जिस्मानी होने की चाह हर किसी को होती है

आज की चुदाई स्टोरी प्रदीप की है जिसकी शादी अभी दो साल पहले ही हुई है, उसकी बीवी प्रतिष्टा बहुत स्मार्ट और सेक्सी है. दोनों ही अलग अलग बैंक में जॉब करते हैं. उनके पेरेंट्स जो आर्मी से रिटायर्ड हैं, सब साथ ही रहते हैं. पिता की अपनी कोठी है, पैसे की कोई कमी नहीं है.

प्रदीप और प्रतिष्टा अभी बच्चा नहीं चाहते अगले तीन साल तक… सेक्स लाइफ उनकी भरपूर रंगीन है. पिता रिटायर्ड भले ही हो चुके हों पर जिन्दगी जीना जानते हैं तो घर पर भी कोई पाबन्दी नहीं है.
अचानक प्रदीप को बैंक में एक ऑफर मिलता है कि 200 किमी दूर एक बड़े शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में बैंक को अपनी नई ब्रांच खोलनी है और उसे वहाँ का मेनेजर बना कर भेजा जा सकता है. सुविधाएँ सारी हैं पर काम बहुत ज्यादा है. 15 दिन मैं एक बार ही शायद घर आ पाए..
प्रतिष्टा ने तो उसको जाने को मना किया पर प्रदीप को ऐसा मौका दोबारा कभी नहीं मिलता, फिर उसके पिता ने प्रतिष्टा को समझाया- अभी प्रदीप को जाने दो, तुम्हारा ट्रान्सफर भी वहीं करवाने का प्रयास करेंगे, पर इसमें वक़्त लग सकता है.

प्रदीप ने नई ब्रांच ज्वाइन करी, शुरू के 15 दिन के लिए बैंक ने होटल मैं व्यवस्था कर दी. सारा स्टाफ नया था उस शहर के लिए. उसकी उम्र की एक ही लड़की थी रितुजा. वो भी प्रतिष्टा की ही उम्र की रही होगी और बहुत स्मार्ट थी… काम की अच्छी जानकारी थी उसे!
सही मायने में ब्रांच की पूरी जिम्मेदारी प्रदीप और रितुजा पर ही थी.

रितुजा शादीशुदा थी, उसकी शादी हुए तो डेढ़ साल ही हुआ था. उसका पति किसी कंपनी में मार्केटिंग में था तो रितुजा को अकेले रहने की आदत सी थी.
प्रदीप मकान ढूंढ रहा था… रितुजा भी! उनको मकान भी ऐसा चाहिए था जो फर्निशेड हो और अच्छी लोकेलिटी में हो. प्रदीप को तो डबल बेडरूम फ्लैट चाहिए था जिससे आज नहीं तो कल प्रतिष्टा आ ही जाएगी वो आराम से रह सकें.

उनकी ब्रांच के एक क्लाइंट ने प्रदीप को एक कॉलोनी में एक कोठी बताई, जिसमें तीन बेड रूम थे.
अब इतना बड़ा मकान प्रदीप क्या करता… पर लोकेशन बहुत अच्छी थी. कोठी के मालिक तीन साल के लिए किसी डेपोटेशन पर अगले सप्ताह विदेश जा रहे थे, तो जल्दी खाली करने की कोई चिंता भी नहीं थी.
जब प्रदीप ने उनसे कहा कि इतनी बड़े मकान का वो क्या करेगा, तो मकान मालिक ने जो बुजुर्ग थे, कहा- चलो तुम किराया कुछ कम दे दो.
उन्हें प्रदीप भला लगा… पर वो बोले- पूरी कोठी की जिम्मेदारी तुम्हारी है.

पूरा फर्निशड मकान कहाँ मिलता प्रदीप को… वो ऑफिस मैं बैठा सोच ही रहा था कि कोई एक बेडरूम का किराया शेयर कर ले तो बात बन जाए!
तभी रितुजा केबिन में आई, वो बोली कि उसे तो कोई ऐसी जगह नहीं मिल पा रही जहाँ सिंगल बेड रूम और किचन हो.
वो बहुत परेशान थी.
वो बोली कि वो किसी से मकान शेयर करने को भी तैयार है बशर्ते कोई उस जैसी लड़की हो.

प्रदीप ने उसे मकान की बात बताई और कहा कि वो सोच ले, अगर वो चाहे तो प्रदीप और वो मिलकर उस कोठी को ले लें. दो तिहाई किराया प्रदीप दे देगा और एक तिहाई रितुजा को देना होगा.
रितुजा के बेड रूम का रास्ता बाहर अलग से भी है और रितुजा चाहे तो ड्राइंगरूम शेयर कर सकती है.
रितुजा को हिचक हो रही थी, उसने अगले दिन बताने को कहा.

