चोदने वाली माल की जमके ठुकाई -1

दोस्तो नमस्कार, मैं आपका दोस्त राज आज एक बार फिर से आप सबके लिए एक मस्त मादक कहानी ले कर आया हूँ।
जो मुझे जानते हैं उन्हें पता है कि मैं चूत का कितना रसिया हूँ, चूत देखते ही बस उसको खा जाने की तमन्ना एकदम से दिल में उभर पड़ती है।
मैंने आज तक चुदाई करते हुए यह नहीं देखा, सोचा कि चूत किसकी है। बस अगर चोदने को मिली तो चोद दी।
अपने परिवार में मैंने ऐसा कभी नहीं किया पर रिश्तेदारी में मैंने कभी इस बारे में सोचा नहीं।

यही कारण है कि मैं अपनी रिश्तेदारी में कई हसीन चूतों का मज़ा ले चुका हूँ और आज भी जो मिल जाए चोदने को तैयार रहता हूँ। ऊपर वाले की दया से कभी चूत के लिए नहीं तरसा हूँ।
चलो अब आज की कहानी की बात करते हैं।

कुछ दिन पहले की बात है, मैं अपने बिज़नस के सिलसिले में आगरा जा रहा था। मुझे आगरा में लगभग एक हफ्ते का काम था।
जब मेरे एक दोस्त को पता चला कि मैं आगरा जा रहा हूँ तो वो मेरे पास आया और मुझे कुछ सामान देते हुए बोला- आगरा में मेरी बुआ जी रहते हैं, प्लीज ये सामान उन्हें दे देना।
मैंने वो सामान अपने दोस्त से ले लिया और उसी रात आगरा के लिए निकल पड़ा।
आगरा में मैं होटल में रहने वाला था।

सुबह सुबह आगरा पहुँच कर मैंने एक दो होटल देखे पर कुछ समझ नहीं आया।
फिर सोचा कि पहले दोस्त का सामान ही दे आता हूँ, दोस्त की बुआ के यहाँ चाय पीकर फिर आराम से होटल देखते हैं।
बस फिर मैंने अपनी गाड़ी दोस्त के बताये एड्रेस की तरफ घुमा दी।
दस मिनट के बाद मैं दोस्त के बताये पते के सामने था।
मैंने बेल बजाई तो कुछ देर बाद एक लगभग पैंतीस चालीस की उम्र की भरे भरे शरीर वाली औरत ने दरवाजा खोला।

मैंने अपने दोस्त का नाम बताया और बताया कि उसने अपनी मेघा बुआ के लिए कुछ सामान भेजा है।
तो वो बोली- मैं ही मेघा हूँ, आप अंदर आ जाइए!
जैसे ही वो मुड़ कर अन्दर की तरफ चली तो उसकी मटकती गांड देख कर मेरे लंड ने एकदम से सलामी दी। आखिर ठहरा चूत का रसिया
वैसे मेरे दोस्त की बुआ जिसका नाम मेघा था, थी भी बहुत मस्त औरत… पूरा भरा भरा शरीर, मस्त बड़ी बड़ी चूचियाँ जो उसके सीने की शोभा बढ़ा रही थी, हल्का सा उठा हुआ पेट जोर पतली कमर के साथ मिलकर शरीर की जियोग्राफी को खूबसूरत बना रहा था, उसके नीचे मस्त गोल गोल मटकी जैसे थोड़ा बाहर को निकले हुए कुल्हे जो उसकी गांड की खूबसूरती को चार चाँद लगा रहे थे।

आप भी सोच रहे होंगे कि शरीर की इतनी तारीफ़ कर दी, चेहरे की खूबसूरती के बारे में एक भी शब्द नही लिखा।
अजी, इतने खूबसूरत बदन को देखने में इतना खो गया था कि चेहरे की तरफ तो निगाह गई ही नहीं।
खैर जब अन्दर पहुंचे तो मेघा बुआ ने मुझे बैठने के लिए कहा तो मेरी नजर उनके चेहरे पर पड़ी।
जब बदन इतना खूबसूरत था तो चेहरा तो खूबसूरत होना ही था।
रंग जरूर थोड़ा गेहुआ था पर चेहरे की बनावट और खूबसूरती में कोई कमी नहीं थी, ऐसी खूबसूरती की देखने वाला देखता रह जाए। कमजोर लंड वालो का तो देख कर ही पानी टपक पड़े।

मुझे बैठा कर मेघा बुआ रसोई में चली गई और कुछ देर बाद चाय और नाश्ता लेकर वापिस आई।
जब से आया था तब से मुझे घर में मेघा बुआ के सिवा कोई भी नजर नहीं आया था।
अभी तो सुबह के लगभग नौ बजे का समय था और बुआ अकेली थी।
नाश्ता करते समय बुआ मेरे सामने ही बैठ गई और दोस्त की फॅमिली के बारे में बात करने लगी।

मुझे आये लगभग आधा घंटा हो चुका था, अब मुझे वहाँ से निकलना था, आखिर होटल भी तो देखना था हफ्ता भर रुकने के लिए। बुआ की खूबसूरती को देखते हुए मैं इतना खो गया था कि मेरा मन ही नहीं कर रहा था वहां से जाने का… पर जाना तो था ही!
कहते हैं ना भगवान अपने भक्तों की बहुत परीक्षा लेता है… पर यह भी सच है कि कमीनों की बहुत जल्दी सुनता है।
यही कुछ मेरे साथ भी हुआ।

