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अन्तर्वासना की सच्ची कहानी

गतांग से आगे …

निकिता खुश तो थीं पर वे थोड़ी शर्मिंदा भी थीं कि वे इन दोनों के सामने इतने जोर से ‘झड़ी’ थीं (यह शब्द उनके लिए नया था). मगर वे इंकार कैसे करतीं? मज़ा तो उन्हे आया ही था. उन्होंने शर्माते हुए हां में सर हिलाया तो शीला ने राजे की तरफ इशारा करते हुए कहा, तो अब इसका भी काम कर दीजिये न!

निकिता अब इन लोगों की भाषा समझने लगी थीं. वे समझ गयी थीं कि शीला किस ‘काम’ की बात कर रही थी. यहां आने से पहले इस ‘काम’ की कल्पना भी उनको डरावनी लग रही थी पर राजे से यौनसुख पाने के बाद उनका डर काफी हद तक कम हो गया था. बल्कि उन्हें उसका प्रतिदान करना भी न्यायोचित लग रहा था. उन्होंने स्वीकृति में सर हिलाया तो शीला ने राजे को निर्वस्त्र कर दिया.

राजे निकिता के पास लेट कर उनसे लिपट गया. वो उनके पूरे बदन पर हाथ फेरने लगा. उसने उनकी चून्चियों, कमर, रानों और चूतड़ों को अपने हाथ से सहलाया. एक बार फिर उसका हाथ उनकी चूत पर और उसका मुँह उनकी चूंची पर पहुंच गया. शीला ने उनके पास लेट कर अपना मुंह उनकी दूसरी चूंची पर जमा दिया. निकिता का कामावेग फिर बढ़ने लगा. शीला ने उनका हाथ राजे के यौनांग पर रख दिया. एक बार तो वे उस बलिष्ठ अंग के स्पर्श से चिहुंक उठीं. उन्होंने अपना हाथ पीछे खींचना चाहा पर शीला ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया. फिर स्वतः ही उनकी मुट्ठी उस पर भिंच गई. अब राजे ने अपनी ऊँगली उनकी योनी में घुसा दी. दोनों के हाथ अपना काम करने लगे. राजे उनकी योनी को अन्दर से सहला रहा था और वे उसके लिंग को बाहर से मसल रही थीं. शीला और राजे के प्रयासों ने जल्द ही उन्हें पूर्णतया कामातुर कर दिया. शीला को उनकी तेज होती सांसों का भान हुआ तो उसने पूछा, बीवीजी, पनिया गईं या अभी देर है?

निकिता को उसकी बात समझ में नहीं आई. उन्होंने उसकी तरफ सवालिया नज़र से देखा तो शीला ने कहा, आपकी चूत पानी छोड़ रही है क्या?

निकिता ने शर्मा कर हां कहा तो शीला बोली, ठीक है. अब इसे भी तैय्यार कर दीजिये.

निकिता ने नासमझी से पूछा, कैसे?

वैसे तो ये तैय्यार ही लगता है, शीला ने कहा. पर आप थोड़ी देर इसका लंड चूस देंगी तो ये आपको पूरा मज़ा देगा.
इस बार निकिता को उसकी भाषा पर तो अचम्भा नहीं हुआ पर वो जो करने के लिए कह रही थी उस पर उन्हें हिकारत महसूस हुई. प्रीतम के बहुत इसरार करने पर उन्होंने एक-दो बार यह करने का प्रयास किया था पर उन्हें यह बिलकुल अच्छा नहीं लगा. उनकी यह धारणा बन चुकी थी कि जो मर्द औरत को यह काम करने के लिए कहते हैं वे उस औरत को जलील करना चाहते हैं! लेकिन साथ ही उनको यह एहसास भी था कि राजे ने मुखमैथुन के द्वारा ही उनको चरमसुख दिया था इसलिए उनको भी इसका प्रतिदान करना चाहिए. पर वे अपनी धारणा के कारण मजबूर थीं. उन्होंने धीमी आवाज में उत्तर दिया, शीला, यह मेरे से नहीं होगा.

क्यों नहीं होगा, बीवीजी? शीला ने पूछा. आप बाबूजी का भी तो चूसती होंगी.

नहीं, उन्होंने जवाब दिया.

अच्छा? बाबूजी आपसे नहीं चुस्वाते? शीला ने आश्चर्य से कहा. पर मैंने तो उनका लंड चूसा था और उन्हें बहुत अच्छा लगा था. आप ज़रा कोशिश तो कीजिये.

नहीं शीला, मेरे से नहीं होगा, उन्होंने फिर इंकार में कहा.

