दोनों कुतिया चुदने के लिए तैयार थी

हेल्लों मेरे प्यारे दोस्तो आपने मेरी बहुत सारी कहानिया पढ़ी होंगी आज फिर से मैं आप सभी के लिए एक ओर कहानी लेकर हाजिर हूँ उम्मीद है की आप स्बही को मेरी ये कहानी भी बाकी कहानियो की ही तरह उत्तेजित करने मे कामयाब होगी।

ज्यादा डीटेल न देते हुये सीधे कहानी पर आते है, दो बजने मे 5 मिनट पहले ही घंटी बजी। सामने शिवशंकर, उनकी पड़ोसन श्यामली और माधवी खड़ी थीं। माधवी के हाथ मैं एक बैग था जिसमें कुछ कपड़े थे।

हम लोग अन्दर आ गए, माधवी ने मेरा परिचय शिवशंकर और श्यामली से कराया। श्यामली एक सांवले बदन की 28-29 साल की छोटी-छोटी चूचियों वाली पतली दुबली महिला थी।

हमने कोल्ड ड्रिंक और चिप्स का नाश्ता किया।

फ़िर माधवी बोली- आप लोग कपड़े बदल लो !

बैग में से दो लुंगी निकाल कर उसने हमें दे दीं। माधवी ने दोनों के कान में कहा- आप अंदर जाकर सिर्फ लुंगी पहन लो !

हम लोग अंदर अपने सारे कपड़े उतार कर सिर्फ लुंगी पहन कर आ गए।

माधवी बोली- श्यामली जी, आप थोड़ी शरमा रही हैं, आप साड़ी उतार दें और मैं आपको पेटीकोट ब्लाउज देती हूँ ! उन्हें पहन लें नहीं तो आपके कपड़े ख़राब हो जाएँगे, थोड़ी देर पेटीकोट-ब्लाउज में रहेंगी तो शर्म भी छूट जाएगी।

थोड़ा न-नुकुर के बाद श्यामली ने अंदर जाकर कपड़े बदल लिए। अब वह गहरे गले के ब्लाउज और पेटीकोट में थी। पेटीकोट नाभि के नीचे बंधा था, श्यामली का बदन चिकना और जवान था जिसने मेरा लण्ड खड़ा कर दिया था। हम लोग बेडरूम में आ गए थे। इसके बाद शिवशंकर और मुझे माधवी ने एक एक हॉट ड्रिंक दे दी, थोड़ी सी उसने श्यामली को दी थी। हम सब लोगों ने ड्रिंक पीना शुरू कर दी थी।

श्यामली ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहने थी। शिवशंकर श्यामली के ब्लाउज में हाथ डाल कर उसकी छोटी छोटी चूचियाँ 5-5 बार दबा चुका था। श्यामली उसका हाथ बार बार हटा देती थी।

माधवी श्यामली के पास गई और बोली- इतना शरमाओगी तो रात का मज़ा कैसे लोगी? ब्लाउज उतार लो और इन छोटी छोटी संतरियों का जूस शिवशंकर जी को पिलाओ तभी तो रात का पूरा मज़ा मिलेगा। माधवी ने पीछे जाकर उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए और उसका ब्लाउज उतार दिया। श्यामली की नरम नरम चिकनी और छोटी छोटी दूधिया चूचियाँ बाहर निकल आई थीं, मेरा और शिवशंकर दोनों का लण्ड उछालें मार रहा था।

शिवशंकर लुंगी ठीक से नहीं पहने थे, उनका लण्ड खड़ा हुआ था जो 5 इंच के करीब होगा, मेरा भी ८ इंची तना हुआ लण्ड लुंगी से बाहर निकलने को उतावला हो रहा था। शिवशंकर श्यामली से चिपक कर उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा और साथ ही साथ उसके नंगे दूध कस कस कर मसल रहा था। शिवशंकर की लुंगी खुलकर हट गई थी अब उसका नंगा लण्ड हम सब देख सकते थे।

माधवी ने आगे बढ़कर श्यामली का हाथ शिवशंकर के लण्ड पर रख दिया और श्यामली से बोली- अब शर्म छोड़ दे और रंडी बन जा ! मजे कर ! शरमा नहीं ! आज दो-दो लण्डों से खेल सकती है ! ऐसा मौका शरीफ औरतों को रोज रोज नहीं मिलता है, तुझे चूत और गाण्ड का ऐसा मज़ा दिलवाऊँगी कि तू जिन्दगी भर याद रखेगी ! बस अब शराफत छोड़ दे और एक रात के लिए वेश्या बन जा।

शिवशंकर ने श्यामली की एक चूची मुँह में पूरी भर ली और दूसरी का चुचूक दबाने लगा। उसका छोटा सा 5 इंची लौड़ा श्यामली मसल रही थी, मेरा लौड़ा तना हुआ था और मैं उसे लुंगी के ऊपर से सहला रहा था। माधवी ने मेरी लुंगी हटा दी थी मेरा ८ इंच लम्बा लण्ड अब माधवी के हाथों में था। माधवी उसे श्यामली को दिखाती हुई सहला रही थी। श्यामली चोर आँखों से मेरा लण्ड देख रही थी।

माधवी श्यामली को गर्म करने के लिए मेरा लौड़ा चूसने लगी। मैं माधवी का पेटीकोट ऊपर उठाकर उसके नंगे चूतड़ों को मलने लगा। कुछ देर लण्ड चूसने के बाद माधवी उठी उसने अपना पेटीकोट और ब्लाउज उतार दिया अब वो पूरी नंगी थी। उसने आगे बढ़कर पलंग पर बेठी हुई श्यामली के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे हाथों से खींचकर उतार दिया। श्यामली की नंगी चूत मेरी आँखों के सामने थी। मेरा लण्ड उसकी चूत देखकर कड़ा हुए जा रहा था। शिवशंकर उसकी चूचियों से अब भी खेल रहा था। श्यामली की नंगी खुली चूत मेरे लण्ड को चोदने का आमंत्रण दे रही थी।

माधवी ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और धीरे से बोली- अभी पूरी रात बाकी है ! तुम भी जमकर इसकी चोदना लेकिन अभी थोड़ा सब्र करो !

