खूबसूरत चूत ने पहले किसी लंड का मज़ा नहीं चखा

गतांग से आगे …..

उसके दोनों हाथ मेरे निप्पलों को मसल रहे थे. सेक्स का ये अनोखा मज़ा मैं पहली बार ले रहा था. कल रात को इतना मज़ा नहीं आया था. मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं. बिजली मेरे होंठों को चूसती जा रही थी. फिर वो मेरी ठोड़ी को चूसने लगी और फिर गले से होती हुई मेरे निप्पलों तक आ गई और उसे दांतों से हलके हलके काटने लगी. मेरे दांतों में फिर सनसनी होने लगी. अचानक मुझे एहसास हुआ कि किरण ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया है.

उसकी गरम गरम ज़बान मेरे लंड को मसलने लगी और थूक से मेरा लंड इतना चिकना हो गया कि बार बार फिसल कर किरण के मुंह से बाहर आने लगा. या शायद वो जानबूझ कर ऐसा कर रही थी. एक तो तेल की चिकनाई और ऊपर से किरण का अमृत भरा मुंह, अगले ही पल लंड का सारा रस बाहर आ गया और किरण एक झटके से पीछे हो गई. कुछ रस उसने पी भी लिया. मेरा लंड अब उसके हाथ में था. उसने लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाया और सारा बचा खुचा रस निचोड़ दिया. मुझे बड़ा अच्छा लगा.

अब बिजली ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे झंडे की तरह हिलाने लगी. शायद वो उसे मुरझाने नहीं देना चाहती थी. मैं तकिए से टेक लगा कर बैठा था. अब मैं पूरी तरह लेट गया. दोनों मेरे शरीर को देखने लगीं. फिर न जाने बिजली को क्या सूझी कि वो मेरे बाजू में ही लेट गई और मुझे करवट बदलने कहा. मैं दूसरी तरफ़ करवट बदल कर लेट गया. उसने फिर मेरी गांड में अपनी उंगली डाल दी. मैंने पलट कर कहा… “ये तुम बार बार ऐसा क्यों कर रही हो?’ वो बोली…“ मजा आ रहा है कि नहीं ??” मैं कुछ नहीं बोला… बोलता भी क्या.

मुझे किरण से भी ज़्यादा बिजली की चूत में मज़ा आने लगा. मैं धक्के मारता मारता बोला…“ बिजली तुम तो सचमुच बिजली हो… तुम्हारी चूत में तो मस्ती का ख़ज़ाना भरा है….

” वो उसी तरह अपनी गांड उचकाती हुई और हांफते हुए बोली…. “थोड़ा टेढ़ा हो जाओ साब, अपने लंड को थोड़ा आड़ा कर लो… फिर देखो कैसे और मजा आता है..

.’ मैंने उसकी बात मानी और अपने लंड को उसकी चूत में थोड़ा तिरछा कर दिया और उसी दिशा में लंड को चूत में अंदर बाहर करने लगा. अरे वाह… ये तो कयामत की चुदाई है… बहुत मज़ेदार, बहुत लज्जतदार. चूंकि इससे पहले मैं दो बार झड़ चुका था, इसलिए इस बार काफ़ी समय लग रहा था. मैंने अब किरण की तरफ़ देखा, वो हम दोनों को दिलचस्पी से चुदाई करते हुए देख रही थी और दो उंगलियां अपनी चूत में डाल कर उन्हें अंदर बाहर कर रही थी. मैं बिजली के ऊपर से उतरा और किरण पर चढ़ गया. तकिए को उसकी गांड के नीचे सही किया. फिर थोड़ा आड़ा हो कर अपने लंड को उसकी चूत के बीच में रखा और धीरे से पुश किया.

लंड ने जाने से इनकार कर दिया. वजह वही थी, यानी किरण की चूत बिजली की चूत की तरह लंबी चौड़ी और गहरी नहीं थी, बड़ी संकरी थी. मैंने एक दो बार और कोशिश की कि अपने आड़े लंड को उसकी चूत में घुसा सकें. मगर सफलता नहीं मिली. किरण मेरी नाकामी देख कर अंदर ही अंदर हंस रही थी. मुझे गुस्सा आया और मैंने ज़ोर लगा कर अपने लंड को उसकी चूत में घुसेड़ने की कोशिश की. थोड़ा सा लंड अंदर गया. बिजली भी ये सब देख रही थी. उसने कहा, “अरे साब तेल लगाओ तेल..