जब चलने लगा तो बुआ ने पूछा कि कितने दिन के लिए आये और कहाँ रुक रहे हो?
तो मैंने बोल दिया- अभी एक हफ्ता रुकूँगा और अभी जाकर कोई होटल देखूँगा रुकने के लिए।
‘अरे… होटल में क्यूँ… तुम्हारे दोस्त की बुआ का घर है तो होटल में क्यों रुकोगे?’
‘नहीं बुआ जी, मेरा काम कुछ ऐसा है कि रात को देर सवेर तक काम करना पड़ता है और घर पर रहकर आप लोगों को तकलीफ होगी, होटल ही ठीक है।’

‘तुम ठीक हो, बुआ भी कहते हो और बुआ की बात भी नहीं मानते… मुझे कोई तकलीफ नहीं होगी तुम्हारे यहाँ रहने से, उल्टा मुझे कंपनी मिल जायेगी तुम्हारे यहाँ रहने से!’
‘वो कैसे..?’
‘तुम्हारे फूफा जी एक महीने के लिए सिंगापुर गये हुए हैं, उनका कोस्मटिक का काम है ना, तो घर पर सिर्फ मैं और मेरी ननद ही है… तुम्हारे यहाँ रहने से हम अकेली औरतें भी सेफ महसूस करेंगी।’
‘पर…मैं…’
‘राज बेटा जैसा मेरे लिए विकास (मेरा दोस्त, जिसकी मेघा बुआ लगती थी) वैसे तुम… अगर तुम हमारे पास रुकोगे तो हमें ख़ुशी होगी… बाकी तुम्हारी मर्जी!’ मेघा बुआ ने थोड़ा सा मायूसी भरी आवाज में कहा तो मैं रुकने के लिए राज़ी हो गया।

सच कहूँ तो मेरे अन्दर का कमीनापन जागने लगा था, दिमाग में बार बार आ रहा था कि अगर पास रहेंगे तो शायद मेघा जैसी खूबसूरत बला की जवानी का रसपान करने का मौका मिल जाए।
वैसे मेघा बुआ ने अपनी ननद का जिक्र भी किया था पर वो इस समय घर पर नहीं थी।
दो दो चूत घर पर अकेली मिले तो कमीनापन कैसे ना जाग जाए।

मैंने गाड़ी में से अपना सामान निकाला और अन्दर ले आया।
बुआ ने मेरे लिए एक कमरा खोल दिया जिसका एक दरवाजा बाहर की तरफ भी खुलता था।
मैंने सामान रख लिया तो बुआ ने एक चाबी मुझे दी और बोली- देर सवेर जब भी आओ, यह दरवाजा खोल कर तुम आ सकते हो। जब तक यहाँ हो, इसे अपना ही घर समझो।
बिजनेसमैन हर चीज का हिसाब लगा लेता है। यहाँ रहने से कम से कम दस हजार तो होटल के बच रहे थे और फिर घर जैसा खाना होटल में थोड़े ही नसीब होता है।
फिर होटल में अगर चूत का इंतजाम करता तो पैसा खर्च करना पड़ता पर यहाँ अगर मेघा बुआ से बात बन गई तो चूत भी फ्री में और अगर ननद की भी मिल गई तो एक्स्ट्रा बोनस।

मैंने अपना सामान कमरे में रखा ही था कि मेघा बुआ आई, बोली- नहाना हो तो दरवाजे से निकलते ही बाथरूम है।
नहाना तो था ही, रात भर के सफ़र की थकान जो उतारनी थी, मैं मेघा बुआ के साथ गया तो बुआ ने बाथरूम दिखा दिया।
बाथरूम का दरवाजा कमरे में तो नहीं था पर था कमरे से बिल्कुल लगता हुआ।

मैंने बैग में से अपने कपड़े और तौलिया निकाला और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया।
बाथरूम में घुसते ही पहले फ्रेश हुआ फिर कपड़े निकाल कर नहाने लगा।
नहाने के बाद जब कपड़े पहनने लगा तो देखा कि अंडरवियर तो बैग में ही रह गया है।
जो पहना हुआ था वो गीला हो चुका था।
घर पर होता तो आवाज लगा कर मांग लेता पर यहाँ तो आवाज भी नहीं लगा सकता था।

मैंने तौलिया लपेटा और जल्दी से कमरे में घुस गया।
कमरे में घुसा तो देखा कि एक अट्ठारह बीस साल की लड़की पौंछा लगा रही थी, मैं उसको देख कर चौंक गया और वो मुझे देख कर!
वो हतप्रभ सी मेरी ओर देख रही थी और मैं उसे!
अचानक उसने शर्मा कर अपना मुँह दूसरी और फेर लिया।
उसके मुँह फेरने के बाद मुझे कुछ होश आया तो देखा कि मेरा तौलिया खुल कर मेरे पाँव में पड़ा था और मैं नंगा खड़ा था उस लड़की के सामने।
लंड तना हुआ तो नहीं था पर हल्की हल्की औकात में जरूर था।

