चुत ने लंड की सवारी की

मेरे जीवन में बहुत कुछ बुरा चल रहा था जिससे कि मैं बहुत ज्यादा परेशान रहने लगी थी और मेरा दिमाग भी अब शायद पहले की तरह काम नहीं कर रहा था मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मेरे जीवन में इतना कुछ कैसे गलत हो सकता है। मेरे पति और मेरे बीच में आए दिन झगड़े होते रहते थे हम दोनों के रिलेशन को 7 वर्ष हो चुके हैं और मेरी एक छोटी लड़की भी है जिसकी उम्र 5 वर्ष है लेकिन मेरे पति और मेरे बीच में आए दिन झगड़े होने लगे थे जिस वजह से मैं मानसिक रूप से तनाव में रहने लगी थी। इसी का खामियाजा मुझे उस वक्त भुगतना पड़ा जब मैंने अपनी मम्मी से बात की तो मेरी मम्मी कहने लगी बेटा तुम दोनों आपस में इतना झगड़ा मत किया करो इससे तुम्हारी बच्ची पर गलत असर पड़ता है।

मैंने अपनी मम्मी से कहा मम्मी मुझे तो यह सब मालूम है लेकिन दुर्गेश तो कुछ समझने को तैयार ही नहीं हैं और वह आय दिन मुझसे झगड़ा करते रहते हैं, इसी के चलते एक दिन मेरा पैर भी फिसल गया और मुझे बहुत ज्यादा चोट लगी क्योंकि मेरा दिमाग बिल्कुल मेरे बस में नहीं था मैं मानसिक रूप से पूरी तरीके से परेशान हो चुकी थी।

एक दिन जब मैं बहुत तकलीफ में थी तो उस वक्त मैं डॉक्टर के पास खुद ही गई मैंने यह बात अपने पति को नहीं बताई मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई थी और जब मैं डॉक्टर के पास गई तो उन्होंने मुझसे बड़े ही प्यार से बात की। इतने समय बाद मुझसे किसी ने इतने प्यार से बात की थी तो मुझे उनका नेचर बड़ा अच्छा लगा उन्होंने मुझे कहा कि आपको घबराने की जरूरत नहीं है सब कुछ ठीक हो जाएगा उन्होंने मुझे दवाई दे दी और मेरी मरहम पट्टी करवा दी उनका क्लीनिक हमारे घर के पास ही है उनका नाम रोहित है। डॉक्टर रोहित का नेचर बड़ा ही अच्छा है जिस वजह से मैं उनसे बहुत प्रभावित हो गई और मुझे उनसे बात करना भी अच्छा लगता था मैं जब भी उनके पास जाती तो वह मुझसे मेरा हाल-चाल पूछ लिया करते मुझे भी किसी ऐसे सच्चे दोस्त की जरूरत थी जो कि इस मुसीबत की घड़ी में मेरा साथ देता क्योंकि मेरे जीवन में तो सिर्फ तनाव ही तनाव था मेरे पति के साथ मेरे रिश्ते बिल्कुल भी ठीक नहीं थे और मेरे घर पर भी कुछ ठीक नहीं चल रहा था।

मेरी मम्मी को भी हर समय इसी बात की चिंता सताती रहती थी कि कहीं मेरा रिश्ता टूट ना जाए और दुर्गेश से कहीं मैं अलग ना हो जाऊं इसलिए उन्हें बहुत ज्यादा डर लगा रहता था और वह मुझे हमेशा समझाती रहती थी। मेरे पास कोई भी ऐसा नहीं था जिससे कि मैं अपने दिल की बात बयां कर पाती और इसी की वजह से मुझे बड़ी तकलीफ झेलनी पड़ रही थी परंतु डॉक्टर रोहित को भी मैंने अपने बारे में सब कुछ बता दिया था और उन्हें मेरे बारे में काफी कुछ चीजें पता चल चुकी थी जिससे कि वह मुझे हमेशा समझाते और कहते आप चिंता ना करें आप सिर्फ अपने आप पर भरोसा कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा।

