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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

रुचिका चाची की धमाकेदार चुदाई – 1

गतांग से आगे ….

मैं तो एक दम घबरा गया और मेरा मुह लाल हो गया

मैं : म म मेरी कोई gf नहीं हैं.
प्रिया : अच्छा पुरे कोलेज में ऐसा कोई लड़का या लड़की नहीं जिसका कोई सीन नहीं है

मैं : स स सच में नहीं है. क क कसम से.
प्रिया : इट्स ओके यार. वैसे तो मेरा भी नहीं पर बोलना येही पड़ता हैं, की कोई है. भाई के डर से सब दूर ही रहते है.
अच्छा चलो मुझे जाना है बाय

आज मुझे अपने हकले होने पर जितना गुस्सा और शर्म आई की क्या बोलू.
घर पे पहुंचा तो पूरा घर खाली था. अपनी चाबी से दरवाजा खोल के जब अन्दर गया और आवाज़ लगायी तो चाची के कमरे से
आवाज़ आई.

चाची : कोन हैं ? कार्तिक ?
मैं : हाँ चाची……सब कहाँ गए ?

चाची : अरे सुबह बोला तो था की सब मंदिर में जायेंगे. रणछोड़ दास जी के भजन हैं.

अब मैं क्या बोलू की सुबह मेरा ध्यान कहा था.

चाची : मैं कपडे धो कर आती हूँ. खाना रेडी है.
मैं : अरे चाची…मेरे कपडे भी धो दिए क्या ?

चाची : नहीं….ला दे… जल्दी.

मैं रूम में गया और अपनी जींस, टी शर्ट और अंडरवियर उठाई. जैसे ही बाथरूम में घुसा मेरी साँसे रुक गयी.
चाची गाँव वालो की तरह उकडू बैठ कर कपडे धो रही थी, उनको वाशिंग मशीन में कपडे धोना नहीं आता था. उनका आचल गिरा हुआ था और ऐसे बैठने की वजह से उनके बूब्स मचल मचल के बाहर आ रहे थे. उन्होंने साड़ी घुटनों के ऊपर तक उठा रखी थी जिससे उनकी पानी से भीगी चिकनी जाघें चमक रही थी.

मैं : ये लो च च चाची
चाची : सारे कपडे ले आया ना ?

मैं : हाँ ..जींस …टी शर्ट ….और ये ……..(कहकर मेने अंडरवीयर भी रख दी)
चाची : यहाँ रख दे……( फिर वो ही कुटिल मुस्कान के साथ बोली) ….अंडरवियर की हालत तो कागज़ जैसे नहीं कर रखी ?

मेरे तो कान गरम हो गए.
मैं : न न नहीं चाची

चाची : सुन……ये साड़ी सही कर दे ना.

वो अपने ढलके हुए आंचल की तरफ इशारा कर रही थी. मैंने कांपते हुए हाथों से उनका आंचल जो उनके कंधे से गिर गया था उसे फिर से कंधे पर रखने लगा तभी वो थोडा सा मुड़ी और मेरा हाथ उनके सोफ्ट मम्मो से टकरा गया. आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
चाची धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी. फिर बोली

चाची : लल्ला….ये बाल्टी भी खाली कर के दे दे ना.

मैंने बाल्टी उठाई और मुड़ा. फर्श चिकना होने से मेरा बैलेंस बिगड़ा और बाल्टी मेरे हाथ से छुट कर ठीक चाची के पीछे गिर गयी. उनका पूरा पिछवाडा गीला हो गया.

चाची : हाय राम यह क्या किया. मेरी पूरी साड़ी गीली हो गयी.

और वो खड़ी होकर साड़ी को झटकने लगी.

चाची : क्या करता है लल्ला……अन्दर तक पानी चला गया …..सारे कपडे धो रखे है…मेरे पास तो अलमारी में दूसरा पेटीकोट भी नहीं है.

