गाँव की देसी भाभी की सेक्स लाइफ- 2

गतांग से आगे …..

‘आहह आहह.. ऐसे ही राज.. आहह आहहह.. और जोर लगाओ.. आहह चूत को तुम्हारे लौड़े से बड़ी शान्ति मिल रही है।’
‘हाँ भाभी ले अन्दर तक ले ले.. आह्ह..’
‘ओह हाई मैय्या चुद गई रे.. ऐ.. हा हा ऐसे ही बड़ा जालिम है रे तेरा लौड़ा.. अन्दर तक मजा देता है.. और जोर से रगड़ो मुझे.. राज सारी ताकत लगा दो..’

मैंने भी गति बढ़ा दी और रगड़ कर उनकी चूत पेलाई करने लगा।

फिर मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा और खुद बिस्तर पर लेट गया। वो मेरे खड़े लौड़े पर बैठ गईं और कमर उछाल-उछाल कर चुदने लगीं।

‘हाय हाय मर गई.. फट गई रे मेरी चूत.. ऐसे तो बड़े अन्दर तक जा रहा है ये.. ओहह आहहह..’

मैं- जोर लगाओ भाभी.. अभी मैं नहीं आप मुझे चोद रही हो। जितनी ताकत है आप में.. उतनी ताकत से मेरे लण्ड की सवारी करो.. तभी आपको और ज्यादा मजा आएगा।

‘आहह राज.. मैं तो बावली हो गई.. इतना मजा मुझे कभी नहीं आया। चूत की सारी खुजली मिट गई.. आहह मैं आने वाली हूँ राज..’

अब वे और जोर-जोर से लण्ड पर उछलने लगीं।
कुछ ही देर में वो लण्ड पर ढेर हो गईं, उनके पानी से मेरा लण्ड तर हो गया था।

पुजा- राज.. अब मेरे बस की नहीं है। अब तुम ही करो.. मेरी तो इस लण्ड की सवारी में जान ही निकल गई।

मैंने कुछ देर उनकी चूत चाटी और साथ में गांड में उंगली करने लगा।

भाभी- राज अब जाके चूत को सुकून मिला.. अरे ये क्या कर रहे हो दर्द हो रहा है।
मैं- भाभी जैसे आपने मेरी लण्ड की सवारी की है.. मुझे भी आपकी गांड की सवारी करनी है। मैं आपकी गांड मारना चाहता हूँ।

पुजा- राज सोचना भी मत.. नहीं तो तुम्हें मेरी चूत से भी हाथ धोना पड़ेगा। मैं जिन्दगी में कभी गांड नहीं मरवाऊँगी.. ज्यादा जिद मत करना। एक बार तुम्हारे भाई ने मारी थी.. पूरा हफ्ता ढंग से टट्टी भी नहीं कर पाई थी। तुम चूत मारो बस.. जितनी मारनी है।

वो गुस्सा हो गईं.. मैंने भी सोचा कहीं गांड के चक्कर में चूत से भी हाथ ना धोना पड़ जाए.. इसलिए मन मार लिया और माफी माँगकर अपना कड़क लण्ड उनके मुँह में दे दिया।
उन्होंने उसे अच्छी तरह से चूस कर गीला कर दिया। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मैंने उन्हें लिटाकर उनकी टांगें अपने कन्धों पर रखी और गीला लण्ड उनकी चूत में उतार दिया।
फिर उनकी ठुकाई शुरू हो गई, पूरा कमरा हम दोनों की आवाजों से गूजने लगा, चूत और लण्ड एक-दूसरे को हराने में लगे हुए थे।

मैंने उन्हें हचक कर चोदा और अन्त में अपने वीर्य की पिचकारियां उनकी चूत में मार दीं।

पुजा- आहह मजा आ गया राज.. अब इसी तरह पूरे दो महीने मुझे चोदते रहना। मैं तुमसे ही चुदने के लिए यहाँ आई हूँ.. कोई दिल्ली घूमना नहीं.. बस तुम्हारे लण्ड की सवारी करनी है मुझे। इन दो महीनों में अपने इस झूले पर जितना झुला सकते हो, झुला दो मुझे!

मैं- भाभी आपको शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा.. मैं आपकी चूत की सैर करूँगा और आपको भी करवाऊँगा।

इस तरह पूरे एक महीने मैंने उनकी कभी उनके रूम में.. कभी घूमने के बहाने लाकर अपने रूम में जमकर चुदाई की।

दूसरे महीने भाई की नाइट ड्यूटी के कारण कम टाइम मिला, पर मौका निकाल कर हम दोनों अपनी हवस शान्त कर ही लेते थे।
रात में उनके साथ सोने को उनके पड़ोस की भाभी आती थीं.. जिससे उन्होंने अच्छी दोस्ती बना ली थी।

दो महीने रहने के बाद भाभी अपने गांव वापस चली जाने वाली थीं.. पर वो जाने से पहले मेरे लण्ड का जुगाड़ बना कर गईं। मैं उनकी मदद से उनके बगल में रहने वाली भाभी को चोद सका।

यह सब हुआ यूं कि भाभी को एक महीना लगातार चोदने के बाद एक दिन उन्हें चोदते हुए मैंने भाभी से कहा- भाभी आपने मेरे लण्ड की आदत खराब कर दी है। अगले महीने तो आप चली जाओगी, फिर मेरे लण्ड का क्या होगा। जाने पहले इसका कुछ इन्तजाम तो करती जाओ।

वो बोलीं- मुझे पता है मेरे चोदू देवर कि मैंने तुम्हारे लण्ड को बिगाड़ दिया है। इसे चूत का चस्का लग गया है। मैंने इसका जुगाड़ बना दिया है.. तुम्हें मेरे जाने के बाद भी चूत मिलेगी। पर तब तक तुम्हें मुझे ही चोदना पड़ेगा। मेरे जाने के बाद ही उस दूसरी चूत में लण्ड लगाना।

मैं- अरे वाह मेरी जान.. पर कैसे और किसकी।
भाभी- पहले वादा करो कि मेरे जाने के बाद ही उसकी लोगे। मैं जब तक यहाँ हूँ तुम्हारे लण्ड को किसी से नहीं बांट सकती.. वो बस मेरी ही चूत में चाहिए।

मैं- भाभी वादा रहा, आपके जाने से पहले उसे हाथ तक नहीं लगाऊँगा। अब तो बता दो कौन है वो?

फिर भाभी बताने लगीं- पिछले महीने से ही मैंने अपने पड़ोस की भाभी से दोस्ती की है.. जब तुम नहीं होते तो हम दोनों आपस में गप्पें लड़ाते हैं। बातों-बातों में उसने बताया कि उसका पति मार्केटिंग में है.. इसलिए ज्यादातर बाहर ही रहता है और जब घर में भी होता है तो काम का बहाना बना कर उसे ज्यादा नहीं चोद पाता है।

बस तभी मैंने उसे तुम्हारे लिए पटाने की सोची और उसे बता दिया कि कैसे शादी में तुमने मुझे चोदा था और तुम्हारे ही कहने पर मैं दिल्ली आई हूँ और अब यहाँ जब भी समय मिलता है मैं तुमसे खूब चुदवाती हूँ। मैं रोज उसकी चूत की भूख बढ़ाने लगी। आखिर वो बेचारी कब तक सहन करती और उसने मुझसे कह ही दिया कि वो भी तुमसे चुदना चाहती है। अब खुश हो तुम?

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