मैंने हाथ में पकड़े हुए कपड़े बेड पर फेंके और झुक कर अपना तौलिया उठाया।
वो लड़की हँसती हुए मेरे पास से निकल कर बाहर चली गई।
क्या यह मेघा बुआ की ननद है?
मैं सोच रहा था।
पर वो मेघा बुआ की ननद नहीं थी बल्कि वो घर पर झाड़ू पौंछा करने वाली थी।

नाम पहले मैंने नहीं पूछा था पर बाद में मेघा बुआ ने बताया था, उसका नाम शबनम था पर सब उसको शब्बो कहते थे।
तीसरी चूत… सोच कर ही लंड अंगड़ाइयाँ लेने लगा था, उसे समझ में आ रहा था कि तीन में से एक आध चूत तो जरूर उसको मिलने वाली थी अगले पाँच-सात दिन में।
तीन तीन चूतों के बारे में सोच सोच कर ही लंड करवटें लेने लगा था।
तीसरी चूत वाली के अभी दर्शन नहीं हुए थे पर उम्मीद थी की वो भी मस्त ही होगी।

मैं तैयार हुआ और अपने काम पर निकल गया।
काम करते करते मार्किट में ही मुझे शाम के पांच बज गए, मुझे खाली हाथ वापिस जाना अच्छा नहीं लग रहा था सो मैंने कुछ मिठाई और फल ले लिए।
गाड़ी की पार्किंग के पास ही एक फूल वाला बैठा हुआ था तो बिना कुछ सोचे समझे ही मैंने एक छोटा सा गुलाब के फूलों का बुके भी ले लिया।
छ: बजे वापिस मेघा बुआ के घर पहुँचा।
घण्टी बजाई तो दरवाजा एक तेईस-चौबीस साल की लड़की ने खोला, चेहरा खूबसूरत था तो मेरी नजरें उसके चेहरे पर चिपक गई।
अभी वो या मैं कुछ बोलते कि मेघा बुआ आ गई और मुझे देखते ही बोली- तुम आ गए राज!

उस लड़की ने बुआ की तरफ मुड़ कर देखा तो मेघा बुआ ने मेरा परिचय करवाया।
यह लड़की मेघा बुआ की ननद थी, नाम था दिव्या!
उन्होंने मुझे अन्दर आने के लिए कहा तो मैं उनके पीछे पीछे अन्दर आ गया।
मैंने फल और मिठाई मेज पर रखी तो बुआ ने उसके लिए थैंक यू बोला।
मैं सोफे पर बैठ गया तो दिव्या मेरे लिए पानी लेकर आई।

जब वो मेरे सामने से मुझे पानी दे रही थी यही वो क्षण था जब मैंने दिव्या को ध्यान से देखा।
दिव्या का कद तो कुछ ज्यादा नहीं था पर उसके पतले से शरीर पर जो चूची रूपी पहाड़ियाँ बनी हुई थी वो किसी की भी जान हलक में अटकाने के लिए काफी थी। उसकी कसी हुई टाइट टी-शर्ट में ब्रा में कसी चूचियों की गोलाइयाँ अपने खूबसूरत आकर को प्रदर्शित कर रही थी। पतला सा पेट और साइज़ के साथ मेल खाते मस्त कूल्हे… अगर कद को छोड़ दिया जाए तो कुल मिलाकर मस्त क़यामत थी।
बुआ और मैं बैठे घर परिवार की बातों में मस्त थे तभी दिव्या चाय बना कर ले आई और हम तीनों बैठ कर चाय पीने लगे।

मैंने दिव्या से बात शुरू करने के लिए पूछा- आप क्या करती हैं दिव्या जी?
‘दिव्या जी… राज जी, आप मुझे सिर्फ दिव्या कहो तो मुझे ज्यादा अच्छा लगेगा।’
‘सॉरी फिर तो तुम्हें भी मुझे राज ही कहना पड़ेगा… राज जी नहीं!’
तभी बुआ भी बोल पड़ी- फिर ठीक है, तुम मुझे भी मेघा कह कर बुलाओगे, बुआ जी नहीं… बुआ जी सुनकर ऐसा लगता है जैसे मैं बूढ़ी हो गई हूँ!’ कहकर मेघा बुआ… सॉरी मेघा हँस दी, साथ में हम भी हँस पड़े।

कुछ देर की बातों में दिव्या और मेघा मुझसे घुलमिल गई थी।
कुछ देर बातें करने के बाद मैं अपने रूम में चला गया और फिर चेंज करने के बाद तौलिया लेकर बाथरूम में घुस गया।
बाथरूम में जाकर नहाया और लोअर और बनियान पहन कर जैसे ही मैं अपने रूम में आया तो दिव्या कमरे में थी। उसका कुछ सामान उस कमरे में था जिसे वो लेने आई थी।