कह कर उन्होंने साड़ी खोलना शुरू कर दी. मेरे सामने मेरी खुजली वाली चाची बिना आंचल के .. और ….भीगी हुई…….साड़ी खोल रही थी. मेरी जींस में तम्बू तन चूका था. तभी जैसे उसे होश आया बोली

चाची : कार्तिक ..बाहर जा. देखता नहीं में कपडे बदल रही हूँ

मैं हकलाता हुआ सॉरी बोलता हुआ बाहर आके खड़ा हो गया.

चाची : मेरे सारे कपडे गीले कर दिए लल्ला. अब मैं क्या पहनू ? जा जाके मेरे रूम में कोई पेटीकोट, ब्लाउस मिले तो ले आ.

मैंने जाके देखा मगर कुछ नहीं था. तभी मुझे चाची का नाईट गाउन दिखा. पूरा पारदर्शी था.

मैं : ये लो चाची.
चाची : अन्दर मत आ. बाहर से ही दे दे.

मैंने दिया और चाची अन्दर से ही चिल्लाई

चाची : लल्ला और कुछ ना मिला क्या ?
मैं : चाची मुझे और कुछ नहीं दिखा…..आप ही तो बोली की सारे ही कपडे धो दिए.

चाची : हाय राम यह तो बहुत झीना हैं. अरे बाहर का दरवाजा बंद है ना ? ऐसे में भाभी और भाई साहब आ गए तो.
मैं : चाची मैं कुण्डी लगा देता हूँ .

मैं जैसे ही मुड़ा चाची बाथरूम से बाहर आई और अपने रूम की तरफ भागी. गाउन सामने से खुला था और अन्दर वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी. भीगने से उनका गाउन पूरा ही पारदर्शी हो गया था. काली ब्रा और फूल की प्रिंट वाली पेंटी साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी. उनके मम्मे भागने की वजह से जोर जोर से हिल रहे थे और उनके भरे भरे गोल गोल नितम्ब पेंटी के अन्दर बाहर आने के लिए मचल रहे थे. उन्होंने से अपने रूम में घुस कर दरवाजा बंद कर लिया और जोर जोर से हसने लगी. मेरा दिमाग ख़राब हो गया.

चाची : लल्ला ….अब लगा लो कुण्डी ….हा हा हा ……बुद्धू बन गए भोले लल्ला….

मेरा सांप फुफकारे मार रहा था, मुझसे रहा नहीं गया मैं फटाफट रूम में गया और सुबह के न्यूज़पेपर को खोल कर टेबल पार रखा , जींस उतारी और अपना लंड हिलाने लगा. उत्तेजना की वजह से मेरी ऑंखें बंद हो गयी थी. आज सुबह से ही चाची ने मुझे इतना गरम कर दिया था कि रुकना मुश्किल था. बार बार चाची के भीगे बदन का चित्र मेरी आँखों के सामने आ रहा था.

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मुझे वो ही सुरसुरी फिर होने लगी मेरा निकलने वाला था. तभी भड़ाक से मेरे रूम का दरवाजा खुला और चाची अन्दर आ गयी.

चाची : चल लल्ला ..साड़ी मिल गयी और खाना लगा दिया है…..आज दाल……हाय राम ये क्या …..

मेरा माल निकलना शुरू हो गया…..मैंने अपने लंड हाथ में छुपाने कि कोशिश कि मगर उसमे से फच ….फच…..धार छुटती
ही जा रही थी. कुछ उड़ कर चाची के पैरों के पास भी गिरी. चाची की आँखों गोल गोल हो गयी थी और वो कभी मुझे और कभी धार पे धार मारते मेरे लंड को देख रही थी. अचानक जैसे उन्हें होश आया और वो बाहर चली गयी.

