मिस्टर चोदनाथ की चोदन कहानी

हैलो दोस्तो, आज आप सभी मेरे साथ पढ़ेंगे एक नयी कहानी जिसको पढ़ने के बाद आप सभी को बहुत मजा आने वाला है। यह घटना 3 साल पहले की है, अंबाला से मेरे पास एक ईमेल आई एक 24 साल की लड़की की, नाम था रीतिका साइनी, परंतु उसने अपना कहानी के लिए नाम रखा था जेसिका… लिखा था कि जय जी आपकी कहानियाँ पढ़ कर मेरी बुर कुलबुलाने लगती है, रस बहाने लगती है। जिस तरह से आपने रीना की बुर की सील तोड़ी, मैं भी आपसे अपनी सील तुड़वाना चाहती हूँ। यह भी चाहती हूँ कि आप मुझे चोद कर हमारी चुदाई की कथा लिखें … मेरी बड़ी तमन्ना है कि यह कहानी मैं पढ़ूँ। मुझे विश्वास है कि अपनी खुद की चुदाई का विवरण पढ़ के बेहद आनन्द आएगा।

जेसिका रानी के संग आठ दस दिन तक मेल बाज़ी हुई और अंत में आपसी सहमति से मैंने दो दिन का अंबाला जाने का प्रोग्राम बना लिया। अब तक मैंने उसे जेसिका रानी और उसने मुझे मिस्टर चोदनाथ कहना शुरू कर दिया था। खूब जम के आपस में गालियाँ बकना और तू तड़ाक से बातें करना चालू हो चुका था। हालाँकि रानी पहले पहले गालियाँ देने में हिचकती थी मगर बहुत जल्दी वो सब गन्दी गालियाँ न सिर्फ सीख गई बल्कि गाली देने में उसकी हिचकिचाहट भी ख़त्म हो गई।

तभी रानी ने एक नई बात कही, वो बोली कि उसका प्रेमी दीप भी उसकी सील टूटने का दृश्य देखना चाहता है और मेरा शिष्य बन कर चुदाई के खेल में पारंगत होना चाहता है। वो भी चाहता है कि मेरी तरह ज़बरदस्त चोदू बने!

यहाँ दीप के विषय में मैं यह बता दूँ कि अपनी दूसरी या तीसरी मेल में जेसिका रानी ने मुझसे पूछा था कि उसके पीछे चार लड़के पड़े हुये हैं, और चारों ही उसको पसंद हैं, वो समझ नहीं पा रही कि किसको चुने। मैंने उसको चार में से एक को चुनने का एक तरीका बताया था जिसके परिणाम स्वरूप दीप उसका प्रेमी बन गया था और दोनों ने शादी का फैसला भी कर लिया था।

मैंने उत्तर दिया- ठीक है जेसिका रानी, मैं तेरी सील तोडूंगा। दीप अगर अपनी माशूका को चुदवाते हुए देखना चाहता है मुझे क्या… देखे जी भर के!
वैसे तो यह शर्त भी जेसिका रानी ने रखी थी कि वो दीप को आशिक़ तभी बनाएगी जब वो उसकी सील मेरे से तुड़वाने को दीप़ी होगा और शादी के बाद में भी मेरे से जेसिका रानी चुदा करेगी जिसमें वो कोई ऐतराज नहीं करेगा। इसलिए मैंने जेसिका रानी को हामी भर दी कि ठीक है दीप उसकी नथ खुलने का नज़ारा देख सकता है।

अब आते हैं कहानी पर:

तय किये हुए दिन मैं अंबाला जा पहुंचा और होटल बेला विस्टा में ठहर गया। दोपहर दो बजे के करीब जेसिका रानी दीप के साथ मेरे रूम में आ गई।
हरामज़ादी को देख के दिल खुश हो गया, मस्त जवान लौंडिया थी माँ की लौड़ी! हृष्ट पुष्ट सरदारनी, बेहद खूबसूरत, 5 फुट 7 इंच का क़द, छरहरा निखरता हुआ मस्त बदन, तने हुए नुकीले चूचुक और खूब गोरा रंग!
मैंने उसको सर से पांव तक निहारा… साली गज़ब की बुर थी कमीनी, खूबसूरत चेहरा, बेहद हसीन हाथ और सुन्दर सुडौल उंगलियाँ। अच्छे बड़े आयताकार सुन्दर नाख़ून जिन पर बैंगनी नेल पोलिश लगाई हुई थी और वे थोड़े थोड़े बिल्कुल सही सही बढ़े हुए थे मस्त! जैसे फिल्मों में अभिनेत्रियाँ नाख़ून रखती है एकदम वैसे!
लहराते हुए रेशमी बाल, लंबी नाक, बड़ी बड़ी आँखें और हल्की सी मुस्कान लिए छोटे छोटे फ़ौरन ही चूसने लायक होंठ… जब ये होंठ लौड़े को दबाएंगे तो कितना मज़ा आएगा। यह बात मन में आते ही लंड मचल उठा।

उसने पटियाला स्टाइल भड़कीले प्रिंट वाली सलवार और गहरे नीले रंग की शमीज़ पहनी हुई थी। पैरों में जूतियाँ जिनमें उसके गोरे पैरों का ऊपरी भाग दिख रहा था। पांव नहीं दिख रहे थे मगर आशा थी कि ऐसे सुन्दर हाथों वाली लड़की के पैर भी सुन्दर होंगे।

दीप एक लंबा तगड़ा नवयुवक था, अच्छा स्मार्ट और हैंडसम!
जेसिका रानी भी मुझे भली भांति देखते हुए बोली- हाय मिस्टर चोदनाथ… कैसे हैं आप… आप तो एक प्रोफेसर लगते हैं।
बहनचोद रानी की सेक्सी मीठी आवाज़ सुन कर लगा जैसे कहीं घंटियाँ बज रही हों। लंड तो अकड़ा हुआ था ही, अब फ़ुनफ़ुनाने भी लगा।

तभी दीप ने कहा- नमस्ते सर जी!
मैंने भी कहा- नमस्ते दीप!
और दोनों को आराम कुर्सियों पर बैठ जाने का इशारा किया।

दोनों बैठ गए तो मैंने दीप से कहा- सुन दीप…अब जो तेरी माशूका की नथ खोली जाएगी, उस नज़ारे को तू यहीं चुपचाप बैठे देखते रहना… न कुछ बोलना है और न कुछ करना है… मेरी रानी को तो छूना भी मत… आ गई बात समझ में?
दीप ने उत्तर दिया- हाँ हाँ सर जी… ऐसा ही होगा… वैसे भी आपकी रानी मुझे छूने कहाँ देती है… अभी तक तो मैंने इसको किस भी नहीं किया… बोलती है जब मैं एक बार चोदनाथ जी से चुद जाऊँ उसके बाद मैं तेरी… अब तक मैंने इसके सिर्फ पैर चाटे हैं और इसकी सु सु पीने के लिए बुर के नज़दीक मुंह लगाया है… बुर से भी नहीं सिर्फ बुर के पास… बस!

मैंने दीप को डांटा- सुन बहन के लंड दीप… सु सु सिर्फ लड़के करते हैं मादरचोद… लड़कियाँ सु सु नहीं करतीं बल्कि अमृत धारा निकालती हैं… इस धारा को स्वर्ण अमृत या स्वर्ण रस कहा जाता है कमीने… संक्षिप्त में सिर्फ अमृत भी कह सकते हैं… तू किस्मत वाला है बुरिये कि जेसिका रानी तुझको अमृत पीने देती है।

दीप ने फ़ौरन कान पकड़ के कहा- सर जी, भूल हो गई, माफ़ कर दीजिये।
जेसिका रानी बोली- और जो तेरी पचासों बार मुट्ठ मारी है उसका भी तो बोल हरामी?
दीप ने सर हिला हिला कर यह बात मान ली।

मैंने जेसिका रानी की ओर बड़े प्यार से देखते हुए कहा- रानी बहुत अकलमंद है कमीने.. चिंता न कर… सबर का फल मीठा होता है… अब तू आराम से बैठ और देख तमाशा…. ज़्यादा ठरक चढ़ जाए तो मुट्ठ मार लियो हरामी के पिल्ले!

