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हवस की पुजारन मेरी जवानी

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम गुडिया सिंह है. अब 24 साल की हो गयी हूँ. अछा कमाती हूँ और अपने पैरो पर खड़ी हूँ. पर एक टाइम था की परिवार की सहायता के लिए मुझे और मेरी बेहन को वो सब करना पड़ा जो हम जैसी मिडलक्लास लड़कियों को गवारा नहीं है. हिन्दी सेक्सी स्टोरी पहली चुदाई

मैं वैसे मीरूत मे पैदा हुई थी पर हम मोदिनगर में आके बस गये थे क्यूंकी मेरे पापा की नौकरी मोदी टाइयर्स मे लग गयी थी. हमे समीर्विहार मे एक अछा मकान भी रहने के लिए मिल गया था. हम दोनो बहाने टीआरएम स्कूल मे पड़ने लगी और हमारा वक्त अछा चल रहा था.

पर फिर खराब टाइम आ गया.. पापा की कंपनी बंद हो गयी और नौकरी छूट गयी. वो लोकल फाइनान्स. इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का काम तो करने लगे पर सक्सेस नहीं हुए. मैं तब 9थ मे थी और सुष्मिता दी 12थ मे थी. भाई बहुत छोटा था.

सुष्मिता दी और मैं स्लिम थे. हमारी फिगर काफ़ी पतली पर टाइट थी. हम दोनो स्पोर्ट्स और डॅन्स मे भी बढ़ चढ़ के हिस्सा लेती थी.इसीलिए हमारी बॉडी पे कहीं भी फॅट नहीं था.

दी और मैं साथ मे सोते थे. मैं पढ़ कर सो जाती थी और दी पढ़ती रहती थी. गर्मियों के दिन थे. एक दिन रात को मैं पानी पीने के लिए उठी. तो देखा दी बिस्तर पर नहीं हैं. मैने सोचा. बाथरूम गयी होगी और मैं सो गयी. लेकिन ऐसा जब एक दो बार हो गया तो मैं दी को ढूँढने निकली.

वो टाय्लेट मे नहीं थी. फिर मैं ड्रॉयिंगरूम से होते हुए मास्टर बेडरूम की तरफ बढ़ी. जहाँ मम्मी पापा सोते थे. तब मैने दी को बेडरूम की डोर के सामने बैठे हुए देखा. उनकी नाइटी जांघों तक आ रखी थी और वो उनके बीच मे हाथ डाल कर पापा के बेडरूम मे झाँक रहीं थी. मैं भी उनके पास गयी तो मुझे पापा के बेडरूम से हँसी की आवाज़ें आने लगी.

फिर मम्मी उउउहह आहहा करने लगी. और फिर ज़ोर से चिल्ला के शांति से छा गयी. मैने देखा दी भी निढाल हो कर लेट गयी. और मैं चुप चाप वापस आ कर लेट गयी. दी आई. पहले बाथरूम गयी और मूह हाथ धो कर साथ मे लेट गयी. उनकी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी जैसे की कहीं दूर से भाग कर आई हो. फिर वो मेरे से लिपट गयी और प्यार से मेरे गालों को चूम कर सो गयी.

अभी 15 साल की हो गयी थी और लड़को के गंदे इशारे और साथ की लड़कियों की हँसी कुछ कुछ समझने लगी थी. मेरे ब्रेस्ट्स नींबू के साइज़ के थे इसलिए अभी तक ब्रा पहनने की ज़रूरत नहीं पड़ी थी. सिर्फ़ कमीज़ से काम चल जाता था.

पर 8th क्लास से पॅड तो पहनने लगी थी. फिर एक रात दी का मॅच था और वो थक कर जल्दी सो गयी. मैं 11 बजे तक पढ़ रही थी. तब मुझे मम्मी की हसने की आवाज़ सुन्नआई पड़ी. मैं चुपचाप बाहर आई तो देखा की पापा के रूम की नाइट लाइट जाली हुई है. मैं भी धीरे से तोड़ा परदा खोल के दरवाज़े के सामने बैठ गयी और रूम के अंदर झाँकने लागपडी.

