लंड सहलाकर अपनी चुत चुदवा ली

मैं और मेरे पापा काम से घर लौट रहे थे हम लोगों की फूल की दुकान है और हम लोग बहुत मेहनत करते हैं उसके बाद हमें कुछ पैसे मिलते हैं हम लोगों का फ्लावर डेकोरेशन का काम है। जैसे ही हम लोग घर लौटे तो मेरी मम्मी घर में रो रही थी मैंने अपनी मम्मी से पूछा आप क्यों रो रही हैं तो मम्मी कहने लगी कपिल बेटा मैं तुम्हें क्या बताऊं आज अंकुर घर पर आया था और वह ना जाने क्या अनाप-शनाप कह रहा था मैंने तो उसकी कोई भी बात नहीं सुनी और उसे घर से जाने के लिए कह दिया लेकिन उसने तुम्हारी बहन आशिका के बारे में बहुत कुछ गलत कहा।

मैंने अपनी मां से पूछा लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों कहा मम्मी कहने लगी ना जाने वह आशिका पर कैसे कैसे इल्जाम लगा रहा था और उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा था मुझसे तो सुना भी नहीं गया मैंने उसे कहा तुम अभी घर से चले जाओ मैंने उसे मैंने घर से जाने के लिए कहा। मैं इस बात से बहुत परेशान हो गया और मेरे पापा तो चुपचाप अपने कमरे में चले गए उन्हें भी बहुत ज्यादा टेंशन हो गई थी इसलिए वह चुपचाप अपने रूम में बैठे हुए थे। उन्होंने किसी से कुछ बात नहीं की लेकिन मुझे ही अब कुछ करना था मैंने अपनी बहन से बात की तो मेरी बहन कहने लगी तुम्हारे जीजा जी चाहते हैं कि अब हमारा तलाक हो जाए वह नहीं चाहते कि हम दोनों साथ में रहे।

मैंने जब यह बात सुनी तो मुझे बड़ा बुरा लगा मैंने आशिका से कहा तुमने मुझे क्यों नहीं बताया मेरी बहन मुझे कहने लगी मैं आपको क्या बताती मैं खुद ही इतने समय से परेशान थी। मैंने उसे कहा क्या तुम्हारा हम पर कोई हक नहीं है तुम्हें हमें बताना चाहिए था पापा भी इस बात से बहुत ज्यादा टेंशन में है वह आजकल किसी से बात भी नहीं कर रहे हैं और ना ही उनका काम पर कोई ध्यान रहता है।

मेरी बहन आशिका बहुत समझदार है और वह नहीं चाहती थी कि हम बेवजह की टेंशन ले इसलिए उसने हमें कुछ भी नहीं बताया लेकिन मुझे बहुत बुरा लगा था और मैंने आशिका से कहा मुझे बहुत ज्यादा बुरा लगा तुम्हें यह सब हमें बताना चाहिए था। कुछ दिनों बाद मैं अपने जीजा अंकुर से मिला जब मैं अपने जीजा से मिला तो मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की और कहा आप आशिका को इतनी तकलीफ क्यों दे रहे हैं क्या उसने आज तक आपको कोई कमी रखी है या उसकी वजह से आपको कोई तकलीफ हुई है लेकिन आप उसके साथ बहुत गलत कर रहे है। वह मुझे कहने लगे तुम मुझे ना ही समझाओ तो ठीक होगा तुम्हारी बहन ना जाने क्या गुल खिला रही है यह तो तुम उससे ही पूछना लेकिन अब मैं उसके साथ बिल्कुल भी नहीं रह सकता और उसे तुम अपने साथ ही अपने घर ले जाओ।

मैंने उन्हें कहा आप बहुत गलत कर रहे हैं आपको उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा लेकिन वह तो जैसे अपने प्यार के नशे में चूर थे ना जाने किस लड़की से उनका अफेयर चल रहा था जिसकी वजह से वह आशिका को भी ठुकरा रहे थे। मैं अपनी बहन को दरबदर की ठोकर नहीं खाने दे सकता था इसलिए मैं उसे अपने साथ घर पर ले आया।