रात को रितुजा ने फेसबुक पर प्रदीप की प्रोफाइल और उसके परिवार को देखा, उसे वो लोग भले लोग लगे.
रितुजा ने अपने पति को बताया तो उसके पति ने उस शहर में जहाँ से प्रदीप आया था, अपने डीलर से प्रदीप के बारे में पूछा. वो प्रदीप को जानते थे, उन्होने तुरंत हाँ कह दी.

अब रितुजा ने भी प्रदीप से उस कोठी को दिखाने को कहा. कोठी देख कर उसका भी मन लट्टू हो गया और दोनों ही मकान मालिक के जाते ही उसमें शिफ्ट हो गए.

प्रदीप और रितुजा दिन भर साथ काम करते, रात को साथ ही बैंक से निकलते.
शुरू को दो-तीन दिन तो उन्होंने होटल में खाना खाया.
कोठी मैं दोनों के पास अलग अलग किचन था. एक दो दिन में रितुजा सहज हो गई, अब वो और प्रदीप सुबह की चाय साथ पीने लगे.

लंच तो बाहर से ही आता बैंक में, पर डिनर उन दोनों ने मिलकर बनाना शुरू कर दिया. अब दोनों में अच्छी पटने भी लगी. बीच में एक दिन को रितुजा का पति सर्वेश भी आया, वो भी स्मार्ट पर्सनालिटी का रंगीन तबियत का आदमी था तो तीनों ने साथ ही बाहर डिनर लिया… रात को देर तक तीनों गप्पें मारते रहे. रात को सर्वेश और रितुजा की जम कर चुदाई हुई… सेक्स कितना भी खामोश हो, आहट हो ही जाती है.
सुबह रितुजा भी देर से उठी… सर्वेश जा चुका था.

उसकी हालत देख प्रदीप हंस दिया और उसे चाय बना कर दी.
रितुजा शर्मा गई.
प्रदीप ने कहा- ये तो पेट की मजबूरी है, वर्ना इतनी हसीं जिन्दगी कोई ऐसे खराब करने के लिए नहीं होती.

अब उसके और रितुजा की नजदीकी बढ़ती गईं, दोनों एक साथ बेड पर बैठ कर टीवी देख लेते या बेड पर बैठ कर ही ऑफिस का साथ लाया काम निपटा लेते.
रितुजा चंचल थी तो कभी कभी प्रदीप को धौल लगा देती या प्यार से डांट देती.

एक दिन रितुजा को बुखार हो गया, प्रदीप ने उसे सुबह चाय के साथ बिस्कुट दिया और मेडिकल स्टोर से दवाई लाकर दी.
रितुजा बैंक जाने की जिद कर रही थी तो प्रदीप ने डांट कर उसे घर पर रुकने को कहा.

दोपहर प्रदीप घर आ गया, वो मौसमी का जूस लेकर आया था रितुजा के लिए. रितुजा के सर में बहुत दर्द था, प्रदीप ने उसके बहुत मना करने पर भी उसका सर दबा दिया और उसे सुला दिया.
रात को जब प्रदीप घर आया तो रितुजा का बुखार कम नहीं था, प्रदीप ने उसे कुछ खिला कर दवाई दी और ठंडे पानी की पट्टी से सिकाई करी.
रितुजा अब आराम से सो गई थी, प्रदीप वहीं एक कुर्सी पर सो गया.
रात को 2 बजे रितुजा की आँख खुली… अब उसका बुखार बिलकुल उतर चुका था. उसे प्रदीप वहीं सोता मिला. रितुजा को प्रदीप पर बहुत प्यार आया.

उसे ध्यान आया कि शायद प्रदीप ने तो आज डिनर भी नहीं किया होगा. वो किचन में गई और कॉफ़ी बना लाई और स्लाइस सेक लिए.
प्रदीप की भी आँख खुल गई थी, वो बोला- सॉरी… पता नहीं कैसे आँख लग गई, मैं अपने कमरे में जाता हूँ.
रितुजा ने उसे प्यार से हाथ मिला कर थैंक्स कहा और काफी पिला कर ही भेजा.

अगले दिन सुबह रितुजा बिलकुल फ्रेश थी… सन्डे था पर प्रदीप को आज भी बैंक जाना था.
रितुजा ने चाय बनाई और प्रदीप के कमरे में गई तो प्रदीप थक कर सो रहा था.

रितुजा को प्रदीप पर बहुत प्यार आ रहा था, वो प्रदीप के बाल सहलाने लगी.
प्रदीप की आंख खुल गई, वो हड़बड़ा कर उठा.
रितुजा हंस पड़ी.
असल में प्रदीप टी शर्ट नहीं पहने था तो उसे अजीब सा लगा. प्रदीप ने फटाफट टीशर्ट डाली… दोनों ने चाय पी और शाम पिक्चर देखने का प्रोग्राम बनाया.