रहने दे, शीला, इस बार राजे बोला. मेमसाहब बड़े घर की औरत हैं. ये मेरे जैसे छोटे आदमी का लंड अपने मुंह में कैसे ले सकती हैं!

यह बात नहीं है, राजे, निकिता ने फ़ौरन उसकी बात काटी. मुझे सच में यह अच्छा नहीं लगता मेरा मतलब है किसी का भी चूसना.

पर बीवीजी, मुझे तो लंड चूसने में बहुत मज़ा आता है, शीला ने कहा. पता नहीं आपको अच्छा क्यों नहीं लगता!

अब छोड़ न शीला, राजे ने कहा. ज़रा तू ही चूस दे.

शीला उठ कर राजे की जाँघों पर बैठ गई. उसने अपना सर झुकाया. राजे का लंड किसी डंडे की तरह तन कर खड़ा हुआ था. निकिता पहली बार उसके खड़े लंड को देख रही थीं. बड़ा तंदरुस्त और सुडौल लंड था, प्रीतम के लंड से कम से कम दो इंच लम्बा और गोलाई में भी बड़ा. उन्होंने सोचा कि इस मूसल को मुंह में लेने से वे भले ही बच गईं पर उन्हें इस को अपनी योनी में तो लेना ही होगा. और उन्हें यह कोई आसान काम नहीं लग रहा था.

शीला ने एक हाथ से राजे के लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से लंड की टोपी को पीछे कर के उसके सुपाड़े को नंगा कर दिया. सुपाड़ा बहुत चिकना दिख रहा था. शीला उसे अपनी जीभ से चाटने लगी. उसकी लपलपाती जीभ सुपाडे के चारों ओर घूम रही थी, कभी नीचे, कभी ऊपर, कभी बांयें तो कभी दायें. राजे को शायद अपने लंड पर शीला की जीभ का फिसलना बहुत अच्छा लग रहा था. उसके मुंह से सिस्कारियां निकल रही थीं.

निकिता शीला के कृत्य के अलावा उसकी मुखमुद्रा को आश्चर्य से देख रही थीं. वो बड़ी आनंदमग्न दिख रही थी. कुछ देर सुपाडे को चाटने के बाद शीला ने अपना मुंह खोला और पूरे सुपाडे को अपने मुंह में ले लिया. उसके होंठ लंड पर भिंच गए. वह अपने सर को धीरे-धीरे ऊपर नीचे करने लगी. राजे के नितम्ब भी हौले-हौले ऊपर उठने लगे. निकिता ने आश्चर्य से देखा कि कुछ ही देर में राजे का समूचा लंड शीला के मुंह में समा गया. शीला अपना सर ऊपर नीचे करने लगी तो राजे मज़े से सीत्कार कर उठा. अब वो पूरी तरह शीला के वश में दिख रहा था. तभी शीला की नज़र उनकी नज़रों से मिली. उसकी गर्वीली आंखें मानो कह रही थीं, ‘देखो, यह ताक़तवर मर्द अब मेरे काबू में है!’ यह देख कर निकिता को शीला से ईर्ष्या होने लगी. उन्होंने मन ही मन सोचा ‘काश, मैं भी यह कर पाती.’

शीला ने शायद उनके मन की बात पढ़ ली. उसने लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल कर उनसे पूछा, बीवीजी, अब आप कोशिश करेंगी?

निकिता को शीला की बात एक चुनौती जैसी लगी. उन्होंने सोचा कि अगर शीला जैसी अनपढ़ औरत इस तरह मर्द पर काबू कर सकती है तो वे क्यों नहीं! वे इंकार नहीं कर सकीं. वे बैठ कर राजे के लंड की ओर झुकीं. शीला ने उन्हे लंड चूसने का तरीक़ा समझाया. अपनी उंगली को लंड का प्रतीक बना कर उसने दिखाया कि इसे कैसे चाटना और चूसना है. उसे देखते हुए निकिता ने राजे का लंड अपने हाथ में लिया और उसे चाटने लगीं. उन्हे उसका जायका कोई खास बुरा नहीं लगा. कुछ ही देर में उन्होंने लंड का सुपाड़ा अपने मुंह में लेने की कोशिश की. इतने बड़े सुपाड़े को मुँह के अंदर लेने में उन्हें मुश्किल तो हुई पर उन्होंने हार नहीं मानी क्योंकि यह उनकी इज्ज़त का सवाल बन गया था. पूरा सुपाड़ा उनके मुंह में चला गया तो उन्होने शीला की ओर विजयी दृष्टि से देखा. शीला ने भी आँखों ही आँखों उनकी प्रशंसा की. निकिता अपनी मनोदशा से चकित भी थीं. वे सोच रही थीं कि कल तक जिस पुरुष के साथ यौनाचरण करना उन्हें अपनी बेईज्ज़ती लग रही थी आज उसी के लंड को मुंह में लेना उन्हे गर्व की अनुभूति दे रहा है (अब उन्हें ‘लंड’ जैसा शब्द भी वर्जनीय नहीं लग रहा था). शीला की सलाह पर उन्होंने अपनी जीभ को सुपाड़े के गिर्द घुमाना शुरू कर दिया. इसका तुरंत असर हुआ और राजे के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.