इतना कह के मैंने लपक कर जेसिका रानी को गोद में उठा लिया और उसको बाँहों में कस के लिपटा लिया। आलिंगन में लिए मैं बिस्तर पर आ गया और रानी को लिटा दिया।
जैसे ही मैं बिस्तर पर चढ़ने को हुआ तो रानी ने खनखनाती हुई शहद सी आवाज़ में कहा- मिस्टर चोदनाथ… एक बात मानोगे मेरी?

मैं- अरे मेरी जान, एक क्यों एक हज़ार बातें मानूँगा… बोल न क्या कहना चाहती है मादरचोद कुतिया?
रानी- कुछ खास नहीं मैं यह चाहती थी कि आज का खेल मेरे इशारों पर चले… जैसे जैसे मैं डायरेक्शन दूँ, आप वैसा वैसा ही करिये… मंज़ूर मिस्टर चोदनाथ!

मैंने गर्दन हिला कर हामी भरी और पूछा- और कुछ बदज़ात रण्डी?
जेसिका रानी ने इठलाते हुए कहा- दूसरा यह कि आपको चैट पर फोन पर तो खूब गालियाँ दे देती थी मगर फेस टू फेस गाली देने में शर्म आ रही है… थोड़ी गर्म हो जाऊँगी तो शायद शर्म भी खुल जाए मिस्टर चोदनाथ!

मैंने कहा- ठीक है, मैं ये बात समझता हूँ लेकिन मेरी एक शर्त यह है कि तू मुझे मिस्टर चोदनाथ बोलना बन्द कर और या तो दीपे बोल या बुर निवास या सिर्फ चोदनाथ!
इस पर रानी ने कहा- मैं तो चोदनाथ ही कहूँगी बहनचोद!

‘हा हा हा हा हा! बड़ी जल्दी कुतिया की शर्म निकल गई। देने लगी न हरामज़ादी गाली!’
मैंने कहा- आगे क्या हुक्म है मेरी रानी का… कैसे आगे बढ़ना है बताइये रानी जी?

जेसिका रानी ने इतराते हुए, बड़े कामुक अंदाज़ में बल खाते हुए धीमे स्वर में कहा- पहले तो दीपा मुझे कस के बाँहों में जकड़ ले, जैसे अभी बिस्तर पर लिटाने से पहले जकड़ा था। बहुत आनन्द आया जब तुम्हारी जफ्फी में हड्डियाँ कड़कड़ा गईं… साँसें उखाड़ दो मिस्टर चोदनाथ… मुझे बाँहों में लिए लिए मेरे होंठों का रस चूसते रहो दीपा…

मैंने रानी को बिस्तर से उठाकर फिर से बाहुपाश में बांध लिया और जैसा रानी चाह रही थी, अपने होंठ उसके गुलाब की पंखड़ियों समान लबों से सटा दिए, और लगा उनको हुमक हुमक के चूसने!रानी के मुंह का जूस मेरे मुंह में आ रहा था और मेरा उसके मुंह में, रानी के मुंह का स्वाद और गंध बेहद नशीले थे।
यारो, मस्त हो गया मैं!
लड़कियों के मुखरस और मुखसुगंध कुछ अलग ही होती है, आदमी का लंड तन्ना उठता है… हम्म्म्म… हम्म्म्म… बहनचोद हम्म्म्म.

मैंने उसे इतना ज़ोर से लिपटा रखा था कि बुरी तरह से अकड़ा हुआ लौड़ा उसके पेट में गड़ा जा रहा था और उसके चूचे मेरी छाती में चुभ रहे थे।
मस्ती में चूर हो गए थे हम दोनों!

उसका मुंह गर्म था और उसमें लार बहे जा रही थी, मेरा मुंह भी पनिया गया था, मेरे हाथ उसके नितंबों तक पहुँच चुके थे और मजा ले लेकर उनको सहलाते हुए दबा रहे थे जबकि रानी मेरा लंड पकड़ना चाहती थी लेकिन असफल थी क्यूंकि लंड तो उसके नर्म पेट में गड़ा हुआ था।
रानी ने अपने एक पैर मेरी टांगों से लिपटा लिया था और मेरे बाल पकड़े हुए वो मुझको अपने मादक होंठों का रसपान करवा रही थी।

काफी देर तक एक दूसरे के लबों का जूस चूसने के बाद रानी ने मुंह अलग किया और बोली- पहले तो अपने लौड़े के दर्शन करवा… सबसे पहले आंखें हरी कर लूँ फिर आगे बढ़ूँगी साले चोदनाथ!

मैंने कहा- पैंट खोल के खुद ही निकाल के दर्शन कर ले हराम की ज़नी… ये लंड मुसंड भी तो पैंट की क़ैद से आज़ाद होने को बेचैन हो रहा है।

रानी ने लपक के मेरी पैंट की बेल्ट खोल दी और पैंट नीचे गिरा दी, उसके बाद रानी ने मेरी टी शर्ट भी उतार डाली, मेरी नंगी बाँहों को चूमते हुए रानी ने बनियान उतार के दूर कहीं फेंक दी। फिर रानी ने मेरे पेट की चुम्मियाँ लीं, मेरी निप्पल्स पर जीभ फिराई और नाभि चाटते हुए उसने मेरा बॉक्सर शॉर्ट भी नीचे खिसका दिया।

अब मैं एकदम मादरजात नंगा खड़ा था, लंड एक गुस्साए हुए नाग की भांति फुन्ना रहा था, साला बार बार तुनक तुनक के उछाल मार रहा था।
रानी ने जैसे ही लौड़े को अपने मुलायम हाथों में थामा तो उम्म्ह… अहह… हय… याह… हवस की तेज़ धारा मेरे बदन में दौड़ी।

जेसिका रानी ने लौड़े को पुचकारते हुए, सहलाते हुए, चूमते हुए उसके साथ बातें करनी शुरू कर दीं- हाय.य.य… मैं मर जावाँ नागनाथ… आज तुम अपने बिल में घुसोगे नागनाथ… बिल भी तुम्हारी बाट देख रहा है जान… पता है तुम्हें तुम्हारा बिल पानी छोड़ रहा है ताकि तुम्हें भीतर घुसने में ज़रा भी दिक्कत न हो… पुच्च पुच्च पुच्च… हाय.य.य.य.य दीपा.. लंड महादीप तुम इतने मोटे तगड़े हो! खून खून कर दोगे बुर को… पुच्च पुच्च पुच्च..

जेसिका रानी ने तन्नाए हुए लौड़े की उभरी उभरी नसें दबाईं और अंडे सहलाये। फिर लौड़े की सुपारी को कई दफा चूमा चाटा। लंड की खाल धीरे से पूरी पीछे खींच के सुपारी नंगी की और फिर उसके साथ नाक सटा के सूंघ सूंघ के लंड की विशेष गंध का आनन्द लेने लगी, सूंघती चूमती और फिर लंड को दबाते हुए गहरी गहरी आहें भरती!

मैंने पूछा- रानी तू है तो अभी तक कुमारी कच्ची कली… ये सब कहाँ से सीखा?

