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जीजा संग होली में रंगवाई हर एक अंग-1

होली का मौसम ,गर्मी की शुरुवात और ठंड का अंत,ये मौसम ही बना ही मौज मस्ती के लिए इसीलिए शायद हमारे पूर्वजो ने होली की शुरुवात की ,रंगों का त्यौहार,मस्ती का त्यौहार,लेकिन बदलते हुए सालो में और परिस्थितियों ने इस त्यौहार के स्वरूप को ही बदल दिया है ,आज होली में दारू पीने वालो,नशे में हुल्लड़ करने वालो और मस्ती के नाम पर सामाजिक मर्यादाओ को भंग करने वालो की जमात ही दिखाई देती है ,परिवार के लोग इन सबसे थोड़ा दूर ही रहते है ,लेकिन गांव में नही वहां का मौहोल आज भी उतना ही निर्दोष बना हुआ है,लेकिन इस शराब ने वहां का माहौल भी खराब किये हुए है,लेकिन फिर भी पारिवारिक लोग भी इसका मजा उठाते है,और खासकर मेरे गांव में तो खूब होली खेली जाती है,ये कहानी मेरे उस होली की है जिसे मैं कभी भूल नही सकती ,जिसमे एक दीवार गिरी और मैं लड़की से एक औरत बनी |

मेरा नाम शिल्पा है ,अभी अभी मेरी बड़ी दीदी कल्पना की शादी राज नामक लड़के से हुई जो की पास के ही गांव का रहने वाला है लेकिन शहर में रहकर जॉब करता है,शादी को अभी 5 महीने ही हुए थे की होली ने दस्तक दी ,मेरे जीजा और दीदी बहुत ही अच्छे और मुझे बहुत ही प्यार करने वाले है,मैं अभी कालेज में हु जो की पास के ही कस्बे में पड़ता है,मेरी दीदी ने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया था ,जबकी मेरे घर वाले लड़की को पढ़ना ठिक ही नही समझते,घर वालो के इसी रवैये का भुगतान मेरी दीदी ने भी किया था,उन्हें कालेज जाने ही नही दिया गया,लेकिन उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया और घर वालो से लड़कर मुझे कालेज भेजा,जीजा भी बहुत ही ओपन माइंड के है ,वो मेरे गांव के पहले दामाद थे जिन्होंने दहेज नही लिया,हमारे परिवार में उनकी इज्जत इसी बजह से बहुत ही ज्यादा होती है,

दूसरी ओर हमारे समाज में लड़के वाले हमेशा से ही अपनी मनमानी करते रहे है खासकर दामाद तो जैसे लड़की के घरवालों के लिए भगवान ही होता है,वो कुछ भी गलत करे सब माफ,यहां तक की मैंने कई लोगो को लड़कियों को मरते ही देखा है और घरवाले लड़की को ही डांट लगा देते है की पति है थोड़ा मार भी दिया तो क्या हो गया,मर्द है किसी दूसरी लड़की के साथ संबंध बना भी लिया तो क्या हो गया…मुझे इन सब चीजो से और ऐसे सोच से घिन सी आती है लेकिन क्या करे समाज में सोच ऐसे घर कर गई है की इसे युही तो मिटाया नही जा सकता इसके लिए लड़कियों को पढ़ना और आत्मनिर्भ बनना पड़ेगा,ऐसे इस मामले में जीजा जी का कोई जवाब नही वो दीदी को थोड़ी भी तकलीफ नही देते,बल्कि हमारे घर वालो की मदद को भी तैयार रहते है,और कोई भी नखरा नही दिखाते,सच कहु तो मेरे जीजा शिल्पा है |

कल्पना दीदी और मैं दोनो ही बहुत ही गोरी और गांव की भरी हुई लडकिया है,गांव में घूमना और खेतो और घर के काम करना हमे पसंद रहा,गांव वालो की गंदी नजर हमेशा से ही हम पर रही लेकिन कल्पना दीदी के रहते कोई भी आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता वो किसी को भी माँ बहन की गली देने से नही चूकती थी ,लेकिन मेरा स्वभाव थोड़ा शांत है और उनके जाने के बाद ही मुझे पता चला की मैं जवान हो गई हु और मर्दो के लिए इतनी आकर्षक हो गई हु ,मेरे उजोरो की चोटी छुपे नही छुपती और गोल नितम्भ जैसे सब कुछ कहना चाहती हो,गोरा बदन और मदमस्त यौवन की वजह से मेरे पीछे गांव के हर आवारा लड़के पड़े रहते है,यहां तक की अधेड़ और बुड्ढे भी मेरी जवानी को निहारे बिना नही रहते,मेरे रिस्ते के चाचा और ताऊ भी नजर बचा कर मुझे निहार ही लेते है,पहले तो मुझे कुछ समझ नही आता था लेकिन उनका यू देखना या तो मेरे मन में उनके लिए घृणा भर देता या मैं थोड़ी मचल जाती ,आखिर जवानी का उफान थो मेरे अंदर भी था लेकिन ये कब फूटने वाला था और कैसे फूटने वाला था ये तो मैंने सपने भी नही सोचा था |

