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दीदी की नंगी जवानी

ये बात उन दिनों की है जब मैं दसवीं क्लास का छात्र था। दोस्तों की बुरी संगत ने उमझे बिगाड़ दिया और मैं हर समय लड़कियों के बारे में सोचने लगा और सोच सोच कर मूठ मारने लगा बड़ा मजा आता था। मेरे घर में मेरी मां और एक बहन है जो मेरे से दो साल बड़ी है और खूबसूरत भी बहुत है अक्सर लड़के उसे देखकर आहें भरते हैं लेकिन वह किसी को घस नहीं डालती हर समय पढ़ती रहती है।

मेरे मन में दीदी मेनका को लेकर कोई गलत विचार नहीं था लेकिन एक दिन जब मैं स्कूल से लौटा तो घर में जाकर कपड़े बदलकर जैसे ही बाथरूम में घुस वहां का नजारा देखकर दंग रह गया दीदी बिलकुल नंगी होकर नहा रही थ उसकी गोरी गोरी पीठ मुझे दिखई दी झटके के साथ वह मुड़ी और मुझे देखकर शरमा गयी और अपने बूब्स छुपाने लगी लेकिन तब तक मैंने उन्हें देख लिया था क्या बूब्स थे एकदम गोरे गोल गोल मैं तो उन्हें देखता ही रह गया तन्द्रा तब टूटी तब दीदी मुझे डांटते हुए बोली क्या देख रहा है- मै तेरी सगी बहन हूँ .. चल जा ..और उसने दरवाजा बंद कर लिया।

मैं वापस अपने कमरे में आ गया मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया था और वहीं बैठकर मैंने दीदी को चोदने की कल्पना करके पहली बाद दीदी के नाम की मूठ मारी …बड़ा आनन्द आया। उस दिन के बाद जैसे मेरी नीयत दीदी के प्रति बदल सी गयी और मैं हर समय दीदी को चोदने की सोचने लगा किन्तु यह कैसे हो सकता था …मेनका दीदी बिलकुल अप्सरा मेनका जैसी सुन्दर और खूबसूरत थी मगर मेरी सगी बहन थी। लेकिन मेरे लंड हर समय खड़ा रहने लगा और मैं दीदी को चोदने की सोचने लगा। मां दीदी के लिए रिश्ता देख रही थी। लेकिन कहीं पर बात नहीं बन रही थी दरअसल हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इस वजह से दीदी का रिश्ता नहीं हो पा रहा था।

वह पूरी जवान 18 साल की हो गयी थी और मैं सोलह साल का किन्तु मै था हट्टा कट्टा गबरू जवान । दीदी को लेकर मैं दिन में भी और रात को भी मूठ मारने लगा। कई बार मैंने दीदी को बाथरूम में छूपकर देखा और कपड़े बदलते हुए भी देखा ..बहन ने यह बात नोटिस भी की और मुझे घूरकर भी देखा मगर कभी इस बात के लिए मुझे उसने डांटा नहीं। यह देखकर मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गई और एक दिन मैंने दीदी को पीछे से पकड़ लिया और उसके बूब्स दबा दिए दीदी हैरान रह गई और उसने मेरे गाल पर जोरदार तमाचा जड़ दिया …मै रोने लगा और माफ़ी मांगने लगा ….बात आई गई हो गई परन्तु दीदी को पाने की हसरत कम नही हुई बल्कि बढती गई परन्तु आगे बड़ने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी और मैं दीदी को शादी से पहले एक बार चोदना जरूर चाहता था।

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यह बात मैंने ठान ली थी किन्तु कैसे यह सवाल खड़ा था … फिर यह सब सोचकर मैंने एक प्लान बनाया और उस प्लान के तहत मैंने अपने एक दोस्त का सहारा लिया और वह दोस्त साधू बनकर हमारे घर आया। मेरी मां साधु महात्माओं पर पूरा विश्वास करती है। साधू से वह पूछने लगी कि मेनका की शादी कब होगी और हमारी आर्थिक स्थिति कब ठीक होगी। इस पर साधु ने कहा- तुम्हारे घर में कामदेव का प्रकोप है और घर में कोई कुंवारी स्त्री अपनी कामूकता को दबा रही है और कोई मर्द भी स्त्री का साथ चाहता है इसी वजह से ये सब हो रहा है । यदि इस घर में स्त्री पुरूष का मिलन पूर्णिमा की अर्धरात्रि को हो जाये तो सब ठीक हो जायेगा।