इतनी चूतों का मज़ा लेने के बाद मुझे यह तो अच्छे से पता है कि कोई भी लड़की या औरत सबसे ज्यादा खुश सिर्फ अपनी तारीफ़ सुनकर होती है।
जैसे ही दिव्या अपना सामान लेकर कमरे से जाने लगी तो मैंने बड़े प्यार से दिव्या को बोल दिया- दिव्या.. अगर बुरा ना मानो तो एक बात बोलूँ?
‘क्या?’
‘तुम बहुत खूबसूरत हो… मैंने आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत लड़की नहीं देखी।’
‘हट… झूठे…’
‘सच में दिव्या… झूठ नहीं बोल रहा.. तुम सच में बहुत खूबसूरत हो!’
‘ओके… तारीफ के लिए शुक्रिया… अब जल्दी से तैयार होकर आ जाईये… भाभी ने खाना तैयार कर लिया होगा।’ कह कर दिव्या एक कातिल सी स्माइल देते हुए कमरे से बाहर निकल गई।

दिव्या की स्माइल से मुझे इतना तो समझ आ चुका था कि अगर कोशिश की जाए तो दिव्या जल्दी ही मेरे लंड के नीचे आ सकती है। पर मेघा भी है घर में… थोड़ा देखभाल कर आगे बढ़ना होगा।
अभी सिर्फ आठ बजे थे और इतनी जल्दी मुझे खाना खाने की आदत नहीं थी, मैंने अपना लैपटॉप खोला और दिन में किये काम की रिपोर्ट तैयार करने लगा।
कुछ देर काम करने के बाद मुझे बोरियत सी महसूस होने लगी तो मैंने लैपटॉप पर एक ब्लू फिल्म चला ली और आवाज बंद करके देखने लगा।
ब्लूफिल्म देखने से मेरे लंड महाराज लोअर में तम्बू बना कर खड़े हो गए। मुझे ब्लूफिल्म की हीरोइन मेघा बुआ सी नजर आने लगी थी।
अचानक मेरे मुँह से निकला- हाय… मेघा बुआ क्या मस्त माल हो तुम..
और यही वो क्षण था जब मेघा बुआ ने कमरे में कदम रखा।

मेघा बुआ को कमरे में देख मैं थोड़ा घबरा गया, मैंने जल्दी से लैपटॉप बंद किया और मेघा की तरफ देखने लगा।
‘राज… कहाँ मस्त हो… कब से आवाज लगा रही हूँ… खाना तैयार है आ जाओ..’
‘वो बुआ… सॉरी मेघा… मुझे जरा लेट खाने की आदत है तो बस इसीलिए..’
‘चलो कोई बात नहीं कल से लेट बना लिया करेंगे पर आज तो तैयार है तो आज तो जल्दी ही खा लेते है नहीं तो ठंडा हो जाएगा।’
‘ओके… आप चलिए मैं आता हूँ।’

जैसे ही मेघा वापिस जाने के लिए मुड़ी मैं खड़ा होकर अपने लंड को लोअर में एडजस्ट करने लगा और तभी मेघा मेरी तरफ पलटी। मेरा लंड लोअर में तन कर खड़ा था, मेघा हैरानी से मेरी तरफ देख रही थी।
मैंने उसकी नजरों का पीछा किया तो वो मेरे लंड को ही देख रही थी जो अपने विकराल रूप में लोअर में कैद था।
वो बिना कुछ बोले ही कमरे से बाहर निकल गई। मैं थोड़ा घबरा गया था कि कहीं वो बुरा ना मान जाए।
पर मेरे अनुभव के हिसाब से बुरा मानने के चांस कम थे।

मैं अपने लंड को शांत कर लगभग पाँच मिनट के बाद बाहर आया तो टेबल पर खाना लग चुका था और वो दोनों मेरा इंतजार कर रही थी। वो दोनों टेबल के एक तरफ बैठी थी तो मैं टेबल के दूसरी तरफ जाकर बैठ गया।
दिव्या एक खुले से गले की टी-शर्ट पहने हुई थी और मेघा अभी भी साड़ी पहने हुए थी।
जैसे ही मैं अपनी जगह पर बैठा तो दिव्या उठ कर सब्जी वगैरा मेरी प्लेट में डालने लगी।
क्यूंकि वो मेज के दूसरी तरफ थी तो उसको ये सब थोड़ा झुक कर करना पड़ रहा था, झुकने के कारण उसके खुले गले में से उसकी मस्त गोरी गोरी चूचियाँ भरपूर नजर आ रही थी।

उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी, इस कारण उसकी चूचियों का मेरी आँखों के सामने भरपूर प्रदर्शन हो रहा था। ऐसी मस्त चूचियां देखते ही मेरे लंड ने फिर से करवट ली और लोअर में तम्बू बन गया।

तभी मेरी नजर मेघा पर पड़ी तो झेंप गया क्योंकि वो मेरी सारी हरकत को एकटक देख रही थी।
दिव्या मेरी प्लेट में खाना डालने के बाद अपनी जगह पर बैठ गई और फिर हम तीनों खाना खाने लगे।
खाना खाते खाते मैंने कई बार नोटिस किया कि मेघा बार बार मेरी तरफ देख देख कर मुस्कुरा रही थी, उसके होंठों पर एक मुस्कान स्पष्ट नजर आ रही थी।
पर उस मुस्कान का मतलब समझना अभी मुश्किल था।