मैने देखा की पापा लेटे हुए थे और मम्मी अपना ब्लाउस और सारी उतार कर उन पर बैठी हुई थी. उनके बदन और जांघें लाल रोशनी मे चमक रही थी. पापा उनके ब्रेस्ट्स मसल रहे थे और वो खुशे के मारे सिसकारियाँ ले रहीं थी. फिर उन्होने पापा का लंड अपनी चूत मे डाला और वो उपर नीचे करके पापा को चोदने लगी. उनकी आँखे बंद थी और उनके होठों से सीसी सीसी की आवाज़ आ रही थी.

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मैं भी ये नज़ारा देख कर गरम हो गयी थी और मेरी उँचुई बुर मे गीलापन आने लगा था. फिर मैने भी अपनी कची मे हाथ डाल कर रगड़ना शुरू कर दिया. बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा खून मेरे सिर में टक्कर मार रहा था.

अचानक पापा से नहीं रहा गया और उन्होने मम्मी को अपने नीचे गिरा लिया और उन्हे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. मम्मी और ज़ोर ज़ोर से मज़े लेले कर सिसकारियाँ ले रही थी. फिर पापा झड़ गये और मैं भी. पूरे बदन मे ऐसा लग रहा था की जान ही नहीं है. बड़ी मुश्किल से मैं वाहा से अपने कमरे मे आ पाई. सूसू करके और मूह हाथ धो कर किसी तरह मैं बिस्तर मे लेट गयी.

सुष्मिता दी मेरे पास ही लेती हुई थी. अचानक वो पलटी और बोली की तुम भी देख आई नज़ारा. मेरी तो साची बोलू फट ही गयी थी की मैं पकड़ी गयी. पर दी जब हसी तो मेरी जान मे जान आई. वो बोली अब तू बड़ी हो रही है. एक दिन बैठ के तुझे भी समझाउन्गि की इस घर की खुशी के लिए क्या क्या करना पड़ता है और मुझे लिपटा के वो सो गयी.

उस दिन मुझे दी की बात कुछ अटपटी सी लगी और मैं कुछ समझी भी नहीं थी. बहुत सोचा तो मुझे कुछ समझ मे आने लगा. कैसे दी मेरे लिए गिफ्ट्स लाती हैं. घर का समान का और बिजली वगेरा का बिल अपनेआप देती हैं तो पापा से पैसे नहीं लेती हैं. वो कुछ ट्यूशण तो पढ़ाती थी. पर इतने पैसे तो नहीं कमा सकती.

मैने उनको कई बार लड़को के साथ बाइक या कार मे देखा है. जब पूछा तो बोली की उनके फ्रेंड्स हैं. एक बार वो जिम के पास भी गयी थी तो मैं बाहर बैठी थी. तब भी वहाँ उनके फ्रेंड्स बाहर बैठे थे. काफ़ी अमीर लग रहे थे. तो मुझे लगा की दी के फ्रेंड्स उनकी हेल्प करते हैं..मुझे लगा की काश मेरे भी ऐसा कोई दोस्त होता . पैसेवाला होता और मुझे गिफ्ट्स देता.

फिर एक दिन दी घर शाम तक नहीं आई थी. अचानक एक फोन आया और पापा और मम्मी स्कूटर उठा कर चल दिए. उनके चहरे पर से हवैइयाँ उड़ रही थी. काफ़ी रात को वो लोग दी को ले कर घर आ गये. दी का चेहरा मुरझा हुआ था और उनकी कपड़ो पर भी जगह जगह मिट्टी लगी हुई थी. वो चुपचाप नहा कर आई और सो गयी. उस रात उन्होने खाना भी नहीं खाया.