धीरे-धीरे उन्होंने अपने मुख को नीचे धकेला और वे आधा लंड अपने मुंह में लेने में सफल हो गयीं. वे उसे आम की गुठली की तरह चूसने लगीं. अब उन्हें लंड का जायका भी रास आ रहा था. यह सिलसिला चलता रहा और राजे लंड-चुसाई का मज़ा लेता रहा. वो समय आने में देर न लगी जब राजे झड़ने के कगार पर पहुँच गया. उसने किसी तरह निकिता के हठीले मुंह को अपने लंड से दूर धकेला और हाँफते हुए उनसे गुज़ारिश की, बस मेमसाहब, अब चोदने दीजिये.

निकिता ने जब पहली बार राजे का लंड देखा था तब वे उसके साइज से डर गयी थीं पर अब उनकी कामोत्तेजना इतनी तीव्र हो चुकी थी कि वे चुदने के लिए अधीर थीं. उन्होंने अपनी आँखों से राजे को मौन निमन्त्रण दिया. राजे ने उन्हें पीठ के बल लिटा दिया. वो उनकी जाँघों को फैला कर उनके बीच आ गया. उसने अपना लंड हाथ में ले कर उसे निकिता की जांघों के बीच फिराया. लंड चूत की फांकों को सहलाते हुए चूत के मुहाने पर आया पर वहां थोड़ी छेड़खानी करने के बाद क्लाइटोरिस पर पहुँच गया. राजे ने थोड़ी देर सुपाडे से क्लाइटोरिस को मसला और फिर उसे चूत के द्वार पर पहुंचा दिया. दोस्तो आप मस्ताराम डॉट नेट पर अन्तर्वासना की सच्ची कहानी पढ़ रहे है |  इस बार उसकी चूत के साथ छेड़छाड़ कुछ लम्बी चली. चूत अनवरत पानी छोड़ कर लंड का प्रवेश सुगम बना रही थी पर लंड था कि टालमटोल किये जा रहा था. अनुभवी राजे अपनी चेष्टा से निकिता को कामावेग के शिखर पर ले गया था. इस बार जब उसने लंड को चूत से हटाया तो निकिता बेसाख्ता बोल उठीं, ऐसे क्यों तरसा रहे हो? अब घुसा भी दो.

चालाक राजे ने लंड को उनकी गांड से सटा कर पूछा, कहाँ, मेमसाहब?

निकिता को अपनी गांड पर चिकने और गीले लंड का स्पर्श सुहावना लग रहा था पर वे कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थीं. उन्होंने फ़ौरन उत्तर दिया, मेरी चूत में! और यह कह कर वे शर्मा गईं.

चुदाई में उस्ताद राजे ने भांप लिया था कि गीली होने के बावजूद निकिता की संकड़ी चूत उसका लंड आसानी से नहीं ले पाएगी. उसने अपने हाथ से लंड पर अच्छी तरह थूक लगाया. फिर उसने झुक कर अपने मुंह से सीधे चूत पर थूक टपकाया. एक ऊँगली से थूक को चूत के अन्दर तक पहुँचा कर वो निकिता के ऊपर लेट गया. उसने अपनी उँगलियों से उनकी जांघों को टटोल कर अपना निशाना ढूंढा और अपने लंड को निशाने पर रख दिया. उसने अपने कूल्हों को हौले से आगे धकेला. निकिता के मुँह से एक सिसकारी निकल गई पर लंड को अभी प्रवेश नहीं मिला था. राजे ने कहा, मेमसाहब, आपकी चूत बड़ी संकड़ी है! आपको थोडा दर्द हो सकता है.

कोई बात नहीं, निकिता ने हौसला दिखाया. तुम घुसाओ.

