अजब रिश्तो में गजब चुदाई -1

दोस्तों ये कहानी सुरु होती है एक छोटे से गाँव से। इस कहानी में रिश्तों में चुदाई की किस्से भी होंगे। तो जिसे इन्सेस्ट पसंद नहीं वो ये कहानी न पढ़े। इसके किरदार के बारे में थोडा बता देती हु।
प्रणीति:- एक कमसिन खूबसूरत सेक्सी लड़की।बहोत ही सीधी साधी लड़की है। अपने काम से काम रखने वाली लड़की। स्कूल पढाई और परिवार यही इसकी जिंदगी है।सेक्स की दुनिया का जादा कुछ पता नहीं।
नित्या:-प्रणीति की माँ उम्र 36 साल। ये भी बला की खूबसूरत और सेक्सी औरत है। पढ़ी लिखी होने के कारन रहन सहन बहोत अच्छा है।
जसवंत:- प्रणीति के पिता। ये किसान है। बहोत खेती होने के कारन पैसो की कोई कमी नहीं।
दीप:- प्रणीति का बड़ा भाई। शहर में पढता है। उम्र 19 साल। महीने में एक बार गाँव आता है सबसे मिलाने के लिए। बाकि किरदार भी है। जैसे जिक्र होगा वैसे बताउंगी। तो कहानी सुरु करते है।
* *
नित्या:- प्रणीति कितनी देर लगाती है नहाने में??चल मुझे खाना बनाना है तेरे बाबा के लिए।
प्रणीति:- हो गया माँ…आ रही हु। ठीक से नहाने भी नही देती हो।
नित्या:-आधे घंटे से अंदर है।
प्रणीति बहार आती है।
प्रणीति:- क्या माँ आप भी न…..

* लेकिन नित्या उसकी बात सुनाती भी नहीं और झट से अंदर चली जाती है।
प्रणीति अपने कमरे में जाके तैयार होने लगति है।*
जसवंत अपने कम निपटा के आता है। जैसे वो बाहर हॉल में आता है…
जसवंत:- नित्या खाना हो गया क्या??
*प्रणीति :- बाबा माँ नाहा रही है।

जसवंत:- अच्छा उसको कहना की मैं खेत के लिए निकल रहा हु। खाना लेने दशरत को भेज दूंगा।
दशरत:– शादी शुदा जसवंत के यहाँ खेतो में कम करनेवाला नोकर। उम्र 34 साल। बहोत ही चोदु किस्म का इंसान। इसकी बुरी नजर प्रणीति और उसकी माँ पे है। जसवंत के यहाँ सालो से काम करता है इसकी वजह से सब उसे अपने परिवार का ही समजते है।
प्रणीति:- ठीक है।

नित्या जल्दी नहाके खाना बना देती है। प्रणीति भी तैयार होके अपना टिफिन उठाके स्कूल के लिए निकल पड़ती है।
रस्ते में अपनी दोस्त सोना के घर होते हुए दोनों दोस्त स्कूल के लिए निकल पड़ते है।
सोना:–ये भी बहोत खूबसूरत है। लेकिन बहोत चंट है। ये पुरे गाँव की खबरे रखती है। ऐसे सेक्स की बातें करने में बहोत मजा आता है। लेकिन प्रणीति इसे हमेशा चुप करवा देती है। दोनों विपरित स्वाभाव की होने के बावजूद बहोत गहरे दोस्त
*बरसात का मौसम चारो तरफ हरियाली। ऐसे में गाँव बहोत ही खूबसूरत लगता है। स्कूल गाँव के थोडा बाहर था। गाँव से लेके स्कूल का रास्ता थोडा सुनसान ही रहता था। लेकिन स्कूल के टाइम नहीं होता था। रस्ते में कुछ मनचले लडके अपनी आखे सेकने बैठे रहते थे। वो सिर्फ दूर से देख के आहे भरते रहते थे। कोई कुछ बोलता नहीं था।*
* *माधवि और सोना अपने क्लास में जाके बैठ जाती है। इस बात से अनजान की उसकी जिंदगी कुछ दिनों में पूरी बदलने वाली है।