अगले दिन संडे था और घर पर हम दोनो ही थे. तब मैने दी से पूछा की क्या हुआ था. दी मुझे बेडरूम मे ले गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया. तब उन्होने बताया की क्यूंकी घर की माली हालत ठीक नहीं है वो कुछ बड़े घरों के बिगड़े हुए लड़को के साथ मस्ती करती है और घूमती हैं . जिसके उन्हे पैसे मिलते है. कल दिन मे स्कूल के बाद किसी लड़के के साथ मस्ती करते हुए पोलीस ने पकड़ लिया था.

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इसीलिए मम्मी पापा को ठाने बुलाना पड़ा. कहने लगी की क्या करे. ये सब करना पड़ता है. आज दी की शादी हो चुकी है. नौकरी करती हैं और उनका अछा चल रहा है. पर इस आछे टाइम के पीछे उन्होने कितनी बार मूह काला करवाया है वो ही जानती हैं.

लेकिन तब उस कची उमर मे मुझे लगा की मुझे भी दी की हेल्प करनी चाहिए. मैं एक झन को जानती थी जो मेरे स्कूल और कॉलोनी के बाहर चक्कर लगाता रहता था. बंदर जैसा दिखता था. पर कई बार मैने बड़ी बड़ी कार चलाते हुए देखा था.

सुना है उसका बाप बहुत मालदार था. इसलिए मैने दीपक. उसका नाम दीपक था. को थोड़ी लाइन देनी शुरू कर दी. वो साला तो खुशी से पागल हो गया. जब उसने साथ मे घूमने का ऑफर दिया तो मैं कुछ ना नुकर करके तैय्यार हो गयी. लेकिन साले को छूने नहीं दिया.

उस दिन उसने मुझे गोल्ड की रिंग गिफ्ट करी. मैं भी उसको धीरे धीरे पास आने देने लगी. हर बार गिफ्ट तो मिलता ही था. लेकिन अब मुझे भी उसके साथ लिपटने छिपटने में मज़ा आने लगा था. जब वो बाहों में भर के किस करता था तो उसका लंड उसकी पैंट मे खड़ा होकर चुबने लगता था. मैं भी 2-3 महीने में उससे काफ़ी कुछ सोना और गिफ्ट्स ले चुकी थी.

एक रात मैं घर पर अकेली थी तो मैने उसे घर पर बुला लिया. बिल्कुल पागल सा हो गया था. मेरे बदन को चूमता रहा और मम्मो को चूस्ता रहा. शायद उसने इससे पहेले कोई नंगी लड़की नहीं देखी थी. हा. जब उसने मेरी बुर मे अपना लंड डाला तो दर्द बहुत हुआ.

पर वो झड़ भी बहुत जल्दी गया था इसीलिए मज़ा भी नहीं आया. उसके बाद मैने उसे कई बार चोदने दिया . पैसे भी लेती रही पर वो मुझे कभी भी सॅटिस्फाइ नहीं कर पाया. ऐसे ही कई साल निकल गये और मैं इंजिनियरिंग करने गाज़ियाबाद आ गयी.

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यहाँ का माहौल तो और खुल्ला हुआ था. और जल्दी ही मैने एक नया बाय्फ्रेंड बना लिया. बहुत मालदार आसामी था..हॉस्टिल मे कार रखता था. माल बहुत देता था पर साला पिछली लाइन का खिलाड़ी था. इसीलिए मैं बच के रहती थी. नहीं तो सुबह बड़ा दर्द होता था. इन्फेक्षन का भी ख़तरा रहता था.

उसके बाद कॉलेज पूरा करते करते और जॉब मे आने के बाद कितने आए और कितने गये पर मेरी हवस को कोई नहीं मिटा पाया. माल तो बहुत बटोरा पर ना पक्का प्यार करने वाला मिला ना कोई अछा दोस्त.

लेकिन वैसे मज़े मे हूँ. आजकल तो डेटिंग अप आ गये है . कोई ना कोई मुर्गा तो मिल ही जाता है. पर सच कहूँ. उस प्यार की तलाश है जो मेरी आग बुझा सके.. आजकल गुरूगाओं मे हूँ.. आप मे से है कोई मेरा हात थमानेवाला….?? हिन्दी सेक्सी स्टोरी पहली चुदाई

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The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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