बहन की चुदाई की अनोखी कहानी- 1

हेलो दोस्तों मेरा नाम राजू है. मेरी उम्र 19 साल है और मैं लखनऊ में रहता हूँ और इस कहानी में मैं आप को बताऊँगा की कैसे मेरी बड़ी बेहेन की चुदाई मेरे जिगरी दोस्त से मैंने करवाई. मेरे दोस्त का नाम कार्तिक है और वोह पहले मेरे पडोस में रहता था. हमारी दोस्ती बचपन की है. उसके घर पर उसके मम्मी पापा और वो रहते है. हमारे घरेलु रिश्ते थे मेरी दीदी उसको भी राखी बंधती थी और छोटा भाई समझती थी पर वो मेरी दीदी को चोदना चाहता था और मुझे उसकी मम्मी बहुत अच्छी लगती थी. हम होमोसेक्स भी करते थे इसीलिए हम एक दुसरे से कुछ नहीं छुपाते थे. उसके पापा का १ साल के लिए अचानक नोयडा ट्रान्सफर हो जाने से अब वो और उसकी मम्मी ही वहाँ रहते है पर अब उन्होंने अपना घर मेरे घर से ४ किलो मीटर की दूरी पर बनवा लिया है और कुछ दिन पहले वो शिफ्ट हो गए है. मेरे घर पर भी मेरे माँ पापा और मेरी बेहेन सुनीता रहते है. मेरे माँ पापा दोनों नौकरी करते है और सुनीता कालेज में पड़ती है. सुनीता की उम्र 21 साल है.

एक दिन मैं कार्तिक के घर गया. उसकी माँ ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाया. मैंने उनसे पुछा, “शोभा आंटी, कार्तिक कहाँ है. कई दिनों से मिला ही नहीं और कालेज भी नहीं आ रहा है.”
शोभा: “उसकी तो तबियत बहुत खराब है”
“क्या हो गया आंटी” मैंने पूंछा.
शोभा: अब तुमसे क्या छिपाऊ जब से इस घर में शिफ्ट हुए है अचानक उसको दौरे पड़ने लगे है, वैसे तो एकदम ठीक रहता है पर अचानक चक्कर आ कर गिर पड़ता है.
तब तक कार्तिक भी आ गया. मैंने देखा तो दिखने से वो एकदम फिट लगा रहा था. मैंने उससे पूंछा की आंटी क्या कह रही है. किसी डॉक्टर को दिखाया या नहीं.

कार्तिक: यार सभी बड़े डॉ को दिखा लिया एक महीने से दवा खा रहा हूँ पर कुछ फरक की नहीं पड़ता है. अचानक चक्कर आ जाता है और १ से २ मिनट के लिए मैं बेहोश हो जाता हूँ. इसीलिए गाड़ी भी नहीं चला रहा और घर से बाहर भी नहीं जा रहा हूँ.

मैंने आंटी से कहा के आप मेरे साथ चलिए और कार्तिक की कुंडली ले लीजिए. मेरे एक गुरु जी है जो की ज्योतिष के अच्छे जानकर है और कई लोगो की मदद कर चुके है वोह बता सकते है की कार्तिक को क्या दिकत है. आंटी भी साधू लोगो को बहुत मानती थी तो वो उसी समय मेरे साथ चल दी. कार्तिक को हमने घर पर ही छोड़ दिया की कहीं रस्ते में तबियत न खराब हो जाये. गुरु जी के आश्रम पहुच कर हमने अपने आने की खबर करवाई. काफी भीड़ होने के बावजूद गुरु जी ने हमें पहले ही बुलवा लिया.

गुरु जी: आओ बेटा राजू, सब कुशल मंगल तो है
“नहीं गुरु जी, ये मेरे दोस्त की माता जी है. अचानक मेरे दोस्त को दौरे पड़ने लगे है जिससे हम बहुत परेशान हैं.”
गुरु जी: क्या नाम है बेटी तुम्हारे पुत्र का.
शोभा: जी कार्तिक
गुरु जी: अरे बहुत ही सुन्दर और गुडी बालक है, कई बार राजू के घर पर उससे मुलाकात हो चुकी है मेरी.
शोभा: जी कई डॉ को दिखाया पर कुछ नहीं हुआ, अब तो आपका की सहारा है.
गुरु जी: बेटी तुम्हारे पुत्र की जन्म कुंडली ली हो क्या.
शोभा: जी महाराज, ये लीजये.
ये कह कर शोभा ने कार्तिक की कुंडली स्वामी जी को दे दी. करीब १ घंटे तक स्वामी जी ने उसको पड़ा.