मेरे जीजा राज भी किसी से कम नही थे और किसी से मैं सबसे पहली बार आकर्षित हुई थी तो उनसे ही ,वो सचमे एक गजब की व्यक्तित्व के मालिक थे,हा काले थे लेकिन सच्चे मर्द थे,बलशाली भुजाए,चौड़ा बालो से भरा हुआ सीना ,गजब के आकर्षक,सभी से प्यार से मिलने और बोलने वाले और सबसे बड़ी बात महिलाओं की इज्जत करने वाले,उनका केयर करने वाले ….वाह आई लव माय जीजा…..मेरे सपने में अगर पति की कोई छबि थी तो वो मेरे जीजा ही थे,मैं उस दिन का बेसब्री से इंतजार करने लगी जब वो आएंगे,दीदी से मिलने की बेचैनी से ज्यादा जीजा से मिलने की खुसी मेरे अंदर मचल रही थी ,और मैं जानती थी की वो होली में दीदी के साथ ही घर आने वाले है,दीदी की पहली होली थी तो वो मायके में ही मनाने वाली थी और जीजा उन्हें छोड़कर अपने घर जाते लेकिन फिर शाम तक हमारे घर आने वाले थे,मैं जीजा से मिलने और उनके साथ होली में खूब मस्ती करने के मूड में थी,मेरी बेताबी को देखकर चाची में यहां तक कह दिया की सम्हलकर जीजा और साली का रिश्ता बहुत ही नाजुक होता है,थोड़ी भी चूक हुई तो तू साली से घरवाली बन जाएगी,मेरी माँ और चाची इसपर खूब हँसे थे लेकिन मुझे ये वहां तो अच्छा नही लगा और मैं अपने कमरे में मुह फुला कर आ गई लेकिन चाची की बात को सोचकर पता नही क्यो एक अजीब सी बेचैनी मेरे मन में होने लगी और मेरे होठो में इस बात को सोच सोच कर ही मुस्कुराहट सी आने लगी |

“जीजा …”मैं दौड़कर जीजा जी के गले से लग गई जब दीदी और जीजा जी होली के एक दिन पहले घर आये,एक एक फ्रॉक में थी जिसे मैं सिर्फ घर में ही पहनती थी ,जीजा जी के मजबूत सीने से जैसे ही मेरे बड़े स्तन ठकराये मैं थोड़ा पीछे हटने को हुई लेकिन तब तक तो जीजा ने भी मुझे कस लिया था ,अब तो मेरे स्तन उनके मजबूत सीने में धंस गए थे,और उनके हाथ मेरे पीठ पर थे जो ही उसे हल्के हल्के सहला रहे थे,मैं उसके कंधे में अपना सर रख कर थोड़ी देर तक खड़ी रही लेकिन जीजा ने मुझे थोड़ा दबा कर ही छोड़ दिया,मैं उनसे अलग हुई तो मेरे चहरे में लाली साफ थी मैं थोड़ी सी नर्वस हो गई थी ना जाने क्यो इस वाकये ने मुझे थोड़ा उत्तेजित कर दिया था,मैं अब जवान हो चुकी थी और मचलती हुई जवानी को सम्हालना ऐसे भी थोड़ा मुश्किल ही होता है,|

“अच्छा पूरा प्यार बस जीजा पर ही उतार दे दीदी के लिए भी कुछ बचा है की नही “

सोनिया दीदी ने मुझे छेड़ा

“क्या दीदी आप भी “मैं उनके गले से जा लगी,

“ओह मेरी बेटी कितनी बड़ी लग रही है”दीदी ने मेरे गालो को खिंचा उन्हें तो अब भी मैं बच्ची ही लगती हु,जबकि वो मुझसे बस 2 साल की ही बड़ी है,

“क्या दीदी अभी तो 1 महीने पहले ही देखा था मुझे,”

“ये उम्र ही ऐसी है अभी तो इसके बढ़ने के दिन है”जीजा ने थोड़े अजीब अंदाज में कहा ,उनकी नजर मेरे वक्षो को घूर रही थी लेकिन उन्होंने जल्द ही नजर हटा ली,जिसे दीदी ने पकड़ लिया ..

“ह्म्म्म आप का इशारा तो मैं समझ रही हु,लेकिन खबरदार ये मेरी प्यारी बहन है”दीदी ने जीजा को आंखे दिखाई जो की हमारे समाज में कम ही होता है खासकर जब घरवाले भी मौजूद हो,

“ओह मेडम जी माफ कर दीजिये “जीजा ने कान पकड़कर बड़े ही मजाकिया अंदाज में कहा जिससे मैं और दीदी हँस पड़े लेकिन माँ ने दीदी को हल्के से मारा ,

“पति से ऐसे बात करते है ,वो भी सब के सामने “लेकिन दीदी और जीजा और मैं हंसते रहे वही पापा ,माँ थोड़े नर्वस हो गए,

जीजा दीदी को छोड़ अपने गांव को निकल गए थे उनके जाते ही पापा दीदी के ऊपर भड़क गए |

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“तुझे शर्म हया है की नही अपने पति से सबके सामने ऐसे बात करती है ,वो तो सीधा साधा पति मिल गया है तुझे वरना अभी तेरे गालो में दो झापड़ लगा देता”पापा मेरी तरफ मुड़े

“और तुझे शर्म हया है की नही ऐसे कपड़े पहन के घूम रही है और कैसे राज से लिपट गई थी,हमारे परिवार में कोई अपने भाई से भी ऐसे लिपटता है क्या वो तेरा जीजा है,कुछ उल्टा सीधा हो गया तो…अब जवान हो गई है और “पापा का गुस्सा इतना तेज था की मेरे आंखों में आंसू आ गए लेकिन दीदी पापा के ऊपर ही चढ़ गई |

“आप लोग इस घटिया सोच से कब बाहर आओगे,वो तो मेरी किस्मत है की बिना ज्यादा पढ़े लिखे भी मुझे राज जी जैसे समझदार पति मिल गए वरना आप लोग तो मुझे भी किसी गवार के साथ ही बांध देते जो मुझे आपके सामने भी मारता तो आप लोग चुप चाप देखते और मेरी बहन को गंदी नजरो से देखता छेड़छाड़ करता फिर भी उसकी आवभगत करते”

