गाँव की देसी भाभी की सेक्स लाइफ- 2

गतांग से आगे …..

मैं- वाह भाभी.. आपने तो आज लौड़े को खुश कर दिया।

यह कहकर मैं नई चूत मिलने की सोचकर उन्हें और जोर से चोदने लगा।
थोड़ी ही देर में मेरी सारी खुशी उनकी चूत में बह गई।

भाभी ने अगले ही दिन उससे मेरी मुलाकात करवा दी। उसका नाम कंचन था। उम्र 25 साल, वो एक बच्चे की माँ थी। वो देखने में बहुत सुन्दर थीं.. या ये कहो चोदने लायक माल थीं। उनकी जवानी ने उन्हें देखते ही मेरा लण्ड खड़ा कर दिया था। पर भाभी को वादा किया था, निभाना तो था ही.. आखिर ये माल उन्हीं ने मेरे लिए पटाया था। यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मैंने उससे कहा- देखो भाभी आपको मुझे अपने बगल में रूम दिलाना पड़ेगा। ऐसे तो हम पकड़े जाएंगे। ये तो मेरी गाँव की भाभी हैं.. इसलिए यहाँ आकर इन्हें चोदने में तो मुझे कोई कुछ नहीं कर सकता.. पर मैं आपको दिन में नहीं चोद सकता इसलिए बगल में रूम का जुगाड़ करो। तब तक मैं आपको चोदूँगा भी नहीं।

उससे दूर रहने का यही एक बहाना था।
पुजा भाभी मेरी बातों से खुश हो गईं और इस महीने जब भी टाइम लगा उनकी खूब चुदाई की।

उधर कंचन ने मेरे लिए कमरा ढूँढ ही लिया।
तब तक भाभी गाँव चली गईं।

उनके गाँव जाने के बाद अब मुझे कंचन की ही लेनी थी, तो मैंने भी कमरा चेन्ज कर लिया और उनके बगल मेंआ गया। कुछ ही दिनों में वहाँ सबसे जान-पहचान हो गई, पर उसे चोदने का मौका नहीं मिल पा रहा था।

आगे आपको बताऊँगा कि मेरे लौड़े को कंचन भाभी की चूत का स्वाद कैसे मिला।