जेसिका रानी खिलखिला के हंसी… बहनचोद हंसी क्या मदमस्त थी जैसे कोई झरना, प्रकृति की कृपा से, बड़ी ऊंचाई से नीचे धमाधम गिर रहा हो।
अपनी दिलकश हंसी का आनन्द दिलाते हुए रानी ने उत्तर दिया- चोदनाथ दीपा, कुछ चुदाई की फ़िल्में देखकर और ज़्यादातर तेरी लिखी कहानियाँ पढ़ कर… जो जो तेरी रानियों ने कहानियों में किया वो सब सीख लिया… हर कहानी की रानी से कुछ कुछ! मस्ताई हुई रानी ने झुक के फिर से लंड पर चुम्मियों की बरसात कर डाली।

‘अब आगे का प्लान सुन चोदनाथ दीपा… अब दीप तेरी आँखों पर मेरा दुपट्टा बांध देगा… मैं बिस्तर पर कम्बल ओढ़ के, नंगी होकर लेट जाऊँगी.. तू थोड़ा थोड़ा कम्बल हटाता जायगा और धीरे धीरे खुलते हुए मेरे अंग अंग को चूमेगा… ठीक है न चोदनाथ?’

मुझे क्या प्रॉब्लम थी, यह नए स्टाइल का सुन के मुझे भी बहुत तेज़ उत्तेजना होने लगी थी, अभी से दिख रहा था कि बहुत मज़ेदार चुदाई होने वाली है, मैं बोला- जो हुक्म रानी साहिबा!
और घुटनों के बल बैठ के आँखें बंद करवाने की प्रतीक्षा करने लगा।

रानी ने दीप को आर्डर दिया कि मेरी आँखों पर पट्टी बांधे।
दीप ने रानी का दुपट्टा उठाया और मेरी आँखों पर लपेट दिया।
हम्म्म्म… हम्म्म्म! बहनचोद रानी के दुपट्टे से उसके शरीर की मदमाती गंध मेरे नथुनों में बसने लगी- आहा आहा आहा आहा आहा!! यारों मजा आ गया!
मैं इस सुगंध का आनन्द लूट ही रहा था कि कम्बल के नीचे से रानी की आवाज़ आई- आजा चोदनाथ अब बिस्तर के पास आजा…

मैं जेसिका की सुगंध का आनन्द लूट ही रहा था कि कम्बल के अन्दर से रानी की आवाज आई- आ जा चोदनाथ अब बिस्तर के पास आजा… कम्बल के नीचे मैं बिल्कुल नंगी हूँ… अब खोल ले पट्टी…
दीप ने झट से आकर रानी का दुपट्टा खोल के मेरी आंखें आज़ाद कर दीं।

देखा तो बिस्तर पर कम्बल नीचे से लेकर ऊपर तकिये तक फैला हुआ था और तकिये पर रानी के सिर्फ बाल दिख रहे थे। मैं सरक के बिस्तर के नज़दीक रानी के पैरों की तरफ बैठ गया।

मैंने हल्के से कम्बल को थोड़ा सा हटाया, रानी के पांव खुल गए।
सबसे पहले मेरी नज़र तलवों पर पड़ी… यार ! बेटीचोद दिल बाग़ बाग़ हो गया। मुलायम और हल्के गुलाबी से नर्म नर्म तलवे!
दूध से गोरे, रेशम से चिकने और त्रुटिहीन!
मैंने पूरे पांवों को निहारा तो बहनचोद मन प्रसन्न हो गया… बहुत ही हसीन पैर थे रानी के, साफ सुथरे भली भांति तराशे हुए नाख़ून जिनमें हाथों की नेल पोलिश वाले शेड की बैंगनी रंग की नेल पोलिश लगाई हुई थी, अंगूठा साथ वाली उंगली से ज़रा सा छोटा!

मैंने मुंह घुमा के दीप से कहा- सुन… रूम सर्विस फोन करके तीन प्लेट रसगुल्ले और तीन पेप्सी या कोक आर्डर दे दे… रानी की बुर का पर्दा फाड़ने के बाद मुंह मीठा करेंगे न!
दीप ने जी सर जी कह के आर्डर कर दिया तो मैंने वापिस अपना ध्यान जेसिका रानी के बदन पर केंद्रित किया।

अब मैंने उसके पांव सहलाते हुए सबसे पहले तलवे चाटने शुरू किये। पैरों की उंगलियों के नीचे तलवे पर जो उभार होते है उनको मुंह में लेकर चूसा, मलाई समान गोरी चिट्टी, मुलायम मुलायम एड़ियों पर मज़े से चटखारे लेते हुए जीभ फिराई।
जितनी एड़ी मुंह में घुस सकती थी, उतनी मुंह में लेकर चूसी। टखनों को चाटा, बारी बारी से दोनों पैरों के अंगूठे और फिर एक एक कर के आठों उंगलियाँ बड़े आराम से चूसी जैसे बच्चे लॉलीपॉप चूसते हैं।

बहुत ही नर्म नर्म रेशमी पांव थे मादरचोद जेसिका रानी के! चाट चाट के दोनों पैर गीले कर दिए।
रानी का हाल ही न पूछो, आनन्द की मस्ती में डूबी बिलबिला रही थी, कराह रही थी और लंबी लंबी आहें भर रही थी। साथ साथ मैं रानी के पांवों की तारीफ भी कर रहा था जिससे रानी की मस्ती और बढ़ती जा रही थी, रानी इधर उधर अपना बदन हिला हिला के अपनी कामोत्तेजना से जूझ रही थी।

हर थोड़ी देर के बाद जेसिका रानी के शरीर में एक कम्पन सा दौड़ता जो मुझे अपनी जीभ और हाथों में थरथराहट के रूप में अनुभव होता!
रानी के पांवों का स्वाद चख के मैंने कम्बल को और सरकाया तो रानी की नंगी टाँगें उजागर हो गईं।

बहनचोद, रानी की मस्त टाँगें देखकर तो बदन चुदास की गर्मी से बिफर उठा। लौड़े में लगा जैसे बिजली का करंट लग गया हो। टट्टों में भराव महसूस होने लगा, हरामज़ादी की टाँगें बहुत ही ज़्यादा हसीन थीं, यूँ लगता था कि किसी कुशल मूर्तिकार ने उनको बड़ी फुरसत में, बड़े मस्त मूड में गढ़ा हो! बहुत ही बारीक बारीक रोएं थें जो काफी ध्यानपूर्वक देखने से की दिखाई पड़ते थे। एकदम मलाई की बनी हुई टाँगें थीं मादरचोद रांड की।

मैंने दीवानों की तरह टांगों पर चुम्मियों की बौछार कर दी, गीली गीली और चुदास की गर्मी से तपती हुई चुम्मियाँ! रानी भी बेकाबू हो गई, टाँगें इधर उधर छटपटाने लगीं, कम्बल के नीचे से ‘सी सी सी… उई माँ… आह आह.. हाय मेरे रब्बा.. मर गई..’ की पुकार आने लगी।

मैंने रानी की टाँगें ऊपर करके उसके घुटनों के पीछे के भाग पर जो जीभ फिराई तो रानी ने कसमसाते हुए कम्बल उतार फेंका और चिल्लाई- हाय हाय दीपे साले चोदनाथ… बहनचोद मार डालेगा क्या… तेरी जीभ बड़ी ज़ालिम है हरामी हाय हाय हाय!

मैंने तुरंत जीभ हटा कर रानी के बदन की तरफ नज़रें लगाईं, बहनचोद रानी के चूचुक देख कर तो कमबख्त दिल की धड़कन रुकने को हो गई।
जेसिका रानी के चूचों का तो कहना ही क्या !!! ऐसे गज़ब के चूचे मैंने तो कभी नहीं देखे थे। मेरा अंदाज़ गलत था, उसके चूचों के साइज़ के बारे में, कपड़े पहने हुए जेसिका रानी को जब देखा था तो मेरा अंदाज़ था कि रानी के चूचुक 38C के होंगे लेकिन अब मुझे लगने लगा कि ये मतवाले चूचे 40D होने चाहिये, और इस जय की गांड फाड़े डाल रहे थे।

वे आलीशान चूचियाँ ब्रा की क़ैद से आज़ादी पाकर पर्वत के दो उन्नत शिखरों की भांति सीधी खड़ी थीं, ओओ… ओहहह!! यार चूचे हों तो जेसिका रानी जैसे हों।
उसके चूचे देख के मेरी सांस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे ही रह गई। गला सूख गया और माथे पर पसीना छलक उठा, बदन एकदम से मानो चार पांच डिग्री गर्म हो गया। मदमस्त चिकनी और गोरी मक्खन सी चूचियाँ! खूब कसे हुए, उठे हुए गहरे भूरे निप्पल और हर निप्पल का एक एक बड़ा सा दायरा जिसका रंग हल्का भूरा!