इधर प्रणीति के घर पे…..
दशरत:- भाभी…भाभी…मालिक का टिफिन हो गया हो तो दे दीजिये।
नित्या:- हा हा …हो गया है ये लो।
* नित्या टिफिन लेके दशरत को देती है। दशरत नित्या को देखते ही रहता है। उसकी बड़ी बड़ी चुचिया चलते वक़्त ऊपर निचे होते देख दशरत का लंड खड़ा होने लगता है।
दशरत:- मन में….आय हाय उम्म्म क्या चुचिया है…मन करता है अभी दबा दू…जी भर के चुसू दबाउ अह्ह्ह काश ये मेरी बीवी होती दिन रात इसको चोदते रहता।
नित्या:- क्या हुआ दशरत भैया ??क्या सोचने लगे??
दशरत:-अ..आ..वो कुछ नहीं…ठीक है मैं निकलता हु।
* *दशरत जाने के लिए मुड़ा…लेकिन थोडा आगे जाके वापस मुद के देखा …नित्या अपने कमरे की तरफ जा रही थी…उसकी मटकती गांड को देख अपना लंड मसलने लगा।
दशरत:-बस एक बार ये मुझे मिल जाय…ऐसी जमके चूत और गांड मारूँगा की कभी भूल नहीं पाएगी। अभी तो इसकी बेटी भी जवान हो गयी है। बिलकुल अपनी माँ पे गयी है। दोनों चोदने मिल जाय एक बार बस….ये सोचते हुए दशरत खेतो की तरफ निकल पड़ा।
*
घर पे नित्या अपना काम निपटा के आराम करने लगती है। ”ये दशरत आजकल बहोत घूरने लग गया है। इसकी शिकायत करनी पड़ेगी इनसे। घर में जवान बेटी है। कही उसके साथ इसने ऐसा वैसा कर दिया तो??”
ये सोच के नित्या थोड़ी घबरा जाती है। लेकिन अगले पल जब वो खुदको आईने में देखती है तो…” वैसे दशरत की भी कोई गलती नही है…मैं हु ही इतनी सेक्सी…लेकिन आजकल ये मुझपे ध्यान ही नहीं देते। जब नयी नयी शादी हुई थी तब ये कितनी चुदाई करते थे मेरी। जब मौका मिला वही अपना लंड मेरी चूत में पेल देते थे। कई बार सासु माँ और ससुरजी ने भी देख लिया था। लेकिन ये नहीं सुधरे। लेकिन अब देखो घर पे कोई नहीं रहता फिर भी महीने में एकाद बार चोदते है। खैर मुझे भी अब चुदाई में जादा दिलचस्पी नहीं रही। चलो थोड़ी देर सो जाती हु। प्रणीति आ जायेगी थोड़ी देर में।
* **
*प्रणीति का स्कूल खत्म हो चूका था। वो घर जाने के लिए निकली….लेकिन जैसे वो स्कूल के कंपाउंड में आयी उसने देखा की दीप की बाइक वहा खड़ी है।
प्रणीति:- सोना वो देख भैया की बाइक…वो आये है शायद…चल ऑफिस में देखते है।
सोना:- हा चल …उनके साथ ही घर चलते है…मेरे पैरो में दर्द है..मैं तो ये सोच सोच के पागल हो रही थी की घर तक पैदल कैसे जाउंगी…दीप को मेरे लिए ही भेजा है भगवान् ने…

उनकी ये बाते चल रही थी की दीप उनके पिछेसे आ रहा था और उसने सोना की बाते सुन ली।
दीप:- हा बिलकुल तेरे लिए ही भेजा है मुझे….
दोनों चौक के पीछे देखती है…
प्रणीति:-भैया आप यहाँ कैसे??
दीप:- अरे वो *स्कूल में कुछ काम था।