गुरु जी: बेटी, अब तक जीवन मैं मैंने ऐसा दोष नहीं देखा. इसका ठीक होना असंभव है.
यह सुन कर शोभा आंटी जोर से रोने लगी और कहने लगी “ नहीं महाराज, ऐसे मत कहिये कार्तिक मेरा एक ही बेटा है, उसके लिए जो भी करना होगा वो मैं करूंगी पर आप मुझे निराश न करे.
गुरु जी: धीरज रखो बेटी
शोभा: नहीं महाराज, अब अगर मेरा बेटा ठीक नहीं हुआ तो मैं अपनी जान दे दूँगी.
गुरु जी: राजू बेटा, तुम जरा बाहर जाओ, मुझे शोभा से अकेले में कुछ बात करनी है.
मैं उठ कर बाहर आ गया और दरवाजे से कान लगा कर खड़ा हो गया

अंदर गुरु जी आंटी से कह रहे थे “ देखो बेटी मैं वैसे तो ये उपाय बताने वाला नहीं था पर तुम्हारी हालत मुझे मजबूर कर रही है. पर ये उपाय भी आसान नहीं है और धर्म संगत भी नहीं है.”
शोभा: ऐसी क्या बात है स्वामी जी.
गुरु जी: बेटी कार्तिक की कुंडली में एक भयानक दोष है जो सिर्फ एक हालत मैं ही हट सकता है. मुझसे तो कहा भी नहीं जा रहा.
शोभा: बताइए स्वामी जी. जो भी उपाय होगा मैं करने के लिए तैयार हूँ.
गुरु जी: बेटी, कार्तिक एक ही दशा मैं ठीक हो सकता है. यदि वो एक ही सप्ताह के भीतर किसी अविवाहित कुवारी ब्राम्हण कन्या से तीन बार सम्भोग करे.
यह सुन कर मुझे तो झटका लग गया और आंटी भी चौक गयी.

“यह आप क्या कह रहे है गुरु जी, इस बात की संबावना तो बहुत कम है की कोई ब्रह्मिन अपनी बेटी की शादी कार्तिक से करे जबकि हम ब्राम्हण नहीं है” शोभा बोली
गुरु जी: मैंने कहा है अविवाहित कन्या, यह नहीं कहा की उसका कार्तिक से विवाह हो, यदि विवाह हो गया तो वो कन्या भी कायस्थ हो जायेगी और यह उपाय विफल हो जायेगा. साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना होगा की पहले सम्भोग के वक्त उसकी योनी अक्षत हो और कन्या के मासिकधर्म होते हो अर्थात आयु १६ वर्ष से अधिक हो और पूरे सप्ताह वो सिर्फ कार्तिक के साथ ही सम्भोग करे किसी और के साथ नहीं और कम से कम तीन बार सम्भोग करे ही. इस उपाय के बाद कार्तिक चाहे तो उस कन्या से विवाह कर सकता है.

“ मुझे तो यह असंभव लगता है, भला कौन लड़की तैयार होगी इस तरह से और जो किस लालच मैं तैयार हो जायेगी तो वो कुवारी तो नहीं ही होगी. वैसे भी आज कल तो लड़किया कम उम्र में ही अपना कुवारापन खो देती है.” शोभा ने कहा.
गुरु जी ने कहा “ जरूरी नहीं की कन्या तैयार हो, बात सम्भोग की है प्रेम की नहीं. और मैंने कहा ही था की उपाय कठिन है. पर इसके सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है. और अगर कार्तिक इस बीमारी से निकल जाता है तो ८० वर्ष का आरोग्य जीवन होगा.”

ये सुन कर शोभा आंटी ने गुरु जी को प्रणाम किया और बाहर आ गयी. हम वापस घर चल पड़े. इतनी देर में मैंने अपना प्लान बनाया और अनजान बनते हुए आंटी से पुछा की स्वामी जी ने क्या कहा और आप इतनी परेशान क्यों है. तो शोभा आंटी ने मुझसे कहा की बात तुम्हारे लायक नहीं है. अभी तुम छोटे हो.
मैंने कहा आंटी आप मुझे नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं पर मैंने सब कुछ सुन लिया है.
शोभा “ जब तुमने सब कुछ अपने कानो से सुन लिया है तो मुझसे क्या पूछ रहे हो, स्वामी जी ने जो कहा है वो तो हो नहीं सकता”

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