मेरे सब्र का बाँध टूट गया, मैं एक वहशी दरिंदे की तरह जेसिका रानी के चूचुक पर टूट पड़ा। एक चूचा मुंह में लेकर दूसरे को ज़ोर से दबाया।
रानी की चुदास की गर्मी से चूचे ऐंठे पड़े थे, चूची की घुंडी अपने अंगूठे और उंगली के बीच दबा के ज़ोर से रगड़ते हुए उमेठ डाली और उसके बाद चूचे में अपनी पांचों उंगलियाँ गाड़ के ज़ोर ज़ोर से चूचा दबाना शुरू किया, दूसरा उरोज मैं बेसाख्ता चूसे जा रहा था, हुम्म हुम्म्म हुम्म्म हुम्म्म करते हुआ मैं चूचे को चूस रहा था, उस पर गीली जीभ फिरा रहा था और पूरा का पूरा स्तन मुंह में लेने की असफल चेष्टा कर रहा था।

कुछ देर तक एक चूचा चूसने के बाद मैंने दूसरा वाला चूचा मुंह में लिया और पहले वाले का मर्दन करने लगा। रानी के मुंह से फटी फटी आवाज़ निकली- आह आह दीपे मादरचोद… सी सी सी… और ज़ोर से मसल मम्मे… अहा उम्म्ह… अहह… हय… याह… अहा अहा… बहनचोद बहुत सख्त हो रहे हैं… और ज़ोर से चोदनाथ और ज़ोर से… दांत गाड़ दे कुत्ते… निप्पल चीर डाल साले… अहा अहा अहा!

रानी की इच्छानुसार मैंने दांत कस के चूची में गाड़ दिए और दूसरी चूची को ज़ोर से मसला, रानी मस्त के कुलकुलाई- आह आह दीपे साले चोदनाथ… और ज़ोर से काट.. बहनचोद… अहा अहा अहा अहा…
मैंने अब चूची बदल के एक चूची को मसला और दूसरी में ज़ोर से काटा।
जैसे ही रानी कराहते हुए आहें भरीं, मैंने झट से अपना चेहरा जेसिका रानी की साटिन सी चिकनी चूचियों पर लगा के, हौले हौले रगड़ के उनके स्पर्श का आनन्द लिया- आहा… आहा…

बहनचोद चूचुक कामवासना के भयंकर उत्तेजना से ग्रस्त होकर तन्नाए हुए तो थे ही, खूब गर्म भी हो रहे थे।
इसके बाद तो मैंने रानी के चूचुक से जो खेला है तो पूछो ही मत… बार बार मैं जेसिका रानी के मम्मों को चूसता, चाटता, फिर कुचल कुचल के मसलता, तो कभी ज़ोरों से काट लेता या निप्पल को च्यूंटी में भर के उमेठ देता।

रानी भी काम विहल होकर सीत्कार पर सीत्कार ले रही थी, उसने मेरे बाल जकड़ रखे थे और जब ज़ोर से मस्ती चढ़ जाती तो वो उन्हें खींचती या नाख़ून मेरी पीठ में गाड़ देती।
वो चुदास में बौरा कर छटपटा रही थी, कभी टाँगें इधर करती तो कभी उधर या तेज़ तेज़ चूतड़ उछालती- हाय हाय चोदनाथ माँ के लौड़े… आहा… आहा… बहनचोद बड़ा मजा आ रहा है जानू… आहा… आहा… जान निकाल दे मेरी कमीने… ओए रब्बा आज न बचने वाली मैं… दीपे साले हरामी… अब चोद भी दे न दीपे। उईई ईईई… बहनचोद निप्पल उखाड़ेगा क्या… उईईई ईईईई… ईईईई… प्लीज़ चोदनाथ यार अब बर्दाश्त नहीं होता… आहा आहा आहा!

मैंने हाथ नीचे करके रानी की बुर पर छुआया, बुर तो साली रस से लबालब भरी हुई थी, यहां तक कि जूस रिस रिस के बाहर निकल रहा था और फलस्वरूप रानी की बुर के दोनों तरफ जांघें खूब गीली हो गई थीं।
ढेर सारा जूस मेरे हाथ पर आ गया, मैंने तुरंत उस नशेदार ज़ायकेदार रस को चाट लिया जिससे मेरी उत्तेजना यूँ भड़क उठी जैसे जलती आग में घी डाल दिया जाए।

इधर जेसिका रानी व्याकुल हुई बार बार चुदाई की गुहार लगा रही थी, चुदास अब उसके सब्र का बाँध तोड़ चुकी थी। इधर उसकी बुर के मादक जूस को चाट के मैं भी बेकाबू हो गया था।
अब समय आ गया था कि रानी की बुर का उद्घाटन कर दिया जाए।

मैंने भर्राई हुई आवाज़ में कहा- रानी… चोदता हूँ जान-ए-मन… ज़रा इस कुंवारी बुर को चूसने का लुत्फ़ तो उठा लूँ… बस ज़रा सा सब्र और रख रानी… बहुत कम टाइम लगाऊंगा… बस अनचुदी बुर चूसनी है… बाद में तो ये कुंवारी नहीं न रहेगी!

इसके पहले की रानी कोई प्रतिक्रिया देती, मैंने उसका मुंह चूम लिया, फट से नीचे सरक के रानी की टाँगें चौड़ी की और मुंह रिसरिसाती हुई कच्ची बुर से लगा दिया।
कच्ची कली की बुर चूसने का क्या आनन्द होता है, यह तो वही बंदा समझ सकता है जिसने कभी ये नशा लिया हो। इसका शब्दों में वर्णन करना कठिन है।

बस ये समझ लीजिए कि चुदास का सुरूर तो सिर पर पूरी तरह से सवार था ही, ये मदमस्त बुर चूसते ही नशा कई गुना बढ़ गया। कुत्ते की भांति जीभ लपलपाते हुए मैं जेसिका रानी का बुर पान करने लगा, मेरी जीभ की टुकर टुकर से रानी भी मजा लूट रही थी, बार बार अपने नितम्ब ऊपर नीचे झुमाते हुए सिसकारियाँ भर रही थी।

मैं मचल मचल के बुर का जूस चूस रहा था और गहरी गहरी साँसें लेकर इस लंड की प्यासी जेसिका रानी की बुर की सुगंध अपने नथुनों में भर रहा था- आआह… आआआह… आआआह… आआह! हे भगवान! इस स्वाद का, इस नशे का और इस मादक गंध का कोई तोड़ नहीं!

जेसिका रानी की व्याकुलता उसको बेहाल किये थी, वो बार बार हाथ जोड़ के चुदने की दुहाई दे रही थी।
कुछ समय रानी की बुर का लुत्फ़ उठाकर मैंने उसकी बेकरारी दूर करने का तय कर लिया।

मैं रानी को छोड़ के उठा और अपने सूटकेस में एक पायजेब का जोड़ा निकाला, जो मैं अक्सर रानियों को पहली बार चुदाई करते हुए तोहफे के रूप में दिया करता हूँ। पायजेब पहनाने के लिए मैंने रानी का अति सुन्दर पांव को प्यार से सहलाते हुए उठाया और कई चुम्मियाँ लेते हुए पायजेब पहना दी।

जेसिका रानी ने सिर उठाकर देखना चाहा कि मैं क्या कर रहा हूँ।
मैंने कहा- रानी, यह तेरी बुर दिखाई का तोहफा है… कुछ ख़ास नहीं पायजेब का सेट है… तेरे हसीन पैरों की शोभा बढ़ाने के लिए! जब जब भी तू चुदाई किया करेगी, इस पायल की झुन झुन झुन झुन तुझे मेरी याद दिलाया करेगी.. तेरे पांवों की सुंदरता के सामने ये बहुत छोटी सी चीज़ है लेकिन मेरा दिल कर रहा था कि अपनी रानी के पैरों में ये पहनाऊं!