दीदी गुस्से में लाल हो गई थी ,माँ को समझ आ गया की बात ज्यादा बढ़ सकती है उन्होंने दीदी को प्यार से समझने की सोची ,

“अरे बेटी हमारा समाज ही ऐसा है की लड़की को झुक कर रहना पड़ता है,अब हम समाज के बनाये हुए नियमो से तो बाहर नही जा सकते”

“समाज के नियंम हमारी सुविधा के लिए बनाये गए थे माँ,ना की इस लिए की लड़कियों का शोषण किया जाय,लड़कियों को जानवरो जैसे रखा जाय,क्या हम लडकिया बस मर्दो की गुलामी करने के लिए ही बनी है,क्या हम इंसान नही है,समाज के ठेकेदारों ने हमे ऐसा बना दिया है वरना हम भी लड़को से किसी भी मुकाबले में कम नही है,गार्गी,मैत्रियी भी तो लड़की ही थी,लक्ष्मी बाई,आनंदी(इंडिया की पहली महिला डॉक्टर),
भी तो ….”
चटाक ….
एक जोरदार आवाज आयी ,पापा ने दीदी के गालो में एक थप्पड़ जड़ दिया था,

“शहर क्या चले गई ,अच्छा पति क्या मिल गया हमे ज्ञान दे रही है,”

पापा इतना बोलकर बाहर चले गए,दीदी के आंखों में आंसू आ गए थे,वो बिना कुछ बोले ही अंदर चले गयी……..

रात दीदी अपने कमरे में खामोश बैठी थी,कल ही होली थी और दीदी का मुड़ बहुत ही खराब था,

“दीदी क्या हुआ आप तो इन लोगो को जानती हो ना फिर भी …”मैं दीदी के पास पहुची

“ह्म्म्म जानती हु ,लड़की कुछ भी बोले तो उन्हें मार के चुप करा देते है,सच में सोनी आज तक मैंने तेरे जीजा जैसा मर्द नही देखा जो की लड़कियों की इतनी इज्जत करता हो,वो मुझे अपने पलको में बिठाकर रखते है,मेरा बहुत ख्याल रखते है”दीदी का चहरा जीजा के याद में खिल गया,

“अच्छा दीदी आप ने जीजा को उस समय क्यो डांट दिया था “अब दीदी के चहरे में मुस्कान आ गई

“अच्छा पहले तू बता की तेरा चहरा उस समय लाल क्यो हो गया था”

दीदी की बात से मैं शर्म से पानी पानी हो गई,

“क्या दीदी आप भी “

“अरे बता ना दीदी से क्या छुपा रही है”

“मुझे क्या पता बस कुछ अजीब सा लगा जब जीजा ने मुझे अपने सीने में दबाया “

दीदी मेरे गालो को प्यार से सहलाई और मेरे ठोड़ी को पकड़कर मेरा चहरा ऊपर किया जो की अभी शर्म से नीचे हो गया था,

“वह मेरी बिटिया अब सचमे बड़ी हो गई है,जीजा के सीने से तेरा ये टकराया ना “उन्होंने मेरे उजोरो को जोरो से दबाया

“आह दीदी छि “मैं और भी शर्मा गई थी लेकिन सच पूछो तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा

“क्यो बोल ना “दीदी ने जोर दिया लेकिन मैं सर नीचे किये ही ना में सर हिलाया

“ओहो ..समझ गई बदमाश सब समझ गई ,तेरे जीजा भी समझ गए थे और इसी लिए तेरे इन कबूतरों को देख रहे थे ,इसलिए उन्हें डांट पड़ी ,”

“क्यो “मैं पागलो जैसा प्रश्न कर बैठी ,जिसपर दीदी जोरो से हँसी

“क्योकि मेरी रानी उनका हक तेरे नही मेरे कबूतरों पर है”दीदी फिर से खिलखिलाई

“वो मेरे जीजा है देख लिया तो क्या हुआ “मैंने थोड़े शांत स्वर में कहा

“अच्छा तो कल इन्हें मसलवा भी लेना अपने जीजा से ,बड़ी आयी जीजा की साली “दीदी ने तोड़े मजाक में ही कहा था लेकिन मुझे ये सोच के ही कुछ अजीब सा लगा की जीजा का हाथ मेरे उजोरो को मसल रहा है,

“छि दीदी मैं क्यो मसलवाउ आप ही ऐसा करो “दीदी फिर से हँसी

“वो तो मैं रोज ही करवाती हु”दीदी ने हंसते हुए कहा ,लेकिन मेरी आंखे बड़ी हो गई

“दीदी आपको दर्द नही होता “मैं आश्चर्य में थी

“तू सच में अभी बच्ची ही है,तेरे जीजा को बोलकर तुझे थोड़ा बड़ा करना पड़ेगा नही तो यंहा के कमीने लड़को के ही जाल में फंस जाएगी “दीदी के बातो में थोड़ी गंभीरता थी जिसे मैं नही समझ पाई

“तुझे अभी बहुत पढ़ना है बहुत आगे जाना है ,इन लोगो को दिखाना है की एक गांव की लड़की क्या कर सकती है,और इसमें मैं और तेरे जीजा हमेशा तेरे साथ रहेंगे”दीदी अब सच में पूरी तरह से गंभीर थी,

“लेकिन दीदी पढ़ाई तो मैं कर ही रही हु,फिर मैं क्यो बिगडूंगी”