हम लोगों ने उसके बाद भी काफी कोशिश की और अपने जीजा को समझाने की कोशिश की लेकिन हर बार की तरह वह कुछ समझने को तैयार ही नहीं होते और वह उल्टा हमें ही दोष देते कि तुम लोगों ने आशिका की परवरिश बिल्कुल भी अच्छे से नहीं की। वह मेरी बहन पर बहुत कुछ गलत इल्जाम लगाते मेरी बहन भी पूरी तरीके से टूट चुकी थी और उसे भी किसी सहारे की जरूरत थी इसलिए मैं उसे हमेशा समझाया करता था। मैं कोशिश करता था कि उसे कोई तकलीफ ना हो और वह अपने टेंशन से बाहर आ सके लेकिन उसके दिमाग में तो यही चल रहा था और इस वजह से वह बीमार भी होने लगी। उसे मैंने बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वह कुछ समझ नहीं रही थी मुझे उसे समझाने में काफी समय लग गया था।

अब सब कुछ ठीक होने लगा था लेकिन मैं अपने जीजा अंकुर की गलतियों पर पर्दा नहीं डालना चाहता था और उनके साथ भी वही हुआ जो उन्होंने हमारे साथ किया था।

उनकी बहन निहारिका कॉलेज में पढ़ती है उस पर वह बहुत भरोसा किया करते थे लेकिन उन्होंने उस पर कुछ ज्यादा ही भरोसा कर लिया था जिससे कि उनका भरोसा भी टूट गया। निहारिका का अपने पड़ोस में रहने वाले एक लड़के से अफेयर चल रहा था और जब मुझे इस बात का पता चला तो मुझे इस बात से बहुत खुशी हुई क्योंकि उन्होंने जैसा मेरी बहन के साथ गलत किया था वैसा ही अब उनकी बहन के साथ भी होने वाला था। वह जिस लड़के से प्यार करती थी उसके बारे में मुझे सब कुछ पता था वह लड़का एक नंबर का बदमाश है लेकिन यह बात शायद निहारिका को नहीं मालूम थी।

मैंने सोचा निहारिका की जिंदगी भी अब मेरी बहन की तरह ही बर्बाद हो जाएगी लेकिन मैं शायद उस वक्त गलत था क्योंकि मैं सिर्फ बदले की आग में जल रहा था लेकिन जब मुझे एहसास हुआ कि कहीं वह लड़का उसके साथ कुछ गलत ना करें और कहीं उसे भी इस बात की तकलीफ ना हो तो मैंने उसे समझाने की कोशिश की परन्तु उसको मेरी बातों पर यकीन नहीं था उसे लगा कि शायद मैं जानबूझकर यह सब कर रहा हूं। मैंने जब निहारिका के सामने उस लड़के की असलियत रखी तो वह यह सब सुनकर दंग रह गई उसे मुझ पर यकीन नहीं था इसलिए मैंने अपने कुछ दोस्तों से कहा तुम निहारिका को उस लड़के के बारे में बताओ।

जब उन्होंने उसके बारे में उसे बताया तो निहारिका ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी वह बहुत ज्यादा दुखी हो चुकी थी लेकिन निहारिका को यह पता चल चुका था कि मेरी बहन के साथ उसके भैया ने कुछ ठीक नहीं किया और उस पर बेवजह के इल्जाम लगाकर उन्होंने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी है।

एक दिन निहारिका मुझसे मिलने के लिए दुकान पर आई उस दिन मैं और पापा साथ हीं थे हमारे साथ बैठकर उसने मुझसे कहा भाभी कैसी हैं मैंने उसे कहा दीदी ठीक है तुम बताओ तुम क्या कर रही हो वह कहने लगी मेरा कॉलेज पूरा हो चुका है और अब मैं घर पर ही हूं। उसने मुझसे कहा भैया ने भाभी के साथ बहुत गलत किया और मैं भैया को इस बारे में समझा दूंगी कि उन्होंने भाभी के साथ गलत किया है उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। मैंने निहारिका से कहा तुम्हें यह काफी देर बाद समझ आया क्योंकि तुम्हें लगा था कि शायद जिंदगी इतनी आसान होती होगी मेरी दीदी के ऊपर क्या बीत रही है यह तुम्हें भी शायद पता होगा।