और माधवी ने शिवशंकर को आँख मारते हुए मेरा लौड़ा दुबारा मुँह में घुसा लिया।

शिवशंकर उठा और उसने अपना लौड़ा भी श्यामली के मुँह पर रख दिया। श्यामली शिवशंकर की गोद में लेटकर माधवी की देखादेखी उसे लबालब चूसने लगी। शिवशंकर मेरे पास बैठा हुआ था, हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए। मैंने शिवशंकर से कहा- यार, थोड़ा अपना माल मुझे भी चखा देना।

शिवशंकर बोला- साली की गाण्ड मार लूँ, फिर साथ साथ दोनों कुतियाओं को बजाएँगे।

मैंने कहा- माधवी को अपना लौड़ा चुसवाओ ! बहुत मस्त चूसती है।

शिवशंकर ने लौड़ा श्यामली के मुँह से निकल लिया माधवी ने भी मेरे मुँह से लण्ड निकाल दिया और श्यामली को हटाकर शिवशंकर का लण्ड अपने मुँह में ले लिया। मैंने श्यामली को अपनी तरफ खींच लिया और उसके मुँह पर अपना लण्ड रख दिया, श्यामली बोली- आपका तो बहुत बड़ा है?

मैंने उसके कान में कहा- मुँह में रखो मज़ा भी बड़ा देगा।

श्यामली गर्म हो चुकी थी, उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ठूंस लिया। अब दोनों औरतें शिवशंकर और मेरा लण्ड मस्त होकर चूस रहीं थीं। श्यामली की चूचियाँ भी अब मेरे हाथों में खेल रही थीं।

थोड़ी देर बाद माधवी ने शिवशंकर का लण्ड अपने मुँह से निकाल दिया और श्यामली के मुँह से भी मेरा लण्ड हटा दिया। शिवशंकर श्यामली की चूत पर हाथ फेरते हुए बोला- राजीव, वाकई माधवी जी ने तो आज सच लौड़ा चूसने का असली मज़ा दिया। यह मेरी कुतिया तो चूसना जानती ही नहीं, सिर्फ मुँह आगे पीछे करती है।

माधवी मुस्कुराते हुए बोली- आपकी माल को आज सब सिखा दूंगी। अब इसकी थोड़ी चूत की सेवा कर दीजिये, हरामिन की चुदने को कुलबुला रही है।

शिवशंकर उठा और उसने श्यामली की टांगें चौड़ी करके उसमें अपना लण्ड घुसा दिया। श्यामली की चूत बजने लगी, माधवी ने भी मेरा लण्ड अपनी चूत में डलवा लिया था।

अब पलंग पर दोनों औरतों की चुदाई चल रही थी, कमरा ऊहाह ऊहाह की आवाज़ों से गूँज रहा था। थोड़ी देर बाद दोनों की चूतें गाढ़े वीर्य से नहाई हुई थीं।

माधवी श्यामली से बोली- अपने यार का लौड़ा चाट ले ! बहुत स्वादिष्ट लगता है वीर्य चोदने के बाद !

श्यामली को दिखाते हुए माधवी ने मेरे सुपाड़े पर अपनी जीभ फिरा दी। श्यामली ने भी शिवशंकर का लण्ड थोड़ी देर चाटा। इसके बाद 5 मिनट तक हम चारों बिस्तर पर पस्त हो गए।

थोड़ी देर के लिए मैं और माधवी बाहर आ गए थे। दस मिनट बाद माधवी ने दो हॉट ड्रिंक बना ली एक उसने शिवशंकर को दी और एक श्यामली को। शिवशंकर का लण्ड ठंडा हो रहा था। मैंने लुंगी बाँध ली थी। माधवी बोली- यह लीजिये शिवशंकर जी, आज आपकी पीछे से सवारी की इच्छा भी पूरी हो जाएगी।

शिवशंकर ने पूरी ड्रिंक ली। थोड़ी सी माधवी ने श्यामली को भी पिलाई। इसके बाद एक पतली मोमबत्ती पर माधवी ने कंडोम चढ़ाया और शिवशंकर से बोली- शिवशंकर जी थोडा घोड़े को श्यामली जी के मुँह में डालिए। इसके बाद माधवी ने एक पतली ट्यूब श्यामली की गाण्ड में घुसा दी, श्यामली ऊई करती हुई बोली- निकालो दर्द हो रहा है।

माधवी ने ट्यूब पिचका कर पूरी निकाल ली और बोली- दर्द तो जब शिवशंकर तेरी मारेंगे तब पता चलेगा ! और राजीव जी ने घुसा दिया तो दो दिन तक ठीक से नहीं चल पाएगी तू।

माधवी के इशारे पर शिवशंकर ने दो उँगलियाँ श्यामली की गाण्ड में घुसा दीं।

माधवी बोली- पूरी अंदर तक गाण्ड में घुसा कर अच्छी मालिश कर दीजिये मेमसाहब की ! नहीं तो गाण्ड नहीं मार पायेंगे।

शिवशंकर की उँगलियाँ श्यामली की गाण्ड में आगे-पीछे होने लगीं। दो मिनट तक शिवशंकर ने उँगलियाँ आगे-पीछे की, उसके बाद माधवी ने मोमबत्ती शिवशंकर के हाथ में दे दी और बोली- अब मोमबत्ती से इसकी गाण्ड चोदिये।

2-3 मिनट तक श्यामली लेटी हुई चुपचाप लण्ड चूसती रही और शिवशंकर मोमबत्ती उसकी गाण्ड में आगे पीछे करता रहा। 5 मिनट के बाद शिवशंकर ने लण्ड निकाल लिया अब श्यामली की गाण्ड लण्ड से गुदनी थी।

माधवी ने पलंग पर एक मोटा गद्दा बिछा दिया और श्यामली से बोली- अपनी गाण्ड एक बार मरवा ली तो चूत का मज़ा भूल जाएगी ! प्यार से मरवाना ! शुरू में दर्द होगा, बाद में तो मज़ा आना है। शिवशंकर जी का लण्ड तो छोटा है, झेल लेगी, जिनकी गाण्ड बड़े लण्ड से फटती है वो तो कई बार बेहोश हो जाती हैं। चल अब जरा घोड़ी बन !

