दोनों दोस्तो ने अपनी प्यास उस कॉल गर्ल पे मिटाई

मेरे और विनोद के बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी। हम दोनों एक दूसरे पर बहुत भरोसा करते थे लेकिन मेरी और विनोद की दोस्ती को ना जाने किसकी नजर लगी। हम दोनों साथ में रहा करते थे और सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा था लेकिन ना जाने ऐसा क्या हुआ कि विनोद को मुझ में कमियां दिखने लगी। एक दिन विनोद ने मुझसे कहा यार मुझे आज कुछ पैसों की जरूरत थी मैंने उसे कहा तो फिर तुम अकाउंटेंट से पैसे ले लो विनोद अकाउंटेंट से पैसे ले लिए गया।

उसे लगने लगा था कि शायद मैं उसे कुछ बताता नहीं हूं लेकिन ऐसा कुछ नहीं था मैंने विनोद से कभी भी कुछ चीज नहीं छुपाई थी परंतु ना जाने उसके दिमाग में ऐसी क्या बात आई की वह अब मुझ पर ही शक करने लगा था। उसे लगने लगा कि मैं उसके साथ कुछ गलत कर रहा हूं विनोद ने उस दिन तो अकाउंटेंट से पैसे ले लिए थे और सब कुछ ठीक था। एक दिन हमें एक काफी बड़ा प्रोजेक्ट मिला उसके लिए मुझे कुछ पैसे कमीशन के तौर पर उस व्यक्ति को देने पड़े जिसने हमें वह काम दिलवाया था।

मैंने जब विनोद को इस बारे में कहा कि मैंने कुछ पैसे उस व्यक्ति को दे दिए हैं तो विनोद मुझे कहने लगा तुमने उसे पैसे नहीं दिए हैं बल्कि तुमने वह पैसे अपने पास रख लिए हैं मैंने विनोद से कहा तुम्हारा दिमाग सही है तुम मुझ पर पैसों के लिए ऐसा इल्जाम लगा रहे हो। विनोद कहने लगा तुमने हमेशा ही मेरे साथ गलत किया है और तुम सिर्फ अपने बारे में सोचते हो मैंने विनोद से कहा तुम बहुत गलत कह रहे हो मैंने ऐसा कभी भी अपने बारे में नहीं सोचा और ना ही मैंने कभी भी तुम्हारा हक मारने की सोची।

हम दोनों ने यह काम एक साथ शुरू किया था मैंने तुम्हें हमेशा अपना भाई समझा और यदि तुम मुझ पर ऐसा इल्जाम लगाओगे तो मुझे नहीं लगता कि हम दोनों को साथ में रहना चाहिए या हम दोनों का ऐसा काम करना चाहिए कि जिससे हम दोनों के बीच झगड़े पैदा हो अच्छा तो यही होगा कि हम दोनों को अलग ही हो जाना चाहिए।

अब हम दोनों के पास कोई चारा नहीं था हम दोनों ने अपने बिजनेस की पार्टनरशिप खत्म कर ली मैंने उसके बदले विनोद को पूरे पैसे दे दिये ताकि उसे कभी यह ना लगे की मैंने उसका हक मारा है। हम दोनों की सहमति से हम दोनों अलग हो चुके थे लेकिन मैं यह जानना चाहता था कि आखिरकार उनके दिमाग में यह बात किसने डाली कि मैं उसका हक मार रहा हूं और वह मुझ पर इतना ज्यादा शक करने लगा था जिस वजह से हम दोनों को अलग होना पड़ा।

हम दोनों की बचपन की दोस्ती भी अब खत्म हो चुकी थी जब उसको मैंने पैसे दिये उसके बाद विनोद ने मुझे कभी कोई फोन नही किया और ना ही उसने मेरे बारे में पूछने की हिम्मत उठाई लेकिन मैं उससे बहुत ज्यादा नाराज था और मैंने भी उससे बात नहीं की परंतु फिर भी मुझे हमेशा ही लगा रहता था कि विनोद के दिमाग में आखिरकार यह बात किसने डाली। मैं कुछ समय बाद विनोद से दोबारा बात करने लगा हम दोनों के बीच वह दोस्ती तो नहीं रह गई थी लेकिन फिर भी जो थोड़े बहुत रिश्ते हम दोनों के बीच बचे थे, बस मैं उतना ही उससे बात किया करता था क्योंकि मैं यह जानना चाहता था कि आखिरकार यह सब किसके दिमाग की उपज है जो की हम दोनों की दोस्ती खतरे में पड़ी और अब हम दोनों अलग हो गए हैं।