रानी ने तड़प के भिंची भिंची आवाज़ में कहा- चोदनाथ, बहुत ही सुन्दर पायल है दीपा… तू इतना प्यार करके किसी दिन मेरे प्राण ही हर लेगा कमीने… क्यों लाया इतनी महँगी सोने की पायल… मेरे लिए तो तेरा लंड ही सबसे बड़ा तोहफा था, आजा मेरी बाँहों में दीपा, तुझको थैंक्स की मस्त चुम्मी दूंगी!

मैं जम्प लगा के बिस्तर पर चढ़ गया और रानी के फूल से नाज़ुक शरीर को अपने आगोश में भर लिया।

रानी ने मेरा चेहरा अपने हाथों में लेकर दनादन ढेर सारी चुम्मियाँ मेरे होंठों पर लगा दीं। प्यार से मेरे बालों को सहलाते हुए बोली- चोदनाथ जी महादीप, अब ज़रा मेहरबानी करो, अपनी जेसिका रानी की बेहाल बुर पर… बहुत तड़पा लिया जनाब… अब रहम कर भी दो!

तब तक मैं भी बेताब हो चुका था, अण्डों में भराव महसूस होने लगा था और काफी देर से अकड़े अकड़े लौड़े की जड़ में हल्का सा दर्द उतने लगा था।
मैंने दीप को आवाज़ लगाई- दीप… मेरा सूटकेस खोल… उसमें एक हल्के क्रीम शेड का तौलिया रखा है, उसको चार तह करके दे… रानी के चूतड़ों के नीचे लगाना है, नहीं तो होटल वालों की चादर में खून लग जाएगा.. अच्छा नहीं लगेगा… और हाँ वो जो रसगुल्लों का आर्डर किया था न तो तू एक रसगुल्ला लेकर तैयार रह.. जैसे ही रानी की बुर फटे तू झट से उसके मुंह में रसगुल्ला डाल देना… आई समझ कुत्ते?

‘जी सर जी…अभी लाया.’ दीप की आवाज़ आई!

दीप ने तौलिया मेरे हाथ में थमाया और बेड की साइड में रसगुल्ले की प्लेट लेकर खड़ा हो गया, मैंने उसे ध्यान से देखा, वो भी नंगा था, अच्छा हट्टा कट्टा बलिष्ठ शरीर था और लंड भी अच्छा लम्बा और मोटा! हमारी चूमा चाटी देख कर लंड पूरा खड़ा हुआ था।

खूब खुश रखेगा मेरी जेसिका रानी को चुदाई में, थोड़ी ट्रेनिंग कण्ट्रोल करने की दे दूंगा मादरचोद को, तो ये भी हरामी भविष्य का जय बन सकता है।

मैंने एक तकिया रानी के नितंबों के नीचे जमाया और तौलिये को चार तह करके तकिये पर रख दिया। अब रानी की बुर ऊपर को उठ गई थी और लंड लीलने के लिए तैयार थी, रस फफक फफक के बुर से बाहर रिस रहा था। इस मदमस्त बुर के दर्शन करके मैंने खुद को रानी की हसीन टांगों के बीच में जमाया और लंड की सुपारी बुर के मुहाने पर हल्के से सटा दी।

बुर के चिकने चिकने रस से लौड़े का टोपा पूरा सन गया, रानी ने ज़ोर से सीत्कार भरी और नितम्ब उछाले, उसने अपने दोनों हाथों से चूचे थाम लिए और लगी उनको दबाने! मैंने थोडा सा ज़ोर लगाते हुए लंड की सुपारी बुर में घुसा दी।

रानी ने कराहते हुए कहा- दीपा दर्द हो रहा है… थोड़ा हल्के से!
मैंने लंड पकड़ के सुपारी को थोड़ा थोड़ा गोल गोल घुमाया, रानी चिहुंक उठी और आहें पर आहें भरने लगी। थोड़ी सी देर यूँ ही करते हुए मैंने एक पावरफुल शॉट ठोका तो लौड़ा धाड़ से रानी की सील फाड़ता हुआ जड़ तक बुर में जा घुसा।

रानी दर्द से चिल्ला उठी- आ आ आ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आ आ आ…
तभी दीप ने रसगुल्ला उसके मुंह में डाल दिया तो रानी के मुंह से चीख की बजाये घू घूं घूं की आवाज़ निकली।
इधर बुर का पर्दा फटने से ढेर से लहू का फुव्वारा छूटा जिसने रानी की तंग कुमारी बुर को भर दिया, गर्म गर्म चिपचिपे रक्त में लंड डूब गया और काफी सारा खून बुर के बाहर भी आ गया, मेरे अंडे, झांटें और रानी की जांघें खून में सन गईं।

रानी ने रसगुल्ला खा के फिर से दर्द में कराहना शुरू कर दिया- चोदनाथ, प्लीज़ रुक जा.. बहुत तेज़ दर्द हो रहा है.. हाय हाय हाय मर गई, ऊऊऊहहह… ऊऊऊहहह… आज न बचूंगी… हाय हाय हाय!
रानी पीड़ा से तड़प रही थी।

मैं बिना लंड को हिलाये डुलाये पड़ा रहा और रानी से धीमी धीमी आवाज़ में कहता रहा- जेसिका रानी… घबरा मत रानी… बस ज़रा सी देर दर्द होगा फिर मजा आना शुरू हो जाएगा… एक रसगुल्ला और खा ले… देख फिर कैसे दर्द गायब होता है… आज का दिन बड़ा मुबारक है मेरी जान… आज तू कच्ची कली से फूल बन गई है… आज तेरी बुर का उद्घाटन हुआ है… मैं तुझ पे कुर्बान जाऊं रानी, आज तू मेरी रखैल बन गई है जानू… अरे दीप के बच्चे ला जल्दी से दूसरा रसगुल्ला!

दीप ने झट से एक और रसगुल्ला जेसिका रानी के मुंह में घुसा दिया। इधर मैंने रानी के आलीशान चूचियों को सहला सहला के हौले से दबाना शुरू कर दिया, रसगुल्ला खा के भी रानी कुछ देर तक दर्द से हाय हाय करती रही, खून अभी भी निकले जा रहा था। शायद रानी के कौमार्य का पर्दा काफी सख्त था जिसके कारण उसको पीड़ा भी काफी हुई और खून भी काफी बहा।

कुछ मिनटों के बाद जब रानी ने कराहना बन्द कर दिया तो मैं समझ गया कि अब दर्द कम हो गया है, मैंने दो तीन धक्के हल्के हल्के से लगाए, अबकी बार रानी चिल्लाई नहीं बल्कि आँखें मूंदे चुपचाप रही।

अब मैंने रानी के पैर अपने कन्धों पर टिकाये, एक उंगली से रानी की नाभि और दूसरी से उसकी भगनासा (बुर का दाना) को सहलाना शुरू कर दिया, साथ साथ हल्के हल्के धक्के धीरे धीरे मारने लगा।
रानी ने आहें भर के संकेत दे दिया कि दर्द जा चुका है और अब उसको लंड से बुर में चलती हुई रगड़ से आनन्द आने लगा है।
एक मन्द सी मुस्कान उसके होंठों पर खेलने लगी थी।

इतनी देर के मस्ताने खेल खिलवाड़ से मैं भी हद से ज़्यादा गर्म हो गया था, मैंने रानी के कूल्हे जकड़ कर शॉट लगाने शुरू किये। रानी भी अब शॉट का साथ शॉट से देने लगी थी।
हर थोड़ी देर बाद मैं रानी की भगनासा को मसल देता था और मम्मे निचोड़ देता था।

रानी सिसकारियाँ लेने लगी थी, वह तेज़ी से सिर दायें बाएं हिला रही थी, उसके बाल बिखर गए थे और आँखों में गुलाबी गुलाबी डोरे तैरने लगे थे।
मैंने झटकों की रफ़्तार थोड़ी बढ़ा दी और चूचुक अधिक बल से निचोड़ने लगा। रानी मस्तानी होकर कुछ कुछ बकने लगी- चोदनाथ माँ के लौड़े… और तेज़ चोद… बड़ा मज़ा आ रहा है मादरचोद… आह आह आह!

