खूबसूरत चूत ने पहले किसी लंड का मज़ा नहीं चखा

गतांग से आगे …..

फिर बिजली ने थोड़ा तेल और लिया और पूरे लंड को उससे भिगो दिया. मेरा लंड चक चक करने लगा. अब उसने मुट्ठी बना कर मेरे पूरे लंड को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और आगे पीछे करने लगी. पता नहीं ये तेल का कमाल था या बिजली के नाजुक हाथों का, मैं बिस्तर पर तड़पने लगा. बिजली हैरान हो कर बोली. “क्या बाबू जी… तुम तो लौंडो जैसा मचल रहे हो…’ मैंने उसका हाथ अपने लंड से हटाया और बोला…“ यकीन मानो, ये सब मैं पहली बार करवा रहा हूं… तजुर्बा नहीं है.” किरण मेरे हाथों को पकड़ कर बोली…“ क्यों झूट बोल रहे हो साब, रात को क्या किया था…? अच्छा अब उल्टे हो कर लेट जाओ… पीठ पर मालिश कर देती हूं.’

मैं उल्टा हो कर लेट गया तो बिजली बोली… “वाह साब, तुम्हारी चूतड़ तो बड़ी चिकनी है.’ मुझे शर्म सी आई और मैंने चादर से अपना पिछला भाग छुपा लिया. दोनों ज़ोर ज़ोर से हंसने लगीं. अब किरण और बिजली दोनों ने मेरी पीठ की मालिश शुरू कर दी. उनके नरम नरम हाथों से मेरी थकान मिटने लगी. वो बड़ी खूबसूरती से मेरे शरीर की मालिश कर रही थीं. फिर किरण ने झटके से मेरे पैरों पर पड़े चादर को हटा लिया और बोतल का सारा तेल मेरी गांड के फांकों में उंडेल दिया और फिर ठहाके लगाने लगीं. मैने भी कुछ नहीं कहा, असल में मुझे भी मज़ा आने लगा था.

अब पता नहीं किसकी उंगली थी, जो मेरी गांड के छेद से छेड़छाड़ कर रही थी. चिकने तेल में डूबी नाजुक उंगली धीरे धीरे मेरी गांड के छेद में अंदर बाहर होने लगी. ये एक नया अनुभव था मेरे लिए. मेरा लंड इतना सख़्त हो गया, जैसे अभी फट पड़ेगा. मैने सिर घुमा कर देखा तो वो बिजली थी, जो ये हरकत कर रही थी. मुस्कुरा कर बोली…* कैसा लग रहा है बाबू जी?” मेरे मुंह से आवाज़ नहीं निकली. अब उसकी उंगली तेज़ी से गांड के छेद में अंदर बाहर हो रही थी और मैं सनसनाहट से कांप रहा था. किरण मेरे पीठ पर लगातार रगड़े लगा रही थी.

एक पल को दिमाग़ में ख़याल आया कि ये गांव तो स्वर्ग है, इसे छोड़ कर कहीं जाना बेवकूफी है. बिजली की उंगली लगातार मेरी गांड के छेद में अंदर बाहर हो रही थी. किरण ने मेरे पेट के नीचे अपना हाथ घुसाया. मैंने अपना पेट ऊपर कर लिया. अब मेरा लंड किरण के हाथ में था. तेल से चिकने हाथ ने लंड को यूं पकड़ लिया जैसे बाज़ चिड़िया को दबोच लेता है. दो तरफ़ा हमले से मैं पूरी तरह सरेंडर हो गया. ऊपर से गांड में उंगली और नीचे से लंड की मालिश. मुझे से सहन नहीं हुआ और मैं उठ कर बैठ गया. दोनों मुस्कुरा मुस्कुरा कर मुझे देखने लगीं. मैं गहरी गहरी सांस लेता हुआ तकिए से टेक लगा कर बैठ गया. किरण ने फिर मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे धीरे उसे सहलाने लगी. ।

बिजली मेरे करीब आ गई और उसने अपने तपते होंठ मेरे ख़ुश्क होंठों पर रख दिए. फिर वो मेरे होठों को चूसने लगी. उसके दोनों हाथ मेरे निप्पलों को मसल रहे थे. सेक्स का ये अनोखा मज़ा मैं पहली बार ले रहा था. कल रात को इतना मज़ा नहीं आया था. मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं. बिजली मेरे होंठों को चूसती जा रही थी. फिर वो मेरी ठोड़ी को चूसने लगी और फिर गले से होती हुई मेरे निप्पलों तक आ गई और उसे दांतों से हलके हलके काटने लगी. मेरे दांतों में फिर सनसनी होने लगी. अचानक मुझे एहसास हुआ कि किरण ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया है.