और श्यामली के बाल सहलाते हुए माधवी ने उसे घोड़ी बना दिया।

श्यामली घोड़ी बन गई थी और अपनी कोहनी बिस्तर पर लगा ली थी। शिवशंकर ने उसकी कमर पकड़ के लण्ड उसकी गाण्ड में छुला दिया। माधवी ने अपने हाथ से शिवशंकर का एक इंच लण्ड उसकी गाण्ड में घुसवा दिया।

माधवी मुस्कुराते हुआ बोली- शिवशंकर जी, बचा हुआ लण्ड प्यार से इसकी गाण्ड में डालना और श्यामली जी की प्यार से मारिएगा।

शिवशंकर इसे मजाक समझा, उसने गाण्ड को चूत समझते हुआ एक तेज झटका मार दिया। लण्ड श्यामली की गाण्ड में तेजी से घुसा तो श्यामली बुरी तरह से चीख उठी और उसने तेज झटका गाण्ड को दिया, इस बीच लण्ड गाण्ड से निकल गया।

श्यामली की आँखों में पानी आ गया था।

माधवी शिवशंकर पर चिल्लाती हुई बोली- आप से मैंने कहा था न कि प्यार से मारिएगा।

श्यामली बोली- न बाबा न ! मुझे गाण्ड नहीं मरवानी !

माधवी बोली- श्यामली जी, आप थोडा आराम करें ! मैं शिवशंकर जी को समझाती हूँ ! अबकी वो आपकी प्यार से मारेंगे। एक बार आपने गाण्ड मरवा ली तो बार बार मरवाना चाहेंगी। शिवशंकर जी, आप श्यामली जी को सॉरी बोलिए और मेरे साथ आइये, मैं आपको कुछ समझाती हूँ।शिवशंकर ने श्यामली से सॉरी बोली और शिवशंकर को बाहर ले आई, मैं भी बाहर आ गया।

माधवी शिवशंकर से बोली- शिवशंकर जी, श्यामली गाण्ड मरवाने को तैयार है। आप उसकी गाण्ड प्यार से मारिएगा। अकेले आप गाण्ड नहीं मार पाएंगे। श्यामली आपकी बीबी तो है नहीं, इसलिए अपने माल का मज़ा राजीव जी को देंगे तभी आप गाण्ड मारने में सफल हो पाएंगे और एक बार आपने औरतों की गाण्ड मारना सीख ली तो आप कई औरतों को खुश कर सकते हैं।

शिवशंकर माधवी से धीरेसे बोला- कुतिया को कोई भी चोद दे, मुझे कोई दिक्कत नहीं ! लेकिन मुझे आज गाण्ड मारना सीखना है क्योंकि मैंने अपने दो दोस्तों की बीवियों को बताया हुआ है कि मैं गाण्ड मारने का खिलाड़ी हूँ और उनमें से एक की दो दिन बाद मुझे गाण्ड मारनी है, दूसरी अगले महीने जब मेरा दोस्त सिंगापुर जाएगा, तब मरवाएगी। अगर मैं उनकी गाण्ड नहीं मार पाया तो मैं किसी को मुँह नहीं दिखा पाऊँगा।

माधवी बोली- मैं आपको गाण्ड का खिलाड़ी बना कर भेजूँगी। आप जब श्यामली की गाण्ड मारें तब राजीव जी उसे लौड़ा चुसवाएंगे।

माधवी ने हमें कुछ बातें सिखाईं, अब रास्ता साफ़ था, शिवशंकर के माल श्यामली को अब मैं बजा सकता था।

माधवी शिवशंकर से बोली- शिवशंकर जी, श्यामली गाण्ड मरवाने को तैयार है। आप उसकी गाण्ड प्यार से मारिएगा। अकेले आप गाण्ड नहीं मार पाएंगे। श्यामली आपकी बीवी तो है नहीं, इसलिए अपने माल का मज़ा राजीव जी को देंगे तभी आप गाण्ड मारने में सफल हो पाएंगे और एक बार आपने औरतों की गाण्ड मारना सीख ली तो आप कई औरतों को खुश कर सकते हैं।

शिवशंकर माधवी से धीरे से बोला- कुतिया को कोई भी चोद दे, मुझे कोई दिक्कत नहीं ! लेकिन मुझे आज गाण्ड मारना सीखना है क्योंकि मैंने अपने दो दोस्तों की बीवियों को बताया हुआ है कि मैं गाण्ड मारने का खिलाड़ी हूँ और उनमें से एक की दो दिन बाद मुझे गाण्ड मारनी है, दूसरी अगले महीने जब मेरा दोस्त सिंगापुर जाएगा, तब मरवाएगी। अगर मैं उनकी गाण्ड नहीं मार पाया तो मैं किसी को मुँह नहीं दिखा पाऊँगा।

माधवी बोली- मैं आपको गाण्ड का खिलाड़ी बना कर भेजूँगी। आप जब श्यामली की गाण्ड मारें तब राजीव जी उसे लौड़ा चुसवाएंगे।

माधवी ने हमें कुछ बातें सिखाईं, अब रास्ता साफ़ था, शिवशंकर के माल श्यामली को अब मैं बजा सकता था।

हम सब लोग कमरे में आ गए।

माधवी श्यामली से बोली- आप शिवशंकर का लण्ड धीरे धीरे चूसें, साथ ही साथ राजीव आपकी चूत को चोदेगा। दो-दो लण्डों का मज़ा जब आप लेंगी तो गाण्ड मरवाने में दिक्कत नहीं आएगी।