प्रणीति:- मुझे बता देते मैं कर देती….और आपने फ़ोन भी नहीं किया।
दीप:- क्यू मेरे ऐसे अचानक आने से तू खुश नहीं है क्या?? सोना को देख कैसे खुश हो रही है।
प्रणीति:- वो तो घर पे पैदल नहीं जाना पड़ रहा इस बात से खुश है।
दीप:- हा चलो जल्दी…देखो लग रहा है बरसात होने वाली है।
*दीप बाइक सुरु करता है। प्रणीति पीछे बैठती है उसके पीछे सोना।
थोड़ी दूर जाते है लेकिन बरसात जोर से सुरु हो जाती है। जब तक किसी पेड़ के निचे जाते तीनो बहोत भीग जाते है।

* प्रणीति अपने बैग से बड़ी पॉलिथीन की बैग निकालती है और उसमे अपना और सोना का बैग रख देती है।
इधर दीप की नजर भीगी हुई सोना पर पड़ती है।सफ़ेद सलवार पानी से भीग के पूरी तरह उसके बदन से चिपक जाती है।जिससे उसकी अंदर पहनी सफ़ेद ब्रा साफ़ साफ़ नजर आने लगाती है। सोना को ये बात समज आ जाती है की दीप उसे देख रहा है। उसे मन ही मन बहोत अच्छा लगता है। वो अपनी चुन्नी ठीक करने के बहाने से उसे ऐसे एडजस्ट कराती है जिससे दीप को उसकी चुचिया देखने में आसानी हो। वो बहोत दिनों से मन ही मन दीप से प्यार करती है पर दोस्त का भाई होने के कारन कुछ कहती नहीं।

दीप उसकी चुचियो की गोलाई और साइज़ देख के चौक जाता है। उसे पहली बार अहसास होता है की सोना अब जवान हो गयी है।और कमाल की जवानी निखर आई है उसकी। वो पेड़ के निचे खड़े थे मगर थोड़ी फवारे उन पर पद रही थी। दीप सोना के चहरे पे पड़ती बारिश की बुंदे को देखता है। उसका भीगा चेहरा देख उसे कुछ होने लगता है। उसकी उभरती जवानी और खूबसूरती दीप के मन में भर जाती है।
दीप:- वाओ सोना कितनी सेक्सी लग रही है। इसके सामने तो मेरी कॉलेज की लडकिया पानी कम चाय है।
* दीप कभी उसकी चूची को तो कभी उसके चेहरे को तो कभी उसके होटो को देखता है।सोना शर्मा के निचे देखते रहती है। लेकिन उसे पता होता है की दीप उसे देख रहा है।

प्रणीति:- भैया क्या हुआ कहा खो गए??
*ये सुनके दीप और सोना दोनों संभल जाते है।
प्रणीति:- मैंने बैग रख दिए है अच्छेसे अब चलो ये बारिस नहीं रुकने वाली।
* वो तीनो फिर से बाइक पे बैठ के घर पहोच जाते है।

दीप और प्रणीति सोना को उसके घर पे छोड़ देते है। सोना अपने भीगे कपडे चेंज करने बातरूम जाती है। अपनी चुनरी निकल के बाजु में रखती है। अपने आप को देखते ही उसे अहसास होता है की उसके भीगे कपडे उसके बदन से चिपके हुए है।वो देखती है की दीप ने उसे कैसे रूप में देख लिया था। एक अजीब सी लहर उसके पुरे शारीर में दौड़ जाती है। जब वो अपने सारे कपडे निकल के नंगी होती है तो देखती है उसकी चुचिया बहोत टाइट हो चुकी है। उसके गुलाबी निप्प्ल्स एकदम तने हुए है। बारिश के मौसम की ठंडी हवाये उसके शरीर में रोंगटे खड़ी कर चुकी है। लेकिन सोना को उस ठण्ड में भी प्यारी सी गर्मी का अहसास हो रहा था। जब उसने अपने बदन को छुवा उसकी उत्तेजना *और भी बढ़ गयी। वो अपनी आँखे बंद करके सोचती है की कैसे दीप उसे देख रहा था।

जब से सोना जवान हुई थी न जाने कितनी बार दीप के बारे में सोच के उसने अपनी चूत में उंगली डाल के उसे चोदा था। पर आज की बात कुछ और ही थी। आज उसकी चूत कुछ जादा ही मस्त हो रही थी। बारिश का पानी और अपनी चूत से निकला रस दोनों मिक्स हो रहे थे। ठन्डे पानी और अपनी चूत का गरम रस उसकी चूत को आज अलग ही मजा दे रहे थे। उसने एक उंगली चूत पे घुमाते हुए दूसरे हाथ में अपना चुचियो का गुलाबी निप्पल मसलने लगी। आँखे बंद कर दीप के बारे में सोचते हुए अपनी चूत को उंगली से चोदने लगी।

