बहन की चुदाई की अनोखी कहानी- 1

गतांग से आगे …

मैंने कहा’ “ आंटी, इतनी जल्दी हार नहीं मानिए, मैं काफी देर से येही सोच रहा था की आपके घर जो काम वाली है वो तो ब्राम्हण है और उसकी बेटी अभी 16 साल की हुई है, अगर उसको ५-१०००० हजार रुपये दे दिए जाये तो वो शायद तैयार हो जाये”
शोभा “अरे वो कुंवारी नहीं है, जब 15 साल की थी तभी एक लौंडे के साथ भाग गयी थी. ४ महीने बाद लौट कर घर आई थी और मान लो की अगर वो कुवारी होती भी तो कौन सी माँ मान जायेगी. तुम भी तो ब्राम्हण हो तुम्ही कोई लड़की बताओ. अरे अगर कोई तुम्हे १०००० रुपये दे तो क्या तुम अपने घर की लड़की किसी को दे दोगे.”

मैंने कहा “ आंटी आप तो नाराज़ हो रही है, कार्तिक को मैं अपने भाई से बढकर मानता हूँ और जरूरत पड़े तो सुनीता को भी इस काम के लिए दे सकता हूँ और वोह भी बिना किसी पैसे के.”
मेरी बात सुन कर शोभा के तो होश ही उड़ गए. वो बोली “ सच राजू, अगर यह तुम सच कह रहे हो तो तुम कार्तिक को वाकई भाई मानते हो और सुनीता है तो 21 की पर इतनी सीधी है की पक्का कुवारी ही होगी. तुम अगर ऐसा कर दोगे तो मैं तुम्हारा एहसान जिंदगी भार नहीं भूलूंगी और सुनीता की शादी भी कार्तिक से कर दूँगी. पर सुनीता तैयार हो जायेगी”

मैंने कहा “ देखिये स्वामी जी ने कहा था की सम्भोग बिना कन्या की स्वीकृति से भी हो सकता है. और दूसरी बात मेरे घर वाले नहीं मानेगे की उसकी शादी किसी गैर ब्रह्मिन के यहाँ हो इसीलिए मुझे इस बात का वादा चाहिए की यह बात बाहर नहीं जायेगी ताकि सुनीता की बदनामी न हो.”
शोभा “ मैं जबान देती हूँ “
“जबान से काम नहीं चलेगा, आज हमारे सम्बन्ध अच्छे है कल कौन जाने क्या हो जाये, आप कुछ नहीं कहेगी पर अगर मेरी कार्तिक से लड़ाई हो जाये और वो सबको बोल दे” मैंने कहा
शोभा “ तो तुम क्या चाहते हो”
“देखिये मेरी सगी बेहेन की इज्जत का सवाल है तो दूसरी तरफ कार्तिक की भी किसी सगी रिश्तेदार का सवाल होना चाहिए.”
शोभा “ देखो राजू, अगर मेरे कोई बेटी होती तो मैं उसे तुम्हारे हवाले कर देती, पर मेरा एक ही बेटा है कार्तिक”
“बेटी न सही माँ ही सही” मैंने कहा.

मेरी बात सुन कर शोभा चौक गयी. मैं कहा “ चौकिये मत आंटी जी, देखिये अगर सुनीता के साथ कार्तिक ने सम्भोग किया और आपने मेरे साथ तो ना मैं किसि से कहूँगा ना आप लोग. कार्तिक की बीमारी भी ठीक हो जायेगी और मेरी चिंता भी दूर हो जायेगी जो मुझे सुनीता की बदनामी को लेकर है. अरे अब सोच क्या रही हैं मैं अपने दोस्त के लिए अपनी सगी बेहेन की क़ुरबानी दे सकता हूँ और आप अपने एकलौते बेटे के लिए अपनी क़ुरबानी नहीं दे सकती”

शोभा बोली “मैं यह नहीं सोच रही हूँ क्योंकि मेरे पास तैयार होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है बल्कि यह सोच रही हूँ की तुम्हे एक ३७ साल की औरत में इतनी दिलचस्पी क्यों है”
मैंने कहा “अरे आंटी हीरे की कदर तो जौहरी ही जनता है, तो बताइए बात पक्की.”
“पक्की” शोभा बोली और मैंने प्यार से आंटी के एक होठों पर एक पप्पी ले ली.
उनके घर पहुच कर मैंने गाड़ी रोकी और बोला “आंटी आप कार्तिक को बाहर भेज दीजिए ताकि उसे भी मैं समझा दूं .”

