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करुणा भाभी का नंगा बदन देख

मैं आपको कहानी की हीरोइन करुणा भाभी के बारे में बता दूँ। उनका कद 5 फुट6 इंच का और रंग गोरा है। उनका वक्ष स्थल यानि चूचों का साइज करीब छत्तीस इंच का है। भाभी देखने में ऐसी लगती हैं कि मानो परी हों। जब वो चलती थीं.. तो उनके कूल्हे ऐसे मटकते कि अच्छे से अच्छे लोगों की भी पैंट गीली हो जाए।

ये बात आज से दो साल पहले की है.. जब मैं नौकरी के सिलसिले में दिल्ली गया था। वहां नैनी में मैंने किराए पर एक कमरा लिया। मेरी नौकरी में मेरी ड्यूटी कभी सुबह.. कभी रात को होती थी, क्योंकि मैं एक कॉल सेंटर में काम करता था। उन दिनों मेरी रात की ड्यूटी थी.. तो सुबह पांच बजे मैं अपने कमरे में आ जाता था और सो जाता था।

उस दिन मैं करीब 11 बजे सोकर उठा और अपने कमरे की बालकनी में आकर खड़ा हो गया। उस दिन मैंने करुणा भाभी को पहली बार देखा था।
मैं तो उन्हें देखता ही रह गया… वाह.. क्या मस्त भाभी थीं। मेरे कमरे की स्थिति कुछ ऐसी थी कि अगर मैं अपने ऊपर वाले कमरे की बालकनी में आ जाऊं.. तो मुझे उनके घर के अन्दर थोड़ा-थोड़ा दिख जाता है।

जब मैंने भाभी को देखा तो अपने घर के बाहर झाड़ू लगा रही थीं। जब वो झाड़ू लगा रही थीं.. तो उनका पल्लू कभी नीचे गिर जाता.. तो उनके चूचों के बीच की दरार दिख जाती। मुझे इस तरह से उनको देखने में बड़ा मजा आ रहा था। कई दिन ऐसे ही निकल गए।
एक दिन उन्होंने मुझे उनको ताड़ते हुए देख लिया.. पर वो बोलीं कुछ नहीं।

फिर एक दिन मैं पड़ोस की दुकान में सामान ले रहा था.. तो वो भाभी भी वहीं आ गईं।

मैं वहाँ से जाने लगा तो उन्होंने मुझे आवाज लगाई- सुनिए, आपका पर्स गिर गया है।

वो मेरा नाम नहीं जानती थीं.. तो मैं मुड़कर उनके पास गया। मैंने पर्स उठाया और उन्हें थैंक्स बोला। यहीं से हमारी बातचीत शुरू हुई और हम चलते-चलते बात करने लगे। उन्होंने मेरे बारे में पूछा.. तो मैंने भी उनके बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि उनका पति दुबई में बिज़नेस करता है और साल में दो-तीन महीने के लिए आता है। उनके घर में उनके अलावा उनकी सास और ससुर रहते हैं और एक छोटा देवर भी रहता है।

मुझे भाभी से बात करना अच्छा लग रहा था.. तो मैंने भाभी को अपना फ़ोन नंबर दिया और उनसे उनका नंबर ले लिया।

अगले दिन मैंने उनको फ़ोन किया तो उन्होंने उठाया तो हम बात करने लगे। कुछ दिन हम नार्मल बात करते रहे।
एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा- तुम मुझे उस दिन ऐसे क्यों देख रहे थे.. जब मैं बाहर झाड़ू लगा रही थी?
मैंने कहा- भाभी आपकी वक्ष के बीच में बनी दरार मुझे बड़ी अच्छी लगती है।

इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा और हंस दीं। मुझे हिम्मत मिली और मैंने आगे बात बढ़ाई। फिर धीरे-धीरे हम अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में बात करने लगे। कब ये बात सेक्स में बदल गई.. पता ही नहीं लगा। इसी दौरान उन्होंने बताया कि उनका पति जब आता है तब ही वो सेक्स कर पाती है.. नहीं तो बस ऐसे ही रात को करवट बदल-बदल कर गुजारनी पड़ती है।

उनके मुँह से ये सुनकर मैं उनकी और थोड़ा ओर आकर्षित हो गया.. क्योंकि अकेली रह रही भाभी को देखकर कोई भी उनकी तरफ खिंचा जा सकता था।
मैंने उनसे कहा- मैं आपकी ये समस्या दूर कर सकता हूँ।
उन्होंने बिना कुछ कहे फ़ोन रख दिया।

