अन्तर्वासना की सच्ची कहानी

गतांग से आगे …

तो तो फिर क्या चाहता है वो?

बीवी के बदले बीवी! बीवीजी के आने में अभी टाइम है पर वो इतना इंतजार कर लेगा. जिस दिन वो वापस आयें, उस दिन आप उन्हें मेरे मरद के पास भेज देना.

यह सुन कर प्रीतम का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा. उन्होंने क्रोध से कहा, जानती हो क्या कह रही हो तुम?

अदला-बदली की ही तो बात कर रही हूं. एक हज़ार में बाज़ारू औरत तो आप भी ला सकते थे फिर आप मुझे एक हज़ार रुपये क्यों दे रहे थे? इसीलिये ना कि मैं धंधा करने वाली बाज़ारू औरत नहीं हूं!

यह तो धोखाधड़ी है! तुमने यह पहले क्यों नहीं बताया? प्रीतम ने तमतमा कर पूछा.

बाबूजी, मैंने तो कहा था कि मेरी एक शर्त है, शीला ने कहा. पर आपने उसे सुने बिना ही कह दिया कि आपको मेरी हर शर्त मंजूर है.

प्रीतम को याद आया कि शीला की बात सच थी. पर वो अब भी अपने आपे से बाहर थे. वे गुस्से से बोले, एक हज़ार कम हैं तो दो हज़ार ले लो.

अब शीला भी उसी लहज़े में बोली, बाबूजी, आप बीवीजी को मेरे मरद के पास भेज देना, मैं आपको दो हज़ार रुपये दे दूंगी!

प्रीतम अब गुस्से से पागल हो गए. वे बोले, तू अपनी औकात भूल गई है! अपने पैसे ले और जा. और हां, कल से काम पर नहीं आना.

शीला को उन पर गुस्सा भी आया और दया भी. वो सहज स्वर में बोली, मैं तो आपकी औकात देख रही हूँ, बाबूजी! आपकी बीवी सती सावित्री और गरीब की बीवी रंडी! यह है बड़े लोगों की औकात! ठीक है, जाती हूं अब.

शीला जाने के लिए मुड़ी. प्रीतम का वासना का नशा अब पूरी तरह से उतर चुका था. शीला को जाती हुई देख कर वे सोच रहे थे कि आज वे बाल-बाल बचे हैं. तभी शीला फिर मुड़ी. उसने अपना मोबाइल ऑन किया और उसे प्रीतम के सामने कर दिया. उसे देख कर प्रीतम का सर घूमने लगा. उन्हें लगा कि वे गश खा कर गिरने वाले हैं. मोबाइल में उनकी और शीला की चुदाई का वीडियो था. वे किसी तरह संभले और उनके मुंह से निकला, ये…! ये कैसे…!!!

शीला को उनकी हालत देख कर मज़ा आ रहा था. उसने उनकी दुविधा दूर करते हुए कहा, आपको याद है कि जब आपने पहली बार मुझे दबोचा था, तब मैने क्या कहा था? ‘आज नहीं, कल इतवार है. कल आप जो चाहो कर लेना.’ अगले दिन आपके कमरे में आ कर मैंने खिड़की से बाहर देखा था और पर्दों को खिसकाया था. मैंने पर्दों के बीच थोड़ी जगह छोड़ दी थी. बस, बाकी काम बाहर से मेरे मरद ने कर दिया.

अब प्रीतम की हालत ऐसी थी कि काटो तो खून नहीं. वे अवाक् थे कि यह क्या हो गया? हुआ भी है या नहीं? एक पल उन्हें यह सपना लगता पर दूसरे पल सामने खड़ी शीला उन्हें हकीकत लगती. उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वे क्या करें?

शीला ने मोबाइल बंद कर के कहा, आप ठीक तो हैं, बाबूजी? आपकी तबियत कुछ बिगड़ी हुई सी लग रही है!

प्रीतम जैसे नींद से जागे, हूं? मैं! हां, ठीक हूं तुम तुम क्या करोगी? मतलब अब …?

अब स्थिति पूरी तरह शीला के काबू में थी. वह खुश हो कर बोली, अब तो तीन ही रास्ते हैं. आप आराम से बैठ जाइए ना. पहला रास्ता यह है कि मैं बीवीजी को यह वीडियो दिखा दूं और आगे क्या करना है यह उन्ही पर छोड़ दें. दूसरा रास्ता यह है यह वीडियो बाज़ार में बिके और इसे हर कोई देखे. …

प्रीतम अब एक हारे-पिटे जुआरी की तरह दिख रहे थे. अगर उनकी पत्नी ने यह वीडियो देख लिया तो न जाने वो उनके साथ क्या करेगी! और यह बाज़ार में बिकने लगा तो उनके सामने आत्महत्या करने के सिवा कोई चारा नहीं बचेगा! वे डरे हुए स्वर में बोले, और तीसरा रास्ता?