उसकी गरम गरम ज़बान मेरे लंड को मसलने लगी और थूक से मेरा लंड इतना चिकना हो गया कि बार बार फिसल कर किरण के मुंह से बाहर आने लगा. या शायद वो जानबूझ कर ऐसा कर रही थी. एक तो तेल की चिकनाई और ऊपर से किरण का अमृत भरा मुंह, अगले ही पल लंड का सारा रस बाहर आ गया और किरण एक झटके से पीछे हो गई. कुछ रस उसने पी भी लिया. मेरा लंड अब उसके हाथ में था. उसने लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाया और सारा बचा खुचा रस निचोड़ दिया. मुझे बड़ा अच्छा लगा. अब बिजली ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे झंडे की तरह हिलाने लगी. शायद वो उसे मुरझाने नहीं देना चाहती थी. मैं तकिए से टेक लगा कर बैठा था. अब मैं पूरी तरह लेट गया.

दोनों मेरे शरीर को देखने लगीं. फिर न जाने बिजली को क्या सूझी कि वो मेरे बाजू में ही लेट गई और मुझे करवट बदलने कहा. मैं दूसरी तरफ़ करवट बदल कर लेट गया. उसने फिर मेरी गांड में अपनी उंगली डाल दी. मैंने पलट कर कहा… “ये तुम बार बार ऐसा क्यों कर रही हो?’ वो बोली…“ मजा आ रहा है कि नहीं ??” मैं कुछ नहीं बोला… बोलता भी क्या.

बचपन से ही.” वो बोली और फिर उठ कर चली गई. जैसे ही मैं खाना खा कर फ़ारिग़ हुआ, वो एक लड़की को ले कर आ गई. मैंने देखा वो भी बड़ी अच्छी थी.
अच्छा तो ये है बिजली. नमस्ते बाबू जी.” बिजली हाथ जोड़ कर बोली. यहां क्या सभी लड़कियां यहीं काम करती हैं ? मैने किरण से पूछा. “सब नहीं साब, सबके ऐसे नसीब कहां?” ये बोल कर वो हंसने लगी. बिजली ने भी उसका साथ दिया. फिर किरण दरवाज़ा बंद करने चली गई और मैंने बिजली से पूछा. तुम भी मालिश करती हो?” नहीं हम तो…” वो बोलते बोलते रुक गई. किरण बोली… “ ये डायरेक्ट काम करती है साब… मालिश का झगड़ा ही नहीं.” मैने ग़ौर से बिजली को देखा तो वो मुझे इतनी बुरी नहीं लगी. उसके कपड़े ढीले ढाले थे, जिससे उसके बदन का अंदाज़ा नहीं हो रहा था.

मैने दोनों से कहा, “ देखो मुझे सुबह जल्द उठना है… इसलिए…” दोनों लड़कियों ने एक दूसरे को देखा और खिलखिला कर हंस पड़ीं. उन्हें बात बात पर हंसने की आदत थी. ‘‘लेट जाओ साब.” किरण बोली. मैं लेट गया तो किरण ने फिर तेल की वही बोतल निकाली और बोली…“ मालिश तो करेंगे ना ?” “इस वक़्त तो सचमुच मालिश का ही जी चाह रहा है… बहुत थक गया हूं.’ बिजली मेरे करीब आ कर बैठ गई और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी. शर्ट उतारने के बाद उसने मेरी पैंट की तरफ़ हाथ बढ़ाया. पैंट की ज़िप खोल कर उसने अंडरवेयर के साथ पकड़ कर पैन्ट को नीचे घसीटा और दूसरे ही पल मैं नंगा हो गया, पूरी तरह. लंड तो पहले ही तन कर खड़ा हो गया था. बिजली ने अपने हाथ का बाल्शित बना कर मेरे लंड को नापा और किरण से कहा…“ कल्लन से दो उंगल कम है!” मेरी झांटें जल गईं. मैंने बुरा मानते हुए कहा. “ कौन है ये कल्लन मादरचोद ?” वो दोनों फिर खिलखिला कर हंसने लगीं. किरण बोली.