मैंने सोचा कि पता नहीं मैंने क्या गलत कह दिया.. कहीं भाभी मुझसे नाराज तो नहीं हो गईं।
मैंने कुछ दिन फ़ोन नहीं किया।

लगभग दस दिन बाद भाभी का खुद फ़ोन आया तो उन्होंने कहा- तुम मेरी समस्या को कैसे दूर करोगे?
मैंने कहा- जैसे आपको ठीक लगे।
उन्होंने कहा- मैं आज तुमसे मिलना चाहती हूँ।
मैंने कहा- शाम को मिलते हैं.. अभी मेरी ड्यूटी है।
उन्होंने कहा- ठीक है।

शाम को हम मिले.. तो उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर मुझसे पूछा- क्या तुम मेरी समस्या को मेरे साथ सेक्स करके दूर कर सकते हो.. क्योंकि मैं सेक्स की भूखी हूँ।

मैंने कहा- क्यों नहीं भाभी.. आप कहो और मैं न करूं। मैं भी कब से यही सोच रहा था.. इसीलिए तो उस रोज के बाद मैं आपको बाल्कनी से देखता था।
उन्होंने कहा- कल मेरे घरवाले शादी के लिए ग्वालियर जा रहे हैं.. मैं नहीं जा रही। तुम कल रात को मेरे घर आ जाना।
मैंने कहा- ठीक है।

उन दिनों मेरी ड्यूटी भी दिन के समय की थी। मुझे जाने में कोई दिक्कत नहीं थी और अगर होती भी तो छुट्टी ले लेता। क्योंकि जो मैं चाहता था.. वही होने वाला था।

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मैं अगले दिन शाम को खाना खाकर आठ बजे उनके घर चला गया। मेरे मन में तो सेक्स हिलोरें खा रहा था।
मैंने उनके घर की बेल बजाई तो भाभी ने दरवाजा खोला। उन्होंने स्लीवलेस कुर्ती और पजामा डाला हुआ था। मैंने सोचा कि शायद वो रात को यही पहन कर सोती हैं।

मैं उन्हें देखता ही रह गया और उन्हें देख कर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया। भाभी जी ने मुझे अन्दर बुलाकर सोफे पर बिठाया और पानी लाकर दिया। वो मेरे पास बैठ गईं.. तो मैंने उनसे कहा- मुझे पानी की प्यास नहीं है.. मुझे आपकी प्यास है। यह कहते हुए मैंने उन्हें अपनी बांहों में पकड़ लिया और उनके होंठों को चूमने लगा।

वो बोलीं- यहाँ नहीं.. कमरे में चलते हैं।

हम दोनों उठकर बेडरूम में आ गए, वहां जाकर भाभी ने दरवाजा बंद किया। अब मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन को चूमने लगा।

वो भी पलट गईं और मुझे भी कस कर पकड़ लिया, फिर हम एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे। कुछ देर यूं ही चलता रहा।

उसके बाद मैं भाभी जी को गोद में उठाकर बिस्तर पर ले गया और बिस्तर पर लिटा दिया। फिर उनके ऊपर आकर भाभी की कुर्ती में हाथ डालकर उनके चूचों को दबाने लगा। उनकी उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल गई।

उसके बाद मैंने देर न करते हुए उनकी कुर्ती निकाल दी। नंगी भाभी के शरीर का खुला नजारा देख कर मैंने कहा- वाह भाभी.. कहाँ छुपा कर रखा था इस खूबसूरत जिस्म को?
उन्होंने कहा- कहीं नहीं.. यहीं तो थे आपके सामने.. जिन्हें आप मुझे झाड़ू लगाते हुए देखते थे।

मैंने हँसते हुए उनकी ब्रा भी निकाल दी। ब्रा निकालने के बाद भाभी के चूचे ऐसे लग रहे थे जैसे काफी समय से किसी ने उन्हें छुआ ही न हो।

मैंने भाभी की नंगी चूचियों को दबाना और चूसना शुरू किया तो भाभी सिसकियाँ निकालने लगी थीं।

वो कह रही थीं- चंदन मेरी जान.. और जोर से चूसो मेरे चूचों को.. काफ़ी समय से इन्हें किसी ने नहीं चूसा है.. चूस चूस.. कर इन्हें लाल कर दो।