प्रदीप दोपहर बाद बैंक से आ गया. शाम को मौसम खराब हो गया तो पिक्चर का प्रोग्राम तो कैंसिल कर दिया पर पास के एक होटल में डिनर करने चले गए.
होटल पास ही था तो पैदल ही चले गए, पर लौटते में तेज बारिश में भीग गए. दोनों भागते भागते घर आये. रितुजा को छींक आनी शुरू हो गई थी, डर लगा कि दोबारा बुखार न आ जाए.

प्रदीप ने रितुजा को जल्दी कपड़े बदलने को कहा और फटाफट अपने कपड़े बदल कर अदरक की चाय बनाई. रितुजा उसके कमरे में ही आ गई थी. आज पहली बार उसने कैपरी और टीशर्ट पहनी थी… खुले बालों में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी.

वो जैसे ही कमरे में घुसी, जोर की बिजली कड़की और लाइट चली गई. रितुजा डर गई और सामने खड़े प्रदीप से जा चिपटी. प्रदीप को भी इसका अंदाज नहीं था पर रितुजा डर रही थी तो उसने उसे अपने से चिपटा लिया और उसके गाल थपथपा दिए.

अंधेरे में दो जवान बदन चिपटे खड़े थे तो अचानक ही रितुजा ने मुंह ऊपर किया और उनके होंठ मिल गए. अब तो दोनों बेतहाशा एक दूसरे को चूमने चाटने लगे.
तभी लाइट आ गई और दोनों झटके से अलग हुए… दोनों को लगा कि ये कैसा पाप हो गया. दोनों की नजर नहीं मिल रहीं थीं.

पर रितुजा समझदार थी, उसने प्रदीप को सॉरी बोला और मुड़ कर जाने लगी.
प्रदीप ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे प्यार से बेड पर बिठाया और चाय देते हुए बोला- गलती मेरी थी!
रितुजा मस्त लड़की थी, बोली- चलो हिसाब बराबर…
दोनों ने हंसते हुए चाय पी.

प्रदीप बोला- अब ऐसा कभी नहीं होगा.
इस पर रितुजा बोली- बहुत बुरा लग रहा है या भले बनने की कोशिश कर रहे हो?
प्रदीप कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुरा दिया.

रितुजा ने उसकी ओर हाथ बढ़ाया और बोली ‘फ्रेंड्स…’
प्रदीप ने भी गर्मजोशी से हाथ मिलाया और बोला ‘येस्स्स… फ्रेंड्स!’
प्रदीप ने रितुजा के माथे पर एक प्यारा सा किस किया…. रितुजा अपने रूम में चली गई.

इधर प्रदीप को नींद नहीं आ रही थी, रह रह कर रितुजा के गर्म होंठ उसे भटका रहे थे.
वो उठा और किचन से पानी पीकर लौट रहा था कि उसने देखा रितुजा के रूम की लाइट जल रही है… हालाँकि लाइट हल्की थी, पर रूटीन में रितुजा रूम की लाइट बंद कर के सोती थी.

प्रदीप ने देखा डोर भी हल्का सा खुला है. उसने झाँका तो रितुजा बेड पर लेटी बार बार करवट बदल रही थी.. मतलब वो भी सोई नहीं थी. प्रदीप उसे देखता रहा.
अचानक रितुजा उठ कर बैठ गई और दरवाजे की ओर देख कर बोली- अंदर आ जाओ…
प्रदीप की तो जैसे चोरी पकड़ी गई… वो अंदर घुस और बेड तक पहुंचा.

रितुजा बेड से उतरी और बेल की तरह लिपट गई प्रदीप से… प्रदीप ने भी उसे जोर से भींच लिया. होंठ फिर मिल गए… अब बेताबी ज्यादा थी… सांसें गर्म हो चुकी थीं, प्रदीप ने रितुजा के टॉप के अंदर हाथ डाल कर उसकी पीठ को सहलाना शुरू किया. रितुजा ने नीचे कुछ नहीं पहना था.
अब उनके कपड़े एक एक करके उतर गए और दोनों बेड पर एक दूसरे में सामने की कोशिश में लग गए.

रितुजा नीचे थी और प्रदीप सीधा उसके ऊपर लेट गया, रितुजा ने अपने हाथ से उसका लंड अपनी चूत में कर लिया. प्रदीप ने पूरे जोर से उसकी गहराइयों तक अपना लंड पेला. रितुजा का शरीर सख्त हो गया और उसने भी प्रदीप के पैरों को अपनी टांगों से दबोच लिया.

कुछ देर की धक्कम पेल के बाद प्रदीप ने पूछा- कहाँ निकालूँ?
तो रितुजा बोली- अंदर ही आ जाओ… मैं सेफ हूँ!
इसके बाद दोनों अगल बगल एक दूसरे को देखते हुए लेट गए और सो गए.