वो तो मैंने पहले ही बता दिया था. आप बीवीजी को राज़ी करके मेरे मरद के पास भेज दें. वो उन्हें चोद लेगा तो यह किस्सा ही ख़तम हो जाएगा. और हां, आप चाहें तो यह अदला-बदली आगे भी चल सकती है. …अब चलती हूँ मैं. कल आऊंगी. तब तक आप सोच लीजिये कि आपको क्या करना है!

शीला चली गई और प्रीतम गहरे सोच में डूब गए. सोच क्या, वे तो एक गहरे गर्त में थे जिससे निकलना असंभव सा लग रहा था. शीला के बताये पहले दो रास्तों का तो एक ही अंजाम था – उनकी निश्चित बर्बादी! तीसरा रास्ता उन्हें बचा सकता था पर अपनी संभ्रांत पत्नी को एक नौकरानी के पति को सौंपना!!!

उनके दिल से आवाज आई, तुम्हारे जैसा इज्ज़तदार आदमी यह घटिया काम करेगा?

तभी दिल के दूसरे कोने ने कहा, बड़ा इज्ज़तदार बनता है! अगर अपनी बीवी को उसके पास नहीं भेजा तो तेरी इज्ज़त बचेगी?

पहले कोने ने जवाब दिया, क्या करूँ फिर? एक तरफ कुआँ है और दूसरी तरफ खाई! अगर निकिता को भेजा तो भी इज्ज़त जायेगी और नहीं भेजा तो भी!

दूसरे कोने ने समझाया, तू यह क्यों नहीं सोचता कि उस घटिया आदमी ने निकिता को चोद भी लिया तो बात सिर्फ चार लोगों तक ही सीमित रहेगी. दुनिया के सामने तो इज्ज़त बनी रहेगी.

पहले कोने ने कहा, हां, यह तो है. मुझे शीला को सख्ती से कहना होगा कि यह बात हम चार लोगों तक ही सीमित रहनी चाहिए.

दूसरे कोने ने कहा, अब हिम्मत रख और निकिता के आने पर उसको तैयार कर. दोस्तो आप मस्ताराम डॉट नेट पर अन्तर्वासना की सच्ची कहानी पढ़ रहे है |  पहला कोना अब भी शंकित था, पर निकिता मानेगी? उसने इंकार कर दिया तो?

दूसरे कोने ने उसकी शंका दूर की, मूर्ख, निकिता एक भारतीय पत्नी है. रोज़ तो अखबारों में पढता है कि पति अगर बलात्कार भी कर आये तो पत्नी उसे बचाने की कोशिश करती है, यहाँ तक कि उसे निर्दोष साबित करने के लिए उसे नपुंसक भी बता देती है!

‘ठीक है, पहले कोने ने थोडा आश्वस्त हो कर कहा. निकिता के आने पर उससे बात करता हूं. प्रीतम ने मन ही मन तय तो कर लिया था कि निकिता के लौटने पर वे उससे बात करेंगे पर ऐसी बात करना कोई आसान काम नहीं था. वे अच्छी तरह जानते थे कि स्थिति उस के सामने रखने में उन्होंने ज़रा भी गलती कर दी तो परिणाम भयानक हो सकता है. वे निकिता को खो भी सकते हैं. वैसे निकिता क्रोधी स्वाभाव की नहीं थीं पर अपने पति की बेवफाई कौन स्त्री बरदाश्त करेगी.

प्रीतम समझते थे कि उनको एक-एक शब्द तौल कर बोलना होगा और साथ ही उन्हें अच्छी खासी एक्टिंग भी करनी होगी. उन्हें अपने कॉलेज के दिन याद आ गए जब वे नाटकों में अभिनय किया करते थे. गनीमत थी कि निकिता के लौटने में तीन दिन थे. इन तीन दिनों में उन्हें पूरा रिहर्सल करना था. लेकिन मुश्किल यह थी कि यहाँ कोई संवाद लेखक और निर्देशक नहीं था. सब कुछ उन्हें स्वयं करना था. प्रीतम दिन-रात सोचते रहते थे कि उन्हें क्या और कैसे बोलना है.

शीला रोज़ काम करने आती थी और प्रीतम से पूछती रहती थी कि बीवीजी कब आएँगी. शीला और उसके पति ने उनका वासना का भूत ऐसा उतारा था कि शीला को देख कर अब उन्हें रोमांच के बजाय वितृष्णा होती थी. उन्होंने तय कर लिया था कि इस बार वे बच जाएँ तो भविष्य में किसी परायी स्त्री कि तरफ आँख उठा कर भी नहीं देखेंगे.

