गाँव की देसी भाभी की सेक्स लाइफ- 1

गतांग से आगे …..

पुजा- देवर जी मुझे यहाँ क्यों लेकर आए हो।
मैं- भाभी जी आपको मालूम तो है। मुझे आपकी गुलाबी चूत देखनी है।
पुजा- नहीं नहीं.. यहाँ नहीं। यहाँ कोई आ गया और किसी ने देख लिया तो?

मैं- भाभी जी यहाँ खेतों के बीच में कोई नहीं आता है। वैसे भी यहाँ हम दोनों को कोई नहीं जानता, मान जाओ ना.. फिर ऐसा मौका कभी नहीं मिलेगा और आपकी चूत देखने को ही तो आपको यहाँ शादी में बुलाया है। किसी को पता नहीं चलेगा, तुम चिन्ता ना करो।

थोड़ी देर मनाने के बाद वो मान गईं। वैसे भी उन्हें पता तो चल ही गया था कि आज कुछ न कुछ तो होकर ही रहेगा।

मैंने अपना गमछा बिछाकर उन्हें अपने पास बिठाया। थोड़ी देर हाथों को सहलाकर उनके होंठों में अपने होंठ रख दिए। वो भी महीनों की प्यासी थीं और अपने गाँव से चुदने ही आई थीं।

उन्होंने मुझे जकड़ लिया, मैंने भी अपने हाथों से उनकी चूचियों को दबाना शुरू किया और कपड़ों के ऊपर से ही उनकी चूत सहलाने लगा।
वो भी बहुत ज्यादा गर्म हो गई थीं।

कुछ ही मिनट की चुसाई के बाद हम दोनों अलग हुए.. दोनों का बुरा हाल था, मेरा लण्ड पैंट में तम्बू बन गया था, दोनों ने फटाफट अपने-अपने कपड़े उतार कर साइड में रख लिए।
आग दोनों तरफ बराबर लगी थी।

फिर मैंने देखा वाकयी उनकी चूत गुलाबी थी।
मैं- वाह भाभी.. आपकी चूत तो सचमुच में गुलाबी है। इसे देखकर तो मजा आ गया।
पुजा- राज क्या करूँ.. ज्यादा चुदी नहीं है ना.. पूरे साल में 30 दिन तो कुल चुदती है ये, बाक़ी साल भर सूखी रहती है.. तो गुलाबी तो होगी ही। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
मैं- चिन्ता न करो भाभी.. आज मैं इसे पूरी तरह से तर कर दूँगा.. देखो मेरा लौड़ा इसे सींचने के लिए कब से तैयार खड़ा है।

फिर हम दोनों 69 में आ गए.. वो मेरा लौड़ा चूस रही थीं और मैं उनकी गुलाबी चूत को चूस रहा था। वो मेरा लौड़ा लगातार ऐसे चूसे जा रही थीं, जैसे मूली समझ कर खा जाना चाहती हों।

उनकी चूत चूसने में और उनके चूचियां दबाने में बहुत मजा आ रहा था। चूत में जीभ की रगड़ से वो कुछ ही देर में झडने लगीं.. मैंने उनका सारा पानी पी लिया।

मैंने भी उनके मुँह में ही धक्के लगाने शुरू कर दिए। कुछ ही समय में मेरा लावा भी उनके मुँह में गिरने लगा जिसे वो पूरा चाट-चाट कर साफ कर गईं।
हम दोनों को ही इस ओरल सेक्स चूसा चुसाई में बहुत मजा आया।

थोड़ी देर सुस्ताने के बाद वो फिर से मेरा लौड़ा सहलाने लगीं, मेरा हथियार फिर से खड़ा हो गया था।

पुजा- अब ना तड़पाओ राज, डाल दो इसे मेरी चूत के अन्दर.. ये लण्ड खाने को कब से तड़फ रही है। वो अपनी टांगें फैलाकर जमीन पर लेट गईं।

मैंने भी अपने लौड़े पर थूक लगाया और उनकी चूत के दाने पर रगड़ने लगा। वो तो पागल सी हो गईं.. उन्होंने खुद मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर लगा लिया और ऊपर को जोर लगाने लगीं।

मैंने भी लण्ड को चूत पर दबाना शुरू किया.. चिकनी चूत होने के कारण लण्ड को रास्ता बनाने में ज्यादा टाइम नहीं लगा। लण्ड पूरा अन्दर जाते ही उनके मुँह से एक लम्बी ‘आह..’ निकली।

चूत वाकयी में टाइट थी, शायद बहुत समय बाद चुदने के कारण ऐसा था। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।

दोनों को बहुत मजा आ रहा था। वो उछल-उछल कर मेरा साथ दे रही थीं, हर धक्के के साथ उनकी मादक सिसकारियाँ निकल रही थीं- आहह आहह.. राज और जोर से.. मैं कब से इसे अपने अन्दर लेने को तड़फ रही थी.. आहहह आहह.. जोर से पेलो राज..

‘आहह.. भाभी.. मैं खुद कई दिन से तुम्हें चोदना चाह रहा था.. आखिर आज आप मेरे लण्ड के नीचे आ ही गईं.. कसम से लाजवाब हो भाभी.. आपने तो दिल खुश कर दिया.. लो और लो..’
मैं उन्हें हचक कर चोदने लगा।

उन्होंने भी चुदाई के खूब मजे लिए, फिर एकदम से वो अकड़ गईं- आहह आहहह.. मैं आ रही हूँ राज.. और जोर से चोदो..

कुछ ही देर में उन्होंने पानी छोड़ दिया।
अब तो उन्हें चोदने में और भी मजा आने लगा, उनकी चूत में लण्ड के अन्दर-बाहर होते समय ‘फच्च.. फच्च..’ की आवाज गूंज रही थी और उनके मुँह से कामुक सिसकारियाँ माहौल को मस्त बना रही थीं।

मैंने उन्हें हर तरीके से चोदा.. उन्होंने दो बार और पानी छोड़ दिया। अब मेरा लौड़ा भी जवाब देने लग गया, मेरा भी होने वाला था- भाभी मेरा होने वाला है.. बोलो कहाँ गिराऊँ। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है। मैंने धक्के तेज कर दिए।

पुजा- राज, अन्दर ही गिरा दो.. कब से चूत सूखी पड़ी है.. इसे अपने पानी से सींच दो.. मैं तुम्हें अपने अन्दर महसूस करना चाहती हूँ। डरने की कोई बात नहीं, मैंने आपरेशन करा रखा है।

मैं- दिल खुश कर दिया भाभी आपने तो.. चूत के अन्दर माल गिराने का तो मजा ही और है.. वैसे भी मुझे अन्दर गिराने में बहुत मजा आता है।

मैंने कुछ ही झटकों के बाद अपना सारा पानी उनकी चूत के अन्दर भर दिया और थोड़ी देर बाद लण्ड बाहर निकाल कर उनके बगल में लेट गया।

मैं- बोलो भाभीजान.. मजा आया कि नहीं.. चूत की खुजली मिटी की नहीं..

पुजा- राज आज बड़े दिनों बाद चूत को इतना सुकून मिला। मेरी कई दिनों से बंजर जमीन आज तुम्हारे पानी से तर हो गई। सच में बहुत मजा आया तुम बहुत अच्छा चोदते हो.. कहाँ से सीखा ये सब?

मैं- आप जैसी भाभियों की ही दुआ है। उन्होंने ही सिखाया। भाभी मजा आया हो तो एक राउण्ड और हो जाए। देखो मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। इसे एक बार और अपनी चूत की सवारी कर लेने दो।