आज मेरा पहला ही दिन था और जल्दबाजी काम बिगाड़ भी सकती थी।
खाना खाने के बाद मैं उठ कर सोफे पर बैठ गया और टीवी देखने लगा, दिव्या और मेघा रसोई में थी।
तभी दिव्या एक प्लेट में आगरे का मशहूर पेठा रख कर ले आई और बिलकुल मेरे सामने आकर खड़ी हो गई।
मेरी नजर टीवी से हट कर दिव्या पर पड़ी तो आँखें उस नज़ारे पर चिपक गई जो दिव्या मुझे दिखा रही थी।
वो प्लेट लेकर बिलकुल मेरे सामने झुकी हुई थी और उसकी ढीली सी टी-शर्ट के गले में से उसकी नंगी चूचियों के भरपूर दर्शन हो रहे थे।
मैं तो मिठाई लेना ही भूल गया और एकटक उसकी गोरी गोरी चूचियों को देखने लगा।
‘राज बाबू… कहाँ खो गए… मुँह मीठा कीजिये ना..’

दिव्या की बात सुन मैं थोड़ा सकपका गया- दिव्या… समझ नहीं आ रहा कि कौन सी मिठाई खाऊँ?
‘मतलब?’
‘कुछ नहीं…’ कह कर मैंने एक टुकड़ा उठा लिया और दिव्या को थैंक यू बोला।
दिव्या ने भी एक टुकड़ा उठाया और मेरे मुँह में देते हुए बोली- यू आर वेलकम!
और हँसते हुए वहाँ से चली गई।
हरा सिग्नल मिल चुका था पर मेघा का थोड़ा डर था। डरने की आदत तो थी ही नहीं पर थोड़ा सावधानी भी जरूरी थी।
कहते हैं ना सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी।

करीब आधे घंटे तक मैं अकेला बैठा टीवी देखता रहा, फिर मेघा और दिव्या दोनों ही कमरे में वापिस आ गई।
मेघा मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गई पर दिव्या आकर मेरे वाले सोफे पर मुझ से चिपक कर बैठ गई।
हम सब इधर उधर की बातें करने लगे पर बीच बीच में कई बार मैंने महसूस किया की शायद दिव्या जानबूझ कर अपने बूब्स मेरी कोहनी से टच कर रही थी… गुदाज चूचों के स्पर्श से मेरे लंड महाराज की हालत खराब होने लगी थी।
कुछ देर बातें करने के बाद मेघा उठ कर अपने कमरे में जाने लगी और उसने दिव्या को भी आवाज देकर अपने साथ चलने को कहा। दिव्या ने कहा भी कि उसे अभी टीवी देखना है पर मेघा ने उसे अन्दर चल कर बेडरूम में टीवी देखने को कहा और फिर वो दोनों कमरे में चली गई।

मैं अब अकेला बोर होने लगा तो मैं भी उठ कर पहले बाथरूम गया और फिर अपने कमरे में घुस गया, लैपटॉप पर कुछ देर काम किया फिर ब्लू फिल्म देखने लगा।
मुझे रात को बहुत प्यास लगती है, अपने घर में तो मैं सोते समय पहले से ही एक जग पानी का भर कर रख लेता हूँ। पर यहाँ मैं मेघा या दिव्या को पानी के लिए कहना ही भूल गया था।
कुछ देर सोचता रहा कि मेघा या दिव्या को आवाज दूँ फिर सोचा की खुद ही रसोई में जाकर ले लेता हूँ।

मैं उठा और कमरे से बाहर निकला और रसोई की तरफ चल दिया।
मेघा के कमरे की लाइट अभी तक जल रही थी, सोचा कि दिव्या टीवी देख रही होगी। पर चूत के प्यासे लंड की तमन्ना हुई कि सोने से पहले एक बार उन हसीनाओं के थोड़े दर्शन कर लिए जाएँ ताकि रूम में उनको याद करके मुठ मार सकूँ। बिना मुठ मारे तो नीद भी नहीं आने वाली थी।
रूम के दरवाजे पर जाकर अन्दर झाँका तो अन्दर का नजारा कुछ अलग ही था, दीवार पर लगी स्क्रीन पर एक ब्लूफिल्म चल रही थी। मैं तो हैरान रह गया।
जब नजर बेड पर गई तो मेरे लंड ने एकदम से करवट ली, मेघा बेड पर नंगी लेटी हुई थी और दिव्या भी सिर्फ पेंटी पहन कर बुआ के बगल में बैठी हुई थी।
बुआ अपने हाथों से अपनी चूचियां मसल रही थी और दिव्या एक हाथ से अपनी चूचियाँ दबा रही थी, दूसरे से बुआ की नंगी चूत सहला रही थी।
दोनों का ध्यान स्क्रीन पर था।
मेरे कदम तो जैसे वहीं चिपक गये थे।