सोना:- अह्ह्ह स्स्स्स दीप उफ्फ्फ कब तक तड़पाओगे मुझे अह्ह्ह उम्म्म्म देखो न मेरी चूत कैसे गीली हो रही है तुम्हारी याद में अह्ह्ह्ह
आज सोना की उत्तेजना उफान पर थी। उसकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी की दो उंगलिया भी एक साथ उसकी चूत में आसानी से अंदर बाहर हो रही थी। सोना जल्द ही अपनी मंजिल पर पहोच चुकी थी।
सोना हांफ़ते हुए वाही निचे बैठ गयी। आज से पहले ऐसा अहसास उसे कभी नहीं हुआ था। थोड़ी देर बाद वो नहाके और अपने कपडे चेंज करके वापस अपने कमरे में आ गयी।
* इधर दीप का हाल भी कुछ ऐसाही था। बार बार उसे सोना का वो भीगा बदन आँखों के सामने आ रहा था। बारिश की बुँदे उसके माथे से होते हुए उसके चहरे को उसके होटो को छूती उसके गले से उतरकर उसकी चुचियो की दरारों में समाती देख उसे एक अनोखा अहसास हो रहा था। उसका लंड वो नजारा देख के तबसे खड़ा था। बड़ी मुश्किल से माँ और प्रणीति से उसने छुपाया था। और जिस वक़्त सोना दीप के बारे में सोच के चूत को उंगलियो रगड़ रही थी उसी वक़्त दीप भी सोना के नाम की मुठ मार रहा था।
**
* आग दोनों तरफ लग चुकी थी। लेकिन दोनों की समश्या एक ही थी*
* * * “प्रणीति”
दीप सोच पड़ा था की सोना तक वो अपने दिल की बात कैसे पोहचाये?? उसे उससे जादा फिकर इस बात की थी की अगर प्रणीति को पता चल गया तो ???और उसने माँ बाबा को बता दिया तो उसकी खैर नहीं। क्यू की वो जानता था उसकी बहन बहोत ही सीधी थी।
* सोना भी यही सोच के परेशान हो रही थी की दीप उसे पसंद करने लगा है ये बात उसे पता चल चुकी है पर प्रणीति को कैसे समझाएगी??
* दूसरे दिन सुबह हमेशा की तरह प्रणीति स्कूल जाने के लिए निकली तो दीप ने उसे रोक लिया।
दीप:- प्रणीति चल मैं तुझे छोड़ देता हु।
प्रणीति:- क्यू आप नहीं जा रहे क्या??आपका कॉलेज??
दीप:- अरे आज शुक्रवार है ….अभी फिर दो दिन छुट्टी है ….सोचा की अब सोमवार को ही जाऊंगा।
प्रणीति:- सच भैया?? चलिए….
* *दोनों बाइक पे बैठ के सोना के घर पहोचते है।*
सोना:- अरे दीप….. भैया आप गए नहीं…

* *दीप को भैया कहना उसे बहोत जान पे आ रहा था…पर दिल पे पत्थर रख के उसने पूछा।
प्रणीति:- हा भैया दो तिन दिन बाद जाने वाले है।
* ये सुनके सोना बहोत खुश हो गयी।
वो तीनो बाइक से स्कूल पहुंचे।
दीप और सोना एक दूसरे को छुप छुप के देख रहे थे। कभी कभार जब उनकी नजरे टकरा जाती तो दोनों भी एक प्यार भरी स्माइल कर देते। ये बहोत ही खूबसूरत वक़्त होता है दो प्यार करने वालो के लिए। छुप छुप के एक दूसरे को देखना। होटो पे तो खामोशी होती है पर दिल के अंदर न जाने कितने अरमान आंगडाइ ले रहे होते.

