..

प्रिया (शरारती मुस्कराहट के साथ बोली) : पार्क में GF के साथ थे क्या ?

कहानी जारी है … आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए पेज नंबर पर क्लिक करें ….

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