.” मगर तेल तो कब का ख़त्म हो चुका था. मैंने इशारे से बिजली को बताया कि तेल नहीं है. बिजली उठी और उसने मुझे किरण की चूत से अलग किया और फिर किरण की चूत को दो उंगलियों से चौड़ा करके उसके अंदर थूकने लगी. दो तीन बार थूक कर वो बोली… “ अब प्रयास करो साब.”

मैंने अपना लंड फिर किरण की चूत पर आड़ा रखा और हलके से धक्का मारा. वाह, ये तो आधे से ज़्यादा लंड अंदर चला गया. किरण की हलकी सी चीख निकल गई. बिजली ने मेरे कंधों पर हाथ रखा और ज़ोर से दबाया. लंड पूरा किरण की चूत में घुस गया. किरण फिर अपना सिर दाएं बाएं करने लगी. लंड को चूत में आगे पीछे करने में थोड़ी तकलीफ तो हो रही थी, मगर इतनी लज्जत मिल रही थी कि क्या बताऊँ? थोड़ी देर तक मैं किरण को यूं ही चोदता रहा और वो भी आंखें बंद करके मजे लेती रही. फिर बिजली बोली…. अब मेरी बारी साब. मैंने बिजली की ओर रुख किया तो किरण ने मेरे हाथ पकड़ लिए और बोली…“ पहले मेरा काम तो तमाम करो.”

मैं बिजली को देखने लगा. वो मुस्कुराई और बोली…. “ठीक है, खतम करो साली को.” मैंने दोबारा अपना तनतनाया हुआ लौड़ा किरण की चूत में डाला, जो अब आसानी से अंदर चला गया. इतनी देर चुदाई करने से उसकी चूत का मुंह अच्छी तरह खुल गया था. मैने जल्दी जल्दी उसे चोदना शुरू किया. धीरे धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी और किरण की सांसें भी उसी गति से चलने लगीं. जब क्लाइमेक्स पर पहुंचा और लंड का सारा रस बाहर आया तो महसूस हुआ कि सारे शरीर से स्वाद की लहरें निकल कर किरण की चूत में समा रही हैं….

जैसे कोई किसी फल की छिलका उतारता है, वैसे ही। जिस्म की सारी थकान उतर गई. जब तक वीर्य की एक एक बूंद न निकल गई, मैं उसे झटके मारता रहा. इतना सारा रसीला पदार्थ उसकी चूत से बाहर निकला कि मैं हैरान रह गया. ये रस सिर्फ मेरे लंड का ही नहीं था, इसमें किरण की चूत का रस भी शामिल था. बिजली ने किरण की चूत पर हाथ रख कर सारे वीर्य को मुट्ठी में ले लिया और अपनी छातियों पर मलने लगी. उसे देख कर किरण भी वैसा ही करने लगी. मैं उन दोनों के बीच में लेट गया और कुछ देर हम यूं ही पड़े रहे. फिर किरण उठ कर बोली….
अब हम लोग जाते हैं…. जल्दी से पैसे दे दो…. कल शायद आप न मिलो…”

मैं उठा और पर्स से पैसे निकाले. सौ सौ के दो नोट थे. मैने किरण से कहा… “तुम लोगों ने मेरे साथ जो काम किया है, उसे मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता…. इसलिए सौ के बजाए दो सौ दे रहा हूं…. सौ तुम्हारे और सौ बिजली के.”
दोनों खुश हो गईं. किरण ने कहा…. “अब कब आना होगा साब ?” बिजली भी मेरा हाथ पकड़ कर बोली… “हां बाबूजी… तुम बहुत अच्छे हो… अगर दोबारा आए तो हमें अच्छा लगेगा…” मैं मन ही मन में सोचने लगा, इस साल माउंट आबू में छुट्टियां मनाने का प्रोग्राम बनाया था…! मगर मावली पोरा जैसा पिकनिक स्पॉट सारे देश में कहां मिलेगा !!!