मैने उसी कागज़ से लंड को पोछा. मेरी गांड फटफटी की तरह फट रही थी. बेटा आज तो गए. बाप जल्लाद है….मार मार के गांड सुजा देगा और माँ मारे शर्म के मार जाएगी. मैं सर झुका के बाहर गया.

मैं : च च च चाची……..

चाची मेरी तरफ मुड़ी. उनका चेहरा लाल हो गया था. उनकी वो तीखी नाक कोनो से फूली हुई थी. या तो वो गुस्से में थी या उनको भी मस्ती आ गयी थी.

चाची : लल्ला……हद होती है…..तू बहुत बिगड़ गया हैं……भाभी और भाई साहब को पता चला की तू पढाई छोड़ कर ये सब
हरकते करता है तो उन कर क्या गुजरेगी ? ऐसे आदतों की वजह से ही तेरे चाचा का ये हाल हैं. जो आज तक बाप नहीं
बन पाए

मैं : च च चाची प प प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. म म माँ और प प पापा को मत बोलना. मैं अब कभी मूठ नहीं मारूंगा.
प प प्लीज़ चाची प्लीज़

चाची एक दम से शांत हो गयी. फिर से उनके चेहरे पे वो ही टेड़ी मुस्कान हलके हलके आई.

चाची : लल्ला…….मैं ये नहीं कहती की बिलकुल मत कर. पर रोज़ रोज़ करना तो गलत है. कमजोरी आ जाएगी. कल तेरी
शादी होगी, फिर क्या करेगा. बहु को खुश नहीं रखेगा तो इधर उधर झाँकेगी. मर्द बनेगा कि ग्वाला ?

मैं : ठ ठ ठीक है चाची ……ध्यान रखूँगा…..

चाची : ये ले खाना खा ले….

मैं : चाची ….ये रोटी पर कितना घी लगाया है ? ? मुझे इतना घी मत दो.
चाची टेड़ी मुस्कान के साथ बोली : अरे लल्ला……घी नहीं खायेगा तो ताक़त कैसे आएगी. घी से ही तो धातु बनती है.

मैं : धातु ? धातु क्या ?
चाची : वो ही जो तुम रोज़ इधर उधर …..कागजों में उड़ाया करते हो.

माँ कसम……अभी मूठ मरी थी और चाची की टेड़ी मुस्कान और ऐसी बातें सुन कर सांप ने फन उठा ही लिया. मैंने अडजस्ट करने के लिए नीचे हाथ लगाया और चाची बोली

चाची : लो अभी घी खाया भी नहीं और फिर निकालने चले ?

मैने घबरा के हाथ ऊपर कर लिया और चाची जोर जोर से हसने लगी. उन्होंने फिर वहीँ पर खड़े खड़े मेरे सामने ही अपनी टांगो के बीच खुजाना शुरू कर दिया. मैं इधर उधर देखने लगा. तभी चाची बोली

चाची : अरे लल्ला….बहुत परेशान हो गयी रे…..मरी इस खुजली के मारे……कोई क्रीम व्रिम ला दे ना…..खुजली मिटती ही नहीं.

मेरे सर में हथोड़े चलने लगे. सारा शरीर सुन्न हो गया बस लंड धड़क रहा था. चाची अभी भी मुझे देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. तभी बेल की आवाज़ आई. माँ – पापा आ चुके थे.
मैं खाना खा के सीधा रूम में घुस गया. सर चकरा रहा था की ये आज कल हो क्या रहा हैं…..चाची ने कभी ऐसे नहीं किया था….और न ही मैंने उन्हें इस नज़र से देखा था.
मगर आज कल जब भी मैं उनको देखता तो वो मुझे ही देख रही होती और मंद मंद मुस्कुरा रही होती. साले चाचा से इसकी खुजाल मिट नहीं रही इसी लिए चाची दूसरा रास्ता देख रही थी. ये सोच कर मुझे थोडा कांफिडेंस आ गया. चलो देखते है क्या होता है……

सोचते सोचते कब नींद लग गयी पता ही नहीं चला. अचानक मेरा सेल बजने लगा और मैं झटके से उठा. घडी मैं १२ बजे थे. मैंने नंबर देखा. अनजाना नंबर था.