शिवशंकर ने अपना लण्ड श्यामली के मुँह में डाल दिया। मैंने श्यामली की चूत अपनी 3-4 उँगलियों से सहलानी शुरू कर दी, उसकी चूत के दाने पर मेरी रगड़ तेज होती जा रही थी। हम तीनों सेक्स का आनन्द ले रहे थे।

एक मिनट के बाद श्यामली लण्ड मुँह से बाहर निकालते हुए बोली- चोदिये ना ! बहुत खुजली हो रही है।

माधवी इसी का इंतजार कर रही थी, बोली- राजीव जी, अब इसकी चूत फाड़ दीजिए।

मैंने बिना देर किये श्यामली की गीली चूत में अपना लण्ड घुसा दिया। माधवी के कहे अनुसार चूचियाँ दबाते हुए तेज धक्कों के साथ मैंने श्यामली को चोदना शुरू कर दिया था। शिवशंकर ने माधवी के इशारे पर अपना लण्ड निकाल लिया था।

श्यामली की चूत में आज पहली बार आठ इंची मोटा लण्ड घुसा था, वो ऊई आह ! मर गई ! फट गई ! की आवाज़ करती हुई मुझसे चुद रही थी।

माधवी शिवशंकर से बोली- अब इसकी चुदाई के बाद आप इसकी गाण्ड में अपना लण्ड पेलना। मोटे लण्ड से चुद रही है अब इसे गाण्ड में दर्द भी कम लगेगा।

श्यामली को कुछ देर चोदने के बाद मैंने माधवी के इशारे पर लण्ड बाहर निकाल लिया माधवी ने मेरा लण्ड श्यामली की गाण्ड पर छुला दिया और बोली- राजीव जी थोडा सा इसकी गाण्ड में ठोक कर अपने वीर्य से इसकी गाण्ड भर दो !

मैंने श्यामली की गाण्ड में लण्ड घुसा दिया। मैं प्यार से उसकी गाण्ड ठोंक रहा था श्यामली दर्द से चिल्लाने लगी थी बड़ी मुश्किल से एक इंच मेरा मोटा लण्ड घुसा होगा। उसके बाद मेरे 2-3 छोटे धक्कों के बाद श्यामली की गाण्ड वीर्य से नहा गई। इसके बाद एक गीले कपड़े से मैंने अपना लण्ड पौंछा और माधवी के पास बैठ गया। श्यामली बिस्तर पर उल्टी लेट गई थी। उसके चेहरे से चुदाई की ख़ुशी दिख रही थी। उसकी गाण्ड में अंदर तक मेरा वीर्ये घुसा हुआ था।

पाँच मिनट के आराम के बाद माधवी ने श्यामली के बालों पर हाथ फिराया और बोली- चलो उठो और अब अपनी गाण्ड अपने यार से फटवाओ ! आज रात मज़े की रात है !

श्यामली को कोहनी के बल माधवी ने लिटाया और उसके मुँह में पहले मेरा लण्ड डलवा दिया और श्यामली को धीरे धीरे लण्ड के आगे के हिस्से को चूसने को कहा। कुछ देर बाद माधवी के इशारे पर मेरा लण्ड अंदर तक उसके मुँह में चलने लगा। शिवशंकर ने श्यामली की गाण्ड पर लण्ड छुला दिया था। २ इंच के करीब श्यामली की गाण्ड पहले ही फाड़ दी गई थी और मेरे वीर्ये से श्यामली की गाण्ड चिकनी भी हो रही थी इसलिए शिवशंकर का पाँच इंची लण्ड आधे से ज्यादा घुस गया था। मैंने थोड़ी देर के लिए लण्ड निकाल लिया और उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसे कस कर पकड़ लिया शिवशंकर धीरे धीरे श्यामली की गाण्ड ठोक रहा था, श्यामली चिल्ला रही थी, उसकी आँखों से पानी गिर रहा था, मेरी पकड़ मजबूत थी इसलिए वो लण्ड निकाल नहीं पा रही थी।

माधवी चिल्ला रही थी- साली रंडी ! अंदर लेने की कोशिश कर ! बाहर क्यों निकाल रही है?

माधवी ने उसके बाल कस कर खींचना शुरू कर दिए और शिवशंकर पर चिल्लाते हुए बोली- थोड़ा सा बच रहा है, जल्दी घुसा दे।

शिवशंकर पूरी ताकत से लण्ड अंदर पेलने लगा थोड़ी देर में शिवशंकर का पाँच इंची लण्ड पूरा गाण्ड में घुसा हुआ था। माधवी ने श्यामली के बाल अब सहलाने शुरू कर दिए और बोली- अब तेरी गाण्ड में पूरा घुसा हुआ है, आराम से गाण्ड मरवा और मज़े कर ! शुरू में सबके दर्द होता है। राजीव जी का लण्ड तेरे मुँह के आगे है मन करे तो चूस लियो, दुगना मज़ा आएगा।

शिवशंकर ने धीरे धीरे उसकी गाण्ड गोदनी शुरू कर दी थी। श्यामली हूँ हूँ की सिसकारी भर रही थी। थोड़ी देर में शिवशंकर ने गाण्ड बजाना शुरू कर दिया अब श्यामली की गाण्ड अच्छी तरह बज रही थी, श्यामली की चिल्लाने की आवाजें गूँज रही थी। श्यामली मस्ती से गाण्ड मरवा रही थी और चिल्ला रही थी। मेरा लण्ड श्यामली के मुँह के आगे उछालें मार रहा था।

माधवी ने मुझे इशारा किया और बोली- अब साली को मसल दो।

मैंने आगे बढ़कर लण्ड मुँह में डाल दिया और उसकी चूचियों को कस कस कर हाथों से दबाने लगा। अब श्यामली की गाण्ड गुद रही थी और मुँह में मेरा लण्ड चल रहा था। चूचियों की मालिश और चुचूक नोचते हुए मैं उसको अपना लण्ड चुसवा रहा था, श्यामली को बहुत मज़ा आ रहा था।

मैंने थोड़ी देर के लिए लण्ड बाहर निकाल लिया और उसके मुँह के आगे खड़ा कर दिया तो श्यामली बोली- ऊह ऊहं ! मत निकालो !