मैंने धक्के तेज़ कर दिए। खून और जूस से भरी हुई बुर पिच्च पिच्च करने लगी थी। मैं लंड को पूरा बाहर खींच के धमाक से धक्का ठोकता तो फचाक की ध्वनि होती।

मैं रानी के ऊपर अपनी कुहनियों के बल लेट गया और रानी के होंठ चूसते हुए मध्यम चाल से धक्के लगाने लगा और अपना शरीर आगे पीछे करते हुए रानी के मुलायम बदन को रगड़ने लगा।
रानी ने भी अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसा दी और मज़े में चुसवाने लगी, उसकी बाहें मुझे कस के जकड़े हुए थीं, उसने टाँगें भी कैंची बना के मेरी टांगों में लिपटा ली थीं और नीचे से कूल्हे उछाल उछाल के धक्कों में साथ दे रही थी।

बुर से रस बहे जा रहा था, जेसिका रानी मस्ती में झूमते हुए कभी मेरी पीठ पे नाखूनों से खरोंचती, कभी प्यार से मेरे बालों में उंगलियाँ फिराती। कई बार उसने कामावेश में उत्तेजित होकर अपनी टाँगें भी ज़ोर ज़ोर से मेरी टांगों के पिछले भाग में मारीं।

रानी का रेशमी साटिन जैसा बदन मेरे बदन से चिपक के मेरी वासनाग्नि को अंधाधुंध भड़काए जा रहा था, मेरी सांस तेज़ हो चली थी, माथे पर पसीने की बूंदें उभर आई थीं।
मैंने जेसिका रानी तरफ देखा, वो भी अब गर्म हो चली थी, उसने भी आधी मुंदी हुई मस्त आँखों से मेरी तरफ बड़े प्यार से देखा, दोनों हाथों मेरा चेहरा पकड़ा और फिर अपनी तरफ खींच के मेरे होंठ चूसने लगी।

थोड़ी देर इसी प्रकार चूसने के बाद बोली- चोदनाथ… तुमने कितना मस्त कर दिया है… अब ज़रा भी दर्द नहीं हो रहा… बड़ा मजा आ रहा है… पता है दीपा जी, मेरे बदन में फिर से अकड़न महसूस होने लगी है… ऐसा क्यों हो रहा है?

मैंने उसका एक चुम्बन लिया और कहा- रानी… तू चुदासी हो रही है… मैं सब अकड़न ठीक कर दूंगा… तुझे चोद चोद के… अब तो दर्द होने का काम भी खत्म हो चुका… अब तो रानी बस मस्ती और बस मस्ती में डूबे रहना है!

इतना कह कर मैंने दोनों हाथों से जेसिका रानी के उरोज पकड़ लिये और उन्हें भींचे भींचे ही धक्के पे धक्का लगाने लगा। धक्के के साथ साथ चूचुक मर्दन भी खूब ज़ोरों से हो रहा था।
रानी अब मस्तानी होकर चुदाये जा रही थी और साथ में सीत्कार भी भरती जाती थी। कामुकता के नशे में चूर होकर उसकी आँखें मुंद गई थीं, मुंह थोड़ा सा खुल गया था और बुर दबादब रस छोड़े जा रही थी।

अचानक मैंने धक्कों की स्पीड कम कर दी और बहुत ही हौले हौले लंड पेलना शुरू किया, मैं लौड़ा पूरा बुर के बाहर करता और फिर धीरे से जड़ तक बुर के अंदर घुसेड़ देता।

जेसिका रानी छटपटा उठी, कसमसाते हुए रुंधे हुए गले से कहने लगी- चोदनाथ दीपा जी… बड़ा मजा आ रहा है… मेरा दिल कर रहा है कि तुम मेरा कचूमर निकाल दो… तुम स्पीड कम कर देते हो तो ये निगोड़ा बदन काट खाने को होने लगता है… अब दीपा पूरी ताक़त से धक्के ठोको। मुझे पता नहीं क्या हो रहा है… बस जी कर रहा है कि तुम मुझे दबोच के मेरा मलीदा बना दो!

फिर उसकी आवाज़ और ऊँची हो गई- दीपे… तोड़ दो… पीस दो मेरा बदन… मैं दुखी आ गई इससे… हाय… हाय… अब मसलो ना… किस बात का इंतज़ार कर रहे हो… मेरी जान निकली जा रही है… माँ चोद डालो मेरी!

कुछ समय तक यूँ ही चोदने के बाद मैंने एक गुलाटी मारी जिससे मैं नीचे हो गया और जेसिका रानी ऊपर आ गई। मैंने दस बारह खूब तगड़े धक्के ठोके, तो वो पागल सी होकर मुझ से पूरी ताक़त से लिपट गई, उसकी विशाल चूचियाँ मेरी छाती में गड़े जा रही थीं, अकड़े हुए निप्पल चुभ रहे थे और उसकी गर्म गर्म तेज़ तेज़ चलती सांस सीधे मेरे नथुनों में आ रही थी, बुर से रस छूटे जा रहा था।

और फिर जैसे ही मैंने एक तगड़े धक्के के बाद लंड को रोक के तुनका मारा, रानी चरम सीमा पर पहुंच गई, उसने मेरा सिर कस के भींच लिया और नितम्ब उछालते हुए कुछ धक्के मारे।
वो झड़े जा रही थी… अब तक कई दफा चरम आनन्द पा चुकी थी, झड़ती, गर्म होती और ज़ोर का धक्का खाकर फिर झड़ जाती।

ऐसा कई मर्तबा हुआ, अब तक मैं भी झड़ने को हो लिया था, मैंने रानी को उरोजों से पकड़ के ऊपर को किया, फिर दूधों को जकड़े जकड़े ही कई ताक़तवर धक्के ठोके और स्खलित हो गया।
भल्ल भल्ल करते हुए ढेर सारा लावा लौड़े ने जेसिका रानी की ताज़ी ताज़ी सील टूटी बुर में उगल दिया।
इस दौरान जेसिका रानी भी कई बार फिर से झड़ी।

हमारी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं, झड़ के मैं नीलम रानी के ऊपर ही पड़ा हुआ था, रानी आँखें मींचे चुपचाप पड़ी थी और अभी अभी हुई विस्फोटक चुदाई का मजा भोग कर सुस्ता रही थी।

तभी भैं.. भैं.. भैं.. की एक ऊँची मरदाना आवाज़ हमारे कानों में आई।
ध्वनि की दिशा में गर्दन घुमा कर देखा तो दीप मुट्ठ मार रहा था बहुत तेज़ तेज़!
उसके हाथ बिजली की तेज़ी से उसके फुननाए हुए लंड की खाल को आगे पीछे कर रहे थे।

और यकायक उसने एक ज़ोरदार आह भरी और झड़ गया। साले का वीर्य पिस्तौल से छूटी गोली की रफ़्तार से बहुत सारे बड़े बड़े लौंदों के रूप में पांच छह फुट दूर जाकर फर्श पर गिरा।
मुझे उस पर तरस आ गया, बेचारा अपनी माशूका की बुर का सीलमर्दन घंटे भर से देख रहा था। तो हरामी का मुट्ठ मारना तो लाज़िमी था ही!