दीप उन दोनों को स्कूल छोड़ने के बाद जाने के लीये मुड़ता है। लेकिन उसे पिछेसे सोना के पुकारने की आवाज आती है। वो रुक जाता है। सोना उसके पास आती है।
सोना:- दीप ..स्कूल से लेने के लिए भी आओगे ना??
*पहले तो सोना के सिर्फ दीप कहने से उसे एक अलग ही ख़ुशी मिलती है और दूसरा सोना उसे स्कूल से लेने के लिए बुला रही होती है।
दीप:- हा आऊंगा ना….
सोना:- ठीक है बाय…

* दीप भी उसे बाय बोलके वापस गाँव की तरफ निकल पड़ता है।
इधर नित्या घर पे अकेली थी। जसवंत का टिफिन लेने के लिए दशरत आता है। घर के बाहर से आवाज देता है पर नित्या अभी भी खाना बना रही होती है। दशरत थोडा अंदर जाता है। किचन में नित्या काम कर रही थी।उसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी। दशरत उसे देखता है। नित्या की साडी कमर से खिसकी हुई थी। उसकी गोरी कमर को देख दशरत का लंड में हलचल होने लगाती है।
दशरत:- अह्ह्ह स्स्स साली क्या मस्त लग रही है। पसीने की बुँदो से क्या चमक रही है। साड़ी भी क्या कसके पहनती है पूरी गांड उभर के दिखती है। उम्म्म्म्म्म अह्ह्ह मेरा लंड तो पूरा खड़ा हो गया।

नित्या को अहसास होता है की दरवाजे पे कोई खड़ा है। वो पलट के देखती है। दशरत पैजामे के ऊपर से अपना लंड मसलते हुए देख लेती है। दशरत झट से अपना हाथ हटाता है।
दशरत:- वो भाभी टिफिन…..
नित्या:- हा बस हो ही गया।….आप बैठो बाहर….और पलट के कम करने लगती है….लेकिन पलटते वक़्त वो दशरत के खड़े लंड को एक नजर देखने से खुद को रोक नहीं पाती।
दशरत बाहर जाके बैठ जाता है।

नित्या:- साला कमीना…आज तो हद्द हो गयी…लगता है इसकी शिकायत करनी ही पड़ेगी। कैसे मुझे देख के लंड मसल रहा था। लेकिन उसका लंड बहोत बड़ा लग रहा था। प्रणीति के बाबा से भी बड़ा। उफ्फ्फ ये मैं क्या सोच रही हु। एक पराये आदमी के लंड के बारे में???छी….लेकिन अगर उसका लंड बड़ा है तो है उसमे क्या??शर्म के मारे ठीक से देख नहीं पायी। लेकिन जितना देखा उससे तो काफी मोटा और लंबा लग रहा था। और उसकी बीवी भी तो बोल रही थी की जब वो उसे चोदता है तो उसकी चूत फाड़ देता है। क्यू न एक बार अच्छेसे देख लू कितना बड़ा है?? चुप कर कुछ भी क्या?? अरे मैं कोनसा चुदने वाली हु उससे बस एक बार देखना है और वो भी पैजामे के ऊपर से।
आखिर नित्या का मन उसके लंड को एक बार देखने के अधीर हो उठता है। वो अपनी साडी को थोडा साइड में कर लेती है ताकि वो उसकी चुचियो को देख सके ताकि उसका लंड खड़ा हो जाय।

नित्या:- दशरत भैया जरा यहाँ आइये…
दशरत नित्या की आवाज सुनके अंदर जाता है।
दशरत:- जी भाभी…क्या हुआ??
नित्या:- ये तेल खत्म हो गया है। वो बड़ी कैन से इस छोटी कैन में डाल दीजिये।*
दशरत:- जी भाभी अभी डाल देता हु।…दशरत की वासना भरी नजर नित्या की चुचियो पे पड़ती है जो उसकी डीप नैक ब्लाउज में से थोड़ी दिख रही थी। दशरत का लंडमें फिर से तनाव आने लगता है। नित्या तिरछी नजरो से देख के मन ही मन खुश हो रही थी। वो एक छोटी प्लेट में कैन रखती है ताकि तेल जमीन पे न गिरे। वो उसे दशरत के सामने रख देती है और खुद उसके साइड में निचे बैठ जाती है। दशरत खड़ा होने के कारन और नित्या थोडा निचे की तरफ झुकने से दशरत को आधे से जादा चुचिया दिखने लगी थी। दशरत का लंड झटके मारने लगा था क्यू की इसकी उसने कभी उम्मीद नहीं की थी। नित्या थोडा तिरछी नजरो से देखती है। पतले पैजामे में से दशरत का अंडर वियर साफ़ दिख रहा था। और उसके लंड का आकर भी।