राजे ने अपना मुँह उनके होठों पर रख दिया. कुछ देर वो उनके होंठों को चूमता रहा और फिर अचानक उसने पूरी ताक़त से एक धक्का मारा. उसका फौलादी लंड अपना निशाना भेदता हुआ पूरा अंदर घुस गया. निकिता का मुंह राजे के मुंह से छिटका और उससे एक लम्बी ‘उईई…!’ निकल गई. साथ ही उनका शरीर बेसाख्ता लरज़ उठा. शीला ने राजे को लताड़ा, ये क्या कर दिया, ज़ालिम! बीबीजी को दर्द हो रहा है!

राजे अपना लंड बाहर खींच पाता उससे पहले निकिता ने उसकी कमर को अपने हाथों से थामा और कहा, नहीं राजे, बाहर मत निकालना. मैं ठीक हूँ. उन्हें थोड़ी तकलीफ हुई थी पर वे हार मानने को तैयार नहीं थी. उन्हें लगा कि जिस लंड को शीला रोज़ झेलती थी उसे वे नहीं झेल पायीं तो उनकी हार हो जाएगी.

राजे बहुत खुश था. जिस चूत को हासिल करने के सपने वो कई दिन से देख रहा था वो अब उसके कब्जे में थी. और अपने लंड पर उस टाईट चूत की कसावट उसे बहुत मज़ेदार लग रही थी. अब उसे कोई जल्दी नहीं थी. कुछ देर वो बिना हिले निकिता के होंठों का रस पीता रहा. जब निकिता का दर्द दूर हो गया तब उन्होंने अपनी कमर को हरक़त दी. राजे उनके इशारे को समझ गया. चुदाई-कला में एक्सपर्ट तो वो था ही. अब वो उन्हें पूरी महारत से चोदने लगा. उसके मोटे लंड ने निकिता की कसी हुई चूत को फैला दिया था और अब लंड का आवागमन बेरोकटोक हो रहा था. राजे ने धीरे-धीरे अपने धक्कों की ताक़त बढ़ा दी. निकिता ने अपनी टांगों से राजे की कमर को भींच रखा था. दर्द की जगह अब मस्ती ने ले ली थी और वे अब राजे के धक्कों का लुत्फ़ ले रही थीं. उनकी आँखें बंद थीं. कुछ देर बाद उनकी साँसें बेतरतीब हो गईं. चुदते हुए उन के मुँह से बराबर ‘ऊंsssऊं…! ओह…! आहsss…!’ की ध्वनि निकल रही थीं.

शीला जान गई थी कि निकिता चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थीं पर उन्हें छेड़ने के लिए उसने पूछा, दर्द हो रहा है क्या, बीवीजी? इसे निकालने के लिए कहूं?

नहीं, निकिता ने सिसकारियों के बीच जवाब दिया.

कैसा लग रहा है अब? शीला ने फिर पूछा.

बहुत अच्छा लग रहा है, निकिता ने कहा. अब उतेजनावश उनके नितम्ब उछलने लगे थे. उनकी सक्रिय भागीदारी से राजे और भी खुश हो गया. वो पूरी तबीयत से धक्के लगाने लगा. निकिता उसकी ताल से ताल मिला कर उसके पुरजोर धक्कों का जवाब दे रही थीं.

शीला को प्रीतम बाबू की एक बात याद आई. उन्होंने कहा था कि बीवीजी सिर्फ नीचे लेटती हैं, बाकी सब उन्हें ही करना पड़ता है. उसने सोचा कि क्यों न आज इनसे कुछ नया करवाया जाए! उसने राजे से कहा, ज़रा रुक तो. तू ही ऊपर चढ़ा रहेगा या बीवीजी को भी ऊपर आने देगा?

ओह, मैं तो भूल ही गया था, राजे ने रुक कर अपना लंड बाहर निकालने की कोशिश की.

नहीं, निकिता ने अपनी चूत को भींचते हुए कहा. ऐसे ही ठीक है.

चूत की पकड़ मजबूत होने के कारण राजे का लंड अंदर ही फंसा रहा पर वो शीला की बात से सहमत था. वो जानता था कि जब निकिता उसके ऊपर होंगी तो वो चुदाई का मज़ा लेने के साथ-साथ उनके हुस्न का पूरा नज़ारा भी देख सकेगा. वो बोला, शीला ठीक कहती है, मेमसाहब. आपको भी तो अपने सेवक सवारी करनी चाहिए.
वो उनके ऊपर से उतर कर पलंग पर लेट गया. उसने निकिता का हाथ पकड़ कर उन्हें अपने ऊपर खींचा. निकिता लजाते हुए उसके ऊपर आ गईं. उन्होंने उसके लंड को हाथ में पकड़ा और अपनी चूत को उस पर टिकाया. उन्होंने अपनी चूत को धीरे-धीरे नीचे धकेला. कुछ ही पलों में उन्होंने पूरा लंड अपने अंदर ले लिया. उन्होंने विजयी दृष्टि से शीला की ओर देखा तो शीला ने कहा, बीवीजी, अब आपको जैसे धक्के पसंद हैं, वैसे लगा सकती हैं.