दीदी थोड़ी शांत हो गई

“तुझे नही पता की ये लोग कैसे है,जवान लड़की के पीछे हाथ धोकर पड़ जाते है ,और तेरी तो जवानी झलक रही है,पता नही अगर तुझे सबका चस्का लग गया तो फिर क्या होगा,साले तुझे बदनाम भी करेंगे और तेरा मजा भी उठाएंगे,….नही नही तू मेरे साथ ही रहना ,अब शहर में ही पड़ना ,”

दीदी जैसे अपने आप से ही बाते कर रही थी,जो की मेरे समझ के बाहर थी ,
“दीदी …दीदी “मैंने थोड़े जोर से कहा
“ह्म्म्म ओह मैं तो ना जाने कहा खो गई थी,चल जल्दी सो जा कल होली है ना तेरे जीजा भी शाम तक आ जाएंगे …”
“मैं तो उनसे बहुत होली खेलूंगी “मैं बहुत ही एक्साइटेट थी,
“हम्म पता नही होली के अलावा और क्या क्या खेलने वाली है तू “दीदी की अजीब बात से मेरा मुह बन गया लेकिन दीदी हँस पड़ी

होली ,आज मेरे जीवन की सबसे हसीन होली होने वाली थी ,आज मैं अपने नए जीजा के साथ होली खेलने वाली थी,वो जीजा जिनसे मैं बहुत ही प्यार करने लगी थी ,जाने अनजाने ही उनमे अपना पति और अपनी मोहोब्बत देखने लगी थी,वो ही एक मेरे लिए मर्द थे बाकी के लोगो पर तो मेरी नजर ही नही जाती और कल के वाकये के बाद से ,और दीदी के मुह से उनकी इतनी तारीफ सुनने के बाद मैं तो उनसे मिलने को पागल ही हो रही थी,पापा के डर से आज मैंने फ्रॉक नही पहनी थी बल्कि एक सफेद सलवार सूट पहन लिया था,मेरे यौवन की आहट को इसमें भी छिपाना मुश्किल ही था,तने हुए उजोर साले सूट में ऐसे कस रहे थे की मैं बेचैन हो जाती थी,ऊपर एक ब्रा भी पहनो ,मैंने थोड़ा ढीला सा सूट पहनना ही उचित समझा ,लेकिन क्या करू ये निगोड़ी जवानी ……

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दिन भर सहेलियों और परिवार वालो से होली खेली जो की आम होली की तरह ही थी दोपहर होते होते थककर घर आ गई दीदी भी साथ ही थी,ऐसे भी दोपहर के बाद होली के दिन हमारे गांव में लडकिया बाहर नही निकला करती क्योकि गांव के मर्द दारू के नशे में dj लगाकर झूमने लगते है,गली में घूमते रहते है और महिलाओं खासकर लड़कियों के लिए ऐसे माहौल में जाना उचित नही समझा जाता ,होली की दोपहर सबसे बोरिंग होती है लेकिन आज नही क्योकि आज तो मेरे जीजा आने वाले थे,पापा रात से पहले घर नही आने वाले थे वो भी दारू पीकर कही पड़े होंगे,वही माँ अधिकतर अपनी सहेलियों के घर ही रुक जाती थी जंहा सभी औरते एक साथ होली खेलती और भांग पीकर मस्त रहती,दीदी को ये सब कभी पसंद नही था इसलिए वो हमेशा मुझे दोपहर को ही घर ले आती थी.

मैंने जीजा के स्वागत की तैयारी के लिए घाघरा चोली पहनी मेरी ब्रा मुझे बहुत ही परेशान कर रहा था इसलिए मैंने उसे ना ही पहनने का निर्णय किया,और बाल्टी में रंग घोलकर भी रख लिया,दीदी थक चुकी थी और कमरे में जाकर सो गई थी लेकिन मुझे कहा नींद थी,मैं तो बेचैनी से इधर उधर टहल रही थी,3 बजने को थे की कार के हॉर्न से मैं दरवाजे की तरफ दौड़ी ,दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी लेकिन मैं दरवाजे के पास ही खड़ी हुई बस इंतजार कर रही थी.

“अरे कौन है दरवाजा तो खोलो “जीजा की आवाज में थोड़ी लड़खड़ाहट थी ,मैंने बाल्टी पास ही रखी और दरवाजा खोलकर उसके पीछे ही छिप गई जीजा अंदर आये और चोरों तरफ देखने लगे,मैंने हल्के से दरवाजा बंद किया , किसी को ना पाकर वो पलटे ही थे की मैंने पूरी बाल्टी ही उनके ऊपर डाल दी

“हैप्पी होली “”मैं भागने ही वाली थी की उन्होंने मेरे हाथो को पकड़ लिया और मुझे अपने से सटा लिए ,वो पूरी तरह से गीले थे और उनके गीले कपड़े के कारण मेरे कपड़े भी गीले हो रहे थे,मेरे उजोर उनके सीने से दबे हुए थे और मैं कसमसा रही थी,
“साली जी ऐसे कैसे भगोगी अभी तो हमने आपको भिगोया ही नही है”
“जीजा छोड़ो ना “जीजा के मुह से शराब की थोड़ी बदबू आयी
“अपने शराब पी है”