एक दिन मुझे विनोद की पत्नी मिली वह मुझे मॉल में मिली मैंने उससे कहा क्या मैं आपसे कुछ देर बात कर सकता हूं विनोद की पत्नी मुझे भैया कहकर बुलाती है और उसका नाम विलोचना है। वह मुझे कहने लगी हां भैया क्यों नहीं हम लोग कहीं बैठ जाते हैं हम लोग साथ में बैठे हुए थे मैंने विलोचना से बात की और उसे समझाया। मैंने उस दिन विलोचना को सारी बात बता दी और विलोचना से कहा विनोद और मेरे बीच में अब पहले जैसे रिश्ते नहीं रह गए हैं हम दोनों अब अलग हो चुके हैं लेकिन मुझे इस बात का बहुत दुख है कि विनोद मुझसे अलग अब अपना काम कर रहा है।

विलोचना ने मुझे उस दिन कहा तो भैया वह अब अपना काम कर रहे हैं तो उन्हें अपना काम करने दीजिए मुझे यह सुनकर बड़ा ही अटपटा सा लगा मुझे विलोचना की बातें कुछ ठीक नहीं लगी और मैंने भी उसके बाद उससे बात नहीं की। मैंने जब विलोचना के बारे में जानने की कोशिश की तो मुझे पता चला विलोचना का करैक्टर कुछ ठीक नहीं है। वह किसी और व्यक्ति से प्यार करती है क्योंकि जब तक मैं बीच में था तब तक तो शायद यह संभव नहीं था लेकिन अब वह विनोद को आसानी से अपने जाल में फंसा सकती थी पर मैंने भी सोच लिया था कि मैं विनोद को इतनी जल्दी बर्बाद नहीं होने दूंगा मैं विनोद को किसी भी हाल में विलोचना से बचा कर ही रहूंगा।

मैं विलोचना की असलियत विनोद को बताना चाहता था लेकिन विनोद तो उस पर बहुत ज्यादा भरोसा करता था और वह मुझ पर यकीन क्यों करता विनोद से भी मेरे रिश्ते कुछ ठीक नहीं थे और यह सारा कुछ खेल विलोचना ने हीं रचा था। मैं उसकी असलियत विनोद को बताना चाहता था तो मैंने उसके लिए एक व्यक्ति को हायर किया जो की जासूसी का काम करते हैं मैंने उन्हें विलोचना के पीछे लगा दिया।

कुछ समय बाद मुझे विलोचना के खिलाफ सारी जानकारी मिल गई जो मैं चाहता था मैं सीधे तौर पर विनोद को विलोचना के बारे में नहीं बता सकता था फिर मैंने उसे विलोचना के बारे में वह जानकारी दे दी अब शायद वह भी विलोचना के बारे में समझ चुका था। एक दिन विनोद ने मुझे फोन किया और कहा मुझे तुमसे मिलना था मैंने विनोद से कहा हां क्यों नहीं हम लोग मिल लेते हैं कितने समय बाद मैं अपने दोस्त से मिल रहा था मुझे उससे मिलना अच्छा लग रहा था।

जब हम दोनों साथ में बैठ कर बात कर रहे थे तो विनोद ने मुझसे विलोचना की बात छेद दी और कहां समीर मैं तुम्हें क्या बताऊं मैं इतना परेशान हूं कि आजकल मेरा मन कहीं लगी नहीं रहा है मैंने विनोद से कहा आखिर ऐसी क्या बात हो गई है। विनोद ने मुझे सारी बात बताई और कहा मैंने विलोचना पर इतना भरोसा किया और उसे मैं इतना ज्यादा प्यार करता था लेकिन उसने मेरे साथ ही धोखेबाजी की। उसने तुम्हारे खिलाफ भी मुझे भड़काने की कोशिश की और उसने तुमसे मुझे दूर जाने के लिए कहा हम दोनों की दोस्ती तो खराब हो ही चुकी है लेकिन उसके बाद जब मुझे विलोचना की असलियत पता चली तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और मैं अपने आपसे बहुत ज्यादा दुखी हूं।

मैंने विनोद से कहा तुम्हें दुखी होने की जरूरत नहीं है तुम पहले भी मेरे दोस्त थे और आज भी मेरे दोस्त हो मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा हूं और जब भी तुम्हे मेरी जरूरत होगी तो सबसे पहले तुम मुझे अपने साथ पाओगे। जब यह बात मैंने विनोद से कहीं तो उसने मुझे कहा यार मैं तुम्हें क्या बताऊं विलोचना किसी और से ही प्यार करती है मैंने उसके साथ शादी कर के बहुत गलत किया मुझे नहीं मालूम था कि वह मेरे साथ इतना बड़ा खेल खेल रही है।

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