वो दोनों बहुत धीमी आवाज में बातें कर रही थी, मैंने बहुत ध्यान लगा कर सुना तो कुछ समझ आया- दिव्या… मसल दे यार… निकाल दे पानी…
‘मसल तो रही हूँ भाभी…’
‘जरा जोर से मसल… कुछ तो गर्मी निकले…’
‘भाभी… हाथ से भी कभी गर्मी निकलती है… तुम्हारी चूत की गर्मी तो भाई का लंड ही निकाल सकता है!’ कह कर दिव्या हँसने लगी।
‘तुम्हारे भाई की तो बात ही मत करो… बहनचोद महीना महीना भर तो हाथ नहीं लगाता मुझे… और जब लगाता भी है तो दो मिनट में ठंडा होकर सो जाता है..’
‘ओह्ह्ह्ह… इसका मतलब मेरी भाभी जवानी की आग में जल रही है…’
‘हाँ दिव्या… कभी कभी तो रात रात भर जाग कर चूत मसलती रहती हूँ… तुझे भी तो इसीलिए अपने पास रखा है कि तू ही अपने भाई की कुछ कमी पूरी कर दे।’

‘भाई की कमी मैं कैसे पूरी कर सकती हूँ… मेरे पास कौन सा लंड है भाई की तरह…’ दिव्या खिलखिलाकर हँस पड़ी।
‘अरे लंड नहीं है तो क्या हुआ… तू जो चूत को चाट कर मेरा पानी निकाल देती है, उससे ही बहुत मन हल्का हो जाता है।’
‘भाभी… जो काम लंड का है, वो लंड ही पूरा कर सकता है, जीभ से तो बस पानी निकाल सकते हैं, चुदाई तो लंड से ही होती है।’
‘तू बड़ी समझदार हो गई है… पर तेरा भाई तो अब एक महीने से पहले आने वाला नहीं है, तो लंड कहाँ से लाऊं?’
‘किसी को पटा लो…’
‘हट… मैं तेरे भाई से बेवफाई नहीं कर सकती… आजकल नहीं चोदते है तो क्या हुआ… पहले तो मेरे बदन का पोर पोर ढीला कर दिया करते थे… बहुत प्यार करते हैं वो मुझे!’
‘भाभी एक बात कहूँ…’
‘हाँ बोलो मेरी रानी..’

भाभी… तुम्हारे साथ ये सब करते करते मेरी चूत में बहुत खुजली होने लगती है… तुम तो बहुत चुद चुकी हो पर मेरी चूत ने तो बस तुम्हारी उंगली का ही मज़ा लिया है अब तक… मेरी चूत को अब लंड चाहिए वो भी असली वाला!’
‘अच्छा जी… मेरी बन्नो रानी को अब लंड चाहिए… आने दे तेरे भाई को… तेरी शादी का इंतजाम करवाती हूँ।’
‘भाभी अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ…’
‘हाँ बोलो..’

मेघा बुआ और उसकी ननद दिव्या नंगी होकर लेस्बीयन सेक्स कर रही थी, दिव्या अपनी भाभी की चूत में उंगली करते हुए अपने लिए लंड की ख्वाहिश जाहिर कर रही थी।
‘ये जो राज आया हुआ है…’
‘हाँ… तो..’
‘आपने गौर किया… कितना बड़ा लंड है उसका?’
‘अरे… तुमने कब देख लिया उसका लंड…’
‘देखा नहीं है भाभी… जब वो बाथरूम से नहा कर बाहर आया था तो उसके लोअर में तम्बू बना हुआ था बस उसी से अंदाजा लगाया किबहुत लम्बा और मोटा लंड होगा उसके लोअर के अन्दर…’
‘हाँ… देखा तो मैंने भी है… पर तेरा इरादा क्या है?’

‘इरादा अभी तक तो नेक ही है… सोच रही हूँ की अपनी भाभी की जलती सुलगती चूत को राज के लंड से ठण्डा करवा दूँ… मेरी भी रोज रोज की मेहनत कम हो जायेगी…’
‘कमीनी… मैं सब समझती हूँ… तू किसकी चूत को ठंडा करवाना चाहती है…’
‘तो इसमें बुरा क्या है भाभी… ऐसे तड़प तड़प के जीना भी कोई जीना है?’
‘दिव्या वो मेरे भतीजे का दोस्त है… वो क्या सोचेगा हमारे बारे में…’

‘अरे भाभीजान… मर्द है वो… और जहाँ तक मुझे पता है सारे मर्द चूत के गुलाम होते हैं… चूत देखते ही सब भूल जाते हैं।’
‘अच्छा… तेरी चूत में अगर इतनी ही आग लगी है तो तू अपनी चूत चुदवा ले… मैं ये सब नहीं कर सकती!’
‘पर भाभी मैंने आज तक लंड नहीं लिया है… पहली बार लेने में डर लग रहा है… अगर तुम मदद करोगी तो मैं भी जन्नत के मजे ले लूँगी।’
‘ना बाबा ना… मुझे तो डर भी लगता है और शर्म भी आती है ये सब सोचते हुए भी…’
‘अच्छा जी… अपनी ननद से चूत चटवा कर, चूत में उंगली करवा के मज़ा लेती हो तब तो शर्म नहीं आती?’
‘मेरी बन्नो… लगता है तेरी चूत का दाना कुछ ज्यादा ही फुदक रहा है जो राज के लंड को खाने के लिए तड़प रही है?’