इस फ्री सेक्स स्टोरी में आपने अब तक पढ़ा कि रात में प्रदीप और रितुजा के बीच सेक्स हो गया और दोनों सो गए.
सुबह प्रदीप की आँख पहले खुली, उसने रितुजा को किस करके उठाया और अपने कपड़े पहन कर रूम में चला गया.
दोनों एक घंटे बाद किचन में मिले तो रितुजा उससे चिपट गई और थैंक्स बोला… उसे कोई पश्चाताप नहीं था तो अब प्रदीप भी रिलैक्स्ड था.

दोनों ने नाश्ता किया और बैंक निकल लिए.
अगले दिन बैंक हॉलि डे था तो प्रदीप और रितुजा दोनों ने ही अपने अपने घर जाने का प्रोग्राम बनाया.
प्रदीप ने रितुजा को तो दोपहर को ही फ्री कर दिया जिससे वो घर चली जाए, वो खुद शाम को निकल लिया.

प्रतिष्टा को उसने फोन कर दिया था, रात को 10 बजे वो घर पहुँच कर सबके साथ डिनर करके, गप्पबाजी करके वो अपने रूम में पहुँचा.
थोड़ी ही देर में प्रतिष्टा भी आ गई. डोर लॉक करते ही दोनों बरसों के बिछड़े की तरह चिपक गए.

प्रतिष्टा रो रही थी कि उसका मन नहीं लगता और वो नौकरी छोड़ कर उसके पास आना चाहती है क्योंकि ट्रान्सफर नहीं हो पा रहा है.
प्रदीप ने उसे समझाया कि ऐसे दिल छोटा नहीं करते… एक लगी बंधी आमदनी घर आ जाती है.
प्रदीप ने उसे समझाया कि वो अपना फ्रेंड सर्किल बढ़ाये और मस्त रहे… दोनों के बीच यह तय हुआ कि हर पंद्रह दिनों के बाद दो दिन के लिए प्रदीप यहाँ आयेगा और तीन दिनों के लिए प्रतिष्टा वहाँ रहेगी.

प्रतिष्टा प्रदीप से चिपटी हुई थी.
दोनों साथ नहाने के लिए गए… शावर की बौछार के नीचे दो बदन चिपटे हुए अपनी प्यास बुझा रहे थे. प्रदीप तो प्रतिष्टा के मम्मों का पहले ही दीवाना था तो आज तो वो उन्हें खा ही जाना चाहता था.
प्रतिष्टा अपने मम्मों को बचाने के लिए नीचे बैठ गई और प्रदीप का लंड अपने मुंह में ले लिया. उसकी चुसाई इतनी जबरदस्त थी कि प्रदीप को लगा उसका माल अभी छूट जाएगा तो उसने अपने को अलग किया और टॉवल लपेट कर बेड पर आ गया.

प्रतिष्टा ने भी अपना बदन पौंछा और वो नंगी ही बेड पर आ गई और आते ही टूट पड़ी प्रदीप पर… वो उसके ऊपर चढ़ गई और उसका लंड अपनी चूत में करके करने लगी उसकी घुड़सवारी… प्रदीप भी नीचे लेटा लेटा उसे धक्के दे रहा था.
फिर प्रदीप ने उसे नीचे पलटा और उसकी टांगें ऊपर करके चौड़ी कर दी और घुसेड़ दिया उसकी चूत में लंड… अब तो बेड पर वो घमासान हुआ कि शायद आवाज नीचे उसके माँ बाप तक भी पहुँच गई होगी.
थक कर दोनों चिपट कर सो गए.

प्रतिष्टा की आँख सुबह 4 बजे खुली तो उसने प्रदीप का लंड फिर मुख में ले लिया और उसकी नींद खोल दी… फिर एक बार चुदाई हुई.

सुबह नहाकर 9 बजे दोनों नीचे आये तो प्रदीप की माँ पिताजी ने हंसते हुए कहा- खुल गई आंख…
दोपहर को पूरा परिवार मूवी गया और रात को बाहर डिनर लेकर लौटे.

इन दो रातों में प्रदीप और प्रतिष्टा ने अपना चुदाई का कोटा पूरा कर ही लिया. बीच में दो-तीन बार प्रदीप की रितुजा से भी बात हो गई.
रितुजा ने प्रदीप को बताया कि उसके पति सर्वेश का ट्रान्सफर प्रदीप के पुराने शहर में ही हो गया है और उसके लिए कोई वन बेडरूम सेट वो ढूंढ दे.