मैं : ह ह हेल्लो….
फ़ोन पर : हेल्लो…..इज इट कार्तिक ?

मैं : य य येस …….ह ह हु इस इट ?
फ़ोन पर : इसका मतलब तुम नहीं पहचाने….

मैं : न न नहीं ?
फ़ोन पर : भूल गए……रोज़ बस स्टॉप पर मिलते हो…….उस दिन मुझे स्मायल भी दी थी ….मेरा नंबर माँगा था और अपना नंबर दिया था

मैं कनफ्युस हो गया. कौन है ये ? डॉली शर्मा से आज तक बात नहीं की वो भेन्चोद तो नकचड़ी है…….ये हैं कौन ? ?

मैं : द द देखिये…..मैं अ अ आप को नहीं जानता…….और न ही मैंने मेरा नंबर आप को दिया था.
फ़ोन पर : फिर आप ……तुमसे कहा था न आप नहीं बोलना……

मैं : प प प प्रिया…..तुम हो ?
प्रिया : खिल खिला के हँसते हुए : हाँ यार…..क्या तुम भी…..लगता है सच मुच में कोई GF नहीं है तुम्हारी…..ये फ़ॉर्मूला तो हमेशा काम करता है. पर तुम भी न..

मेरी तो उड़ के लग गयी. स्वयं अप्सरा इस मिटटी के माधव को फ़ोन करे………

मैं : प प प पर तुम्हे मेरा नंबर दिया किस ने ?
प्रिया : कहीं से भी मिला …..तुमसे मतलब…….अरे वो लायब्रेरी के कार्ड पर लिखा था. मैंने सेव कर लिया था की कभी काम पड़ा तो……

मैं : इतनी रात को कैसे फ़ोन किया…..
प्रिया : इतनी रात को मतलब……अरे मिस्टर अभी तो १२ ही बजे है…कोनसा तुमको नींद में से उठा दिया. अरे तुम सोये थे क्या ?

मैं : ह ह हाँ …न न नहीं वो ….
प्रिया : यार सॉरी …मुझे लगा की मैं लेट सोती हूँ तो सब लेट सोते होंगे….

मैं : अरे नहीं नहीं…..बोलो न….क्या हुआ ?
प्रिया : यार…..वो नोट्स न……मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा हैं…….नेक्स्ट मंथ तो सेम की एक्साम ही हैं……अब मैं क्या करू ?

मैं : क क क्या समझ नहीं आ रहा ?
प्रिया : देखो…..मैंने बेलेंस शीट बना ली……..ट्रेडिंग अकाउंट बना लिया….मगर प्रोफिट अन लोस बनाया तो टोटल नहीं मिलती

मैंने सर ठोक लिया. इस पागल को जब येही नहीं पता तो घंटा अकाउंट में पास होगी. मैंने थोड़ी देर उसको समझाया मगर वो सब उसके सर के ऊपर से चला गया.
आखिर मैंने उसको बोला.

मैं : प प प्रिया…..तुम्हारे तो बेसिक ही क्लिअर नहीं हैं,
प्रिया : हाँ यार…..मैंने साईंस से कॉमर्स में स्विच किया था ना …..अब क्या होगा…..१५ दिन के लिए कोई ट्यूशन भी नहीं मिलेगी और मिली भी तो बेसिक कहाँ से आएगी.

मैं चुप था…..मगर मेरे दिमाग में कीड़ा कुलबुलाने लगा था.

मैं : प प प्रिया…तुम घर पर किसी प्रायवेट ट्यूटर से पढ़ लो ?
प्रिया : अरे पर अभी मिलेगा कौन यार ??? एक मिनिट ……..तुम भी तो पढ़ा सकते हो….

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