‘भाभी… सच में जब से राज के लोअर में खड़े लंड का अहसास हुआ है, तब से चूत पानी पानी हो रही है।’
‘चल अब बातें छोड़ और मेरी चूत का पानी निकाल… कल सुबह कोशिश करना राज को पटाने की… अगर वो मान गया तो चूत चुदवा लेना… मुझे कोई ऐतराज नहीं!’
‘मेरी अच्छी भाभी…’ कहकर नंगी दिव्या नंगी मेघा से लिपट गई और फिर वो दोनों अधूरा काम पूरा करने में व्यस्त हो गई।

मैं भी चुपचाप अपने कमरे में आया और एक बार जोरदार मुठ मारी और फिर सुबह का इंतज़ार करते हुए सो गया।
अगले दिन सुबह मेघा ने मुझे उठाया, आँख खुली तो वो मेरे सामने खड़ी थी चाय का कप लेकर…
मेघा को देखते ही रात का नजारा एक दम से आखों के सामने घूम गया, मन में तो आया कि पकड़ कर अभी चोद दूँ पर जब आग उधर भी लगी थी तो मैंने पहल करना सही नहीं समझा।
मेघा नहा कर तैयार होकर आई थी, बढ़िया सा परफ्यूम लगाया हुआ था, बदन महक रहा था मेघा का… मुझे खुद पर काबू करना मुश्किल हो रहा था।
मेघा चाय मेरे हाथ में पकड़ा कर जाने लगी तो मैंने तारीफ़ करते हुए बोल ही दिया– मेघा क्या बात है… आज तो सुबह सुबह ही तैयार हो गई?
‘नहीं ऐसी कोई बात नहीं है… मैं तो हर रोज सुबह सुबह ही तैयार हो जाती हूँ।’
‘वैसे एक बात कहूँ… बहुत खूबसूरत लग रही हो!’
मेघा ने कोई जवाब नहीं दिया बस एक स्माइल दे कर वो कमरे से बाहर चली गई।

घड़ी देखी तो दस बजने वाले थे, क्लाइंट ने ग्यारह बजे का समय दिया था, मैं जल्दी से उठा और तौलिया लेकर बाथरूम की तरफ भागा।
जैसे ही बाथरूम के पास पहुँचा, तभी दिव्या बाथरूम से बाहर निकली, मुझे देख कर उसने एक सेक्सी सी स्माइल दी और चली गई।
नहाने के बाद याद आया कि मैं आज भी अंडरवियर कमरे में ही भूल गया था पर अब शर्माने की जरूरत नहीं थी बल्कि मेघा और दिव्या को कुछ दिखाने की जरुरत थी।

मैंने बनियान पहनी और तौलिया लपेट कर ही बाथरूम से बाहर आ गया।
दिव्या रसोई में थी और मेघा बाथरूम के सामने बनी एक अलमारी में से कुछ सामान निकाल रही थी।
जैसे ही मैं बाथरूम से बाहर आया, दरवाजे की आवाज सुनकर मेघा का ध्यान मेरी तरफ हुआ, तभी मैंने जानबूझ कर अपने हाथ में पकड़े हुए कपड़े नीचे गिरा दिए।
मेघा मेरे पास आकर मेरे कपड़े उठाने लगी। उसी समय मैं भी कपड़े उठाने के लिए नीचे बैठा।

यही वो क्षण था जब मेरे तौलिये ने मेरे बदन का साथ छोड़ दिया, मेरा साढ़े सात इंच का लम्बा और लगभग तीन इंच का मोटा लंड एकदम से मेघा के सामने सलामी देने लगा।
मैं जल्दी से उठा तो तौलिया नीचे गिर गया, लंड अब बिलकुल मेघा के मुँह के सामने था।
मैंने सॉरी बोलते हुए जल्दी से तौलिया उठाया और भाग कर कमरे में चला गया।
मैंने अपना काम कर दिया था, अब जो भी होना था वो मेघा या दिव्या की तरफ से होना था।
कमरे में जाकर मैं तैयार हुआ, तभी दिव्या कमरे में आई और मुझे नाश्ते के लिए बुलाने लगी।
बाहर आया तो मैंने देखा मेघा और दिव्या टेबल पर बैठे मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे।
मैं सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया और चुपचाप नाश्ता करने लगा। मेघा मुझे ही घूरे जा रही थी जबकि दिव्या बिना इधर उधर देखे नाश्ता कर रही थी।
नाश्ता करने के बाद दिव्या बर्तन उठा कर रसोई में चली गई।
मैंने मौका देखा और मेघा को देखते हुए बोला– मेघा… जो कुछ भी हुआ मैं उसके लिए शर्मिंदा हूँ… तभी मैं होटल में रुकने को बोल रहा था।

अगर तुम बुरा ना मानो तो मैं आज किसी होटल में चला जाता हूँ।
‘अरे राज… तुम इतना परेशान क्यूँ हो रहे हो… हो जाता है ऐसा कभी कभी… और हाँ… कहीं जाने की जरूरत नहीं है… जब तक आगरा में हो, तब तक तुम हमारे साथ ही रहोगे… समझे…’ बोलकर मेघा ने एक कातिलाना स्माइल दी।
मैं तो खुद भी यही चाहता था, मैंने अपना लैपटॉप उठाया और फिर घर से निकल गया।
क्लाइंट से मिलने के बाद मैं लगभग एक बजे फ्री हो गया। वैसे तो मुझे एक दो और क्लाइंट्स से मिलना था पर चूत के रसिया को अब चूत नजर आने लगी थी तो सोचा कि अब बाकी काम शाम को करेंगे।

