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अन्तर्वासना की सच्ची कहानी

गतांग से आगे …

अब तक प्रीतम भी नंगे हो चुके थे. शीला ने लजाते हुए उनके लिंग को देखा. उसे वो कोई खास बड़ा नहीं लगा. उससे बड़ा तो उसके मरद का था. वो सोच रही थी कि यह अन्दर जाएगा तो उसे कैसा लगेगा. शुरुआत उसने ही की. वो प्रीतम के पास गई और उनके लिंग को अपने हाथ में ले कर उसे सहलाने लगी. उसके हाथ का स्पर्श पा कर लिंग तुरंत तनाव में आ गया. प्रीतम ने भी उसके स्तनो को थाम कर उन्हें मसलना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर बाद प्रीतम शीला को पलंग पर ले गए. दोनो एक दूसरे को अपनी बाहों में भर कर लेट गये. दीपक ने अपने एक हाथ से उसके निपल को मसलते हुए कहा, “शीला, तुम नही जानती कि मैं इस दिन का कब से इंतजार कर रहा था!”

“मैं खुश हूं कि मेरे कारण आपको वो सुख मिल रहा है जिसकी आपको जरूरत थी,” शीला ने प्रीतम के लिंग को मसलते हुए कहा.

प्रीतम फुसफुसा कर बोले, “तुम्हारे हाथों में जादू है, शीला.”

शीला बोली, “अच्छा? लेकिन यह तो मेरे हाथ में आने से पहले से खड़ा है.”

प्रीतम भी नहीं समझ पा रहे थे कि आज उनके लिंग में इतना जोश कहाँ से आ रहा है. वो भी अपने लिंग के कड़ेपन को देख कर हैरान थे और कामोत्तेजना से आहें भर रहे थे. शीला ने अपनी कोहनी के बल अपने को उठाया और वो प्रीतम की जांघों के बीच झुकने लगी. प्रीतम यह सोच कर रोमांचित हो रहे थे कि शीला उनके लिंग को अपने मुह में लेने वाली है. उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी कि शीला जैसी कम पढ़ी स्त्री मुखमैथुन से परिचित होगी. उनकी पढ़ी-लिखी मॉडर्न पत्नी ने भी सिर्फ एक-दो बार उनका लिंग मुंह में लिया था और फिर जता दिया था कि उन्हें यह पसंद नहीं है.

ओह! कितना उत्तेजक होगा यह अनुभव! प्रीतम ने सोचा और धीमे से शीला के सर के पीछे अपना हाथ रखा. उसके सर को आगे की तरफ धकेल कर उन्होंने यह जता दिया कि वे भी यही चाहते है. शीला ने उनके लिंगमुंड को चूमा. उसके होंठ लिंग के ऊपरी हिस्से को छू रहे थे और तीन-चार बार चूमने के बाद शीला ने अपनी जीभ लिंग पर फिरानी शुरू कर दी .प्रीतम आँखें बंद कर के इस एहसास का आनंद ले रहे थे. शीला ने अपना मुंह खोला और लिंग को थोड़ा अंदर लेते हुए अपने होंठों से कस लिया. उसके ऐसा करते ही प्रीतम को अपने लिंग पर उसके मुह की आंतरिक गरमाहट महसूस हुई. उन्हें लगा कि उनका वीर्य उसी समय निकल जाएगा.

उन्होंने अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर के अपनी उत्तेजना और रोमांच पर काबू किया. फिर उन्होंने अपने हिप्स उसके मुह की तरफ उठा दिये जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लिंग उसके मुह मे जा सके और वो उसके पूरे मुह की गरमाहट अपने लिंग पर महसूस कर सके. लेकिन उनकी उत्तेजना इतनी बढ़ गई थी कि वे शीला का सर पकड़ कर उसे अपने लिंग पर ऊपर नीचे करने लगे. अब शीला का मुह पूरे लिंग को अपने अंदर समा चुका था.

शीला कुछ देर और उनके लिंग को अपने मुह में लिए चूसती रही पर प्रीतम का यौन-तनाव अब बर्दाश्त के बाहर हो गया था. उन्होंने माला को चित लिटा दिया. वो समझ गई कि अब वक्त आ चुका है. उसने अपनी टाँगे चौड़ी कर दी. प्रीतम उस की फैली हुई टाँगों के बीच आये और उसके ऊपर लेट गये. वे उसके गरम और मांसल शरीर का स्पर्श पा कर और भी कामातुर हो गए. उनका उत्तेजित लिंग शीला की योनि से टकरा रहा था. उनकी बाँहें शीला के गिर्द भिंच गयीं और उनके नितम्ब बरबस ऊपर-नीचे होने लगे. शीला ने अपनी टांगें ऊपर उठा दी. लिंग ने अनजाने में ही अपना लक्ष्य पा लिया और योनी के अन्दर घुस गया.