और उसने आगे बढ़कर फिर मुँह में लण्ड डाल लिया। माधवी दूर से श्यामली की गुदती गाण्ड और लण्ड चुसाई का मज़ा ले रही थी।

माधवी बोली- राजीव जी, इसने लण्ड चूस तो बहुत लिया अब इसके मुँह में प्यार से लण्ड ठोक दो, बेचारी चूस चूस कर थक थक गई होगी।

मैंने श्यामली के बाल पकड़े और धीरे धीरे उसके मुँह में लण्ड पेलना शुरू कर दिया। इधर शिवशंकर प्यार से धीरे धीरे उसकी गाण्ड ठोके जा रहा था। बीच में शिवशंकर बोला- माधवी जी मज़ा आ गया। श्यामली की गाण्ड और मुँह दोनों में चुदाई चल रही थी, माधवी ने मेरी गाण्ड में ऊँगली की, मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया।

श्यामली पगला रही थी, बोली- और करो, मत निकालो ! ऊई ऊई मारो ! बड़ा मज़ा आ रहा है।

माधवी ने शिवशंकर से कहा- अब साली की फाड़ दो ! पूरी गरम है !

माधवी ने टीवी चला दिया था, शिवशंकर ने माधवी जी के इशारे पर लण्ड पूरी ताकत से श्यामली की गाण्ड में ठोंक दिया श्यामली पागलों की तरह चिल्ला रही थी- ऊह, आह ! मर गई ! फट गई ! निकालो निकालो !

लेकिन गाण्ड श्यामली की शिवशंकर ने गोदनी जारी रखी। श्यामली पलंग पर फिसल गई शिवशंकर उसकी कमर कस के पकड़ा हुआ था उसने श्यामली की गाण्ड मारने की स्पीड तेज कर दी। श्यामली चिल्लाए जा रही थी- छोड़ो मर गई ! अब नहीं ! फट गई ! मादरचोद ! निकाल कुत्ते ! मर जाऊँगी।

माधवी बोली- अब कुतिया की गुदी है !

शिवशंकर की गाण्ड पर चोट जारी थीं, कुछ देर बाद माधवी ने शिवशंकर से कहा- शिवशंकर जी। प्यार से !

अब शिवशंकर धीरे हो गया था, श्यामली के बाल सहलाते हुआ माधवी ने कहा- श्यामली, तुम एक बार फिर राजीव जी का लण्ड चूसो !

मैंने श्यामली के मुँह में लण्ड घुसा दिया। उधर शिवशंकर श्यामली की गाण्ड चोद रहा था और श्यामली मेरा लौड़ा लोलीपोप की तरह चूस रही थी। दो मिनट बाद शिवशंकर ने अपने वीर्य की पिचकारी श्यामली की गाण्ड में छोड़ दी और अपना लण्ड कुछ ही देर बाद बाहर निकाल लिया। श्यामली की गाण्ड लण्ड से फट चुकी थी। यह सब देखकर मैं पूरा उत्तेजित था, मैंने भी अपनी पिचकारी श्यामली के मुँह में छोड़ दी, श्यामली का पूरा मुँह वीर्य से भर गया, उसने मेरा लण्ड रस पलंग पर उलट दिया और सीधी होकर पलंग पर बेसुध होकर लेट गई। शिवशंकर भी बेसुध हो रहा था, मेरा लण्ड खाली हो गया था लेकिन मुझे लग रहा था कि मुझे श्यामली की गाण्ड और चोदनी चाहिए।

मेरा लण्ड चुदी हुई श्यामली को देखकर दुबारा खड़ा हो रहा था।

माधवी बोली- श्यामली और शिवशंकर, आप आराम करिए मैं और राजीव आपके लिए अनार का जूस लाते हैं।

मैं और माधवी जूस लेने बाहर आ गए।

माधवी और मैं नंगे थे। माधवी ने रसोई में आते ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसते हुए बोली- पहले तुम मुझे चोद दो ! मेरी चूत चुदाई देख देख कर बहुत खुजला रही है।

किचन के पत्थर पर टाँगे चौड़ी करके माधवी इस तरह झुक गई कि उसकी चूत में आराम से घुसाया जा सकता था। मेरी चोदने की इच्छा तो श्यामली की थी पर माधवी को मैं नाराज नहीं कर सकता था। मैंने अपना आठ इंची लण्ड माधवी की चूत में डाल दिया और माधवी को चोदने लगा। चुदते चुदते माधवी अनार के दाने निकालने लगी और जूस बनाने लगी। माधवी को पता था कि कैसे चुदा जाता है। किसी भी मर्द को इस तरह चुदाई की गुरु औरत चोदने में दुगना मज़ा देती है। मुझे भी उसे चोदने में मस्त मज़ा आ रहा था। जूस तयार होने के पाँच मिनट बाद मेरा लण्ड उसकी चूत में खाली हो गया।

माधवी और मैं चार ग्लास जूस बना कर कमरे में आ गए। हम सब नंगे थे, शर्म सबकी छूट गई थी, सबने साथ साथ जूस पिया।

श्यामली ने उठकर माधवी को बाँहों में भरा और बोली- माधवी, सच बहुत मज़ा आया, आप नहीं होतीं तो यह शिवशंकर कुत्ता गाण्ड का मज़ा न खुद लेता और न मुझे दे पाता। सच आज जन्नत का मज़ा आया जब शिवशंकर ने मेरी गाण्ड में शताब्दी दौड़ाई तो मुझे ऐसा लगा कि गाण्ड मरवाते मरवाते मर ही न जाऊँ ! सच, बता नहीं सकती कि कितना मज़ा आ रहा था। माधवी, सच मेरी प्यारी माधवी, आज तुम न होतीं तो इतना मज़ा नहीं आता।