मैंने गाड़ी उठाई और वापिस घर की तरफ चल पड़ा।
रास्ते में से मैंने कुछ खाने पीने का सामान लिया और दस मिनट के बाद ही मैं मेघा के घर के सामने था, दरवाजे पर पहुँच कर डोर-बेल बजाई।
दरवाजा मेघा ने खोला, अभी तक वो सुबह की तरह ही महक रही थी- अरे राज आज तो बड़ी जल्दी आ गए?
‘वो क्लाइंट ने शाम को मिलने का समय दिया है तो सोचा कि घर ही चल पड़ता हूँ… कहाँ शाम तक भटकता फिरूँगा।’

‘यह तुमने बहुत अच्छा किया… मैं भी अकेली बोर हो रही थी… खाना खाओगे?’
‘नहीं मेघा… वो जिस क्लाइंट के पास गया था उसने बहुत कुछ खिला दिया… खाना खाने का बिल्कुल भी मन नहीं है।’
‘ओके जैसी तुम्हारी मर्जी… भूख लगे तो बता देना..’
‘दिव्या… कहाँ है?’
‘वो अपने कॉलेज गई है… चार बजे तक आएगी।’ बोलकर मेघा रसोई में चली गई।

मैं कुछ देर तो वहीं बैठा रहा फिर उठकर कमरे में चला गया, जाकर मैंने अपने कपड़े बदले और एक टी-शर्ट और लोअर डाल कर वापिस बाहर आकर बैठ गया।
तभी मेघा ट्रे में दो गिलास जूस के लेकर आ गई।
जब उसने मेरे सामने झुक कर मुझे गिलास पकड़ाया तो मन किया कि अभी मेघा के चूचे पकड़ लूँ
‘मेघा एक बात पूछूँ?’
‘अरे.. पूछो ना..’
‘सुबह वाली बात का तुम्हें बुरा तो नहीं लगा?’
‘नहीं यार… तुमने कौन सा जानबूझ कर कुछ किया था… फिर तुम तो घर के ही हो…’
थोड़ी देर चुप रही पर मैंने महसूस किया कि मेरे सुबह वाली बात शुरू करने से मेघा थोड़ा अलग रंग में आने लगी थी।
‘सच कहूँ मुझे तो बहुत शर्म आई जब देखा कि मैं तुम्हारे सामने बिल्कुल नंगा खड़ा हूँ…’

फिर भी मेघा कुछ नहीं बोली पर उसकी आँखें उसके मन का राज खोल रही थी जिनमे मुझे थोड़ा थोड़ा वासना के डोरे नजर आने लगे थे।
‘मेघा… तुमने तो मुझे बिल्कुल नंगा देख लिया…’ मैंने मेघा की आँखों में झांकते हुए कहा।
‘राज… प्लीज कुछ और बात करो ना…’
‘और क्या बात करूं मेघा… झूठ नहीं बोलूँगा… जब से मैं आगरा आया हूँ तुम्हारी खूबसूरती का दीवाना सा हो गया हूँ!’
मेघा चुप रही।
‘सच कहता हूँ मेघा… अगर तुम मेरे दोस्त की बुआ ना होती तो मैं कब का तुम्हें अपनी दोस्ती का ऑफर कर चुका होता।’
‘रहने दो रहने दो… अब इतना भी मत चढ़ाओ मुझे… मुझे जमीन पर ही रहने दो!’
‘मेघा… एक बात पूछूँ?’
‘हाँ पूछो..’

‘आपके पति आपसे इतने इतने दिन दूर रहते हैं… दिल लग जाता है तुम्हारा?’ मैंने मेघा की दुखती रग को छेड़ा।
मेघा मेरी बात सुनकर कुछ चुप सी हो गई, उसके चेहरे के भाव उसके दिल का हाल बयाँ कर रहे थे।
वैसे तो मैं उसके दिल का हाल रात को ही जान गया था।
मैं उठा और मेघा के पास जाकर बैठ गया, मेरे बैठते ही मेघा उठ कर जाने लगी तो मैंने बिना अंजाम की परवाह किये मेघा का हाथ पकड़ लिया।

मेघा अपना हाथ छुड़वाने की कोशिश करने लगी तो मैंने थोड़ा जोर लगा कर मेघा को अपनी तरफ खींचा तो वो कटे पेड़ की तरह मेरे ऊपर गिर गई।
मैंने उसको सँभालते हुए उसकी कमर में हाथ डाला तो मेघा के मुलायम और गुदाज बदन के एहसास ने मेरे दिल में हलचल पैदा कर दी।
मेघा ने उठने की कोशिश की तो मैंने उसको कसके पकड़ लिया, उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ मेरी छाती पर धंसी जा रही रही थी, उसकी साँसें तेज हो गई थी और दिल की धड़कन स्पष्ट सुनी जा सकती थी।
कुछ देर ऐसे ही पकड़े रहने के बाद मैंने जब पकड़ थोड़ी ढीली की तो वो एकदम से मेरी बाहों में से निकल कर अपने कमरे में भाग गई।