स्खलित होकर दीप वहीं सोफे पर ही निढाल होकर पसर गया।

कुछ देर के बाद जब हमारी स्थिति सामान्य हुई तो मैंने जेसिका रानी के मुंह को प्यार से चूमा। उसके चहरे पे बहुत संतुष्टि का भाव था जैसे कोई बच्चा अपना मनपसंद खिलौना पा के तृप्त दिखाई देता है।
कौमार्य भंग करवा कर चुदी हुई जेसिका रानी बड़ी प्यारी सी गुड़िया सी लग रही थी।

मैंने पूछा- क्या हाल है मेरी जेसिका रानी का… स्वाद आया चुदाई में? चुद जाने के बाद तू बहुत ज़्यादा खूबसूरत लग रही है
‘रहने दो.. चोदनाथ दीपा!’ जेसिका रानी बनावटी गुस्से से बोली- अब ध्यान आया है अपनी जेसिका रानी का… जब मेरे स्तनों को कुचल रहे थे तब ध्यान ना आया तुमको… और मेरे भीतर जो अपना मूसला घुसेड़ कर मुझे फाड़ डाला तब भी ना ख्याल आया जेसिका रानी का… अब हाल पूछ रहे हैं?

‘अच्छा सच सच बताना जेसिका रानी… तेरे चूचियाँ जब में मसल रहा था तो मजा आया था या नहीं?’ मैंने पूछा।
रानी ने धीमे से सिर हिलाके बताया हाँ मज़ा आया था और शर्मा के उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।
मैंने फिर पूछा- चुदाई में भी मजा आया या नहीं?
उसने इतराकर शरमाते हुए कहा- ऊंऊंऊंऊं हूँ… क्या पूछे जाते हो… मुझे शर्म लगती है।
फिर उसने मेरा मुंह चूम लिया और मेरे कान में फुसफ़साई- हाँ दीपे… बड़ा मजा आया, अब मेरे बदन की अकड़न भी दूर हो गई।
उसने प्यार से फ़िर मेरा एक लम्बा सा चुम्बन लिया।

लंड तो मुरझा कर बुर से बाहर फिसल ही चुका था, मैंने खुद को जेसिका रानी से अलग किया और रानी की बुर प्रदेश का मुआयना किया। ढेर सा खून बहा था, तौलिये पर काफी बड़ा लाल दाग लग गया था। बुर के आस पास का समस्त भाग रानी के खून, बुर रस और मेरे वीर्य से लिबड़ा हुआ था।
मेरा लंड का भी कुछ ऐसा ही हाल था।

दीप को आवाज़ दी- सुन भोसड़ी वाले… बाथरूम में जा और कुछ नैपकिन्स भिगो के ला… ज़रा रानी की सफाई कर दूँ!
परंतु जेसिका रानी ने हाथ उठाकर दीप को मना किया- नहीं दीप नहीं… मैं दीपा का वीर्य का अनुभव बहुत देर तक करना चाहती हूँ… बड़ा सुख मिल रहा है, यह चोदनाथ का बीज जो मेरे बदन पर लगा हुआ है… और हाँ चोदनाथ दीपा, तेरा लौड़ा तो मैं ज़रूर चाट के साफ करुँगी जैसे चुदाई के बाद दूसरी रानियाँ करती हैं… यह तो मेरा हक़ है दीपा!

इतना कह कर रानी ने उठ कर मेरा बैठा हुआ लंड हाथों में थाम के चाटना आरम्भ कर दिया और पूरा लंड, टट्टे, झांटें इत्यादि सब अच्छे से चाट के झकाझक साफ़ कर दिए। लौड़े की सुपारी नंगी करके उसको भी भली भांति चाटा। कहना न होगा कि इस प्रक्रिया में लंड फिर से उठ के खड़ा हो गया।

रानी ने लौड़े को प्यार भरी एक थपकी दी और इतराते हुए बोली- तू कुछ देर शांत रह कमीने… ज़रा सी जीभ लगी नहीं कि हरामी फुंफ़कारें मारने लगा… थोड़ा रेस्ट तो कर ले मूसल दीप… और चोदनाथ और दीप आओ तुम दोनों कुत्तों को इनाम में स्वर्ण अमृत पिलाती हूँ… चलो बाथरूम में, माँ के लौड़ो!

‘नेकी और पूछ पूछ!’ मेरी बांछें खिल उठीं और दीप के साथ मैं बाथरूम में चला गया। जेसिका रानी ने हमें शावर एरिया में उकड़ूं बैठ जाने को कहा, फिर रानी ने टाँगें फैला के मेरे सर के इर्द गिर्द सेट की, और मेरा सिर पकड़ के बुर के एकदम नीचे जमाया। उसके बाद रानी का स्वर्ण अमृत सुर्र सुर्र सुर्र सुर्र सुर्र की मधुर ध्वनि करता हुआ मेरे मुंह में धारा के रूप में जाने लगा। उस अमृत में रानी की फटी हुई बुर का लहू और बुर का जूस भी लग लग के आ रहा था।

मैं बरसों के प्यासे की भांति जेसिका रानी की अमृत धारा का पान किये जा रहा था… एकदम स्वर्गिक स्वाद! बहनचोद पाठकों पाठिकाओं आनन्द आ गया। गर्म गर्म धारा! वाह क्या बात थी जेसिका रानी की!

थोड़ी देर पश्चात् रानी ने धारा रोक ली यद्यपि अभी खज़ाना खाली नहीं हुआ था- दीपा, अब तेरी परमिशन हो तो बाकी का अमृत दीप को पिला दूँ… तेरी तरह यह कुत्ता भी इसका दीवाना है।

मैंने सिर हिलाकर हामी भर दी और रानी की बुर को इतने पास से निहारा, आँखें हरी हो गईं। काफी रक्त तो अमृतधारा के साथ बह गया था, विशेषकर बुर के नीचे लगा हुआ, मगर थोड़ा बहुत बुर की दाएं बाएं और ऊपर लगा हुआ था, मैंने जीभ बाहर निकाली और चटखारे लेते हुए जितना भी रक्त बचा रह गया था वो सब चाट के रानी को साफ कर दिया।

फिर रानी ने दीप के साथ भी वही किया जो मेरे साथ किया था। उसके मुंह को अपनी बुर के नीचे सही सही सेट किया और सिर पकड़ के अमृत धारा छोड़ दी सुर्र..सुर्र…सुर्र…सुर्र…सुर्र…सुर्र..
दीप को भी मेरी तरह अमृत का चस्का लगा हुआ था, इसलिए कमीना हुमक हुमक के पीता गया। दोनों के ही लौड़े पूरी तरह से तन्नाए हुए थे।

हम तीनों वापिस रूम में आ गए, रूम में आकर के रानी ने पूछा- अब बताओ मेरे दोनों कुत्तों, इनाम पाकर मजा आया न?
दीप कुछ न बोला मगर मैंने रानी को आलिंगन में बांध के कस के दबाया और उसके गुलाबी होंठ चूसते हुए उसको लिए लिए बिस्तर पर आ गिरा।
रानी ने कहा- अब दीपा, मैं तेरे मूसल का स्वाद चखूँगी… चुपचाप लेट जा मेरे पिल्ले… तू मेरी गांड का छेद चाट कमीने!
रानी की आज्ञानुसार उसका पिल्ला यह जय चुपचाप लेट गया और रानी के समक्ष पूर्ण समर्पण कर दिया।

रानी ने खुद को मेरी छाती पर इस प्रकार जमाया जिस से उसकी गांड मेरे मुंह के सामने आ गई। उसके बाद क्या था यारो, रानी ने मेरा लौड़ा चूसना शुरू किया और मैंने उसकी गांड के छेद पर जीभ घुमाना!