“हा और तुम्हारे और तुम्हारी दीदी के लिए भी लाया हु ,लेकिन पहले तुम्हे भिगोने तो दो”मैं हंसते हुए छटपटाने लगी जीजा ने मुझे अपने गोद में उठा लिया और सीधे पास ही पड़े एक रंग से भारी बाल्टी के पास ले जाकर उतारा ,मैं समझ गई थी वो क्या करने वाले है लेकिन मैं भाग भी तो नही सकती थी ,सच में जीजा थे तो बड़े ही स्ट्रांग ,उन्होंने मेरे हाथो को एक हाथ से पकड़े रखा और दूसरे से बाल्टी को उठाकर मेरे उपर उढेल दिया ,अब मैं पूरी तरह से गीली थी और मेरे कपड़े रंगों से सराबोर थे,सबसे ज्यादा शर्म तो मुझे तब आयी जब मेरे स्तन मेरे कपड़े से चिपक गए और ऐसे दिखने लगे जैसे की वो नंगे ही हो ,ब्लाउज़ का कपड़ा थोड़ा पतला था और मेरे मोटे मोटे स्तनों उसमे से झांक रहे रहे,थे ,मैं शर्म से दोहरी हो रही थी लेकिन जीजा उसे घूरे जा रहे थे,उन्होंने मुझे फिर से खीचकर अपने सीने से लगा लिया ,इसबार मेरे लिए एक और तूफान आ गया था उनके कमर के नीचे से मेरे कमर के नीचे कुछ चुभ रहा था ऐसा लगा जैसे कोई लकड़ी चुभो रहा हो.

“जीजा ये क्या चुभ रहा है”मैं थोड़ी मचली लेकिन जीजा ने मेरे कमर के नीचे मेरे नितम्भो में हाथ फेरा और उसे अपनी ओर खिंच लिया जिससे वो लकड़ी जैसा कुछ मेरे जांघो के बीच पहुच गया और वही पर रगड़ खाने लगा,आज जीवन में पहली बार मुझे ऐसी उत्तेजना का अहसास हुआ था,मैं उनसे दूर होने को छटपटाने लगी थी,लेकिन वो अपने लकड़ी को मेरे जांघो के बीच रगड़े ही जा रहे थे,मुझे लगा जैसे की मेरे योनि से कुछ रिसाव सा हो रहा है,मुझे जोरो की पेशाब की लगने लगी थी,मैंने खुदको थोड़ा सम्हाला
“जीजा प्लीज छोड़ो ना अजीब लग रहा है,”मैं थोड़ी शांत हो गई थी लेकिन मैं सच में छूटना चाहती थी
“अच्छा लेकिन एक शर्त में ,मुझे रंग लगाने दे “
“भिगो तो चुके हो “मैं थोड़ी शरारत भरे लहजे में कहने लगी

“अरे मेरी साली जी अभी तो आपको असली पिचकारी से भिगोना बाकी है लेकिन तब तक रंग ही लगाने दो “जीजा की बात मुझे समझ तो नही आयी लेकिन मैंने पिंड छुड़ाने के लिए हामी भर दी ,जीजा जेब से रंग निकाले और मेरे चहरे से लगाना शुरू कीया उन्होंने लाल रंग का गुलाल निकाल कर मेरे गालो पर मलना शुरू किया ऐसी मालिस तो किसी ने आज तक नही की थी वो बहुत ही आराम और इत्मीनान से मेरे गालो में अपने हाथ चला रहे थे,मेरे फुले हुए गोर गालो में उनके सख्त हाथो के स्पर्श ने मेरे होठो में एक अनजानी सी मुस्कान खिला दी ,वो थोड़े नीचे होते हुए मेरे गले में रंग लगाने लगे,मैंने केयर किया की उनकी सांसे थोड़ी तेज हो रही थी,उन्होंने मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे उरोजों को पकड़ा मैं मचली,

“जीजा नही “इस बार मेरी आवाज में एक सिहरन भी थी,मैं मादकता में डूबती जा रही थी,जीजा का ऐसा करना मुझे बहुत सुकून दे रहा था लेकिन फिर भी मुझे बहुत ही शर्म आ रही थी ,जीजा ने मुझे पलटा और मेरी पीठ को अपने सीने से लगा लिया ,मैं मचलती हुई हल्के हल्के नही नही बोल रही थी जबकि मेरे मन में बस हा ही हा थी ,वो मेरे उजोरो को हल्के हल्के दबाने लगे मेरी आंखे भी बंद हो गई थी ,ना जाने जीजा ये कैसी होली खेल रहे थे,लेकिन मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और मेरे होठो से बस सिसकिया ही निकल रही थी,

“आह जीजा “उनके हाथो का अहसास मेरे वक्षो पर ऐसे हो रहा था जैसे मैंने कपड़े पहने ही ना हो ,वैसे भी मैंने जो पहना था उसका कोई मतलब नही रह गया था,जीजा के हाथ मेरे पीछे आये और उन्होंने मेरे ब्लाउज़ के पीछे लगे चैन को खोल दिया ,उनके सामने अब मेरी नंगी पीठ थी जिसे पर वो हाथो से नही अपने होठो से अपने थूक को लगा रहे थे ,उनके कमर के बीच की वो लड़की जिसे लिंग कहते है तन कर सच में किसी रॉड की तरह हो चुका था और मेरे नितम्भो को धीरे धीरे से ठोकर लगा रहा था ,वो थोड़े उत्तेजित होने लगे थे उन्होंने मेरी कमर को अपने कमर से सटा लिया और अपने लिंग को मारे गद्देदार नितम्भो में रगड़ना शुरू कर दिया,मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था,थोड़ी शर्म और बहुत सा मजा ,मैं पागल हुए जा रही थी ,मुझे लगने लगा की मैं सच में जवान हो गई हु और कई ऐसी चीज है जो मुझे अभी सीखना है,वो अपने होठो से मेरे पीठ के कोने कोने को चूम रहे थे और उनके होठ गीले होकर अपने लार छोड़ रहे थे,मैं मचल रही थी जीजा मचल रहे थे ,और सबसे ज्यादा उनके जांघो के बीच वो रॉड मचल रहा था ………

