खूबसूरत चूत ने पहले किसी लंड का मज़ा नहीं चखा

गतांग से आगे …..

वो हंस कर बोली…. काटते नहीं हैं क्या ? कितने लंबे हैं.

टाइम नहीं मिलता.

उसने मेरी पैंट का ज़िप खोलना शुरू किया. मैं इसी इंतज़ार में था. मैं चुपचाप पड़ा रहा. उसने ज़िप खोल कर मेरी पैंट के बटन भी खोल दिए और अंडर वेयर के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगी. इससे पहले मेरा लंड कभी इतनी जल्दी नहीं जागा था. ऐसे झट से तन गया कि लगा अभी अंडर वेयर को फाड़ कर बाहर आ जाएगा. मेरी नस नस में करंट दौड़ने लगा. मुझे अजीब सी बेचैनी होने लगी. वो अब मेरी जांघों पर बैठ गई और फिर उसने दोनों हाथों से मेरी पैंट को दोनों ऊपरी सिरों को पकड़ा और धीरे धीरे उसे नीचे उतारने लगी. पेंट के साथ अंडर वेयर भी उतरने लगी. मैं सर से पैर तक गर्म हो गया. पैंट खिसकते खिसकते घुटनों तक आ गई और फिर उसने पूरी तरह मुझे नंगा कर दिया. मेरी ज़बान सूखने लगी और मैं अपने होंठों पर ज़बान फेरने लगा.

वो मेरी हालत देख कर मुस्कुरा रही थी. बोली, * इससे पहले कभी मालिश नहीं करवाई क्या आपने ?’

‘नन..नहीं, कभी नहीं.’

ये पहली मालिश है’?

‘हां बिल्कुल पहली.

वो खिलखिला कर हंसने लगी. मैं लगातार अपने होंठों पर ज़बान फेर रहा था. वो बोली… पानी पिएंगे ?

मैंने ना में सिर हिलाया. वो फिर मुस्कुराई और मुझ पर झुक गई. उसने अपने रसीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. मुझे ऐसा लगा, जैसे मुझे अमृत मिल गया हो. वो मेरे ऊपरी होंठ को चूसने लगी. आश्चर्य की बात थी कि उसकी सांसों में गुलाब जैसी खुशबू थी. शायद वो पहले से तैयारी करके आई थी. फिर उसने मेरे होंठों को अपने मुंह में ले लिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. उसके दायें हाथ ने मेरे लंड को थाम रखा था और वो हल्के हल्के उसे रगड़ रही थी.

मुझसे बरदाश्त न हुआ और मैंने कहा, मुझे तो नंगा कर दिया, तुम भी तो कपड़े उतारो.

वो बोली… नहीं ये नहीं…

मैं बोला… क्या मतलब ?

मतलब क्या ? मैं सिर्फ मालिश करने आई हूं. करवाने नहीं.

मुझे लगा, कहीं खड़े लंड पे धोखे’ वाली बात तो नहीं. वो मेरे शक को भांपते हुए बोली…. आपका काम यूं ही हो जाएगा साब…. बस आप देखते रहिए.

वो अपनी ज़बान से मरी ठड्डियों को चाटते चाटते मेरी छाती तक आई. मेरी चूचियों को मुंह में कुछ देर दबाने के बाद और उसे चूसने के बाद वो चाटते चाटते मेरी नाभि तक चली आई. और फिर…. मैं जिस पल का इंतज़ार कर रहा था, वही हुआ…. उसने झट से मेरे लंड को अपने मुंह में दबा लिया. मेरी तो चीख़ निकलते निकलते रह गई. पहले कभी किसी ने मुझे ब्लो जॉब नहीं किया था. हल्के हल्के वो मेरे पूरे लंड को अपने मुंह में लेने लगी और अंदर बाहर करने लगी. उसकी लार से मेरा लंड एकदम चिकना हो गया और मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मैं अभी झड़ जाऊंगा. और वही हुआ. जैसे किसी स्रोत से पानी फूट पड़ता है. मेरे लंड से स्पर्म का ऐसा फव्वारा छूटा कि उसके होंठों से होता हुआ गालों को छूता हुआ दीवार से जा टकराया.

अरे बाप रे…. वो घबरा कर बोली…. ये क्या ? ।

मैं भी चौंक सा गया था…. बोला… ऐसा पहली बार हुआ है न मेरे साथ… पता नहीं… क्या कर दिया तुमने.

वो अपने होंठों और गालों को अपने पल्लू से पोंछते हुए बोली…. इतनी जल्दी टायं टायं फिस्स. ।

मेरे शरीर की गर्मी अब ठंडी होने लगी थी. उसने फिर अपने नरम नरम हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और मेरे गीले गीले लंड को मसलने लगी. फिर उसने अपनी मुट्ठी में मेरे लंड को पकड़ा और हस्त मैथुन करने लगी. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया. वो मुस्कुराई और बोली… चलो…फिर तैयार हो गया तुम्हरा बबुआ.

मैने उसका हाथ अपने लंड से हटाया और नकली गुस्से से बोला… हाथ से ही करती रहोगी क्या ?

हां… दूसरा काम करने का अनुमती नहीं है हमको.

किसकी अनुमति चाहिए.

हमरे बापू की.

अरे बापू को मारो गोली… उन्हें क्या मालूम कि तुमने दूसरा काम किया भी है कि नहीं.

नहीं उनको मालूम पड़ जाएगा.