माधवी श्यामली की चूचियाँ सहलाती हुई बोली- अरे रानी, सेक्स में बहुत मज़ा है ! अभी तो तुमने दो लण्डों का स्वाद थोड़ा सा ही चखा है। जब साथ साथ चूत और गाण्ड में घुसेंगे, तब देखना कितना मज़ा आएगा। अभी तो और मज़े करवाऊँगी बस तू रण्डी बन कर मज़े ले।

शिवशंकर बोला- माधवी जी, मेरा लण्ड तो इसकी गाण्ड में घुस कर चोट खा रहा था, देखिये पूरा लाल हो रहा है।

माधवी ने एक पप्पी शिवशंकर के सुपारे पर ली और बोली- राजा, मज़े भी तो खूब लिए हैं। थोड़ी चोट लग भी गई है तो क्या हुआ। अभी तो इसे रात भर बैटिंग करनी है। श्यामली जी भी जब चलेंगी तो इनकी गाण्ड दुखेगी।

श्यामली के चुचक नोचते हुए माधवी बोली- राजीव जी का लण्ड गाण्ड में और डलवा लेना फिर कभी गाण्ड फटवाने में दर्द नहीं होगा।

श्यामली बोली- नहीं बाबा नहीं ! राजीव का लण्ड अगर घुस गया तो मैं तो मर जाऊँगी।

माधवी हँसते हुए बोली- लण्ड से औरतें मरने लगतीं तो दुनिया कब की खत्म हो गई होती, चलो अब गर्म पानी से नहा लो। रात में दोनों यहीं रुकना, पति का फोन आएगा तो बाथरूम में जाकर सुन लेना।

दोनों रात को रुकने के लिए राज़ी हो गए। श्यामली नहाने चली गई।

नहा कर जब श्यामली बाहर आई तो बोली- माधवी जी, सच मेरी गाण्ड तो बहुत दुःख रही है, हाय, मुझे तो एसा लग रहा है 2-3 दिन मैं ठीक से नहीं चल पाऊँगी।

माधवी मुस्कुराते हुआ बोली- श्यामली जी, आप सही कह रही हैं, यह दर्द 5-6 दिन में सही होगा। और कोई भी औरत जो गाण्ड मरवाती होगी दूर से आपकी चाल से समझ जाएगी कि आपकी गाण्ड मारी गई है। इस दर्द को थोड़ा कम करने के लिए मेरी समझ से आप अपनी चूत किसी लबे और मोटे लण्ड से मरवाएँ लेकिन प्यार से। अगर आप बुरा न मानें तो रात को राजीव जी के साथ सोयें वो प्यार से रात में आपकी सिर्फ चूत मारेंगे और सुबह आपको दर्द कम लगेगा।

इस बीच श्यामली का मोबाइल बजा।

श्यामली बोली- मेरे पति का है !

मैंने लण्ड बाहर खींच लिया तो श्यामली बोली- घुसाए रखो ! निकालते क्यों हो? तुमसे चुदते हुए पति से बतियाने का मज़ा ही अलग है।

मैंने उसकी चूत में लण्ड दुबारा घुसा दिया, धीरे धीरे मेरा लौड़ा उसकी चूत चोद रहा था। श्यामली ने फ़ोन उठा लिया।

श्यामली फ़ोन पर बोली- डार्लिंग कैसे हो?

श्यामली ने स्पीकर फ़ोन ऑन कर दिया था। उधर से एक पप्पी की आवाज़ आई और उसके पति ने कहा- रानी, मुझे तो तुम्हारे बिना नींद नहीं आ रही ! लौड़ा हाथ में पकड़े हुए हूँ। तुम क्या कर रही हो? श्यामली बोली- चुदवा रही हूँ ! चूत में लण्ड डलवा रखा है ! मज़े कर रही हूँ ! तुम्हारे से दुगना बड़ा है हरामी का ! पूरी चूत फाड़ रखी है कुत्ते ने।

उसके पति ने पूछा- कहाँ से पकड़ लिया?

श्यामली बोली- सड़क पर अँधेरे में खड़ी हो गई थी ब्लाउज के बटन खोल कर ! साले ने 5000 में ख़रीदा है।

“कुतिया, तुझे एड्स हो जायेगा।”

श्यामली बोली- अच्छी बात है। मर जाऊँगी, चूत की खाज़ तो मिटेगी साले ! लेकिन तुझे भी साथ लेकर मरूँगी।

उनकी बातें सुन कर मेरा लण्ड उसकी चूत थोड़ी तेजी से चोदने लगा।

श्यामली बोली- रण्डी बना दिया है तूने ! पहले तेरी मूंगफली से ही खुश हो लेती थी। अब तो तू महीने में बीस-बीस दिन बाहर रहने लगा है, कितने दिन तक बैंगन डालूँगी चूत में?

उसका पति बोला- रानी, इस बार माफ़ कर दो, अगला टूर दो महीने बाद है।

श्यामली बोली- ओह ! ओह ! यानी अब दो महीने तक तुम्हारी बीवी बनकर रहना पड़ेगा? हैं? लेकिन अब तो मुझे मोटे मोटे लण्डों से चुदने की आदत पड़ गई है। अच्छा, अब सो जाओ ! मुझे चुदवाने दो बहुत मज़ा आ रहा है !

श्यामली ने फ़ोन काट दिया। मैंने उसकी चूची दबाते हुए तेज धक्कों से उसे चोदना शुरू कर दिया।

श्यामली बोली- साला अभी एक बार और फ़ोन करेगा।

दो मिनट बाद ही घंटी फिर आ गई। मैंने श्यामली को पूरा मसल रखा था, उसने फ़ोन उठाया और बोली- भोंसड़ी के ! नींद नहीं आ रही तुझे?

उसका पति बोला- डार्लिंग, तुम्हारी बातें सुनकर लण्ड चूत में डालने का बहुत मन कर रहा है।

श्यामली बोली- डाल दे हरामी !