उन्होंने रंग से मेरी पीठ को रंग दिया और उनके हाथ मेरे बांहो से होते हुए मेरी नंगी पीठ पर चलते हुए मेरे उरोजों तक पहुच गए,मेरे नंगे उरोजों को वो इतने प्यार सहला रहे थे की मैं पागल ही हो गई,मेरे निप्पल कड़े हो चुके थे और वो उन्हें अपनी उंगलियों से सहला रहे थे,उन्होंने फिर के रंग लिया और मेरे उरोजों में मलने लगे,मेरे योनि का गीलापन भी बढ़ रहा था उससे ज्यादा उसमे एक अजीब सी खुजली का अहसास हो रहा था,जो मुझे और भी बेचैन कर रही थी,मैं अपने दोनो जांघो को आपस में रगड़ने लगी ,जीजा बहुत ही ज्यादा समझदार निकले उन्होंने एक हाथ मेरे उरोजों से हटाया और मेरे जांघो के बीच लाकर रख दिया मेरे घाघरे के ऊपर से ही उन्होंने मेरे योनि को सहलाना शुरू किया .

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“आह जीजा क्या कर रहे हो ,मर जाऊंगी ओह माँ ,नही “लेकिन वो कहा मानते एक हाथ से मेरे स्तनों की हालत बुरी कर रखी थी तो दूसरे से मेरे योनि को मसलने लगे थे ,उनका मन अब भी नही भरा उन्होंने मेरे घाघरे का नाडा ही खोल दिया वो सरक कर जमीन में ही गिर जाता अगर मैं अपने हाथो से उसे नही पकड़ती मैं सर उठाकर जीजा को देखने या उन्हें रोकने की हालत में ही नही थी,उन्होंने ढीले घाघरे के अंदर से अपना हाथ घुसा दिया ,मैं अगर उन्हें रोकने को अपना हाथ उठाती तो घाघरा जमीन में ही गिर जाता मैं मचलती हुई खड़ी रही मुझे अजीब सी गुदगुदी हो रही थी ,

“जीजा प्लीज् ना नही “
“मेरी जान होली के दिन जीजा को कभी भी नही नही बोलते”उन्होंने मेरे गालो को भरकर चूमा और मेरे पेंटी के इलास्टिक को थोड़ा सरका कर मेरे नग्न योनि में अपने उंगलियों को ठिका दिया,वो अपनी उंगलियों से उसे नापने को हुए लेकिन योनि का मुह अभी पूरी तरह से बंद था वो ऊपर की त्वचा को ही सहलाने लगे ,मेरा गीलापन उनकी उंगलियों को भिगोने लगा ,मेरे लिए ये सब सहन करना ही मुश्किल था और मैं ऐसे झड़ी जैसे कोई बांध टूट गया हो,जैसे जोरो से पेशाब कर दी हो.,तो अब खड़े नही हो पा रही थी मेरे पाव लड़खड़ाने लगे ,उन्होंने मुझे सम्हाला और अपने हाथो को निकालकर मेरे कमर को पकड़ लिया मुझे अपनी ओर किया ,मैं उसके बांहो में खुद को छोड़ चुकी थी जैसे मैं बेहोश ही हो गई हु,उन्होंने मेरे गिरे हुए सर को उठाया और मेरे होठो को अपने होठो में मिला कर चूसने लगे,मैं इतनी भी शक्ति नही जुटा पाई की अपने प्यारे जीजा का साथ दे सकू.

“आई लव यू साली जी “
उन्होंने बड़े ही प्यार से कहा
“लब यू जीजा “मैं इतना ही बोल पाई मेरे होठो में मुस्कान खिल गई थी मुझे आज मेरे जीजा का इतना प्यार जो मिला था मुझे लगने लगा जैसे मैं उनके ही लिए हु ,मेरा सब कुछ उनका ही है,मैं थोड़ी संहली तो उनसे नजर ही नही मिला पाई ,मैं अंदर जाने को हुई उन्होंने फिर से मुझे अपनी ओर खिंच लिया और मेरे होठो में अपने होठो को भर लिया ,मैं एक हाथ से घाघरे का नाडा लगा रही थी उसे कसकर मैंने अपना हाथ उसके सर पर रख दिया हम दोनो बहुत देर तक एक दूसरे के होठो को चूसते रहे मेरे लिए ये सब पहली बार था लेकिन अब कोई भी डर मेरे अंदर नही था ना ही कोई संकोच ही बचा था,मुझे समझ आ गया था की मेरे जीजा मुझे कितना प्यार करते है और मुझे कितनी खुशिया दे सकते है,शायद इसी लिए दीदी इनकी इतनी दीवानी थी ,जब हमारा चुम्मन टूटा मैं शर्मा कर अपना सर उनके मजबूत कंधों पर ठिका दिया ,उन्होंने मेरे मांसल नितम्भो को सहलाया ,
“मजा आया “
मैंने ना में सर हिलाया जो की बिल्कुल ही गलत था
“अच्छा तब तो तुम्हे पूरा मजा देना पड़ेगा “
मैं सर उठाकर उन्हें आश्चर्य से देखने लगी
“कैसे “मैंने मासूमियत भरा प्रश्न किया
“अपने इस लकड़ी को तुम्हारे छेद में घुसकर “जीजा जोर से हँसे
लेकिन मैं बुरी तरह से शर्मा गई ,बचपन से ही मुझे सिखाया गया था की इस छेद को किसी को नही दिखाना और मर्दो को तो बिल्कुल भी नही ,ये गंदी जगह होती है,
“छि जीजा आप कैसी बाते करते है”