प्रीतम अपने लिंग पर योनि की गरमाहट को पूरी तरह से महसूस कर पा रहे थे. योनी की जकड़ उतनी मजबूत नहीं थी जितनी उनकी पत्नी की योनी की होती थी. लेकिन लिंग पर नई योनी कि गिरफ्त रोमांचकारी तो होती ही है और प्रीतम भी इसका अपवाद नहीं थे. लिंग पर नई योनी का स्पर्श, शरीर के नीचे नई स्त्री का शरीर और आँखों के सामने एक नई स्त्री का चेहरा – इन सब ने प्रीतम को उतेजना की पराकाष्ठ पर पंहुचा दिया.

उनका लिंग जल्दी वीर्यपात न कर दे इसलिये अपना ध्यान योनी से हटाने के लिए प्रीतम ने शीला के निचले होंठ को अपने होंठों में दबाया और उसे चूसने लगे. शीला ने भी उनका साथ दिया और वो उनका ऊपर वाला होंठ चूसने लगी. अब प्रीतम ने अपनी जीभ शीला के मुह में घुसा दी. शीला भी पीछे नहीं रही. दोनों की जीभ एक-दूसरी से लड़ने लगीं. इसका परिणाम यह हुआ कि प्रीतम अपनी उत्तेजना पर काबू खो बैठे. उनके नितम्ब उन के वश में नहीं रहे और बेसाख्ता फुदकने लगे. उनका लिंग सटासट योनि के अंदर-बाहर हो रहा था. उसमे निरंतर स्पंदन हो रहा था. उनकी साँसे तेज हो गई थी. उनके मचलने के कारण लिंग योनि के बाहर निकल सकता था.

शीला ने इस सम्भावना को ताड़ लिया. उसने अपने पैर उनके नितम्बों पर कस कर उनके धक्कों को नियंत्रित करने की कोशिश की. वह सफल भी हुई पर एक मिनट बाद प्रीतम का लिंग फिर से बेलगाम घोड़े की तरह सरपट दौड़ने लगा. उनका मुंह खुला हुआ था और उससे आहें निकल रही थी. लिंग तूफानी गति से अंदर बाहर हो रहा था. अचानक प्रीतम का शरीर अकड़ गया और उनके लिंग ने योनी में कामरस निकाल दिया. वे शीला के ऊपर एक कटी हुई पतंग की तरह गिर गए. वे अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझ रहे थे कि एक लम्बे अर्से के बाद आज उन्हें एक पूर्ण तृप्ति देने वाले संभोग का अनुभव हुआ था.

जब प्रीतम कामोन्माद से उबरे तो उन्हें एहसास हुआ कि शीला ने तो उन्हें तृप्ति दे दी थी पर वे उसे तृप्त नहीं कर पाए थे. वे शीला के ऊपर से उतर कर उसकी बगल में लेट गए. लंबी साँसे लेते हुए वे बोले, शीला, बहुत जल्दी हो गया ना! तुम तो शायद प्यासी ही रह गई. दोस्तो आप मस्ताराम डॉट नेट पर अन्तर्वासना की सच्ची कहानी पढ़ रहे है |

शीला उनके सीने पर हाथ फेरते हुए बोली, पहली बार नई औरत के साथ ऐसा हो जाता है. पर अभी हमारे पास वक़्त है. आप थोड़ी देर आराम कीजिये, मैं चाय बना कर लाती हूं.

वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहन कर पहले बाथरूम में गई और फिर किचन में. उसके जाने के दो मिनट बाद प्रीतम बाथरूम में गये. वापस आ कर उन्होने अंडरवियर पहना और कुर्सी पर बैठ गये. पिछले कुछ मिनटों में जो उनके साथ हुआ था वो उनके दिमाग में एक फिल्म की तरह चलने लगा. उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि उन्होंने अपनी पत्नी के अलावा किसी और स्त्री के साथ सम्भोग किया था! पर सामने पड़े शीला के कपड़े बता रहे थे कि यह सच था. वे थोड़े लज्जित भी थे – एक तो इसलिये कि उन्होंने एक नौकरानी के साथ यह काम किया था और दूसरे इसलिये कि वे उसे तुष्ट नहीं कर पाए.

प्रीतम अपने ख्यालों में खोये हुए थे कि शीला उनके लिए चाय ले कर आ गई. उन्हें चाय का कप दे कर वह उनके सामने जमीन पर बैठ कर चाय पीने लगी. उनको उदास देख कर वह बोली, दुखी क्यों हो रहे हैं, बाबूजी? मैंने कहा ना कि हमारे पास वक्त है. इस बार सब ठीक होगा!

इस बार? प्रीतम निराशा से बोले. अब दुबारा होना तो बहुत मुश्किल है!