प्रदीप के पास तो टाइम नहीं था, इसलिए उसने सर्वेश से बात करके अपने पिताजी से मिलने को कह दिया और जब तक मकान न मिले वो प्रदीप के घर ही रह ले, ऐसा उसने सर्वेश से कहा. सर्वेश की बारे में प्रदीप ने प्रतिष्टा और अपने पेरेंट्स को बोल दिया कि वो अच्छा आदमी है.

प्रदीप के पेरेंट्स बोले कि कोठी के पीछे जो एक रूम सेट है, उसे ठीक करा देते हैं… ऐसी लगवा देंगे. अगर सर्वेश को ठीक लगे तो वह रह ले…
किराया तो सर्वेश की कंपनी देगी ही.
असल में प्रदीप के पेरेंट्स को भी लगा कि उन्हें भी एक कंपनी मिल जाएगी, वर्ना पैसों की तो उन्हें कोई आवश्यकता नहीं थी.
प्रदीप ने प्रतिष्टा से कह दिया कि सर्वेश से वो एक बार ही मिला है पर वो रितुजा के माध्यम से इतना कह सकता है कि वह खुशदिल, मस्त और दोस्ती लायक है.

प्रदीप ड्यूटी पर चल गया, वो सीधे बैंक ही पहुंचा. रितुजा एक दिन पहले शाम को आ गई थी तो वो ब्रेकफास्ट पैक करके लाई थी.
प्रदीप ने उसे भी लंच के साथ ही खाया.

शाम को प्रदीप को बैंक से जाते काफी लेट हो गया, रितुजा को उसने जल्दी ही भेज दिया था.
रात को जब प्रदीप घर पहुंचा तो पूरा घर महक रहा था. रितुजा ने कल और आज में पूरा घर चमका दिया था और उसका बेड रूम भी अच्छे से सेट कर दिया था.
डिनर में उसने आज प्रदीप का मनपसंद खाना बनाया था.

प्रदीप ने मुस्कुरा कर उसके दोनों हाथ पकड़ कर थैंक्स कहा तो रितुजा बोली- फटाफट नहा आओ, फिर खाना खायेंगे, बड़ी जोर से भूख लगी है.
प्रदीप बोला- तुम भी फ्रेश हो आओ!
रितुजा ने प्रदीप के बेड पर नए लुंगी और कुरता रखे थे जो वो प्रदीप के लिए खरीदकर लाई थी. प्रदीप ने नहाकर वही पहन लिए. जब वो बाहर आया तो देखा रितुजा किचन में है और उसने वही सेम नाइट ड्रेस पहनी हुई थी और उस पर बहुत खिल रही थी.

रितुजा उसे देख कर मुस्कुराई… प्रदीप ने जकर उसे पीछे से चिपटा लिया और उसके होंठों पर किस कर लिया जिसका जवाब रितुजा ने अपनी जीभ उसकी जीभ से अच्छे से टकरा कर दिया.

डिनर तैयार था, आज रितुजा ने एक ही प्लेट में खाना लगाया और दोनों ने एक ही प्लेट में खाना खाया. कभी प्रदीप ने रितुजा को बाइट खिलाया कभी रितुजा ने प्रदीप को!
डिनर से फारिग होकर दोनों ने मिलकर किचन को साफ़ किया.

प्रदीप बोला- मैं तुम्हारे लिए कॉफ़ी बनता हूँ…
उसने दो कप कॉफ़ी बनाई और लेकर अपने बेड रूम में आ गया. दोनों बेड पर बैठ कर कॉफ़ी पीते हुए अपने घर के किस्से बताने लगे.

रितुजा ने हंस कर कहा- वैसे तो तुम्हारी भी वही स्थिति रही होगी, मेरे पति का तो इन दो दिनों में मन ही नहीं भरता…
हालाँकि रितुजा ये कहते हुए रुआंसी हो गई थी. बात भी ठीक है, बिना जीवनसाथी के क्या रहना… सिर्फ सेक्स सब कुछ नहीं होता.
प्रदीप ने रितुजा को रुआंसी देख के अपने पास कर लिया तो रितुजा भी उसकी छाती पर सर रख कर सुबुकने लगी. प्रदीप ने एक बार बहुत होली से उसके गालों को थपथपा कर किस कर दिया. उसके स्पर्श और प्यार से रितुजा नार्मल हो गई.

दोनों ने कॉफ़ी ख़त्म की और रितुजा अपने रूम में जाने के लिए उठी, तो प्रदीप ने हाथ पकड़ लिया… रितुजा भी जाना कहाँ चाहती थी, वो पलटी और प्रदीप ने उसे खींच लिया, रितुजा सीधी प्रदीप की बाँहों में झूल गई, उनके होंठ मिल गए, दोनों बेड पर ही चिपट गए.

रितुजा के पैर प्रदीप के पैरों को रगड़ रहे थे, दोनों की लुंगी जांघों तक उठ गई थी… प्रदीप के हाथ अब रितुजा के मम्मों पर थे.
रितुजा एक बार तो बोली- प्रदीप, हम ये गलत तो नहीं कर रहे?
पर प्रदीप ने बजाए जवाब देने के उसका टॉप उतार दिया और अपना भी… धीरे धीरे दोनों ही बिना कपड़ों के चादर के अंदर चिपटे ही थे. प्रदीप ने लेटे लेटे ही अपना लंड रितुजा की चूत में कर दिया.
रितुजा ने अपनी टांगें कस के मिला ली जिससे प्रदीप का लंड भी चूत में टाइट हो गया.
दोनों के जीभ आपस में टकरा रहीं थीं.

तूफ़ान ऐसा था कि मानो दोनों एक दूसरे में समा ही जायेंगे.
तभी रितुजा ऊपर आ गई और प्रदीप के ऊपर बैठ कर चुदाई करने लगी.
उसकी स्पीड तेज थी.. नीचे से प्रदीप भी उछल रहा था. प्रदीप ने सारा माल रितुजा की चूत में भर दिया.. नीचे से किया था तो रितुजा के उठते ही उसका वीर्य टपकता हुआ बेडशीट पर आ गया. रितुजा बोली- छी.. सड़ा दिया सारा बेड…

दोनों हंसते हुए वाशरूम से साफ़ करके आये.

रितुजा ने बेड शीट उतार कर वाश रूम में डाली और दूसरी बेड शीट बिछाई और प्रदीप से बोली- अब चुपचाप सो जाओ… मैं भी अपने रूम में जा रही हूँ, सुबह ये शीट धो दूँगी.
अब रोज का सेक्स इनका नियम बन गया था.

उधर प्रदीप के शहर में रितुजा का पति सर्वेश भी प्रदीप के घर पर शिफ्ट हो गया और जल्दी ही परिवार से घुलमिल गया.
एक बार रितुजा भी आई तो उसे प्रतिष्टा और प्रदीप के पेरेंट्स ने बहुत प्यार दिया.

प्रतिष्टा जब प्रदीप के पास आई तो दोपहर बाद रितुजा ने बैंक से छुट्टी ले ली और प्रतिष्टा को समय दिया.

प्रदीप के पेरेंट्स को अचानक एक शादी में दो दिन के लिए जाना पड़ा और उस समय क्लोजिंग का समय होने से न तो प्रतिष्टा को छुट्टी मिली न प्रदीप आ पाया.
प्रदीप के पेरेंट्स प्रतिष्टा को सर्वेश के भरोसे छोड़ कर चले गए.

शाम को जब प्रतिष्टा घर वापिस आई तो सर्वेश ने पूछ लिया- कोई काम हो तो बता दीजियेगा.
प्रतिष्टा हंस कर बोली- खाना बना दीजिये…
सर्वेश बोला- मेरा बनाया हुआ आप खा नहीं पाएंगी, चलिए डिनर बाहर करते हैं.

प्रतिष्टा को भी सर्वेश के साथ कम्फ़र्टेबल लगता था और प्रदीप के कहने पर उन दोनों के बीच दोस्ताना सम्बन्ध हो गए थे तो प्रतिष्टा फ्रेश होकर जीन्स टॉप डाल कर सर्वेश के साथ उसकी बुलेट मोटरबाइक पर जाने के लिए बाहर आई. दोनों बिल्कुल कॉलेज स्टूडेंट्स लग रहे थे.

प्रतिष्टा शादी के बाद कभी बाइक पर नहीं बैठी थी, अपनी कॉलेज लाइफ में तो उसने बाइक पर बहुत मस्ती की थी, तो वो संकोच में एक तरफ पैर करके बैठने लगी, तो सर्वेश हंस कर बोला- हम डेट पर जा रहे हैं या तीर्थयात्रा पर?
प्रतिष्टा हंस पड़ी और दोनों ओर पैर करके बैठ गई और अपने दोनों हाथों से सर्वेश के कंधे पकड़ लिए.

सर्वेश ने बाइक दौड़ा दी प्रतिष्टा को भी पुराने दिन याद आ गए… और प्रदीप की ओर से दोस्ती की खुली छूट थी तो अब प्रतिष्टा भी चिपक कर बैठ गई सर्वेश से. उसके मम्मों का दबाव सर्वेश की पीठ पर था तो सर्वेश को भी मस्ती आ गई.. एक इमरजेंसी ब्रेक.. और प्रतिष्टा बिलकुल चिपट गई सर्वेश से…
प्रतिष्टा उसकी बदमाशी समझ गई और उसने पीछे से एक धौल लगा दिया उसके, पर फिर चिपट गई और अपनी बाहें उसकी बाँहों के नीचे से ऊपर कर दीं.. बिल्कुल प्रेमी जोड़ों की तरह…

डिनर लेकर दोनों इंडिया गेट पर घूमते रहे. अब दोनों ने एक दूसरे के हाथ भी थाम रखे थे.
रात को 11 बजे के बाद ही दोनों घर वापस आये.

सर्वेश प्रतिष्टा को बाय बोल कर अपने रूम में चला गया.. आज प्रतिष्टा बहुत बेचैन थी, उसको सर्वेश का साथ बहुत अच्छा लगा था. उसकी चूत भी दो बार पानी छोड़ चुकी थी पर वो अपने मन में घबरा रही थी इस तरह प्रदीप को धोखा देकर!
प्रतिष्टा ने कपड़े बदले और बेड में घुस गई. उसने प्रदीप को फोन मिलाया.

उधर प्रदीप और रितुजा चिपटे पड़े थे, प्रतिष्टा का फोन देख कर प्रदीप चौंका, फोन तो उठाना ही था, उसने रितुजा को आहिस्ता से अलग किया और फुसफुसा कर कहा- प्रतिष्टा का फोन है…
रितुजा प्रदीप से चिपटी हुई थी… वो भी झटके से अलग हुई और प्रदीप की छाती पर उसके बालों से खेलने लगी.

प्रदीप ने फोन उठाया, प्रतिष्टा रो रही थी… बोली- तुम वापस आ जाओ, मेरे को तुम्हारी बहुत याद आ रही है.
प्रदीप भी ये सुन कर बेचैन हो उठा… प्रतिष्टा ने उसे शाम को बता दिया था कि सर्वेश उसे डिनर पर ले जा रहा है तो उसने तो उसे उकसाते हुए कहा था- सर्वेश बढ़िया लड़का है, उससे दोस्ती कर लो, तुम्हारा वक़्त भी अच्छा निकल जायेगा.
तो प्रदीप ने पूछा- क्या हुआ.. क्या सर्वेश से कोई बात हो गई?

सर्वेश का नाम सुनकर रितुजा भी चौंकी.. प्रदीप ने स्पीकर फोन खोल दिया.. तो सुबकते हुए प्रतिष्टा बोली- नहीं, सर्वेश तो बहुत अच्छा आदमी है. बहुत ध्यान रखता है, पर क्या इतनी नजदीकी ठीक है?
उसकी बात सुन कर प्रदीप हंस पड़ा… बोला- कोई बात नहीं, वो रोमियो है तुम उसकी जूलिएट बन जाओ… कुछ भी करो, बस रोओ मत खुश रहो…
प्रतिष्टा बोली- कल को बाद ज्यादा बढ़ गई तो?
तो प्रदीप बोला- मुझे मालूम है कि तुम भागोगी नहीं उसके साथ… और भाग भी गईं तो लौट आओगी क्योंकि तुम जानती हो हम दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते.

प्रदीप ने उसे फिर समझाया कि अगर किसी से दोस्ती करके मन बहलता है तो थोड़ी बहुत बेईमानी में कुछ हर्ज़ नहीं!
कह कर वो हंस पड़ा.

अब प्रतिष्टा भी नार्मल हो गई थी और हंस पड़ी.
प्रतिष्टा ने घड़ी देखी, 12 बज गए थे.. उसने सर्वेश को एक मिस्ड कॉल दी.

सर्वेश ने तुरंत ही पलट कर फोन किया, वो घबरा कर बोला- क्या हो गया?
प्रतिष्टा बोली- नींद नहीं आ रही.. कॉफ़ी पियोगे?
सर्वेश ने हाँ कह दी.. पर बोला- एक शर्त है, वो ही पहने रहना होगा जो अभी पहने हो…
प्रतिष्टा बोली- धत्त…
क्योंकि वो तो शार्ट नाइटी में थी.

उसने फटाफट एक गाउन डाला और किचन में चली गई… डोर पर नॉक हुई तो उसने दरवाजा खोला.. सर्वेश शॉर्ट्स और स्लीवेलेस टीशर्ट में था, उसका बॉडी का कसाव और मांसल डोले-शोले झलक रहे थे.. उसके हाथ में एक गुलाब का फूल था जो उसने बाहर लॉन से तोड़ा होगा.

सर्वेश ने बड़ी स्टाइल से नीचे बैठ कर फूल उसे प्रेजेंट किया तो प्रतिष्टा ने भी झुक कर फूल लिया और फूल को किस किया.
सर्वेश बोला- हाय… काश हम फूल होते…
उसका मतलब समझकर प्रतिष्टा ने हंसते हुए उसे भी किस कर लिया और किचन में भाग गई क्योंकि उसे मालूम था कि अब अगर वो रुकी रही तो तबला बज जायेगा.

सर्वेश ने पीछे से उसे बताया कि अभी रितुजा का फोन आया था, कह रही थी कि प्रतिष्टा का ख्याल रखना…
प्रतिष्टा कॉफ़ी लेकर ड्राइंग रूम में आ गई, दोनों सोफे पर बैठ कर कॉफ़ी पीने लगे.