नित्या:- हा भैया अब डाल दो….धीरे से डालना…निचे गिरना नहीं चाहिए।
दशरत:- जी भाभी…..मन में..साली डाल दो तो ऐसे बोल रही है जैसे *अपनी चूत में लंड डालने को कह रही है। उम्म्म्म्म भाभी बस एक बार चूत में डालने के लिये कहदो कसम से ऐसा मजा दूंगा न अह्ह्ह्ह्ह्ह
*दशरत ये सब सोच रहा था और अपने लंड को झटके दिए जा रहा था। नित्या उसके खड़े लंड का साइज़ देख पागल सी हो गयी थी। इतना तगड़ा लंड इतने करीब से देख के उसकी चूत गीली होने लगी थी।

नित्या:- मन में..हाय रे क्या मस्त लंड है उफ्फ्फ्फ़ किस्मत वाली है इसकी बीवी उम्म्म्म मेरे पति का इतना बड़ा होता तो कितना मजा आता चुदने में स्सस्सस्सस
तेल की छोटी कैन भट चुकी थी मगर दोनों अपने खयाल में मस्त थे।
नित्या का ध्यान कैन पे जाता है…
नित्या:- बस हो गया भैया…हो गया।
दशरत बड़ी कैन अपनी जगह रख देता है।
दशरत:- और कोई काम हो तो बता दीजिये भाभी…संकोच मत कीजियेगा कभी। दशरत अपना लंड सेट करते हुए कहता है।
नित्या उसकी बात का मतलब समझ जाती है। नित्या काफी उत्तेजित महसूस कर रही थी। इस वजह से उसकी हरकते उसे बुरी नहीं लग रही थी।
नित्या:- नहीं भैया अब कोई काम नहीं….आप जाओ वो टिफिन की राह देख रहे होंगे।
दशरत चला जाता है।

इधर दीप बाइक लेके अपने दोस्त नीरज से मिलने उसके घर जाता है।
नीरज दीप से दो साल बड़ा है। वो एक तरह से गाँव का लवगुरु है। पढाई छोड़ चूका है। उसके पास बहोत सी गाये और भैंसे है और वो दूध का बिजनेस करता है। वो अक्सर दीप से मिलने शहर जाता है।
दीप उसे मिलके सोना को कैसे पटाना है इसके लिए टिप लेना चाह रहा था।
दीप उसके घर पहोचता है तो उसकी माँ कहती है की वो तबेले में है।
दीप तबेले में जाता है। लेकिन वो जो देखता है उसपे उसे विश्वास नहीं होता।

* नीरज तबेले में एक कोने में जहा जानवरो का चारा रखा होता है वह किसी औरत को चोद रहा था। दीप झट से थोडा छुप जाता है। नीरज ने उस औरत को घोड़ी बना रखा था …उसकी साडी को कमर तक चढ़ा रखा था। और पिछेसे उसकी चूत में अपना लंड डाल कच कच चोदे जा रहा था। वो औरत दबी आवाज में अह्ह्ह उम्म्म स्स्स्स धीरे ऐसी आवाजे निकाल रही थी। नीरज अब बहोत जोर से उस औरत को चोद रहा था। *दीप ये सब पहली बार देख रहा था। उसका गला सुख चूका था।लेकिन असली झटका उसे तब लगा जब वो औरत पलटी और नीरज का लंड चूसने लगी। वो औरत नीरज की सगी चाची थी। दीप को खुद की आँखों पे विश्वास नहीं हो रहा था। नीरज की चाची उसका लंड पूरा मुह में लेके चूस रही थी। जुबान से चाट रही थी।*