क्या बात करते हैं, बाबूजी? शीला विश्वास से बोली. आप चाय पी लीजिये. फिर मैं आपके लंड को तैयार न कर दूं तो मेरा नाम शीला नहीं.
यह सुन कर प्रीतम चौंक गए, न सिर्फ शीला के आत्मविश्वास से बल्कि उसकी भाषा से भी. वे ऐसे शब्दों से अनभिज्ञ नहीं थे, अनभिज्ञ तो कोई भी नहीं होता. पर उन्होंने अब तक किसी भी स्त्री के साथ ऐसी भाषा में बात नहीं की थी. किसी स्त्री के मुंह से ऐसे शब्द सुनना तो और भी विस्मयकारी था. उनकी पत्नी तो इतनी शालीन थी कि उनके सामने ऐसी भाषा का प्रयोग करना अकल्पनीय था.

उनको चकित देख कर शीला फिर बोली, आपको यकीन नहीं हो रहा है, बाबूजी? अभी देख लेना आपके लंड की क्या मजाल कि मेरे मुंह में आ जाए और खड़ा न हो!

अब प्रीतम समझ गए कि शीला जिस तबके की थी उसमे मर्दों और औरतों द्वारा ऐसी भाषा में बोलना सामान्य होता होगा. चाय ख़त्म हो चुकी थी. शीला किचन में कप रख आई. उसने प्रीतम के सामने बैठ कर उनका अंडरवियर उतारा. उनके लंड को हाथ में ले कर वो बोली, मुन्ना, बहुत सो लिए. अब उठ जाओ. अब तुम्हे काम पर लगना है.

थोड़ी देर लंड को हाथ से सहलाने के बाद उसने सुपाडा अपने मुंह में ले लिया और उस पर अपनी जीभ फिराने लगी. जल्द ही उसकी जादुई जीभ का असर दिखा. निर्जीव से पड़े लंड में जान आने लगी. धीरे धीरे उसकी लम्बाई और सख्ती बढ़ने लगी. शीला ने पूरे लंड को अपने मुंह में लिया और उसे कस कर चूसने लगी. प्रीतम ने उसके सिर पर हाथ रख कर अपनी आँखे बंद कर ली. उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि उनका लंड इतनी जल्दी दुबारा खड़ा हो गया था! शीला उनके लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे वो उसके रस को चूस कर ही निकालना चाहती हो. प्रीतम इस सुखद एहसास का भरपूर मज़ा ले रहे थे, ”ओsssह…! शीला थोड़ा धीरे आsssह्ह …!”

शीला पांच मिनट तक उनका लंड चूसती रही. जब उसे यकीन हो गया कि अब लंड से काम लिया जा सकता है तो उसने प्रीतम को पलंग पर लेटने को कहा. जब प्रीतम लेट गए तब उसने अपना ब्लाउज़ और पेटीकोट उतारना शुरू किया. प्रीतम कामविभोर हो कर उसे निर्वस्त्र होते हुए देख रहे थे. नंगी होने के बाद शीला उनकी जांघों पर सवार हो गई. वो आगे झुक कर उनके होंठों को चूसने लगी. प्रीतम ने उसके स्तनों को अपने हाथों में लिया और उन्हें हल्के हाथों से दबाने लगे. शीला ने अपना मुंह उठा कर कहा, बाबूजी, जोर से दबाओ ना. मेरी चून्चियां बीवीजी जितनी नाज़ुक नहीं हैं!

प्रीतम उसकी चून्चियों को तबीयत से दबाने और मसलने लगे. शीला ने फिर से अपने रसीले होंठ उनके होंठों पर रख दिए और उनसे जीभ लड़ाने लगी. प्रीतम को ऐसा लग रहा था मानो वो स्वप्नलोक की सैर कर रहे हों. पलंग पर स्त्री का ऐसा सक्रिय और आक्रामक रूप वे पहली बार देख रहे थे. जब वे बुरी तरह काम-विव्हल हो गए तो उन्होंने शीला से याचना के स्वर में कहा, बस शीला, अब अन्दर डालने दो.

शीला ने शरारत से उन्हें देखा और पूछा, कहाँ डालना चाहते हो, बाबूजी? मुंह में या मेरी चूत में?

प्रीतम ने शर्मा कर कहा, तुम्हारी चूत में.

शीला ने अपनी चूत पर थूक लगाया और उसे प्रीतम के लंड से सटा दिया. लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसने अपनी कमर को नीचे धकेला. एक ही धक्के में चूत ने पूरे लंड को अपने अन्दर निगल लिया. अब शीला हौले-हौले धक्के लगाने लगी.

शीला की गर्म चूत में जा कर प्रीतम के लंड में जैसे आग सी लग गयी. उनके नितम्ब अनायास ही उछलने लगे पर इस बार कमान शीला के हाथों में थी. उसने प्रीतम की जाँघों को अपनी जाँघों के नीचे दबाया और उन्हें उछलने से रोक दिया. उसने प्रीतम से कहा, बाबूजी, आप आराम से लेटे रहो और मुझे अपना काम करने दो.