“अरे मेरी जान जब तक मैं अपनी इस पिचकारी से तुम्हे भिगोउंगा नही तब तक तो साली और जीजा की होली अधूरी ही रहेगी”
“नही खेलनी ऐसी होली ,अब छोड़ो ना देखो कहा कहा रंग लगा दिए हो ,दीदी देखेगी तो डाटेंगी मैं नहाने जा रही हु आप भी नहा लो “
मैंने उनसे खुद को छुड़वाया
“नहाऊंगा पहले तेरी दीदी को तो भिगो दु अपने इस पिचकारी से “उन्होंने अपने खड़े हुए लिंग की तरफ इशारा किया ,मैं शर्माते हुए भाग गई और वो दीदी के कमरे की तरफ चले गए………

सुमित्रा कमरे से बाहर आयी और थोड़ी देर में मेरे सामने की स्क्रीन बदल गई ,इस समय कमरे में नेहा भी थी ,सुमित्रा अभी बिस्तर पर लेट रही थी ,दिनेश और टाइगर उसके हुस्न को मुह फाडे हुए देख रहे थे ,वही नेहा की नजर अभी सुमित्रा को देख रही थी ,टाइगर ने अभी अभी रिमोट से मेरा विव्यु बदला था,कैमरे के तीन एंगल मेरे सामने थे ,एक से मैं सुमित्रा की पीठ और मसाज करते हुए उस व्यक्ति को देख सकता था ,ये साइड विव्यु था जिससे पूरा कमरा मुझे दिखाई दे रहा था ,दूसरा नीचे लगाया गया था जिससे मैं सुमित्रा के चहरे को आराम से देख पता अगर वो सर उठाती ,अभी उसके लेटने पर मुझे उसके बाल दिख रहे थे ,और थोड़े बाजू का चहरा लेकिन अभी उसका चहरा पूरी तरह से नीचे था ,अगर वो सर घुमाती तो मैं उसके चहरे को आराम से देख पाता,वो पेट के बल लेटे हुई थी ,तीसरा भी साइड से पूरे कमरे का विव्यु दे रहा था ,कमरा ज्यादा बड़ा नही था और कैमरे की क्वालिटी अच्छी थी जिससे मुझे आराम से सब कुछ दिख पा रहा था.

उस आदमी ने सुमित्रा के चहरे को उठाकर उसकी ठोड़ी के पास कुछ छोटे गड्ढे सा रखा जिससे सुमित्रा का सर थोड़ा ऊपर हो गया,उसके चहरे को अब सभी देख सकते थे ,वो हल्के से मुस्कुराई ,उस आदमी ने उसके बालो को पीछे करते हुए उसे साइड में सरका लिया ,अब सुमित्रा का चहरा स्पष्ट था,सुमित्रा की नजर नेहा से मिली उसने आंखों ही आंखों में उससे जैसे कुछ सवाल किया ,नेहा ने हल्के से हा में सर हिलाया ,और जो कैमरा सुमित्रा के चहरे को दिखा रहा था उधर इशारा किया सुमित्रा की आंखे सीधे उस कैमरे को देखने लगी ,एक बारी तो मैं ऐसे घबराया जैसे वो मुझे ही देख रही हो ,मुझे समझ आ गया था की सुमित्रा ने नेहा से क्या पूछा था और नेहा ने उसे क्या बताया होगा,लेकिन वहां बैठे बाकी लोग इसे जान नही पाए क्योकि किसी को नही पता था की नेहा उर्फ रेहाना असल में सुमित्रा की ही सहेली है….टाइगर ने नेहा को पास बुलाया और कुछ कहा नेहा वहां से निकल गई थी,वो आदमी अपने काम में लग चुका था ,मैंने एक ड्रिंक बनाई और हल्के हल्के सिप लेने लगा..

सुमित्रा के पैरो से मालिश शुरू हुई थी ,वो उसके एड़ी को मसल रहा था,वो एक पारदर्शी तेल का इस्तमाल कर रहा था ,सुमित्रा ने एक गहरी सास भरी जैसे वो कुछ सूंघ रही हो ,शायद वो तेल की ही खुसबू होगी,मेरी बीवी पर मेरे सामने हुआ किसी गैर का वो पहला स्पर्श ,मेरे अंदर से कोई झनकार उठी वही सुमित्रा ने एक आह भरी जिसकी आवाज मेरे कानो में भी पहुची ,

सुमित्रा की बाकियों के चहरे में एक मुस्कान आ गई,ऐसे तो सुमित्रा नियत से ही बहुत गर्म थी लेकिन फिर भी ना जाने टाइगर को क्या सुझा

“बेबी एक ड्रिंक लेना चाहोगी स्पेशल तुम्हारे लिए तैयार करवाया हु,उसे पीकर जन्नत में पहुच जाओगी “टाइगर के चहरे में एक अर्थ भरी मुस्कान तैर गई ,सुमित्रा थोड़ी देर सोचती रही लेकिन उसने ना में सर हिला दिया ,

“कॉमआन यार मजा आ जाएगा तुम्हे ,वो तुम्हे और भी गर्म कर देगा “टाइगर के चहरे में शैतानी मुस्कान खिल गई ,