घर की माली हालत सुधर जायेगी और लड़की का रिश्ता भी हो जायेगा। तभी मेरी बहन मेनका कालेज से आ गयी। साधु उसे देखकर बोला- यह कोन है ? मां ने कहा यह मेरी बेटी मेनका है इसी की शादी के बारे में आपसे पूछ रही थी। मेनका को मां ने पास बुलाया और साधु ने उसका हाथ देखा फिर मस्तक की रेखाएं पढ़कर बोला- घौर अन्याय हो रहा है इस लड़की के साथ …यह लड़की बड़ी ही पीड़ा में है इस पर कामदेव की घटा छायी है कामदेव इसकी सुन्दरता छीन लेंगे इस का रिश्ता अभी दस साल तक नहीं हो सकता। यह सुनकर मेरी मां रोने लगी और बोली महाराज इसका कोई उपाय हो तो बताइये। साधु ने कहा- एक ही उपाय है वही जो मैंने अभी बताया था।

पूर्णिमा की आधी रात को इस लड़की का कुंवारापन टूटेगा तभी इसका रिश्ता होगा और वह भी इसी घर के किसी मर्द द्वारा। मां यह सुनकर भौचक्की रह गयी। लेकिन महाराज यह कैसे हो सकता है। इस घर में तो एक ही मर्द है और वह है इसका सगा भाई… साधु बोला मैंने मेनका की कुंडली देख ली है इसकी कुंडली में इसके भाई का योग लिखा है यदि यह अपने भाई के साथ रात को सोना शुरू कर दे और उसे खुश करे तो निश्चित रूप से कामदेव प्रसन्न हो जायेंगे और जल्दी ही इसका रिश्ता तय हो जायेगा। इतना कहकर साधु चला गया और जाते जाते चेतावनी दे गया कि यदि ऐसा नहीं किया तो अनर्थ हो जायेगा। खाने के लाले पड़ जायेंगे और लड़की का रिश्ता दस साल तक नहीं होगा।

यह सब सुनकर मां रोने लगी और अपनी किस्मत को कोसने लगी। तभी बहन अपने कपडे बदल कर भीतर से आयी और बोली- मां आप रोइये नहीं जैसे साधु महाराज ने कहा है हम वैसा ही कर लेते हैं मैं भाई के साथ सोने के लिए तैयार हूं ..यह सुनकर मेरी बांछे खिल गयी मगर मैं झूठा गुस्सा दिखलाते हुए बोला पागल हो गई हो क्या …यह कैसे हो सकता है मैं ऐसा हरगिज नहीं कर सकता। बहन बोली झूठमूठ के लिए यह सब कल लेते है यार इस घर की भलाई में ही हम सब की भलाई है ….मां भी कहने लगी बेटा अपनी बहन की खुशी के लिए तुझे यह सब करना होगा तभी इसकी शादी होगी वरना जिंदगी भर कुंवारी रहेगी …आखिर में मैं मान गया लेकिन मैंने एक शर्त रखी कि मैं दीदी की मांग में पहले सिन्दूर भरूंगा फिर उसके साथ साउंगा नहीं तो मुझे बहन वाली फिलींग आयेगी और मैं दीदी के साथ वह सब नहीं कर सकूंगा और एक मर्द अपनी बीबी के साथ करता है। यह सुनकर मां सोच मै पड़ गई तभी दीदी बोली मै राजी हूँ ।

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अगले ही दिन पूर्णिमा थी माँ ने दीदी को तैयार किया और मैंने दीदी की मांग में सिन्दूर भर दिया और दीदी भी बिलकुल दुल्हन की तरह तैयार हो गयी थी और सजधज कर मेरा रात को इंतजार करने लगी। रात को 12 बजे मैंने दीदी का घूघट उठाया और उस पर टूट पड़ा उसके अंग अंग पर किस किया और पूरी नंगी कर दिया दीदी शर्मा रही थी लेकिन उसने मना नही किया और वह मेरा साथ दे रही थी .. फिर धीरे से बोली लाईट बंद कर दो मुझे शर्म आ रही है लेकिन मैंने लाइट बंद नही की और बोला अँधेरे मे मुझे डर लगता है मैंने दीदी को नंगी करके अपनी गोद मै बैठा लिया और धीरे धीरे उसके बूब्स चूसने लगा और नीचे से लंड घुसाने लगा ओग आह आह करने लगी और पूरी ररह से मस्ती मै आ गई ….पूरी रात दीदी को चोदता रहा और सुबह भी उसे कपडे नही पहनने दिए नंगी ही रखा …मेरी हसरत पूरी हो गई थी.

यही तो मेरा इरादा था कि दीदी को जी भरकर चोदूं  जो आत मैंने कर लिया फिर तो यह जैसे सिलकिसला बन गया। आगे चलकर दीदी के पीरियड बंद हो गयी और वह पेट से हो गयी। फिर मैंने दीदी के साथ सचमुच की शाादी कर ली और कुछ माह बाद दीदी मेरे सुन्दर से बेटी की मां बन गयी आज भी मैं दीदी के साथ पति पत्नी के रूप में रह रहा हूं और अब दीदी मेरे दूसरे बच्चे की मां बनने वाली है दीदी को आज तक नहीं पता चला कि वो साधु और कोई नहीं मेरे जिगरी दोस्त था और मेरे कहने पर ही घर आया था और उसकी सारी बातें झूठी थी.

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