प्रीतम ने समर्पण कर दिया. जब शीला ने देखा कि प्रीतम अब उसके कंट्रोल में हैं तो उसने धक्कों की ताक़त बढ़ा दी. प्रीतम लेटे-लेटे शीला के धक्कों का मज़ा लेने लगे. शीला एक-दो मिनट धक्के मारती और जब उसे लगता कि प्रीतम झड़ने वाले हैं तो वो रुक जाती. ऐसे ही वो एक बार धक्कों के बीच रुकी तो उसने पूछा, बाबूजी, कभी बीवीजी भी आपको ऐसे चोदती हैं या वे सिर्फ चुदवाती हैं?

प्रीतम ने थोडा शरमाते हुए कहा, वे तो सिर्फ नीचे लेटती हैं. बाकी सब मैं ही करता हूं.

बाबूजी, मेरा मरद तो मुझे हर तरह से चोदता है – कभी नीचे लिटा कर, कभी ऊपर चढ़ा कर, कभी घोड़ी बना कर तो कभी खड़े-खड़े, शीला ने कहा.

प्रीतम को लगा कि उसे चुदाई के साथ-साथ शीला की अश्लील बातें सुनने में भी मज़ा आ रहा है. चुदाई और शीला की बातें दो-तीन मिनट और चलीं. फिर प्रीतम को लगा कि वे आनन्दातिरेक में आसमान में उड़ रहे है. जब आनंद का एहसास अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया तो उन्होने शीला की कमर पकड़ ली. उनके नितंब अपने आप तेज़ी से फुदकने लगे. वैसे भी उन्होंने बहुत देर से अपने को रोक रखा था. उन्होंने शीला को अपनी बाहों में भींच लिया. उन्हें अपने लंड पर उसकी चूत का स्पंदन महसूस हो रहा था जिसे वे सहन नहीं कर पाये.

उनका लंड शीला की चूत में वीर्य की बौछार करने लगा. जब शीला की चूत ने उनके वीर्य की आखिरी बूंद भी निचोड़ ली तो उनका लंड सिकुडने लगा. दोनों एक दूसरे को बाहों में समेटे लेटे रहे. कुछ देर बाद जब प्रीतम की साँसे सामान्य हुईं तो उन्होंने कहा, “शीला, तुमने आज जो आनंद मुझे दिया है वो मैं कभी नहीं भूलूंगा.”

महीना समाप्त हुआ. शीला को तनख्वाह देनी थी. प्रीतम ने वादे के मुताबिक उसे एक की बजाय दो हज़ार रुपये दिए. पर शीला ने एक हज़ार रुपये वापस करते हुए उन्हें कहा, बाबूजी, मेरे मर्द ने मना किया है. मैं एक हज़ार ही लूंगी.

यह सुन कर प्रीतम चौंक गए. उन्होंने आश्चर्य से कहा, क्या? तुमने उसे यह बता दिया?

शीला ने गर्दन झुका कर जवाब दिया, इतनी बड़ी बात मैं उससे कैसे छुपाती. उसके हाँ करने पर ही मैं आपकी इच्छा पूरी करने को तैयार हुई थी. दोस्तो आप मस्ताराम डॉट नेट पर अन्तर्वासना की सच्ची कहानी पढ़ रहे है |  प्रीतम को यकीन नहीं हो रहा था कि शीला का पति यह कर सकता है. उन्होंने विस्मय से पूछा, तुम्हारा पति यह मान गया? उसने तुम्हे मेरे से चुदने की इजाज़त दे दी और इसके बदले में वो कुछ नहीं चाहता?

आपने मेरे मरद को ग़लत समझा है वह कोई धर्मात्मा नहीं है वो भी आपकी तरह औरतों का रसिया है. उसे सिर्फ इतना चाहिए कि जैसे उसने आपकी इच्छा पूरी की वैसे ही आप उसकी इच्छा पूरी कर दें.

शीला की बात से प्रीतम चकरा गए. वे यह तो समझ गये कि शीला का पति एक नई औरत चाहता है और शीला को इस में कोई ऐतराज़ नहीं है पर उन्हें यह समझ में नहीं आया कि इसमें वो क्या कर सकते हैं. उन्होंने कहा, लेकिन इस के लिए तो एक हज़ार काफी होंगे! मेरा मतलब है कि इतने में तो वो एक अच्छी-खासी औरत का इंतजाम कर सकता है.

क्या कह रहे हैं, बाबूजी? शीला ने नाराज़गी से कहा. मेरा मरद ऐसा नहीं है. वो बाज़ारू औरतो के पास नहीं जाता.

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