नीरज:- हाय रे मेरी जान उम्म्म्म जब तू मेरा लंड चूसती है न तो बहोत प्यारी लगति है।
चाची:- अह्ह्ह्ह स्स्स्स क्या करू मेरे राजा तेरे लंड का रस इतना अच्छा है न कितना भी पियो पेट ही नहीं भरता।
नीरज:- मेरी रानी तो दिन में दो बार तो पिलाता हु ना तुझे और कितना चाहिए??
चाची:- उम्म्म्म अह्ह्ह्ह तेरे लंड के सहारे ही तो मेरी कट रही है अह्ह्ह्ह
चल अब निकाल जल्दी अपना पानी बुझा दे मेरी प्यास अह्ह्ह्ह्ह
नीरज:- उम्म्म्म्म तू बातो में लगी है अह्ह्ह्ह चूस ले जल्दी से *अह्ह्ह्ह*

* चाची अब चुप हो के नीरज का लंड चूसने लगी और उसके लंड को हिलाने लगी कुछ ही पल में नीरज ने अपना सारा पानी चाची के मुह में डाल दिया। चाची भी बड़े चाव से उसे पि गयी।
दीप वहा से झट से निकल गया और बाहर तबेले से थोडा दूर जाके खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद चाची बाहर आयी। दीप को सामने देख के चौक गयी लेकिन अगले पल।संभल गयी और बिना कुछ बोले वहा से निकल गयी।
दीप उसे वहा से जाते हुए देखने लगा। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

थोडा संभलने के बाद दीप अंदर गया। नीरज कुछ काम कर रहा था। दीप को देख के वो खुश हो जाता है।
नीरज:- अरे तू कब आया?? फ़ोन भी नहीं किया…
दीप:- कल ….हा अब गाओं में ही हु तो क्या फ़ोन करना इसलिए सीधा यही आ गया।
नीरज:- चल आजा घर चलते है…
दीप:- नहीं यही बैठते है…
नीरज:- चल ठीक है….और बता क्या हालचाल??

दीप:- मेरा छोड़ साले तू बता ये क्या चक्कर है तेरा??
नीरज:- क्या चक्कर??किस बारे में बात कर रहा है??
दीप:- ये तेरी चाची वाला…..
दीप को लगा की नीरज घबरा जायेगा मगर वो तो हंस रहा था।
नीरज:-अछा वो..तूने देखा क्या??
दीप:- हा…
नीरज:- देख भाई…उसे लंड की जरुरत थी मैं उसकी जरुरत पूरी कर रहा हु।

दीप:- लेकिन वो चाची है तेरी…
नीरज:- हा तो क्या?? चाचा उसे चोदता नहीं तो वो बेचारी क्या करे??
तू टेंशन मत ले यार…
दीप:- भाई ये गलत है लेकिन…
नीरज:- सुन मेरी बात…यहाँ आ..अब मैं तुझे जो बताऊंगा उसे ध्यान से सुन….देख औरत जो होती है उसे जिंदगी में ऐशो आराम न मिले वो चल जाता है मगर उन्हें लंड ना मिले तो वो बर्दास्त नहीं कर पाती। औरतो को लंड की चाहत पहली बार तब होती है जब वो जवानी पहला कदम रखती है और दुबारा जब वो 30 35 साल के ऊपर हो जाती है। इन दोनों ही परिस्थिति में उनको चुदाई की बड़ी प्यास होती है। पहले जवानु का उबाल उन्हें चैन से बैठने नहीं डेता। मगर उस वक़्त वो समाज के नियमो से बंधी होती है इस लिए चुपके चुपके ऐसा कम करती है। और जब वो 30 35 साल की हो जाती है तो उनका पति उनको देखता नहीं। कभी कभार चोदता है लेकिन इससे उनका पेट नहीं भरता। इसलिए वो मज़बूरी में दूसरा आदमी ढूंढती है। और देख अगर मैं चाची को नहीं चोदता तो कोई और चोदता…इसमे मेरा भी फायदा है ना…मुझे चाची की चूत मिल जाती है चोदने को…मुठ मारने की जरुरत नहीं…क्यू की मेरी शादी को अभी 2 3 साल टाइम है। तब तक मजे करो। समझा??