कल्लन हमारे गांव का मुखिया है….और बिजली का रखवाला.” ** और तुम्हारा?” मैंने किरण से पूछा…जो अब सरसों का तेल मेरी छाती और पीठ पर मल रही थी. उसने अपने बालों को पीछे झटकते हुए कहा… “अरे वो बड़ा हरामी है… उसकी बात मत करो.” बिजली ने भी थोड़ा सा तेल अपने हाथों में ले लिया और मेरे लंड के टिप पर उंडेल दिया. फिर उसने अपनी दोनों मुलायम उंगलियों से उसे मसलना शुरू कर दिया. बिजली के इस मसाज से मेरे रोम रोम में बिजली सी कौंधने लगी. वो बड़ी नज़ाकत से लंड के सिरे को मसल रही थी. मुझे मज़ा तो आने लगा, पर न जाने क्यों मेरे दांतों में सनसनी सी होने लगी.

फिर बिजली ने थोड़ा तेल और लिया और पूरे लंड को उससे भिगो दिया. मेरा लंड चक चक करने लगा. अब उसने मुट्ठी बना कर मेरे पूरे लंड को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और आगे पीछे करने लगी. पता नहीं ये तेल का कमाल था या बिजली के नाजुक हाथों का, मैं बिस्तर पर तड़पने लगा. बिजली हैरान हो कर बोली. “क्या बाबू जी… तुम तो लौंडो जैसा मचल रहे हो…’ मैंने उसका हाथ अपने लंड से हटाया और बोला…“ यकीन मानो, ये सब मैं पहली बार करवा रहा हूं… तजुर्बा नहीं है.” किरण मेरे हाथों को पकड़ कर बोली…“ क्यों झूट बोल रहे हो साब, रात को क्या किया था…? अच्छा अब उल्टे हो कर लेट जाओ… पीठ पर मालिश कर देती हूं.’

मैं उल्टा हो कर लेट गया तो बिजली बोली… “वाह साब, तुम्हारी चूतड़ तो बड़ी चिकनी है.’ मुझे शर्म सी आई और मैंने चादर से अपना पिछला भाग छुपा लिया. दोनों ज़ोर ज़ोर से हंसने लगीं. अब किरण और बिजली दोनों ने मेरी पीठ की मालिश शुरू कर दी. उनके नरम नरम हाथों से मेरी थकान मिटने लगी. वो बड़ी खूबसूरती से मेरे शरीर की मालिश कर रही थीं. फिर किरण ने झटके से मेरे पैरों पर पड़े चादर को हटा लिया और बोतल का सारा तेल मेरी गांड के फांकों में उंडेल दिया और फिर ठहाके लगाने लगीं. मैने भी कुछ नहीं कहा, असल में मुझे भी मज़ा आने लगा था.

अब पता नहीं किसकी उंगली थी, जो मेरी गांड के छेद से छेड़छाड़ कर रही थी. चिकने तेल में डूबी नाजुक उंगली धीरे धीरे मेरी गांड के छेद में अंदर बाहर होने लगी. ये एक नया अनुभव था मेरे लिए. मेरा लंड इतना सख़्त हो गया, जैसे अभी फट पड़ेगा. मैने सिर घुमा कर देखा तो वो बिजली थी, जो ये हरकत कर रही थी. मुस्कुरा कर बोली…* कैसा लग रहा है बाबू जी?” मेरे मुंह से आवाज़ नहीं निकली. अब उसकी उंगली तेज़ी से गांड के छेद में अंदर बाहर हो रही थी और मैं सनसनाहट से कांप रहा था. किरण मेरे पीठ पर लगातार रगड़े लगा रही थी. एक पल को दिमाग़ में ख़याल आया कि ये गांव तो स्वर्ग है, इसे छोड़ कर कहीं जाना बेवकूफी है. बिजली की उंगली लगातार मेरी गांड के छेद में अंदर बाहर हो रही थी.

किरण ने मेरे पेट के नीचे अपना हाथ घुसाया. मैंने अपना पेट ऊपर कर लिया. अब मेरा लंड किरण के हाथ में था. तेल से चिकने हाथ ने लंड को यूं पकड़ लिया जैसे बाज़ चिड़िया को दबोच लेता है. दो तरफ़ा हमले से मैं पूरी तरह सरेंडर हो गया. ऊपर से गांड में उंगली और नीचे से लंड की मालिश. मुझे से सहन नहीं हुआ और मैं उठ कर बैठ गया. दोनों मुस्कुरा मुस्कुरा कर मुझे देखने लगीं. मैं गहरी गहरी सांस लेता हुआ तकिए से टेक लगा कर बैठ गया. किरण ने फिर मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे धीरे उसे सहलाने लगी. । बिजली मेरे करीब आ गई और उसने अपने तपते होंठ मेरे ख़ुश्क होंठों पर रख दिए. फिर वो मेरे होठों को चूसने लगी.

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