शोभा बोली “उसे यह भी बताओगे क्या की सुनीता के बदले तुम मुझसे सम्भोग करोगे”.
“जितना जरूरी होगा उतना ही बताऊँगा, आप उसे बाहर तो भेजिए” शोभा अंदर गयी और कार्तिक बाहर आ गया. उसे गाड़ी में बिठा कर हम वह से चल दिए थोड़ी दूर जाकर मैंने गाड़ी साइड मैं रोकी और उसे गले लगा कर कहा “हमारा प्लान कामयाब हो गया, तुम्हारे चक्कर का चक्कर चल गया और तुम्हारी माँ मुझसे चुदने के लिए तैयार है और सुनीता की चुदाई तुमसे करवाने के लिए तो वोह कुछ भी करेगी. स्वामी जी ने क्या एक्टिंग की है मज़ा आ गया”.
कार्तिक “अरे इतना बढ़िया प्लान बनाया था की फ्लॉप कैसे होता, चलो घर चलो और आगे की तैय्यारी करते है.”
घर पहुँच कर मैंने कार्तिक को इशारा किया और वोह अंदर चला गया और मैंने शोभा से कहा “चलिए आंटी, कार्तिक को सब समझा दिया है, थोडा नाराज़ था पर मैंने उसे समझा दिया की ये बहुत जरूरी है. चलिए बेड रूम में चल कर आगे की बात करते है”

शोभा “हाय तुमने कार्तिक को बता दिया की तुम मेरे साथ क्या करोगे”
“अब वो घर पर है और हम सेक्स करेंगे तो उसे पता नहीं चलेगा?” मैंने कहा और शोभा को बेड रूम में ले जाकर दरवाजा बंद कर लिया.
शोभा ने कहा “अभी ये करना जरूरी है जब कार्तिक सुनीता से कर ले तब हम करेंगे.”
मैंने कहा “अरे यार कार्तिक तो कल सुनीता के साथ पहली बार करेगा, सुनो तुम आज रात को मेरे घर फोन करना और सुनीता से कहना की कल तुम्हारे यहाँ पूजा है और सरे लोग आ जाये. मम्मी पापा ३ दिन के लए बाहर गए है तो सुनीता मेरे साथ यहाँ आएगी तब तुम कह देना की पंडित नहीं आया और पूजा कैंसल हो गयी. सबको फोन करके मन कर दिया पर हमारा फोन नहीं लगा रहा था. फिर सुनीता को तुम कोल्डड्रिंक देना जिसमे एक दवा होगी जो मैंने कार्तिक के पास रखवा दी है. वोह पिटे ही सुनीता बेसुध हो जायेगी और उसके बाद कार्तिक का काम हो जायेगा. कहो मेरी जान कैसा लगा प्लान.”

ये बोल कर मैंने शोभा की साढी खोल दी और अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी.
शोभा “इतनी जल्दी आंटी से जान और आप से तुम पर आ गए, मानती हूँ पक्के बेहेंचोद हो, बहुत बढ़िया प्लान बनाया है सुनीता को चुदवाने का. आओ और अब मेरी प्यास बुझाओ”
मुझे उम्मीद नहीं थी की शोभा इतनी जल्दी खुल जायेगी पर उसके मुह से गलिया सुन कर मजा आ गया. लम्बी, गोरी चिटटी शोभा का भरा बदन, चौड़ी कमर, बाहर निकले उत्तेजक हिप्स और ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन मेरे मन में हलचल मचाने लगे। मेरे मन में उनको नंगा देखने का ख्याल आने लगा। फिर हम दोनों बिस्तर पर लेट गए. शोभा एक दम मुझ से लिपट गयी, मुझे करंट सा लगा जब उनके बूब्स मेरी छाती से छुये। उसकी एक टांग मेरे उपर थी।

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