“मैं तो ये सोचकर ही गर्म हो रही हु की मेरा पति मुझे देख रहा ह,मुझे अब किसी भी ड्रिंक की जरूरत नही है” “उसने दिनेश के तरफ इशारा किया लेकिन मुझे लगा जैसे वो मेरे बारे में कह रही हो,मेरा दिल बैठ गया लेकिन अगले ही पल मुझे ये भी याद आया की सुमित्रा ने उसे मना क्यो किया ,वो शायद जानती थी की टाइगर उसे क्या देने जा रहा था,शायद वही ड्रग्स ड्रिंक के फार्म में,जिससे सुमित्रा अपना सुध बुध खोकर वासना की अंधेरी राहों में गुम हो जाती ,लेकिन सुमित्रा तो दूध की जली थी,वो टाइगर के प्लान को समझकर बड़ी ही खूबी से उसे चुप करा दिया था,
सुमित्रा मुस्कुराते हुए दिनेश को देख रही थी जो की अपनी आंखे बड़ी बड़ी किये उस हुस्न को देख रहा था जिसे वो भोगा करता था(मुझे तो यही लगता था),शायद उसके दिल की धड़कन भी मेरी ही तरह बड़ी हुई थी …वही टाइगर शैतानी हँसी से मुस्कुरा रहा था उसने वहां लगे कैमरे की ओर देखा और अपनी मुस्कान और भी चौड़ी कर दी जैसे वो मुझे चिढ़ा रहा हो.

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वो आदमी अपने हाथो का जादू सुमित्रा पर चलाने लगा था,सुमित्रा की आंखे अपने ही आप बंद होने लगी थी,वो सिसकिया ले रही थी अब लड़के का हाथ उसके घुटनो तक को रगड़ रहा था,उसके मजबूत हाथो का स्पर्श सुमित्रा को पागल बना रहा था ,उसकी सांसे अनियंत्रित होने लगी थी,उसका हाथ मजबूत गोल जांघो के पास पहुचा ,सुमित्रा की मोटी जाँघे मुलायम और गद्देदार ,मैंने अपने जीवन में उसे बहुत मसला था मुझे उस व्यक्ति पर रस्क हो रहा था जो आज मेरी बीवी के जांघो में बिना किसी रोक टोक के हाथ फेर रहा था,उसके निकर से उसका मजबूत और विशालकाय काला लिंग (जो की मैं देख चुका था )तना हुआ दिखने लगा ,वो भी अब सुमित्रा के जांघो को छू रहा था,सुमित्रा को भी इसका अहसास हो रहा होगा क्योकि वो हल्के से मुस्कुराने लगी थी ,वो नाइटी को ऊपर उठा रहा था जैसे जैसे उसके हाथ ऊपर जाते वहां ढका हुआ कपड़ा ऊपर उठ जाता.

इधर मेरे लिंग का भी हाल कुछ अच्छा नही था मैं उसे बाहर निकलना चाहता था लेकिन मन में भरा हुआ वो दर्द जो मुझे ये सब देखकर हो रहा था वो मुझे इसे निकलने से मना कर रहा था ,मैं खुस की भावनाओ के द्वंद में फंसा कभी रोने तो कभी हँसने की स्तिथि में पहुच गया था,सही गलत के बीच फंसा मेरा मन एक जगह पर टिक ही नही पा रहा था,अभी अभी लड़के ने सुमित्रा के जांघो पर अपना लिंग जोर से दबाया था ,
“आह “सुमित्रा ने धीरे से कहा ,और मेरे लिंग ने फुंकार मारी,साथ में मेरी आँखों ने आंसू छोड़ दिए ,मैं एक नया पैक बना कर तुरंत ही पी गया ,सुमित्रा का कपड़ा अब उसके जांघो से पूरी तरह से ऊपर था.

चूतड़ों की गोलाई और भराव अब झांकने लगे थे ,मुलायम चूतड़ पेटी में कसे हुए ,दूधिया रंग के और आपस में कसे हुए थे,उस उत्तेजक दृश्य ने दिनेश और टाइगर की हालत भी खराब कर दी थी ,वो अपने पेंट से ही लिंग को मसलने लगे थे ,टाइगर उठा और सुमित्रा के चूतड़ों से कपड़ा उठा कर उसके कमर तक ला दिया ,वो अभी पेंटी में थी लेकिन फिर भी इतनी मदमस्त रस से भरी और भारी से कसाव वाले नितम्भो को देखकर बुड्ढे का भी लिंग झटके मारने लगे,टाइगर अपने हाथो से उसे सहलाने लगा ,सुमित्रा की आंखे और भी जोरो से बंद हो गई थी ,वो हल्की हल्की सिसकिया ले रही थी जो की मेरे कानो में गूंजने लगा था,मुझसे बर्दास्त नही हुआ और मैं वँहा से उठने ही वाला था की टाइगर की आवाज मेरे कानो में पड़ी.

“ये देख पूरी गीली हो गई है अभी से “
वो हंसा और दिनेश भी उठकर उसके पास आकर देखने लगा ,मैं फिर से वही जम गया,सुमित्रा की योनि रस से भीग चुकी थी जिसका सबूत उसकी पेंटी से झांकता हुआ वो गीलापन था जो की उसके योनि के रिसाव के कारण बना था,टाइगर अपनी उंगलिया उसके योनि के पास ले जाता और एक उंगली उसके योनि के फांको के बीच चला देता है ,
“आह नही “सुमित्रा धीरे से और लंबी सांसे ले कर बोलती है वो अपना चहरा पीछे करके झूठे गुस्से और हल्की मुस्कुराहट से टाइगर को देखती है ,दिनेश भी सुमित्रा को छूने वाला होता है लेकिन टाइगर उसे मना कर देता है
“तुम पति हो पति को छूने का नही बस देखने का अधिकार है”

कहानी अभी जारी है आगे की कहानी हम अगले पार्ट में शेयर करेंगे.

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