मैं और तेजी से उनके चूचे चूसने लगा और उनके काले काले निप्पलों को काटने लगा। भाभी को भी मजा आ रहा था और वो लगातार ‘आह.. आह.. हां ऐसे ही चूसो आह..’ की आवाज निकाल रही थीं।

करीब दस मिनट तक भाभी के चूचे चूसने के बाद मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपना लंड भाभी को चूसने के लिए बोला तो भाभी ने झट से मेरा लंड पकड़ कर मुँह में भर लिया और चूसने लगीं। मुझे बड़ा मजा आ रहा था.. क्योंकि भाभी एकदम पागलों की तरह मेरा लंड चूस रही थीं।

मैंने भाभी की नंगी चूत में अपनी एक उंगली डाली.. तो उनकी ‘आह..’ निकल गई। मैंने भाभी की चूत में उंगली को आगे-पीछे करना शुरू किया।
भाभी पागल सी हो गईं.. और मेरे हाथ में ही झड़ गईं।

मैंने अपना मुँह उनकी चूत की तरफ किया और भाभी की चूत को चूसने लगा, वो मेरा लंड चूस रही थीं। इसी बीच मैं भी भाभी के मुँह में होने वाला था.. तो मैंने भाभी जी से कहा- मैं होने वाला हूँ।

तो उन्होंने कुछ नहीं कहा.. बस लंड चूसती रहीं। मैं भाभी जी के मुँह में ही झड़ गया, वो मेरे लंड से निकले सारे माल को पी गईं.. फिर भी मेरा लंड को पागलों तरह चूसती रहीं। मुझे थोड़ी अकड़न सी होने लगी.. तो मैंने उन्हें रोका और उनके चूचों को चूसने लगा। पांच मिनट बाद भाभी फिर मेरे लंड को चूसने लगीं.. और अब उन्होंने मेरे लंड को चूस-चूस कर खड़ा कर दिया।
भाभी बोलीं- अब इसे मेरी चूत में उतारो.. मुझसे नहीं रहा जा रहा है।

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मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटाकर उनकी कमर के नीचे तकिया लगाया और चूत पर अपना लंड रखा। मैंने भाभी की आंखों में देखा और एक धक्का मार दिया। मेरा लंड एक इंच ही अन्दर गया होगा कि उन्होंने चीख मारी।

मैंने भाभी के होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और फिर से एक ज़ोर का धक्का मारा। इस बार मेरा आधा लंड उनकी चूत में समां गया।

उसके बाद मैंने धीरे-धीरे उनकी चूत में अपना लंड पेलना शुरू किया। जब उन्हें मजा आने लगा तो फिर भाभी जी खुद अपनी कमर उठा-उठाकर मुझसे चुदने लगीं और मेरे लंड को अपने अन्दर तक डलवाने लगीं।

साथ में भाभी चिल्ला रही थीं- आहह रॉनित.. फाड़ दे इसे आज.. बहुत दिन से तड़प रही है ये.. किसी के लंड के लिए.. अहह.. आज बुझा दे इसकी आग..
मैंने कहा- भाभी जी आज मैं आपकी चूत की पूरी तसल्ली करवा दूँगा और आज मैं भी इसे छोड़ने वाला नहीं हूँ।

मैं भी बहुत दिनों से सेक्स का भूखा था और फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मैंने भाभी को बीस मिनट तक चोदा और अंत में मैं भाभी की चूत में ही झड़ गया। फिर मैं भाभी के शरीर पर ही लेट गया।
कुछ देर हम ऐसे ही लेटे रहे, फिर भाभी ने पूछा- बहुत अच्छा चोदा तुमने.. क्या तुमने पहले भी किसी से सेक्स किया है?

तो मैंने कहा- हाँ भाभी.. मेरी एक गर्ल फ्रेंड थी कोमल.. उसे मैंने चोदा है। एक बार उसे और उसकी फ्रेंड को भी चोदा है।

उसके बाद भाभी और मैं बाथरूम में गए और एक-दूसरे को साफ़ किया। वहां भी हमने शावर के नीचे एक-दूसरे को चूमते हुए सेक्स किया।
इस रात हमने चार बार सेक्स किया।

फिर मैंने भाभी को गर्भ निरोधक गोली दे दी। अगले दिन मैंने भाभी को उनके बेडरूम की दीवार के सहारे खड़ा करके.. मेज के ऊपर लिटाकर और कुर्सी पर बिठाकर भाभी जी चूत और गांड दोनों मारी। जब भी मुझे मौका मिलता मैं उनके अच्छे देवर की तरह रोज चुदाई करता हूँ।

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