ज़िन्दगी में पहली बार चुदाई की कमान निकिता के हाथ में आई थी. उन्होंने हलके धक्कों से शुरुआत की. जब उनका आत्मविश्वास बढा तो उनके धक्कों में और ताक़त आने लगी. राजे ने उनकी कमर को अपने हाथों से थामा और वो भी उनका साथ देने लगा. उसकी नज़रें उनके फुदकते जिस्म पर जमी हुई थी. वो अपनी किस्मत पर इतरा रहा था कि आज उसे ऐसी हसीन औरत को चोदने का मौका मिला था. साथ ही वो उनकी कसी हुई चूत का पूरा लुत्फ़ उठा रहा था. लुत्फ़ निकिता भी उठा रही थीं. वे जान गयी थीं कि चुदाई का मज़ा पुरुष की शक्ल-सूरत पर नहीं बल्कि उसके काम-कौशल और उसके लंड की शक्ति और क्षमता पर निर्भर करता है. और राजे इन सब का स्वामी था. वे एक बार तो चुदने से पहले ही झड़ चुकी थीं और अब दूसरी बार झड़ने के कगार पर थीं.

राजे नीचे से अपनी ताक़तवर रानों से निकिता की चूत में पुरजोर धक्के मार रहा था. उसने उनकी कमर को कस के पकड़ लिया था ताकि लंड चूत से बाहर न निकल जाए. निकिता के गले से अजीब आवाजें निकल रही थीं. राजे उनके चेहरे के बदलते नक्श देख कर भांप गया था कि वे अब अपनी मंजिल के नज़दीक थीं. उसने उन्हे चोदने में अपनी पूरी ताक़त लगा दी.

निकिता अब पूरी दुनिया से बेखबर थीं. उनकी आँखें बंद थी, सांसें उखड रही थीं और जिस्म बेकाबू था. उनका पूरा ध्यान अब उन मदमस्त तरंगों पर केन्द्रित था जो एक के बाद एक उनकी चूत से उठ रही थीं. शीला ने उनसे पूछा, ‘बीवीजी, ये ठीक तरह से चोद रहा है कि नहीं?’

निकिता बरबस बोल उठीं, बहुत अच्छी तरह चोद रहा है, शीला बहुत अच्छी तरह!

और इन शब्दों के साथ ही उनका शरीर अकड़ने लगा. उनकी तनावग्रस्त चूत फड़कने लगी. राजे उनको चोदते हुए बोला, निकाल दीजिये, मेमसाहब! निकाल दीजिये अपनी चूत का पानी!

और वही हुआ. निकिता बड़े जोर से उसके लंड पर झड़ीं. और ऐसे झड़ीं कि वे अपनी सुधबुध खो बैठीं. उन्हें ब्रह्माण्ड अपने चारों तरफ घूमता हुआ प्रतीत हुआ. उन्हें पता ही नहीं चला कि वे कब आनन्द के अतिरेक में राजे के ऊपर गिर गईं.

जब निकिता की चेतना लौटी तब उन्होंने देखा कि उनकी बाँहें राजे के गिर्द कसी हुई थीं, राजे अपने हाथों से उनकी पीठ और नितम्बों को सहला रहा था. उसका लंड अब भी उनकी अलसाई चूत में तना हुआ खड़ा था. राजे ने उनकी आँखों में देखते हुए पूछा, मज़ा आया, मेमसाहब?

हां राजे, बहुत मज़ा आया, उन्होंने बेझिझक कहा. पर तुम्हारा अभी नहीं हुआ?

अब ज्यादा देर नहीं है, राजे ने जवाब दिया. अगर आप मुझे दो मिनट और चोदने दें तो मेरा भी हो जाएगा.

ठीक है, उन्होंने कहा. तुम मुझे अपने नीचे ले कर चोद लो!

निकिता राजे के ऊपर से उतर कर चित लेट गईं. इस बार राजे ने देर नहीं की. वह जानता था कि उनकी चूत तैय्यार है. वह उनके ऊपर सवार हो गया. उसने उनकी चूत में अपना लंड घुसाया और फिर से चुदाई शुरू कर दी. शीला ने ताकीद की, देख, प्रेम से लेना और ज्यादा देर न लगाना.

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