दीप:- उसके आगे हाथ जोड़के…हा मेरे भाई सब समझ गया। लेकिन यार वो चाची है सगी तेरी।
नीरज:- अरे मेरे भाई वही तो बता रहा हु….देख अगर वो मेरी चाची नहीं होती तो मैं उसे चोद सकता था …मैं यही सोचता हु किं वो मेरी चाची नहीं है…वो सिर्फ एक औरत है और मैं मर्द रिश्ते तो हम कहा पैदा होते है उससे बनते है पर है तो हम औरत और मर्द ही ना। रिश्तों के नाम को निकल दिया तो क्या रहता है?? औरतो के पास चूत है हमारे पास लंड उन दोनों को आपस में मिलाना है बाकि बाते जाय भाड़ में…क्यू अब हुआ न सब क्लियर??

दीप को अब भी थोडा अटपटा सा लग रहा था। पर वो और प्रवचन सुनने के मूड में नहीं था। तो उसने सिर्फ हा में गर्दन हिला दी।
दीप:- ह्म्म्म अब थोडा क्लियर हुआ है…पर एक बात बता तूने चाची को पटाया कैसे??
वीजय:- जाने दे यार बहोत लंबी कहानी है।*
दीप:- बता तो सही…
नीरज:- देख मेरे चाची के रिश्ते के बारे में किसीको भी पता नहीं….तू पहला इंसान है …लेकिन चाची और मेरे रिश्ते के पीछे और एक कहानी है..जो मैं तुझे बताना नहीं चाहता।

दीप:- बता दे यार…मैं किसी को नहीं कहूँगा।
नीरज:- जा ने दे न भाई….फिर कभी।
दीप:- ठीक है भाई…जब तेरा दिल करे….लेकिन साले कमीने मस्त मजे करता है यार तू…
नीरज:-हा यार वो तो है….चाची है बड़ी कमाल की…ऐसे चुदवाती है की क्या बताऊ….उसे बहोत शौक है चुदवाने का….और साली लंड के पानी के लिए इतनी भूकी है क्या बताऊ…
दीप:- हा देखा मैंने….कैसे चूस रही थी….और गांड भी क्या जबरदस्त है यार उफ्फ्फ्फ़ मेरा तो लंड खड़ा हो गया था।
नीरज:- आय हाय क्या बात है मेरा शरीफ दोस्त अब बिगड़ने लगा है….(आँख मारते हुए) बोल चोदेगा क्या चाची को?? मैं लगाता हु तेरी सेटिंग….बोल??

दीप:- नहीं यार कुछ भी क्या??
नीरज:- शरमा मत मेरी जान….यही दिन होते है मजे करने के…
दीप के मन में तो लड्डू फूटने लगते है। लेकिन झिझक की वजह से वो नहीं नहीं बोलते रहता है।
नीरज:- अरे कुछ नहीं होगा…कब तक मुठ मार के काम चलाएगा??
दीप:- लेकिन चाची मानेगी??

नीरज:- तू उसकी चिंता मत कर…मैं उसे बोल दूंगा की तूने उसे मुझसे चुदवाते देख लिया है और अब वो भी तुम्हे चोदना चाहता है। वो तो है ही लंड की भूकी मान जायेगी। नहीं मानी तो बोलूंगा की उसने हमारी फ़ोटो ले ली है और चाचा को दिखाने की बात कर रहा था।
दीप:- यार कुछ गड़बड़ तो नहीं होगी??
नीरज:- भाई है तू मेरा…तू जा आराम से घर…मैं तेरी सुहागरात का बंदोबस्त करता हु। तू बस 4 बजे यही तबेले में आ जाना। वैसे तो वो मेरा टाइम रहता है लेकिन आज तू मजे करना। 4 से 5 बजे तक एक घंटा मस्त चुदाई करना साली की। बाद में चाचा और उसके बच्चे आ जाते है घर पे।
दीप:- ठीक है मैं तुझे 3.30 को फ़ोन करता हु।
नीरज:- ह्म्म्म ठीक है।*