मेरा लण्ड उसकी चूत में दौड़ ही रहा था, श्यामली अब चुदाई की आह ऊह आह भरने लगी और अपने पति से बोली- मज़ा आ रहा है ! वाह, क्या चोदा है तूने ! चल हरामी अब सो जा।

उसका आदमी बोला- रानी, तुम्हारी पप्पी के बिना कहाँ नींद आएगी?

श्यामली मुस्कुराते हुए बोली- कहाँ चाहिये?

वो बोला- मुझे नहीं, तुम्हारे शेर को चाहिए !

श्यामली ने एक पुच की आवाज़ की और बोली- लो मिल गई, अब सो जाओ।

और उसने फ़ोन काट दिया और अपनी गर्दन घुमा कर मेरे होंठों में अपने होंठ डाल दिए। इसके बाद मैंने श्यामली को उल्टा किया और उसकी गाण्ड से लण्ड छुलाते हुए लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया और जोर के धक्कों के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी। श्यामली पूरे मज़े लेते हुए अब लण्ड से चुद रही थी। मैंने पीछे से श्यामली की चुदाई करीब आधे घंटे लण्ड तेज और धीरे करते हुए की और उसकी चूत अपने वीर्य से भर दी. श्यामली इस बीच मस्ती भरी आहें भरती रही, इसके बाद दो बजे रात को हम सो गए।

सुबह सात बजे श्यामली उठी और मेरे लण्ड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत से लगाने लगी, बोली- सच राजीव ! तुमने तो कल रात मुझे मस्त कर दिया ! एक बार और चोद दो, पता नहीं दुबारा कब चुदने को मिले?

और उसने मुझसे चिपक कर मेरा लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया।

तभी माधवी कमरे में आ गई और मुस्कुरा कर बोली- अरे ! उठते ही शुरू हो गई? सच राजीव का लण्ड है ही इतना सुन्दर ! चोदो कुतिया को ! कल इसके शिवशंकर ने रात में दो बार मेरी गाण्ड और दो ही बार मेरी चूत फाड़ी ! तुम इसे चोदो, मैं शिवशंकर को बुला कर लाती हूँ और दिखाती हूँ कि चुदाई कैसे होती है। इसे अपनी गोद में बैठा कर चोदो ताकि यह सामने शीशे में अपनी चूत में लण्ड घुसता हुआ देख सके और मस्तियाए।

मुझे माधवी की बात सही लगी, मैंने पलंग से टेक लगा ली और श्यामली को अपने लण्ड पर बैठने को कहा।श्यामली गर्मा रही थी, वो मेरे लण्ड पर चढ़ गई, थोड़ा नींद में होने के कारण उसकी चूत में लण्ड घुस नहीं पा रहा था, माधवी ने उसकी चूत चौड़ी की और अपने हाथ से पकड़ कर मेरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। अब श्यामली का मुँह पलंग के सामने लगे शीशे की तरफ था अपनी चूत में घुसा लण्ड वो आराम से देख सकती थी।

श्यामली को मैंने अपने लण्ड पर उछालना शुरू कर दिया और उसकी चूचियाँ कस कस कर मसलने लगा। अपनी चुदती हुई चूत वो आराम से शीशे में देख रही थी, सामने शीशे में अपने को चुदते हुए देखकर श्यामली शर्माने का नाटक करने लगी।

मैंने उसके दोनों हाथ अपने गले के पीछे ले जाकर बांध लिए और बोला- कुतिया, रंडी ! जरा अपनी गेंदें तो देख धक्के लगने से ऐसे उछल रहीं हैं जैसे कि निकल कर इस शीशे पर ही गिर जाएँगी।

श्यामली बोली- जरा इनकी घुन्डियाँ मसल दो, आज सारे मज़े ले लेने दो ! क्या हसीं सुबह है।

मैंने उसकी दोनों घुण्डियों को उँगलियों से उमेठना शुरू कर दिया और श्यामली बेशर्म होकर मेरे लौड़े पर उछलने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी।

माधवी शिवशंकर के साथ अंदर आ गई थी और एक तरफ खड़े होकर यह सब देख रही थी, दोनों पूरे नंगे थे शिवशंकर का लौड़ा तन रहा था।

माधवी ने ताली बजाते हुए कहा- वाह राजीव जी, मज़ा आ गया ! क्या शिवशंकर जी के माल को चोदा है।

अब मैंने रखा को पलंग पर झुका दिया और घोड़ी बनी श्यामली की चूत में अपना लण्ड दौड़ाया।

श्यामली शिवशंकर से बोली- शिवशंकर, मेरे मुँह में लौड़ा डाल दो, सच में दो लण्डों से मज़ा दुगना हो जायेगा।

शिवशंकर ने आगे बढ़कर अपना लण्ड उसके मुँह में ठोंक दिया। अब श्यामली की चूत और मुँह दोनों में लण्ड चल रहे थे, माधवी देख देख कर मुस्कुरा रही थी।

माधवी बोली- शिवशंकर जी, आपको मैंने गाण्ड मारने का मास्टर बना दिया है, एक बार हमें हमारी श्यामली कुतिया की दुबारा गाण्ड मारकर दिखाओ, सच अपने शागिर्दों को दूसरे की बीवियों की मारते देखकर मुझे बहुत सुख मिलता है।

हम लोगों ने अपने लण्ड बाहर निकाल लिए। श्यामली मुस्कुराते हुए पलंग पर गाण्ड ऊंची करके लेट गई। शिवशंकर ने श्यामली की गाण्ड में ऊँगली को गोल करके घुसा दिया और उसकी गाण्ड के छेद को चौड़ा कर के अपना लण्ड छुला दिया और उसमें अपना लण्ड घुसा दिया।

श्यामली ऊई ऊह ओह करके चिल्ला उठी, लेकिन यह माधवी के सिखाने का असर था कि लण्ड गाण्ड में दो मिनट के अंदर पूरा घुस चुका था और शिवशंकर एक अच्छे खिलाड़ी की तरह श्यामली की गाण्ड चोदने लगा।