कैसे मालूम पड़ेगा… तुम्हारे घाघरे में झांक कर देखेंगे क्या ?

हां साब, वो ऐसा ही करते हैं…. हमरी बुर में उंगली डार कर परखते हैं.

अरे… ये तुम्हारा बाप तो गायनोकॉलाजिस्ट लगता है.

उसने फिर मेरे लंड को पकड़ लिया और मसलने लगी. मेरा लंड जो ढीला हो रहा था, फिर तनने लगा. मैंने फिर उसका हाथ अपने लंड से हटाया और बोला… नहीं… तुम्हें वो दूसरा काम करना ही होगा… नहीं तो तुम जाओ.

ठीक है चले जाते हैं….

वो उठने लगी तो मैं घबरा गया. कहीं सचमुच न चली जाए. मैंने जल्दी से कहा. अच्छा ठीक है यार… चलो..वही करो.

वो हंसने लगी और बोली… हाथ से या मुंह से. मुंह से…

लेकिन मैं भी कुछ करना चाहता हूं.

क्या ?

तुम भी काफ़ी थक गई होगी… कहो तो मालिश कर दें.

नहीं बाबा… हम जानते हैं… मालिश वालिश क्या… आप वही करना चाहते हो.

नहीं… मैं अपना लंड तुम्हारी चूत तक नहीं ले जाऊंगा… सिर्फ़ हाथ से.

हमने कभी ऐसा नहीं करवाया किसी से.

तो अब करवा लो.

कहीं कुछ हो न जाए.

क्या होगा…? सिर्फ़ मज़ा आएगा. मैं उसे बोलने का ज़्यादा मौका नहीं देना चाहता था. मैने झट से अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया. उसके मुंह से एक सिस्कारी निकली…. ओह…अफ ! मैने अपने पंजे से उसके घाघरे पर से ही उसकी फूली हुई चूत को पकड़ लिया और हिलाने लगा. उसकी आंखों में नशा सा छाने लगा…

वो बोली… नहीं साब… कुछ गड़बड़ न हो जाए.

मैने उसकी बात नहीं सुनी और नीचे से उसके घाघरे के अंदर हाथ ले गया. दोनों जांघों के बीच उसकी चूत बड़ी मुलायम और कुंवारी सी थी. मैं सिर्फ महसूस कर रहा था. देखने का मौका नहीं मिला था. मैंने अपनी उंगली उसकी चूत की दरार में डाल दी. भीगी हुई उसकी चूत का स्पर्श मुझे किसी और ही दुनिया में ले गया. मुझे ख़ुद भी नशा होने लगा.

ये कैसा एहसास !!! उसकी आंखें बंद सी होने लगीं…. उसने आसानी के लिए अपनी दोनों टांगों को फैला लिया. चूत की दरार खुल सी गई. मैंने घाघरा ऊपर उठाया और आंखें फाड़ फाड़ कर उसकी गुलाबी चूत को देखने लगा. हल्का हल्का पानी सा रिस रहा था उसकी दरारों से. देखने से ही पता चलता था कि इस खूबसूरत चूत ने पहले किसी लंड का मज़ा नहीं चखा था. या अगर चखा भी होगा तो एक या दो बार.

मैने उससे कहा… ऐसा तो हो नहीं सकता कि तुम पहली बार मेरी मालिश कर रही हो. इससे पहले भी कई बार तुमने कितनों की मालिश की होगी… तो क्या किसी ने भी तुम्हें नहीं चोदा ?

हमने चोदने दिया ही नहीं… वो अपने होंठों को काटते हुए बोली.

और अगर मैं कोशिश करूं तो…

करके देखो.

मैं उसकी चूत पर झुक गया और धीरे से अपनी ज़बान उसकी चूत के दाने पर रख दी. वो मस्ती सहन न करते हुए उफ कर बैठी. मैने धीरे धीरे उसके दाने को अपनी जीभ से सहलाना शुरू किया. वो “आह, ओह” करने लगी. उसकी आंखें बंद थीं. और वो ज़्यादा मज़ा लेने के लिए अपनी चूतड़ों को मेरे मुंह पर धक्का देने लगी. अब मुझे सिर्फ अपनी ज़बान बाहर निकाले रखनी थी. उसकी चूत बार बार मेरी ज़बान पर आती और हट जाती. उसे इतना मज़ा आने लगा कि उसने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरे सर को आगे पीछे करने लगी. मेरा मुंह बार बार उसकी चूत से टकराने लगा. मुझे शरारत सूझी और मैंने अपनी ज़बान को मुंह में बंद कर दिया. वो बेचैन हो गई और सिसकते हुए बोली… साब… डाल दो डाल दो…

मैने पूछा … क्या डाल दो.

अपनी जीभ….

कहां..

हमरी बुर में … जल्दी..

नहीं …. जीभ नहीं..

भगवान के लिए साब…

मेरी जीभ थक गई है….।

तो अंगुली ही डाल दो…. घुसा दो.

उंगली में दर्द हो रहा है… ।

अरे साब, काहे को इतरा रहे हो.

मैं हंस कर बोला… तुम भी तो इतरा रही थी…

अच्छा जो करना है करो.

निकालू लंड ? ।

घुसा दो… जल्दी.

मैने उसे बिस्तर पर चित लिटा दिया और उसके घाघरे को अच्छी तरह से ऊपर कर दिया. अब उसकी प्यारी सी चूत उभर कर मेरे सामने आ गई थी….

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