उन्होंने मेरे अंदर एक कॉन्फिडेंस जगा दिया जिससे कि मुझे भी लगा कि मुझे भी कुछ करना चाहिए और मैंने एक कंपनी में जॉब के लिए अप्लाई किया। वहां पर जब मेरी जॉब लग गई तो अब मैं अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी थी और मैं अपने काम में इतना व्यस्त रहती कि मुझे कुछ और करने का समय ही नहीं मिल पाता था मैं जब शाम को घर लौटती तो मेरे पति उस वक्त घर आ चुके होते थे लेकिन मैं उनसे कम ही बात किया करती थी।

अब यह सिलसिला चलता रहा और मैं बड़े अच्छे से नौकरी कर रही थी मैं अब कुछ पैसे बचाने की लगी थी क्योंकि मुझे अपनी बेटी के भविष्य के बारे में भी सोचना था मैं उसके भविष्य को संवारने चाहती थी ताकि कहीं मेरे जैसी स्थिति में वह भी ना आ जाए इसलिए मैं उसे अपने पैरों पर खड़ा करना चाहती थी और उसे एक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाना चाहती थी ताकि वह एक अच्छी शिक्षा ले और एक अच्छे माहौल में रहे।

मैंने उसे एक स्कूल में दाखिला दिलवा दिया था और वह अब स्कूल में भी पड़ने लगी थी मेरी आधी चिंता तो ऐसे ही दूर हो चुकी थी अब मैं खुद को पहले से बेहतर महसूस कर रही थी और यह सब सिर्फ डॉक्टर रोहित की वजह से ही हो पाया यदि डॉक्टर रोहित मुझे नहीं समझाते तो शायद मैं कभी भी यह फैसला नहीं ले सकती थी लेकिन उनके ही कहने पर मैंने जॉब करने का फैसला लिया और अपने जीवन को एक अलग मोड़ दिया।

एक दिन मेरे हाथ में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था मैंने सोचा मैं डॉक्टर रोहित से मिल लेती हूं मैं जब उनसे मिलने गई तो वह मुझे कहने लगे आपके हाथों में कुछ तकलीफ हो रही है मैं आपको अपने एक दोस्त का नंबर देता हूं आप उनके पास चले जाइएगा उन्होंने मुझे अपने एक दोस्त का नंबर दिया मैं उनके पास चली गई और उन्होंने मुझे कुछ दवाइयां दी मेरा उनसे ट्रीटमेंट चल रहा था क्योंकि मेरे हाथ में बड़ा तेज दर्द हुआ करता था जिससे कि कभी कबार मैं बर्दाश्त नहीं कर पाती थी। धीरे धीरे मेरा दर्द ठीक होने लगा।

एक दिन मुझे मालूम पड़ा कि मेरे पति दुर्गेश का रिश्ता तो किसी और महिला से भी चल रहा है। मैं यह बात सुनकर बहुत ज्यादा दुखी हो गई मुझे दुख इस बात का था कि मेरे पति ने मुझे धोखा दिया और उन्होंने मेरे साथ बहुत ही गलत किया। मैंने इस बारे में अपने पति से बात की तो वह मुझे कहने लगे अब तुम्हारी मेरे जीवन में कोई जगह नहीं है और ना ही अब हमारा वह रिलेशन रह गया है जिसे कि हम दोनों निभा सके। मुझे शुरुआत से ही समझ नहीं आया कि मैंने कहां पर गलती की है क्योंकि मैंने कभी भी आज तक अपने पति को कोई तकलीफ नहीं होने दी लेकिन उसके बाद भी उन्हें मुझ में हमेशा ही कोई ना कोई कमियां दिखाई देती जिस वजह से वह मुझसे झगड़ा किया करते थे।

कभी कभी हमारा झगड़ा इतना ज्यादा हो जाता कि कई बार तो हम दोनों एक दूसरे से बहुत ही ज्यादा झगड़ा करने लग जाते थे लेकिन अब बात बहुत ज्यादा आगे बढ़ चुकी थी और मैं भी शायद अब उन्हें माफ नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने अलग रहने का फैसला कर लिया। जब मैंने यह बात अपनी मम्मी को बताई तो वह बहुत गुस्सा हुई लेकिन मेरे पास और कोई चारा नहीं था क्योंकि अब ना तो मेरे पति का रिश्ता मेरे साथ अच्छा था और ना ही मुझे कोई उम्मीद थी कि हम दोनों के रिश्ते में कोई सुधार आ सकता है।