श्यामली की मज़े से भरी सिसकारियाँ निकल रही थीं, बीच बीच में उसके चूतड़ों पर कस कर हाथ भी मार रहा था।

कुछ देर बाद शिवशंकर श्यामली की गाण्ड में लण्ड घुसाए बिस्तर पर गिर गया, उसने करवट ली तो श्यामली उसके बदन के ऊपर थी, लण्ड श्यामली की गाण्ड में घुसा हुआ था, उसने श्यामली की टांगें चौड़ी कर दी थीं। सामने श्यामली की फटी चूत खुली हुई थी, उसके नीचे गाण्ड में शिवशंकर का लण्ड घुसा हुआ था और शिवशंकर उसकी गाण्ड मार रहा था साथ ही साथ श्यामली के चुचूक शिवशंकर नोचे जा रहा था।

माधवी बोली- श्यामली जी, आपको आज राजीव और शिवशंकर के बीच सेंडविच बनवाती हूँ। राजीव, आप देख क्या रहे हो? इसकी चूत मारो, देखो, आपका इंतजार कर रही है।

मेरा लण्ड तना हुआ था, मैंने देर किये बिना अपना लण्ड श्यामली की चूत में पेल दिया। अब श्यामली के दोनों छेदों में लण्ड घुसे थे, शिवशंकर और मैं दोनों श्यामली को एक साथ चूत और गाण्ड में चोद रहे थे।

श्यामली दर्द से चिल्ला रही थी, माधवी सिगरेट पीते हुए बोल रही थी- श्यामली, ऐसा मज़ा घरेलू औरतों को बार बार नहीं मिलता ! चुदने के मज़े ले ले ! रंडी बनी बहुत सुन्दर लग रही है।

हम दोनों ने दस मिनट साथ साथ श्यामली को चोदा फिर उसकी गाण्ड और चूत एक साथ वीर्य से भर दी।

हम सब लोग अब थके हुए बिस्तर पर लेट गए, माधवी चाय बनाने चली गई। चाय पीने के बाद श्यामली माधवी से चिपक गई और बोली- माधवी, आपने मस्त कर दिया ! सच बहुत मज़ा आया। मैं आपको हमेशा याद रखूँगी।

माधवी मुस्कुराते हुए बोली- राजीव जी बहुत अच्छे आदमी हैं, इनका फ़ोन नंबर ले लो, कभी कभी इनसे भी चुदवाती रहना।

श्यामली बोली- इनसे तो मुझे हर महीने चुदवाना है, इनके लण्ड ने जो मुझे चूत चुदाई का मज़ा दिया है वो तो मैं भूल ही नहीं सकती। लेकिन यह सब उमा और आपके कारण हुआ है। आई लव यू माधवी !

माधवी बोली- चलो आप लोग नहा धोकर तैयार हो जाओ और अपने घर जाओ ! अगले रविवार को, श्यामली, मन हो तो मेरी खोली पर आना, वहाँ से होटल अमर ले चलूँगी, तीन-तीन अमीरजादों के लण्डों से मज़ा लेना एक साथ ! ऊपर से दस हजार रुपए और मिलेंगे।

इसके बाद शिवशंकर और श्यामली तैयार होकर एक बजे के करीब अपने घर के लिए निकल गए।

माधवी उनके जाने के बाद मेरे पास आई और आँख मारते हुए मुस्कुरा कर बोली- राजीव जी, मज़ा आ गया?

मैंने कहा- सच माधवी ! आज जितना मज़ा कभी नहीं आया।

माधवी हँसते हुए बोली- अब कल के मैच के लिए तैयार हो जाइये ! कल आपको रुचि जी को बजाना है, रुचि आपकी सहेली है, प्यार से उनकी लेना ! उन्होंने आज तक अपने पति के अलावा किसी और से नहीं चुदवाई है।

मैंने पूछा- कल कितने बजे शिवशंकर जी के यहाँ जाना है?

माधवी मुस्कुराते हुए बोली- आप भी कितने सीधे हैं? अगर शिवशंकर जी के यहाँ रुचि गई तो शिवशंकर जी भी तो रुचि की चोद देंगे ! आपने भी तो उनके माल की खूब मारी है। कल आपको मैं उमा की खोली में ले चलूँगी, वहाँ रुचि आपको मिलेगी, वहीं उसकी चूत आप मारना और लण्ड चुसवाना। उमा 50 साल की है और वो दस साल रंडी रह चुकी है, वो आपको और रुचि को चुदाई के बढ़िया गुर सिखाएगी और रुचि को लण्ड का शौकीन बना देगी।

इसके बाद माधवी मुझे एक पप्पी देकर अपने घर चली गई।

अगले दिन माधवी बारह बजे आ गई उसके साथ ऑटो करके मैं धारावी में उमा की खोली पर आ गया। उमा एक 50 साल की औरत थी। अंदर रुचि एक गरीबों जैसी साड़ी पहन कर बैठी थी। उमा चाय बना लाई।

माधवी ने बताया कि उमा इसे अपनी भतीजी बना कर लाई है।

रुचि मुझे देखकर शरमा रही थी।

उमा बोली- इतना क्यों शरमा रही हो? फ़ोन पर तो बात कर चुकी हो ! तुम्हारा पुराना यार है। लो चाय पियो !

रुचि मुझे देखकर अब भी शरमा रही थी, हम चार लोग ही कमरे में थे।

उमा रुचि की तरफ देखते हुए माधवी से बोली- बहुत शरमा रही है, कल 12 बजे से पहले नहीं छोडूंगी तेरी चूत की भोंसड़ी बनवानी है, थोड़ी देर और शरमा ले।

उमा बोली- माधवी, यह बहुत शर्मीली है, इसे सबके सामने नंगा करवाऊँगी और चुदवाऊँगी, नहीं तो कुतिया स्मार्ट नहीं बन पाएगी।

रुचि शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी।