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कामवासना का सुख दोनों को मिला

हेल्लो दोस्तों मेरी ये पहली कहानी मस्ताराम को भेज रहा हूँ और मैं चाहता हूँ की वो अपने अंदाज में मेरी कहानी को पब्लिश करे. दोस्तों मेरा नाम तनिष है, हमारा गाँव छोटा सा है. मेरे घर के सामने दीक्षा नाम की एक लड़की रहती है. बड़ी कमाल की है वो चिड़िया. चलते समय उसकी गांड बहुत सेक्सी ऊपर नीचे होती है. उसका सीना देखते ही मेरे तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. वो लगभग पांच फीट ऊँची होगी. मैं तो उसका आँखों से ही चोदन करता रहता हूँ. उसको बिस्तर में इस्तेमाल करने की बड़ी आस मन में हमेशा से थी, है, और रहेगी.

इन दिनों में गाँव को तीन दिन में एक बार ही नल पे पानी मिलता है. तो बावड़ी से पानी खींचते वक्त मेरा हाथ उसके सीने के नीचे वाले भाग को लग गया. वो तो गुस्सा हो गई, कहने लगी कि जानबूझ कर मैंने उसे हाथ लगाया. मन में मैंने कहा कि हाथ तो क्या, मैं तुझे चोदना चाहता हूँ.
मन में कहने से क्या होता है भला!

एक बात तो बताना भूल ही गया, उसकी छोटी बहन विशाखा जो अभी पढ़ती है. वो तो एटम बम है. छोटी सी है पर वो भी कमाल है. मैंने अभी तक किसी भी लड़की को चोदा नहीं है, ना ही किस किया था
दीक्षा अभी पेपरों की तैयारी कर रही है. परसों रात की बात है. रात के 11:30 बजे पर मैं मूतने के लिए बाहर आया तो उसके घर की लाईट जल रही थी. मैंने पास जाकर देखा कि वो पढ़ाई कर रही है.
मैंने उसे कहा- थक गई होगी, सो जाओ अब!
उसने कहा- तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
“तुझे देख रहा हूँ.”

मेरे सीने मैं धक धक हो रही थी कि अगर वो चिल्लाएगी तो मेरे इज्जत का तो फालूदा निकल जायेगा.
मैं उसकी प्रतिक्रिया देखने के लिए वहीं खड़ा रहा तो वो बड़े गुस्से से मुझे देख रही थी. वो चिल्लाई नहीं तो मेरा हौसला और भी बढ़ गया.
मैंने कहा- ये गुस्सा बिस्तर पे दिखा तो मैं जानू!
वो खिड़की बंद करने लगी तो मैंने कहा- सोच कर देखो एक बात, मैं तो घर का ही हूँ… बाहर बात नहीं जायेगी.
तो उसने बड़ी जोर से खिड़की बंद कर ली.
मैं तो सोने चला गया.

अगली सुबह मैंने देखा कि वो और उसकी माँ (वो भी सेक्सी) जा रही थी, तो मैंने पूछा- मामी जी कहाँ जा रहे हो?
“डॉक्टर के पास!” उनका जवाब आया.
मैंने कहा- ज्यादा पढ़ाई हो गई है, इसे तो अब इंजेक्शन की जरूरत है.
दीक्षा तो मुझे गुस्से से देख रही थी क्योंकि मेरी बात सिर्फ वो ही समझी और कोई नहीं.

उस रात फिर से मैंने देखा कि खिड़की फिर से खुली है. मैं समझ गया कि कल की बात उसे पसंद आ गयी है, आज थोड़ा सा घी डालना है बस… और मेरे बाबू राव को वो पहला सुख मिल जाएगा.
मैं खिड़की के पास गया और पूछा- मेरे बारे में क्या सोचा है?
पहले तो उसने ऊपर ही नहीं देखा… कुछ भी नहीं बोली… तो थोड़ा सा धीरज करके मैंने कहा- पढ़ाई कर के थक गई होगी तो मुझसे मालिश ही करवा लो!
तो उसने ऊपर देखा तो उसकी आँखों में आंसू थे.
मैं डर गया और वहाँ से भाग गया.

अगली सुबह उनके घर के सामने एक गाड़ी खड़ी हुई और दीक्षा के माँ बाप और सेक्सी बहन बैठ कर चले गए.
शायद दीक्षा पढ़ाई के वजह से नहीं गयी ऐसा मैंने सोचा. और मैं अपने काम पर चला गया.

उसी रात गांव में चोर आ गये, बड़ा हल्ला गुल्ला हुआ और दीक्षा अकेली थी तो वो डर गई. उसने मेरी मम्मी को कहा- चाची, आप मेरे साथ मेरे घर में सो जाऊ, मुझे डर लग रहा है.
तो मम्मी ने मुझ से कहा- तू चला जा इसके साथ!

मैं तो यहीं चाहता था पर मैंने कहा- मुझे मेरे थोड़ा सा काम है, आप ही जाओ.
तो मम्मी ने कहा- बेटा, हम औरतें, अगर वहाँ चोर आयेंगे तो क्या कर लेंगी? कोई तो पुरुष होना जरूरी है.
मैंने कहा- फिर आप भी चलो हमारे साथ!
तो उन्होंने कहा- बेटा, बहाने मत बना, जा जल्दी!
तो मुझे जाना पड़ा.

उनका घर दो मंजिला था. जब मैं घर गया तो उसने कहा- ऐसी वैसी बातें मत करना, मुझे पढ़ाई करनी है.
मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मुझे रात 11.30 का इंतजार था. जब सारा गाँव सो जाता है.

मैं भी वहाँ सोफे पर सो गया. 11.30 बज गए पौने बारह भी बज गए, तो उसने किताब बंद की और सोने को चल दी.
मैंने अब उससे कहा- क्या सोचा है मेरे बारे में? बात सिर्फ आपस में ही रहेगी.
तो उसने कहा- मेरा एक लड़के के साथ चक्कर है और हमारा सब कुछ हो गया है.
मेरे मूड थोड़ा ख़राब हो गया, फिर मैंने सोचा कि पहला चान्स आया है, क्यों छोड़ूँ, मैंने कहा- कोई बात नहीं जी, हमसे मालिश तो करवाइये!

उसने तरस खा के पूछा- आखिर तुम्हें चाहिए क्या?
“तुम्हें चोदना…”
यह सुन कर तो उसकी आँखें खुली की खुली है रह गई. उसने कुछ नहीं कहा और वो ऊपरी मंजिल पर सोने चली गई. मैंने भी सारी लाईट दरवाजे बंद कर लिए और ऊपर गया. तो उसने कमरा अन्दर से बंद कर रखा था.
12 अभी तक नहीं बजे थे, अभी कुछ मिनट बाकी थे, मैंने दरवाजे पर टिक टिक की और बोला- प्लीज दीक्षा, मुझे तेरी रिक्शा में बैठने दो ना!!!
तो भी उसने दरवाजा नहीं खोला.

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मैंने भी ठान ली है कि आज उसको चोद कर ही रहूँगा. यही नहीं, उसकी बड़ी गांड में मेरा सारा माल डाल दूंगा. बहुत तरसाया है साली ने…
लगभग 10 मिनट मैं उसका दरवजा बजाता रहा. तभी उसने दरवाजा खोल दिया. देखा तो मैं देखता ही रह गया… उसने अपनी पहले पहनी हुई ड्रेस उतार दी थी और पतली सी झिरिमिरी की नाईट गाउन पहने खड़ी थी.
उसने मुँह टेढ़ा करके कहा- मुझे तेरे साथ नहीं सोना है.
“पर मुझे तो तेरे साथ सोना है ना… प्लीज… ना मत कर…” मैं आगे हुआ और उसके हाथ को चूमा और कहा- एक चान्स दे दो प्लीज… तुम्हें नाराज नहीं करूँगा.
वो कुछ भी नहीं बोली.

मैंने उसके हाथों को सहलाना शुरू कर दिया.
“उसका नाम क्या है?” मैंने पूछा.
“किसका?” वो बोली.
“जिसके साथ तुम्हारा चक्कर है… उसका!”
“नहीं यार, तुमसे छुटकारा पाने के लिए मैंने ऐसे ही झूठ कहा था.” वो बोली.

“अभी तक तुम वर्जिन हो?” मैंने पूछा.
“हाँ…”
मेरे मन में तो लड्डू फूटे… आहिस्ता आहिस्ता मैंने उसकी गर्दन को चूमना चालू कर दिया. हाथ अपना काम कर रहे थे.
वो धीरे धीरे तप रही थी.

गर्दन चूमने के बाद मैंने उसके गालों को चूमना चालू कर दिया. धीरे धीरे मैंने उसके ओठों के रसपान का बड़ा मजा उठाया. उसके गर्म गर्म श्वास मुझे और भी बेचैन कर रहे थे.
मैंने कहा- मैं तुम्हारे स्तन देख सकता हूँ?
“ना कहोगे तो नहीं देखोगे क्या?” उसने पलट सवाल किया.

तो मैंने गर्दन के पास सहलाना शुरू कर दिया और एक हाथ उसके बड़े बड़े स्तनों अन्दर से घुमने लगा दूसरा हाथ उसके गाउन के क्लिप खोलने में लग गए.
वो तो सिर्फ बेड पर बैठी थी… गाउन के क्लिप खुल गए… मैंने उसका गाउन उतार फेक दिया… वो सिर्फ पेटीकोट और निकर पर ही थी.
मैंने कहा- तुम ब्रेसिअर नहीं पहनती?
उसने कहा- नहीं…
“कल से पहननी पड़ेगी!” मैंने कहा.
वो शर्मा गई.

मैंने उसका पेटीकोट उतार दिया और देखा कि उसका पेट थोड़ा सा बाहर था, तो मैंने मजाक से पूछा- कौन सा महीना चालू है?
वो सिर्फ नीचे सर झुकाए खड़ी थी. मैं उसको देखता रहा. क्या गांड थी उसकी… वाह आज तो म़जा आएगा.

खड़े खड़े मैं उसको चूमने लगा. चूमते वक्त दोनों हाथों से उसकी गांड दबाने लगा. धीरे धीरे एक हाथ उसके निकर में गया तो झट से उसने उसे बाहर निकाला.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
उसने कहा- मुझे नहीं पसंद…
मैंने कहा- कुछ भी करना था लेकिन तनिष का इगो हर्ट नहीं करना था.

मैंने उसको उसी के बेड पर पीठ के बल लिटाया, उसकी टांगों को सहलाने लगा. मैं ऊपर खिसकता गया, दोनों हाथ निकर पर आ गए, मैंने निकर पकड़ी और खींच ली. नीचे उसकी योनि बाहर से थोड़ी काली थी… मैंने सीधे उंगली करनी चालू कर दी तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर बाहर निकाल दिया तो मैंने कुछ सोचा और फिर से उसके ऊपर किसिंग के लिए आ गया.

पांच दस मिनट किस कर कर मैंने उसे कहा- अब तुम्हारी बारी, मुझे किस करो…
वो भी मुझे किस करने लगी.
फिर मैंने उसके स्तन चूसने का काम चालू कर दिया. वो तो बहुत तप गई. मैंने अपने कपड़े उतारे लेकिन अंडरवीयर नहीं निकाली और बेड पर पीठ के ब़ल लेट गयाम उसे कहा- मेरी अंडरवीयर खींच ले… और देख तुझे कौन चोदने वाला है.
वो पहले शरमाई… “मैं नहीं करुँगी.” ये कहा.

मैंने पूछा- क्या नहीं करोगी?
“अभी जो कर रहे हैं, वो…”
मैंने कहा- अब तुम्हारा बाप भी आएगा तो तुम्हें चुदने से नहीं रोक सकता… अगर दर्द नहीं चाहती हो तो मेरी अंडरवीयर निकालो और मैं जैसा कहता हूँ वैसा करो.
फिर वो मेरे पास आ गई घबराते घबराते… उसने मेरी अंडरवीयर पकड़ी और खींच ली.
अब तक मेरी अंडरवीयर एक बार गीली हो चुकी थी.

उसने आँखें बंद कर ली थी… मैंने उसका हाथ लिया और कहा- अपने यार को नहीं देखोगी?
और उसका हाथ मेरे लंड पर रख दिया तो उसने झट से पीछे खींच लिया… तो मैंने उसको उसी के बेड के पास बैठा दया और उसके मुँह के पास मेरा लंड ले गया, उसे कहा- अब तो आँखें खोलो. और चूसो.
“चूसो…” यह सुनते ही “मुझे ये पसंद नहीं…” उसने कहा.

मैंने उसे कहा- क्यों इन्कार करती हो? तुम जानती हो कि मैं जो चाहता हूँ वो करता हूँ… तो चूसो… चलो!
वो कुछ भी नहीं बोली.
मैंने कहा- मुँह खोलो!
उसने आँखें बंद ही रखी और मुख खोल दिया… मैंने उसके मुँह में मेरा लंड सरका दिया और उसके हाथ से लंड को आगे पीछे करने को कहा. वो धीरे धीरे कर रही थी… मेरे लम्बे और मोटे लंड के माप को भाम्प कर वो… शायद वो घबरा गयी… उसके हाथ कांपने लगे.

मैंने उसे उठाया, बेड पर बिठाया… उसे कहा- आंखें खोलो और देखो बहाने मत करो!
जबरदस्ती से मैंने उसे देखने के लिए मजबूर किया. मैंने उसे लिटा दिया और उसकी ओढ़नी से उसके हाथों को बेड से बाँध दिया और उसकी बुर में उंगली करनी चालू कर दिया. वो तड़पने लगी… पर मैं नहीं रुका, मैं उसके ऊपर हो गया और उसे कहा- अब तुम आखिरी बार अपनी कुंवारी बुर को देख लो, मैं तुम्हें ठोकने जा रहा हूँ.

मैंने अपना लंड उसकी बुर पर रगड़ना चालू कर दिया.
उसने कहा- धीरे से करना.
शायद मैंने यह नहीं सुना, लंड का आगे का सिरा उसकी बुर पर दबा दिया तो वो चिल्लाई.
मैंने कहा- अभी शुरूआत भी नहीं हुई और तुम…
फिर लंड को उसकी बुर पर जोर से दबा दिया और दोनों हाथों से उसकी कमर को मैंने पकड़ा हुआ था ताकि वो ऊपर ना खिसके.

मेरे लंड का मुख उसकी बुर के अंदर था और मैंने हल्का सा झटका दिया तो वो रोने लगी.
मैंने कहा- क्या हुआ?
उसने कहा- बहुत दर्द हो रहा है.
फिर मैं उसे किस करता रहा… अचानक एक जोर का झटका दिया और वो जोर से चिल्ला उठी.
मैंने बिन रुके एक और झटका दिया तो मेरा लौड़ा पूरा का पूरा उसकी बुर के अंदर जा चुका था.
मैं आहिस्ता आहिस्ता उसे चोदने लगा।

पांच मिनट के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और देखा कि बुर से थोड़ा खून आ रहा है.
मैंने उसे कहा- मुबारक हो… अब तुब वर्जिन नहीं रही हो.
फिर मैंने कंडोम चढ़ाया और फिर मैं फिर से अंदर डालने लागा.
वो चिल्ला रही थी… मैंने उसके मुँह पर अपना मुँह रख कर उसका मुँह बंद कर दिया और नीचे से लंड अंदर डालने लगा. ये तो अच्छा हुआ कि मैंने उसके हाथों को बाँध कर रखा था…मेरा लंबा मोटा लंड पूरा अंदर घुसेड़ दिया था मैंने!

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फिर मैंने कहा- पहली बार में दर्द होता ही है… सह लो थोड़ा सा…
उसी की निक्कर उसके मुँह में डाली और धीरे धीरे शॉट लगाना चालू कर दिया.
मेरा अंदाजा गलत निकला था कि उसकी डील डौल के हिसाब से उसे तकलीफ कम होगी. वो रो रही थी… मेरे धक्के चालू थे, मैं पूरी तरह हे उस पर हावी था. उसने उसका बदन सीधा कर
लिया और वो झड़ गयी थी पर मैं नहीं झड़ा था, मेरे धक्के चालू थे. मेरा इंजिन बहुत तेज हो गया था. मेरे धक्कों से उसके कबूतर जोर हिल रहे थे, जैसे वो हिल रहे थे, वैसे मेरी स्पीड और बढ़ती जाती… नीचे उसकी बुर की पूरी तरह से मैंने वाट लगा दी थी.

उसके बिस्तर की सफ़ेद चादर पर बहुत खून गिर गया था पर मैंने चोदना शुरू ही रखा. फिर मैं एक बार झड़ गया. उसे पूरी तरह से चोद कर मैंने अपनी हवस बुझाने की कोशिश की. लंड बाहर निकला तो बुर से खून आ रहा था. मैंने उसी के तौलिये से उसे साफ़ किया, उसके हाथ खोल दिए और उसी के पास लेटा रहां.

वो उठी, बाथरूम गई, अपनी बुर को धोया और बाहर आकर कपड़े पहनने लगी.
मैंने कहा- अभी मत पहनो… काम अधूरा मत छोड़ो, अभी बहुत कुछ बाकी है… तुम्हारी गांड मारनी है, आ जाओ बैठो!
ऐसा कह कर उसे इशारा किया अपने लंड के तरफ.

फिर भी वो कपड़े पहने लगी तो मैं उसे कबूतरों को मसलने लागा. अभी तो सिर्फ 12.50 हुए थे, सारी रात अभी बाकी थी.

थोड़ी देर बाद कुतिया की तरह बेड पर उससे पोज बनवाया और उसकी गांड पर लंड रख दिया और मैंने कहा- अपना मुँह बंद रखना क्यूंकि आगे जितना दर्द नहीं हुआ, उससे कई गुना दर्द अब होगा.
वो फिर से रो पड़ी… मैंने ध्यान नहीं दिया और अपना हथियार उसकी गांड में ठोकता गया. वो बहुत चिल्लाई… पर मैंने उसका मुँह दबाया और उसकी गांड मारनी चालू कर दी.
थोड़ी ही देर में मैं उसकी गांड में झड़ गया. गांड मारते समय मैंने कंडोम नहीं लगाया था. उसकी गांड में लंड था, वो रही रही थी.
तब मैंने उसे बताया कि मुझे विशाखा को भी चोदना है… तुम मेरी सहायता करोगी?
उसने कहा- अभी वो नादान है…
मैंने कुछ नहीं कहा पर उसकी गांड जवाब दे रही थी. उसने कहा- ठीक है, मैं उसे पूछ कर बताऊँगी.

उसकी गांड और जोर से जवाब देने लगी- ठीक तुम जैसा चाहोगे!
उस रात मैंने दो बार उसकी बुर को और चोदा.

सुबह के 3.30 बजे वो सोने की जिद करने लगी… मैंने कहा- ठीक है, नंगे ही सोयेंगे.
वो तैयार हो गयी… हम सो गए.
उसके कबूतर दबा दबा कर लाल लाल हो गए थे.

सुबह सात बजे दूध वाला आया तो मेरी नींद खुली, देखा क्या… कि दीक्षा बिस्तर पर नहीं थी.
नीचे जाकर देखा तो दूध लेकर वो कॉफ़ी बना रही थी… उसकी चाल कुछ अकड़ी अकड़ी सी थी तो मैंने पूछा- तुम ऐसी क्यों चल रही हो?
“तुम्हारी वजह से!!”
मैंने कहा- मैंने क्या किया?
“आगे इतना नहीं… पर पीछे से बहुत दर्द हो रहा है.”
मैंने कहा- फिर एक बार इंजेक्शन देना पड़ेगा पीछे से…
वो मुस्कुरा कर मुझे मुक्का दिखाने लगी.

अब तो सिर्फ विशाखा का इंतजार है… छोटा एटम बम है, पर आवाज बड़ी करेगा. विशाखा एकदम पतली है, दीक्षा से थोड़ी सी हाईट ज्यादा होगी. पर आयटम एकदम झकास है.
एक दिन उसे भी चोद के रहूँगा वो भी वर्जिन!

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