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मोटी गांड वाली मारवाड़ी आंटी को चोदा

हैल्लो दोस्तों, में रितेश फिर से एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ। ये कहानी मेरे घर से थोड़ी दूर एक मारवाड़ी आंटी की है, उनकी उम्र 42 साल है और उनका नाम रीना है, वो साईज़ में मोटी से भी ज्यादा मोटी है, उन्हें कोई भी एक बार देख ले तो 25 घंटे तक उसको ही चोदे।

ये बात 10 मार्च 2016 की है और मेरे घर से थोड़ी दूरी पर एक मारवाड़ी आंटी रहती है, उनका नाम रीना है, उनका साईज़ मस्त 40 का बूब्स, उनकी चूत पर बहुत बाल है, उनकी गांड 50 की होगी। उनके एक बेटा और एक बेटी है। उनका बेटा अपनी जॉब पर है और उनकी बेटी की शादी हो गयी है और उनके पति की अपनी एक शॉप है।

उनके घर के पास फ़ास्ट फूड की दुकान थी, तो में वहाँ हफ्ते में एक दिन जाता था। फिर एक दिन जब में अपनी बाईक पार्क कर रहा था तो मैंने उस आंटी को देखा तो वो अपने पति के साथ जा रही थी। अब सब लोग आंटी को देख रहे थे, क्या मोटी गांड वाली आंटी गोरी भी है? अब मेरा लंड उन्हें देखते ही खड़ा होने लगा था।

फिर मैंने अपने ध्यान को दूसरी जगह स्थिर किया और फ़ास्ट फूड की दुकान में चला गया। अब शाम के 6 बज रहे थे। फिर मुझे मेरे घर से फोन आया कि मेरे चाचा जी आए है, नाश्ता लेकर आओ। फिर में निकला और फ़ास्ट फूड की दुकान के पास में ही एक मिठाई की दुकान है तो उसमें गया और कुछ मिठाई और कुछ नमकीन लिए।

फिर जैसे ही में बिल देकर बाहर निकला तो तभी मैंने देखा कि आंटी अंदर आ रही है, क्या बड़े-बड़े बूब्स थे उनके? फिर मैंने सोचा कि इनके बूब्स से ही मिठाई बनती होगी। फिर आंटी ने मेरी तरफ अपना चेहरा किया और एक स्माईल दी तो मैंने भी उन्हें स्माईल दे दी और अपने घर चला गया। फिर में घर पर मम्मी को मिठाई के पैकेट देकर अपने रूम में चला गया और अब मुझे नींद आने लगी थी तो में थोड़ी देर सो गया।

फिर मम्मी ने मुझे करीब 9 बजे उठाया और कहा कि चल खाना खा ले, तो में उठा और खाना खाकर फिर से अपने रूम में आ गया और अपने बेड पर लेट गया। तभी आंटी के बूब्स मेरी आँखो के सामने आ रहे थे। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और हिलाने लगा, उफ़फ्फ़ आंटी ऊऊ आंटी आहहहह आ आंटी। अब मेरा लंड टाईट हो गया था।

फिर मैंने उसे ज़ोर-ज़ोर से हिलाया और करीब 15 मिनट के बाद मेरा माल ओह आंटी आ हाहहहाहा करके निकल गया। फिर मैंने अपने लंड को साफ किया और सो गया। फिर मेरी नींद सुबह 10 बजे खुली तो मेरा लंड फिर से मुझे दस्तक देने लगा था। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और आंटी को सोचकर थोड़ी देर तक अपना लंड हिलाया और फिर फ्रेश होने वॉशरूम में चला गया।

फिर मैंने फ्रेश होकर नाश्ता किया और बाहर चला गया। फिर मैंने आंटी के घर के बाहर बाईक पर बैठकर सोचा कि आंटी बाहर निकलेगी तो थोड़ा देखूँगा। फिर करीब 10 मिनट के बाद मैंने देखा कि आंटी पैदल आ रही है और उनके हाथों में एक बाज़ार वाला बैग था। तभी पीछे से एक गाड़ी आई और आंटी को कीचड़ मारकर चली गयी।

अब आंटी की पूरी साड़ी पर कीचड़ लग गया था। फिर में दौड़कर गया और पूछा कि आंटी लगी तो नहीं ना। फिर आंटी ने कहा कि नहीं, लेकिन माहरो सब कपड़ो गंदा कर दियो। फिर मैंने कहा कि आप बैग मुझ दे दो, तो उन्होंने अपना बैग मुझे दे दिया। फिर वो अपनी साड़ी ठीक करके बोली कि माहरो बैग दो, तो मैंने कहा कि चलो ना आपको घर तक छोड़ देता हूँ।

फिर हम एक साथ चल दिए। फिर उनके घर पहुँचकर उन्होंने कहा कि बैठो, तो मैंने कहा कि नहीं आंटी ठीक है। फिर वो बोली अरे कोई बात नहीं बेटा बैठो, तो में डाईनिंग रूम में बैठ गया। फिर आंटी बोली कि रूको में अभी चेंज करके आती हूँ, तो मैंने कहा कि ठीक है।

फिर आंटी अपनी गांड मटकाते हुए अपने रूम में चली गयी। फिर करीब 5 मिनट के बाद में उठकर आगे बढ़ा तो वहाँ एक रूम था। फिर मैंने रूम के अंदर देखा तो मैंने जो नज़ारा देखा वहाँ कोई भी रहता तो उन्हें चोदना शुरू कर देता। अब आंटी पूरी नंगी थी, क्या बड़ी-बड़ी गांड थी उनकी? अब मेरे देखते ही मेरा लंड सलामी देने लगा था। दोस्तों आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

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