निहारिका को भी अपनी गलती का एहसास था इसलिए उसने मुझे उस दिन के लिए धन्यवाद कहा और कहने लगी यदि तुम समय पर मुझे उसकी असलियत नहीं बताते तो शायद मैं भी उसकी असलियत कभी जान नही सकती थी लेकिन तुमने समय पर मेरी आंख खोल दी और तुम्हारी वजह से ही मुझे उसकी असलियत पता चली। मैंने निहारिका से कहा पहले मुझे भी लगा था कि मुझे तुम्हें कुछ भी नहीं बताना चाहिए था लेकिन मैंने जब इस बारे में सोचा तो मुझे अच्छा नही लगा लेकिन तुम्हारे भैया ने मेरी बहन के साथ कुछ अच्छा नहीं किया निहारिका ने मुझे कहा मैं अपने भैया को समझाऊंगी।

उसने अपने भैया को समझाया और शायद अब वह अपनी गलती को मान चुके थे इसलिए उन्होंने आशिका को दोबारा से स्वीकार कर लिया और दोबारा से ऐसी कोई गलती ना हो उसके लिए उन्होंने मेरे परिवार से माफी मांगी। अब सब कुछ ठीक हो चुका था इसमें कहीं ना कहीं निहारिका ने भी हमारा साथ दिया था।

निहारिका को भी शायद मेरी अच्छाइयों से प्यार हो चुका था और जब भी वह मुझे मिलती तो उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी होती। वह मुझे हमेशा कहती तुम बहुत अच्छे इंसान हो उसने शायद मुझे दिल ही दिल चाहा लिया था एक दिन मैं अपनी बहन आशिका से मिलने के लिए गया। उस दिन निहारिका घर पर ही थी उस रात में वहीं रुकने वाला था जब रात को मैं लेटा हुआ था तो मेरे पास निहारिका आई और कहने लगी क्या तुम सो रहे हो। मैंने उसे कहा नहीं मैं तो ऐसे ही लेटा हुआ था वह मेरे पास आकर बैठ गई और मुझसे बातें करने लगी।

मैं सोच रहा था वह कब जाएगी लेकिन वह तो जाने का नाम ही नहीं ले रही थी वह मेरे पास बैठ कर बात कर रही थी। उसने जब मेरी टांग पर हाथ रखा तो मैं कुछ समझ नहीं पाया लेकिन जब मैंने भी उसकी जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह मचलने लगी और मुझे कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो लेकिन मुझे तो उसकी जांघ को सहलाने में बड़ा मजा आ रहा था मै अंदर ही अंदर में पूरे जोश में आ चुका था।

मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने उसे अपने हाथ में ले लिया और वह मेरे लंड को हिला रही थी मैं पूरे जोश में आ गया। मैंने उसे कहा तुम अपने मुंह में लंड ले लो उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे सकिंग करने लगी काफी देर तक यह सिलसिला जारी रहा। जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो वह मचलने लगी उसकी योनि से गर्मी बाहर निकलने लगी। मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया जब मेरा लंड उसकी योनि में गया तो उसके मुंह से चीख निकल पड़ी और वह चिल्लाने लगी।

उसकी मादक आवाज बहुत तेज होती मैं उसे लगातार तेजी से धक्के दे रहा था उसने अपने दोनों पैरों से मुझे जकड लिया और वह पूरे मजे में आने लगी। मुझे उसे धक्के मारने में एक अलग ही मजा आता मैं काफी देर तक उसे ऐसे ही धक्के देता रहा जैसे ही मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गिरा तो वह कहने लगी आज तो मेरी इच्छा पूरी हो गई। मैंने उसे अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया और कहां तुम्हारा फिगर तो लाजवाब है तुमने तो मेरी इच्छा पूरी कर दी। वह कहने लगी मैं तो तुम्हे दिल के दिल चाहने लगी हूं और शायद तुम्हारी अच्छाइयों को मैं बहुत पसंद करती हूं इसलिए तो मैं तुम्हें अपना मानती हूं।