सर्वेश ने अपना मग टेबल पर रखा और प्रतिष्टा के दोनों हाथ पकड़ कर बोला- आई लव यू…
प्रतिष्टा बोली- आई लव यू टू… पर ये गलत है… धोखा है अपने पार्टनर्स से…
सर्वेश खड़ा हो गया और बहुत बेचैनी से बोला- प्रतिष्टा, मैं अच्छे से जनता हूँ कि ये गलत है पर मैं क्या करूं, मैं रितुजा के बिना नहीं रह पाता.. मुझे सेक्स का बहुत शौक है. अब मैं बाजार में तो जा नहीं सकता इसके लिए… आखिर हमारी भी कुछ बायोलॉजिकल नीड्स हैं.. और हमारे पार्टनर्स की भी मजबूरी है वर्ना वो हमें अकेला नहीं छोड़ते!

सर्वेश भला आदमी था.. वो प्रतिष्टा के अकेलेपन का कोई फायदा नहीं उठाना चाहता था, उसने एक घूँट में कॉफ़ी ख़त्म की और तेज चलकर बाहर निकल गया.

प्रतिष्टा गुमसुम सी बैठी रही, उसे नहीं समझ आ रहा था कि वो क्या करे… उसे सर्वेश से चिपट कर प्यार करने का मन हो रहा था पर कुछ मर्यादाएं उसे आगे बढ़ने से रोक रही थीं.

तभी अचानक प्रदीप का फोन आया, वो बोला- मैं जानता था कि तुम अभी सोई नहीं होगी.. प्रतिष्टा… मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ और एक बात बताना चाहता हूँ कि अगर यहाँ रितुजा नहीं होती तो मैं यहाँ नहीं रह पाता.. वो एक अच्छे दोस्त की तरह मेरा बहुत ख्याल रखती है… इस समय वो भी मेरे पास बैठी है, लो बात करो उससे!

प्रतिष्टा चौंक गई, इस समय रितुजा प्रदीप के बेड रूम में??
रितुजा फोन पर आई, बोली- घबराओ मत प्रतिष्टा, मैं अभी आई हूँ, मेरे पास सर्वेश का फोन आया था, वो बहुत परेशान था… वो बहुत रोमांटिक है पर धोखा देने वाला आदमी नहीं है. वो कह रहा था कि उसकी किसी बात का तुम बुरा मान गई हो.. प्रतिष्टा मैं अपने पति को जानती हूँ.. वो रोमांटिक है, आशिक मिजाज है पर कुछ ऐसा नहीं करेगा जिस पर तुम्हें या उसे बाद में पछतावा हो. तुम उस पर विश्वास कर सकती हो. और जो तुम्हें अच्छा लगे उतना उसका साथ एन्जॉय कर सकती हो.

फोन कट गया.

प्रतिष्टा उठी और गेट खोल कर बाहर निकली.

सर्वेश लॉन में बैठा था. वो भाग कर उसकी बाहों में जा समाई, दोनों के होंठ मिल गए.. सर्वेश ने उसे गोद में उठाया और अंदर ले आया और धीरे से सोफे पर लिटा दिया.
दोनों सोफे पर ही चिपट गये… कब उनके कपड़े उतर गए, कब दो शरीर एक हो गए… दोनों के चेहरे एक दूसरे के थूक से चमक रहे थे… दोनों की जीभें पूरे चेहरे पर घूम रहीं थी.

सर्वेश ने पूरी गहराई तक जाकर उसकी चुदाई की थी… दोनों के शरीर पसीने से लथपथ हो गए थे और दोनों निढाल होकर सोफे पर ही पड़ गए.
थोड़ा संभल कर सर्वेश उठा और प्रतिष्टा को किस करके कपड़े पहन कर अपने रूम में चला गया.
प्रतिष्टा ने भी डोर लॉक किया और सब कुछ ठीक करके वाशरूम में घुस गई.

अगले दिन सर्वेश सुबह प्रतिष्टा को दिखाई नहीं दिया, शायद जल्दी ही चला गया था.
उसका व्ट्सएप मेसेज था.. ‘पता नहीं सही हुआ या गलत.. पर एक अच्छे दोस्त की तरह मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा…पर प्लीज कभी प्रदीप या रितुजा को ये मत बताना… वर्ना हम दोनों ही उनकी निगाहों में गिर जायेंगे…’
प्रतिष्टा ने सर्वेश को जवाब दिया… ‘मैं भी एक अच्छे दोस्त की तरह तुम्हारे साथ हूँ.. शाम को घर जल्दी आना…’

तो दोस्तो, यह थी मेरी फ्री सेक्स स्टोरी…