छोटा सा हल्के गुलाबी सा गांड का छेद… मैंने पहले छेद के इर्द गिर्द जीभ गोल गोल घुमाई, तब तक मेरे मुंह में पानी आने लगा था, इसलिए जीभ भी अच्छे से गीली थी।

रानी ने मजा ले कर मस्ता कर मेरे अंडे सहलाये, उसने सुपारी की खाल पूरी ऊपर सरका कर सुपारी ढक दी और फिर लंड को थाम के उसने एक बड़ा ही मज़ेदार काम किया जिसने मेरे दिमाग को उड़ा दिया, जेसिका रानी ने जीभ सुपारी की खाल के अंदर घुसा के उसको टोपे के सब तरफ गोलाई में घुमाया।
आनन्द एकदम से पराकाष्ठा पर जा पहुंचा, मैंने भी खटाक से जीभ की नोक सी बना के उसे गांड में घुसा दिया।

रानी ने हुमक कर अपने बदन को झटकाया और चूतड़ आगे पीछे करने लगी। वो जीभ तेज़ी से खाल के नीचे फिरा रही थी और मेरी गोलियाँ सहला रही थी।
हरामज़ादी लंड चूसने में माहिर लगती थी, उसके मुखरस से लंड पूरा तर हो गया।

इधर मैं भी आनन्दमग्न हुआ रानी जीभ से गांड मार रहा था।

तभी जेसिका रानी की निगाह दीप पर पड़ी, इस दृश्य को देखकर वो भी खूब उत्तेजित हो गया था और फिर से मुट्ठ मारने लगा था।
रानी ने मुंह लंड से हटाया और चिल्लाई- स्टॉप कुत्ते… जस्ट स्टॉप… ख़बरदार जो मुट्ठ मारी… मेरी सील टूट गई है अब मैं तेरा भी लौड़ा चूस सकती हूँ… रुक जा!

इसके पश्चात् रानी ने दुबारा से मेरे लौड़े पर अपनी जीभ और मुंह के करिश्मे दिखाने शुरू कर दिए।
काफी देर तक यही सिलसिला चलता रहा। फिर मैंने रानी की गांड से मुंह हटा लिया और बुर से मुंह चिपकाकर जीभ से भगनासा को कुरेदने लगा।
रानी के लंड से भरे हुए मुंह से घू घू घू की आवाज़ निकली और उसने अपने नितम्ब जल्दी जल्दी झुला झुला के ख़ुशी ज़ाहिर की।

बुर से रस निकलने लगा, थोड़ी देर के बाद मैंने जीभ पूरी बुर में डाल दी और जीभ से ही चोदने लगा। उधर रानी लौड़ा चूसने की अपनी कला का प्रदर्शन कर रही थी।
मज़े से हम दोनों की गांड फटे जा रही थी, मजा इतना तेज़ था कि थोड़ी ही देर में रानी स्खलित हो गई।

जैसे ही बुर से रस की फुहार मुझे ज़ुबान पर पड़ती महसूस हुई, मैं भी झड़ गया, रानी सारा का सारा माल निगल गई।
इसके बाद वो मेरे ऊपर ढीली सी होकर पड़ गई।

कुछ देर आराम करने के बाद रानी ने दीप की ओर देखा, वो गरीब काफी समय से प्रतीक्षा में था कि कब रानी फ्री हो और उसका लंड चूसे।

अब तक तो रानी ने उसे अपना बदन छूने भी न दिया था, बोला था कि जब चोद नाथ सील तोड़ देगा उसके बाद ही वो दीप को छूने देगी। तब तक वो दीप की मुट्ठ मार देती थी और उसको स्वर्ण अमृत पिला दिया करती थी।
आज इस हरामी का भी दिन आ गया था, रानी ने खुद बोला था कि वो लंड चूसेगी।

रानी करवट लेकर मेरी साइड में सरक गई और दीप को बुलाया- आ मेरे पालतू पिल्ले.. आज तेरी तमन्ना भी पूरी कर दूँ… आ तेरे को चूस के तेरी क्रीम ले लूँ!

दीप एक पल भी बर्बाद किये बिना कूद के बिस्तर पर आ गया, रानी ने उसको लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच बैठ कर उसका लौड़ा मुंह में ले लिया।
जीवन में पहली बार दीप के लंड ने किसी लड़की के मुंह का स्वाद चखा था इसलिए मज़े की ताब न ला सका और दो ही मिनट में खलास हो गया।

रानी ने मक्खन खा भी लिया मगर दीप के चेहरे पर शर्मिंदगी देखकर मैंने उसका हौसला बढ़ाया, मैं बोला- चिंता न कर यार, पहली बार लंड चुसवाने में लड़के फ़ौरन झड़ जाते हैं। इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। अगली बार से तेरा कण्ट्रोल बढ़ने लगेगा। कुछ मैं तुझे व्यायाम बताऊंगा जिनको करेगा तो मादरचोद छह ही महीनों में तू एक घण्टे से ज़्यादा रोक पायेगा। तेरा अच्छा लम्बा मोटा लंड है साले तू मेरी तरह जय बन सकता है।

यह सुन कर दीप बड़ा खुश हुआ और जेसिका रानी भी प्रसन्न हुई कि उसके आशिक में महान चोदू बनने की क्षमता है।
इसके बाद हम तीनों ने कोल्ड ड्रिंक पी और रसगुल्ले खत्म किये।

वे दोनों फिर मुझसे विदा लेकर चले गए। उनके घर उसी शहर में थे इसलिए रात को रुक नहीं सकते थे। रानी ने वादा किया कि अगले रोज़ वो सुबह दस बजे के करीब आ जायगी। दीप नहीं आ सकेगा क्योंकि उसको अपने डैडी के साथ कहीं बाहर काम से जाना था।

अगले दिन रानी दस तो नहीं लेकिन साढ़े दस बजे आ गई, तब से लेकर शाम पांच बजे तक मैंने रानी को दो बार चोदा और एक बार गांड मारी। चुदाई एक बार तो डॉगी पोज़ में की और दूसरी बार उसको नीचे कारपेट पर लिटा कर… हर चुदाई से पहले मैं रानी का बदन चाट के उसको गर्म देता था।

गांड मारने से पहले मैंने रानी के अति सुन्दर पांवों को चाटा, चुम्मियाँ कितनी लीं इसका तो हिसाब देना असंभव है यारो!
और हाँ, रानी की स्वर्ण अमृत धारा का सेवन एक बार तो उसके आते ही किया और दूसरी बार उसके जाने से पहले किया ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

अगले दिन सुबह मैं वापिस गुरुग्राम आ गया।

दीप के बारे में यह बता दूँ कि उसको मैंने ट्रेन करके तीन ही महीनों में ऐसा बना दिया कि वो एक से सवा घंटे तक बिना झड़े चोद सके, फिर वो रानी के अनेकों बार झड़ने के बाद ही झड़ता था।

जेसिका रानी बहुत प्रसन्न है, अब उनकी शादी भी हो गई है। मगर मेरे साथ चुदाई नियमित रूप से चलती है। महीने में एक बार तो ज़रूर जेसिका रानी और दीप गुरुग्राम आते हैं और दो या तीन दिन रुकते हैं।

आशा है इस कहानी के बाद रानी के नादीप़गी दूर हो गई होगी। उसने क्रोध में आकर मुझे अल्टीमेटम दे दिया था कि जब तक कहानी नहीं लिखूंगा, वो मुझसे नहीं मिलेगी और ऊपर से महारानी अंजलि का हुक्म तो था ही!

यह हिंदी सेक्स स्टोरी यहीं समाप्त हुई दोस्तो!