बार-बार सोचने पर भी प्रीतम के समझ में नहीं आ रहा था कि वे निकिता को क्या कहें. उन्होंने मन ही मन कई तरह के वाक्य बनाए पर हरेक में कुछ न कुछ कमी नज़र आ जाती थी. अंत में उन्होंने सोचा कि निकिता को कोई गहरा शॉक देना ही एक मात्र रास्ता था जो उन्हें उसके गुस्से से बचा सकता था. शॉक कैसा हो यह भी उन्होंने सोच लिया. रिहर्सल का तो वक़्त ही नहीं मिला क्योंकि निकिता के लौटने का दिन आ गया था. ट्रेन पहुँचने से पहले उन्होंने निकिता को फ़ोन से बताया कि तबियत ख़राब होने के कारण वे स्टेशन नहीं आ सकेंगे. निकिता ने उनको कहा कि वे ओटो रिक्शा ले कर आ जायेंगी. वे अपनी तबियत का ध्यान रखें.

छुट्टी का दिन था. शीला काम करके जा चुकी थी. निकिता घर पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि ड्राइंग रूम का दरवाजा खुला हुआ था. उन्हें लगा कि प्रीतम की तबियत जितना उन्होंने सोचा था उससे ज्यादा ख़राब है. वे सूटकेस नीचे रखने के लिए झुकीं तो उन्हें मेज पर पेपर वेट से दबा एक बड़ा कागज़ दिखा जो हवा से फडफडा रहा था. मेज पर और कुछ नहीं था. उन्होंने आगे बढ़ कर वो कागज़ उठाया. जैसे ही उन्होंने उसे पढना शुरू किया, उनकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया.

किसी तरह मेज़ पर अपने हाथ रख कर वे गिरने से बचीं. उन्होंने बड़ी हिम्मत कर के खुद को संभाला और वे बिजली की तेज़ी से अन्दर की ओर दौड़ पडीं. बैडरूम के दरवाजे पर पहुँचते ही वे एक पल के लिए ठिठकीं और फिर चिल्ला उठीं, नहीं. रुको.

प्रीतम ने चौंक कर उन्हें देखा और कहा, मत रोको मुझे. मेरे लिये और कोई रास्ता नहीं बचा है. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना.

इससे पहले कि वे कुछ करते, निकिता ने दौड़ कर उनकी टांगों को पकड़ लिया. उन्होंने हाँफते हुए कहा, ये क्या पागलपन है! नीचे उतरो. तुन्हें मेरी कसम है. अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मैं भी आत्महत्या कर लूंगी.

(आप समझ ही गए होंगे कि प्रीतम ने क्या किया था. उन्होंने ड्राइंग रूम में एक पत्र लिख छोड़ा था जिसमे लिखा था –

मेरे प्राणों से प्रिय निकिता,

जब तुम यह पत्र पढ़ोगी तब तक मेरी आत्मा मेरे अधम शरीर से विदा हो चुकी होगी. मैंने जो पाप किया है उसका कोई प्रायश्चित नहीं है. तुम्हे मुंह दिखाना तो दूर, मैं तो तुम से माफ़ी मांगने के लायक भी नहीं रहा हूं.

तुम्हारा गुनाहगार,

प्रीतम

पत्र पढ़ते ही किसी अनहोनी की आशंका से त्रस्त निकिता तुरंत अन्दर दौड़ पडी थीं. बैडरूम के दरवाजे पर पहुंचते ही उन्होंने देखा कि प्रीतम एक स्टूल पर खड़े थे. उनके हाथ में एक रस्सी का फंदा था जिसे वे गले में डालने ही वाले थे. रस्सी का दूसरा छोर ऊपर पंखे से बंधा हुआ था.)
निकिता ने फिर लगभग रोते हुए कहा, अगर तुमने ये पागलपन नहीं छोड़ा तो मैं सच कहती हूँ, इस घर से एक साथ दो अर्थियां उठेंगी.

अब प्रीतम क्या करते! वे अपनी प्राणों से प्रिय पत्नी को कैसे मरने देते! उन्हें नीचे उतरना ही पड़ा. नीचे उतरे तो उनका सर झुका हुआ था. निकिता ने रोते हुए उन्हें अपनी बांहों में भर लिया. पर निकिता की आँखों से अधिक आंसू प्रीतम की आँखों से बह रहे थे. पति-पत्नी का करुण रुदन काफी समय तक चलता रहा. किसी तरह निकिता ने दिलासा दे-दे कर अपने पति को चुप कराया. जब प्रीतम कुछ सामान्य हुए तो निकिता ने आशंकित मन से उन्हें पूछा कि हुआ क्या था. अब प्रीतम क्या जवाब देते? पर वे सच्चाई को छुपाते भी कब तक! जब निकिता ने पूछना जारी रखा तो उन्हें अटकते-अटकते रुआंसी आवाज में सब बताना पड़ा. गर्दन उठाने की हिम्मत उनमे नहीं थी.

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