मैंने अपनी बच्ची को अपने साथ ही रख लिया और मैं उसकी देखभाल अच्छे से करने लगी लेकिन मेरे पास यह समस्या थी कि उसकी देखभाल कौन करेगा इसलिए मैंने उसके लिए एक आया भी रख ली वह उसकी देखभाल किया करती और मैं अपनी नौकरी पर पूरी तरीके से फोकस कर रही थी। मुझे जब भी कोई तकलीफ या समस्या होती तो मैं डॉक्टर के पास चली जाती और उनसे जब भी मैं बात करती तो मेरी समस्या का हल हमेशा हो जाता था उनसे मेरी दोस्ती बहुत अच्छी हो चुकी थी और वह दिल के भी बड़े अच्छे हैं, वह मुझे हमेशा ही समझाते रहते थे कि तुम कभी भी चिंता मत किया करो और कभी भी अपने आप को अकेला महसूस मत किया करो। उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं एक बार उन्होंने मुझे अपनी पत्नी से भी मिलवाया था उनका परिवार बहुत ही अच्छा है और सब लोग बहुत ही खुश रहते हैं। रोहित और मेरी दोस्ती बहुत अच्छी थी इसलिए मैं डॉक्टर रोहित को अपने घर पर कभी भी बुला लिया करती थी, एक दिन डॉक्टर रोहित मुझसे मिलने सुबह के वक्त आ गए।

उस दिन मैं घर पर ही थी, उन्होंने मुझे कहा मुझे तो लगा था आज आप घर पर नहीं होंगी लेकिन आज तो आप घर पर ही। मैंने उन्हें कहा हां मैं आज घर पर ही रुक गई थी मेरी तबीयत ठीक नहीं थी इस वजह से मैं घर पर ही थी। वह मुझे कहने लगे लेकिन आपकी तबीयत को क्या हुआ उन्होंने मुझे बिस्तर पर लेटा कर मेरे हाथ को देखना शुरू किया, जब उन्होंने मेरे माथे पर हाथ रखा तो मैं डॉक्टर रोहित को बड़े ध्यान से देख रही थी उनका हाथ गलती से मेरे स्तनों पर लगा और मेरे अंदर की उत्तेजना जैसे जाग उठी थी।

इतने समय से मैं अपने पति से अलग थी मेरे अंदर भी सेक्स की आग जल रही थी जो सिर्फ रोहित ही बुझा सकते थे। मैंने उन्हें अपने पास बैठने को कहा जब वह मेरे पास बैठे तो मैं अपने स्तनों को दिखाने लगी, वह मेरे स्तनो को देखकर खुश हो जाते वह मेरे स्तनों की तरफ अपनी नजरें मारते तो मैं समझ गए कि उनके दिल में भी कुछ चल रहा है। मैंने उनके लंड को पैंट से निकालते हुए अपने मुंह में ले लिया, वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे और जब मैं उनके लंड को अपने मुंह में लेती तो मुझे बड़ा मजा आता और वह भी पूरे जोश में आ जाते।

मैंने करीब 2 मिनट तक उनके लंड को सकिंग किया जब उनके अंदर का जोश जाग चुका था तो उन्होंने मुझे लेटाते हुए बड़े अच्छे से मेरे पूरे बदन को महसूस किया। उसके बाद उन्होंने जो मुझे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ, वह मुझे ऐसे ही धक्के देते रहते उन्होंने मेरी चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था और वह बड़ी तेजी से मुझे धक्के मार रहे थे जिससे कि मेरे अंदर अलग सी बेचैनी जाग रही थी।

इतने समय बाद किसी ने मेरी आग को बुझाने की कोशिश की थी, मुझे नहीं पता था कि वह डॉ रोहित होंगे, मैंने कभी उनके बारे में ऐसा नहीं सोचा था लेकिन जब वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्का देते तो मेरे अंदर का आग बढ़ती जाता और मैं पूरे जोश में आ जाती। वह अपने लंड को मेरी योनि के अंदर तक डाल रहे थे जिससे कि उनके अंदर एक अलग ही बेचैनी जाग जाती। जब उन्होंने अपने वीर्य को मेरी बड़ी चूतडो के ऊपर गिराया तो मैंने उन्हें कहा मुझे तो बहुत मजा आ गया। वह कहने लगे मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम्हारे साथ भी कभी मैं ऐसा करूंगा लेकिन उन्होंने मेरी इच्छा को बड़े अच्छे से पूरा किया।